हरि हर बाबा की कहानी

24 एप्रिल 2012 subah ; काशी सत्संग अमृत

 

किसी भी बात का अहम बड़ी मुसीबत पैदा करता है..

मैं और मोर-तोर  की माया…

“मैं”- मैं विद्वान, मैं धनी, मैं पापी, मैं पुण्यात्मा..ये “मैं” जो है ना बड़ी मुसीबत पैदा करता है.. “मैं” तो भगवान में मिल जाए बास !…तब होता है कल्याण..

भगवान को अपना मानने से भगवान में अपना ‘मैं’ आसानी से मिल जाता है..और भगवान से अलग ‘मैं’ रावण का भी ठीक नही रहा..भगवान से अलग ‘मैं’ हीरण्यकश्यपू का भी ठीक नही रहा..और शबरी भीलण का ‘मैं’ गुरुजी की कृपा से भगवान में मिला तो शबरी भीलण  महान हो गयी..मीरा का ‘मैं’ भगवान में मिला तो मीरा महान हो गयी..रहिदास का ‘मैं’ भगवान में मिला तो महान हो गये..जनक राजा का ‘मैं’ भगवान में मिला तो जनक राजा भी महान हो गये…

जिस का ‘मैं’ भगवान के सिवाय किसी बात बात में फँसा है वो चाहे कितना बुध्दिमान हो, कितना धनवान हो, कितना सत्तावान हो फिर भी अभागा तो है..

 3 प्रकार की सृष्टियाँ होती है:- आधीभौतिक, आधीदैविक, और तीसरी सृष्टी – सृष्टी नहीं बल्कि परम सत्ता है “अध्यात्म”….आधीभौतिक और आधीदैविक जहाँ से सत्ता लाते वो अध्यात्म होता है..अध्यात्म में रमण करने के लिए ही वेद पुराण शास्त्र है..लेकिन वेद पुराण शास्त्र रटा और उस से कुछ विशेष बनाने लगा तो वो धोखे में रहे जाता है..फिर ऐसे लोगों को प्रार्थना करनी पड़ती है की-

मुझे वेद पुराण क़ुरान से क्या?

मुझे प्रेम का पाठ पढ़ा दे कोई..प्रभु प्रेम का…

मुझे मंदिर मस्जिद जाना नही, मुझे हरि रस का प्याला पीला दे कोई…

जहाँ उँच और नीच की बात नही,

जहाँ जात और पात की बात नही ..

ना हो मंदिर मस्जिद चर्च जहाँ,

 ना हो पूजा नमाज़ में फ़र्क वहा..

बस प्रेम ही प्रेम की सृष्टि मिले

नाव को खे के चलो वहाँ..

जीवन की नैय्या  परमात्म प्रेम की तरफ ले चलो..

 

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कबीर जी के पास काशी के विद्वान गये..की “हम तो न्यायाचार्य, विशेषाचार्य आदि..हमारे पास 5-15 आदमी आते तो 2-4 उठ जाते..तुम्हारे पास ऐसा क्या है की जो लोग आते, तुम्हारे हो जाते?..”

कबीर जी बोले, “पंडितों तुम्हारे पास रटा-रटाया शास्त्रो का बोज़ा है..मेरे पास भगवत रस का झरना है..इसलिए जिस को भगवत रस चखने को मिल जाता फिर वो रटारटीवालों के यहा टिकता नही..बात मेरी कड़क लगेगी, लेकिन सच्चाई ये है..”

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काशी में काई उच्च कोटि के संत महा पुरुष हो गये..उन संतों में भी एक विलक्षण लक्षण संपन्न महा पुरुष ऐसे हुए की जिन की चर्चा अँग्रेज़ों को भी नतमस्तक हो के करनी पड़ी…और मदनमोहन मालवीय भी उन की कृपा के आगे  नतमस्तक हो जाते थे..

त्रैलंग स्वामी, भास्करानंद, शाम नारायण ल़हेरी, विशुध्दानंद ये सब समकालीन महापुरुष हो गये..इन सभी संतों का उस महापुरुष के प्रति बड़ा आदर था..

