जिधर देखता हूँ खुदा ही खुदा है..

15 एप्रिल 2012 –सुबह ; लखनौ सत्संग अमृत

साधक के 4 गुण है : शम ,  दम,  तितिक्षा और समाधान .

शम :-  शम माना भगवान के नाम का उच्चारण कर के मन के संकल्प विकल्प रोकना..इस को बोलते शम…

शम माना मन की चंचलता का नियंत्रण..चंचल तो रहेगा मन लेकिन सामान्य आदमी 1 घंटे में मानो 1000 संकल्प करता है तो शमवान 400/500/300/200 पे मन को ले आएगा..उस के मन के संकल्प में ताकद  भी होगी…उस का आशीर्वाद, बददुवा(वर और श्राप) फलने लगेगा..तो शमवान है वो आदरणीय हो जाता है..वंदनीय हो जाता है..सन्मान  के पात्र हो जाता है..

शम माना मन को रोकने की टेक्निक…

हम ने साधन काल में क्या किया की स्वस्तिक बनाया और फिर अपने आँखों की सीध में दीवार पर पुठ्ठे पर स्वस्तिक रख दिया और स्वस्तिक के बीच एक पीला बिंदु किया और जप करते उसे देखते..उस का रंग बदल जाता है..एकाग्रता होती है..चमत्कार होने लगते है..

शम माना मन को रोकना..

दम :-

दम माना इंद्रियों को रोकना..इंद्रियों की चंचलता नियंत्रित करना..

फिर मन इधर उधर दौड़े तो मन को बुरी जगह से रोक कर अच्छी जगह पर लगाए रखना इस को बोलते दम..

तितिक्षा :-

आप यहा कई घंटों से गरमी सहे रहे, धूल सहे रहे, भूख-प्यास सहे रहे..किस के लिए ?  ईश्वर के लिए…तो आप ये तितिक्षा कर रहे…आप अभी तीसरे पायदान पर हो..

आप जो हवन कर रहे- यज्ञ  कर रहे, कुछ  भी शुभ कर रहे तो बोले किस के लिए ? बोले उस प्रभु की प्रसन्नता के लिए..शरीर की वाह वाही के लिए नही..

कस्मिन देवाय हविष्यते

आत्मदेवाय हविष्यते

उस आत्म-परमात्म देव को प्रसन्न करने के लिए..

तो शम-दम-तितिक्षा..

तितिक्षा :-

यह तीसरा सदगुण है- मनुष्यता का..महान पुरुष बनने का..ये तीसरा सोपान है तितिक्षा….

तितिक्षा माना कष्ट सहेना..

और चौथा गुण है समाधान.

समाधान :-

हमारी श्रध्दा टूटे ऐसा कही व्यवहार हुआ, ऐसी कोई अफवाह सुनी, ऐसा कोई किताब पढ़ा, ऐसा कोई दुर्जनो का संपर्क हुआ तो हम भगवान के प्रति , शास्त्र के प्रति ज़रा मन डगू मगू हो जाए तो समाधान करना चाहिए..श्रध्दा  से ईश्वर की महानता की तरफ समाधान करना चाहिए की हमें समझ में नही आता लेकिन ईश्वर का अस्तित्व है..

इलाहाबाद में अल्फर्ट पार्क जो अब मोतीलाल नेहरू पार्क के नाम से जाना जाता है..एक साधु रामायण पर सत्संग करते थे..तो शामलाल सक्सेना  में से ईसाई बना छोरा सम्यूयल  सक्सन  जो पी .एच डी. करने को वहाँ कही हॉस्टेल में रहेता था..(ईश्वर का अस्तित्व का परिचय देनेवाली ये सत्य घटित घटना पूज्यश्री बापूजी ने सुनाई.. please visit : RAAMAAYAN SACHCHAA HAI TO CHAMATKAAR DIKHAAO!)

चमत्कार देखेंगे तब मानेंगे..रामायण सच्चा नही, राम जी सच्चे नही, गीता सच्ची नही बोलनेवाले सम्यूयल  सक्सन  हिंदू से  ईसाई बने लड़के ने चमत्कार हुआ तब ईश्वर को माना…

लेकिन इन ग्रंथों से हमारा जीवन सही हो जाता है..जो बोलते ये ग़लत है सच्चे नही , लेकिन इन का पाठ , स्मरण, आचरण से जीवन सही हो जाता है..तो ये सही है मान लेना चाहिए..

