सच्चे सुख की ‘मास्टर की'(master key)

22 अप्रैल 2012 ; जौनपुर सत्संग अमृत

जो मेरे पास क्या क्या है..मैं भाग्यशाली हूँ..ऐसी भ्रमणा में नही पड़ता..अभी का जीवन कैसा है-सुखी है/दुखी है उस को महत्व नही देता..जैसा भी होगा , गुजर जाएगा और मौत आने के बाद आगे की यात्रा कैसी होगी उस को सवारने का ध्यान जो रखता है वो वर्तमान में प्रसन्न रहेता है..हर परिस्थिति  को विधान मानता है..

जो ज़रा जरा बात में भयभीत होता है, ज़रा जरा बात  में आकर्षित होता, ज़रा ज़रा बात में चिंतित होता है वो तुच्छ माना जाता है, अल्प मती का माना जाता है …

जो दुख आने पर दुख की खाई खोदता नही है, दुख का सतउपयोग करता है, सुख का सतउपयोग करता है..सुख दुख को भोगे नही, जो दुख का भोगी है उस का दुख मिटता नही..जो सुख को भोगता है , सुख उस को खोकला बनाए बिना छोड़ता नही..भगवान कहेते है:

सुखम वा यदि वा दुखम स योगी परमो मतः ll

जो सुख दुख में सम रहेता है वो मेरे मत में परम योगी है..तो सुख आए तो बहुजन हिताय, बहुजन  सुखाय  ..संयम कर के अपने और दूसरों के जीवन में सुख, आनंद और आल्हादिनी  भगवान की भक्तिधारा मिले यह सुख का उपयोग है…

दुख आए तो किसी पर दोषारोपण ना करे..ना खुद को कोसे , ना भगवान को कोसे, ना किसी को कोसे..दुख आए तो प्रसन्न हो जाए की ये हमें जगाने को आया है..संसार आसक्ति करने योग्य नही है, संसार से आसक्ति मिटाने के लिए दुख आया है..

श्रीकृष्ण ने कूंता जी से पुछा की , “बुआ जी , अब युध्द जीत लिया..अर्जुन की विजय हो गयी..युधिष्टिर का राज्य हुआ..अब आप जो माँगना है माँग लो..”

तब कूंता बुआ कहेती है की, “माधव..केशव..मुझे दिन दिन नया नया दुख भेजा करो!”

कृष्ण हँसे..

“इतना लाक्षागृह में पांडवों को जलाने की साजिश,12 वर्ष का वनवास, अग्यातवास..और इतने सारे दुख हुए..अभी तुम को दुख से उबान नही आई?..”

कूंता जी बोली, “प्रभु दुख में तुम को याद करते है, विवेक जागता है, वैराग्य जागता है..आप की मधुर स्मृति  आप के साथ एकाकार करती है..सुख में आदमी सोता है, विकारों में फिसलता है..फिर नरकों में जाता है ..इसलिए माधव अब तो मुझे दुख ही दिया करो..”

और जिस को आप चाहते हो वो चीज़ मिल गयी तो आप को दुख देगी क्या?..दुख चाहो और दुख मिला तो दुखी होंगे क्या?…आप दुख नही चाहते और दुख मिलता तो आप दुखी होते हो!..आप नही छोड़ना चाहते और छूट जाता है तो दुखी होते हो…आप जिस चीज़ को नही चाहते वो चीज़ आई तो दुखी होते हो..आप चाह को ही बदल दो!!

आप ठीक से समझ लेना हाँ ..मैं ये बहुत बड़ी बड़ी मास्टर की दे रहा हूँ आप को!

धरती पर साडे 5 करोड़ लोग है..आप धरती के किसी भी एक आदमी को मेरे सामने खड़ा कर के नही दिखा सकते की जो यह कहे की “मैं ने ये काम दुखी होने के लिए किया है…अथवा फलाना काम दुखी होने के लिए कर रहा हूँ..” ऐसा एक आदमी भी नही मिलेगा..फिर भी सभी के पास दुख रहेता है..क्यो की संसार दुखालय है, उस में सुखी रहेने की कोशिश करते इसलिए दुखी है..संसार दुखालय है, इस का उपयोग कर के अंतरात्मा को जान लोगे तो संसार भी सुख देने वाला और परमात्मा का भी सुख..दोनो हाथ में लड्डू!दाढ़ी की दाढ़ी, बाबा का बाबा!..रोज का खर्चा नही, छीलाछीली नही.. 🙂 बाबा का बाबा..दाढ़ी की दाढ़ी!