ये बाबा कुछ अलौकिक रिध्दी सिध्दीयों के धनी तो थे.. लेकिन भगवत प्रेम, काशी के प्रति प्रेम और अपनत्व उन के हृदय में ऐसा भरा था की वे काशी में सुबह का नित्य कर्म करने नही जाते..गंगा पार दूर देहात में चले जाते..और वहा से डोल-डाल कर के वापस आते..आखरी तक उन्हों ने यह नियम निभाया..बड़े बड़े राजे महाराजे भी उन की चरणरज के लालायित होते थे..काशी विश्व विद्यालय के मदन मोहन मालवीय जी पर उन की थोड़ी सी नाराजी हुई तो मालवीय जी को ब्रिटिश शासन की तरफ से नोटीस मिला और मालवीय जी संकट में पड गये..

कोई प्रोफेसर था जो मालवीय जी के संकट को और बाबा जी की महिमा को भी जानता था..वो बाबा जी का भक्त था..बाबा जी का नाम था- हरि हर बाबा…उन का जन्म हुआ था 1821 में..छपरा के जाफरापुर  गाँव में..वास्तव में उन का नाम सेनापति था..जो उन के पिताजी ने रखा था की बोले ये सेनापति बनेगा…7 वर्ष के बाद उन को एक भाई हुआ तो उस का नाम हरि हर रखा गया..माँ तो भगवान के चरणों में पहुँच गयी थी, कुछ वर्ष बीते तो पिताजी भी चल बसे थे..7 वर्ष का हरि हर भी चल बसा..सेनापति हरि हर की याद में रोता की माँ चल बसी, पिताजी भी चल बसे ..लेकिन तू क्यू चल दिया भैय्या..14 साल का सेनापति 7 वर्ष के छोटे भाई की याद में रोता..तो उन का असली नाम तो छूट गया , उन को सब हरि हर का भाई नाम से बुलाते..और आगे चल के उन का नाम ही हरि हर पड गया..वो ही हरि हर बाबा..

नागवा के समीप वितरागानन्द सरस्वती बाबा का संपर्क हुआ..भगवन नाम की दीक्षा मिली..भगवान के नाम का रस उभरा..माँ के मृत्यु का दुख, पिता के मृत्यु का दुख , नन्हे भाई का मृत्यु का दुख भगवान की भक्ति ने हर लिया..

दुखी आदमी का दुख तब तक रहेता है जब तक वो संसार के सुख से उस दुख को मिटाना चाहता है..ये दुखी आदमी की बड़ी भूल है..दुख आए तो संसार के सुख से दुख को मत भगाओ..श्री हरी के स्मरण से, श्री हरि की प्रीति से और उस की व्यवस्था में हाँ मिलाने से दुख सदा के लिए मिट जाता है…

हरि हर बाबा का दुख मिट गया और भगवत भजन में रस आने लगा..भगवत भजन का प्रभाव ये हुआ की वे धान्यस्त हो जाते..एक ऐसी सुंदर घड़ियाँ आई की वे श्री राम , सीता जी, लक्ष्मण और हनुमान जी उन के आगे प्रगट हो गये..हनुमान जी ने कहा की तुम्हे और आगे  बढ़ना हो तो तुम काशी विश्वनाथ बाबा के पास जाओ..राम लक्ष्मण जानकी और हनुमान जी अंतर्धान हो गये..

हरि हर बाबा अयोध्या से चल पड़े..काशी विश्वनाथ के चरणों में पहुँचे..गंगा जी के प्रति भी उन की बड़ी सदभावना थी…

पहेले की साधना थी – राम राम राम..कभी उन के मुख से निकलता – शिव शिव शिव…बज़रे में रहेते..

 ध्यान देना: व्यर्थ्य चिंतन से साधक की शक्तियों का र्हास होता है.. व्यर्थ्य मनोराज से भी साधक की शक्तियों का र्हास होता है..ध्यान के बहाने मनोराज, व्यर्थ्य चिंतन, रसास्वाद, निद्रा, तंद्रा ये दोष आ ही जाते है..इसलिए बीच बीच में भगवान के नाम उच्चारण करने से  इस निद्रा, तंद्रा, व्यर्थ्य चिंतन से सुरक्षा  देने का अद्भुत सामर्थ्य है..

ओ ——म्म्म्मममम न—–म —–ह  शि——वा ——य (प्लुत  उच्चारण )

यह शिव जी के नाम का प्लुत  उच्चारण व्यर्थ्य चिंतन को निगल जाएगा..सार्थक चिंतन, सार गर्भीत और निसंकल्प अवस्था में पहुँचा देगा…निसंकल्प अवस्था आई अथवा सार चिंतन आया तो ईश्वरीय सामर्थ्य के द्वार खुलते है…

हरि हर बाबा की कथा रस प्रद है, उत्साह वर्धक है …

1925 की घटित घटना है..काशी विश्व विद्यालय के कुछ  छात्र जुते पहेन कर बाबा के बज़रे में घुस गये..तुलसी घाट के निकट एक बज़रे में बाबा रहेते थे..मल्लाहों ने उन छोरों को डांटा, रोका लेकिन उन छात्रों ने उन की एक ना मानी..उपर से उन मल्लाहों को और आए हुए कुछ भक्तों पर उन उदंड छोरो ने  पत्थर बाजी कर ली..जब परिस्थिति हिंसक सी हो गयी तो बाबा बोले अब यहा हम नही रहेंगे..बजरा खोला ..बाबा की आज्ञा  का कोई उल्लंघन नही कर सकता था..काशी घाट पर  ये दुखद दृश्य देख कर काशी वासियों का हृदय पसिजा और उग्र हो गया..

मदन मोहन मालवीय जी तक खबर पहुँची..काशी विश्व विद्यालय के ये कैसे नालायक लड़के है की जुते  पहेन  कर संत के बज़रे में चले गये और पत्थर मारे..काशी भी उग्र हो गया था..मालवीय जी दौड़े दौड़े आए..बाबा के चरणों में प्रणाम किया की, “बाबा, बच्चो ने ग़लती की…”

बाबा ने कहा, “ग़लती की तो बस…यही पढ़ाई है तुम्हारी? ऐसी पढ़ाई देश का क्या भला करेगी?जब संस्कार नही दे सकते तो विश्व विद्यालय खोलने की क्या ज़रूरत है?”

मालविय जी क्या जबाब देते?..नतमस्तक हो कर कहा की, “बाबा..अगर वो समझते तो ये ग़लती नही करते..उन की ग़लती के बदले मैं आप से माफी माँगता हूँ..”

बोले, “अच्छा जाओ..राम जी ने क्षमा कर दिया..लेकिन सुनो..बच्चो को अगर जब ठीक संस्कार नही दे सकते हो सज्जनता के, मानवता के, श्रेष्ठ नागरिकता के और उदंड ही बनाना है तो तुम समय और पैसा क्यूँ गवाते हो..”

बाबा के हृदय को ठेस पहुँची थी…मालवीय जी खिन्न मन लेकर वापस आए..2 दिन के बाद मालवीय जी के हाथ में ब्रिटिश शासन का नोटीस आ गया-जहा तुम विश्व विद्यालय बनाने जा रहे हो , 2 महीने के अंदर वो जगह खाली करो..उस जगह पर सरकार मिलिटरी की छावनी बनाने का निर्णय कर बैठी है..नोटीस पढ़ कर मालवीय जी तो पसीने से तर-बतर हो गये..कई राजनैतिक और कई अच्छे अच्छे मिलने वाले लोगों से बातचीत की लेकिन कोई हल नही मिल रहा था..एक दिन बिता..दूसरा..तीसरा..चौथा दिन..ब्रिटिश शासन उग्रता भरा निर्णय ले बैठी है अब उन को कौन समझाए?..

बाबा का कोई भक्त था..मालावीय जी की परेशानी से द्रवित हो गया..मालवीय जी को बोला की हो सकता है की संत-अपराध से ब्रिटिश शासन की बुध्दी फिरी हो..बाबा की नाराज़गी से प्रकृति ने सज़ा देने का इरादा किया हो..

संत सताए तीनो जाए

तेज, बल और वंश

ऐसे ऐसे कई गये

रावण,कौरव जैसे कन्स

महाभारत में भी लिखा है की उस की अकाल मृत्यु हो सकती है, उस की बुध्दी से ग़लत निर्णय लिए जाते है..प्रकृति इस प्रकार उस को दंड देती है..

हम ने भी अपने जीवन में भी कइयों को ऐसा देखा..किसी संत को सताया फिर वो आदमी पागल हो गया..अपने आप पर क्रूड ऑइल  डाल कर मर गया…दूसरे ने किसी संत को सताया और वो पागल हो के गंगा जी में कूद के मर गया..संत नारायण बापू जी ने मेरे को  ये घटना बताई..

