पिशाच मोचिनी तिथि और चंद्र ग्रहण विशेष

अलीगढ़ सत्संग अमृत; 8 डिसेम्बर 2011

पिशाच मोचिनी तिथि का पर्व विशेष

आज 8 तारीख है, कल 9 तारीख है..9 दिसंबर 2011 पिशाच मोचिनी तिथि का पर्व है..जिस को भी भूत, पिशाच, उपर की हवा हो तो 9 तारीख को जमनापार (जहा 10 तारीख को बापूजी का सत्संग होने वाला है उस स्थल पर) पहुंचे… वहाँ ब्राम्हण  द्वारा श्राध्द तर्पण की व्यवस्था की है..वहा कोई भी जा सकता है जिन को भूत, पिशाच, आला बाला आदि तकलीफे है..तो 9 तारीख को शरीर में जो छुपे  है उन की भी सदगति होगी और  जिन को परेशानी है उन की भी सेवा हो जाएगी…

{ पिशाच मोचिनी तिथि (श्राद्ध) – 9th Dec’11

इस दिन प्रेत योनि को प्राप्त जीवों (पूर्वजों) के निमित्त तर्पण आदि करने से उनकी सदगति होती है |जिनके घर-परिवार, आस-पडोस या परिचय में किसी की अकाल मृत्यु हुई हो या कोई भूत-प्रेत अथवा पितृबाधा से पीड़ित हो, वे पिशाच मोचिनी तिथि को उनकी सदगति, आत्मशांति और मुक्ति के लिए संकल्प करके श्राद्ध – तर्पण अवश्य करें | भूत-प्रेतादिक से ग्रस्त व्यक्ति इसे अवश्य करें |  

विधी जानने के लिए यहा पधारे :  http://wp.me/P6Ntr-NE  }

चंद्र ग्रहण विशेष

10 तारीख को पूनम है..सुबह 9 बाज कर 11 मिनट से सूतक लगता है..उस के पहेले खा लेना चाहिए..सूतक में खाते है ना तो फिर आरोगया और पुण्या डब्बू हो जाते..शाम को 6 बाज कर 15 मिनट से ग्रहण चलेगा तो 9 बाज कर  38 मिनट तक है..उस में तो कटाई खाना पीना नही..और हज़ार लाख काम छ्चोड़ कर मौन रहेना और जप करना…

एक बार जप करोगे तो लाख गुना फल होगा..

तो ये आप करना मैं हाथ जोड़ कर प्रार्थना करता हूँ..आप को बहुत लाभ होगा..दुनियानवी लाभ नही; अध्यात्मिक लाभ बहोट होगा..दुनियानवी लाभ तो अध्यात्मिक का चेला है !

कल मंत्र दीक्षा है ..मंत्र दीक्षा से होने वाले 33 लाभ जानने के लिए कृपया यहा पधारे :
http://wp.me/P6Ntr-xl

मोरादाबाद में हमारा सत्संग हुआ..वहा की समिति ने दीप  लेकर ज्योत मेरे से जगवाई …ज्योत जगवाई तो उस ज्योत ने क्या क्या चमत्कार किया ये कोई लिखे तो एक लंबा भागवत रामायण ग्रंथ बने !..इतने सारे चमत्कार है…

सनातन धर्म में दीप ज्योति की बड़ी महिमा है..भगवान की आरती भी करते तो दीप  जला के करते…

नाचते गाते कीर्तन करते वो ज्योति एक घर में 7 दिन रही…फिर दूसरे के घर में..फिर तीसरे के घर में…रोज शाम को पाठ हो, कीर्तन हो तो घर का माहोल सात्विक  हो जाता है, पाप ताप मिटाते है..रोग , शोक, चिंता और कष्ट मिटते है..घर में सुख शांति बरकत आदि आने लगती है…ऐसे करते करते ज्योति की बुकिंग चलती रही..2-2 साल की बुकिंग हो गयी तो ये लोग हरिद्वार आए बोले बाबा एक और ज्योत जगवाओ … दूसरी ज्योत जगवाए..अब इन्हो ने मुझे बताया की मोरादाबाद वाले और आस पास वाले ज्योत को बुला बुला के अपने बहोत  काम बना लेते है..अभी तो 2-2 ज्योत होते हुए भी 2013 नवंबर तक दोनो ज्योतियों का बुकिंग फुल है..

