ॐ महामंत्र की महानता

20  एप्रिल 2012 शाम ; गोरखपुर सत्संग अमृत

 

 

ह——रि———ओम्म्ममममम—- हरि  ओम…

हरि ॐ  ॐ  ॐ  ॐ  ॐ  ॐ  ॐ  ॐ … प्रभुजी ॐ ॐ ॐ  ॐ  मेरे जी ॐ ॐ ॐ ॐ प्यारेजी ॐ ॐ आत्मदेव ॐ ॐ परमात्मा ॐ ॐ शिव ॐ ॐ ॐ ॐ रामा जी ॐ ॐ शामा जी ॐ ॐ ॐ ॐ आनंद देवा ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ हा हा हा हा…..

(हास्य प्रयोग)

ये लगता तो बिल्कुल साधारण प्रयोग है..लेकिन इस के पिछे बड़ा अध्यात्मिक खजाना खुलने की सुव्यवस्था है..हमारे शरीर में 72 करोड़ 72 लाख नाड़ियाँ है..दुनिया की कोई औषधि , कोई टोनाटोटका इन सभी नाड़ियों को एक साथ सात्विक और पवित्र करे और इस ब्रम्‍हांड से पार वाली परम सत्ता से जोड़ दे ऐसी त्रिभुवन में कोई चीज़ नही है..है तो केवल यही है.. ओमकार!

और सारे शब्द आहत से पैदा होते है..ये ओमकार अनाहत  है..अनाहत (अनहद) नाद की शक्ति और सामर्थ्य का पूरा वर्णन हम नही कर पाएँगे..

अजब राज है मोहब्बत के फसाने का..

जिस को जितना आता है गाए चला जाता है..

अपना और औरों का मंगल किए जाता है..

भगवान की जो स्वाभाविक स्पंदन है ..जैसे बरफ का स्वभाव शीतलता है, सूरज का स्वभाव उष्णता है.. जल का स्वभाव रस मय  है..ऐसे ही परमात्मा का स्वाभाविक ध्वनि है वह ओमकार …

यह ओमकार भगवान ब्रम्हा ने नही बनाया..भगवान विष्णु ने नही बनाया..भगवान शिव ने नही बनाया..इस मंत्र की भगवान विष्णु ने खोज की है, इसलिए इस मंत्र के ऋषि भगवान नारायण कहे जाते है..

ऋषि तू मंत्र द्रष्तार; न कर्तार …

ऋषि मंत्रो के रहस्यों का द्रष्टा है,  कर्ता नही है..एक होता है निर्माण और दूसरी होती है खोज..तो भगवान नारायण ने इस मंत्र की खोज की है..खोज उसकी की जाती है जो पहेले से ही अस्तित्व में है…(ओंकार मंत्र पहेले से अस्तित्व में है)

बच्चा पैदा होते ही इस बात की चिंता नही करते की काला है की गोरा है/लंबा है की नाटा है.. लेकिन इस बात को देखते की बच्चा रोता है की नही..नही रोता तो उस को चुंडी मार के भी रुलाते है ता की उसकी ओंकार  चेतना उस के सारे अंगों में फैले; नही तो कोई अंग विकलांग ना रहे जाय..

ये बड़ा रहस्य मय  जप है..इस का जप करने वाला व्यक्ति और इस मंत्र के रहस्य को समझ के दूसरों की जैसी जैसी अवस्था है ऐसी साधना कराने वाला व्यक्ति धरती पे कही कही, कभी कभी मिलता है…(श्री सद्गुरुदेवजी भगवान की महा जयजयकार हो…)

नारायण हरि ..हरि  ओम हरि ..

मंत्र में 4 बातें होती है..

1) जो मंत्र आप जपते है वो आप के अधिकार क्षेत्र में आता है की नही आता..

2) मंत्र का देवता कौन है यह आप को पता चलना चाहिए..

3) मंत्र का ऋषि कौन है यह जानकारी होनी चाहिए..

4) मंत्र का क्लिं कौन है? मंत्र की शक्तियाँ जगाने की  मास्टर की कौन सी है?

ऐसे मंत्र का अर्थ सहित जप हो..तो इस ओंकार मंत्र के अर्थ का जितना भी विस्तार करे कम है..

(ओंकार मंत्र के प्रभाव का वर्णन जिस ग्रंथ में है वो थिओसॉफिकल सोसाइटी में रखा है उस की कहानी पूज्यश्री बापूजी ने सुनाई…

   ॐकार की महिमा का ग्रंथः प्रणववाद  )

इस ओंकार मंत्र को 120 माला रोज जपे और दुष्ट कर्म छोड़ दे तो एक साल में जैसा ईश्वर चाहिए वो मिलेगा..कृष्ण चाहिए, राम चाहिए, शिव चाहिए अथवा तात्विक रूप से जो मूल ईश्वर है उस का भी साक्षात्कार हो सकता है..

