युग-प्रवर्तक संत श्री आशारामजी बापू के समर्थन में विराट सत्याग्रह

युग-प्रवर्तक संत श्री आशारामजी बापू
भारतभूमि अनादिकाल से ही संतों-महात्माओं और अवतारी महापुरुषों की चरणरज से पावन होती चली आ रही है। यहाँ कभी मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम अवतरित हुए तो कभी लोकनायक श्रीकृष्ण। शास्त्रों के ज्ञान को संकलित करके पूरे विश्व को अध्यात्म-ज्ञान से आलोकित करनेवाले भगवान वेदव्यासजी की जन्मस्थली भी भारत ही है और विश्वभर में अहिंसा, सत्य, अस्तेय आदि को फैलानेवाले भगवान बुद्ध भी इसी धरती पर अवतरित हुए हैं। सूरदासजी,तुलसीदासजी, रैदासजी, मीराबाई, एकनाथजी, नामदेवजी, कबीरजी, नानकजी, गुरु गोविंदसिंह, स्वामी रामतीर्थ, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद,रमण महर्षि, माँ आनंदमयी, उड़िया बाबा, स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज आदि अनेकानेक नामी-अनामी संतों-महापुरुषों की लीलास्थली भी यही भारतभूमि रही है, जहाँ से प्रेम, भाईचारा, सौहार्द, मानवता, शांति और आध्यात्मिकता की सुमधुर, सुवासित वायु का प्रवाह सम्पूर्ण जगत में फैलता रहा है। इसी कड़ी में आज एक हैं : अलौकिक आत्मारामी, श्रोत्रिय, ब्रह्मनिष्ठ, योगिराज प्रात:स्मरणीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू, जिन्होंने केवल भारत ही नहीं वरन् सम्पूर्ण विश्व को अपनी अमृतमयी वाणी से आप्लावित कर दिया है।
बालक आसुमल का जन्म सिंध प्रांत के बेराणी गाँव में चैत्र कृष्ण षष्ठी (गुजराती तिथि अनुसार), विक्रम संवत् 1998 तदनुसार 17 अप्रैल 1941 के दिन हुआ था। आपके पिता थाऊमलजी सिरुमलानी नगरसेठ थे तथा माता महँगीबा धर्मपरायणा और सरल स्वभाव की थीं। बाल्यकाल से ही आपश्री के चेहरे पर आत्मिक तेज, अलौकिक सौम्यता, विलक्षण शांति और नेत्रों में एक अद्भुत तेज दृष्टिगोचर होता था, जिसे देखकर आपके कुलगुरु ने भविष्यवाणी भी की थी कि ‘आगे चलकर यह बालक एक महान संत बनेगा, लोगों का उद्धार करेगा।’ इस भविष्यवाणी की सत्यता आज किसीसे छिपी नहीं है। लौकिक विद्या में तीसरी कक्षा तक ही पढ़ाई करनेवाले आसुमल ब्रह्मनिष्ठ संत श्री आशारामजी बापू के रूप में विश्ववंदनीय होकर आज बड़े-बड़े वैज्ञानिकों, दार्शनिकों, नेताओं तथा अफसरों से लेकर अनेक शिक्षित-अशिक्षित साधक-साधिकाओं तक सभीको अध्यात्मज्ञान की शिक्षा दे रहे हैं, भटके हुए मानव-समुदाय को सही दिशा प्रदान कर रहे हैं… आपश्री बाल्यकाल से ही अपनी तीव्र विवेकसम्पन्न बुद्धि से संसार की असत्यता को जानकर तथा प्रबल वैराग्य के कारण अमर पद की प्राप्ति हेतु गृह त्यागकर प्रभुमिलन की प्यास में जंगलों-बीहड़ों में घूमते-तड़पते रहे। ईश्वर की कृपा कहो या ईश्वरप्राप्ति की तीव्र लालसा, नैनीताल के जंगल में परम योगी ब्रह्मनिष्ठ संत श्री लीलाशाहजी बापू आपको सद्गुरु के रूप में प्राप्त हुए। आपकी ईश्वरप्राप्ति की तीव्र तड़प देखकर उन्होंने आपको शिष्य के रूप में स्वीकार किया। कुछ ही समय पश्चात् करीब 23 वर्ष की अल्पायु में ही पूर्ण गुरु की कृपा से आपने पूर्णत्व का साक्षात्कार कर लिया। तभी से आप आसुमल में से संत श्री आशारामजी बापू के रूप में पहचाने जाने लगे।
आपश्री के विषय में कलम चलाना मानो सूरज को दीया दिखाना है। सारे विश्व के लिए विश्वेश्वर रूप ग्रहण करनेवाले आपश्री के बारे में जितना भी लिखा जाय, कम ही होगा। कहाँ तो आप शांत गिरि-गुफाओं में आत्मा की मस्ती में मस्त बने और कहाँ इस कलह-युग में छल-कपट, राग-द्वेष से भरे मानव-समुदाय के बीच लोकमांगल्य के विशाल कार्यों में ओतप्रोत! आप अपने पूज्य सद्गुरुदेव की आज्ञा शिरोधार्य करके अपनी उच्च समाधि-अवस्था का सुख छोड़कर अशांति की भीषण आग से तप्त लोगों में शांति का संचार करने हेतु समाज के बीच आ गये। सन् 1972 में आपश्री साबरमती के पावन तट पर स्थित मोटेरा गाँव पधारे, जहाँ दिन में भी भयानक मारपीट, लूटपाट, डकैती व असामाजिक कार्य होते थे। वही मोटेरा गाँव आज लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं का पावन तीर्थधाम, शांतिधाम