आगरे वालों ने भी 10 से भी अधिक ज्योतियां जगवाई..और यहा भी कितने सारे दीप  तैयार होकर  आए है..जिस को मैं वैदिक मंत्र उच्चारण  कर के जगा दूँगा…जिस से आप के घर में भक्ति की, प्रीति की, आरोग्य की, प्रसन्नता की ज्योत जगाते रहेना आप लोग…

इस में कोई खर्चा नही है, कोई फीस नही है, कोई चार्ज  नही है..और घी  की ज्योत नही जगानी है..एरंडी का तेल हो अथवा सोयाबीन का हो…अथवा कपासिया का तेल हो..उसी से ज्योत जगेगी..असली घी की ज्योत नही जगाना ..असली घी में नकली बहोत  गड़बड़ मिलाते है..चरबी और क्या क्या होता है तोबा तोबा! तो तेल में ही  ज्योत जगानी है …

मोरादाबाद की एक घटना सुरेश महाराज सुनाएँगे …

श्री सुरेशानन्द जी :

जैसे अग्नि की ज्योति उपर उठती है ऐसे व्यक्ति उँचा जीवन जिए..इसलिए गुरुदेव के पवित्र कर कमलो से सब के मंगल हेतु, सब के कल्याण हेतु ये ज्योत जगाई गयी मोरादाबाद में..जहाँ ज्योत ले जाने वाले थे , 2 दिन पहेले उन के बच्चे का अपहरण हो गया..इन्हो ने व्यवस्थापको को कहा की हमारे घर ज्योत नही लाना, घर पे शोक का वातावरण है..तो व्यवस्थापको ने कहा शोक तो भक्ति से ही दूर होता है..पाठ से , भगवान नाम से सब दुख दूर होता है ..घर में ज्योत आएगी तो अपने आप दुखो का अंधेरा भाग जाएगा..

भक्त भक्ति करता है, पाठ करता है तो हर आफ़त शराफ़त से उस का पिछा  छोड़  जाती है..

पाठ शुरू हो गया..पाठ की बड़ी भारी महिमा है…टोरंटो के बच्चो ने अपने हाथो से पाठ लिखा तो उन को बहोत  लाभ हुए, गुरु देव से तदाकारता बढ़ी, गुरु देव से मानसिक संबंध जुड़ा और पढ़ाई में भी बहोत  सफलता प्राप्त हुई..

तो मोरादाबाद में व्यवस्थापको ने  उस घर के लोगों को कहा की आप निश्चिंत  रहो सब दुख दूर होंगे.. पाठ शुरू हुआ..वहा बच्चे को लेकर जो अपहरण कर्ता गये थे उन को लगा की ये बड़े आदमी का बेटा है..खूब पैसा मिलेगा..चलो खूब शराब पीते है…खूब शराब पीने लगे…वहा घर पर पाठ शुरू हुआ..गुरुदेव की कृपा ऐसी बरसी की…

गुरु मानव के रूप में दिखते लेकिन मानव नही है..हम आकाश में  सूर्य देखे दिन में तो इतना छोटासा  ही दिखेगा..जब की सूर्य नारायण  इतने छोटे  नही है;  पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़े है..हमारी देखने की दृष्टि सीमित है और उन के और हमारे बीच दूरी  ज़्यादा है…इसलिए वो छोटे  लगते है..ऐसे ही जो शिष्य गुरुदेव से बहोत  दूर होता है श्रध्दा के अभाव के कारण वो अपनी गुरु की गुरुता और महिमा को देख नही पाता..समझ नही पाता..पर जो शिष्य श्रध्दा भक्ति से दिल से गुरु के करीब होता है वो देख पाता है की मेरे गुरु देव

अत्रि नेत्रा शिव: साक्षात द्विबाहुश्च हरी: स्मृता:  l

यो-चतुर्वदनो ब्रम्‍हा श्रीगुरू: कथित: प्रिये  ll

गुरु ही त्रिनेत्र रहित शिव है,दो हाथ वाले भगवान विष्णु है और एक मुख वाले ब्रम्‍हा जी है..

