आधिदैविक जगत कि शक्तियाँ

Kootah – 1st Nov’12
जप करने से रजोगुण, तमोगुण नाश हो जायेगा | सात्विकता और प्रसन्नता बढ़ेगी | और सपने में भगवान के गुरु के, देवी,देवताओं के दर्शन होने लगे तो समझ लेना भले हमने २००० जप किया, २०० किया, लेकिन १ करोड़ हो गया तभी सपने में दर्शन हो रहे हैं | अगर २ करोड़ जप हो जाता है | तुमने तो २००० जप किया फिर कभी ७००० किया तो २ करोड़ हो गया | अच्छे से पर्व के दिन | तो जन्म कुंडली का दूसरा घर बदल जाता है जिस्ज्को धन स्थान बोलते हैं | जैसे आपकी छाया आपके पीछे-पीछे ऐसे आप जहाँ भी जायेंगे रोजी-रोटी खान-पीन, रुपया-पैसा आपके लिए महेनत नही करनी पड़ेगी | सहेज में आएगा | मैं कहीं भी जाता हूँ, छोड़ के, फेंक के बैठ जाता था तो भी आ जाता था मेरे पास | अगर २ करोड़ जप हो जाये तो रोजी-रोटी की चिंता नही करनी पड़ेगी | खामखाँ परेशान हो रहे हैं, सर्टिफिकेट लेकर घूम रहे हैं, जप कर लो न | जैसे छाया तुहारे पीछे-पीछे आती है, पाली हुई बकरी, पाला हुआ कुत्ता, पाला हुआ प्राणी आपके पीछे-पीछे चलता है, ऐसे ही २ करोड़ जप होने से रोजी-रोटी, सम्पदा आपके पीछे-पीछे | अगर ३ गुना जप हो जाये, तो जन्मकुंडली का तीसरा घर, जिसको सहेज स्थान बोलते हैं, वो शुद्ध हो जाता है और असाध्य कार्य आपसे सध जायेंगे | कठिन काम भी आप आसानी से करने में सफल हो जाओगे | अगर ४ गुना जप हो जाता है तो जन्मकुंडली का चौथा घर जिसको सुख स्थान बोलते हैं, वो शुद्ध हो जाता है | शरीर और मन के उपर आघात नही पड़ेंगे | कितना भी कोई निंदा करे, झूठे-झूठे आरोप रखे |
झूठी-झूठी बदनामी करने के लिए करोड़ो रुपया खर्च कर दे , बापू के दिल में कभी दुःख नही होता | और उन लोगो के तो करोड़ो भी बर्बाद हुए, कई लोगो को जेल हुई | कई लोगो को बीमारियाँ हुई, कोई-कोई तो मर गये और कोई-कोई कई तो दो पैसे की भी इज्ज़त नही रही | ऐसे कई लोग जो बदनामी करने में लगे थे, पैसे लेके | विधर्मी लोग पैसे लेते थे, चेनल वालो को, अख़बार वालो को तो बापू कई निंदा करो, बापू हिंदुस्तान में एक नम्बर के ऐसे संत हैं जो भीड़ है | विदेशो में भी बापू के लाखो भक्त हैं, ऐसा सुनते हैं | तो करोड़ो रुपया खर्च किया बापू को बदनाम करने के लिए लेकिन कुछ भी नही हुआ | और हेलिकॉप्टर एक्सीडेंट में भी कुछ नही हुआ | अब सब बदनामी करने वालो का कला मुंह कर दिया, हेलिकॉप्टर ने तो |
अगर ५ गुना जप होता है, तो जन्मकुंडली का पांचवां घर, पुत्र स्थान और विद्या स्थान आपका शुद्ध होता है | अपुत्रवान को आप पुत्र और अविद्वान को ज्ञान दे सकते हैं | अगर ६ गुना जप हो जाए तो शत्रु स्थान, जन्मकुंडली का छटा घर माना जाता है | आपकी कोई निंदा करे, आपसे कोई दुश्मनी करे, आपके उपर कोई झूठे आरोप रखे, कोई भी दुश्मनी करे, आपको उस दुश्मन की परवाह नही क्योंकी आपका जप है तो जो आपसे दुश्मनी