जैसे इस घड़ियाल को बनानेवाला कौन है तुम नही जानते..तुम ने नही देखा.. तुम्हारे सामने यह घड़ियाल नही बनी..कौन सी फॅक्टरी में बनी ये भी तुझे पता नही ..लेकिन ये घड़ियाल का अस्तित्व  दिखाता है की कही ना कही फॅक्टरी में बनी होगी और बनाने वाला मानुषी दिमाग़ होगा..जब घड़ियाल है तो उस को बनाने वाला है ये  मानना पड़ेगा ..ऐसे ही सूरज है,चंदा है, पृथ्वी है – ये किसी मनुष्य की बनावट नही है..फिर भी ये दिखते है तो इस को बनाने वाला कोई है..और वो नियंता भी है..ऋतु परिवर्तन भी होते है..गरमियों में गरमी पड़ती, बारिश में बारिश होती..वसंत ऋतु में फूल खिलते है..ये सब जड़ के कारण नही होता..इस के पिछे दिमाग़ है चैत्यन्य का…और उस की सत्ता भी है..अच्छा काम करते तो बुध्दी में बल आता है और ग़लत करते तो धड़कने बढ़ती है..और ज़्यु ज़्यु अच्छा काम करते त्यू त्यू  बहुतों का हितेशी हमारे हृदय में प्रसन्न होता है और हमारा ओज, बल, प्रभाव बढ़ा देता है..और ज्यो ज्यो हम दूसरों को दबोचना चाहते है त्यो त्यो हम से ऐसी ग़लती करवाता है की हम भी दबोचे जाते है..

http://youtu.be/g6DrGFdEO-I

 

अध्यात्मिक बल वास्तविक में सब बलों से उँचा है..एक आधीभौतिक बल होता है , दुसरा आधीदैविक बल होता है..

हीरण्यकश्यपू और रावण के पास आधीदैविक बल था..उन की प्रजा को सोने के घर थे.. बिना खेड़े, बिना बोए प्रजा को धनधान्य  संपदा मिल जाती थी..

मैं  एक सवाल करता हूँ की  हर पार्टी बोलती हम ये कर देंगे वो कर देंगे खाली हमें सत्ता सोपों तो क्या वे हमें सोने के घर बना के दे सकते है क्या? केवल हाउस टॅक्स माफ़ करने का भी नेताओं में दम नही है..बिजली का दाम नही बढ़ाएँगे 5 साल तक ये वचन देना भी उन के बस का नही है…

तो जो सोने की लंका, सोने का हीरण्यपुर बनाने के बाद भी प्रजा के दुख नही मिटा सके, अपने दुख नही मिटा सके..तो भगवान के रस के बिना नीरस जीवन में सोने की लंका आ गयी तो क्या और सुंदरी पत्नी , ललनाए होती तो भी इच्छा वासना ऐसी बढ़ गयी की माँ सीता की तरफ भी भागा आया और उसी में उस का विनाश हुआ -इतिहास साक्षी है…

रावण को लालनाओ के हाव भाव का शोक था तो हीरण्यकश्यपू को शोक था की जगत में मैं ही एक मात्र परमेश्वर हूँ मानने का..उसी के घर प्रलहाद अवतरित हुए….प्रलहाद आदर सहित बोलता की, भगवान सर्वत्र है..लेकिन किसी चीज़ को पकड़े रखना और किसी स्थिति को बनाए रखने की वासना जीव की होती है..ईश्वर तो सब का मंगल चाहते है..सब को अपना रूप मानते है..मैं इश्वर हूँ और दूसरे जीव है-तुच्छ है ऐसा ईश्वर का नज़रिया नही हो सकता…ये सत्संग से हमने सुना है..ईश्वर प्रेम स्वरूप है, व्यापक है और ईश्वर  किसी को अपना दास , गुलाम बना कर पूजवाना नही चाहते..लेकिन लोग उन को स्वामी मान कर सेवा करते तो ईश्वर के गुण उन में आते है..लेकिन ईश्वर किसी को तुच्छ और अपने को श्रेष्ठ नही मानते…”

प्रलहाद को हीरण्यकश्यपू ने सारे उपाय कर के मारना चाहा..लेकिन प्रलहाद का बाल बांका ना हुआ…

अहम किसी की भी कुर्बानी देकर अपना विस्तार और विशेषता चाहता है..अहंकार का पेट नही भरता..प्रेम के पेट में कोई ऐसी वासना नही होती..अहंकार लेकर खुश होता है लेकिन प्रेम देकर खुश होता है..