इस ओंकार मंत्र की 120 मालाएँ करे 7 सप्ताह, और (गाय के)दूध की खीर बना के सूर्य को भोग लगाए..और भ्रूमध्य में सूर्य नारायण का ध्यान करें..तो 7 जन्म की दरिद्रता मिट जाती है..अगले 7 जनम तक कुटुम्ब ख़ानदान में कंगालियत नही आएगी..

मैं अमेरिका के विज्ञानी जे मॉर्गन से सहेमत  हूँ की पेट, जिगर और मस्तक के रोग मिटाए ऐसा ओंकार का प्रभाव है..लेकिन यह सिर्फ़ ओंकार के एक श्लोक का प्रभाव है..ऐसे 22 हज़ार श्लोक है..

इस मंत्र के र्हस्व उच्चारण करने से पाप नाशीनी उर्जा पैदा होती है..

सत्संग में एक टक वक्ता को देखता है वो ही वक्ता की कृपा को पी पाता है और वक्ता के ज्ञान को पचा पाता है..

एक बार गुरुजी ने सत्संग किया और इतनी उँची बात कही तो मेरा ध्यान लग गया..मेरे गुरुजी ने मुझे ऐसी डांट चढ़ाई  की उस घड़ी को मैं हज़ार बार प्रणाम करूँ…उस के बाद मैं ने सत्संग को सुनने में कही भी बंदर छाप मन नही होने दिया..मंकी ब्राण्ड माइंड नही रखा..

नारायण हरि …हरि  ओम हरि …

भगवान को, गुरु को, ओंकार को अथवा किसी प्रिय पेड़ पौधे को एक टक देखते हुए ओंकार का गुंजन करो रोज 15 मिनट …तो थोड़े दिनों में इस महा मंत्र की महानता आप अनुभव करने लगोगे..

आप के जीवन में जो भी निरसता है, जो कमियाँ है अथवा बेवकूफी से आप फिसलते जाते हो फिर पछताते हो फिर फिसलते हो – ऐसे विकारों में गिरते गिरते आदमी अपने को कोसता है..जो लोग अपने को कोसते है वो अपने आप के दुश्मन होते है लेकिन जो अपने को दूसरों से विशेष मानते है  वे भी रावण के कतार में घसीटे जाते है.. अपने में दुनवी विशेषता लाकर अहंकार करना ये भी आप अपने लिए बंधन बनाते हो..और  अपने कोई दोष है उस को याद कर के आप कोसते हो तब भी आप अपने पैर पर कुल्हाड़ा मारते हो..वास्तविक में ये गुण और दोष , अच्छाइयाँ  और बुराइयाँ  तुम में थी नही, है नही, रहे सकती नही..ये सब तुम्हारे मन में है, तुम्हारी बुध्दी  में है, तुम्हारे शरीर में है- तुम में नही है….

लेकिन इस की अनुभूति कैसे हो?

बोले सदगुरु का ज्ञान  और  परमात्मा की उपासना से…ये परतें  हट जाते ही आप 33 करोड़ देवताओं से भी जो सन्मानित होते वो इंद्र भी आप के आगे  घुटना टेकेंगे इतने आप दिव्यात्मा महान आत्मा हो जाते हो…

मानुषी सुख की पराकाष्ठा हो तो भी उस से 100 गुना सुख गंधर्वों के पास होता है, गंधर्वों से 100 गुना सुख पितृलोक में होता है , पितृलोक से भी 100 गुना सुख अजानज देवता और करमज देवता को होता है ..और ऐसे करमज देवता और अजानज देवता से भी 100 गुना सुख, सामर्थ्य, प्रभाव, सत्ता जिस इंद्र देव के पास है वो इंद्र देव ब्रम्हवेत्ता महापुरुषों को घुटने टेकता है…ब्रम्‍हवेत्ता महापुरुष को -जिस ने ओंकार का रहस्य जान कर आत्म साक्षात्कार किया उस को- इंद्र घुटने टेकता की मुझे जब आनंद, सुख चाहिए तो अप्सराए नाचे , गंधर्व गाए, साजी साज़ बजाए तब मुझे मज़ा आए… लेकिन ये संत महापुरुष ओंकार का जप करते हुए ज़रा सा दृष्टि डालते तो लोग बैठे रहे जाते..लोगों को लौकिक असुविधाओं में भी चिन्मय सुख की प्राप्ति होती है..लाखो आदमियों को उन की वाणी और उन की निगाहे मजबूती से अध्यात्मिक यात्रा करा देती है..