करेगा उसको कुदरत के डंडे  पड़ेंगे | संत का निंदक महा हत्यारा, संत का निंदक परमेश्वर मारा,  संत के निंदक की पूजे न आश, नानक  संत का निंदक उठ चले निराश |  संत का निंदक बघड रूप होई |  संत के निंदक को मिले सजाई | नानक संत बहवे तहराई | अगर संत की शरण में आ जाता है, और संत को जच जाये तो ऐसे पापी को माफ़ करके उनकी सद्गति कर सकता है | लेकिन संत की निंदा करके कोई सुखी रह जाये, सम्भव नही है |
अगर ७ गुना जप हो जाता है तो जन्म कुंडली का सातवाँ घर जिसको स्त्री स्थान बोलते हैं, वो शुद्ध हो जाता है | शादी नही होती हो, तो उन लोगो को उन संत के आशीर्वाद से अच्छी दम्पति, अच्छा जीवन जीने का शादी-विवाह हो जाता है | अगर ८ करोड़ जप हो जाता है,  ८ करोड़ में तुम ने तो १ हजार भी नही किया और ८ करोड़ हो गये ८ गुण फल हो रहा है, तो मृत्यु स्थान शुद्ध होता है | आप किसी जहाज में, किसी गाड़ी में, बस में, कार में बैठे हो, लेकिन जप है तो आपका एक्सीडेंट नही होगा | एक्सीडेंट हुआ तो भी आपको खरोंच तक नही आएगी | आपके साथियों की भी रक्षा होगी | ये ८ करोड़ का फल हेलिकॉप्टर के एक्सीडेंट ने प्रत्यक्ष करके दिखा दिया | अगर ९ करोड़ जप होता है तो आपका धर्म स्थान शुद्ध होता है | जिस देवता का, जिस भगवान का मन्त्र है, वो भगवान प्रकट हो जायेंगे | वार्ता करेंगे, वरदान देंगे | अगर अन्तर्यामी भगवान का साक्षात्कार करना है तो उसका भी ज्ञान जल्दी हो जायेगा | इसीलिए मन्त्र बड़ा भारी साधन है | मन्त्र मिल गया तो भटकने की जरूरत नही है बाहर के मन्दिरों में, बाहर के इधर-उधर में | अब तो जप किया और बाहर की चाबी तो पुजारी के हाथ में है और ये अन्तर्यामी का तो मन्त्र है | जो गुरु दीक्षा लेता है तो तीर्थ बोलता है अब हम तुमको क्या पवित्र करें ? ये तो गुरु दीक्षा वाला हममे नहायेगा तो हमको पवित्र करता है | देवता लोग बोलते हैं अब ये दर्शन करके पवित्र तो क्या होगा, इसके आने से हमारा माहोल पवित्र होता है | गुरु दीक्षा ऐसी भारी चीज है | भगवान कृष्ण कहते हैं, यज्ञया नाम जप यज्ञयो असमी | सभी यज्ञयो में जप यज्ञ तो मेरा ही स्वरूप है | और जप यज्ञ में फिर गुरु मन्त्र मिला है | गुरु के द्वारा मन्त्र मिला है तो वो तो बहुत प्रभावशाली होता है | तो आप मन्त्र दीक्षा के बाद अपने को अकेला मत मानना | अपने को मरकर नर्क में जाऊंगा ऐसा मत मानना |
मेरी नानी गयी नर्क में ले गये उनको यमदूत तो यमराज को डांटकर फिर जिन्दी हो गयी | फिर उनतालीस साल जी |