बन चुका है। इस साबर-तट स्थित आश्रमरूपी विशाल वटवृक्ष की शाखाएँ आज भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में फैल चुकी हैं। आज विश्वभर में करीब 410 से भी अधिक आश्रम स्थापित हो चुके हैं, जिनमें सभी वर्णों, जातियों और सम्प्रदायों के लोग देश-विदेश से आकर आत्मानंद में डुबकी लगाते हैं तथा हृदय में परमेश्वरीय शांति का प्रसाद पाकर अपने को धन्य-धन्य अनुभव करते हैं। अध्यात्म के सभी मार्गों का समन्वय करके पूज्यश्री अपने शिष्यों के सर्वांगीण विकास का मार्ग सुगम करते हैं। भक्तियोग, ज्ञानयोग, निष्काम कर्मयोग और कुंडलिनी योग से साधक-शिष्यों का, जिज्ञासुओं का आध्यात्मिक मार्ग सरल कर देते हैं। पूज्यश्री समग्र विश्व के मानव-समुदाय की उन्नति के प्रबल पक्षधर हैं। इसीलिए हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी व अन्य धर्मावलम्बी भी पूज्य बापूजी को अपने हृदय-स्थल में बसाये हुए हैं और अपने को पूज्य बापूजी के शिष्य कहलाने में गर्व महसूस करते हैं। आज लाखों लोग पूज्यश्री से दीक्षित हो चुके हैं तथा देश-विदेश के करोड़ों लोग उन्हें श्रद्धासहित जानते-मानते हैं व सत्संग-रस में सराबोर होते हैं। भारत की राष्ट्रीय एकता, अखंडता और शांति के प्रबल समर्थक पूज्यश्री ने राष्ट्र के कल्याणार्थ अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया है।
पूज्य बापूजी कहते हैं : ‘‘संसार के जितने भी मजहब, पंथ, मत, जातियाँ आदि जो भी हैं, वे उसी एक चैतन्य परमात्मा की सत्ता से स्फुरित हुए हैं और सारे-के-सारे एक दिन उसीमें समा जायेंगे। फिर अज्ञानियों की तरह भारत को धर्म, जाति, भाषा व सम्प्रदाय के नाम पर क्यों काटा-तोड़ा जा रहा है? निर्दोष लोगों के रक्त से भारत की पवित्र धरा को रंजित करनेवाले लोगों तथा अपने तुच्छ स्वार्थों की खातिर देश की जनता में विद्रोह फैलानेवालों को ऐसा सबक सिखाया जाना चाहिए कि भविष्य में भारत के साथ गद्दारी करने की बात वे सोच भी न सकें।’’ आज एक ओर जहाँ सारा विश्व चिंता,तनाव, अराजकता, असामाजिकता और अशांति की आग में जल रहा है, वहीं दूसरी ओर पूज्य बापूजी स्वयं गाँव-गाँव, नगर-नगर जाकर अपनी पावन वाणी से समाज में प्रेम, शांति, सद्भाव तथा आध्यात्मिकता का संचार कर रहे हैं।
बालक ही देश के भावी नागरिक हैं। बाल्यकाल के संस्कार एवं चरित्र-निर्माण ही मनुष्य के भावी जीवन की आधारशिला हैं। अत: देश के विद्यार्थियों में सुसंस्कार-सिंचन कर उनके जीवन को स्वस्थ व सुखी बनाकर सुंदर भविष्य-निर्माण हेतु ब्रह्मनिष्ठ संत श्री आशारामजी बापू के प्रेरक मार्गदर्शन में देश-विदेश में 17,000 से अधिक ‘बाल संस्कार केन्द्र’ (http://bsk.ashram.orgनि:शुल्क चलाये जा रहे हैं। इनमें बालकों को यौगिक प्रयोग सिखाये जाते हैं। इससे उनकी शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक शक्तियों का विकास होता है और वे सफलताप्राप्ति में सक्षम बनते हैं।
विद्यार्थियों की छुट्टियों का सदुपयोग कर उन्हें संस्कारवान, बुद्धिमान, उद्यमी, परोपकारी बनाने हेतु ‘विद्यार्थी उज्ज्वल भविष्य निर्माण शिविरों’ का आयोजन होता है। विद्यालयों में ‘योग व उच्च संस्कार शिक्षा’ अभियान चलाया जाता है, जिसमें विद्यार्थियों को यौगिक शिक्षा, आदर्श दिनचर्या, परीक्षा में अच्छे अंक कैसे प्राप्त करें आदि महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया जाता है। विद्यार्थियों को प्रतिभावान, उन्नत, संयमी बनाने के लिए पूज्य बापूजी के मार्गदर्शन में ‘दिव्य प्रेरणा-प्रकाश ज्ञान प्रतियोगिता’ शुरू हुई। अब तक इसमें 55,123 विद्यालयों के 45,13,068 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के यशस्वी विद्यार्थियों को सुवर्ण पदक, रजत पदक व नकद राशि सहित हजारों पुरस्कार दिये गये। साथ ही इस प्रतियोगिता के माध्यम से शरीर को स्वस्थ व सुदृढ़, मन-बुद्धि को बलवान तथा जीवन को उन्नत बनानेवाला सत्साहित्य 1 करोड़ विद्यार्थियों तक पहुँचा। वर्ष 2013 में तीन सत्साहित्य ‘हमें लेने हैं अच्छे संस्कार’, ‘योग व उच्च संस्कार’ व ‘प्रेरणा ज्योत’ के आधार पर प्रतियोगिता के विजेताओं एवं पुरस्कारों की संख्या दुगनी होकर 1 लाख हो गई । ‘संस्कारी बच्चे ही देश का भविष्य हैं’ यह जाननेवाली व राज्य का वास्तविक हित चाहनेवाली महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़,हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब आदि सरकारों ने सभी विद्यालयों में प्रतियोगिता का आयोजन राज्यस्तरीय किया ।