यहा क्या हुआ की उस लड़के को बापूजी ने प्रेरणा दी की उठ बेटे अब सोचता क्या है..तेरे लिए ही मैने ये लीला की है..धीरे धीरे बाहर निकल और दरवाजा बाहर से बंद कर के तू घर भाग जा ..वो बच्चा दरवाजा बाहर से बंद कर के भागा ..ऑटो कर के घर पहुँचा..वहा घर में श्री आशारामायण पाठ की पुर्णाहुति हो रही है..और ये बच्चा घर पहुँचा है! माँ-बेटे का कैसा सुंदर मिलन हुआ होगा!..2 दिन से माँ-बेटा तड़प रहे थे.. श्री आशारामायण का पाठ पूरा हुआ और माँ-बेटा का मिलन हुआ…

पुज्यश्री बापुजी :

वो दृश्य देख कर  मोरादाबाद के ये भाई गद गद हो गये..और इन्हो ने 108 ज्योत जगवाने का संकल्प किया है उत्साह से ..लेकिन देल्ही में जाते जाते ही 108 हो जाएँगे..1008 तक पहुँच जाएगा…!

श्री सुरेशानन्द जी :

चारों ओर प्रसन्नता फैले और उजियारा छाये

सत्संग सुन के इस जोगी का सब के दिल खिल जाए

जोगी रे क्या जादू है तुम्हारे प्यार में …..

जग में बिखरे सब जीवों को  ईश की ओर  है खींचे

मुरझाए सूखे जीवन को जोगी प्रेम से सिंचे

जोगी रे क्या जादू है तुम्हारे जोग में…..

जल का मंथन कितना करो, नवनीत ना उस से निकलता

जग में सार कुछ  भी नही बस सार जोगी की निकटता

जोगी रे क्या जादू है तुम्हारे प्यार में…..

पावन वाणी जोगी की भक्तों का मान हर्षायें

मुस्काये जब जोगी मेरा महेके सारी दिशायें

जोगी रे क्या जादू है तुम्हारे प्यार में…..

बाटें है रहेमत के खजाने भर भर के भक्तों को

जोगी के रूप में हम ने पाया धरा पे ही है रब को

जोगी रे क्या जादू है तुम्हारे ज्ञान  में…..

जोगी पे श्रध्दा तारण हारी, भक्ति है दुख हारी

ग्यान जोगी का भव भय भंजन , प्रेम बड़ा हीतकारी

जोगी रे क्या जादू है तुम्हारे प्यार में…..

सब कुछ  देते जोगी फिर भी हम से कुछ नही चाहे

जिन पे चलना था बड़ा मुश्किल महेका दी वो राहें

जोगी रे क्या जादू है तुम्हारे प्यार में…..

हम सब के दाता है जोगी देना ही देना जाने

अभेद दृष्टि इन की पावन सब को अपना माने

जोगी रे क्या जादू है तुम्हारे प्यार में…..

भगवत गीता और वेदों में श्रध्दा की महिमा भारी

जोगी पर श्रध्दा ने है भक्तों की बिगड़ी सवारी

जोगी रे क्या जादू है तुम्हारे ज्ञान में…..

ॐ शांति

श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो !!!!!

गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे ….

Aligarh (U.P.) Satsang Amrut; 8 Dec 2011

pishaach mochini tithi kaa parv vishesh

aaj 8 taarikh hai, kal 9 taarikh hai..9 dec.2011 pishaach mochini tithi kaa parv hai..jis ko bhi bhut, pishaach, upar ki havaa ho to 9 taarikh ko jamanaapaar  pahunche..(jahaa 10 taarikh ko Baapuji kaa satsang hone waalaa hai us sthal par pahunche)wahaa  braamhan dwara shradhd tarpan ki vyavasthaa ki hai..wahaa koyi bhi jaa sakataa hai jin ko bhut, pishaach, alaa balaa aadi takalife hai..to 9 taarikh ko sharir men jo chhupe hai un ki bhi sadgati hogi aur  jin ko pareshaani hai un ki bhi sewaa ho jaayegi…

 chandra grahan vishesh

10 taarikh ko poonam hai..subah 9 baj kar 11 minat se sutak lagataa hai..us ke pahele khaa lenaa chaahiye..sutak men khaate hai naa to phir aarogya aur punya dabbu ho jaate..shaam ko 6 baj kar 15 minat se grahan chalegaa to 9 baj kar  38 minat tak hai..us men to katayi khaanaa pinaa nahi..aur hajaar laakh kaam chhod kar maun rahenaa aur jap karanaa…

ek baar jap karoge to laakh gunaa phal hogaa..