राम और रावण में ये फ़र्क है की राम प्रेम मूर्ति है और रावण अहंकार मूर्ति है..कंस  अहंकार मूर्ति है और कृष्ण प्रेम मूर्ति है..हीरण्यकश्यपू अहंकार मूर्ति है और प्रलहाद प्रेम मूर्ति है…

कई माइयाँ बोलती मैं ने ये अनुष्ठान किया, वो किया…ऐसा करो मेरे करो की बास मुझे भगवान की प्राप्ति हो जाए..

अरे! भगवान की प्राप्ति सदा है! केवल अपनी समझ बदल दो…अभी जो दिख रहा वो भगवान से अलग हो के कुछ दिखता है क्या?..सर्व व्यापक परमेश्वर है..आप सर्व व्यापक परमेश्वर की समीक्षा कीजिए..सर्व व्यापक की प्रतीक्षा मत कीजिए…

चलो तो चले आसमान देखे

आसमान में सब तारे

तारों का चाँद भी तू

तेरा मकान आला

जहा तहा बसा है तू..

चलो तो चले बाजार देखे

बाजार में सब आदम

आदम का दम भी तू

तेरा मकान आला

जहा तहा बसा है तू..

चलो तो चले दरिया देखे

दरिया में सब राहेब

राहेब का रब भी तू

तेरा मकान आला

जहा तहा बसा है तू..

कीड़ी में तू छोटा दिखता है..हाथी में तू बड़ा दिखता है…महावत में तू अनुशासन करता है..बच्चा हो कर उवा उवा तू ही करता है और माँ  होकर दुलार भी तू करता है प्रभुजी ..( ऐसा नजरिया बन गया तो ) भगवत प्राप्ति यूँ हो गयी!वो दूर नही, दुर्लभ नही..परे नही पराए नही..

ऐसा हो जाए, ये हो जाए ये हमारी गंदी आदत हम को ईश्वर से दूर करती है..

और दूसरी गलती ये है की अभी ईश्वर नही है, बाद में कुछ  धड़ाका-भड़ाका होगा तभी ईश्वर आएगा इस वहेम  में आदमी उलझ जाते है..हम भी उलझे थे..लेकिन गुरुजी ने सब उलझन मिटा दी..तो गुरुजी की बात आप भी मान लो की – वासुदेव सर्वं इति ll

सर्वत्र वाशुदेव ही वाशुदेव है…

जिधर देखता हूँ खुदा ही खुदा है..

खुदा से ना कोई चीज़ जुदा है…

जब अवल और आख़िर खुदा ही खुदा है..

तो अब भी वोही है , क्या उस के सिवा है?

है आगा जो अंबा जरों का जिगर में

मियाँ से ना हरगिज़ वो गैर हो रहा है

जिसे तुम दुनिया समझते हो गाफील

वो कुल हक़ ही हक़ है, ना जुदा है ना बका है..

हक़ ही हक़ है..चैत्यन्य  ही चैत्यन्य  है!

हाँ !चैत्यन्य  के 2 विभाग है..एक चैत्यन्य  परब्रम्‍ह परमात्मा और एक उस की अष्टदा प्रकृति..जैसे पुरुष और पुरुष की शक्ति..ऐसे ही परमात्मा और परमात्मा की शक्ति..परमात्मा की शक्ति का नाम है प्रकृति..उस में 8 गुण होते है- पृथ्वी, जल, तेज, वायु,आकाश ये 5 भूत बहिरकरण और मन, बुध्दी और अहंकार ये अंतकरण -इस अष्टदा प्रकृति से “मैं” भिन्न हूँ ऐसा भगवान ने बोल के कृपा कर के साधको को जल्दी अपना अनुभव करने की दिशा दी …

भूमि रापो अनलो वायु

खं मनो बुध्दी  रेवच

अहंकार इत्येव

मैं भिन्न प्रकृति अष्टदा

भगवान कहेते मैं इस अष्टदा प्रकृति से भिन्न हूँ…मन बदलता उस को हम जानते है..बुध्दी  भी बदलती उस को भी हम जानते है..अहंकार भी बदलता है, पाँच भौतिक शरीर बदलता है उस को भी हम जानते है..तो जानने वाला नित्य आत्मा है..और बदलने वाला अनित्य – आत्मा का विलास है..तो जो बदलता है वो प्रकृति है..और जो  बदलाहट को जानता है वो मेरा परमात्मा है..वो अभी है.. आएगा तो भी उपदेश देगा की उसी को जानो…

कृष्ण को देख रहा है अर्जुन फिर भी अर्जुन का दुख दूर नही हुआ..जब तत्वज्ञान दिया तब अर्जुन बोलता है मेरा मोह नष्ट हो गया..अर्थात विपरीत मान्यता मेरी मिट गयी..

तो खाली विपरीत मान्यता मिटते ही भगवान का साक्षात्कार है..

dono ek hi hai!

विपरीत मान्यता क्या है?

जैसे कहाँ  राजा भोज और कहाँ गंगू तेली..तो  गंगू तेली का तेल का धन्दा छोड़ दो और राजा भोज का तखत छोड़  दो तो मनुष्यता में दोनो एक है..ऐसे ही भगवान का आत्मा आदि नारायण है और हम फलानी बाई फलानी माई  है; तो माई का शरीर छोड़  दो और भगवान का वैकुंठपना छोड़  दो बाकी चैत्यन्य  दोनो एक है!

तो भागवत में कथा आती है..राजा प्राचिनबहिर के 10 बेटे थे..(पूज्यश्री बापूजी ने प्रचेताओं की कथा  सुनाई)..भगवान शिव का और भगवान नारायण का दर्शन करने के बाद भी अगर परम कल्याण चाहिए तो अपने आप का दर्शन करना होता है..सुख आता चला जाता, दुख आता चला जाता, बचपन आता चला जाता, जवानी आती चली जाती फिर भी जो  ज्यूँ का त्यू  रहेता है वो मैं कौन हूँ? …मैं शरीर नही हूँ..मैं मान नही हूँ..मैं अहंकार नही हूँ..अहंकार बदलता है, मन बदलता है, बुध्दी  बदलती है फिर भी जो नही बदलता मैं वो आत्मा हूँ…चैत्यन्य  हूँ..ओम ओम ओम ओम ओम….

ॐ शांती

श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जय जयकार हो !!!!!

गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे…

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

15 April 2012-subah; Lakhanau Satsang Amrut

saadhak ke 4 gun hai …sham, dam, titikshaa aur samaadhaan…

sam maanaa bhagavaan ke naam kaa uchchaaran kar ke man ke sankalp vikalp rokanaa..is ko bolate sham

sham maanaa man ki chanchalataa kaa niyantran..chanchal to rahegaa man lekin saamaanya aadami 1 ghante men maano 1000 sankalp karataa hai to shamawaan 400/500/300/200 pe man ko le aayegaa..us ke man ke sankalp men taakad bhi hogi…us kaa aashirwaad, bad duwaa(var aur shraap) phalane lagegaa..to shamawaan hai vo aadaraniy ho jaataa hai..vandaniy ho jaataa hai..sanmaan ke paatr ho jaataa hai..

sham maanaa man ko rokane ki technik…

ham ne saadhan kaal men kyaa kiya aki swastik banaayaa aur phir apane aankhon ki sidh men diwaar par puththe par swastik rkh diyaa aur swastik ke bich ek pilaa bindu kiyaa aur jap karate use dekhate..us ka rang badal jaataa hai..ekaagrataa hoti hai..chamatkaar hone lagate hai..

sham maanaa man ko rokanaa..

dam maanaa indriyon ko rokanaa..

indriyon ki chanchalataa niyantrit karanaa..

phir man idhar udhar daude to man ko buri jagah se rok kar achhi jagah par lagaaye rakhanaa is ko bolate dam..

