संसारसागर तैरने की तरकीब (अहमदाबाद पूनम स्पेशल )

अहमदाबाद पूनम सत्संग अमृत; 6 एप्रिल 2012 .

आज एक व्यक्ति मिला..बोला, पहेले बहोत ठीक ठाक था..बिल्डर का काम करता था..पूनम भरता था..जब पूनम छोड़ी तो मेरा सब अफे-दफे हो गया है…विकार भी सताते है..

तो धन कितना भी मिल जाए..सत्ता और सौंदर्य कितना भी मिल जाए..जीवन में व्रत और नियम नही है तो जीवन फिसलने में देर नही होती..

समर्थ रामदास ने कहा दासबोध ग्रंथ में : भैंस के सींग पर रायी का दाना जितनी देर ठहेरता है उतनी देर भी अगर अ-सावधान रहे तो पुराने संस्कार, पुराने विकार गिरा सकते है…

 इसलिए भगवान ने कहा:

भजन्ते माम दृढ़ व्रतः ll

 मुझे दृढ़ता से भजे…दृढ़ नियम हो, दृढ़ व्रत हो..जितनी व्रत नियम में  दृढ़ता होगी उतना संकल्प बल होगा, श्रध्दा बल होगा और सत्य के नज़दीक होंगे…

अपने जीवन में दृढ़ नियम रखो..की इतनी देर नींद से पहेले शांत होना है, इतनी देर नींद के बाद शांत होना है..और बीच बीच में थोड़ा शांत होना…शांत होना माने निसंकल्प होना..

हज़ारो तीर्थों का पुण्य, हज़ारो मालाओं का पुण्य, हज़ारो उपवासो का पुण्य निसंकल्प होने के आगे  छोटा  हो जाएगा..ओंकार का उच्चारण किया और चुप हो गये..

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

कोई कितना भी जेलसी के कारण तुम्हारी निंदा करता है या तुम को दुश्मन मानता है लेकिन तुम उस को दुश्मन नही मानो…ऐसे कुत्तों से सावधान रहो..

एक कुत्ता भोंकता है, उस को देख के दूसरा कुत्ता भोंकता, तीसरा भोंकता…  सारी रात गाँव के कुत्ते भोंकते  रहेते लेकिन गाँववाले काम करते, रोटी खाते, टीवी देखते, सो जाते ..कुत्ते भोंकते भोंकते थक जाते!..बिल्कुल सच्ची बात है.. 🙂

मैं अगर झूठ बोलू तो मैं भी मरू तुम भी मरो..ऐसी कसम पहेली बार खाता हूँ! 🙂 ..आज तक तो मैं बोलता की मैं झूठ बोलू तो तुम मरो..अभी ये और वीवीआईपी कसम है!…मैं पहेले मरू फिर तुम मरो मेरे साथ 🙂 ..है क्या झूठी बात?…ये संसार है…

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

आम आदमी की तकलीफ़ क्या है?

उस की तकलीफ़ है भय और शोक, चिंता..ये सभी की है..कोई नही चाहता मैं भयभीत रहूं..भयभीत करनेवाले से आदमी कतराता है की ये डराता है…

भय, शोक और चिंता हम चाहते नही..क्यों की हमारे आत्मा में शोक की गुंजाईश नही है..दुख हम चाहते नही है क्यों की दुख हमारा स्वभाव नही है..ये हमारे आत्मा के स्वभाव के विपरीत है इसलिए हम को अच्छा नही लगता..  मृत्यु हम नही चाहते..मरने से सब डरते है, मरने से सभी बचते है..क्यों की मृत्यु हमारा स्वभाव नही है..मृत्यु हमारे शरीर की होती है, बेवकूफी से शरीर को “मैं” मानते इसलिए डर लगता है.

शोक – बीती हुई बात, बीती हुई चीज़ को अपना मानने से शोक होता है.. ‘ऐसा क्यू हुआ’ सोच के शोक करते…तो जो सृष्टि की व्यवस्था है उस को स्वीकार कर ले की इस से ही विकास है..लेकिन  सृष्टि के व्यवस्था के आड़े मन आता है , इस से शोक होता है.