‘वेलेंटाइन डे’ जैसे संयम-विनाशक विदेशी त्यौहारों से अपने देश के किशोरों व युवक-युवतियों की रक्षा करने हेतु पूज्य बापूजी की प्रेरणा से हर वर्ष14 फरवरी को विभिन्न विद्यालयों एवं घर-घर में ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ (http://mppd.ashram.orgमनाया जा रहा है। पूज्य बापूजी द्वारा समाज को दी गयी इस नयी दिशा से लाखों-लाखों विद्यार्थी अब तक लाभान्वित हुए हैं। ‘मातृ-पितृ पूजन’ सत्साहित्यकी वितरण-संख्या वर्ष 2011 में 10 लाख,2012 में 25 लाख और 2013 में 48 लाख रही और छत्तीसगढ़ सरकार ने पूज्यश्री की ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ की इस पहल से प्रेरणा पाकर 14फरवरी ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ को राज्यस्तरीय पर्व के रूप में मनाने का स्वर्णिम इतिहास रच दिया।
अब ‘संत श्री आशारामजी गुरुकुलों’ (http://www.gurukul.ashram.org) की भी शृंखला स्थापित हो गयी है, जिनमें विद्यार्थियों को लौकिक शिक्षा के साथ-साथ स्मृतिवर्धक यौगिक प्रयोग, योगासन, जप, ध्यान, प्राणायाम आदि के माध्यम से उन्नत जीवन जीने की कला सिखायी जाती है। उनमें सुसंस्कारों का सिंचन किया जाता है तथा उन्हें अपनी महान वैदिक संस्कृति का ज्ञान प्रदान किया जाता है। इस प्रकार आधुनिकता के साथ आध्यात्मिकता का अनोखा संगम हैं ये आश्रम के गुरुकुल । पूज्यश्री युवानों को राष्ट्र का कर्णधार मानते हैं। यदि किसी राष्ट्र का युवावर्ग बलशाली,उद्यमी व संस्कारित है तो वह राष्ट्र उन्नति की चरम सीमा पर पहुँचता है। इसी उद्देश्य से पूज्यश्री के पावन मार्गदर्शन में ‘युवाधन सुरक्षा अभियान’चलाया जाता है तथा ‘युवा सेवा संघ’ (http://www.yss.ashram.org)एवं ‘महिला उत्थान मंडल’ (http://mum.ashram.org) की स्थापना की गयी है। इन संगठनों द्वारा भारतभर में ‘संस्कार सभाएँ’ चलायी जा रही हैं, जिनका लाभ लेकर युवान-युवतियाँ अपना सर्वांगीण विकास कर रहे हैं। पूज्यश्री की प्रेरणा से ‘साधक शिक्षक संगठन’ की भी स्थापना हुई है।
पूज्यश्री का विशाल शिष्य-समुदाय आपश्री की तरह भारत की एकता, अखंडता व शांति का समर्थक होकर पूर्णरूपेण राष्ट्र को समर्पित है। आपश्री के परम कल्याणमय मार्गदर्शन में आज भारत में 410 से भी ज्यादा आश्रम व 1400 से भी अधिक श्री योग वेदांत सेवा समितियाँ और विदेशों में भी अनेक समितियाँ लोक-कल्याण के कार्यों में सेवाभाव से संलग्न हैं तथा पूज्यश्री के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए सतत प्रयत्नशील हैं। विद्यार्थियों के विकास हेतु और उनको तेजस्वी, पुरुषार्थी, संयमी तथा दृढ़ आत्मविश्वासी बनाने हेतु पूज्यश्री के सान्निध्य में विद्यार्थी तेजस्वी तालीम शिविरों का भी आयोजन किया जाता है। आश्रम व समितियों के साधक भाई-बहन स्कूलों-कॉलेजों में जाकर विद्यार्थियों को योगासन एवं स्मरणशक्तिवर्धक प्रयोग सिखाते हैं तथा वहाँ व्यसनमुक्ति अभियान भी चलाते हैं। विद्यार्थियों के लिए प्रेरक, उत्तम गुणवत्तायुक्त एवं रियायती दरोंवाले रजिस्टर व नोटबुकों का निर्माण भी आश्रम द्वारा किया जाता है।