जिस पद को पाए बिना इंद्र आदि देव  अपने को दीन मानते है उस पद को पा कर भी उस आत्मवेत्ता महापुरुष को  अभिमान नही होता..(श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो!!!!!)

आत्म साक्षात्कार के आगे इंद्र का सुख भी बौना है..तुलसीदास जी ने उस का वर्णन किया :

तीन टुक कोफिन की, भाजी बिना लूण

तुलसी हृदय रघुबीर बसे तो इंद्र बापुडा कूण ?

उपनिषदों में कहा :

पित्वा ब्रम्‍हरस योगिनोभुत्वा

उन्मत इंद्रोमपी रंकवत भास्यए

अन्य से का वार्ता ?

इंद्र भी कंगला लगता है आत्म साक्षातकारी पुरुष के आगे..दूसरे की क्या वार्ता करे?..ऐसा वैभव आप एक साल के अंदर पा सकते है ये ओंकार उपासना का चमत्कार है…

(  सच्चे संतो के दर्शन सत्संग से क्या क्या फ़ायदे होते है उस की खोज कर के समाज के आगे रखने वाले तैलंग स्वामी की कथा  पूज्यश्री बापूजी ने सुनाई :-

 tailang swami  link.   )

संत के दर्शन , सत्संग और ओंकार मंत्र जप की क्या महिमा है उस का बयान कौन कर सकता है?..भगवान अनंत है तो अनंत का वर्णन करेंगे तो वो अनंत कैसे रहेंगे?..हरि  अनंत , हरि  कथा अनंत..तो हरि  के नाम का महिमा भी तो अनंत है…

श्रीकृष्ण ने इस ओंकार मंत्र के आंतरिक साधना का रस चखाया था यशोदा जी को..वो यशोदा तुम्हारे साथ है अभी..भगवान को यश देनेवाली बुध्दी अध्यात्मिक अर्थ में यशोदा है..बुध्दी  का द्रष्टा अध्यात्मिक अर्थ में आत्म-कृष्ण है..आप भी  कृष्ण यशोदा की ओंकार उपासना वाली  मधुरता का स्वाद लो…कंठ में ओम ओम ओम ओम ओम ….

(पूज्यश्री बापूजी ने आनंद माधुर्य की प्राप्ति कराने वाली ओंकार साधना करवाई ..)

आप ने जो भी सत्ता पाई, योग्यता पाई तो उस से औरों की जीवनी शक्ति के ह्रास को रोक कर जीवनी शक्ति जीवन दाता की तरफ जाए तो आप का मंगल होगा…

ओम शांति.

श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो!!!!!

ग़लतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे…

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

19 April 2012 eve; Gorakhpur

hariiiiiii ooooooommmmmmmm hari om…

hari om om om om om om om om .prabhuji om om om mere ji om om om  pyaareji om om aatmdev om om paramaatmaa om om shiv om om om om raamaa ji om om shaamaa ji om om om om aanand devaa om om om om haa haa haa haa…..

(haasy prayog)

ye lagataa to bilkul saadhaaran prayog hai..lekin is ke pichhe badaa adhyaatmik khajaanaa khulane ki suvyavasthaa hai..hamaare sharir men 72 karod 72 laakh naadiyaa hai..duniyaa ki koyi aushadhi , koyi tonatotakaa in sabhi ko ek saath saatvik aur pavitr kare aur is bramhaand se paar waali param sattaa se jod de aisi tribhuvn men koyi chij nahi hai..hai to kewal yahi hai.. omkaar!

aur saare shabd aahat se paidaa hote hai..ye omkaar anaahad hai..anahad naad ki shakti aur saamarthy ka puraa varnan ham nahi kar paayenge..

ajab raaj hai mohabbat ke phasaane kaa..jis ko jitanaa aataa hai gaaye chalaa jaataa hai..apanaa aur auron kaa mangal kiye jaataa hai..

bhagavaan ki jo swaabhaavik spandan hai ..jaise baraf kaa swabhaav shitalataa hai, suraj ka swabhaav ushnataa hai.. jal kaa swabhaav ras may hai..aise hi paramaatmaa kaa swaabhaavik dhwani hai vah omkaar hai…

yah omkaar bhagavaan vishnu ne nahi banaayaa..bhagavaan vishnu ne nahi banaayaa..bhagavaan shiv ne nahi banaayaa..is mantr ki bhagavaan vishnu ne khoj ki hai, isliye is mantr ke rishi bhagavaan naaraayan kahe jaate hai..