भय भी इसी का कारण है..ये चीज़ चली ना जाए..इज़्ज़त चली ना जाए..फलाना चला ना जाय..ऐसा हो ना जाय..इस कारण भय होता…तो भय का मूल भी ना-समझी है..शोक का मूल भी ना-समझी है..चिंता का मूल भी ना-समझी है..

वास्तविक में विधायक का जो विधान है वो इतना मंगलकारी है, इतना शुभकारी है , इतना कल्याणकारी है की उस के लिए उस का वर्णन करने के लिए कई सप्ताह सत्संग चलता रहे …

मृत्यु ईश्वर का विधान है..अगर मृत्यु ना हो तो  सृष्टि में कोई ठीक से जी ना सके..

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

बल का दुरुपयोग करने से आदमी बल-हीन हो जाता है..यश का दुरुपयोग करने से यश-हीन हो जाता है..सत्ता का दुरुपयोग करने से आदमी सत्ता-हीन हो जाता है..ये मंगल विधान है….

..जनक ने सत्ता का सदुपयोग किया तो चमचम चमके..रावण ने सत्ता का दुरुपयोग किया तो धम धम धमाके..तुम को अगर सत्ता मिली है, बल मिला है और तुम द्वेष से किसी के पिछे पड जाते हो तो तुम्हारी कीमत घट जाती है और तुम्हारे हाथ, पैर , दिमाग़ लड़खड़ाने लगेगा..द्वेष-पूर्ण व्यवहार बल का दुरुपयोग है..राग-पूर्ण व्यवहार बल का दुरुपयोग है..ये दुर्बुध्दी है.. दुर्बुध्दी के विचार छोड़ दो..

सम गछ्छंते l

..सभी का विकास हो, सभी का भला हो..जो कुछ मिला है उस का सदुपयोग करो..अगर दुरुपयोग करते हो तो दुर्दशा के लिए तैय्यार रहो…उस सत्ता से, उस पद से, उस सुख से तुम गिराए जाते हो..

मिली हुई चीज़ का दुरुपयोग ना हो..अभी हम हेलिकॉप्टर से आए तो दूसरे लोग भी बैठते, शेअर करते , उसी से चलता है..हम उस में पैसा नही लगाते..लगेगा की बापूजी हेलिकॉप्टर में आए..हम हेलिकॉप्टर में इसलिए नही आए की हेलिकॉप्टर में सुविधा है; इसलिए आए की 4-5 जगह की पूनम उसी के द्वारा हो सकती है, दूसरा कोई साधन नही है..

तो आप की योग्यता दूसरे के लिए है..डॉक्टर की डॉक्टरी मरीजो के लिए है, संतो का संतत्व समाज के लिए है..

कइयों से सहयोग लेकर आप योग्य बने तो कइयों की सेवा में तुम्हारी योग्यता लगाओ..नही तो मरने के बाद गटर के कीड़े हो सकते हो, कुत्ता हो सकते हो, बैल या भैस हो सकते हो..

ऑनेस्टी इस द बेस्ट पॉलिसी.

बेईमानी से लगेगा की थोड़ा फ़ायदा हो गया, चतुर है..लेकिन वो चतुराई चूल्‍हे में गिरा देती है..

चतुराई चूल्‍हे पड़ी

पूर पडयो आचार

तुलसी हरि के भजन बिन

चारो वरण चमार

ब्राम्‍हण हो, क्षत्रिय हो, वैश्य हो..चमडेवाले सभी को मान कर तबाही के रास्ते जाते..

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

मेरा देखो देल्ही पर भी नज़र है..घड़ी के काँटे पर भी नज़र है , तुम्हारे पर भी नज़र है और तुम्हारे-वाले पर भी नज़र है…तुम्हारे वाला कौन है?..’मैं ..मैं ..मैं’..तुम्हारा मैं कैसे उस प्यारे के प्यार में थन-गनित हो जाए इस पर भी नज़र है..