पूज्यश्री की अमृतवाणी एवं शास्त्रों से संकलित सत्साहित्य का प्रकाशन अनेक भारतीय भाषाओं जैसे – हिन्दी, गुजराती, मराठी, ओड़िया, तेलुगू,कन्नड़, पंजाबी, सिंधी, बंगाली, उर्दू, तमिल, मलयालम के साथ-साथ नेपाली व अंग्रेजी में भी किया जाता है। आपश्री की जीवनोद्धारक अमृतवाणी जन-जन तक पहुँचाने हेतु ‘ऋषि प्रसाद’ (http://www.rishiprasad.orgपत्रिका का प्रकाशन भी प्रतिमाह किया जाता है। विश्व में सर्वाधिक सदस्यतावाली आध्यात्मिक पत्रिकाओं में अग्रणी स्थान रखनेवाली यह पत्रिका हिन्दी, गुजराती, मराठी, ओड़िया, तेलुगू, कन्नड़, सिंधी, सिंधी (देवनागरी), बंगाली व अंग्रेजी इन दस भाषाओं में प्रकाशित होती है। इसकी 20 लाख से अधिक प्रतियाँ प्रकाशित होती हैं। इसकी लोकप्रियता दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। अब तो विदेशों में भी इसकी काफी माँग हो रही है। इन सबके अतिरिक्त हिन्दी, गुजराती तथा मराठी भाषाओं में मासिक समाचार पत्र ‘लोक कल्याण सेतु’ (http://rishiprasad.org/lokkalyansetuका भी प्रकाशन किया जा रहा है। इसकी विषय-सामग्री इतनी प्रेरणादायी और रोचक होती है कि पाठक सहज ही प्रशंसा करते नहीं अघाते। पूज्य बापूजी के जीवन, उद्देश्य और योगलीलाओं पर आधारित आध्यात्मिक मासिक विडियो मैगजीन ‘ऋषि दर्शन’(http://rishidarshan.org)हजारों घरों तक पहुँच रही है। आश्रम मंगलमय संदेश सेवा (SMS सेवा) के अंतर्गत नित्य प्रात: पूज्यश्री के अमृतवचन,आगामी सत्संग-कार्यक्रम, पूनम-दर्शन, महत्त्वपूर्ण वार-त्यौहार, व्रत-तिथि, स्वास्थ्य, साधना संबंधी विशेष जानकारी नियमित रूप से मिलती है। मंगलमय चैनल (http://www.ashram.org/Live) के द्वारा अमेरिका, केनेडा, यूनाइटेड किंगडम, यु. ए. ई ., ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, पोलेंड, होंगकोंग, रशिया, चीन, सऊदी अरेबिया, सिंगापुर, साऊथ अफ्रीका, नेपाल, पाकिस्तान, इटली, बेल्जियम, फ्रांस, यूगांडा, ब्राज़ील, मैक्सिको, मॉरिशस, जॉर्जिया, इजिप्त, हन्गरी, डेन्मार्क आदि 167 राष्ट्रों में बापूजी का सत्संग सजीव प्रसारित होता है |
आश्रम द्वारा आयुर्वेदिक उपचार केन्द्र भी चलाये जा रहे हैं। सूरत, अहमदाबाद, बड़ौदा, पांडेसरा-सूरत, भैरवी जि. नवसारी (गुज.), उल्हासनगर, बोईसर,डोम्बिवली जि. थाने, प्रकाशा जि. नंदुरबार, माणगाँव जि. रायगढ़, नासिक, नेरुल, गोवंडी, गोरेगाँव जि. मुंबई (महा.), जयपुर (राज.), लुधियाना (पं.),पानीपत, फरीदाबाद (हरि.), हैदराबाद, अडोनी जि. कुरनूल (आं.प्र.), बैंगलोर, बीदर, बेलगाँव, खानापुर (कर्नाटक) तथा आगरा, वाराणसी, गाजियाबाद (उ.प्र.), दिल्ली, चंडीगढ़ के आश्रमों में हजारों-हजारों लोगों की चिकित्सा के लिए ये केन्द्र कार्यरत हैं। इनमें से सूरत और पानीपत के आश्रम में आयुर्वेदिक पंचकर्म केन्द्र भी चलाये जा रहे हैं। लोगों को शुद्ध व उत्तम गुणवत्तावाली दवाएँ अत्यल्प मूल्य में मिल सकें, इस हेतु औषध-निर्माण भी किया जाता है। ग्रामीण, पिछड़े व आदिवासी क्षेत्र के मरीजों को चल-चिकित्सालयों द्वारा सेवाएँ दी जाती हैं।
समाज के पिछड़े, शोषित, बेरोजगार व बेसहारा लोगों की सहायता के लिए आश्रम द्वारा ‘भजन करो, भोजन करो, रोजी पाओ’ योजना चलायी जा रही है। इसके अंतर्गत उन्हें कहा जाता है कि वे आश्रम में अथवा आश्रम द्वारा संचालित समितियों के केन्द्रों में आकर दिनभर केवल भजन, कीर्तन और ध्यान करें। उन्हें दिन का भोजन और शाम को घर जाते समय 20 से 40 रुपये नकद दक्षिणा के रूप में दिये जाते हैं। इसमें भाग लेनेवालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। इससे जहाँ लोगों को भोजन की विकट समस्या से निजात मिलती है, वहीं उनका आध्यात्मिक उत्थान भी हो रहा है। इससे बेरोजगार लोगों में आपराधिक प्रवृत्ति को रोकने में बहुत सहायता मिलेगी। नारी उत्थान कार्यक्रमों के अंतर्गत साधना-ध्यान-भजन में आगे बढ़ने की इच्छुक बहनें अहमदाबाद (गुज.) व छिन्दवाड़ा (म.प्र.) स्थित महिला उत्थान आश्रमों में रहकर लौकिक-पारमार्थिक उत्थान में रत हैं। कारागारों में कैदियों के जीवन को सही दिशा देने हेतु विडियो सत्संग, सत्साहित्य-वितरण व ‘कैदी उत्थान कार्यक्रम’ किये जाते हैं।