संत को सताने से कुदरत का कोप आता है तो संत का आदर करने से कुदरत और भगवान की कृपा भी तो बरसती है..तो भक्तो को कदम कदम पर इस का अनुभव होता है..

बाबा के भक्त ने मदन मोहन मालवीय जी से कहा की हो सकता है की संत को सताने का अपराध हुआ तो कुदरत का कोप हुआ  होगा..अपन हरि बाबा के पास चले..तो मालवीय जी और कुछ कार्यकर्ता हरि बाबा को मिलने गये..प्रणाम कर के कहा की ब्रिटिश शासन ने ये कहेर बरसाया है..विश्व विद्यालय की जगह 2 महीने के अंदर खाली करवाना चाहते है..हमारे पास कोई विकल्प नही है..बाबा  आप कृपा कर सकते है..

बाबा बोले, “कोई बात नही..तुम कोई जबाब नही देना..देखो क्या होता है..”

8 दिन के बाद ब्रिटिश शासन ने झक मार कर पत्र भेजा की आप को जो पहेले का नोटीस भेजा है उस को निरर्थक समझना..ऐसा था हरि हर बाबा का संकल्प!

 मंत्र शक्ति वाले अहम भगवान में शांत कर के भगवान की शक्तियाँ ले आता है..

विद्वान होना अच्छा है लेकिन विद्वत्ता का अहंकार, वेश भूषा का अहंकार व्यक्ति को ईश्वर से दूर कर देता है..किसी भी बात का अहंकार ईश्वर से हम को विमुख कर देता है..विद्वत्ता वो अच्छी है जो भगवान में मन लगाए..कुटुम्ब वही अच्छा है जो भगवान में मन लगाए..तीर्थ क्षेत्र और जगह वो ही अच्छी है जो विश्वनाथ के विश्व मानव के अभिन्न सत्ता में जगा दे..

यूँ तो पशु भी जी रहे..क्या बड़ी बात है?..यक्ष किन्नरों के पास भी धन होता है क्या बड़ी बात है?..धन हुआ सत्ता हुई तो कोई बड़ी बात नही..भगवान का रस मिलना ये बड़ी बात है..

जहाँ में उस ने बड़ी बात कर ली जिस ने आत्मा परमात्मा की मुलाकात कर ली…

ब्रिटिश शासन का दम घूँट गया हरि बाबा के संकल्प से..पहेले तो उदंड छात्रों की खिंचाई कर दी बाबा ने, और मालवीय जी की भी..लेकिन फिर कैसे नर रत्न भी दिए इस विश्व विद्यालय ने..बाबाओं का कितना सहयोग है…

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इस सत्संग के कुछ और अमृत बिन्दु :

 1) पुज्यश्री बापूजी बोले कि, गर्भवती महिलाए   सीजेरियन नही करवाए, गाय के रस से प्रसूति आसानी से होती है और प्रसूति का मंत्र भी दिया है.

2) सारस्वत्य मंत्र से पूर्व काल में बीरबल की बुध्दी के करिश्मे अकबर बादशाह के साथ उस कालीन लोगों ने देखे लेकिन आज भी पूज्यश्री बापूजी से मंत्र लिए हुए लाखो बच्चे चमक रहे है..तांशु, अजय  मिश्रा, क्षितिज सोनी, राजू भदोरिया आदि उदाहरण .

 3) विश्व की पहेली, सत्संग पंडाल में  बिना धुवे और बिना धूल उड़ाए चलने वाली दर्शन रेल में पुज्यश्री बापूजी का परम पावन दर्शन और श्री सुरेश महाराज के श्रीमुख से सूझ बुझ ज्ञान के साथ भक्ति बढ़ाने वाला पहाड़ी राग का जोगी रे भजन जो मोबाईल से होने वाली हानी को रोकता है ..

 4) पूज्यश्री बापूजी ने रामानंद स्वामी की पंचगंगा घाट की कहानी सुनाई..