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

ईश्वर का अपना स्वरूप होता है,

ईश्वर का अपना स्वभाव होता है,

ईश्वर का अपना गुण होता है और ईश्वर की अपनी आदत होती है..

जिस आदमी की जो आदत है उस के अनुरूप चलो तो बहुत फ़ायदा मिलता है..जिस का जो स्वभाव है तुम जान जाओ तो बहुत फ़ायदा ले सकते हो..जिस की जो हस्ती है उस को तुम जानो तो बहुत लाभ होगा..

ईश्वर की हस्ती, ईश्वर के अस्तित्व को , ईश्वर के स्वभाव को, ईश्वर के गुण को , ईश्वर की आदत को थोड़ा जानो..

ईश्वर का स्वभाव क्या है?

ईश्वर का स्वभाव तुम अगर जान लोगे ना तुम उस के भजन के रस पाए बिना रहे नही सकते हो..शिव जी भगवान है, कृष्ण भगवान है, राम भगवान है..भगवान में भागवी कला ईश्वर है, लेकिन सभी में जो सत्ता है उस को ब्रम्‍ह परमात्मा बोलते..

तो ब्रम्‍ह का स्वरूप क्या है?

ब्रम्‍ह का स्वरूप समझने वाला ब्रम्‍ह से अलग नही होगा..मिल जाएगा ब्रम्‍ह से..बाहर से अलग दिखेगा लेकिन एकाकार हो जाएगा..

जैसे घड़े का आकाश महा आकाश का स्वरूप समझते ही खुद को घड़े का आकाश नही मानेगा, महा आकाश ही मानेगा..तरंग अपना स्वरूप जानेगा तो समझेगा की मैं सरोवर हूँ..ऐसे ही आप ने ईश्वर का स्वरूप जानोगे तो आप जी नही सकते..हद हो गयी! 🙂

 ..ईश्वर का स्वरूप जानो तो आप ईश्वर से अलग नही हो सकते..ईश्वर का स्वरूप जानो तो आप ईश्वर से अलग नही रहे सकते.. 🙂

और ईश्वर का स्वभाव जानो तो आप उस का रस लिए बिना नही रहे सकते..क्यो की ईश्वर का स्वभाव आप का स्वभाव हो जाएगा..और फिर आप को देख के लोगों को रस आएगा..इसलिए पूनम वाले घंटो इंतजार करते..क्यों की रस मिलता है..भगवान शिव जी कहेते है:

उमा राम स्वभाव जेही जाना l

ताही भजन बिन भाव ना आना ll

जो रोम रोम में रम रहा है अनंत ब्रम्‍हांडों में व्याप रहा है , उस परमेश्वर के स्वभाव को जो जानता है उस का भजन छोड़ कर दूसरे किसी भी चीज़ में फसता नही..रहेता सब में है लेकिन कही फसता नही…

संसार क्या है? पानी!

मन क्या है? दूध!!

पानी के बड़े पतेले में एक लोटा दूध डाल दिया तो? दूध भी नही रहा, पानी भी काम का नही रहा..लेकिन दूध को जमा दिया..मथ दिया..फिर पानी में मख्खन डाल दिया तो मख्खन तैरता रहेगा..

ऐसे तुम्हारे मन को थोड़ा शांत  करो..थोड़ा मथो ..फिर मन का नवनीत निकालो , फिर संसार में डालो…यूँ तैरते रहोगे.. 🙂 ये जीवन जीने की तरकीब है लाला ..लो! ..सत्संग को वेस्ट मत करो..

रोज का एक करोड़ कमाने वाला भी कंगाल है अगर सत्संग नही सुनता है तो..रावण के पास करोड़ो थे, शबरी के पास मतंग ऋषि का सत्संग था तो महान हो गयी..

मेरे जीवन में सत्संग नही होता तो ? कितनी भी तपस्या करता तो भी मुझे वो चीज़ नही मिलती जो सत्संग में मिली…इसलिए अपना भला चाहो तो सत्संग करो..

