परमात्मा ज्ञानस्वरूप भंडार

परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापूजी का सत्संग फरीदाबाद दिनांक – २९ सितबर २०१२

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ऐसा दुनिया में कौन है मरेगा नहीं, बिछड़ेगा नहीं, और बेवफाई न करेगा | जो मरे नहीं, बिछड़े नहीं और बेवफाई न करे वो त्रिभुवन में कौन है | बोले शरीर तो मरेगा, देवता के पास जायेंगे तो इंद्र तो बिछड़ेगा, किदर भी जावोगे मरना, बिछडना, बेवफाई है तो ऐसा कौन है ? वो मरेगा नहीं, बिछड़ेगा नहीं, और बेवफाई न करेगा | जो कभी मरे नही, हमसे बिछड़े नहीं और कभी हमसे बेवफाई न करे ऐसा कौन है | कभी मरे नहीं, बिछड़े नहीं, और बेवफाई न करे ऐसा कौन है … परमेश्वर आत्मदेव | मरेगा नहीं, बिछड़ेगा नहीं शरीर बिछड जायेगा, रिश्तेदार बेवफाई करेगा | दमड़ी – दमड़ी जोड़कर मकान बनाया लेकिन मरेंगे ना तो रिश्तेदार हमारी हड्डी घरमे नहीं आने देंगे | जो मरे नहीं वो मेरे रब्ब…. बिछड़े नहीं वो मेरे अकालपुरुष वो बेवफाई कभी न करना दे वो मेरे आंतर आत्मदेव | मरे नहीं, बिछड़े नहीं, और बेवफाई न करे वो आंतर आत्मदेव परमेश्वर है | शरीर मरता है, बिछड़ता है और बेवफाई तो रोज करता है | कितना भी खिलावो-पिलावो कभी कुछ, कभी कुछ अंत में देखो तो ऐसा लाचार सुनने की इच्छा है लेकिन सुनाई कम पड़ता है बेवफाई हुई, देखने की इच्छा है दिखाई ही कम पडता है नहीं पडता है, जीने की इच्छा है लेकिन हरामी बेवफाई करते है | शरीर तो बेवफाई करेगा, पत्नी भी वफ़ादारी कब तक करेगी जब अपने शरीर अपने साथ बेवफा हो जाता है तो पत्नी क्या करेगी, पति क्या करेगा | मरे नहीं, बिछड़े नहीं, और बेवफाई न करे वो है परमात्मा | बिछड़ता नहीं है नहीं जान गये तभी भी बिछड़ा नहीं है, हम नहीं भी मान रहे तभी भी बिछड़ा नहीं है |

 

इंदिरा गाँधी की गुरु आनंदमयी माँ आखंडनंदजी महाराज का सत्संग सुनती, उनको मत्था टेकती | शिवलिंग बनाके आयी चाँदी का सीर पर बाबा ये ले लो | बाबा ने ले लिया, बाबा मेरे को भी स्वीकार कर लो ऐसी नम्र थी | इंदिरा गाँधी की गुरु, ऐसे कैयंके गुरु | आखंडनंद महाराज जहाँ मत्था टेकते थे वो थे उड़िया बाबा | संतो कोई हत्था-पैया जोड़े चलो बाबा, चलो – चलो इस्पिताल ले गये, मरिजोंकी कहराती हुई दशा देखकर बाबा को बहोत गुस्सा आया और आये अपने निवास पर और हाथ-पैर पट्टाकर भगवन को खरी-खोटी सुना दे दी ऐसी सुनावे मानो बाबा आज रूद्ररूप में है | भगवान.. कैसा भगवान… कायका भगवान खुप सुनावे | मै कायको ऐसा सुनावे आप समाज लेना | बाबा हाथ तो पछाडे लेकिन पैर भी पिछाड़े खुप दम मारके भगवान को डांटे | तो आखंडनंद बाबा जहाँ आनंदमयी मत्था टेकती थी,  उन्होंने कहाँ महाराज- आप भगवान को नहीं मानते है क्या ? आरे मानता नहीं तो सुनाता क्यू उनको ? वंध्या के पुत्र को थोड़ी सुनाया जाता है ? आकाश के कुसुमों को थोड़ी सुनाया जाता है ? वो दिखता नहीं लेकिन सभी उसी के सत्ता से दिखते है और वो मरता नहीं है सभी उसीकी सत्तासे मरते, भटकते है |

