श्राद्ध महिमा

परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापूजी का सत्संग भोंडसी दिनांक-७ अक्टूबर २०१२ शाम

हरि ॐ …ॐ …. प्यारेजी ॐ…. प्रभुजी ॐ ……

जाट भजो गुजर भजो चाहे भजे अहिर |

ठाकुर भजो ठाकुरी भजो सबका होवी तीर |

भगवान के द्वार पर कोई भी जाती को हो भजन करता है तो उसकी बात पहुँचती  है |

रस तीन प्रकार के होते है | हाथरस, बनारस नया नया सुनो कुछ, बना बनाया बनाया रस | एक होता है हाथरस–जलेबी, पूरी, पकोड़ी, मेवा, मिठाई, चमचम ये सब हाथ का रस है | दूसरा बनारस बना बनाया रस, ये दोनों रस जड है | उन रसों का अनुभव होता है आत्मरस से, परमात्मा रस से, नींद आ गयी है फिर हाथ रस के व्यंजन डालो के बनारस के व्यंजन डालो पता नहीं चलेगा | आत्मरस जागृत होगा तभी रस आयेगा | हरि ॐ.. हरि ॐ… हरि ॐ… प्रभु ॐ … प्यारे ॐ … दाता ॐ …रामा ॐ … श्यामा ॐ  … सतचित्त आनंदस्वरूप सतस्वरुप हरि ॐ…. ॐ.ॐ ॐ ॐ.ॐ ॐ हा हा हा…

श्रीमद भागवत में आता है – रसों वैश्य वैश्वानरो .. वो परमात्मा रसस्वरूप है | उस परमात्मा में जिसकी प्रिती है, उस परमात्मा में जिसकी रूचि है, उस परमात्मा में जिसकी आस्था है, उस परमात्मा को जो दूर नहीं मानता, उस परमात्मा को जो दुर्लब नहीं मानता, उस परमात्मा को जो परे नहीं मानता, उस परमात्मा को जो पराया नहीं मानता, उस परमात्मा को जो कठिन नहीं मानता, सहज मानता है, सुलभ मानता है उसीका नाम है शंकर | नेता बोलेगा तो भाषण हो, प्रोफेसर बोलेगा तो विषय पर स्पीच हो, पंडित बोलेगा तो कथा होगी, संत बोलेगा तो सत्संग हो जायेगा |

एक घडी आधि, आधि घडी आधि में पुनिआध | तुलसी संगत साध की | हरे कोटि अपराध  |

आज श्राद्ध पक्ष की सप्तमी है और रविवार की सप्तमी है, रात को १२ बजके ६ मिनट तक जितना भी जप करोगे उसका फल लाख गुना हो जायेगा कितना बड़ा फायदा हो जाय | श्राद्ध पक्ष में तुम्हारे पिता, पितामह, परपितामह, नाना, परनाना, नानियाँ, परनानियाँ सात-सात पीढ़ियों को, पितरो को आप तृप्त कर सकते है भगवान नाम का कीर्तन करके उनको पुण्य अर्पण करके वे तृप्त हो जायेंगे | जिनके घर में श्राद्ध नहीं होता उनके कुल-खानदान में लंबी आयुष्य और लंबी समझवाले दिव्य आत्माएँ नहीं आती | जिनके घर में श्राद्ध आदि नहीं होता वो मरने के बाद उत्तम गति को नहीं पाते है | जिनके घर में, परिवार में श्राद्ध नहीं होता उनके चित्त में भगवत रस, भगवत शांति और भगवत प्रसादजामती करनेवाला अंतरात्मा का प्रकाश नहीं मिलता |

पुराणों में में लिखा है श्राद्ध के कर्ता को क्या फायदा होता, न कर्ता को क्या नुकसान होता है | ये मै पुराण की बात बताता हूँ – हरिक सुमरती है – न तत्र वीराजायेंते, न आरोग्यं, न शास्वैस्त्य, नच श्रेयो अधिकच्छती, यत्र श्राद्धं विवर्जितं |

जहाँ श्राद्ध नहीं होता, जिसके घरों में श्राद्ध नहीं होता वीर उत्पन्न नहीं होते, कोई निरोग नहीं रहता किसीको कुछ, किसीको कुछ रोग पकडे रहता है | लंबी आयुष्य वाले नहीं होते और किसी तरह भी कल्याणकारी आत्माएँ नहीं प्राप्त होती | महर्षि जाबल कहते है- श्रद्धा से पुत्र, आयु, आरोग्य, अतुल ऐश्वर्य, अविलासित वस्तु श्राद्ध से प्राप्त होती है | श्रेष्ठ पुत्र, लंबी आयु, निरोगता, अतुल ऐश्वर्य, अविलासित वस्तु श्राद्ध कर्ता को सहज में मिलती है | महर्षि सुमंतु कहते है – श्राद्ध जैसा कल्प, कल्याणप्रद दूसरा मार्ग नहीं | विष्णुपुराण में पित्री ग्रहण, हीन जो श्राद्ध परंपरा नहीं करते ब्रम्हा, इंद्र, रूद्र, अश्विनीकुमार, सूर्य, अग्नि, अष्टवसु, आयुर, ऋषि, मनुष्य, पशु-पक्षी, सैसू समस्त प्राणी श्राद्ध कर्ता से तृप्त हो जाते है | ब्रम्हपुराण में लिखा है जो शोक से, श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करते है उनके कुल में दुखी आत्माएँ नहीं होती | मार्कडेंय पुराण में लिखा है जिस देश में, जिस कुल में श्राद्ध नहीं करते वीर, निरोग और शतायु पुत्र, पौत्र आदि उत्पन्न नहीं होते | श्राद्ध में छाहंनवे अवसर है, धर्मसिंधु अनुसार वर्ष की बारह अमावस्या है, हर महीने अमावस्या आती है श्राद्ध किया जा सकता है | चार पुण्यदायी तिथि श्राद्ध किया जा सकता है | चौदाह मनुन्तर आदि तिथियाँ श्राद्ध किया जा सकता है | बारह संक्राति, बारह वैध्यतीयोग, बारह व्यापतीपाद योग, पंद्रह पित्रीपक्ष, आठ–पाँच अष्टका श्राद्ध और पाँच अनाष्टका और पाँच पुर्वदेव इस प्रकार छाहंनवे दिवस श्राद्ध के होते है लेकिन सभी में अश्विनी मास कृष्ण पक्ष, पितृ पक्ष, महालय पक्ष अर्थात १ अक्टूबर से १५ अक्टूबर तक ये श्राद्ध उत्तम में उत्तम माना जाता है | और ये पंद्रह दिन आज बीच का दिन है अति उत्तम है रविवार की सप्तमी है | मै तो आपको फिर से बधाई देता हूँ की ऐसा अवसर बड़ा मुश्किल से मिलता है | श्राद्ध पक्ष हो और बीचो-बीच रविवार की सप्तमी हो आज रात को १२ बजके ६ मिनट तक कोई भी जप, ध्यान, कुछ भी सत्कर्म करते हो तो उसका लाख गुना फल हो जाता है |

भगवान राम ने सुना के पिताजी स्वर्गवास हो गए उस समय पैदल यात्रा करते हुए, यात्रा करते-करते रामजी पुष्कर में पहुंचे | श्राद्ध पक्ष था, तो एक दिन पहले ब्राम्हणों को, साधुओ को कहके आना पड़ता है की आप आये है, ताकि साधू, ब्राम्हण ब्रम्हचर्य रखे, पत्नी सहवास न करे और दूसरे के घर अन्न न खाने जाए ये सारी विधि रामजी जानते थे | श्राद्ध के लिए बुलावा दिए थे वे आये और सीताजी से कंद मूल, सकरकंद, आलू जो भी जंगल में मिलेते थे वो सब उबाल के सब ठीक-ठाक करके तैयार रहे भोजन के लिए | अब सीताजी तो रसोई घर संभाले, लखनजी तो ले आवे सब कंदमूल आदि रामजी तो उसकी देखभाल कर रहे | जो ही वेद ब्राम्हण, साधु, ऋषि आये सीताजी पड़ोस से बाहर आने लगी थाल, व्यंजन थे जो विकृत लपके ऐसे भागी जैसे हिरनी शेर को देखकर छलांग मारके जाम मचाकर भाग जाते है | सीताजी जैसी कर्तव्य परायण सती साध्वी और कर्तव्य का थाल छोडकर ऐसे डरकर भागे की रामजी उस अवस्था को कार्यकुशल प्रभाव से बच गये और सीताजी का सारा दायित्व रामजी ने निभाया | औरतों को करना चाहिए रसोई घर में परोसना ये सारा रामजी ने किया और साधू-संतों को परोस के खिलाके विदाई दी | वो चले गये जैसी डरी हुई हिरनी जंगल से लौटे अपने घर के तरफ ऐसी सीताजी आ गई | तो सीताजी का आना रामजी भांप गये पूछा जनक नंदिनी इस प्रकार अपना कर्तव्य छोड़कर छलांग मारकर के भागना तुम्हारे स्वभाव में नहीं है और डरते–डरते आना तुम्हारे स्वभाव में नहीं | जरुर तुमसे कुछ घटना घटित हुई है क्या हुआ है ? बोली  प्रभुजी जिस ब्राम्हण देवता को पिताश्री के निमित्त आमंत्रित किया था जब वो आये तो मैंने महसूस किया की अयोध्या नरेश आपके पिताजी उसमें में थे अब अपने सुसरा के आगे मै वल्कल पहनकर इस तरीके से कैसे परोसूँ, न घूँघट उनके खाने की व्यवस्था कुछ मै क्या करूँ, इसलिए मै छलांग मारके चली गयी |

तो जिनके प्रति हमारी सदबुद्धि, सदभाव होता है श्राद्ध के दिन उन पितरों को बुलाते है अथवा तो वो नहीं आ पाये तो उन्होंने जो पाया है उसका रूपांतरित होके उस मंत्र और श्रद्धा के बल से उनको तृप्ती मिले | तो जो पितर चले गये है तो हमारा एक साल बितता है तो पितर लोक का एक दिन होता है | एक साल मानुषी समय वहाँ पितर लोक का एक दिन होता है | इस पक्ष में, श्राद्ध पक्ष में सबके पितर भागते रहते है की हमारे कुटुम्बि कुछ अर्पण करे | इसमें वस्तु का महत्व तो इतना नहीं होता जितना मंत्र का होता है, श्रद्धा का होता है |

 

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2 Comments on “श्राद्ध महिमा”

  1. priya ramesh dhasal Says:

    hari om guruji aapke karan hamari kitni agyanta mithi hain apko koti koti pramam hari om …….

  2. RAJESH DWIVEDI Says:

    thanks bapu aapko


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