तो ईश्वर का स्वरूप, ईश्वर का स्वभाव, ईश्वर के गुण और ईश्वर की आदत जानो.

(पूज्यश्री बापूजी ने संत श्रीधर स्वामी की कथा द्वारा ईश्वर का स्वरूप, स्वभाव,गुण और आदत की झलक दिखाई.)

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ 

हरि  ओम.

श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो!!!!!

ग़लतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे….

***********************

Ahmdabad Poonam Satsang Amrut; 6th April 2012.

aaj ek vyakti milaa..bola, pahele bahot thik thaak thaa..bildar kaa kaam karataa thaa..poonam bharataa thaa..jab poonam chhodi to meraa sab afe-dafe ho gayaa hai…vikaar bhi sataate hai..

to dhan kitanaa bhi mil jaaye..satta aur saundary kitana abhi mil jaaye..jeevan men vrat aur niyam nahi hai to jeevan phisalane men der nahi hoti..

samarth raamadaas ne kahaa daasbodh granth men : bhains ke sing par raaii kaa daanaa jitani der thaherataa hai utani der bhi agar a-saawadhaan rahe to puraane sanskaar, puraane vikaar giraa sakate hai…

 isliye bhagavaan ne kahaa:

bhajante maam drudh vratah ll

 mujhe drudhataa se bhaje…drudh niyam ho, drudh vrat ho..jitani vrat niyam men  drudhataa hoti utanaa sankalp bal hogaa, shradhdaa bal hogaa aur saty ke najadik honge…

apane jeevan men drudh niyam rakho..ki itani der nind se pahele shaant honaa hai, itani der nind ke baad shant honaa hai..aur bich bich men thoda shaant honaa…shaant hona maane nisankalp honaa..

hazaaro tirthon ka punya, hazaaro maalaaon ka punya , hazaaro upawaaso ka punya nisankalp hone ke aage chhotaa ho jaayegaa..omkaar kaa uchchaaran kiyaa aur chup ho gaye..

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

koyi kitanaa bhi jelasi ke kaaran tumhaari nindaa karataa hai yaa tum ko dushman maanataa hai lekin tum us ko dushman nahi maano…aise kutton se saawadhaan raho..

ek kuttaa bhonkataa hai, us ko dekh ke dusaraa kuttaa bhonkataa,tisaraa bhonkataa..saari raat gaanv ke kutte bhonkate rahete lekin gaanv waale kaam karate, roti khaate, tv dekhate, so jaate ..kutte bhonkate bhonkate thak jaate!..bilkul sachchi baat hai.. 🙂

main agar jhuth bolu to main bhi maru tum bhi maro..aisi kasam paheli baar khaataa hun! 🙂 ..aaj tak to main bolataa ki main jhuth bolu to tum maro..abhi ye aur VVIP kasam hai!…main pahele maru phir tum maro mere saath 🙂 ..hai kya jhuthi baat?…ye sansaar hai…

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

aam aadami ki takalif kyaa hai?

us ki takalif hai bhay aur shok, chintaa..ye sabhi ki hai..koyi nahi chaahataa main bhay bhit rahun..bhaya bhit karanewaale se aadami kataraataa hai ki ye daraataa hai…

bhay, shok aur chintaa ham chaahate nahi..kyon ki hamaare aatmaa men shok ki gunjaaiish nahi hai..dukh ham chaahate nahi hai kyon ki dukh hamaaraa swabhaav nahi hai..ye hamaare aatmaa ke swabhaav ke viparit hai isliye ham ko achhaa nahi lagataa..  mrutyu ham nahi chaahate..marane se sab darate hai, marane se sabhi bachate hai..kyon ki mrutyu hamaaraa swabhaav nahi hai..mrutyu hamaare sharir ki hoti hai, bewkufi se sharir ko “main” maanate isliye dar lagataa hai.

shok – biti huyi baat, biti huyi chij ko apanaa maanane se shok hotaa hai.. ‘aisaa kyu huaa’soch ke shok karate…to jo srushti ki vyavasthaa hai us ko sweekaar kar le ki is se hi vikaas hai..lekin  srushti ke vyavasthaa ke aade man aataa hai , is se shok hotaa hai.

bhay bhi isi kaa kaaran hai..ye chij chali naa jaaye..ijjat chali naa jaaye..phalaanaa chalaa naa jaay..aisaa ho naa jaay..is kaaran bhay hotaa…to bhay kaa mul bhi naa-samajhi hai..shok kaa mul bhi naa-samajhi hai..chintaa kaa mul bhi naa-samajhi hai..

vaastavik men vidhaayak kaa jo vidhaan hai vo itanaa mangal kaari hai, itanaa shubh kaari hai , itanaa kalyaan kaari hai ki us ke liye us ka varnan karane ke liye kayi saptaah satsang chalataa rahe …

mrutyu iishwar kaa vidhaan hai..agar mrutyu naa ho to  srushti men koyi thik se jee naa sake..

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

bal kaa durupayog karane se aadami bal-heen ho jaataa hai..yash ka durupayog karane se yash-heen ho jaataa hai..sattaa kaa durupayog karane se aadami sattaa-heen ho jaataa hai..ye mangal vidhaan hai….bal kaa durupayog kiyaa..janak ne sattaa ka sadupayog kiyaa to chamcham chamake..raawan ne satta ka durupayog kiyaa to dham dham dhamake..tum ko agar sattaa mili hai, bal milaa hai aur tum dwesh se kisi ke pichhe pad jaate ho to tumhaari kimat ghat jaati hai aur tumhaare haath, pair , dimaag ladakhadaane lagegaa..dwesh-purn vyavhaar bal ka durupayog hai..raag-purn vyavahaar bal ka durupayog hai..ye durbudhdi hai..durbudhdi ke vichaar chhod do..sam gachhante..sabhi kaa vikaas ho, sabhi kaa bhalaa ho..jo kuchh milaa hai us ka sadupayog karo..agar durupayog karate ho to durdashaa ke liye taiyyaar raho…us sattaa se, us pad se, us sukh se tum giraaye jaate ho..

mili huyi chij kaa durupayog naa ho..abhi ham helicopter se aaye to dusare log baithate,share karate , usi se chalataa hai..ham us men paisaa nahi lagaate..lagegaa ki baapuji helicopter men aaye..ham helicopter men isliye nahi aaye ki helicopter men suvidhaa hai; isliye aaye ki 4-5 jagah ki poonam usi ke dwaaraa ho sakati hai, dusaraa koyi saadhan nahi hai..

to aap ki yogyataa dusare ke liye hai..doctor ki doctari marjo ke liye hai, santo kaa santatv samaaj ke liye hai..

kayiyon se sahayog lekar aap yogya bane to kayiyon ki sewaa men tumhaari yogyataa lagaao..nahi to marane ke baad gatar ke kide ho sakate ho, kutta ho sakate ho, bail yaa bhais ho sakate ho..

honesty is the best policy.

beiimaani se lagegaa ki thodaa phaaydaa ho gayaa, chatur hai..lekin vo chaturaayi chulhe men giraa deti hai..

chaturaayi chulhe padi

pur padyo aachaar

tulasi hari ke bhajan bin

chaaro varan chamaar

braamhan ho, kshatriy ho, vaishy ho..chamadewaale sabhi ko maan kar tabaahi ke raaste jaate..

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ 

meraa dekho delhi par bhi najar hai..ghadi ke kaante par bhi najar hai , tumhaare par bhi najar hai aur tumhaare-waale par bhi najar hai…tumhaare waalaa kaun hai?..’mai..mai..mai’..tumhaaraa main kaise us pyaare than-ganit ho jaaye is par bhi najar hai..

**********

iishwar kaa apanaa swarup hotaa hai,

iishwar kaa apanaa swabhaav hotaa hai iishwar kaa apanaa gun hotaa hai aur iishwar ki apani aadat hoti hai..jis aadami ki jo aadat hai us ke anurup chalo to bahut phaayadaa milataa hai..jis kaa jo swabhaav hai tum jaan jaao to bahut phaaydaa le sakate ho..jis ki jo hasti hai us ko tum jaano to bahut laabh hogaa..

iishwar ki hasti, iishwar ke asthitv ko , iishwar ke swabhaav ko, iishwar ke gun ko , iishwar ki aadat ko thodaa jaano..

iishwar kaa swabhaav kyaa hai?

iishwar ka swabhaav tum agar jaan loge naa tum us ke bhajan ke ras paaye binaa rahe nahi sakate ho..shiv ji bhagavaan hai, krushn bhagavaan hai, raam bhagavaan hai..bhagavaan men bhaagavi kalaa iishwar hai, lekin sabhi men jo sattaa hai us ko bramh paramaatmaa bolate..

to bramh kaa swarup kyaa hai?

bramh kaa swarup samajhane waalaa bramh se alag nahi hogaa..mil jaayegaa bramh se..baahar se alag dikhegaa lekin ekaakaara ho jaayegaa..

jaise ghade kaa aakaash mahaa aakaash kaa swarup samajhate hi ghade ka aakaash nahi maanegaa, mahaa aakaash hi maanegaa..tarang apanaa swarup jaanegaa to samajhegaa ki main sarovar hun..aise hi aap ne iishwar kaa swarup jaanoge to aap ji nahi sakate..had ho gayi!..iishwar kaa swarup jaano to aap iishwar se alag nahi ho sakate..iishwar kaa swarup jaano to aap iishwar se alag nahi rahe sakate..:)

aur iishwar kaa swabhaav jaano to aap us kaa ras liye bina nahi rahe sakate..kyo ki iishwar kaa swabhaav aap kaa swabhaav ho jaayegaa..aur phir aap ko dekh ke logon ko ras aayegaa..isliye poonam waale ghanto intjaar karate..kyo ki ras milataa hai..bhagavaan shiv ji kahete hai:

umaa ram swabhaav jehi jaanaa

taahi bhajan bin bhaav naa aanaa

jo rom rom ram rahaa hai anant bramhaandon men us parameshwar ke swabhaav ko jo jaanataa hai us kaa bhajan chhod kar dusare kisi bhi chij men phasataa nahi..rahetaa sab men hai lekin kahi phasataa nahi…

sansaar kyaa hai? pani!

man kyaa hai? dudh!!

paani ke bade patele men ek lotaa dudh daal diyaa to? dudh bhi nahi rahaa, paani bhi kaam kaa nahi rahaa..lekin dudh ko jamaa diyaa..math diyaa..phir paani men makhkhan daal diyaa to tairataa rahegaa..

aise tumhaare man ko thodaa chaant karo..thodaa matho..phir man kaa navaneet nikaalo phir sansaar men daalo…yun tairate rahoge.. 🙂 ye jeevan jeene ki tarakib hai..lo!satsang ko waste mat karo..

roj kaa ek karod kamaane waalaa bhi kangaal hai agar satsang nahi sunataa hai to..raawan ke paas karodo the, shabari ke paas matang rishi ka satsang thaa to mahaan ho gayi..

mere jeevan men satsang nahi hotaa to ? kitani bhi tapasyaa karataa to bhi mujhe vo chij nahi milati jo satsang men mili…isliye apanaa bhalaa chaaho to satsang karo..

to iishwar ka swarup, iishwar ka swabhaav, iishwar ke gun aur iishwar ki aadat jaano.

(Pujyashri Baapuji ne sant shridhar swaami ki kathaa dwaaraa iishwar kaa swarup, swabhaav,gun aur aadat ki jhalak dikhaayi.)

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ 

HARI OM.

 SHRI SADGURUDEV JI BHAGAVAAN KI MAHAA JAYJAYKAAR HO!!!!!

Galatiyon ke liye Prabhuji kshamaa kare….

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