 

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एक बात समझ लेनी चाहिए..वर्तमान को रस मय  बनाओ तो निरसता चली जाएगी..निरसता ही सारे विकार और अपराधों का मूल है..और जो वर्तमान को रस मय  बनाया तो उस का भूत काल भी रस मय  हो जाएगा..और भविष्य भी आएगा तो वर्तमान के रस में रस में रसीला हो के आएगा..और रसमय  करने के लिए रात्रि के शयन के वक्त का श्वासोशवास में भगवान नाम का प्रयोग, दिन की शुरूवात का प्रयोग , और काम करने से पहेले और काम के बाद एक मीनट- ‘भगवान मैं तेरा हूँ और तुम मेरे हो..तुम रस स्वरूप हो , बिन फेरे हम तेरे…ओम ओम ओम ओम ओम .. हा हा हा …’  ऐसा हास्य करो तो भगवान रस देने में कहाँ देर करते?..

रात्रि के शयन के वक्त का श्वासोशवास में भगवान नाम का प्रयोग, दिन की शुरूवात का प्रयोग के लिए लिंक : http://wp.me/P6Ntr-Ty 

पृथ्वी का सारा राज्य, धन, सत्ता मिल जाए लेकिन  जीवन में निरसता है तो वो अभागा है..

ॐ शांती ।

श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो !!!!!

गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करें …..

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

 24 April 2012; Kashi Satsang Amrut

kisi bhi baat kaa aham badi musibat paidaa karataa hai..

main aur mor-tor ki maayaa…

“main”- main vidwaan, main dhani, main paapi, main punyaatmaa..ye “main”jo hai naa badi musibat padiaa karataa hai.. “main to bhagavaan men mil jaaye baas!…tab hotaa hai kalyaan..

bhagavaan ko apanaa maanane se bhagavaan men apanaa ‘main’ aasaani se mil jaataa hai..aur bhagavaan se alag ‘main’ raawan ka abhi thik nahi rahaa..bhagavaan se alag ‘main’hiranyakashyapu kaa bhi thik nahi rahaa..aur shabari bhilan kaa ‘main’ guruji ki krupaa se bhagavaan men milaa to shabari bhilan mahaan ho gayi..miraa kaa ‘main’bhagavaan men milaa to miraa mahaan ho gayi..rahidaas kaa ‘main’ bhagavaan men milaa to mahaan ho gaye..janak raajaa kaa ‘main’ bhagavaan men milaa to janak rajaa bhi mahaan ho gaye…

jis kaa ‘main’ bhagavaan ke siwaay kisi baat baat men phansaa hai vo chaahe kitanaa budhdimaan ho, kitanaa budhdiwaan ho, kitanaa sattaawaan ho phir bhi abhaagaa to hai..

 3 prakaar ki srushtiyaan hoti hai :- aadhi bhautik, aadhi daivik, aur tisari srushti nahi balki param sattaa hai “adhyaatm”….aadhi bhautik aur aadhi daivik jahaan se sattaa laate vo adhyaatm hotaa hai..adhyaatm men raman karane ke liye hi ved puraan shaashtr hai..lekin ved puraan shaashtr rataa aur us se kuchh vishesh banane lagaa to vo dhokhe men rahe jaataa hai..phir aise logon ko praarthanaa karani padati hai ki-

mujhe ved puraan kuraan se kya?

mujhe prem kaa paath padhaa de koyi..prabhu prem kaa…

mujhe mandir masjid jaanaa nahi, mujhe hari ras kaa pyaalaa pilaa de koyi…

jahaan unch aur nich ki baat nahi, jahaan jaat aur paat ki baat nahi ..

naa ho mandir masjid charch jahaan,

naa ho pujaa namaaj men phark wahaa..

bas prem hi prem ki srushti mile naav ko khe ke chalo wahaan..

jeevan ki naiyyaa  paramaatm prem ki taraf le chalo..

 

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kabir ji ke paas kaashi ke vidwaan gaye..ki “ham to nyaayaachaary, vishwashaachaary aadi..hamaare paas 5-15 aadami aate to 2-4 uth jaate..tumhaare paas aisaa kyaa hai ki jo log aate tumhaare ho jaate?..”

kabir ji bole, “panditon tumhaare paas rataa-rataayaa shaashtron kaa bojaa hai..mere paas bhagavat ras ka jharanaa hai..isliye jis ko bhagavat ras chakhane ko mil jaataa phir vo rataa rati waalon ke yahaa tikataa nahi..baat meri kadak lagegi, lekin sachchaayi ye hai..”

