विजयादशमी पर्व महिमा

Pujya Sant Shri Asharam Bapuji Bhopal – 24th Oct 2012

ॐ…..
सर्वदा सर्वकालेषु नास्ति तेषां अमंगलं |
एषां हृदयस्थ भगवान, मंगलाय तनो हरि ||
नित्य उत्सव भवेतेषां, नित्य श्री नित्य मंगलं |
एषां हृदयस्थ भगवान, मंगलाय तनो हरि ||

सर्वदा सर्व कालेषु, सदा सब काल में उनके जीवन में अमंगल है ही नही | चाहे हेलिकॉप्टर चूर-चूर हो जाये तो भी अमंगल नही है | नास्ति तेषां अमंगलं | जीभ तालू में लगाकर मन में दोहराओ तो याद रह जायेगा | इसको पक्का करो | सर्वदा सर्व कालेषु, नास्ति तेषां अमंगलं, एषां हृदयस्थ भगवान, मंगलाय तनो हरि || बोलते हैं सर्वदा सर्व कालेषु –  सदा सब समय में, नास्ति ते न शाम अमंगलम, उनके लिए कहीं भी अमंगल, सदा सब जगह, उनके लिए अमंगल नही है | चाहे हेलीकॉप्टर चूर- चूर हो जाये फिर भी अमंगल नही होता | चाहे कुप्रचार वाले उलटे होकर टंग जाये तो भी अमंगल नही होता | चाहे कोई भयंकर प्रारब्ध वेग आये तो भी अमंगल नही होता | क्यों ? एषां हृदयस्त भगवान, जिनके हृदय में भगवान की सत्ता, भगवान की महत्ता और भगवान को अपना मानने की सतबुद्धि मिली है, सत्संग मिला है, उनके हृदय में हरि, जो हर समय है, हर स्थान में है, हर एक के हृदय में है, ज्यों के त्यों भर-पूर हैं | हरि का अर्थ ही यही है – जो हर समय हो, हर स्थान में हैं, हर देश में हो, हर काल में हो, हर वस्तु में हो | सर्वदा सर्वकाल में उनके लिए अमंगल नही होता जिनके हृदय में भगवान हरि की प्रीति, हरि का विश्वास, हरि को अपना, अपने को हरि का जो मानते हैं उनका अमंगल हरि कैसे करने देंगे ? हरि तो हर जगह है न !
हेलिकॉप्टर के एक्सीडेंट के समय भी तो हरि थे वहाँ ! नही थे ? बड़ा चमत्कार ! १० सेकंड में हादसा और एक चमत्कार | हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया कोई बचे नही, बचे तो अधमुए | बहुत सारे मरे, कुछ बचे तो अधमुए | साल भर- २ साल भर बेड रेस्ट | लेकिन यहाँ हेलिकॉप्टर हो गया चूरे-चूरे बापू और उनके भक्त बाल-बाल बच गये | हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया लेकिन किसी को खरोंच नही आयी | पता है उसमें कौन थे स्वर स्वंम आसाराम बापू – न्यूज़ आजतक | नारायण |
आज दशहरे का दिन है | दशहरे के दिन बिना महूर्त के महूर्त | वर्ष के साढ़े तीन महूर्त, बिना महूर्त के महूर्त और दशहरे के दिन श्री रामचन्द्रजी लौटे | दशहरे के दिन की अपनी महिमा है | दस इन्द्रियों में रत जीवात्मा भटक रहा है | दीनता पर, आसुरी वृत्यों पर राम की विजय का दिवस विजयादशमी | भटकने वाले मन, इन्द्रियों पर इस जीवात्मा की विजय का दिवस- विजयादशमी | 
आप दाये नाक से श्वास लो और ॐ स्वरूप हरि को भरो और रोको, मन में जपो ॐ परमात्मने नम:, ॐ हरहे नम: ॐ हरहे नम: | बाये से श्वास छोड़ दो | फिर बाये से ॐ स्वरूप हरी को भरो रोको ॐ……फिर दाये से छोड़ो | दोनो नथुनों से श्वास लो मेरे हृदय में मंगलाय तनो हरि, मैं हरि का हूँ, हरि मेरे हैं | अब सर्वदा सर्व काल में हमारा अमंगल नही होगा | क्योंकि मंगलाय हरि का मैं सुमिरण करता हूँ, दशहरे के दिन इस साधना का उद्धघाटन  कर रहा हूँ | बे मुहर्त के मुहर्त |  ॐ परमात्मने नम:, ॐ हरहे नम: ॐ हरहे नम: |  हरि ॐ शांति ….., होंठ बंद रखना कंठ से ॐ का उच्चारण करना मेरे साथ | फिर से दोनों नथुनों से श्वास लो…… हरि मेरे से दूर नही, दुर्लभ नही, पराये भी नही, मेरे हो न | आद सत, सृष्टि के आदि में जो सत थे, जुगात सत, जुगों से जो सत थे, है भी सत, अभी भी जो सत हैं, अंतरात्मा देव के रूप में हैं, नानिक होसी भी सत, शरीर तो मर जायेगा, मिथ्या है, दुःख भी मर जायेगा, मिथ्या है, सुख भी मर जायेगा, मिथ्या है लेकिन उसको जानने वाला मेरा आत्मा, मेरा हरि सत्य है, मैं उसकी शरण हूँ, मैं उनका हूँ, वो मेरे हैं | फिर से श्वास लो, दोनों कानो में ऊँगली डालो कंठ से बोलना है | इससे स्मृति तो बढ़ेगी, उस अंतरात्मा से

सबंध हो जायेगा | ॐ…… खूब प्यार से , दशहरे के दिन विशेष दुलारे से

नाता पक्का करो | प्रभु मेरे ॐ……… | मन पवित्र हो रहा है, याद शक्ति बढ़ेगी, बुढ़ापे में भी याद शक्ति ठीक रहती है | ॐ…… | मधुर शांति, गहरी शांति, हरि ॐ…….. मैं मंगल स्वरूप हरि की शांति में, हरि की स्मृति में | ॐ…… | पावन से पावन, मंगल से मंगल मधुर से मधुर | मधुरं मधुरे भयोपी, मंगले भयोपी  मंगलं, पावनम पावने भयोपी हरि नाम व केवलम | जो मधुर से  मधुर है, मंगल से मंगल है, पावन से पावन है, वो हरि नाम,

हरि ॐ की ऊँची साधना, ऊँची उपासना करके मैं आत्म शांति पाउँगा | भजन, कीर्तन गाना ये सब ठीक है लेकिन उससे हजार गुना ज्यादा हरि में शांत होना है | हरि को अपना मानना है, अपने को हरि का मानना है | हरि ॐ……. |
आज विजयादशमी है | अपनी सीमा से शत्रु की सीमा में प्रवेश पाकर उसपर विजय पाने का दिवस है | श्री रामचन्द्रजी ने रावण पर विजय पाया था | शिवाजी ने औरंज़ेब पर विजय पाया था आज के दिन |
राजा रघु ने वस्तुत ऋषि के शिष्य कौष को १४ करोड़ स्वर्ण अशर्फियाँ चाहिए थी | राजा रघु ने कुबेर भंडारी को कहा, ये शिष्य अपने गुरु को १४ करोड़ मोहरे देना चाहता है और मेरे पास इसने ये अर्जी रखी है | मैं क्षत्रिय हूँ, तुमसे भीख नही मांगता हूँ | १४ करोड़ मोहरे तुम देते हो तो ठीक है नही तो युद्ध के लिए तैयार हो मेरा बाण आ रहा है | रघु राजा की धमकी से कौशाध्यक्ष, वस्तुत के शिष्य और उसकी प्रार्थना से, प्रार्थना तो क्या कहो, उसकी बात से तैयार हो गये के मैं तुझे १४ करोड़ मोहरे गुरु के चरणों में रखने के लिए दिलाता हूँ | धन-सम्पति के विशेष कौशाध्यक्ष कुबेर भंडारी पर उन्होंने चढाई करने का इरादा बना कर उनको कहा के मुझे १४ करोड़ इस ब्राह्मण को अपने गुरूजी के चरणों में रखने के लिए १४ करोड़ सोना मोहर चाहिए | अगर तुम देते हो तो ठीक है नही तो आज सीमा उलंघन | देखो रघु राजा के तीर का चमत्कार | कुबेर भंडारी ने कहा नही राजन मैं अभी-अभी मोहरों की वर्षा कर देता हूँ | शमी वृक्ष पर मोहरे आयेंगे आप ले लेना | और शमी वृक्ष पर मोहरे आयी | लेकिन मोहरे १४ हजार करोड़ से भी ज्यादा आयी |
विजयादशमी के दिन किसी भी वस्तु, परिस्थिति पर नियन्त्रण करने का संकल्प जल्दी फलता है | इन्द्रियों पर विजय पाने का पर्व | बहिर मुख से अंतर मुख होने का पर्व | अन्याय पर न्याय की जीत का पर्व | तमोगुण पर दैवी शक्ति सत्त्वगुण की विजय का पर्व | दुष्कर्मो पर सत्कर्मो के प्रभाव का पर्व, भोग के उपर संयम, योग का पर्व और आसुरी वृति, जैसे नवरात्रों में माँ ने असुरो को मारा आदि….. तो आसुरी वृति पर देवत्व वृति, पशुता पर मानवता का विजय और