जो उसकी मर्जी वो हमारी मर्जी

८ मार्च २०१३
पार्ट १
प्रयागराज-अलाहाबाद-महाकुम्भ

किस समय क्या करना
सुबह ७ बजे से पहले शौच आदि से निवृत हो जाता है तो उसे कब्जियत की बीमारी नही होगी | ४-५ के बीच बजे प्राणायाम कर लेता है, उसके फेफ्सों की ताकत बड जायेगी | ५-७ शौच, आसन कर लेता है उसकी तबीयत मजबूत हो जायेगी | ७-९ कुछ पीना है तो पी लेवे | ९-११ के बीच खा लें | ११-१ के बीच जो खाएँगे, उनके हृदय का आनंद दब जायेगा | क्योंकि उस समय जीवनी शक्ति हृदय में होती है | खाने में लगी तो आनंद, मानवीय संवेदनाएँ ये सब बिखर जाते हैं | इसलिए आज लोग निरदई बहुत हो गए हैं | हृदय तो कम ही हो गया है | लड़ाई-झगड़े, वकील और पोलिस धमा-धम मारा-पीटी | मानवीय संवेदनाएँ नही इसीलिए झगड़े ज्यादा हो गए हैं | १२-३ के बीच खाते हैं वो ही झगड़े बाज होते हैं | ११ बजे खा लो तो झगड़े बाज नही होते | रात को ७-९ दिमाग कि शक्ति खुली रहती है | उस समय पाठ, साधना, श्लोक, प्रार्थना याद रह जायेगा | ३-५ के बीच जीवनी शक्ति जलीय अंश में होती है | उस समय पानी पी लें तो किडनी कि बीमारी ठीक हो जायेगी | ५-७ के बीच भोजन कर लेना चाहिए शाम का | ७-९ के बीच दिमागी काम कर लेना चाहिए | ९-११ के बीच नींद कर लेवे तो आये हाय | उस समय करोड़-रजु में जीवनी शक्ति होती है | थकान भी मिटेगी और स्वास्थ्य भी बढिया हो जायेगा | ९ बजे सो जाये, ३ बजे उठे | बस, डॉक्टर को दिखा दे डंडा | पैर गर्म, पेट नर्म, सिर ठंडा, आये डॉक्टर तो दिखा दे डंडा |
जो उसकी मर्जी वो हमारी मर्जी
होंठो से ॐ, ॐ, …. | सब वासुदेव की लीला है | खून-पसीना बहाता जा, तान के चादर सोता जा | नाव तो हिलती जायेगी, तू हँसता जा या रोता जा || तो रोये काहेको ? वाह-वाह | एक बाबजी बैठे थे नाव में | और नाव में थोड़े सुराख़ होते रहते हैं | एक थोडा कपड़ा डाला था, खुल गया तो नाव में पानी आने लग गया | तो नाव वाला उसको बंद करने लगा | लेकिन पानी आ रहा था | तो बाबा ने क्या करा करमंडल भर-भर के नाव में डाला | नाव वाला जनता था ये तो बाबा सिद्ध पुरुष हैं | बोले बाबा ये क्या कर रहे हो ? बोले देखो तू ठीक करता है फिर भी नही हो रहा है | तो वो नाव को डुबाना चाहता है तो उसकी मर्जी पूर्ण हो | मैं भी सेवा करता हूँ |
उसके दिमाग में तुका लग गया कोई और उसने नाव में कुछ किया, गाँठ बांधी, पानी आना बंद हो गया | फिर नाव में से पानी भर-भर के बाबा बाहर निकाले | बोले बाबा अभी तो अंदर दल रहे थे | हाँ तो सुराख़ हो रहा था उसकी मर्जी डूबने की तो मैं डाल रहा था | अब तेरे को आइडिया दिया तो पानी बंद हो गया | तो वो नाव को पार लगाना चाहता है तो बाहर निकाले | जो उसकी मर्जी वो हमारी मर्जी | कैसे-कैसे बाबा लोग ? दूसरे उड़िया बाबा हो गए | उड़िया बाबा, हरी बाबा, हाथी बाबा, आनंदमई माँ, ये सब सम कालीन हो गए |
हरी बाबा के बाबा बनने की कथा
तो हरी बाबा से पूछा आप बाबा कब बने, क्यों बने ? तो बोले हम बच्चे थे, खेल रहे थे | एक बाबा भिक्षा माँग के आये | और झोला लटकाते और हमारे साथ खेलते थे बाबा | एक दिन जब बाबा भिक्षा लेकर आये, तो झोला टांग दिया | लेकिन कुत्ता पूंछ हिलावे | बाबा बोले आज तो भिक्षा मेरे अकेले की मिली है, ज्यादा नही है | तू खिन और जाके भिक्षा मांग ले पूंछ हिला के | तो कुत्ता बोले उ.उ.औ… | ये क्या मैं देने वाला नही हूँ | आज तो मेरे हिस्से की है, ज्यादा होती तो तेरे को देता | लेकिन कुत्ता कब मानता | कुछ नही चलेगा जा भिक्षा मांग | कुत्ता फिर पूंछ हिलाए | मतलब दो | कुत्ता जाये नही | जा, उलटे पैर जा | तो कुत्ता उलटे पैर जाने लग गया | तो हरी बाबा बोले, “बाबा ये क्या है ?” आपने तो उसको मना किया नही माना तो आपने कहा उलटे पैर जा तो सच में उलटे पैर जा रहा है | ये कौन सा मन्त्र है ? तेरी मर्जी पूर्ण हो |

Advertisements
Explore posts in the same categories: Uncategorized

Tags: , , , , , , , , , , ,

You can comment below, or link to this permanent URL from your own site.

One Comment on “जो उसकी मर्जी वो हमारी मर्जी”

  1. diptimaya dash Says:

    jay gurudev .jay abapuji.this is very very good time scedule.But how can i develop my will power
    “diptimaya Dash,odisha’


Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s


%d bloggers like this: