सत्संग सहित सेहत के कुछ नुस्खे

29th December 2012,Delhi

मनुष्य के शरीर में थे बड़े अखंड ब्रह्मचारी | भगवान कृष्ण ने कहा पितरों में अर्यमा मैं ही हूँ | मेरा ही स्वरूप है वो और मैं एक हूँ | इतने ब्रह्मचारी में मजबूत रहे के भगवान के साथ | ॐ अर्यमायै नमः ॐ अर्यमायै नमः इस जप से काम-विकार धीरे शमन होता है, मिटने लगता है |
जिनको तबियत अच्छा करना है वे धीरे-धीरे श्वास रोक कर, फिर गुरु मंत्र का जप करें, फिर श्वास छोड़े और श्वास बाहर छोडकर ५०-६० सेकंड अपना गुरु मंत्र जपे | इससे निरोग भी रहेंगे, निर्भय भी रहेंगे और निर्विकार होने में भी मदद मिलेगी | २-३ बार स्वास अंदर रोके और २-३ बार बाहर, एक बार अंदर रोके, एक बार बाहर रोके, दोनों मिलाकर १ प्राणायाम | अगर ३ प्राणायाम भी करने लग गए तो आसानी से रोग और विकार भगाने में तुम सफल हो जाओगे, खाली ३ प्राणायाम | सवा से डेढ़ मिनट श्वास रोके | मैं पहले सवा मिनट रोकता था अब डेढ़ मिनट थोडा कम-ज्यादा अंदर रोकता हूँ | पहले ४० सेकंड रोकता था, फिर ५०, अब ६० सेकंड बाहर रोकता हूँ | अब ज्यादा पावरफुल हो गया, विकार भी भाग जाते हैं और रोग भी भाग जाते हैं, थकान भी भाग जाती है | ये प्राणायाम करके लेट जाये शवासन में, कैसी भी थकान हो, मिटती है |
बच्चों को साल में ३ बार बीमारियाँ होती है कफ सबंधी | बचपन में कफ ज्यादा होता है, जवानी में पित और बुढ़ापे में वायु |
जिसको वायु की तकलीफ हो २ लीटर पानी उबाले डेढ़ लीटर कर ले, उस पानी में ३ बिली पत्ते और २-३ काली मिर्च डाल दें अथवा अजवाइन की एक चुटकी डाल दें या तो पुदीना कूट के डाल दें तो जिसको वायु की, गैस की तकलीफ है उसके लिए ये पानी औषध का काम करेगा | २ लीटर पानी में जरा सा अजवाइन अथवा बिली पत्ते अथवा २-३ काली मिर्च डाल के, २ का डेढ़ लीटर हो जाये | वो पानी पिए दिन में तो वायु में आराम होगा |
अगर पित की तकलीफ है तो २ लीटर पानी उबाल के १ लीटर कर लें | पित सबंधी बीमारी में शांति होगी | आँखों की जलन, गर्मी, गुस्सा, मासिक अधिक आना, चहेरे पर खिल पड़ने, चहेरे पर फोड़े-फुंसी होना, शरीर पर फोड़े-फुंसी होना, कैसे भी फोड़े-फुंसी हो या घाव हो, उन दिनों में २ लीटर में से १ लीटर पानी करके पिएगा वो जल्दी ठीक हो जायेगा | रक्त स्राव ज्यादा हो तभी भी ये प्रयोग काम आएगा |
पित का शमन करने के लिए उबाल के पानी आधा करो लेकिन कफ हो जाता है तो १ लीटर पानी को उबाल के २५० ग्राम कर देना और वो बच्चे को १-२ दिन पिलाये, कैसी भी कफ सबंधी बीमारी हो भाग जायेगी | डॉक्टरों के पास भटकने की जरूरत नही है और दूसरा भी उपाय है जो बच्चों को सर्दी हो जाती है, नाक बहती रहती है, सुबह खाली पेट गुण-गुना पानी पिलाओ २-३ दिन में सर्दी, नाक बहना, खाँसी भाग जायेगी और भी उपाय है, ५० ग्राम शहद ले लो, १० ग्राम लहसुन कूट के उसकी चटनी बना लो | सर्दी के दिनों में या ऋतु परिवर्तन के दिन में बच्चों का नाक बहना, सर्दी या खाँसी हो जाये तो जैसा बालक १-२ ग्राम से लेकर ५-७-१० ग्राम तक चाट सकता है लहसुन की चटनी, इससे भूख भी खुल के लगेगी, सर्दी भी भाग जायेगी, नाक बहना भी ठीक हो जायेगा | लेकिन जो बड़ी उम्र के लोग हैं वो सर्दी में या खाँसी-वांसी में गोली-वोली नही लें | सर्दी की गोली लेने से सर्दी दब जाती है, फिर-फिर से होती है | कफ बढ़ गया, सर्दी हो गयी, फलाना हो गया, तुरंत गोली ले ली, नही | कफ को और बीमारी के कणों को सुखा देती है गोली, अंग्रेजी गोली | फिर वो कण ही ट्यूमर बनते हैं, केंसर बनते हैं, ब्लोकेज बनते हैं |
सर्दी आये तो अंग्रेजी दवा की मुसीबत मुँह में मत डालो | सर्दी आये तो बांया नाक बंद करके दांये नाक से श्वास खींचो जितना भी खिंच सकते हैं फिर सवा से डेढ़ मिनट तक रोको फिर बांये से श्वास छोडो फिर दांये से लो | ऐसे ही ४-५ बार कर लिया, कैसी भी सर्दी हो, १-२ दिन में गायब होगी | जल्दी सर्दी, खाँसी, दमा आएगा नही | मेरे को खाँसते देखा क्या ? आया बस २ प्राणायाम किया, भाग गयी, वातावरण के कारण जो आई तभी भी कुछ उपाय जान लो तो तंदरुस्त रह सकता है |
लेकिन जिसको गर्मी ज्यादा हो गयी है | १४ जनवरी के बाद धीरे-धीरे ठंड कम हो जायेगी | गर्मी हो गयी, आँखे जलती हैं, मासिक ज्यादा हो जाता है, ज्यादा गुस्सा आता हो तो बांये नाक से श्वास लिया रोका, सवा-डेढ़ मिनट दांये से छोड़ा | ऐसे २-४ बार किया गर्मी भाग जायेगी २-३ दिन में बस, रोज नही करना है | गर्मी को भगाना है तो बांये नाक से श्वास लो, रोको और दांये से छोडो | सर्दी को भगाना है तो दांये से लो रोको और बांये से छोडो और चिंता और गर्मी को भगाना हैं , तो दोनों नथुनों से श्वास लो ऊंकार का गुंजन करो | गम, चिंता और विस्मृति भगाकर भगवन में समता बढ़ाने वाला ये प्रयोग है | सभी को ये २ बार करना चाहिए रोज | श्वास लो , मैं भगवान का हूँ, भगवान मेरे है , भगवान शक्ति रूप है , आनंद रूप है और अंतर आत्मा होकर सभी में व्याप्त है | ये तो सभी को करना चाहिए | बच्चे तो ३ बार करें याद शक्ति और बढ़ेगी | अब होंठो में जप करते जाओ अथवा श्वासों की गिनती करते जाओ अथवा हृदय से जप करते हुए मग्न होते जाओ | ऐसे ही सूर्य अस्त के समय संध्या के समय जप ध्यान का प्रभाव होता है, सूर्य उदय होने से पहले शुरू करे और सूर्य उदय होने के बाद भी करता रहे, त्रिकाल संध्या | जो त्रिकाल संध्या करता है उसको रोजी, रोटी, धंधे के लिए हापा-धापी नही करनी पडती है | जंगल में भी जाकर बैठेगा तो उसको खाना मिलेगा | त्रिकाल संध्या से इतना पुण्य बढ़ जाता है | सुबह, दोपहर, शाम ध्यान करना है, प्राणायाम करना है बस | सर्टिफिकेट लेकर भटकते रहो नौकरी नही मिलती, खाली त्रिकाल संध्या करे कहीं भी जाये सब हाजिर |
हम सबकुछ छोड़ के पैदल चल दिए थे नारेश्वर के जंगल में और सुबह नहा के आये तो ये भूख | तो मैंने कह दिया भगवान को कहीं जायेंगे नही मांगने को भीख, जिसको गरज होगी आएगा, श्रृष्टि करता खुद लाएगा | थोड़ी देर में दो किसान आये फल और दूध लेके | मैंने कहा तुम्हारा हमारा परिचय नही है, दूसरा होगा कोई तुम्हारा संत , वे बोले रात को ३ बजे हमने सपना देखा है | मेरे को तो सुबह विचार आया भगवान ने पहले से व्यवस्था करा दी | मैं तो बाद में जन्मा भगवान ने बड़ा भव्य झूला सौदागर के द्वारा हमारे घर भेज दिया | कैसा भगवान ध्यान रखते हैं | तुम्हारा भी रखते है तुम पैदा बाद में हुए उसके पहले माँ के शरीर में दूध बन गया, तुम्हारी नाभि माँ के शरीर से जुड गयी | ऐसा नही के भगवान खाली अकेले मेरे है जितने मेरे हैं उतने के उतने तुम्हारे हैं | जब कोहरा होता है न तो सूरज नही दिखता, ऐसा नही है कि सूरज नही है तब नही दिखता, हमारे आँखों के आगे कोहरा है | ऐसे ही हमारी बुद्धि के आगे नासमझी है | तो भगवान नही अनुभव में आते हैं, बाकि है तो सही और वो भगवान मरते नही, शरीर मरता है | कहीं भी हम जाते हैं तो हमारा चैतन्य |
जैसे घड़ा फूटता है तो आकाश नही मरता | घड़ा कहीं भी जाये तो आकाश साथ में ही होता है ऐसे ही कहीं भी जाओ मरके, भगवान की चेतना साथ में है | लेकिन जो भगवान को मानता है, उसका जप करता है उसको फायदा होता है | ऊं…….प्रभुजी ऊं | पहले तो बाहर से जप करे फिर कंठ में, फिर हृदय में, जप अपने आप होने लगेगा | हमारी तो कई ऐसी माताएँ हैं, बहने हैं, बेटियाँ हैं | रोटी बनती हैं और मन में जप होता है तो रोटी पर ओम उभर आता है | उनके मंत्र कई सिद्धि का लक्षण है, सफलता का | हरि ऊं , हरि ऊं है, ऊं नमः शिवाय है तो ऊं निकल आता है, रोटी पर ऊं छप जाता है | पूजा करती है, पीपल पे पानी देती है तो पीपल के पत्ते पर ऊं उभर आता है | हमारा छिंदवाडा गुरुकुल है, महिला आश्रम है तो सब्जी बोती हैं बच्चियाँ, सब्जी काटती हैं तो ऊं उभर आता है, बैंगन में ऊं आता है |
ऐसे ही रतलाम के पास एक आश्रम है मैं नही गया | लोग तडपते थे बड को फेरे फिरते थे, तो वहाँ पे चबूतरा बना था, मार्बल लगा था, उस मार्बल पर बापू का फोटो प्रकट हुआ | हमारे भक्त जैसा चाहते हैं गुरु की भगवान की फोटो | ये दीक्षित शिष्य ही जानते हैं निगुरे नही जानते कि गुरु और शिष्य के बीच में |
निगुरे का नही कोई ठिकाना, चौरासी में आना जाना | यम का बने महेमान, सुन लो चतुर सुजान, निगुरा नही रहना | भगवान शिवजी ने पार्वतीजी को वामदेवजी से दीक्षा दिलाई और भगवान राम ने वशिष्ठ जी से दीक्षा ली और भगवान कृष्ण ने सांदिपनी गुरु से दीक्षा ली | कलकत्ते की काली माता प्रकट होकर बोलती हैं कि तुम तोतापुरी गुरु से दीक्षा लो तो गदाधर पुजारी बोलते है माँ तुम तो मेरे हाथ का फुल लेती हो, प्रसाद लेती हो, प्रकट होती हो, मुझे दर्शन देती हो फिर मुझे गुरु की क्या जरूरत है ? माँ ने कहा तू भावना के बल से बुलाता है जितनी देर भावना रहती है उतनी देर मेरा विग्रह रहता है, भावना थोड़ी बदली तो माँ अंतरध्यान, बेटा रोता रहे | भावना को जो जनता है उस आत्मा का साक्षात्कार तो गुरु की कृपा के बिना नही होगा | फिर तोतापुरी गुरु से दीक्षा ली तो जो राम का आत्मा है, जो श्री कृष्ण का आत्मा है, जो शिव का आत्मा है वो ही मेरा आत्मा है | ऐसा साक्षात्कार हुआ तो फिर गुरु ने नाम दे दिया, जाओ अब तुम रामकृष्ण हुए | वो गदाधर पुजारी में से रामकृष्ण बने, नरेंद्र में से विवेकानंद बने, आसुमल में से क्या बन गए आपको पता है | ये गुरु की कृपा, दीक्षा कहीं का कहीं पहुंचा देती है और ललाट में मैंने जहां तिलक किया अभी लाल वहाँ गुरु को देखे अथवा ऊंकार को देखे, बड़े चमत्कार प्रकट होते थे | गुरु की मूर्ति से गुरु प्रकट हो जाते थे, कृष्ण प्रकट हो जाते थे, राम प्रकट हो जाते थे | अब सब के लिए हों ऐसा जरूरी नही है कई लोगों को हो जाता है | अखंडानंदजी अपने गुरु की सेवा में थे तो उनके गुरु उनको बताते थे कि के आज मैं जब फोटो के सामने ध्यान करता था तो गुरूजी प्रकट हुए , परसों श्री कृष्ण और गुरूजी आये थे फिर समा गए | शक्तियाँ विकसित होती हैं तो ऐसा होता है |
एकटक गुरु को देखते रहे या ऊंकार को १५ – २० मिनट | सुरेश आठवीं पढ़के भूल गए थे, गुरु का ध्यान करते है तो देखो कैसा विद्वान | विद्वान लोग भी सुरेश का सत्संग सुनते हैं |

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2 Comments on “सत्संग सहित सेहत के कुछ नुस्खे”

  1. Vijay Sharma Says:

    The hindi written by you in Satsang is not coming properly from the last one month.   Vijay Kumar Sharma

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