rishi tu mantr drashtaar

na kartaar…

rishi mantro ke rahasyon kaa drashtaa hai, kartaa nahi hai..ek hotaa hai nirmaan aur dusari hoti hai khoj..to bhagavaan naaraayan ne is mantr ki khoj ki hai..khoj us ki ki jaati hai jo pahele se hi asthitv men hai…(OMKAAR mantr pahele se asthitv men hai)

bachchaa paidaa hote hi is baat ki chintaa nahi karate ki kaalaa hai ki goraa hai/lambaa hai ki naataa hai.. lekin is baat ko dekhate ki bachchaa rotaa hai ki nahi..nahi rotaa to us ko chundi maar ke bhi rulaate hai taa ki us ki omkaar  chetanaa us ke saare angon men phaile; nahi to koyi ang vikalaang naa rahe jaay..ye badaa rahasy may jap hai..is kaa jap karane waalaa vyakti aur is mantr ke rahasya ko samajh ke dusaron ki jaisi jaisi awasthaa hai aisi saadhanaa karaane waalaa vyakti dharati pe kahi kahi, kabhi kabhi milataa hai…(Shri Sadgurudevji Bhagavaan ki mahaa jayjaykaar ho…)

Naaraayan Hari..Hari Om Hari..

Mantr men 4 baaten hoti hai..

1) jo mantr aap japate hai vo aap ke adhikaar kshetr men aataa hai ki nahi aataa..

2) mantr kaa devataa kaun hai yah aap ko pataa chalanaa chaahiye..

3) mantr kaa rishi kaun hai yah jaanakaari honi chaahiye..

4) mantr kaa klim kaun hai? mantr ki shaktiyaa jagaane ki  maaster key kaun si hai?

aise mantr kaa arth sahit jap ho..to is omkaar mantr ke arth kaa jitanaa bhi vistaar kare kam hai..

(omkaar mantr ke prabhaav kaa varnan jis granth men hai vo theosophical society men rakhaa hai us ki kahaani pujyashri baapuji ne sunaayi…)

is omkaar mantr ko 120 mala roj jape aur dusht karm chhod de to ek saal men jaisaa iishwar chaahiye wo milegaa..krushn chaahiye, raam chaahiye, shiv chaahiye athavaa taatvik rup se jo mul iishwar hai us kaa bhi saakshaatkaar ho sakataa hai..

is omkaar mantr ki 120 maalaayen kare 7 saptaah, aur (gaay ke)dudh ki khir banaa ke sury ko bhog lagaaye..aur bhrumadhy men sury naaraayan kaa dhyaan karen..to 7 janm ki daridrataa mit jaati hai..agale 7 janam tak kutumb khaan daan men kangaaliyat nahi aayegi..

main amerikaa ke vigyaani je morgan se sahemat hun ki pet jigar aur mastak ke rog mitaaye aisaa omkaar kaa prabhaav hai..lekin yah sirf omkaar ke ek shlok kaa prabhaav hai..aise 22 hajaar shlok hai..

is mantr ke rhasw uchchaaran karane se paap naashini urjaa paidaa hoti hai..

satsang men ek tak vaktaa ko dekhataa hai vo hi vaktaa ki krupaa ko pee paataa hai aur vaktaa ke gyaan ko pachaa paataa hai..

ek baar guruji ne satsang kiyaa aur itani unchi baat kahi to meraa dhyaan lag gayaa..mere guruji ne mujhe aisi daant chadhaaii ki us ghadi ko main hajaar baar pranaam karun…us ke baad maine satsang ko sunane men kahi bhi bandar chhap man nahi hone diyaa..monkye brand mind nahi rakhaa..

Naaraayan Hari…Hari Om Hari…

bhagavaan ko, guru ko, omkaar ko athavaa kisi priy ped paudhe ko ek tak dekhate huye omkaar kaa gunjan karo roj 15 minat …to thode dinon men is mahaa mantr ki mahaanataa aap anubhav karane lagoge..

aap ke jeevan men jo bhi nirasataa hai, jo kamiyaan hai athavaa bewkufi se aap phisalate jaate ho phir pachhataate ho phir phisalate ho – aise vikaron men girate girate apane aadami apane ko kosataa hai..jo log apane ko kosate hai vo pane aap ke dushman hote hai lekin jo apane ko dusaron se vishesh maanate hai  ve bhi raawan ke kataar men ghasite jaate hai.. apane men dunavi visheshataa laakar ahankaar karanaa ye bhi aap apane liye bandhan banaate ho..aue apane koyi dosh hai us ko yaad kar ke aap kosate ho tab bhi aap apane pair par kulhaadaa maarate ho..waastavik men ye gun aur dosh , achhaayiyaa aur buraayiyaa tum men thi nahi, hai nahi, rahe sakati nahi..ye sab tumhaare man men hai, tumhaari budhdi men hai,tumhaare sharir men hai- tum men nahi hai….

lekin is ki anubhuti kaise ho?

 bole sadguru kaa gyaan aur  paramaatmaa ki upaasanaa se…ye parate hat jaate hi aap 33 karod devataaon se bhi jo sanmaanit hote vo indr bhi aap ke aage ghutanaa tekenge itane aap divyaatmaa mahaan aatmaa ho jaate ho…

maanushi sukh ki paraakaashtaa ho to bhi us se 100 gunaa sukh gandharvo ke paas hotaa hai, gandharvon se 100 gunaa sukh pitrulok men hotaa hai , pitrulok se bhi 100 gunaa sukh ajaanaj devataa aur karmaj devataa ko hotaa hai ..aur aise karmaj devataa aur ajaanaj devataa se bhi 100 gunaa sukh, saamarthy, prabhaav sattaa indr dev ke paas hai vo indr dev bramhvettaa mahaapurushon ko ghutane tekataa hai…bramhavetta mahaapurush ki jis ne omkaar kaa rahasy jaan kar aatm saakshaatkaar kiyaa us ko indr ghutane tekataa ki mujhe jab aanand, sukh chaahiye to apsaraaye naachi, gandharv gaaye, saaji saaj bajaaye tab mujhe majaa aaye… lekin ye sant mahaapurush omkaar kaa jap karate huye jaraa saa drushti daalate to log baithe rahe jaate..logon ko laukik asuvidhaaon men bhi chinmay sukh ki praapti hoti hai..laakho aadamiyon ko un ki waani aur un ki nigaahe majabuti se adhyaatmik yaatraa karaa deti hai..

jis pad ko paaye binaa indr aadi dev  apane ko din maanate hai us pad ko paa kar bhi us aatm vettaa mahaa purush ko  abhimaan nahi hotaa..(Shri Sadgurudev ji Bhagavaan ki mahaa jayjaykaar ho!!!!!)

aatm saakshaatkaar ke aage indr ka sukh bhi baunaa hai..tulasidaas ji ne us kaa varnan kiyaa :

tin tuk kofin ki bhaaji binaa lun

tulasi hruday raghubir base to indr baapudaa kun?

upanishado men kahaa :

pitvaa bramharas yoginobhutvaa

unmat indromapi rank vat bhaasyet

anya se kaa vaartaa ?

indr bhi kangalaa lagataa hai aatm saakshaatkaari purush ke aage..dusare ki kyaa vaartaa kare?..aisa vaibhav aap ek saal ke andar paa sakate hai ye omkaar upaasanaa kaa chamatkaar hai…

(  sachche santo ke darshan satsang se kyaa kyaa phaayade hote hai us ki khoj kar ke samaaj ke aage rakhane waale Tailang swaami ki kathaa  Pujyashri Bapuji ne sunaayi )

sant ke darshan , satsang aur omkaar mantr jap ki kyaa mahimaa hai us kaa bayaan kaun kar sakataa hai?..bhagavaan anant hai to anant kaa varnan karenge to vo anant kaise rahenge?..Hari anant , Hari kathaa anant..to Hari ke naam kaa mahimaa bhi to anant hai…

shrikrushn ne is omkaar mantr ke aantarik saadhanaa kaa ras chakhaayaa thaa yashodaa ji ko..vo yashodaa tumhaare saath hai abhi..bhagavaan ko yash denewaali budhdi adhyaatmik arth men yashodaa hai..budhdi kaa drashtaa adhyaatmik arth men aatmaa-krushn hai..aap bhi  krushn yashodaa ki omkaar upaasanaa waali  madhurataa kaa swaad lo…kanth men om om om om om ….

(Pujyashri Bapuji ne aanand maadhury ki praapti karaane waali omkaar saadhanaa karavaayi ..)

aap ne jo bhi sattaa paayi, yogyataa paayi to auron ki jivani shakti ke hraas ko rok kar jivani shakti jeevan daataa ki taraf jaaye to aap kaa mangal hogaa…

OM SHAANTI.

SHRI SADGURUDEV JI BHAGAVAAN KI MAHAA JAYAJAYKAAR HO!!!!!

Galatiyon ke liye Prabhuji kshamaa kare…

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One Comment on “ॐ महामंत्र की महानता”

  1. rajesh kumawat Says:

    hari om hari om hari om jai maha guru dev hari hai om,,, pram pujey bapu ke charno mai naman


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