समाज और राष्ट्र की ललकार

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मनुष्य की हीनवृत्ति तथा निन्दक भावना भूतकाल में ही नहीं थी, अपितु  यह विकृत प्रवाह आज भी देखा जाता है।
व्यवहार में वेदान्त को कैसे उतारना जीवन में किस प्रकार जोड़ना और सत्त्व के विकास के साथ निर्मल जीवन किस प्रकार जीना, इन विषयों पर बोधक उपदेश देने वाले अनेक प्राणियों के भाग्य बदलने वाले पूज्यपाद संत श्री आसाराम जी महाराज के सम्बन्ध में भी कुछ अबुध गिनेगिनाये लोग उल्टी बाते करते रहते हैं। देशभर में फैले पूज्यश्री के अनेकों आश्रमों तथा श्री योग वेदान्त सेवा समिति की विभिन्न शाखाओं के माध्यम से जीवन के सर्वांगीण विकास, आदिवासी-उत्थान, नारी शक्ति-जागृति, व्यसन मुक्ति अभियान, निर्धनों की सहायता, आसन-प्राणायाम के माध्यम से रोगनिवारण, आयुर्वैदिक औषधनिर्माण, सत्संग-कीर्तन द्वारा समाज में आध्यात्मिकता की भावना को चिरस्थायी बनाते हुए विचार-प्रदूषण समाप्त करने तथा जप-ध्यान द्वारा आत्मविकास एवं सेवाकार्यों द्वारा आत्मनिर्माण व जीवनोत्थान की अनेकानेक प्रवृत्तियाँ चलती हैं, जिनके द्वारा व्यक्ति, समाज, गाँव, राज्य, देश एवं अन्ततः विश्व का उत्थान होता है, कल्याण होता है, शान्ति व प्रेम का साम्राज्य फैलता है, वैर, घृणा, द्वेष, मारकाट एवं अशांति को तिलांजली मिलती है।
गणतंत्र के स्तम्भ के रूप में पहचाने जाने वाले प्रचार माध्यम भी आज सत्यान्वेषण का सामर्थ्य खोकर जन-मानस में सस्ती लोकप्रियता करने के लिए असत्य व भ्रामक समाचारों के प्रकाशन में संलग्न होकर रवि-रश्मि के प्रचण्ड तेज समुज्जवल ऐसे महापुरुषों के व्यक्तित्व पर कीचड़ उछालकर उनका चरित्रहनन कर रहे हैं।
पत्रकारों के पवित्र पेशे को चन्द असामाजिक तत्त्वों द्वारा भी हाथ में लिये जाने के कारण समाचार पत्र-पत्रिकाओँ की निष्पक्षतायुक्त उज्जवल छवि पर बहुत आघात पहुँचा है। अपनी कलम का व्यावसायीकरण करने से ऐसे कुछ तथाकथित पत्रकार लोग सत्य पर प्रकाश डालने का सामर्थ्य खोकर अपने असत्य आचरणयुक्त संदिग्ध व्यवहार द्वारा ईश्वर, संतों व महापुरुषों के प्रति बनी जनता की श्रद्धा को खंडित कर उन्हें अपने पावन पथ से भ्रष्ट करने का कुकृत्य कर रहे हैं।सत्य के पक्षधर पत्रकार व समाचार पत्र जगत में लोकप्रियता के शिखर की ऊँचाइयों को दिनप्रतिदिन सफल होकर छूते जाते हैं व समाचार जगत में ही नहीं अपितु मानवमात्र के हृदय में भी आदर व सम्मानजनक स्थान प्राप्त करते है लेकिन सदैव सत्य की निन्दा, विरोध, छिद्रान्वेषण व भ्रामक कुप्रचार में संलग्न लेखक व पत्र-पत्रिकाएँ एक दिन जनता की नज़रों से तो गिरते ही हैं, साथ ही साथ लोगों को भ्रमित व पथभ्रष्ट करने का पाप के भागीदार भी बनते हैं।
किसी सात्त्विक-सज्जन लेखक-पत्रकार से पूछा गया किः
“आज के युग में लेखन क्षेत्र में कलम को चन्द रुपयो की खातिर गिरवी रखकर सत्यता एवं सज्जनता के विरुद्ध राष्ट्रविरोधी ताकतों तथा असामाजिक तत्त्वों के इशारों पर जो अनर्गल व अश्लील कुप्रचार किया जा रहा है, उसमें आप भी सम्मिलित होकर लाभ प्राप्त क्यों नहीं करना चाहते?”
वे कोई विद्वान, सुलझे हुए व चिंतक लेखक थे। उन्होंने तपाक से उत्तर दिया किः “मैं अपनी कलम में स्याही भरकर लिखता हूँ, पेशाब नहीं।”
प्रचार मीडिया आज के उस नाजुक दौर में, जबकि भारतीय संस्कृति को समूल नष्ट करने के राष्ट्रव्यापी षडयंत्रों की व्यूह रचना की जा रही है, संतों व महापुरुषों के अनुभवों एवं दिव्य ज्ञानामृत को लोकहित में प्रचारित-प्रसारित कर ऋषि-मुनियों द्वारा स्थापित आदर्शों व सिद्धान्तों की जितनी अच्छी तरह से रक्षा कर सकता है, उतना देश का अन्य कोई साधन नहीं कर सकता है तथा यही मीडिया असत्य व अनर्गल कुप्रचारों के फैलाव से राष्ट्र का जितना विनाश कर सकता है, उतना अन्य कोई साधन राष्ट्र को पतन के गर्त में नहीं धकेल सकता है।
विदेशी प्रचार मीडिया ने जब वहाँ के महापुरुषों व संतों की निन्दा व अनादर का अनर्गल कुप्रचार आरम्भ किया तो वहाँ की जनता दिग्भ्रमित व पथभ्रष्ट होकर उनके उपदिष्ट मार्गों पर चलना छोड़कर दिशाविहीन हो गई। यही कारण है कि वहाँ के मानवीय जीवन में आज अत्यधिक उच्छृंखलता व पाशविक प्रवृत्तियों का समावेश होकर उनकी अपनी संस्कृति का विनाश हो गया है और वे धर्म, सत्य, शांति व आनन्द की खोज में भारत के ऋषि-मुनियों तथा संत महात्माओं का आश्रय पा रहे हैं औ एक हम हैं…. जो उनके सिद्धान्तहीन आचरणों का अनुसरण करते हुए महापुरुषों के विरोध द्वारा अपने ही पैरों पर अपने ही हाथों से कुल्हाड़ी मार रहे हैं।
आज समाज और राष्ट्र अपनी अधोगति की सीमा पर खड़े हमें ललकार रहे हैं कि;