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kaashi men kayi uchch koti ke sant mahaa purush ho gaye..un santon men bhi ek vilakshan lakshan sampann mahaa purush aise huye ki jin ki charchaa angrejon ko bhi nat mastak ho ke karani padi…aur madan mohan maalaviy bhi un ki krupaa ke aage nat mastak ho jaate the..

trailang swaami, bhaasakaraanand, shaam naaraayan laheri, vishudhaanand ye sab samakaalin mahaa purush ho gaye..in sabhi santn kaa us mahaa purush ke prati badaa aadar thaa..

ye baabaa kuchh aloukik ridhdi sidhdiyon ke dhani to the,lekin bhagavat prem, kaashi ke prati prem  aur apanatv un ke hruday men aisi bhari thi ki ve kaashi men subah kaa nity karm karane nahi jaate..gangaa paar dur dehaat men chale jaate..aur wahaa se dol-daal kar ke waapas aate..aakhari tak unhon ne yah niyam nibhaayaa..bade bade raaje mahaaraaje bhi un ki charan raj ke laalaayit hote the..kaashi vishw vidyaalay ke madan mohan maalaviy ji par un ki thodi si naaraaji huyi to maalaviy ji ko british shaasan ki taraf se notice milaa aur maalaviy ji sankat men pad gaye..

koyi professor thaa jo malaviy ji ke sankat ko aur baabaa ji ki mahimaa ko bhi jaanataa thaa..vo baabaa ji ka bhakt thaa..baabaa ji kaa naam thaa- HARI HAR BAABAA…un ka janm huaa thaa 1821 men..chhaaparaa ke jafarpur gaanv men..vaastav men un kaa naam senaapati thaa..jo un ke pitaaji ne rakhaa thaa ki bole ye senaapati banegaa…7 varsh ke baad un ko ek bhaai huaa to us kaa naam hari har rakhaa gayaa..maa to bhagavana ke charanon men pahunch gayi thi, kuchh varsh bite to pitaaji bhi chal base the..7 varsh kaa Hari Har bhi chal padaa..senaapati Hari har ki yaad men rotaa ki maa chal basi, pitaaji bhi chal base ..lekin tu kyu chal diyaa bhaiyyaa..14 saal kaa senaapati 7 varsh ke chhote bhaai ki yaad men rotaa..to un ka asali naam to chhut gayaa , un ko sab hari har kaa bhaai naam se bulaate..aur aage chal ke un kaa naam hi hari har pad gayaa..vo hi hari har baabaa..

Nagavaa ke samip vit raagaanand sarswati baabaa ka sampark huaa..bhagavan naam ki dikshaa mili..bhagavan naam kaa ras ubharaa..maa ke mrutyu ka dukh, pitaa ke mrutyu ka dukh , nanhe bhaai kaa mrutyu kaa dukh bhagavaan ki bhakti ne har liyaa..

dukhi aadami kaa dukh tab tak rahetaa hai jab tak vo sansaar ke sukh se us dukh ko mitaanaa chaahataa hai..ye dukhi aadami ki badi bhul hai..dukh aaye to sansaar ke sukh se dukh ko mat bhagaao..shri hari ke smaran se, shri hari ki priti se aur us ki vyavasthaa men haan milaane se dukh sadaa ke liye mit jaataa hai…

hari har baabaa kaa dukh mit gayaa aur bhagavat bhajan men ras aane lagaa..bhagavat bhajan bhajan kaa prabhaav ye huaa ki ve dhaanyasth ho jaate..ek aisi sundar ghadiyaa aayi ki ve shri raam , sitaa ji aur hanumaan ji un ke aage pragat ho gaye..hanumaan ji ne kahaa ki tumhe aur aage badhanaa ho to tum kaashi vishwanaath baabaa ke paas jaao..ram lakshman jaanaki aur hanumaan ji antardhaan ho gaye..

Hari Har baabaa ayodhyaa se chal pade..kaashi vishwanaath ke charanon men pahunche..gangaa ji ke prati bhi un badi sadbhaavanaa thi…

pahele ki saadhanaa thi – raam raam raam..kabhi un ke mukh se nikalataa – shiv shiv shiv…bajare men rahete..