साधना में तीव्रता से आगे बढ़ने के इच्छुक साधकों के लिए कुछ प्रमुख आश्रमों में मौन-मंदिर की व्यवस्था की गयी है। आश्रमों में गौशालाएँ भी हैं,जिनकी सेवा वहाँ के साधकगण करते हैं। आश्रम द्वारा निवाई (राज.) में एक बहुत बड़ी गौशाला स्थापित की गयी है, जिसमें गायों के झरण से‘गोझरण अर्क’ व गोबर से ‘गौ-सेवा केंचुआ खाद’ बनायी जाती है, जो क्रमश: मानव और भूमि के लिए रामबाण औषधियाँ सिद्ध हुई हैं। वातावरण को शुद्ध-सात्विक रखने के लिए गाय के गोबर, चंदन एवं स्वास्थ्यवर्धक सुगंधित जड़ी-बूटियों से ‘गौ-चंदन धूपबत्ती’ भी तैयार की जाती है। अहमदाबाद (गुज.), कोटा (राज.), श्योपुर, सुसनेर, रतलाम, छिन्दवाड़ा (म.प्र.), दोंडाईचा (महा.) तथा लुधियाना (पंजाब) में भी ऐसी गौशालाओं की स्थापना की गयी है। सभी गौशालाओं में कुल मिलाकर 5000 गायें हैं।
पूज्यश्री से दीक्षित एक बहुत बड़ा साधक-समुदाय विदेशों में आश्रम की विभिन्न सेवाओं को वहाँ की जनता तक पहुँचा रहा है, साथ ही भौतिक सुविधाओं में डूबकर अशांत हो रहे लोगों तक पूज्यश्री का सत्संग पहुँचाकर उन्हें सच्ची शांति, आनंद तथा प्रभु की मस्ती में सराबोर कर रहा है। केनेडा,न्यूजर्सी, दुबई, सिंगापुर, नेपाल, हाँगकाँग, चिली, लंदन, नैरोबी, टोरेंटो, लेस्टर इत्यादि अनेक देशों और शहरों में ऐसे ‘मानव कल्याण केन्द्र’ चलाये जा रहे हैं।
आज संत श्री आशारामजी आश्रम लाखों-करोड़ों लोगों का प्रेरणास्रोत बन चुका है। अल्प समय में ही इस संस्था ने विशाल रूप धारण कर लिया है। इससे प्रतीत होता है कि भारत का भविष्य संतों की शरण तथा आशीर्वाद से अवश्य ही उज्ज्वल होगा। भारत पुन: विश्वगुरु की अपनी पदवी प्राप्त करने की राह पर है, जो नि:संदेह उसे प्राप्त होगी।
पूज्य बापूजी के समर्थन में
श्री सुरेशानंदजी के नेतृत्व में विराट सत्याग्रह
११ व १२ सितम्बर सुबह ९ बजे
स्थान- जंतर-मंतर दिल्ली
सम्पर्क – ९९९९६०२५०२, ९८६८०७९०५४
सभी भक्तगण समर्थन में जंतर-मंतर दिल्ली पहुंचें |
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सुरेश चव्हानके (सुदर्शन चैनल के मालिक) : क्यों बापूजी पर आरोप हो रहे है ?
सुदर्शन चैनल मेरे पास है, चक्र बापूजी के पास है | और जब सुदर्शन चक्र चलता है, तब कौरवों का नाश निश्चित है | मुझे किसीने कहा के ये मिडिया वाले बापूजी को समझते क्यों नही | मैंने कहा जो बाप को नही समझ सकते वो बापूजी को कैसे समझेंगे ? क्योंकी बाप को समझने के लिए भी भारतीय संस्कृति चाहिए, भारतीय शिक्षा चाहिए, भारतीय संस्कार चाहिए, भारतीय माँ चाहिए, सब कुछ भारतीय चाहिए | आज बहुत से लोग विदेश से पढ़कर आये हैं, उन लोगों को भारत कहना ही नही आता, केवल इंडिया ही कह सकते हैं | और हिंदुस्तान कहने की तो उनमें हिम्मत ही नही है | इसलिए वो कैसे बापूजी को पहचानेंगे ? और इसलिए आज ऐसी स्थिति में जो मेरा कार्यक्रम है बिंदास बोल उसमे मैं हमेंशा स्थिति रखता हूँ, कारण रखता हूँ,परिणाम रखता हूँ और अंत में उपाय बताता हूँ | तो कम समय में मैं आपको इसी सिक्वेंस में बताना चाहूँगा, की ये स्थिति केवल बापूजी के बारे में नही है, लेकिन बापूजी के बारे में सबसे ज्यादा है, इसका मुझे ज्यादा आनंद है | क्यों पता है ? क्योंकी सबसे ज्यादा हमला किसके उपर होता है ? जो सबसे बड़ा शत्रु है उस पर | आज इस दुनिया की बेईमानी का, दुष्कृत्यों का सबसे बड़ा शत्रु कोई है तो वह बापूजी हैं | इसलिए उनके ऊपर सबसे ज्यादा हमले हो रहे हैं | कमजोर पर कोई क्यों हमला करेगा, जो किसी को कोई नुकसान ही नही पहुँचा सकता ? बापूजी में वो हौंसला है, हिम्मत है | मेरा बिंदास बोल कार्यक्रम खत्म होने के बाद अगर धमकी के कॉल नही आये तो मैं अपने स्टाफ को बुला लेता हूँ, बोलता हूँ के आज धमकी के कॉल क्यों नही आये? इसका मतलब आज काम में कुछ कमी रह गयी ! इसलिए जो हो रहा है, इसका मतलब बापूजी के काम को सेंक्शन है और ये सेंक्शन ही आप लोगों का यश है और आप लोगों का समाधान होना चाहिए के ऐसे गुरु आपको मिले ! ये स्थिति बापूजी के लिए, जयेन्द्र सरस्वती से लेकर शुरू हुई, अब यहाँ तक आयी | मुझे याद है बापूजी ने भी कहा अमदावाद आश्रम में, २००६ की गुरु पूर्णिमा पे, मैं आया था और जो कुटिया है वहाँ पर मैंने बापूजी को कहा था, के बापूजी आपके खिलाफ कुछ षड्यंत्र चल रहे हैं और जल्दी ही आपके खिलाफ ऐसी-ऐसी बदनामी होगी के जो आप सोच भी नही सकते | ये मैंने कैमरे के सामने कहा था | २०१३ जनवरी में नोएडा में फिर कहा था | और पीछे २ हफ्ते पहले, ये केस होने के ३-४ दिन पहले जो इतवार था, उस इतवार को मैंने दिल्ली में भी कहा था | 
