नोकरी-धन्दा मंत्र और सुहाग रक्षा मंत्र

द्वारिका सत्संग अमृत; 4 एप्रिल 2012

सुबह का सत्र

 

ये रेलगाड़ी की ममता ऐसी है की लोग चिपक के रेलगाड़ी के नज़दीक बैठते..ये रेल गाड़ी को बंद करना पड़ेगा .. 🙂

नही बंद करे? रेल गाड़ी अच्छी है? तो भले रेलगाड़ी देखो..मैं जाता हूँ! 🙂

 (आप होते तभी अच्छी लगती…)

हम होते तभी अच्छी लगती? अच्छी बात है 🙂 खम्मा रेलगाड़ी खम्मा…

नारायण नारायण नारायण नारायण..

 

हर समय, हर स्थान में जिस का अस्तित्व है उस सत्य स्वरूप चिद्घन चैत्यन्य  परमात्मा का नाम हरि है..जिस के स्मरण से दुख, शोक, पाप हर जाते है उस परमात्मा का नाम हरि है..

हरती दुखानी, शोकानी, पापानी इति श्रीहरी ll

हरि  की सत्ता के आगे  ये जगत की सत्ता कुछ  भी नही..जगत की सत्ता  नित्य परिवर्तित होती है..जगत की सत्ता हरि  की सत्ता है, लेकिन हरि  की सत्ता स्वतंत्र है..जैसे बिजली की सारे साधन इन्स्ट्रुमेंट है , बिजली के कारण उन में चमक दमक क्रिया कलाप है..उन के कारण पोवर हाउस को कुछ  नही मिलता, लेकिन पावर  हाउस के कारण उन को सब कुछ  मिलता है…ऐसे ही अष्टदा प्रकृति को हरि की सत्ता से सब कुछ  मिलता है..लेकिन प्रकृति के द्वारा हरि को कुछ  नही मिलता..

जैसे सूर्य एक सेकेंड में 50लाख टन कार्बन के कण स्वाहा करता है और उस के बदले में सूर्य कितना प्रकाश, ओज, तेज, जीवनी शक्ति देते उस का कोई नाप-तोल नही..तो सूर्य तो कुछ  लेता है फिर देता है…धरती भी खाद, पानी, बीज लेती है फिर अनेक गुना कर के देती भी है..लेकिन एक हरि  है जो परमात्मा है उस को प्रकृति की किसी चीज़ वस्तु की आवश्यकता नही, परमात्मा प्रकृति के आश्रित नही..और सब शरीर, सब व्यक्ति, सब देवता प्रकृति आश्रित है…

केवल एक परब्रम्ह परमात्मा परम स्वतंत्र है..उसी परमात्मा को योग ने ईश्वर कहा, भक्तों  ने भगवान कहा, मुसलमानो ने अल्लाह कहा, गॉड वालो ने गॉड  कहा…उस के विषय में  किसी ने कुछ  व्याख्या की किसी ने कुछ  कहा…

अजब राज है मोहब्बत के  फसाने के..

जिस को जितना आता है, गाए चला जाता है..

पूर्ण परमात्मा तो अनंत है..अनंत का वर्णन करने की पूरी शक्ति किसी वक्ता में आज तक नही है…नानक जी कहेते : ‘मत करो वर्णन हर बे-अंत है”

जब वो बे-अंत है तो उस का वर्णन पूरा तो नही कर सकते..फिर भी कुछ  वर्णन करते तो उस से काम बन जाता है…

हरि  अनंत..हरि  कथा अनंत..हरि  सामर्थ्य अनंत…

और ये हरि  सभी के अपने  है..ऐसा नही के साधु के है, अ-साधु के भी वो अपने ही है..जीतने सज्जन के भगवान है,  दुर्जन  के भी उतने ही भगवान है..दुर्जन के दुष्ट विचार, दुष्ट क्रिया के कारण उन का लाभ नही लेते वो अलग बात है..लेकिन भगवान उस के भी उतने ही है..