तो मरता नहीं, बिछड़ता नहीं और बेवफा नहीं होता और हमारा अहित नहीं कर सकता…….. अब कुत्ते से मुहँ से मनुष्य की भाषा बुलवाकर सेम्पल सेक्शन की हवा निकाल दीई | तो वो चाहता तो बाबा उनको सुना रहे उसी समय बाबा के हार्ट को स्थीर को कुछ भी करता था अथवा बाबा को चक्कर आते तो सुला देता था | दो पैसे का शेठ, दो पैसे का कोई अपना बोज का दो-चार सुना देता है ना वो बोलता है शटाप.. शटाप.. ऐ बहार निकालो पनिशमेंट दे देगा लेकिन बाबा सुनाये जा रहे और वो सुना जा रहा | कितनी सहनशक्ति थी | सहनशक्ति की पराकाष्टा देखो तो उसी में और उसी की सहनशक्ति पराकाष्टा उसी माँ में है | बच्चा पेट में कभी हिलचाल करके पीड़ा दे देता है | मै छोटा था ना माताएँ-बहिनें  बाते करते थी तो मै सुनाता था | तो बाते-बाते करते-करते वो बोलती थी की मेरा तो साया दूध पीते –पीते काटता है देखती तो मुझे मारती | दूध की जगा पे फिर माँ उसको दंड दे सकती नहीं दे सकती | ये सहनशक्ति माँ में जिसकी है वो माँ का माँ, बाप का बाप, सभी का आत्मदेव, मेरे प्रभू ……

तुम ठाकुर तुम पैरदास जियो पिंड सब तेरी रास | माँ में सहनशक्ति का गुण तेरा है, पृथ्वी में सहनशक्ति का गुण तेरा है, कितना खुदो, कितने गटर डालो, कितने सुबह की शरीर की मै़ल, गंदगी डालो पृथ्वी सह रही है क्योंकि परमात्मा की लेंन है | अभिव्यक्ति गंगाजी को आदर करो, गंगाजी में गाय मुहँ डाले तो पी ले बाय पानी और खून, खार, शेर आ के पानी पीले ले तो गंगा मना नहीं करती, नदियाँ मना नहीं करती, जल मना नहीं करती | पृथ्वी में कोई भी रहो और कुछ भी करो, चाहे वजन डालो, चाहे खड्डे खोदो, चाहे कुछ भी करो, चाहे गंदी चीजे डालो पृथ्वी में क्षमाशक्ति है | माँ में क्षमा शक्ति है | वो उसी के वंशज है और तुम्हारे में भी जो क्षमाशक्ति का गुण है वो उसी का है और स्नेह शक्ति | बछड़े को जन्म देती है गाय, गाय जहाँ खड़ी होती है वहाँ पिशाप कर दे अथवा गोबर पड़े तो उकी छित्ते होती है आसपास तो वो घास नहीं खाती लेकिन अपने खुक से बच्चा जन्मा है कितनी गंदगी है | जहाँ से गोबर और बाथरूम आदि होता है वाही से बच्चा आया है बच्चे को चाटती स्नेह-स्नेह में वो गंदगी भी भोग बना लेती | ये स्नेह का सदगुण अगर गाय में है तो उसी दाता का है ……. तुम ठाकुर तुम पैरदास जियो पिंड सब तेरी रास …….मातोंकी माता और पिताओं के पिता  अगर है वो परमेश्वर | जो देवी, देवता, भुत, भैरव की उपासना करते, भले करे लेकिन ये फुटकर देवता है ये फुटकर फल देगी | ग्रामदेवता है, स्थानदेवता है, कुलदेवता है ये कुछ समय के लिए उनका प्रेत शरीर वहाँ ग्राम में रहता है | चपरासी देंगे तो कितना देंगे लेकिन चपरासी जब देंगे तो सब सत्ता उसी परमेश्वर की सत्ता देंगे | माँ के शरीर में दूध कौन बनाता है? ग्रामदेव नहीं बनाता, स्थानदेवता नहीं बनाता, कुलदेवता नहीं बनाता वो माँ का अंतर्यामी देव हमारे लिए दूध बनाने की व्यवस्था करता है | हमारी नाभि माँ की जेर से जोड़ने की ज्ञान सत्ता है उसकी और छोटे-से छोटा है वो परमात्मा इतना भी छोटा की मच्छर ने भी उसकी ज्ञान और चेतना दिखती है और अक्कल दिखती है | दुनिया के राष्ट्रपति, सारे प्रधानमंत्री, सारे बापू जैसे प्रसिद्ध, अध्यात्मिक व्यक्ति मच्छर के आगे हार मान जाते | तो मेरे ज्ञानदाता, प्रेमदाता, स्नेहदाता कभी न बिछड़े, कभी न मरे, कभी वेबफाई न करे तू इतना हाजरा हजुर | जो भुत-प्रेतोंकी उपासना करते, भुत-प्रेत थोडा बहुत काम करते होंगे, परन्तु भुत जो कुछ उनको देते है लेकिन देने की सत्ता तो भूतों की गहराई में उसकी है लेकिन भुत भी उपासना करते है वे भुत लोक में जायेंगे | लेकिन भुत की अंदर तू है, प्रेत की अंदर तू है और सभी अंदर वासुदेव की नजर से वासुदेव से मिले | मेरे भक्त है ज्यो – ज्यो जिसको सुमरण करता है, ज्यो-ज्यो जिसको पूजता है जो उसको वो  पाता है लेकिन उससे उसको जिस मिलता है मेरा एक सत्ता उसकी है | तो मै कौन हूँ? बोले सुन लो, आप मै कौन हूँ ? सुनना है तो सुन लो –