ये बहुत उँचा.. भगवान का तत्व ज्ञान मैं आप को सुना रहा हूँ..हम जो चाहते वो सब कुछ होता नही है..बचपन में तुम पढ़ना नही चाहते, तुम्हारा चाहा होता तो तुम पढ़ते ही नही..माँ-बाप का चाहा हुआ, तुम को पढ़ना पड़ा..क्या ख़याल है?..तुम स्नान नही करना चाहते फिर भी करना पड़ा..कपड़े नही पहनना चाहते, पहेनने पड़े..

हम जो चाहते वो होता नही है..जो होता है वो भाता नही है..और जितना भाता है वो टिकता नही है..

ये दर्शन शास्त्र की सार बातें है..

एक मुन्ना से पापा ने पुछा , “बेटा तू प्रधान मंत्री हो जाए तो क्या करेगा?”

मुन्ना बोला, “पापा..पहेली बात..मैं ऑर्डर कर दूँगा की सारी स्कूले , कॉलेज बंद!बच्चे सुखी हो जाएँगे..”

🙂 अरे बुद्दु!..बबलू है!..बोला क्या रोज रोज स्कूल जाना पापा..तो हम जो चाहते वो होता नही..जो होता है वो भाता नही..और जो भाता है वो टीकेगा नही..ये पक्का कर लो!

इसलिए वो आदमी दुखी रहेता जिस के जीवन में समझ नही..

बोली, “बापूजी मैं आप को मानती हूँ, मेरा पति मानता है लेकिन मेरा बेटा आप को नही मानता..”

अरे!कृष्ण की बात कृष्ण का बेटा नही मानता था..तो भी कृष्ण मुस्कुराते रहेते, बंसी बजाते रहेते..तेरा बेटा नही मानता तो परेशान क्यूँ होती है?..ये मन की आदत है..जो अच्छा है उस की कदर नही , जो नही है उस की फरियाद लेकर रोना..

अपने घर में 2कमरे फर्नीचर है , दूसरे के 4 कमरे है तो खटकता है की उस को ऐसा है..  हमारे पास नही ..अरे कुछ ऐसे भी तो लोग है की जिन के पास एक भी कमरा नही , झोपडे में रहेते है..वो भी हसते खलते जीवन बिता देते..

तो एक तो दुख खोजते है.

दूसरा फरियाद करते है..

तीसरा सुख भोगते इसलिए दुखी रहेते है..

सुख को भोगो नही, सुख का उपयोग करो..दुख को भोगो नही, दुख का उपयोग करो…तो सुख दुख को पायदानी बना कर आप परमानंद में पहुँच जाओगे !

सुख स्वपना दुख बुलबुला

दोनो है मेहमान

दोनो भी तन दीजिए

आत्मा को पहेचान

बाहर से परिस्थिति आती है, उस को कौन सी नज़रिया से तुम लेते हो.. बाहर से परिस्थिति आई अनुकूल और प्रतिकूल ..तुम उस को साधन बनाओगे तो अनुकूल परिस्थितियाँ भी तुम्हारे लिए वरदान और प्रतिकूल परिस्थितियाँ भी तुम्हारे लिए वरदान!..और उस को तुम अपने मन चाहे स्वार्थी ढंग से देखोगे तो अनुकूलता भी तुम को ले डुबेगी..प्रतिकूलता भी ले डुबेगी..

बिना सत्संग के तो भगवान श्रीकृष्ण साथ में है और घोड़ा गाड़ी चला रहे फिर भी  अर्जुन का दुख नही मिटा..जब अर्जुन को भगवान ने सत्संग सुनाया तब अर्जुन को असलियत समझ में आई तब अर्जुन का दुख टीका नही और सुख मिटा नही..अर्जुन बोलता है :-

नष्टो मोहा स्मृति लब्धवा

तव प्रसादात मय अच्युत

मेरा उलटा ज्ञान  मिट गया..बाहर से सुख लेने की जो गंदी आदत थी वो मीट गयी..नष्टो  मोहा..स्मृति लब्धवा..तव प्रसादात मय अच्युत..अब मैं अपने आप में स्थित हो गया हूँ.. करिष्येम वचनम तव..

मैं दुनिया के सारी युनिव्हरसिटियों के सर्टफ़िकिटो के बंडल लेकर घूमता तो भी मेरा इतना फ़ायदा नही होता जितना मेरा गुरु दीक्षा और सत्संग से हुआ..इसलिए

सत्संग की आधी घड़ी

आधी में पुनी आध

तुलसी संगत साधु की

हरे कोटि अपराध ll

हरि ॐ

श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो !!!!!

गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे…

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ 

22April2012; Jaunpur Satsang Amrut

mere paas kya kya hai..main bhaagyashaali hun..aisi bhramanaa men nahi padataa..abhi kaa jeevan kaisaa hai-sukhi hai/dukhi hai us ko mahatv nahi detaa..jaisa bhi hogaa , gujar jaayegaa aur maut aane ke baad aage ki yaatraa kaisi hogi us ko sawaarane kaa dhyaan jo rakhataa hai vo vartmaan men prasann rahetaa hai..har parishtiti ko vidhaan maanataa hai..

jo jaraa baat men bhayabhit hotaa hai, jaraa baar men aakarshit hota, jaraa jaraa baat men chintit hotaa hai vo tuchh maanaa jaataa hai, alp mati kaa maanaa jaataa hai …

jo dukh aane par dukh ki khaayi khodataa nahi hai,dukh kaa satupyog karataa hai, sukh kaa satupyog karataa hai..sukh dukh ko bhoge nahi, jo dukh ka bhogi hai us kaa dukh milataa nahi..jo sukh ko bhogataa hai , sukh us ko khokalaa banaaye binaa chhodataa nahi..bhagavaan kahete hai:

sukham vaa yadi vaa dukham sa yogi paramo matah ll

jo sukh dukh men sam rahetaa hai vo mere mat men param yogi hai..to sukh aaye to bahujan hitaay ..sanyam kar ke aap aur dusaron ke jeevan men sukh aanand aur aalhaadini bhagavaan ki bhaktidhaaraa mile yah sukh kaa upayog hai…

dukh aaye to kisi par doshaaropan naa kare..naa khud ko kose , naa bhagavaan ko kose, naa kisi ko kose..dukh aaye to prasann ho jaaye ki ye hamen jagaane ko aayaa hai..sansaar aasakti karane yogy nahi hai, sansaar se aasakti mitaane ke liye dukh aayaa hai..

shrikrushn ne kuntaa ji se puchhaa ki , “buaa ji , ab yudhd jeet liyaa..arjun ki vijay ho gayi..yudhdishtir kaa raajy huaa..ab aap jo maanganaa hai maang lo..”

tab kuntaa buaa kaheti hai ki, “maadhav..keshav..mujhe din din nayaa nayaa dukh bhejaa karo!”

krushn hanse..

“itanaa laakshaagrah men paandavon ko jalaane ki saajish,12 varsh kaa vanawaas, agyaatwaas..aur itane saare dukh huye..abhi tum ko dukh se ubaan nahi aayi?..”

kuntaa ji boli, “prabhu tum ko yaad karate hai, vivek jagataa hai, vairaagy jagataa hai..aap ki madhur smruti  aap ke saath ekaa kaar karati hai..sukh men aadami sotaa hai, vikaaron men phisalataa hai..phir narakon men jaataa hai ..isliye maadhav ab to mujhe dukh hi diyaa karo..”

aur jis ko aap chaahate ho vo chij mil gayi to aap ko dukh degi kyaa?..dukh chaaho aur dukh milaa to dukhi honge kyaa?…aap dukh nahi chaahate aur dukh milataa to aao dukhi hote ho!..aap nahi chhodanaa chaahate aur chhut jaataa hai to dukhi hote ho…aap jis chij ko nahi chaahate vo chij aayi to dukhi hote ho..aap chaah ko hi badal do!!

aap thik se samajh lenaa haan..main ye bahut badi badi maaster key  de rahaa hun aap ko!

dharati par saade 5 karod log hai..aap dharati ke kisi bhi ek aadami ko mere saamane khadaa kar ke nahi dikhaa sakate ki jo yah kahe ki “maine ye kaam dukhi hone ke liye kiyaa hai…athavaa phalaanaa kaam dukhi hone ke liye kar rahaa hun..” aisaa ek aadami bhi nahi milegaa..phir bhi sabhi ke paas dukh rahetaa hai..kyo ki sansaar dukhaalay hai, us men sukhi rahene ki koshish karate isliye dukhi hai..sansaar dukhaalay hai, is kaa upyog kar ke antaraatmaa ko jaan loge to sansaar bhi sukh dene waalaa aur paramaatmaa kaa bhi sukh..dono haath men laddu!daadhi ki daadhi, baabaa kaa baabaa!..roj kaa kharchaa nahi, chhilaachhili nahi.. 🙂 baabaa kaa baaba..daadhi ki daadhi!