 

और कब भगवान , किस को किस तरीके से अपनी विशेष कृपा का पात्र बना देते वो भगवान ही जानते है..

( पूज्यश्री बापूजी ने लाखा और लोहन की कथा से यह बात स्पष्ट की..)

सत्य के मार्ग से जानेवाला व्यक्ति सच्चे सुख को पाता है..सत्य का मार्ग सत्संग में ही मिलता है..जो मनुष्य सत्संग में जाता है वो कितना भी पापी हो, कितने भी जनमो का दुर्भाग्य और पाप उस के पिछे पड़ा हो, लेकिन सत्संग में जाने के बाद वो अपने को पापी ना माने, अभागा ना माने.. संत दर्शन से करोड़ो वासना का उन्मूलन हो जाता है..आत्मवेत्ता  महापुरुष की दृष्टि से अमृत बरसता है..सत्संग का अमृत पीने से भक्ति मिलती है और प्रेमा भक्ति का प्रागट्य होता है…

 

***************

 जिस को काम धन्दा नही मिलता हो, नोकरी धंधे  में बरकत नही हो , वो गीता का एक श्लोक उच्चारण कर के काम धंधे, नोकरी के लिए जाए तो उस का छक्का लगने लग जाएगा…केवल 21 बार ये जप करे.

यत्र योगेश्‍वर: कृष्‍ण: यत्र पार्थ धनुर्धर:

तत्र श्री विजयोभूत: येतिर्नीर्तिमर्तिमम ।।

 

इशान कोण में तुलसी लगाए, और तुलसी की 31 प्रदक्षिणा करे धन, धान्य, सुख शांति के लिए..तो भी दुख दारिद्र्य निवर्तक पुण्य बढ़ जाता है..

 

माताये , बहेने पार्वती जी का स्मरण कर के पार्वती जी का मंत्र जपे  तो उन के सौभाग्य की रक्षा होगी…मंत्र लिखवाता हूँ, लिख लो..जो देवियां अपने सुहाग के लिए रक्षा चाहती है उन के लिए ये सिध्द  मंत्र है..माताये  बहेने ये मंत्र लिख ले..

पार्वती जी को तिलक करे, अपने को भी तिलक करे.और नमस्कार कर के ये मंत्र जपे ..

ॐ  ह्रीम गौरीयै नमः

सौभाग्य की रक्षा होगी, सुख, शांति और समृध्दी में भी इज़ाफा(लाभ) होगा..

 

**************

नास्ति ध्यानम समम तीर्थम l

तीर्थ में तो शरीर शुध्द होता है, लेकिन ध्यान में तो तुम स्वयं शुध्द होते .. यज्ञ  में तो वस्तु स्वाहा होती है लेकिन ध्यान में तो तुम्हारे विकार स्वाहा होते है..दान से तुम्हारा धन शुध्द होता  है, लेकिन ध्यान से तुम स्वयं शुध्द  स्वभाव में आते हो.. भगवान का नाम जपते हुए भगवान में शांत हो जाए..भगवान सत रूप है, चेतन रूप है, आनंद रूप है..दोपहेर की संध्या के समय ध्यान, शाम की संध्या के समय ध्यान, सुबह के संध्या के पहेले  ध्यान, काम करने से पहेले घड़ी भर ध्यान करे..अगर 4 घंटे प्रतिदिन कोई ध्यान करता है तो उस के पिछे  जैसी तुम्हारी छाया तुम्हारे पिछे  चलती है ऐसे उस की रोज़ी, रोटी, ख़ान-पान, व्यवस्था  उस के पुण्य प्रभाव से हो जाएगा…आप का इष्ट मजबूत हो जाएगा तो अनिष्ट दूर  हो जाएगा.. अनिष्ट कभी नज़दीक भी आ गया तो भी तुम को दबोच नही सकेगा, चला जाएगा…

*********

प्रीति तो सब में है….लेकिन लाखा लोहन ने प्रीति हाड मांस में की तो बदनाम हो गये और प्रीति भगवान में की तो संत पुरुष हो गये…प्रीति का सदुपयोग करने से भक्ति और भगवान सुलभ हो जाते है..