अभी दिवाली आएगी | दीवाली वाले दिन तिल के तेल से मालिश करके स्नान करना, आरोग्य अच्छा होगा| और कार्तिक का महिना चल रहा है | सुबह सूरज उगने से पहले स्नान करने को, मासा नाम कार्तिक मासों, कार्तिक के समान कोई मास नही | गंगाजी के समान कोई तीर्थ नही | वेदों के समान कोई शास्त्र नही | और सतयुग के समान कोई युग नही | और दिनों में सूरज उगने के बाद मालिश करनी चाहिए | लेकिन दीवाली के दिन जल्दी | शौचालय में जाने के बाद मालिश करनी चाहिए | और खास बात है दीवाली की रात को कंठ से ॐ का उच्चारण, सोते समय ॐ आनंद, ऐसा करते-करते सो जाना | आनंद स्वरूप इश्वर में शांति मिलेगी, नींद भी अच्छी आएगी | तो रात को जैसे प्रसन्न होके सोओगे तो प्रभात तो उठोगे तो प्रसन्न होंगे |
तो युधिष्ठर महाराज, धर्म रजा को, भीष्म पितामह शैया पर पड़े थे, व्यास जी ने भी कहा के जो वर्ष के प्रथम दिन हर्ष से, उल्लास से, जिसका वर्ष का प्रथम दिन जाता है, वर्ष भर उसका अच्छा जायेगा | तो १३ से १५ तारिक तक को सम्भाल लेना | नर्क चतुर्थी १३ तारिक को है, दीवाली, तो १४ तारिक नूतन वर्ष | तो वर्ष का प्रथम दिन प्रभात को प्रसन्नता से जाये | किसी को उलाहना मत देना |
और वर्ष के प्रथम दिन गए के घी का दर्शन, हिरा, संत, भगवान का दर्शन, भगवान और संत की छवि का ही दर्शन होता है | सूर्य नारायण का आँख बंद करके दर्शन, चन्द्र का मानसिक दर्शन, बछड़े सहित दूध पिलाने वाली गाये का दर्शन शुभ माना जाता है | इस प्रकार से कई सात्विक, अच्छी चीजो का दर्शन, सुहागन, सदाचारी स्त्री का दर्शन, भक्त साधक का दर्शन, ये सब नूतन वर्ष के दिन हितकारी माने जाते हैं |
हरा पेठा, कच्चे आम भूल के भी नही खाना चाहिए | जो अमचुर काम में लाते हैं, उससे नींबू काम में लाओ | अमचुर नुकसान करता है | भारी चीजे हजम खराब करती हैं |
१५ दिन के बच्चे को चौथाई गोली पानी में घोल बना के पिला दे | दूध से सवा घंटा पहले | बच्चे को बीमारी कोई नही जल्दी आये | और बच्चों को साल में तिन बार बीमारियाँ पकडती हैं | क्योंकी बाल्य काल में कफ की प्रधानता होती है | तो ऋतू परिवर्तन होते ही कफजन्य रोगों के कर्ण बच्चे बिचारे बीमार पड़ते हैं और डॉक्टर बोलते हैं हम बच्चों के डॉक्टर हैं हमारी सीजन चलती है | उनकी सीजन फ़ैल कर दो | आप ५० ग्राम शहद, २० ग्राम लहसुन कूट के उसकी चटनी बना के रखो | जब बच्चे को बलगम, खाँसी, बुखार, ऐसा-वेसा कुछ गडबड लगे, १-२ ग्राम जैसा बच्चा ५-७ साल का है तो ४-५ ग्राम, बड़ा आदमी हो तो ८-१० ग्राम बस | वो चाटे तो खाँसी, कफ सबंधी बीमारियाँ ठीक हो जाएँगी | अथवा तो संजीवनी गोली | बच्चे को चौथाई, एकदम जन्म है, १५ दिन का है, ६ महीने का है तो आधी गोली, २ साल से बड़ा हो गया तो १ गोली दे दो | बच्चे मजबूत होंगे | घर स्वास लेकर कंठ से दो बार ॐ… | फिर होंठो से ॐ…… तुम दुर्लभ नही थे अब पता चला ॐ….. तुम मेरे हो ॐ……. | ॐ नामो भगवते वासुदेवाय ……… | कंठ से ॐ….. यशोदा को कृष्ण ने ये साधना बताई और यशोदा उसी समय आनंदित हुई | ॐ….. |