 

dhyaan denaa: vyarthy chintan se saadhak ki shaktiyon kaa rhaas hotaa hai..vyarthy manoraaj se bhi saadhak ki shaktiyon kaa rhaas hotaa hai..dhyaan ke bahaane manoraaj, vyarthy chintan, rasaaswaad, nidraa, tandraa ye dosh aa hi jaate hai..isliye bich bich men bhagavaan ke naam uchchaaran men is nidraa, tandraa, vyarthy chintan se surakshaa  dene kaa adbhut saamarthy hai..

oooooooooooommmmmmm naaaamaaaaah shiiiiiiiiiiivaaaaaaaaaaaay..(plut)

yah shiv ji ke naam kaa plut uchchaaran vyarthy chintan ko nigal jaayegaa..saarthak chintan, saar garbhit aur nisankalp awasthaa men pahunchaa degaa…nisankalp awasthaa aayi athavaa saar chintan aayaa to ishwariy saamarthy ke dwaar khulate hai…Hari Har baabaa ki kathaa ras prad hai, utsaah vardhak hai …

1925 ki ghatit ghatanaa hai..kaashi vishw vidyaalay ke kuchh chhaatr jute pahen kar baabaa ke bajare men ghus gaye..tulasi ghaat ke nikat ek bajare men baabaa rahete the..mallaahon ne un chhoron ko daantaa , rokaa lekin un chhhaatron ne un ki ek naa maani..upar se un mallaahon ko aur aaye huye kuchh bhakton par un udand chhoro ne  paththar baaji kar li..jab paristhiti hinsak si ho gayi to baabaa bole ab yahaa ham nahi rahenge..bajaraa kholaa ..baabaa ki aagyaa kaa koyi ullanghan nahi kar sakataa tha..kaashi ghaat par  ye dukhad drushy dekh kar kaashi vaasiyon kaa hruday pasijaa aur ugr ho gayaa..

madan mohan maalaviy ji tak khabar pahunchi..kaashi vishwa vidyaalay ke ye kaise naalaayak ladake hai ki jute pahen kar bajare men chale gaye aur paththar maare..kaashi bhi ugra ho gayaa thaa..maalaviy ji daude daude aaye..baabaa ke charanon men pranaam kiyaa ki, “baabaa, bachcho ne galati ki…”

baabaa ne kahaa, “galati ki to bas…yahi padhaayi hai tumhaari? aisi padhaayi desh kaa kyaa bhalaa karegi?jab sanskaar nahi de sakate to vishw vidyaalay kholane ki kyaa jarurat hai?”

maalaviya ji kyaa jabaab dete?..nat mastak ho kar kahaa ki, “baabaa..agar vo samajhate to ye galati nahi karate..un ki galati ke badale main aap se maafi maangataa hun..”

bole, “achhaa jaao..Raam ji ne kshamaa kar diyaa..lekin suno..bachcho ko agar udand hi bananaa hai to tum samay aur paisaa kyun gavaate ho jab thik sanskaar nahi de sakate ho sajjanataa ke, maanavataa ke, shreshth naagarikataa ke..”

baabaa ke hruday ko thens pahunchi thi…maalaviy ji khinn man lekar waapas aaye..2 din ke baad maalaviy ji ke haath men british shaasan kaa notice aa gayaa-jahaa tum vishw vidyaalay banaane jaa rahe ho , 2 mahine ke andar vo jagah khaali karo..us jagah par sarakaar military ki chhaavani banaane kaa nirnay kar baithi hai..notice padh kar maalaviy ji to pasine se tar-batar ho gaye..kayi raajnaitik aur kayi achhe achhe milane waale logon se baatchit ki lekin koyi hal nahi mil rahaa thaa..ek din bitaa..dusaraa..tisaraa..chauthaa din..british shaasan ugrataa bharaa nirnay le baithi hai ab un ko kaun samajhaaye?..

baabaa kaa koyi bhakt thaa..maalavaiy ji ki pareshaani se dravit ho gayaa..maalaviy ji ko bolaa ki ho sakataa hai ki sant-aparaadh se british shaasan ki budhdi phiri ho..baabaa ki naaraajagi se prakruti ne sajaa dene kaa iraadaa kiyaa ho..

sant sataaye tino jaaye

tej, bal aur vansh

aise aise kayi gaye

raawan,kaurav jaise kans

mahaabhaarat men bhi likhaa hai ki us ki akaal mrutyu ho sakati hai, us ki budhdi se galat nirnay liye jaate hai..prakruti is prakaar us ko dand deti hai..ham ne apane jeevan men bhi kayiyon ko aisaa dekhaa..