 

शक्ति और योग्यता का सदुपयोग करने से भगवान और संत की कृपा सहेज सुलभ हो जाती है..

 

सदाचारी जीवन जीने से ‘सत’ में स्थिति सहेज में हो जाती है..

 

तपस्या से निर्दोषता की पुष्टि होती है…

 

प्रार्थना करने से दूषित अहंकार का शमन होता है…भगवान की प्रार्थना, व्रत , तप, उपवास पावन बनाने में सक्षम है…

 

वाणी के मौन से शक्ति का संचार होता है..

मन के मौन से शांति की अभिवृध्दी होती है….

बुध्दी  के मौन से परमात्म प्रागट्य  होता है…शिवोहम शिवोहम ..चिदानंद रूपम..

 

अहिंसक मनोवृत्ति, इंद्रिय संयम वाली नज़रिया, जीव पर दया, क्षमा का सदगुण , मन का संयम, ज्ञान  और ध्यान में रूचि सत्य में प्रीति करने में सक्षम है…

 

 आत्म शांति मिलने से आत्म सामर्थ्य आता है..दूसरे के भावों को पढ़ने की योग्यता भी आती है..वाणी का मौन पर विजय पाए तो मन का मौन आसान हो जाएगा…मन के मौन से बुध्दी की आपा धापी  कम हो जाएगी…सिध्द  पुरुष ऐसे ही बन जाएँगे…

 

लोहन जैसी व्यक्ति सिध्द माताजी बन सकती है और लाखा जैसी कुप्रसिध्द  डकैत सिध्द महापुरुष बन सकता है तो तुम किस की बाट देखते हो? क्यों अपने दोषों को संभाले रखते हो? क्यो बड़-बड़ को बढ़ाए रखते हो? मौन का आश्रय लो…

जिस ने अनुराग का दान दिया उस से कण माँग लजाता नही?

अपनापन भूल समाधि लगा, ये पिहु का वियोग सुहाता नही..

अब सिख ले मौन का मंत्र नया….  

चुगे चकोर अंगार फरियाद किसी को सुनाता नही…..

चकोर अपने पिया के प्रेम में अंगार चुग  लेता है , लेकिन फरियाद नही करता…

फरियाद  ना करो..फरियाद करने से या सुनने से बहुत हानि होती है…

जो भी  हुआ बोलो ‘वाह वाह’ …ये भी गुजर जाएगा..प्रकृति में जो भी होगा गुजर जाएगा..लेकिन सत्य स्वरूप हरि ज्यों का त्यों रहेगा…

 

अपने साथ कभी दुर्व्यवहार मत करो..

 “बाबा अपने साथ दुर्व्यवहार?”

 हाँ , अंजाने में हो जाता है..जैसे :

मोबाइल में पिक्चर भरना अपने साथ दुर्व्यवहार है..मोबाइल के द्वारा फालतू बातें करना अपने साथ दूर व्यय है..

इधर उधर का व्यर्थ्य का चिंतन अपने साथ दुर्व्यवहार है..

व्यर्थ्य की कंजूसी, अ-संयम, आलस्य, प्रमाद अपने साथ का दुर्व्यवहार है..

ये आप को हानि करेगा..

 

अगर प्यार चाहते हो तो दूसरे के मन की प्रसन्नता बढ़े ऐसा व्यवहार करो..दूसरे का मन तुम्हे स्नेह करने लगे इसलिए दूसरे के मन का ख़याल रखो..

अगर मन चाहते हो तो दूसरे के दुर्गूण मत देखो..दूसरे के गुण देख कर काम करो और गुण-निधान भगवान में अपनत्व लगाओ..

 

अगर संयमी सुखी होना चाहते हो तो सुख की इच्छा का त्याग करो..दूसरे की सेवा में लग जाओ तो संयम और सुख तुम्हे पर्याप्त मिलेंगे..

 

राग से फँसो  मत, द्वेष से सटो मत..प्रभु प्रेम के नाते सभी से मिलो जुलो लेकिन फिर अपने को संभालो ..