ye bahut unchaa.. bhagavaan kaa tatv gyaan main aap ko sunaa rahaa hun..ham jo chaahate vo sab kuchh hotaa nahi hai..bachapan men tum padhanaa nahi chaahate, tumhaaraa chaahaa hotaa to tum padhate hi nahi..maa-baap kaa chaahaa huaa, tum ko padhanaa padaa..kyaa khayaal hai?..tum snaan nahi karanaa chaahate phir bhi karanaa padaa..kapade nahi pahananaa chaahate, pahenane pade..

ham jo chaahate vo hotaa nahi hai..jo hotaa hai vo bhaataa nahi hai..aur jitanaa bhaataa hai vo tikataa nahi hai..

ye darshan shaastr ki saar baaten hai..

ek munnaa se paapaa ne puchhaa , “betaa tu pradhaan mantri ho jaaye to kyaa karegaa?”

munnaa bola, “paapaa..paheli baat..main order kar dungaa ki saari skule , college band!bachche sukhi ho jaayenge..”

🙂 are buddu!..babalu hai!..bolaa kyaa roj roj skul jaanaa paapaa..to ham jo chaahate vo hotaa nahi..jo hotaa hai vo bhaataa nahi..aur jo bhaataa hai vo tikegaa nahi..ye pakkaa kar lo!

isliye vo aadami dukhi rahetaa jis ke jeevan men samajh nahi..

boli, “baapuji main aap ko maanati hun, meraa pati maanataa hai lekin meraa betaa aap ko nahi maanataa..”

are!krushn ki baat krushn kaa betaa nahi maanataa thaa..to bhi krushn muskuraate rahete, bansi bajaate rahete..teraa betaa nahi maanataa to pareshaan kyun hoti hai?..ye man ki aadat hai..jo achhaa hai us ki kadar nahi , jo nahi hai us ki phariyaad lekar ronaa..

apane ghar men 2kamare farnichar hai , dusare ke 4 kamare hai to khatakataa hai ki us ko aisaa hai..  hamaare paas nahi ..are kuchh aise bhi to log hai ki jin ke paas ek bhi kamaraa nahi , jhopade men rahete hai..vo bhi hasate khalate jeevan bitaa dete..

to ek to dukh khojate hai.

dusaraa phariyaad karate hai..

tisaraa sukh bhogate isliye dukhi rahete hai..

sukh ko bhogo nahi, sukh kaa upyog karo..dukh ko bhogo nahi, dukh kaa upyog karo…to sukh dukh ko paayadaani banaa kar aap paramaanand men pahunch jaaoge !

sukh swapnaa dukh bulbulaa

dono hai mehamaan

dono bhi tan dijiye

aatmaa ko pahechaan

baahar se paristhiti aati hai, us ko kaun si najariyaa se tum lete ho.. baahar se paristhiti aayi anukul aur pratikul ..tum us ko saadhan banaaoge to anukul paristhitiyaan bhi tumhaare liye vardaan aur pratikul paristitiyaan bhi tumhaare liye vardaan!..aur us ko tum apane man chaahe swarthi dhang se dekhoge to anukulataa bhi tum ko le dubegi..pratikulataa bhi le dubegi..

binaa satsang ke to bhagavaan shrikrushn saath men hai aur ghodaa gaadi chalaa rahe phir bhi  arjun ka dukh nahi mitaa..jab arjun ko bhagavaan ne satsang sunaayaa tab arjun ko asaliyat samajh men aayi tab arjun kaa dukh tikaa nahi aur sukh mitaa nahi..arjun bolataa hai :-

nashto mohaa smruti labdhvaa

tav prasaadaat may achyut

meraa ulataa gyaan mit gayaa..baahar se sukh lene ki jo gandi aadat thi vo meet gayi..nashti moha..smruti labdhwaa..tav prasaadaat may achyut..ab main apane aap men shtit ho gayaa hun..karishyem vachanam tav..

duniyaa ke saari univrasitiyon ke sartfikito ke bandal lekar ghumataa to bhi meraa itanaa phaaydaa nahi hotaa jitanaa meraa guru dikshaa aur satsang se huaa..isliye

satsang ki aadhi ghadi

aadhi men puni aadh

tulasi sangat saadhu ki

 hare koti aparaadh l

Hari Om.

SHRI SADGURUDEV JI BHAGAVAAN KI MAHAA JAYJAYKAAR HO !!!!!

Galatiyon ke liye Prabhuji kshamaa kare…

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