जो भगवान को यश दे उसका नाम यशोदा और बुद्धि को जो जानता है उसका नाम कृष्ण है | ॐ……. | नित्य उत्सव भवे ते शाम, नित्य श्री, नित्य मंगलम | उनके जीवन में नित्य उत्सव रहता है | नित्य श्री माना सम्पदा | रुपया-पैसा भी सम्पदा है, स्वास्थ भी सम्पदा है, यश भी सम्पदा है और सुख-दुःख में सम रहना ये तो परम सम्पदा है | तो जो भगवान, संतो में प्रीति करते हैं उनके जीवन में नित्य उत्सव रहता है | नित्य श्री माना सम्पदा रहती है | जैसा अमृत तैसी विष खाती, जैसा मान तैसा अपमाना, हर्ष-शोक जाके नही, वैरी-मीत समान कह नानका सुन रे मना मुक्त ताहि ते जान | वो मुक्त आत्मा हो जाता है ऐसी भगवत श्री होती है | और नित्य-नित्य मंगल रहता है जिनके हृदय में भगवान के लिए ज्ञान, बुद्धि में ज्ञान, मन में भगवान की प्रीति, आचरण में सद्भाव, संयम, आचरण में धर्म बस होगया |
नित्य उत्सव भवे ते शाम, नित्य श्री, नित्य मंगलम | ये शाम हृद्य्स्त भगवान, मंगले तनोहरी | उनके जीवन में नित्य उत्सव रहता है, नित्य श्री रहती है | गरीब होने के बाद भी उनके हृदय  की श्री उनको बहुत प्रसन्न रखती है | धन की कमी होने के बाद भी मन की श्री होने के कारण जैसे शबरी के पास धन की कमी थी फिर भी श्री थी | श्री रामजी झूठे बेर खाते हैं | रावण के पास सोने की लंका थी, उनके पास श्री थी, तो रामजी ने तीरों का निशाना बनाया | रुपय हो चाहे न हों श्री तो श्री है |
अखानंदजी महाराज के द्वारा मैंने ये बात सुनी, तिन साधू थे | यात्रा कर रहे थे | यमुना किनारे | उसमें तीसरा साधू जो था वो बुढा था, वृद्ध था | उसने कहा भई हम इस गाव के बाहर इस मन्दिर में आसन लगाके यहीं रहेंगे | तुम तो जवान हो, तुम भले जाओ | तो दो जवान साधू आगे गये | चलते-चलते संध्या हो गयी सोचा अब बरसाना आ रहा है | राधा रानी का गावं  | क्या करेंगे ? मांगेंगे कहाँ ? बोले मांगना कहाँ अपन तो राधा रानी के महेमन हैं खिलाएगी तो खा लेंगे | नही तो मन्दिर में आरती के समय कहीं कुछ प्रसाद मिलेगा वो खा के पानी पिलेंगे | साधुओ ने मजाक-मजाक में कहा | वो साधू पहुंच गये बरसाना और बरसाना में तो आरती हुई, मन्दिर में उत्सव भी हुआ था | साधू बाबा बोले मांगेगें तो नही अपने तो राधा रानी के महेमान है | ऐसे करके साधू सो गये | तो रात के ११ बजे राधा रानी के पुजारी को राधा रानी ने ऐसा जगाया, बोले महेमान हमारे भूखे है, तू सो रहा है | अरे भई महेमान कौन है, दो साधू, राधा रानी का महेमान कौन है ? १२ साल की वो राधा रानी उसको अपना लिया साधू ने | पुजारी के तो होश हवास उड़ गये, ये साधू उठे | सोये हुए साधुओ को उठाया के तुमने, तुम राधा रानी के महेमान हो क्या ? बोले नही हम तो ऐसे ही | बोले नही आप बैठो | हाथ-पैर धोये, पत्तले लाये और अच्छे से अच्छा जो राधा रानी के मन्दिर का प्रसाद था, उत्सव का प्रसाद था जो भी था, लड्डू, रसगुल्ले, खीर-वीर बस टनाटन पक्की रसोई जिमाई | जिमके तुरंत नही सोना चाहिए | वो साधू थोडा टहलके बोले राधा रानी हमने तो मजाक