जीव पर शिव भाव का विजय ये विजयादशमी है | सब मानते हैं के हम जीव हैं, हम पापी हैं, हम पुण्यात्मा हैं, हम दुखी हैं, हम सुखी हैं | ये मान्यता जीवत्व की थी लेकिन सुख, दुःख और मानताएं आ-आकर बदल जाती हैं लेकिन उसको जो जनता है वो शिव भी तो मेरा आत्मा है वो अभी भी तो मेरा आत्मा है | मैं केवल शुद्ध जीव नही | हरि का शाश्वत अंश हूँ | मैं फलानी जाति का, फलाने मजहब का, इस आकृति का केवल शरीर धारी नही हूँ | शरीर मरने के बाद भी रहने वाला अमर आत्मा हरि का सनातन अंश हूँ | हरि ॐ…… ॐ….. कीर्तन | अब मन में ताली नही | चंचलता पर, एकाग्रता पर विजय | बहिर मुखता पर अंतर मुखता होने का विजय, तुच्छ विकारो पर शुद्ध समता का विजय | दैत्यों पर देवों का विजय | दुखो पर दुखहारी हरि के नाम का विजय, ओमकार का विजय | विजयादशमी ॐ……  गहरी शांति …हरि ॐ…… |
विजयादशमी के बाद एकादशी आएगी कल | एकादशी की रात, चन्द्रमा के किरणों में विशेष प्रभाव होता है | दशहरे के बाद की एकादशी | और एकादशी नही | दशहरे के बाद के जो ४ दिन हैं पूर्णिमा तक | तो चन्द्रमा में विशेष – सुगंधिम, पुष्टिवर्धनम तो है | लेकिन औषधि पुष्ट के साथ-साथ प्रसन्नता की और आरोग्यता की वृद्धि करने वाला आभामंडल बनता है | कल एकादशी है, हो सके तो माईयाँ सुई में धागा पिरोओ | बारस को, तेरस को, चौदस को, पूर्णिमा को | ये चार दिन चन्द्रमा की चांदनी को देखना हितकारी है | चन्द्रमा की चांदनी गर्भणि स्त्री के नाभि पे पड़े तो बच्चे विशेष प्रभावशाली, प्रसन्न होंगे |
शरद पूनम की रात २९ तारिक तक मथुरा में लाखो लोग बैठ सके ऐसी व्यवस्था है | वहाँ होगा २६ से सत्संग | २८ तारिक रात को हम शरद पूनम की खीर बनायेंगे | इस बार खीर में कुछ और बूटी, वनस्पतियाँ, डालने की  भी अटकल मिल गयी है एक पुराने व्यक्ति के द्वारा | हर साल तो हम खीर बनाते थे, भक्त खाते थे, हम भी खाते थे | लेकिन इस साल खीर में विदारीकन्द, अश्वग्न्धा, दालचीनी और दूसरी कुछ ऐसी वस्तुएं डालेंगे | खीर बनाते समय उसमें चाँदी के बर्तन हैं हमारे पास वो भी डालेंगे | सोने का छोटा-मोटा जो भी कुछ होगा धो-धा के वो भी डालेंगे | और वो खीर बनायेंगे ८ बजे के करीब-करीब बन जाएगी | और वो खीर ११ बजे तक के चन्द्रमा की किरणों से पुष्ट होगा | २९ तारिक रात को हम भोजन नही बनायेगे खीर ही बनवाएँगे |