to ye aap karanaa main haath jod kar praarthanaa karataa hun..aap ko bahut laabh hogaa..duniyaanvi laabh nahi; adhyaatmik laabh bahot hogaa..duniyaanvi laabh to adhyaatmik kaa chelaa hai !

kal mantra dikshaa hai ..mantr dikshaa se hone waale 33 laabh jaanane ke liye krupayaa yahaa padhaare : http://wp.me/P6Ntr-xl

moraadaabaad men hamaaraa satsang huaa..wahaa ki samiti ne diyaa lekar jyot mere se jagavaayi …jyot jagavaayi to us jyot ne kyaa kyaa chamatkaar kiyaa ye koyi likhe to ek lambaa bhaagavat raamaayan granth bane !..itane saare chamatkaar hai…

sanaatan dharm men deep jyoti ki badi mahimaa hai..bhagavaan ki aarati bhi karate to deep jalaa ke karate…

naachate gaate kirtan karate vo jyoti ek ghar men 7 din rahi…phir dusare ke ghar men..phir tisare ke ghar men…roj shaam ko paath howe, kirtan howe to ghar kaa maahol saatvik ho jaataa hai, paap taap mitate hai..rog , shok, chintaa aur kasht mitate hai..ghar men sukh shaanti barakat aadi aane lagati hai…aise karate karate jyoti ki booking chalati rahi..2-2 saal ki booking ho gayi to ye log haridwaar aaye aur dusari jyot jagavaaye..ab inho ne mujhe bataayaa ki moraadaabaad waale aur aas paas waale jyot ko bulaa bulaa ke apane bahot kaam banaa lete hai..abhi to 2-2 jyot hote huye bhi 2013 navambar tak dono jyotiyon kaa booking full hai..

aagare waalon 10 se bhi adhik jyotiyaa jagavaayi..aur yahaa bhi kitane saare deep taiyyar hokar  aaye hai..jis ko main vaidik mantr uchcharn kar ke jagaa dungaa…jis se aap ke ghar men bhakti ki, priti ki, aarogya ki, prasannataa ki jyot jagaate rahenaa aap log…

is men koyi kharchaa nahi hai, koyi fees nahi hai, koyi chaarge nahi hai..aur ghee ki jyot nahi jagaani hai..erandi ka tel ho athavaa soyaabin kaa ho…athavaa kapaasiyaa ka tel ho..usi se jyot jagegi..asali ghee ki jyot nahi jaganaa ..asali ghee men nakali bahot gadbad milaate hai..charabi aur kyaa kyaa hotaa hai tobaa tobaa! To jyot tel men hi jagaanaa hai…

Moraadaabaad ki ek ghatanaa suresh mahaaraaj aap ko bataayenge..

Shri Sureshaanad ji :

jaise agni ki jyoti upar uthati hai aise vyakti unchaa jeevan jiye..gurudev ke pavitra kar kamalo se sab ke mangal hetu, sab ke kalyaan hetu ye jyot jagaayi gayi moraadaabad men..jahaan jyot le jaane waale the , 2 din pahele un ke bachche kaa apaharan ho gayaa..inho ne vyavasthaapako ko kahaa ki hamaare ghar jyot nahi laanaa, ghar pe shok kaa waataavaran hai..to vyavasthaapako ne kahaa shok to bhakti se hi dur hotaa hai..paath se , bhagavan naam se..ghar men jyot aayegi to apane aap dukho kaa andheraa bhaag jaayegaa..

bhakt bhakti karataa hai, paath karataa hai to har aafat sharaafat se us kaa pichha chhod jaati hai..

paath shuru ho gayaa..paath ki badi bhaari mahimaa hai…toranto ke bachcho ne apane haatho se paath likhaa to un ko bahot laabh huye, guru dev se tadaakaarataa badhi, guru dev se maanasik sambandh judaa aur padhaayi men bhi bahot saphalataa praapt huyi..

to moraadaababd men vyavasthaapako ne  us ghar ke logon ko kahaa ki aap nischint raho sab dukh dur honge.. paath shuru huaa..wahaa bachche ko lekar jo apaharan kartaa gaye the un ko lagaa ki ye bade aadami kaa betaa hai..khub paisaa milegaa..chalo khub sharaab pite hai…khub sharaab pine lage…wahaa ghar par paath shuru huaa..gurudev ki krupaa aisi barasi ki… guru maanav ke rup men dikhate lekin maanav nahi hai..ham aakaash men  sury dekhe din men to itanaa chhotaasaa hi dikhegaa..jab ki sury naarayaan itane chhote nahi hai;  pruthvi se 13 laakh gunaa bade hai..hamaari dekhane ki drushti simit hai aur un ke aur hamaare bich duro jyaadaa hai…isliye vo chhote lagate hai..aise hi jo shishy gurudev se bahot dur hotaa hai shradhdaa ke abhaav ke kaaran vo apani guru ki gurutaa aur mahimaa ko dekh nahi paataa..samajh nahi paataa..par jo shishy shradhdaa bhakti se dil se guru ke karib hotaa hai vo dekh paataa hai ki mere guru dev

atri netra shiv: saakshaat dwibaahusch hari: smruta:  l

yo-chaturvadano bramhaa shriguru: kathit: priye ll

guru hi trinetr rahit shiv hai,do haath waale bhagavaan vishnu hai aur ek mukh waale bramhaa ji hai..

yahaa kyaa huaa ki us ladake ko baapuji ne preranaa di ki uth bete ab sochataa kyaa hai..tere liye hi maine ye lila ki hai..dhire dhire baahar nikal aur darawaajaa baahar se band kar ke tu ghar bhaag jaa…vo bachchaa darwaajaa baahar se band kar ke bhaagaa ..auto kar ke ghar pahunchaa..wahaa ghar men shri aashaaraamaayan paath ki purnaahuti ho rahi hai..aur ye bachchaa ghar pahunchaa hai! maan-betaa kaa kaisaa sundar milan huaa hogaa!..2 din se maa-betaa tadap rahe the..aashaaramaayan kaa paath puraa huaa aur maan -betaa kaa milan huaa…

Pujyashri Baapuji :

vo drushy dekh kar   moradaabaad ke ye bhaai gad gad ho gaye..aur inho ne 108 jyot jagavaane kaa sankalp kiyaa hai utsaah se ..lekin delhi men jaate jaate hi 108 ho jaayenge..1008 tak pahunch jaayegaa…!

Shri Sureshaanad ji :

chaaron aor prasannataa phaile aur ujiyaaraa chhaaye

satsang sun ke is jogi kaa sab ke dil khil jaaye

jogi re kyaa jaadu hai tumhare pyaar men

jag men bikhare sab jivon ko  Iish ki aor hai khinche

murjhaaye sukhe jeevan ko jogi prem se sinche

jogi re kyaa jaadu hai tumhare jog men

jal kaa manthan kitanaa karo, navaneet naa us se nikalataa

jag men saar kuchh bhi nahi bas saar jogi ki nikatataa

jogi re kyaa jaadu hai tumhare pyaar men

paawan waani jogi ki bhakton kaa man harshaaye

muskaaye jab jogi meraa maheke saari dishaaye

jogi re kyaa jaadu hai tumhare pyaar men

baate hai rahemat ke khajaane bhar bhar ke bhakton ko

jogi ke rup men ham ne paayaa dharaa pe hi hai rab ko

jogi re kyaa jaadu hai tumhare gyaan men

jogi pe shradhdaa taaran haari, bhakti hai dukh haari

gyaan jogi kaa bhav bhay bhanjan , prem badaa heetakari

jogi re kyaa jaadu hai tumhare pyaar men

sab kuchh dete jogi phir bhi ham se kuchh nahi chaahe

jin pe chalanaa thaa badaa mushkil mahekaa di vo raahen

jogi re kyaa jaadu hai tumhare pyaar men

ham sab ke daataa jogi denaa hi denaa jaane

abhed drushti in ki paawan sab ko apanaa maane

jogi re kyaa jaadu hai tumhare pyaar men

bhagavat geetaa aur vedon men shradhdaa ki mahimaa bhaari

jogi par shradhdaa ne hai bhakton ki bigadi sawaari

jogi re kyaa jaadu hai tumhare gyaan men

om shaanti.

SHRI SADGURUDEV JI BHAGAVAAN KI MAHAA JAYAJAYAKAAR HO !!!!!

Galatiyon ke liye prabhuji kshamaa kare..

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