विषय-चिंतन, दुष्ट चिंतन, व्यर्थ्य  चिंतन ये तुम्हारी शक्तियों को निगल ना जाए इस की सावधनी  रखो..इसलिए बीच बीच में ओ ———–म्म ( ॐ का प्लुत उच्चारण )

ओम ओम ओम ओम ओम ….

श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो!!!!!

ग़लतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे….

***********************

Dwaarika Satsang Amrut; 4 April 2012

Shaam ka satr

 

ye relgaadi ki mamataa aisi hai ki log chipak ke relgaadi ke najadik baithate..ye rel gaadi ko band karanaa padegaa .. 🙂

nahi band kare? rel gaadi achhi hai? to bhale relgaadi dekho..main jaataa hun! 🙂

 (aap hote tabhi achhi lagati…)

ham hote tabhi achhi lagati? achhi baat hai 🙂 khammaa relgaadi khammaa…

NAARAAYAN NAARAAYAN NAARAAYAN NAARAAYAN..

 

har samay, har sthaan men jis ka asthitv hai us satya swarup chid ghan chaityany paramaatmaa kaa naam hari hai..jis ke smaran se dukh, shok, paap har jaate hai us paramaatmaa kaa naam hari hai..

harati dukhaani, shokaani, paapani iti shrihari ll

hari ki satttaa ke aage ye jagat ki sattaa kuchh bhi nahi..ye nitya parivartit hoti hai..jagat ki sattaa hari ki sattaa hai, lekin hari ki sattaa swatantr hai..jaise bijali ki saare saadhan instrument hai , bijali ke kaaran un men chamak damak kriyaa kalaap hai..un ke kaaran power house ko kuchh nahi milataa, lekin power house ke kaaran un ko sab kuchh milataa hai…aise hi ashtadaa prakruti ko hari ki sattaa se sab kuchh milataa hai..lekin prakruti ke dwaaraa hari ko kuchh nahi milataa..

jaise sury ek second men 50laakh ton kaarban ke kan swaahaa karataa hai aur us ke badale men sury kitanaa prakaash, oj, tej, jeevani shakti dete us kaa koyi naap-tol nahi..to sury to kuchh letaa hai phir detaa hai…dharati bhi khaad, paani, bij leti hai phir anek gunaa kar ke deti bhi hai..lekin ek hari hai jo paramaatmaa hai us ko prakruti ki kisi chij vastu ki aawashyakataa nahi, paramaatmaa prakruti ke aashrit nahi..aur sab sharir, sab vyakti, sab devataa prakruti aashrit hai…

kewal ek parabramh paramaatmaa param swatantr hai..usi paramaatmaa ko yog ne iishwar kahaa, bhakto ne bhagavaan kahaa,musalamaano ne allaah kahaa, god waalo ne god kahaa…us ke vishay ne kisi ne kuchh vyaakhyaa ki kisi ne kuchh kahaa…

ajab raaj hai mohabbat ke  phasaane ke..

jis ko jitanaa aataa hai, gaaye chalaa jaataa hai..

purn paramaatmaa to anant hai..anant kaa varnan karane ki puri shakti kisi vaktaa men aaj tak nahi hai…naanak ji kahete : ‘mat karo varnan har be-ant hai”

jab vo be-ant hai to us kaa varnan puraa to nahi kar sakate..phir bhi kuchh varnan karate to us se kaam ban jaataa hai…

hari anant..hari kathaa anant..hari saamarthy anant…

aur ye hari sabhi ke apane  hai..aisaa nahi ke saadhu ke hai, a-saadhu ke bhi vo apane hi hai..jitane sajjan ke bhagavaan hai,  durajan ke bhi utaane hi bhagavaan hai..durjan ke dusht vichaar, dusht kriyaa ke kaaran un kaa laabh nahi lete vo alag baat hai..lekin bhagavaan us ke bhi utaane hi hai..

 

aur kab bhagavaan , kis ko kis tarike se apani vishesh krupaa kaa paatr banaa dete vo bhagavaan hi jaanate hai..

( Pujyashri Bapuji ne sauraashtr ke laakhaa aur lohan ki kathaa se yah baat spasht ki..)saty ke maarg se jaanewaalaa vyakti sachche sukh ko paataa hai..satya kaa maarg satsang men hi milataa hai..jo manushya satsang men jaataa hai vo kitanaa bhi paapi ho, kitane bhi janamo ka durbhaagy aur paap us ke pichhe padaa ho, lekin satsang men jaane ke baad vo apane ko paapi naa maane, abhaagaa naa maane..karodo waasanaa kaa sant darshan se unmulan ho jaataa hai..aatmvetta mahaapurush ki drushti se amrut barastaa hai..satsang kaa amrut pine se bhakti milati hai aur premaa bhakti kaa praagatya hotaa hai…

 

***************

 jis ko kaam dhandaa nahi milataa ho, nokari dhande men barakat nahi ho , vo gitaa kaa ek shlok uchchaaran kar ke kaam dhande,nokari ke liye jaaye to us kaa chhakkaa lagane lag jaayegaa…kewal 21 baar ye jap kare.

यत्र योगेश्‍वर: कृष्‍ण: यत्र पार्थ धनुर्धर:

तत्र श्री विजयोभूत: येतिर्नीर्तिमर्तिमम ।।

 

yatr yogeshwar krushn

yatr paarth dhanurdhar

tatr shri vijayobhut

yetirnirtimrtimam

 

ishaan kon men tulasi lagaaye, aur tulasi ki 31 pradakshinaa kare dhan, dhaany, sukh shaanti ke liye..to bhi dukh daaridrya nivartak punya badh jaataa hai..

 

maataaye, bahene Paarvati ji kaa smaran kar ke paarvati ji ka mantr jape to un ke saubhaagy ki rakshaa hogi…mantr likhavaataa hun, likh lo..jo deviyaa apane suhaag ke liye rakshaa chaahati hai un ke liye ye sidhd mantr hai..maataaye bahene ye mantr likh le..

paarvati ji ko tilak kare, apane ko bhi tilak kare.aur namaskaar kar ke ye mantr jape..

ॐ  ह्रीम गौरीयै नमः

OM HRIM GAURIYYE NAMAH

saubhaagy ki rakshaa hogi, sukh, shaanti aur samrudhdi men bhi ijaafaa(laabh) hogaa..

 

**************

naasti dhyaanam samam tirtham l

tirth men to sharir shudhd hotaa hai, lekin dhyaan men to tum swayam shudhd hote hao..yagy men to vastu swaahaa hoti hai lekin dhyaan men to tumhaare vikaar swaahaa hote hai..daan se tumhaaraa dhan shudhd hote hai, lekin dhyaan se tum swayam shudhd swabhaav men aate ho.. bhagavaan kaa naam japate huye bhagavaan men shaant ho jaaye..bhagavaan sat roop hai, chetan roop hai, aanand roop hai..dopaher ki sandhyaa ke samay dhyaan, shaam ki sandhyaa ke samay dhyaan, subah ke sandhyaa ke pahel edhyaan, kaam karane se pahele ghadi bhar dhyaan kare..agar 4 ghante pratidin koyi dhyaan karataa hai to us ke pichhe  jaisi tumhaari chhaayaa tumhaare pichhe chalati hai aise us ki roji, roti, khaan-paan, vyavasthaa  us ke punya prabhaav se ho jaayegaa…aap kaa isht majabut ho jaayegaa to anisht door ho jaayegaa.. anisht kabhi najadik bhi aa gayaa to bhi tum ko daboch nahi sakegaa, chalaa jaayegaa…

*********

priti to sab men hai….lekin laakhaa lohan ne priti haadmaans men ki to badanaam ho gaye aur priti bhagavaan men ki to sant purush ho gaye…priti kaa sadupayog karane se bhakti aur bhagavaan sulabh ho jaate hai..

 

shakti aur yogyataa kaa sadupayog karane se bhagavaan aur sant ki krupaa sahej sulabh ho jaati hai..

 

sadaachaari jeevan jine se sat men sthiti sahej men ho jaati hai..

 

tapasyaa se nirdoshataa ki pushti hoti hai…

 

praarthanaa karane se dushit ahankaar kaa shaman hotaa hai…bhagavaan ki praarthanaa, vrat , tap, upawaas paawan banaane men saksham hai…

 

waani ke maun se shakti kaa sanchaar hotaa hai..

 

man ke maun se shaanti ki abhivrudhdi hoti hai….

 

budhdi ke maun se paramaatm praagatya hotaa hai…shivoham shivoham..chidaanand roopam..

 

ahinsak manovrutti, indriy sanyam waali najariyaa, jeev par dayaa, kshamaa kaa sadgun , man ka sanyam, gyaan aur dhyaan men ruchi saty men priti karane men saksham hai…

 

 aatm shaanti milane se aatm saamarthy aataa hai..dusare ke bhaavon ko padhane ki yogyataa bhi aati hai..waani ka maun par vijay paaye to man ka maun aasaan ho jaayegaa…man ke maun se budhdi ki aapaa dhaapi  cum ho jayegi…sidhd purush aise hi ban jaayenge…

 

lohan jaisi vyakti sidhd maataaji ban sakati hai aur laakhaa jaisi kuprasidhd dakait sidhd mahaapurush ban sakataa hai to tum kis ki baat dekhate ho? kyo apane doshon ko sambhaale rakhate ho? kyo bad-bad ko badhaaye rakhate ho? maun kaa aashray lo…

jis ne anuraag kaa daan diyaa us se kan maang lajaataa nahi?

apanaapan bhul samaadhi lagaa, ye pihu kaa viyog suhaataa nahi..

ab sikh le maun kaa mantr nayaa, chuge chakor angaar phariyaad kisi ko sunaataa nahi…..apane piyaa ke prem men angaar chug letaa hai , lekin phariyaad nahi karataa…phairyaad na akaro..phariyaad karane se yaa sunane se bahut haani hoti hai…

jo bhi  huaa waah waah…ye bhi gujar jaayegaa..prakruti men jo bhi hogaa gujar jaayegaa..lekin saty swarup hari jyon kaa tyon rahegaa…

 

apane saath kabhi durvyavhaar mat karo.. “baba apane saath durvyavahaar?” haa, anjaane men ho jaataa hai..jaise :

mobile men picture bharanaa apane saath durvyavhaar hai..mobile ke dwara phaalatu baaten karanaa pane saath dur vyay hai..

idhar udhar kaa vyarthy kaa chintan apane saath dur-vyavahaar hai..

vyarthy ki kanjusi, a-sanyam, aalasya, pramaad apane saath kaa dur-vyavahaar hai..

ye aap ko haani karegaa..

 

agar pyaar chaahate ho to dusare ke man ki prasannataa badhe aisaa vyavahaar karo..dusare kaa man tumhe sneh karane lage isliye dusare ke man kaa khayaal rakho..

agar maan chaahate ho to dusare ke durgun mat dekho..dusare ke gun dekh kar kaam karo aur gun-nidhaan bhagavaan men apanatv lagaao..

 

agar sanyami sukhi honaa chaahate ho to sukh ki ichchaa kaa tyaag karo..dusare ki sewaa men lag jaao to sanyam aur sukh tumhe paryaapt milenge..

 

raag se phanso mat, dwesh se sato mat..prabhu prem ke naate sabhi se milo julo lekin phir apane ko samhaalo..

vishay-chintan, dusht chintan, vyarthy chintan ye tumhaari shaktiyon ko nigal naa jaaye is ki saawadhanai rakho..islie bich bich men oooooooommmmmmmmm

om om om om om ….

SHRI SADGURUDEV JI BHAGAVAAN KI MAHAA JAYAJAYAKAAR HO!!!!!

Galatiyon ke liye Prabhuji kshamaa kare…

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