आज दशहरे का त्यौहार है, सबको दशहरे की बधाई | विजयादशमी विजय का त्यौहार है | गंदी आदतों पे विजय पाने का निर्णय करके लम्बा श्वास लो और जो अपने में कमी है, उस कमी को मन के सामने आगे रखो | ॐ, ॐ की गदा मार के मैंने सीमा उलंघन किया | इसकी सीमा में मैं फँसा था | आज के बाद द्वेष को भगाऊंगा,चटोरेपन को भगाऊंगा, अलग से थाली बनाने की छोटी मानसिकता को भागाउंगा | जितना अंदर से बड़ा होता है उतना बड़े दिल से रहने की अक्ल विकसित होती है | जो भी अपने में कमी है | दूसरा आदमी अपनी कमी नही समझता, हम अपनी कमी को जितना समझते हैं | भगवान कहते है, दस इन्द्रियों पर विजय पाना चाहिए | ब्रह्माजी उपदेश करे, चाहे साक्षात् मैं ही उपदेश करूँ, लेकिन जबतक आदमी अपनी इन्द्रियों को संयत करके अथवा मेरी शांति नही पता तब तक उसके दुखो का अंत नही होगा | लाचारियों का अंत नही होता है, भय का अंत नही होता है, शोक का अंत नही होता है, राग का अंत नही होता है, चाहे कपड़े कैसे भी पहन ले, द्वेष का अंत नही होता है जबतक मुझ अनंत को आत्मा मानकर विश्रांति नही पाता | तो चंचलता पर विश्रांति पाने का दिन, आज संकल्प करो के अब विजयादशमी के दिन हम रोज़ थोड़ी देर शांत होंगे | कैसी भी परिस्थिति आ जाये, हम शांत होकर निर्णय करेंगे | उतावले होकर निर्णय नही करेंगे | उतावले सो बावले | धीरा सो गम्भीरा | कैसा भी दुःख आएगा लेकिन उसमें हम दब्बू नही होंगे | कैसा भी सुख आएगा हम उसमें भोगी नही बनेंगे, संयमी रहेंगे | कैसी भी निंदा आएगी, धैर्य रखेंगे | कैसी भी वाह-वाही आएगी, इश्वर की लीला मानेंगे | अब नासमझी पर विजयदशमी का जय | ॐ….
तो शरद पूनम की रात को आप लोगो को भी औषधियों का मिश्रण मिले, बाज़ार से लोगे, तो हो सकता है कहीं गड़-बड़ी हो जाये | कुछ ऐसी औषधि है के १०० किलो दूध की खीर बनती है तो उसमें २५ ग्राम वो औषधि डालना है | तो मैंने अहमदाबाद के संचालको को बोल दिया के ५० किलो की खीर बनती है गुरुकुलो में तो भईया १०० किलो की तो उनको उतने पैकेट भेजो | ५ किलो में जितनी औषधि डालनी है उसका पैकेट बनाओ | थोडा केसर होगा और पौष्टिक गोलियाँ होंगी | जो अपनी आयुर्वेदिक पौष्टिक गोलियाँ मिलती हैं | तो सभी आश्रमों में ये जल्दी से जल्दी उपलब्ध कराएँ | ज्यों रात होती है त्यों जठरा मंद होती है | तो शरद पूनम की रात को खीर खानी है इसलिए भोजन मत खाना | १०-११ बजे तक खीर पुष्ट हो जाये फिर खाना | भगवान को भोग लगाकर, एक-आध चम्मच मेरी तरफ भी कर देना खीर खाना सिखाया मैंने लाखो-करोड़ो लोगों को थोडा-थोडा हमारे और भी आएगा | मुंह अपना या अपने बच्चे का खोलना भाव बापू का करना हो गया काम | भगवान और संत तो भाव ग्राही होते हैं |
हरि ॐ……

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One Comment on “विजयादशमी पर्व महिमा”


  1. After reading this sat-sang I have made my mind to leave vituperation of others.
    thanks world press


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