titikshaa

aap yahaa kayi ghanton se garami sahe rahe,dhul sahe rahe, bhukh-pyaas sahe rahe..kis ke liye? iishwar ke liye…to aap ye titikshaa kar rahe…aap abhi tisare paaydaan par ho..

aap jo havan kar rahe-yagy kar rahe, kuchh bhi shubh kar rahe to bole kis ke liye? bole us prabhu ki prasannataa ke liye..sharir ki waah waahi ke liye nahi..

kasmin devaay havishyate

aatmdevaay havishyate

us aatma-paramaatm dev ko prasann karane ke liye..

to sham-dam-titikshaa..

titikashaa yah tisaraa sadgun hai..manushyataa kaa..mahaan purush banane kaa..ye tisaraa sopaan hai titikshaa..

titikshaa maanaa kasht sahenaa..

aur chauthaa gun hai samaadhaan.

samaadhaan

hamaari shradhdaa tute aisaa kahi vyavahaar huaa, aisi koyi afawaah suni, aisaa koyi kitaab padhaa, aisaa koyi durjano ka sampark huaa to ham bhagavaan ke prati , shaastr ke prati jaraa man dagu magu ho jaaye to samaadhaan karanaa chaahiye..shradhdaa se iishwar ki mahaanataa ki taraf samaadhaan karanaa chaahiye ki hamen samajh men nahi aataa lekin iishwar kaa asthitv hai..

iilaahaabad men alfart paark jo ab motilaal neharu paark ke naam se jaanaa jaataa hai..ek saadhu raamaayan par satsang karate the..to shaamlaal saxenaa men se iisaai banaa chhoraa samyual saaxan jo P.hd. karane ko wahaan kahi hostel men rahetaa thaa..(iishwar ka asthitv kaa parichay denewaali ye satya ghatit ghatanaa Pujyashri Baapuji ne sunaayi..)

chamatkaar dekhenge tab maanenge..raamaayan sachchaa nahi, raam ji sachche nahi, gitaa sachchi nahi bolanewaale samyual saaxan hindu se iisaai bane ladake ne chamatkaar huaa tab maanaa…

lekin in granthon se hamaaraa jeevan sahi ho jaataa hai..jo bolate ye galat hai sachche nahi , lekin in kaa paath , smaran, aacharan se jeevan sahi ho jaataa hai..to ye sahi hai maan lenaa chaahiye..

jaise is ghadiyaal ko banaanewaalaa kaun hai tum nahi jaanate..tum ne nahi dekhaa.. tumhaare saamane yah ghadiyaal nahi bani..kaun si factory men bani ye bhi tujhe pataa nahi ..lekin ye ghadiyaal kaa asthitv  dikhaataa hai ki kahi na kahi factory men bani hogo aur banaane waalaa maanushi dimaag hogaa..jab ghadiyaal hai to us ko banaane waalaa hai ya maananaa padegaa ..aise hi suraj hai,chandaa hai, pruthvi hai – ye kisi manushy ki banaavat nahi hai..phir bhi ye dikhate hai to is ko banaane waalaa koyi hai..aur vo niyantaa bhi hai..rutu parivartan bhi hote hai..garamiyon men garami padati, baarish men baarish hoti..vasant rutu men phool khilate hai..ye sab jad ke kaaran nahi hotaa..is ke pichhe dimaag hai chaityany kaa…aur us ki sattaa bhi hai..achhaa kaam karate to budhdi men bal aataa hai aur galat karate to dhadakane badhati hai..aur jyu jyu achhaa kaam karate tyu tyu bahuton kaa hiteshi hamaare hruday men prasann hotaa hai aur hamaaraa oj, bal, prabhaav badhaa detaa hai..aur jyo jyo ham dusaron ko dabochanaa chaahate hai tyo tyo ham se aisi galati karawaataa hai ki ham bhi daboche jaate hai..

*********

adhyaatmik bal waastavik men sab balon se unchaa hai..ek aadhi bhautik bal hotaa hai , duasaraa aadhi daivik bal hotaa hai..

hiranyakashyapu aur raawan ke paas aadhi daivik bal tha..un ki prajaa ko sone ke ghar the.. binaa khde, binaa boye prajaa ko dhan dhaany sampadaa mil jaati thi..

mai ek sawaal karataa hun ki  har paarty bolati ham ye kar denge wo kar denge khaali hamen sattaa sopon to kyaa ve hamen sone ke ghar banaa ke de sakate hai kya? kewal house tax maaph karane kaa bhi netaaon men dam nahi hai..bijali kaa daam nahi badhaayenge 5 saal tak ye vachan denaa bhi un ke bas kaa nahi hai…

to jo sone ki lankaa, sone kaa hiranyapur banaane ke baad bhi prajaa ke dukh nahi mitaa sake, apane dukh nahi mitaa sake..to bhagavaan ke ras ke binaa niras jeevan men sone ki lankaa aa gayi to kyaa aur sundari patni , lalanaaye hoti to bhi ichhaa waasanaa aisi badh gayi ki maa sitaa ki taraf bhi bhaagaa aayaa aur usi men us kaa vinaash huaa -itihaas saakshi hai…

raawan ko lalanaao ke haav bhaav ka shok thaa to hiranyakashyapu ko shok thaa ki jagat men main hi ek maatr parameshwar hun maanane kaa..usi ke ghar pralhaad awatarit huye….aadar sahit bolataa ki,”bhagavaan sarvatr hai..lekin kisi chij ko pakade rakhanaa aur kisi sthiti ko banaaye rakhane ki waasanaa jeev ki hoti hai..iishwar to sab kaa mangal chaahate hai..sab ko apanaa rup maanate hai..main iishwar hun aur dusare jeev hai-tuchh hai aisaa iishwar kaa najariyaa nahi ho sakataa…ye satsang se hamane sunaa hai..iishwar prem swarup hai vyaapak hai aur iishwar  kisi ko apanaa daas , gulaam banaa kar pujavaanaa nahi chaahate..lekin log un ko swaami maan kar sewaa karate to iishwar ke gun un men aate hai..lekin iishwar kisi ko tuchh aur apane ko shreshth nahi maanate…”

pralhaad ko hiranyakashyapu ne saare upaay kar ke maaranaa chaahaa..lekin pralhaad kaa baal baankaa na huaa…

aham kisi ki bhi kurbaani dekar apanaa vistaar aur visheshataa chaahataa hai..ahankaar kaa pet nahi bharataa..prem ke pet men koyi aisi waasanaa nahi hoti..ahankaar lekar khush hotaa hai lekin prem dekar khush hotaa hai..

raam aur raawan men ye phark hai ki raam prem murti hai aur raawan ahankaar murti hai..kans ahankaar murti hai aur krushn prem murti hai..hiranyakashyapu ahankaar murti hai aur pralhaad prem murti hai…

******

kayi maayiyaan bolati maine ye anushthaan kiyaa, vo kiyaa…aisaa karo mere k obas bhagavaan ki praapti ho jaaye..

are! bhagavaan ki praapti sadaa hai! kewal apani samajh badal do…abhi jo dikh rahaa vo bhagavaan se alag ho ke kuchh dikhataa hai kyaa?..sarv vyaapak parameshwar hai..aap sarv vyaapak parameshwar ki samikshaa kijiye..sarv vyaapak ki pratikshaa mat kijiye…

chalo to chale aasamaan dekhe

aasamaan men sab taare

taaron kaa chaand bhi tu

teraa makaan aalaa

jahaa tahaa basaa hai tu..

chalo to chale baajaar dekhe

baajaar men sab aadam

aadam kaa dam bhi tu

teraa makaan aalaa

jahaa tahaa basaa hai tu..

chalo to chale dariyaa dekhe

dariyaa men sab raaheb

raaheb kaa rab bhi tu

teraa makaan aalaa

jahaa tahaa basaa hai tu..

kidi men tu chhotaa dikhataa hai..haathi men tu badaa dikhataa hai…mahaavat men tu anushaasan karataa hai..bachchaa ho kar uwaa uwaa tu hi karataa hai aur maa hokar dulaar bhi tu karataa hai prabhuji ..bhagavat praapti yun ho gayi!vo dur nahi, durlabh nahi..pare nahi paraaye nahi..

aisaa ho jaaye, ye ho jaaye ye hamaari gandi aadat ham ko iishwar se dur karati hai..

aur dusaraa abhi iishwar nahi hai, baad men kuchh dhadaakaa-bhadaakaa hoga atabhi iishwar aayegaa is wahem men aadami ulajh jaate hai..ham bhi ulajhe the..lekin guruji ne sab ulajhan mitaa di..to guruji ki baat aap bhi maan lo ki vaasudev sarvam iti ll

sarvatr vaashudev hi vaashudev hai…

jidhar dekhataa hun khudaa hi khudaa hai..

khudaa se naa koyi chij judaa hai..

jab awal aur aakhir khudaa hi khudaa hai..

to ab bhi wohi hai

kyaa us ke siwaa hai?

hai aagaa jo ambaa jaron kaa jigar men

miyaan se naa haragij vo gair ho rahaa hai

jise tum duniyaa samajhate ho gaafil

vo kul haq hi haq hai

naa judaa  hai naa bakaa hai..

haq hi haq hai..chaityanya hi chaityanya hai!haan!chaityany ke 2 vibhaag hai..ek chaityany parabramh paramaatmaa aur ek us ki ashtadaa prakruti..jaise purush aur purush ki shakti..aise hi paramaatmaa aur paramaatmaa ki shakti..paramaatmaa ki shakti kaa naam hai prakruti..us men 8 gun hote hai- pruthvi, jal, tej, vaayu,aakaash ye 5 bhut bahirkaran aur man, budhdi aur ahankaar ye antkaran -is ashtadaa prakruti se “main” bhinn hun aisaa bhagavaan ne krupaa kar ke sadhako ko jaldi apanaa anubhav karane ki dishaa di …

bhumi raapo anlo vaayu

kham mano budhdi rewach

ahankaar etyev

main bhinn prakruti ashtadaa

bhagavaan kahete main is ashtadaa prakruti se bhinn hun…man badalataa us ko ham jaanate hai..budhdi bhi badalati us ko bhi ham jaanate hai..ahankaar bhi badalataa hai, panch bhautik sharir badalataa hai us ko bhi ham jaanate hai..to jaanane waalaa nitya aatmaa hai..aur badalane waalaa anity – aatmaa kaa vilaas hai..to jo badalataa hai vo prakruti hai..aur jo n badalaahat ko jaanataa hai vo meraa paramaatmaa hai..vo abhi hai..aayegaa to bhi upadesh degaa ki usi ko jaano…

krushn ko dekh rahaa hai arjun phir bhi arjun kaa dukh dur nahi huaa..jab ye tatv gyaan diyaa tab arjun bolataa hai meraa moh nasht ho gayaa..arthaat viparit maanyataa meri mit gayi..

to khaali viparit maanyataa mitate hi bhagavaan kaa saakshaatkaar hai..

********

viparit maanyataa kya hai?

jaise kahaa raajaa bhoj aur kahaan gangu teli..to  gangu teli kaa tel kaa dhandaa chhod do aur raajaa bhoj kaa takhat chhod do to manushyataa men dono ek hai..aise hi bhagavaan kaa aatmaa aadi naaraayan hai aur ham phalaani baai phalaani maaii hai; to maai kaa sharir chhod do aur bhagavaan kaa vaikunth panaa chhod do baaki chaityanya dono ek hai!

to bhaagavat men kathaa aati hai..raja praachinbahir ke 10 bete the..(pujyashri Baapuji ne Prachetaaon ki kat aa sunaayi)..bhagavaan shiv ka aur bhagavaan naaraayan kaa darshan karane ke baad bhi agar param kalyaan chaahiye to apane aap kaa darshan karanaa hotaa hai..sukh aataa-chalaa jaataa, dukh aataa chalaa jaataa, bachapan aataa chalaa jaataa, jawaani aati chali jaati phir bhi jyon jyun kaa tyun rahetaa hai vo main kaun hun? …main sharir nahi hun..main man nahi hun..main ahankaar nahi hun..ahankaar badalataa hai, man badalataa hai, budhdi badalati hai phir bhi jo nahi badalataa main vo aatmaa hun…chaityanya hun..om om om om om….

OM SHAANTI.

SHRI SADGURUDEV JI BHAGAVAAN KI MAHAA JAYJAYKAAR HO!!!!!

Galatiyon ke liye Prabhuji kshamaa kare….

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