‘ओ चन्द रुपयों के पीछे अपनी जिन्दगी बेचने वालों….!भारत की सनातन संस्कृति पर पश्चिम की नग्नता का प्रहार करने वालों….! मांसलता और मादकता की धुन पर थिरक कर अपने चरित्र को भ्रष्ट करने वालों… ओ संतों के निन्दकों….! ओ भारतमाता के हत्यारो….! जरा संतों की महिमा को तो पहचानो। उठाओ इतिहास और झाँक कर देखो उसके पन्नों में और तलाशो कि एक हजार बरस की लम्बी गुलामी के दौरान विदेशी आक्रान्ताओँ के बर्बरतापूर्वक किये गये एक से बढ़कर एक भीषण आक्रमणों व अत्याचारों के बाद भी सभी प्राचीन उदात्तता, नैतिकता और आध्यात्मिकता का जन्मस्थान रहा यह भारत और उच्चादर्शों से युक्त इसकी पावन संस्कृति यदि नहीं मिटी है तो उसके पीछे किसका हाथ है?

यह है इस देश में विचरण करने वाले इन्हीं बापूजी जैसे देवतुल्य ऋषिगणों, सदगुरुओं व महापुरुषों की करुणाकृपा का फल है जिनके वेदान्ती ज्ञान ने अनेकानेक प्रतिकूलताओं के बाद भी समग्र राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोये रखा। यह देश इन ऋषियों के ऋण से कभी उऋण नहीं हो सकता।

बड़ी विचित्रता है कि कुछ निहित स्वार्थी असामाजिक तत्त्वों को उन्नत जीवन अपनाने और अज्ञान से परे रहने की ऐसी आध्यात्मिक प्रवृत्तियाँ पसन्द नहीं हैं। जनता की श्रद्धा को ठेस पहुँचाने वाले और अपने स्वार्थ के लिए अनेक लोगों का अकल्याण करने वाले ये हीन स्वभाव के व्यक्ति अन्य जनों को सत्य पंथ से विचलित करते हैं। ये लोग अपना उल्लू सीधा करने के लिए अपनी मर्जी के मुताबिक असत्यों का फैलाव करने में तनिक भी नहीं शरमाते।
जिन्होंने सनातन धर्म के साहित्य को बड़े सेवाभाव से और अति अल्प मूल्य में, देश-परदेश में घर-घर पहुँचाया है ऐसे परोपकार मूर्ति, गीताप्रेस (गोरखपुर) के जीवनदाता श्री जयदयालजी और श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार (भाई जी) जैसे पवित्र आत्माओं के लिए भी कुछ का कुछ बकने वाले लोग बकते रहते थे।
ऐसे दुष्टों की वंश परम्परा संसार में बढ़ती ही रहती है।ऐसे दुष्टो के लिए महात्मा ईसा कहते हैं – “हे परम पिता! तू इन्हें क्षमा कर क्योंकि वे नहीं जानते कि स्वयं क्या कर रहे हैं।”
पूज्य बापूजी तो इस से भी उँची सोच हमारे आगे रखते है की भगवान को हमे नसियत देने की ज़रूरत नही की इन्हे क्षमा कर,भगवान स्वयं जानते है की इन के साथ क्या करना है …गिरनार के एक संत के साथ इस से भी बुरा व्यवहार किया गया था तो उस संत ने बहुत उँची बात कही थी की : हे भगवान, तू तो सब जानता है!

हरि ओम

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5 Comments on “समाज और राष्ट्र की ललकार”

  1. Renuka Harne Says:

    hari om bail on 7th jan for bapuji no excuses bapuji and saiji r being framed under deep conspiracy all saints r at stake and r ruined one after another jago hindu jago stop media trial ban paid news channels

  2. Ritu keswani Says:

    bapu hamare jivan ke adhar h

    • Renuka Harne Says:

      hari om bhai bapuji ne jo apne sadhako ko / baccho ko diya hai woh to sirf wo hee jante hai . aise satguru pa kar to humara jeevan dhanya ho gaya.hum sub ekkjut ho kar apne nirdosh pujya bapuji ko reha karne ke liye har sambhav struggle karenge….jai gurudev

  3. Ritu keswani Says:

    Bapu sanatan dharma ke prakash stambh

  4. Priya Dhasal Says:

    jago hinduo jago aaj santo pe aarop lage hain kal. …. hindu tatva hi mit jayega …..paid media ko hata do .aur …..aur bhrashtachar ko mitha do.


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