ये मैंने कैसे कहा २००६ में, क्योंकी उस समय मै डांग एरिया से आया था | तो बापूजी ने वहाँ पर धर्मांतरण रोकने का जो काम किया था, उसी बात से मैंने अनुमान किया था के बापूजी ने जो इतना बड़ा काम किया है, अब इनको बदनाम करने का काम शुरू होगा | इसलिए बापूजी को सावधान करना जरूरी है | हालाँकि वो दुनिया को सावधान करते हैं | हमने उनको सावधान करने की जरूरत नही | लेकिन एक निमित मात्र बनना जरूरी था, के ७-८ साल बाद वो दुबारा आकर कहे, मैंने ऐसा कहा था | इसलिए मैं दोहरा रहा हूँ | और अभी तो केवल बदनामी हो रही है, जूठे आरोप लग रहे है, आगे जाकर तो जान लेवा हमले से लेकर कुछ भी हो सकता है !  हालाँकि हमको उससे कोई डर नही है | क्योंकी साक्षात हेलिकॉप्टर गिरने के बाद भी पूज्य बापूजी का कोई कुछ बिगाड नही पाया, तो इन लोगों की चीजे क्या बिगाड़ेगी ? लेकिन इसका मतलब हमने चुप बैठना है क्या ? नही | एक उदाहरण मैं आपको वीर सावरकर का देता हूँ | संत एकनाथ संत थे | वो स्नान करके अपने घर जा रहे थे | तो एक दुष्ट पान खाकर उनके ऊपर थूंकता था | एक बार हुआ, दो बार हुआ, ३ बार हुआ ……. १०८ बार हुआ | संत हर बार फिरसे नहाते थे | १०८ वी बार उस दुष्टने क्षमा माँगी | अपना मत परिवर्तन किया | इसका विश्लेक्षण वर्ग में क्लास में जो विद्द्यार्थी थे उन्होंने अलग-अलग तरीके से किया | किसी ने कहा के संत कितने महान हैं, किसी ने कहा के आखिर में मन बदलता है | ऐसे कई उत्तरों के बाद सावरकर की तरफ जब शिक्षक ने देखा और उसको कहा के तुम चुप क्यों हो, तुम्हारा जवाब क्या है तो उसने कहा संत तो संत थे, लेकिन कितने दुर्भाग्य की बात है के हिंदू समाज तब भी सो रहा था, और आज भी सो रहा है | १०८ बार अगर कोई संत पर थूंक रहा था, तो समाज क्या चूडियाँ पहनकर खड़ा था ? तो संत तो संत हैं वो अपना काम करेंगे लेकिन हम क्या चूडियाँ पहन के बैठे हैं, क्यों जवाब नही देंगे ? हमे अपना काम अपने पुरुषार्थ के साथ करना जरूरी है | और इसलिए कल का संत सम्मेलन हमे जरूर कोई मार्ग दिखायेगा | अब स्थिति क्या है इसको मैं ज्यादा नही बताना चाहता हूँ, क्योंकी ये हम सब जानते हैं | कारण क्या है ? मैं आपको कुछ आंकड़े बताना चाहता हूँ, जो शायद आपने कभी सुने नही होंगे | और ये सारा जो कुछ हो रहा है उसके खिलाफ उसके पीछे का ये निर्णायक कारण है | क्या है ? देखिये बापूजी के ७४ साल हो गए है, ७५ चल रहा है और इस पुरे अध्यात्मिक काम में इतने सालो में अगर मैं ये कहूँ १ करोड़ भक्त भी या ४ करोड़ भक्तों में से (हम कम ही कहेंगे ताकि कोई ये ना कहे की बढ़ावा है ) २ करोड़ भक्त भी ५० सालो तक अगर शराब नही पीते हैं तो इसका आंकड़ा होता है १८ लाख ८३ हजार करोड़ रुपये | इतने रुपये बापूजी ने केवल शराब से बचाए हैं | अगर हम सिगरेट का आंकड़ा निकाले तो ये सिगरेट का आंकड़ा भी जाता है ११ लाख करोड़ ३६ हजार रुपये | अगर हम गुटके का आंकड़ा निकाले तो करोडो में है, हम अगर डांस बार जाने से जिनके कदम बापूजी के संस्कार से रुके, उनके आंकड़े निकाले तो करोडो में हैऔर जो ब्रह्मचर्य का संदेश “दिव्या प्रेरणा प्रकाश” और सत्संग के माध्यम से बापूजी ने दिया, उससे यदि एक युवान ५ साल देरी से शारीरिक सम्बन्ध बनाता है तो इस कारण कॉन्डम बनाने वाली कम्पनियों को लाखों-करोड़ों का नुकसान होता है | यह सारे आंकड़े कई लाख खरब में जा रहे हैं | तो इतने खरब रुपये बापूजी ने जिन कम्पनियों का नुकसान किया है, उनके लिए कुछ हजार करोड़ रुपये बापूजी के खिलाफ लगाना कौनसी बड़ी बात है ! 