kisi sant ko sataayaa phir vo aadami paagal ho gayaa..apane aap par krud oil daal kar mar gayaa…dusare ne kisi sant ko sataayaa aur vo paagal ho ke gangaa ji men kud ke mar gayaa..sant naaraayan baapu ji ne mere ko  ye ghatanaa bataayi..

sant ko sataane se kudarat kaa kop aataa hai to sant kaa aadar karane se kudarat aur bhagavaan ki krupaa bhi to barasati hai..to bhakto ko kadam kadam par is kaa anubhav hotaa hai..

baabaa ke bhakt ne madan mohan maalaviy ji se kahaa ki ho sakataa hai ki sant ko sataane kaa aparaadh huaa to kudarat kaa kop huaa  hogaa..apan Hari baabaa ke paas chale..to maalaviy ji aur kuchh kaary kartaa hari baabaa ko milane gaye..pranaam kar ke kahaa ki british shaasan ne ye kaher barasaayaa hai..vishw vidyaalay ki jagah 2 mahine ke andar khaali karawaanaa chaahate hai..hamaare paas koyi vikalp nahi hai..baabaa  aap krupaa kar sakate hai..

baabaa bole, “koyi baat nahi..tum koyi jabaab nahi denaa..dekho kyaa hotaa hai..”

8 din ke baad british shaasan ne jhak maar kar patr bhejaa ki aap ko jo pahele kaa notice bhejaa hai us ko nirarthak samajhanaa..aisaa thaa Hari Har baabaa kaa sankalp!

 

mantr shakti waale aham bhagavaan men shaant kar ke bhagavaan ki shaktiyaa le aataa hai..

vidwaan honaa achhaa hai lekin vidwattaa ka ahankaar, vesh bhushaa kaa ahankaar vyakti ko iishwar se dur kar detaa hai..kisi bhi baat kaa ahankaar ishwar se ham ko vimukh kar detaa hai..vidwattaa wah achhi hai jo bhagavaan men man lagaaye..kutumb vahi achhaa hai jo bhagavaan men man lagaaye..tirth kshetr aur jagah wo hi achhi hai jo vishwanaath ke vishw maanav ke abhinn sattaa men jagaa de..

yun to pashu bhi jee rahe..kya badi baat hai?..yaksh kinnaron ke paas bhi dhan hotaa hai kya badi baat hai?..dhan huaa sattaa huyi to koyi badi baat nahi..bhagavaan kaa ras milana abadi baat hai..

jahaan men us ne badi baat kar li jis ne aatmaa paramaatmaa ki mulaakaat kar li…

british shaasan kaa dam ghunt gayaa Hari baabaa ke sankalp se..pahele to udand chhaatron ki khinchaaii kar di baabaa ne, aur maalaviy ji ki bhi..lekin phir kaise nar ratn bhi diye is vishw vidyaalay ne..baabaaon kaa kitanaa sahayog hai…

 

 *************

IS SATSANG KE kuchh aur AMRUTBINDU:

 

1)Pujyashri Bapuji ne garbhavati mahilaaon ko  sijeriyan nahi karavaaye, gaay ke ras se prasuti aasani se hoti hai bolaa aur prasuti ka mantr bhi diyaa hai.

2)saaraswatya mantr se purv kaal men birbal ki budhdi ke karishme akabar baadashaah ke saath us kaalin logon ne dekhe lekin aaj bhi pujyashri baapuji se mantr liye huye laakho bachche chamak rahe hai..taanshu, ajay  mishraa, kshitij soni, bhadoriyaa aadi udaaharan se samajhaayaa..

 

3)vishw ki paheli satsang pandaal men  binaa dhuve aur binaa udaaye chalane waali darshan rel men Pujyashri Baapuji ka param paawan darshan aur shri suresh mahaaraj ke shrimukh se sujh bujh gyaan ke saath bhakti badhaane waalaa pahaadi raag kaa jogi re bhajan….

OM SHANTI.

SHRI SADGURUDEV JI BHAGAVAAN KI MAHAA JAYJAYAKAAR HO!!!!!

Galatiyon ke liye Prabhuji kshamaa kare…

 

 

 

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4 Comments on “हरि हर बाबा की कहानी”

  1. Pihu Gupta Says:

    jogi rae kya jaadu hai tere pyaar mai

  2. Shrikant Says:

    dont expect comments! Please carry on your blogs


  3. Please carry on your blogs, Your blog is very useful who are unable to rich near satsangs.
    Hari Hari Om !


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