 

भोक्ता रम यज्ञ तपसां | सर्व लोक महेश्वर || सुह्रदय सर्व भुतानामं | ज्ञात्वा मन शांति मृच्छते ||   

ॐ इन्द्रामी इदं स्वाहा न मम, ॐ करुणाय इदं स्वाहा न मम, ॐ कुबेराय स्वाहा इदं न मम, ॐ कुबेराय न मम |

तो वरुण को, कुबेर को ,सबको, जिसको भी देखते हो लेकिन वरुण जो भोग करता है अपने स्वतंत्रा से नहीं है, नहीं भोगता | कुबेर के रूप में, वरुण के रूप में, बाप के रूप में जो सेवा करते हो उनको सुख मिलता है उसका भोक्ता तो मै हूँ | ऐसा तुम जानोंगे तो पूजा छोटे-छोटे की होगी लेकिन उद्देश बड़े का होगा तो मुझसे मिलो | अगर इंद्र को, वरुण को इतना ही मान दिया तो इंद्र , ब्रम्हाजी सौ साल जिये लेकिन ब्रम्हाजी की लंबी आयुष्य होती है | एक दिन ब्रम्हाजी को बिता है तो चौदा मनवंतर गुजरते और एक – एक मनवंतर में एक – एक इंद्र बदल जाता है सौ साल जिव का | ऐसे वर को क्या वरु जैसे उपजे मर जाय तो वरु मेरे गिरधर गोपाल | गिरधर गोपाल इसकी आकृति है लेकिन बोलता है | सब कल्पनाओं को बहाने को छोड़कर तू मुझे अंतर्यामी से शरण आ जा | मै तुझे सारे बंधनोंसे मुक्त कर दूँ | तो सर्व लोक महेश्वर है उसका ज्ञान समजकर किसीका भी प्रेम से आदर करोगे तो उसी के तरफ आयेगा तो अब उसके हो जायेंगे कितना बड़ा फायदा |अभी देखता शेर का और चित्ते का लेकिन मै उसको शेर नहीं मानता हूँ | तो ये दुनिया तीन प्रकार की देखती है – जो संसार से सुख लेना चाहता है उनके के लिए ये संसार दुःख का विलास है | जन्मे तो दु:खी , दाँत आये तो दु:खी, सर्दी हुई तो दु:खी, पेट में दर्द हो तो दु:खी बस दुःख ही दुःख है | जो जिज्ञासु है भगवान के ज्ञान को पाना चाहता है वो पा लेता है उसके लिए संसार माया का विलास है लेकिन जिसको सर्वेश्वर, परमेश्वर को ज्ञान देनेवाले सदगुरु की आखरी कृपा का प्रसाद हजम हो गया उसके लिए सारा जगत जो मरे नहीं, बिछड़े नहीं, बेवफा न हो उस परब्रम्ह परमात्मा का विलास है | ये जगत ब्रम्हज्ञानी को ब्रम्हजगत दिखता है | भगत और साधक को माया दिखती है ईश्वर की और संसार भोगीओंको संसार का दु:खी पकड़ लेता है | आप संसार से सुखी होने की कोशिस मत करो और संसार में सुख नहीं है | रुपयोंसे सुख होता रुपयोंसे आता रूपये मेरे है ऐसा माना तो सुख ह्रदय में ज्ञान से सोचो | पत्नी से सुख नहीं होता, पति से सुख नहीं होता जब उनके व्यवहार से रस में खुशी होती | तो सुख ज्ञान से प्रकाशित होता है | वो परमात्मा ज्ञानस्वरूप ज्ञान श्रुत भंडार है | वो ज्ञान का मूल है उसके द्वारा बुद्धि में ज्ञान, मन में ज्ञान, इन्द्रिय में ज्ञान लेकिन उस मेरे ये चैत्यन्य से सुख यहाँ सीख आता | कर्म से सुख नहीं आता  है कर्म से इच्छा होती है और वैसे कर्म होता है |

अभी श्राद्ध पक्ष आया गा जो श्राद्ध नहीं करते वो शिवजी कहते है उनकी मै पूजा स्वीकार नहीं करता और श्राद्ध करते है वो माता-पिता, जिनके भी श्राद्ध करते उनके भी बदले में आरोग्य, आयु, पुष्टि, कोई खानदान में अच्छी आत्माये और भी उनको पितरो आशीर्वाद से मार्गदर्शन से मदद मिलती है |

हरि ॐ  हरि ॐ

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