इसके पीछे का असली अर्थ-शास्त्र ये है, बहुत से लोग इमोशनल होते हैं, कहते हैं की बापूजी को बदनाम करने के लिए किसीको करोड़ों रुपये लगाने की क्या जरूरत है ? ये जरूरत है | क्योंकी बापूजी अब और शक्तिशाली होते जा रहे हैं, उनका भक्त परिवार और बढता जा रहा है, विपरीत स्थिति में भी बढता जा रहा है | और ये जो करोडों खरबो, मतलब अगर मैं आगे शून्य लगाने को कहूँ तो हम में से कोई नही लगा पायेगा | इतने अब तक जो बचाए हैं अगले आने वाले ५ साल में बापूजी इतना आंकड़ा बचा लेते है तो अमेरिका का १ साल का बजट खराब होता है | १ साल का ! अकेले अमेरिका का !यूरोप के देशो की अगर संख्या निकालें, तो बापूजी का केवल किसी एक विषय से नशा मुक्ति करवाना यूरोप का १ साल का बजट खराब होता है | और उनका तो काम ही है | उन के लिए दुनिया बाजार है, लेकिन हमारे लिए दुनिया संसार है | ये हम दोनों के बिच के सोच का फर्क है | और इसलिए हम कहते है वसुदेव कुटुम्बकम | और ये अर्थ-शास्त्र हमको समझना जरूरी है, के इसके पीछे का कारण क्या है | परिणाम पे अगर हम देंखे तो क्या होगा ?परिणाम ये होगा की अगर इसके खिलाफ आवाज नही उठती, अगर ऐसी लड़ाई अकेली कभी बापू की है, कभी श्री-श्री रवि शंकर की है, कभी रामदेव बाबा की है, कभी जयेन्द्र सरस्वती की है | ऐसा कह कर अगर हम छोड़ते जायेंगे और अगर अकेले लड़ते जायेंगे | एक साथ आकर नही लडेंगे तो क्या होगा ?आने वाले दिनों में ऐसे अत्याचारी मुगलों की खिलाफ लड़ने के लिए शिवाजी तैयार नही होगा, क्योंकी रामदास नही रहेंगे तो शिवाजी कहाँ से आयेंगे ?ये सबसे बड़ा नुकसान होगा | फिर इस देश को गुलाम बनाना सबसे आसान रहेगा | आने वाले १० सालों में इस देश को गुलाम बनाने से रोकने वालो में सबसे जो बड़ी शक्तियाँ हैं वो संत श्री आशारामजी बापू हैं, रामदेव बाबा हैं, श्री श्री रवि शंकर हैं, जयेन्द्र सरस्वती हैं | ऐसे साधू-संत हैं और इस कारण ये सबसे ज्यादा टारगेट पर हैं | ऐसे में हम लोगों का साथ देना जरूरी है | क्योंकी इनकी प्रवृति तो माफ़ करने की है और हमारी प्रवृति होनी चाहिए इंसाफ करने-कराने की | 
अब उपाय क्या हो सकता है ? उपाय ये हो सकता है …
आप ये कहेंगे की आपने सारी देश की बाते बताई व्यक्तिगत इसमें क्या है ? तो व्यक्तिगत इसमें सबसे बड़ा नुकसान है | व्यक्ति अगर संस्कारी नही होगा तो क्राईम बढ़ेगा, और क्राइम केवल व्यक्तिगत नही बढ़ेगा, लेकिन सोशल क्राइम बढ़ेगा, सामाजिक क्राइम बढ़ेगा | हमारी माताएँ-बहने सुरक्षित नही रहेंगी | बेटियां सुरक्षित नही रहेंगी | ये भी एक बड़ा परिणाम है | ऐसे में अगर उपाय की दिशा में जाएँ तो मैं ये कहूँगा के ये सारे चैनल २ कारणों से ऐसा करते हैं | एक तो बड़ा कारण है स्पोंसरशिप और दूसरा कारण है इनकी टी.आर.पी. | क्योंकी बापूजी के खिलाफ जब ऐसी न्यूज चलती हैं, तो लोग एंटरटेनमेंट चैनल नही देंखते | उनकी टी.आर.पी. शिफ्ट होकर न्यूज चैनलों पर चली जाती है | इसलिय न्यूज चैनलों की टी.आर.पी. बढती है | एक बहुत ही आसान इलाज है, जब भी ऐसी न्यूज शुरू हो जाये वो चैनलों को ऑफ करें | जैसे ही चैनल ऑफ हो गया, ६ करोड़ टी.वी. अगर बंद हो गए, तो सारे भौकने वाले बंद | बहुत आसान उपाय, और कुछ करने की जरूरत नही ! इसका मतलब केवल इतना ही नही करना है, लेकिन सबसे पहले अगर कुछ करना है तो ये करना है, उसके बाद बाकि चीजें करनी है | 
दूसरा सोशल मीडिया में ऐसे चैनलों के जो पेज हैं उसको डिसलाइक करें | अपने आपको उससे डिसएसोसियेट करें |
तीसरा संत संमेलन तालुका स्तर पर, जिला स्तर पर, राज्य स्तर परम, विभिन्न जगहों पर किया जाये और वहाँ पर विभिन्न लोगों को बुलाया जाये और उनके सामने ये आकड़े और बातें रखे | आखिर आज भी टी.वी. से कई गुना ज्यादा प्रत्यक्ष सत्संग का परिणाम होता है | ऐसे सत्संग अगर आप इस बहाने देश के तमाम तालुकाओं में करेंगे, तो सच्चाई भी पहुँचेगी और सत्य और मजबूत होगा | और क्या हो सकता है | तो आने वाली इस लड़ाई के लिए मिडिया में और अच्छे लोगों की जरूरत है | क्योंकी आखिर गंदगी को साफ करने का एक तरीका है की उसको और ज्यादा अच्छा पानी डालो तो गंदगी दूर हो जायेगी | इसलिए अच्छे पत्रकार बनाना जरूरी है | 
हम काला धन भारत वापस लाने की बात करते हैं | लेकिन आज हमने ये देखा के उस काले धन का जितना आंकड़ा आपने आजतक सुना है उससे भी कई गुना बापूजी इसी देश में पवित्र धन बना रहे हैं |
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12 Comments on “युग-प्रवर्तक संत श्री आशारामजी बापू के समर्थन में विराट सत्याग्रह”

  1. rohit grover Says:

    hari hari om sadguru dev maharaj ki jai

  2. dayavan Says:

    hari om omo om omn

  3. jineash jain Says:

    i m unable to attend it . i m in bombay. my full support is with u . i like so much to bapu.

    ________________________________

  4. Yogacharya Santosh Pandey Says:

    Bujya Bapu ji Nirdosh hain, ek din satya samne ayega to bapu ji se muh ferne wale log khud par sharminda honge.
    apu ji par pura wiswas rakhen yah pariksha ki ghadi hai……Hari om

  5. shiv kumar sahu Says:

    sadhuwad hai aapko jo yuwa bhaiyo ka margdarsak hain pranam hai. hari om

  6. shiv kumar sahu Says:

    sabhi kupracharko ke liye —– Sant sataye tino jay tej wans aur bal ,aise aise kai gaye Ravan Kaurav Kansh.

  7. pushpendra Says:

    hari om

  8. pralhad salunke ( dhule,maharastra) Says:

    Hari om—pujya bapujikeupar lagaye gande aaropoka may khandan karta hu–zut zut hi hota hai ye sabit hoga deshko bapujiki garaj hay.kubhand rachynewaloka nash ho!
    From-pralhad salunke (chif editor-police vision)dhule,Mahaarastra

  9. ritu Says:

    This is nation’s our’s good luck we get such great bapu ji.
    hari om


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