में कहा था तुमने स्च्मुश में हमको महेमान बना लिया माँ | हे राधे मैया | बड़ा संतुष्ट और शांत | साधू कई बड़े अच्छे होते हैं | साधू राधा जी का चिंत्तन करते-करते सो गये | तो दोनों साधुओ को एक जैसा सपना आया | वो १२ साल कई राधा रानी बोलती है साधू बाबा भोजन तो कर लिया आपने, तृप्त तो हो गये | भूख तो मीट गयी | बोले हाँ | भोजन अच्छा तो रहा | बोले हाँ | भोजन, जल आपको सुखद लगे | बोले हाँ | अब कोई और आवश्यकता है क्या ? बोले नही-नही मैया | बोले देखो वो पुजारी डरा-डरा तुमको भोजन तो कराया लेकिन मेरा पण-बीड़े का प्रसाद देना भूल गया | लो ये मैं पण-बीड़ा देती हूँ आपको | ऐसा कहकर उसने सिरहाने पर रखा | सपने में देख रहे हैं के उसने सिरहाने पर रखा | साध ने देखा के राधा रानी तुम सिरहाने पण-बीड़ा रख रही हो ऐसा करके उनकी आँख खुल गयी | देखा तो सच मुच में पण-बीड़ा सिरहाने पड़ा है | दोनों साधुओ के | राधे-राधे श्याम मिला दे | राधा उल्टा दो तो धारा |
भगवान अन्तर्यामी न जाने क्या-क्या रूप ले लेते हैं | ऐसे ही दुसरे हमारे मित्र संत थे | वो जब साधू बने तो यात्रा करते हुए वो नर्मदा किनारे गये | वो थे योगी महाराज | योगी महाराज ने चुन्नी  लाल महाराज को कहा जाओ नर्मदाजी का जल ले आओ | चुन्नीलाल महाराजजी को मैं अच्छी तरह से जनता हूँ | तो जल ले आये | तो योगी महाराज ने कहा चप्पल पहन के जल लेके आये | एसा जल हम नही लेते | चप्पल उतारी वो जल डोल दिया | नंगे पेर गये | और आश्रम तो इस किनारे और उस किनारे पानी की धार बह रही थी | आधा किलोमीटर चलना पड़े | नंगे पेर बालू पर गये | नंगे पेर पानी ले आये | तो योगी महाराज ने कहा पानी किनारे से भरा या अंदर से भर के आये | बोले बाबा किनारे से भर के आये | बोले धत तेरे की ! किनारे में तो लोग कपड़े धोते हैं, हाथ पेर धोते हैं, स्नान करते हैं | एसा पानी लाया | जा डोल दे | फिर तीसरी, चौथी बार पानी भर के वो चुन्नीलाल महाराज आये तो बोले भूख तो लगी होगी बेटा बोले हाँ | तो नर्बदा जी की तरफ देखा | और थोड़ी देर शांत हो गये और बातो में | एक कन्या आई | चांदी का थाल और व्यंजन, नर्बदा जी कन्या के रूप में थाल भर के ले आई | दोनों ने भोजन किया, वो चांदी का थल छोड़ के चली गयी | शाम हुई तो वो कन्या दुसरे लिबास में आई | जैसे अहीर की कन्या का लिबास और अहीर उचित भोजन, जो अहीर लोग खाते हैं, कड़ी, बाजरे की रोटी, खिचड़ी, खमं, घेंस, कांसे की थाली में देके चली गयी | खा-पी के रात को सोये | सुभ योगी महाराज ने कहा चुन्नी लाल चलो | सामान बाँधा | तो महाराज ने पूछा को चांदी का थाल और कांसे की थाली कहाँ है ? बोले सामान में बाँध दिया | अरे बोले तेरे बाप का है क्या ? वो तो नर्मदा माई बेचारी दे गयी अपनी भूख मिटा ने को | थल अपन कैसे ले चलेंगे, चलो नर्मदाजी को वापस दे आये | नर्बदा किनारे गये बोले मैया धन्यवाद भोजन कराया, तेरे थाल लेले | थाल डाल दिए नर्मदाजी में |
ये स्थूल जगत है | गहराई में शुक्ष्म जगत है | आदि देवी | और उसकी गहराई में अध्यात्मिक जगत है | बस आदि भौतिक मान लो, इंजिन आदि दैविक, और ड्राइवर की चेतना अध्यात्म | अकेला ड्राइवर इतने पेसेंजर नही उठेगा | अकेली इंजिन भी नही भागेगी | अकेली बस भी नही भागेगी | तीनो के मेल से बस का काम | एसे ही तीनो से श्रृष्टि का ये काम चलता है | आदि दैविक जगत में कितनी शक्तियाँ हैं आप में भी हैं | एसे ही लक्ष्मण झुला के २२ किलोमीटर उपर पुरुषोतम गिरी महाराज जी रहते थे | बाबा का जन्म जयंती मनाने की तैयारी चल रही थी | रात को माल पूड़े बनाने की शुरुवात हुई, तो कुछ समय में घी खत्म हुआ |वे भगत बाबाजी के पास गये और बोले के महाराज घी खत्म है और आज शनिवार की रात है तो कल मार्किट बंद होगी तो क्या करे ? बाबा ने कहा कोई बात नही कितना चाहिए | तो भगतो ने कहा २० टीन तो लग जायेंगे | वे बोले कोई बात नही, जाओ गंगा मैया से ले आओ फिर बाज़ार जब खुले तो खरीद के वापस कर देना | गंगाजी से तो २० टीन पानी भरा और कड़ाई में डाला तो माला पूड़े तले गये, पकोड़े तले गये, पुरियां, भुजिया सब बन गये | अगले दिन भंडारा हुआ | जिन्होंने वो भंडारा खाया उस में से एक व्यक्ति अभी जिन्दा था | उनसे मेरी बात हुई तो बोले हाँ बाबा हम ने भी वहां भंडारा खाया | उस दिन तो रविवार था और दुकाने सब बंद थी तो सोमवार को तेल दुकान से २५ टीन लाया गया और गंगाजी में डाला गया | २० टीन गंगाजी को अर्पण क्र दिया, पानी बन गया | आगरा में शाहगंज है | मेरे गुरूजी, लिलाशःजी बैठे थे | एक गरीब आदमी आया | उसने अपने दुखड़े रोये | आँखे खराब हैं,…  | बाबा ने कहा क्या है, तू चिंता मत कर | वो आंकड़े के पत्ते हैं न जिसके फुल हनुमानजी को चढाते हैं | वो तोड़ेगा तो दूध निकलेगा | वो दूध आँखों में डाल दे | ठीक हो जायेगा | आप लोग नही डालना, एसिड है, पाइजन है, जहर है | उसने जाके डाला और आँखे ठीक हो गयी | मिठाई की दुकान पे गया और मिठाई लेकर जय स्वामी लीलाशाह ले भाई प्रसाद | बोले मेरी दुकान की मिठाई मेरे को प्रसाद क्या देता है ? बोले देख आँखे ठीक हो गयी, डॉक्टरो ने कहा ठीक नही होगी अब | लेकिन वो लीलाशाह साईं ने बताया इलाज, वो आंकड़े के पत्ते का दूध मैंने आँखों में डाला अब तो अच्छी तरह देख सकता हूँ | दुकान वाले ने भी अपनी आँख में डाला तो वो अँधा हो गया | तो इस में आदि दैविक शक्ति काम करती है | गुरूजी मिटटी भी दे दे तो उस में आदि दैविक शक्तियाँ होती है | ये बहुत छोटी बाते हैं | तुम भगवन को पा सकते हो | अपना मंगल क्र लो बस |
Advertisements
Explore posts in the same categories: Pujya Bapuji

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s


%d bloggers like this: