प्रभु से प्रीति करो

Ramgarh- Jammu: 2ndNov’12
मनुष्य जन्म मकान बनाना, रुपया-पैसा इकट्ठा करना, दुखी-सुखी होते होते मर जाना उस लिए नही है |  रुपया-पैसा, मकान-वकन ये तो बिलकुल छोटी चीज है | अपने दिल को बनाना है | दिल में दिलबर का ज्ञान हो, दिलबर की प्रीति हो, और दिलबर के नाते संसार में रहें | और संसार को मुसाफिर खाना समझें | और भगवान को अपना समझे | बीएस, इससे मती-गति ऊँची हो जाएगी |
दिवाली के दिन, धन तेरस के दिन लक्ष्मी पूजन इसलिए किया जाता है के हमारा ये लक्ष्मी हमको नारायण से मिलाने वाली हो | धन की शुद्धि, फिर मन की शुद्धि, भावो की शुद्धि, कर्मो की शुद्धि, शुद्ध फल की प्राप्ति | शुद्ध फल भी भगवान की प्रसन्नता के लिए, बहुतों के लिए मंगल में लगा दिया तो भगवान स्वयं अंतरात्मा, हमे अपनी प्यास देंगे इश्वर प्राप्ति की | ईश्वर प्राप्ति की प्यास हुई और सच्चे संत मिल गये तो फिर ईश्वर तो अपना आत्मा है | कठिन नही है | पानी की प्यास हो और घड़ा पास में है, पानी पिलाने वाला पास में है तो फिर क्या देर है ? ऐसा ही होता है | ईश्वर प्राप्ति कठिन नही है, दुर्लभ नही है, प्रे नही है, पराया नही है | जिसको हम कभी छोड़ नही सके वो तो ईश्वर है, और जिसको हम सदा रख न सके वो शरीर है, संसार है | बचपन नही रहा लेकिन बचपन को जानने वाला ईश्वर तो है | दुःख नही रहे, दुःख को जानने वाला तो है | सुख नही रहे, सुख को जानने वाला तो है | हमारा अंतरात्मा ही ईश्वर है | एक-एक शरीर में है तो आत्मा बोलते हैं, सर्वत्र है तो परमात्मा है | एक घड़े में है तो घटाकाश है | घड़े के कारण घटाकाश बाकि तो महाकाश | ऐसे ही शरीर के कारण आत्मा नही तो परमात्मा ही है | परमात्मा कहीं बैठके दुनिया बनाते है इस चक्कर में नही आना | हमारी आत्मा का नाम ही परमात्मा है |
धरती पे इतने मनुष्य नही है जितने बक्टेरिया है | बक्टेरिया किसने बनाये, हमने बनाये | ५००-६०० करोड़ मनुष्य है न उससे भी ज्यादा हमारे शरीर में जीव हैं | जीवो का पालन भी हमारे शरीर में ही होता है | मरते भी हमारे शरीर में है | तो उत्पत्ति होती है तो हम ब्रह्माजी, पालन होता है तो हमारा आत्मा विष्णु, संहार होता है तो हमारा आत्मा महेश्वर | शरीर जल जाये तभी हम रहते है | साक्षात् परब्रह्म हैं | गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवों महेश्वरा, गुरु साक्षात परब्रह्मा, तसमई श्री गुरुवे नमह | ऐसा नही समझना भगवान कहीं बैठके दुनिया चला रहे हैं | ये करो, ये नही करो, ऐसा नही | वो ही अंतरात्मा है | अच्छे काम करते तो सद्बुद्धि देते, प्रसन्नता देते, बल देते | गडबड करते तो उलटी बुद्धि करके कहीं फँसा देते है, दंड देते हैं | अच्छे काम करते तो हेलिकॉप्टर में भी रक्षा हो जाती है, नही तो लोग चलते-चलते गिरते हैं और मर जाते हैं | बैठे-बैठे कुर्सी पे हार्ट-अटैक , छु | यहाँ तो हेलिकॉप्टर अटैक तभी भी कुछ नही | ये अपना आत्मा है | कर्म का नियामक, कर्म का प्रेरक, कर्म का फलदाता, परमेश्वर हमारा आत्मा है | अच्छा काम करके जाओ, बापू का फोटो प्रसन्नता देता है | कुछ गडबड करके जाओ फिर देखो बापू के फोटो के आगे तो वही आँखे, वही फोटो, लेकिन लगेगा के आज बापूजी जरा नाराज हैं | भगवान और संत के चित्र से भी बहुत प्रेरणा मिलती है |
ओमकार मन्त्र पेट की तकलीफों को भगा देता है, दिमाग की कमजोरियों को भगा देता है | लीवर की गडबड को भगा देता है | पापों को भगा कर भगवान स्वयं अमर आनंद को हमारे हृदय में भर देते हैं | अभी कीर्तन करेंगे आपको आनंद आएगा | ज्यादा ताली नही, शांत, कम महेनत में ज्यादा शांति | दये नाक से स्वास लो ॐ भरो रोको ॐ जपो फिर बाये से छोड़ो फिर दाये से | ऐसे ५ बार कर लो | दमा मिटाने की दवा अलोपेथी में नही है, टी.बी. का इलाज भी हमारे वैद्यो को बताया है | १ रुपया भी खर्च नही होगा | आरोग्य निधि पुस्तक में भी लिखा हुआ है |
ज्यादा चिलान्ना, ज्यादा शोर करना प्राण शक्ति कम होती है और आयुष कम भी होती थी | जो कम बोलते हैं, सार गर्भित बोलते हैं, उनकी वाणी में प्रभाव होता है | जो ज्यादा बोलते हैं, लम्बा बोलते हैं, वो झूठ भी बोलते हैं | और प्रभावहिन् भी होता है | रामजी सारगर्भित बोलते हैं, प्रसंग उचित बोलते थे | आप अमानी रहे दुसरो को मान दे ऐसा बोलते थे | वो आदमी सफल होता है | जो अपना हेकड़ी बघारते हुए बोलता है उसकी वाणी प्रभावहीन होती है | जो भगवन को अपना और अपने को भगवान का मानता है, भगवान का जप, ध्यान करता है उसके जीवन में नित्य उत्सव रहता है | नित्य श्री रहती है |
श्री माना सम्पदा | रुपया-पैसा भी सम्पदा है, शांति भी सम्पदा है | लोगों का ताल-मेल अपने साथ ये भी सम्पदा है | और सुख-दुःख में सम रहना ये बड़ी भारी सम्पदा है | तो जो भगवान और गुरु का आश्रय लेते हैं न, उनके जीवन में नित्य उत्सव रहता है | नित्य श्री रहती है | असुर नित्य मंगल रहता है | नित्य उत्सव भवे ते शाम, नित्य श्री नित्य मंगलम, ते शाम हृदयस्त भगवान, मंगलाय तनो हरी | मंगलाय तनो हरी का थोडा कीर्तन करो | मन में करते जाओ | ॐ…..हरी ॐ…..श्यामा ॐ…….| कीर्तन से पहले बच्चो को सिखा दो ये करना | इससे बुद्धि विकसित होती है और आसन पर बैठो | आसन के बिना या नंगे पैर नही घूमना चाहिए | ऐसे बैठे के एर्थिंग न मिले | अब दोनों कानो में ऊँगली डाल कर घर स्वास ले और ओमका का जप कंठ से करें | ॐ…… | १० बार ऐसे प्राणायाम कर लो |
Advertisements
Explore posts in the same categories: Uncategorized

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s


%d bloggers like this: