आनंद-सुख-शांति ज्योत aanand-sukh-shanti jyot

आग्रा सत्संग अमृत ; 7-8 डिसेंबर 2011

हरि ओम….हरि हरि बोल….

ओम विश्वाणी देव

सवित दुरीतानी परासुव

यत भद्रम तन्नो आसुव ll

हरि ओम…..

ओम दुर्जनो सज्जनो भुर्यात

सज्जनो शांति माप्नुयात

शांतों मुच्येत बन्ध्येभ्यों

मुक्तश्च अन्य विमूक्तए ll

भय नाशन  दुर्मति हरण कली मे हरि  को नाम

निश  दिन साधक जो जपेसफल होवई सब काम ll

हरि ओम…….

जनम जनम भरमत फिरयो

मिट्यो ना मन को त्रास

कहे नानक हरि भज मना

निर्भय पाव ही वास ll

 

निर्भव जपे सकल भय मिटे  l

संत कृपा ते प्राणी छूटे ll

 

निर्भय कौन है ?

जिस के जप से सारे भय मिट जाते ऐसा कौन है?

वो तुम ही हो!

तुम अपने को जानते नही ..

तुम्हारे आगे कोई भय फरक नही सकता…भय मन में आता है , उस को तुम जानते हो..

चिंता चित्त में आती उस को तुम जानते हो.. बीमारी शरीर में आती है  उस को भी तुम जानते हो..दुख मन में आता उस को तुम जानते हो… तुम ग्यान स्वरूप परमात्मा के अमर आत्म-चैत्यन्य हो !

जैसे घड़े का आकाश महा आकाश का  अमर अंग  है;  ऐसे जीवात्मा परमात्मा का अमर अंग है..

शरीर मरने के बाद भी तुम नही मरते तो तुम को  भय किस बात का ?…शरीर मर जाए, जल जाए..बैल घोड़े गधे के योनि में जाए ..फिर भी तुम्हारे निर्भय स्वभाव में कोई फ़र्क नही पड़ता !

एक सच्चे गुरु के सच्चे सेवक थे..सत्संग सुनते और गुरु ने जैसा कहा वैसा उन्हो ने अपने जीवन में उतारा था..

‘निर्भव जपे  सकल भय मिटे , संत कृपा ते प्राणी छूटे’ इस कड़ी को सार्थक कर दिया… मतलब वो महान आत्मा बन गया…

जो तुच्छ चीज़ों में उलझता है वो तुच्छ आत्मा है..जो मध्यम चीज़ो में आसक्ति करता वो मध्यम आत्मा है..

जो महान परमात्मा का सत्संग सुनता है और उस का चिंतन करता है वो  महान आत्मा बन जाता..

जैसे केशवराम भगवान ने लीलाराम प्रभु को महान आत्मा बना दिया..लीलाशाह प्रभु बन गये!

और लीलाशाह प्रभु ने आसुमल को क्या बना दिया तुम ढूँढ लेना… 🙂

जोगी रे क्या जादू है तेरे ग्यान  में!

क्या जादू है तेरे जोग में!!

 

ऐसे ही भगवान शंकर ने पार्वती को निर्भव जपे  सकल भय मिटे  की महान संपदा पाने की  वामदेव गुरु के चरणों में दीक्षा दिलाई..

 

कलकत्ते की माँ काली ने प्रगट हो कर पुजारी गदाधर को तोतापुरी गुरु के पास जाने की आज्ञा दी..पुजारी बोले , ‘ माँ तुम प्रगट हो कर मुझे दर्शन देती हो ..मेरे हाथ का बना गजरा तुम सूँघती हो..कभी बालों में लगाती हो..मैं तुम्हारा बालक हो के दूसरे का शिष्य क्यूँ  बनूंगा?’

 

माँ काली ने गदाधर पुजारी को समझाया:

  5 शरीर होते ..एक ये दिखता है उस को अन्न मय शरीर बोलते..इस के अंदर प्राण मय शरीर है, प्राण मय शरीर निकल जाए तो आदमी मुर्दा हो जाएगा..उस के अंदर है मनोमय शरीर… अन्न मय शरीर और प्राण मय शरीर दोनो के होते हुए भी  मन सो गया तो मुँह में पेठा रखो तो स्वाद नही आएगा..आगरा में बोल रहा हूँ इसलिए पेठा का नाम लिया..दूसरी जगह होता तो रसगुल्ला बोलता 🙂 …पेठा ज़्यादा नही खाए, पेठा से भूख मरती है ..तो मन सो गया तो मुँह में पेठा मीठा नही लगेगा…पास में  साप सो जाए तो पता नही लगेगा..तो ये मनोमय शरीर… चौथा होता  है मति शरीर 5 ज्ञानेन्द्रिया और बुध्दी के मेल से ये बनता है..इस को विज्ञान मय शरीर भी बोलते.. 5 वां होता है आनंद मय शरीर…देखा आँख ने आनंद हृदय में आता है, आँख में आनंद नही आता… चखा जीभ ने आनंद हृदय में आएगा..सुना कान से आनंद यहा आएगा..बच्चे की पप्पी लेंगे तो होठों में आनंद नही आएगा, हृदय में आनंद आएगा..तो मानना पड़ेगा की पाँचवा शरीर आनंद मय है…

 

ये एकदम दिव्य ज्ञान है …ये ज्ञान सुनने मात्र से हज़ारो कपिला गौ-दान करने का फल होता है..इस ज्ञान में 13 निमिष  शांत हो जाए तो जग दान करने का फल होता है.. इस ज्ञान में कोई 17 निमिष स्थिति हो  जाए तो बाजपेयी यज्ञ  का फल होता है… 1 मुहूर्त अथवा एक पहेर इस ज्ञान में एकाकार हो जाए तो अश्वमेघ यज्ञ  का फल होता है..

 

बहोत उँचा ज्ञान सुन रहे हो…इस दिव्य ज्ञान को सुनने मात्र से जगत दान करने का फल, सारे तीर्थों में स्नान करने का फल हो जाता है…सारे यज्ञ  करने का फल, सारे पितरों का तर्पण कर के तृप्त करने  का फल हो जाता है ये वो दिव्य ज्ञान है..

ऐसा दिव्य ज्ञान के सत्संग में कोई व्ही व्ही आई पी  भी आए तो अब पिछे बिठाना ता की औरों को डिस्टर्ब ना हो..कई पंतप्रधान भी आए थे ये दिव्य सत्संग सुनने को..मेरे दिल में सभी के लिए प्यार है तो मैं अटल जी की भी क्लास ले लिया था.. खुश हो जाते की बापू ने अपना माना..

दिव्य प्रेरणा पुस्तक में  अटल जी का अनुभव लिखा है ..इस पुस्तक  में एक मंत्र लिखा है, उस मंत्र को बोल कर दूध में देखे और पिये तो बुध्दी बढ़ेगी यश बढ़ेगा.. उस का महत्व पढ़ लेना ..

तो कलकत्ते की काली माता ने गदाधर  पुजारी को समझाया की 5 शरीरो के पार जो चैत्यन्य  आत्मा है, जो  सदा निर्भय है..उस का अनुभव राम जी का है, कृष्ण जी का है..तुम को गुरु की कृपा मिलेगी तो तुम को भी वो ही अनुभव होगा … गदाधर पुजारी ने तोता पुरी गुरु से दीक्षा ली..सत्संग सुना..गुरु जी की कृपा हजम की ..जो राम का आत्मा है वो मेरा आत्मा है; जो कृष्ण का आत्मा है वो मेरा आत्मा है ऐसा अनुभव किया….गुरु की कृपा मिलेगी तो तुम को भी ये अनुभव होगा..

घड़े के आकाश, मकान का आकाश महा आकाश का है.. तरंग अपने को पानी माने और बोले की ‘मैं  तो सारा समुद्र हूँ’ तो सच्ची बात है ..ऐसे जीव अपने को जीव नही, आत्मा माने…मैं परमात्मा  का हूँ, परमात्मा मेरे है.. दुख मेरा नही,सुख  मेरा नही..दुख सुख आ के चले जाते..दुख सुख मन की वृत्ति है.. बीमारी भी मेरी नही ..बीमारी आ के चली जाती..बीमारी भी शरीर की है…मन बदलता उस को मैं जानता हूँ..छोटे  थे तब 4 पैसे की चीज़ कोई छिन लेते तो रोते ऐसे थे बचपन में …ऐसा अब नही है ..अब करोगे ऐसा? तो बचपन की बेवकूफी मर गयी …सुख दुख मर गया..ये सब मरते, लेकिन  तुम मरते हो क्या?… तुम वो निर्भय आत्मा है… डरो नही… हो हो के क्या होगा? मर जाएगा तो शरीर मरेगा… आत्मा को परमात्मा भी नही मार सकता ..क्यो की परमात्मा का आत्मा और मेरा आत्मा एक है…तरंग की आकृति को तो समुद्र मार देगा.. लेकिन पानी को समुद्र मार सकता है क्या? …घड़े को तो कोई भी तोड़ देगा, लेकिन घड़े के आकाश को कोई तोड़ नही सकता है..भगवान भी नही तोड़ सकता..महा आकाश भी नही तोड़ सकता….

ऐसे आत्मा को भगवान भी नही मारते…शरीर तो भगवान भी नही रखते… कृष्ण भगवान का शरीर नही रहा… राम भगवान का शरीर नही रहा.. ऐसे हमारा शरीर तो चला जाएगा लेकिन हम नही मरेंगे… इस प्रकार का ज्ञान गदाधर  पुजारी को तोता पुरी गुरु से  मिला .. गदाधर  पुजारी को साक्षात्कार हुआ…राम कृष्ण परमहंस बन गये!

ब्राम्ही स्थिति प्राप्त कर कार्य रहे ना शेष…मोह  कभी ना ठग सके इच्छा नही लवलेश…पूर्ण गुरु कृपा मिली पूर्ण गुरु का ज्ञान…आसुमल से हो गये….उम्म्म्म…  मैं उन का नाम नही लेता हूँ..आप समझ गये ? 🙂  (सांई  आशाराम…)

 

गदाधर पुजारी ने आज्ञा मानी काली माता की … गदाधर  में  से राम कृष्ण परमहंस बन गये..उन के शिष्य नरेंद्र में से विवेकानंद बने…

इस को आत्म ज्ञान बोलते…. ये दिव्य ज्ञान  है..

आत्म ज्ञानात परम ज्ञानम न मूच्यते (आत्म ग्यान से बड़ा कोई ग्यान नही)

आत्मसुखात परम सुखम न मूच्यते (आत्म सुख से बड़ा कोई सुख नही)

आत्म लाभात परम लाभम न मूच्यते (आत्म लाभ से बढ़कर कोई लाभ नही)

आत्म ज्ञान, आत्म लाभ, आत्म सुख मिले इसलिए वामदेव गुरु से पार्वती को दीक्षा दिलाई शिव जी ने..ऐसे तो शिव जी भी दीक्षा दे सकते थे लेकिन जैसे डॉक्टर अपने घर के मरीज़ो का इलाज नही करते ऐसे शिव जी ने पार्वती को स्वयं ज्ञान नही दिया..मैने अपने भाई को दूसरे महाराज  से दीक्षा दिलाई..

 

 मथुरा का राजा दशाहार का काशी के राजा के पुत्री कलावती से विवाह हुआ…दशाहर ने पत्नी को बोला , आ जाना मेरे महेल में…कलावती गयी नही..राह देखते देखते आख़िर राजा दशाहर कलावती के महेल में आया…बोला की तुम क्यूँ  नही आई?..

कलावती बोली :  नाथ स्री मासिक में हो तो पुरुष को उस के हाथ का भोजन, उस का स्पर्श नही करना चाहिए;  पुरुष का प्रभाव नाश होता है..

तो राजा बोला : तो क्या तुम मासिक में हो?

कलावती बोली: नही नाथ.. मैं झूठ क्यू बोलू?..झूठ बोलने से गृहस्थी जीवन बेकार हो जाता मैं जानती हूँ..और झूठ बोलने से विश्वास भी उठ जाता है.. लेकिन स्री  बीमार हो तो भी बीमार स्री  का सहवास पति को नही करना चाहिए…स्री का व्रत उपवास रखा हो तो भी पति का सहवास करने से दोनो की  आयुष्य नाश  करता है.. लेकिन मुझ में ऐसा कुछ  भी नही..फिर भी नाथ मैं इसलिए नही आई की…

 

देखो महिलाओं में कैसी कुंजी है की हरामी से हरामी पति को भी कैसे बदलती है…

 

‘नाथ आप तो सब जानते है ..मैने बचपन में गुरु जी से मंत्र लिया था… दुर्वासा ऋषि से… इस मंत्र का जप करने से मेरे अंदर के काले कौवे सब मर गये…. आप के शरीर में बहुत काले कौवे छुपे  है ..लाखो लाखो काले कौवे है..

राजा दशाहर बोला: क्या कहेती हो? …छोड़ो ये सब बात…चल मेरे साथ प्रिये  …ऐसा बोल के कलावती के बालो को हाथ लगाया तो शॉक लगा ..राजा बोला : कलावती ये क्या है?

फिर से कलावती को छू ने की कोशिश करने लगा..  ‘तू तो स्वर्ग की परियों  को शर्मिंदा करने को जनमी है…’ कंधे पे हाथ रखा तो  फिर से शॉक  लगा..फिर पुछा: कलावती ये क्या है?

 

कलावती बोली : नाथ ये काले कर्मों  को शॉक  लगता है…हमारी  मंगनी  के दिनों में भी आप ने …अब बुरा नही मानना, हाथ जोड़ती हूँ… लेकिन आप ने काले कर्म किए… वेश्याओं के साथ शराब पिया और काले कर्म किए ..

दशाहर चिल्लाया : कलावती इस बात को मेरे सिवा और कोई नही जानता… तुम को किस ने बताया?

कलावती बोली : श्वासोशवास में मंत्र जप करने से मैं  दूसरे के मन की अवस्था जान जाती हूँ ..

दशाहर बोला: अब जो तुम बोलोगी  वो ही करूँगा…

कलावती बोली :अब  दुर्वासा  ऋषि तो नही है ; लेकिन यमुनापार गार्गाचार्य ऋषि का आश्रम है… उन से दीक्षा लीजिए..

 

राजा दशाहर ने गार्गाचार्य ऋषि से दीक्षा ले कर मंत्र  जप किया …उस के शरीर से लाखो लाखो काले कौवे निकल कर नष्ट हो रहे थे ऐसा शास्त्रों में लिखा है …लेकिन आज कल के विज्ञानी  बोलेंगे ये झूठी बात है…मैं कहूँगा की  काले कर्म होते तो उस व्यक्ति की काली आभा होती है…एक घूँट पानी पियो तो ग्लास में लाखो बॅक्टेरियां हमारे मुँह से निकलते ऐसे ही आदमी के काले कर्म होते तो काली ओरा होती… इसलिए पुराणो के शास्त्रीय भाषा में अलंकारिक कर के काले कौवे बोला गया ..अर्थात समर्थ सदगुरु से दीक्षा लेकर मंत्र का जाप करने से उस व्यक्ति का मैला-पान मिटता जाता है..

 

जब ही नाम हृदय धर्‌यो

भयो पाप को नाश l

जैसे चिनगी आग की

पड़ी पुरानी घास ll

 

मथुरा के राजा दशाहर  के मंत्र साधना के बाद काले कौवे नष्ट हुए..शरीर में  दिव्य कण उत्पन्न हुए..

जप ध्यान से दिव्यता आती है..इसलिए  संतों की चरण रज, संतों  का स्पर्श,  अथवा संतों को  घर मे बुलाते …इस से दुश्चरित्र , दुष्कर्म  और  दूर्वासना , हलकी ओरा नष्ट होकर सात्विक ओरा बनती है..

जितनी सात्विक ओरा पैदा होती है और जितना सात्विक जीवन होता है उतना ही आदमी निर्भय होता है ..

निर्भव जपे  सकल भय मिटे ..निर्भय स्वरूप आत्मा की साधना करो.

श्वास अंदर जाए तो ‘ओम’ ; बाहर आए तो 1 ..

श्वास अंदर जाए तो ‘गुरु’ ; बाहर आए तो 2..

ऐसे श्वासो श्वास की माला  से साधक का इतना तेज़ी से कल्याण होता है की उस का वर्णन नही किया जा सकता..

और ओंकार जप से साधक में ऐसी सुषुप्त शक्तियां जागती है की ….

 

अमेरिका के जे. मॉर्गन बोलता है की ओंकार थेरपी से दिमाग़ , पेट और हृदय के सभी रोग मिटते ..मैं जे . मॉर्गन के खोज को सच्चा मानता हूँ क्यू की ये खोज हमारे ऋषियों ने हज़ारो साल पहेले ही बोला है.. ये तो केवल ओंकार की महिमा का एक श्लोक है..ऐसे ओंकार महिमा के बोधायन संहिता में 22 हज़ार श्लोक है..थिओसॉफिकल सोसाइटी में ये ग्रंथ अनुवाद कर के रखा है..

दोनो नथुनों से श्वास ले..रोके..भगवान नाम जपे …फिर  मुँह बंद कर के उसी श्वास से कंठ मे ओंकार जप करे..ऐसा 2 बार करो, बच्चो को कराओ …तो  बच्चो के अच्छे मार्क्स आएँगे…फेफसो की शक्ति बढ़ेगी, रोग प्रतिकार की शक्ति बढ़ेगी…ज़रा ज़रा बात मे चिडना, ज़रा जरा बात  में रुठ जाना.. ये बेवकूफी मिट जाएगी..

बच्चो को आदत डालो..’तू कर’ ऐसा नही बोलो.. ‘मैं  भी करता हूँ’ ऐसा बोलो…तो आप का भला होगा, आप के बच्चो का भला होगा और मेरा भी भला होगा..मैं हाथ जोड़ता हूँ!

बापू आप का भला कैसे होगा?

भारत के , दुनिया के बच्चे महान बनेंगे तो दुनिया का भला होगा तो मेरा भी भला होगा..!

दूसरा प्रयोग:  बच्चो की अथवा आप की याद शक्ति बढ़ाने के लिए कराओ , करो ..गहेरा श्वास भरो…कानो में उंगली डाल कर मुँह बंद कर के कंठ मे ओंकार जप करना है..ऐसा 10 बार करे तो बच्चे अच्छे मार्क से पास होंगे..आप करेंगे तो याद शक्ति बढ़ेगी..

पूज्यश्री बापूजी ने ओंकार मंत्र की संकल्प के साथ साधना करवाई… )

भगवान जिस में से अवतार लेते, टिकते, फिर विलय हो जाते ; फिर भी ज्यो ज़्यु का त्यु रहेता वो अंतरात्मा सर्वोपरि है..वो ब्रम्‍ह परमात्मा सर्वोपरि है..

श्रीकृष्ण अपने आप को ब्रम्‍ह परमात्मा मानते ..श्री राम भी और ब्रम्हवेत्ता भी अपने आप को ब्रम्‍ह परमात्मा मानते..

श्रीकृष्ण के वचन आप बोलना:

भोक्तारम यागी तापसाम

सर्व लोक महेश्वरम

 

जैसे ये सृष्टि ऐसी सृष्टियाँ भी बहोत है..सभी सृष्टियों के अपने अपने ईश्वर भी बहोत है..सब ईश्वरो के ईश्वर जो आत्मा है वो एक है..वो ईश्वरो का ईश्वर महेश्वर है …भगवान बोलते , सभी यज्ञों  का भोक्ता मैं हूँ…गुरु के यहा सेवा करते हो तो सुख पाते हो तो गुरु के रूप में  सुख का एहसास कराने वाला मैं ही हूँ..सासू ससुरे की सेवा, ग़रीबो की सेवा,  समाज की सेवा कर के जो सुख मिलता उस की गहेराई में भी  मैं ही हूँ..जो दूसरो को सुख-दान करता उस का अंतरात्मा प्रसन्न होता है.. आनंदित आल्हादित हो जाता है..

बहोत सुंदर, दिव्य ओंकार ध्यान हो रहा है..

क्या मंगलमय सत्संग है…आप की जय  हो प्रभु…

इस की कॅसेट ले जाना..

ऐसी खुशी आप के जनम दिवस पर आई थी क्या? ऐसा सुख.. आप के शादी के दिन ऐसा सुख मिला था? ऐसा सुख तो अभी ही मिला है! ये अधरामृत का पान  है!..असुविधाओं में भी ऐसा सुख मिला है…  चिन्मय सुख मिला है..

घर की कोई सुविधा नही…. चिन्मय सुख, चिन्मय  आनंद मिला है … चिन्मय ज्ञान मिला है..

 

..28 जुलाई  2006 की बात है..राजस्थान के जोधपुर से 60 किमी की दूरी पर पीपाड में सत्संग था…बादल आए , जा  रहे…पूरब से बादल आते पश्चिम  की ओर  चले जाते…लोग बोले : बाबा.. 8 साल से ऐसे ही हो रहा है…अकाल पड़ा है..

मैने बोला: प्रार्थना करो…मेरे को जो करना है वो मैं करूँगा..

लोगो ने प्रार्थना की..सारे नाचने लगे…आँधी  चली..भूमंडल चला..बादल ऐसा बरसा ..ऐसा बरसा की पीपाड  के पंडाल में से पानी बरसने  लगा !! छोटी नदियाँ बहेने लगी …

उस इलाक़े का नाम पीपाड कैसे पड़ा?

वहाँ पीपाजी नाम का राजा हो गया..

माता को सव्वा मण प्रसाद चढ़ाते थे…धर्मात्मा थे… साधु संत आए तो प्रसाद भिजवा दिया…

साधु संतों ने देखा की ये राजा केवल मूर्ति की पूजा में रुक जाए ऐसा नही हो; इस को संत का संग दे दो ऐसी कृपा करो ऐसी प्रार्थना की…जैसे के. जी . के बाद का मिड्ल क्लास मिले ..उसी रात राजा को स्वपना आया ….  देवी माता स्वप्ने में  आई..

देवी माता बोली की  मूर्ति की पूजा कब तक करेगा? मूर्ति ना लेती है ना देती है…ना संकल्प करती है..तुम्हारी भावना से तुम्हे थोड़ा फल मिलता है…लेकिन जो लेते देते, तुम्हारे भले का संकल्प करते  ऐसे गुरु के चरणों में  जाओ..गुरु की कृपा पा लो..

पीपा को देवी ने स्वपना दिया…सुबह  पीपा जी ने संतों का स्वागत किया…संतों  ने कहा की हमारे गुरु रामानंद स्वामी है.. उन के आप दर्शन करोगे, 2 वचन सुनोगे तो  आप की 7 पीढ़ी तर जाएगी पीपाजी!

 ..पीपाजी को संतों ने गुरु जी के बारे में अनुभव सुनाया..

पीपाजी ने राज्य में व्यवस्था चलाए ऐसे मंत्रियों को व्यवस्था दी , राज काज  सोपा और ख़ास मंत्री और राजा की शान से काशी  गये..

रामानन्द स्वामी को समाचार  भेजा की राजा पीपाजी मिलना चाहता है..

रामानन्द स्वामी जी ने कहा : भगा दो उस को..राजा को तो रानियां , वाहवाही और प्रजा का टॅक्स चाहिए ..ऐसे राजाओं को हम नही मिलते, हमारा समय खराब होता है…दूसरो को उल्लू बनाने की अटकल होती ऐसे राजकारणी से मैं नही मिलता..

पीपाजी को दुख हुआ की धिक्कार है मेरे जीवन को! जोधपुर से मैं चल कर आया हूँ और गुरुजी का दर्शन नही हुआ….हाथी,घोड़े,ऊँट, सेना सब वापस भेज दिया..कई दिनों  तक गुरु के आश्रम के बाहर पड़े रहे थे..भक्त तो था ..संदेशा भेजा की पीपा ने सब कुछ वापस कर दिया है…केवल गुरु जी के दर्शन के लिए द्वार के बाहर चौकीदार कहो , अथवा द्वार का कुत्ता ही मान लो ..आप के दर्शन के  लिए बैठा है..बोला मैं आप का ही हूँ..

कबीर जी ने भी कहा था:

कबीरा कुत्ता राम का

मोतिया मेरा नाम

गले नाम की जेवरी

जीत खेंचू तीत  जाए

तू तू करे तो बावरा

हुड दुथ करे तो हट जाऊं

जो देवे सो खाऊँ

जो राखे रहे जाऊं

 

स्वामी बोले : बोलने से क्या होता है? अगर मेरा आग्याकारी हो तो जाओ कुवे मे डूब के मरो..

पीपाजी डूबने को गये तो गुरु जी भक्तो को बता दिए और सूक्ष्म शरीर से वहा पीपाजी को रोक दिए ..स्वामी जी बोले : पास हो गये! जाओ… अब राज करो… दर्शन किया , सत्संग सुना ..गुरु आज्ञा मान कर पीपाजी गये..

(पूज्यश्री बापूजी ने संत पीपाजी की कथा सुनाई..

पीपाजी की कहानी पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक कीजिएगा..

http://wp.me/P6Ntr-rR    )

 

– घर मे अटॅच्ड शौचालय ना हो..हो तो एक्झोस फ़ैन का उपयोग करो..

– शांपू से बाल धोना ग्यान तंतु का सत्यानाश  करना है…सप्त धान का उबटन बना के उसी से नहाओ..मैं  आज उसी से नहा के आया..इस से शरीर की गरमी कम होती है, आरोग्य और प्रसन्नता मिलती है..

सप्त धान उबटन से नहाओ – गेंहू+ चावल+ जौ+ तिल+ चना+ मुंग+ उड़द  समान भाग पाउडर कर के रखे ..ये उबटन थोडासा कटोरी मे लेकर रबड़ी जैसा बना के उस से नहाए..

पहेले ललाट को लगाए.. ओम आनंद.. ओम नमः शिवाय.. कर के नहाओ..मैं हफ्ते मे 4 बार तो उस से नहा लेता हूँ..

पर्फ्यूम बेकार चीज़ होती है..साबुन से भी आप के शरीर  का तो नुकसान होता ही है लेकिन नहाने का पानी जहां  जाता वहां नाली के निर्दोष जीव भी तड़प के मरते साबुन शांपू से.. ये उबटन से नहाएँगे आप तो  उन नाली के जीवों की भी यात्रा होगी इस उबटन से ..ये उबटन पाप नाशक है..

आप का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा..

– बालो के लिए आवले का जूस बना के रख दो..सुबह नहाने के आधा घंटा पहेले टाल पे लगाओ..बालों की जड़े मजबूत रहेगी…टाल पर नए बाल उगाने के लिए आधा किलो नारियल तेल मे घोड़े की लिद जितनी उस मे आ सकती डाल दे..उस को उबालते उबालते लिद जल जाए उतना उबाले, वो तेल बालों को लगाए ..और रोज सुबह च्यवनप्राश ले.. टाल पर बाल आ जाएँगे…यौवन आएगा….शिवानी नाम की लड़की के बाल  झड़ गये..एकदम टकली हो गयी..शरम के मारे सीर ढक के घूमती…उस को ये उपाय बताया तो खूब अच्छे बाल आए सीर पर ..

– खजूर रक्त बढाती …मांस पेशियां बनाती ..चेहरे पर लाली आएगी ..रात को 2-4 दाने बच्चो को, बडो को 5-6 दाने  रात को भीगा के सुबह खाए..पचने में  आसान रहेगी ..खजूर में  प्रोटीन्स, लोह , उर्जा बहुत मात्रा में  है ..हृदय , मशतिष्क  को ताकद  देती है, पेट को साफ रखेगी.. दूध के साथ अथवा घी  के साथ खा सकते है ..

शरीर स्वस्थ रहे, मन प्रसन्न रहे, बुध्दी में  बुध्दी दाता का आनंद रहे… जैसा अभी आनंद आया उस की पूर्णता में  पहुँचो..

(श्री सुरेशानन्द जी गा रहे :

गीता जैसा ना ग्रंथ  है कोई गंगा सी ना नादियां

जोगी जैसा नही हितेशी , सुखो का  जोगी दरियां )

जीवन आलस नही, पलायन वादिता नही..लेकिन श्रम रहीत आत्मिक विश्राम है…

शरीर से श्रम छोड़ कर पलंग पर पड़े रहेना ये कोई  विश्राम नही है..लेकिन संकल्प विकल्प शांत कर के आत्मा में- निसंकल्प नारायण में 1-2 मिनट  की विश्रांति बड़ा वैभव है..

श्रम के पहेले विश्राम  होता है और श्रम के बाद भी विश्राम होता है..

श्रम ऐसा करो की विश्राम में गति हो जाए…

नींद को विश्राम नही बोलते… संकल्प विकल्प रहीत मन की दशा को विश्राम बोलते है..मन को विश्राम मिलेगा तो बुध्दी को भी विश्राम मिलेगा …मन के साथ बुध्दी भी भागती दौड़ती , इंद्रिया भी दौड़ती,..मन को विश्राम दिलाने के लिए ये परमेश्वर का नाम  जो है- जिस की खोज भगवान  नारायण ने की  उस ओंकार का प्लूत उच्चारण करना है..

 

1)  ओम ओम ओम ओम ओम जल्दी जल्दी उच्चारण से पाप नाशिनी , रोग नाशिनी  शक्तियां  बनाता है ह्रस्व उच्चारण..

 

 2) दीर्घ उच्चारण कार्य साफल्य शक्ति बनाता है…

ओ —————–म्म्म

ओ —————–म्म्म

 

ओ —————–म्म्म

 

इस से कार्य साफल्य उर्जा बनेगी..

 

3) तीसरा होता है प्लूत (लंबा) उच्चारण… अब कुशा का जमाना नही , मृग चर्म का जमाना नही है तो प्लास्टिक पर अथवा उनी शॉल पर सूती कपड़ा बिछा  के बैठे..

ओ ———————————————–म्म (‘म’ के समय होठ बंद )

प्लूत  उच्चारण करने से तुम्हारी आत्म विश्रान्ति बनेगी..आत्म विश्रान्ति बनने से आप को परमात्म  शांति का, परमात्म आनंद का, परमात्म माधुर्य  का आनंद मय कोष से भी परे परमात्म चेतना का प्रसाद मिलेगा….

उस प्रसाद से आप के सारे दुख मिट जाएँगे..

 

भगवान ने कहा है :

प्रसादे सर्व दुखानां

हानि रस्योप जायते

प्रसन्न चेतसो यासू

बुध्दी  परिवितिष्टते

 

आप की चेतना प्रसन्न होगी और बुध्दी  उस आनंद स्वरूप में प्रतिष्ठित  होगी..

 

अर्जुन ने भगवान को पूछा : आप बोलते महान आत्मा बनता है..सब से बड़ाई है ब्रम्‍ह ज्ञानी की .. स्थिति प्रज्ञ महा पुरुष  की आप महिमा गाते..तो ऐसा क्या है…

इंद्र भी जिस का आदर करते…देवता जिस के दर्शन कर के भाग्य बना लेते…साधारण आदमी भी स्थिति प्रज्ञ  के दर्शन और वचन सुन कर  अपना भाग्य बना लेता.. पाप नाश कर लेता… कई योग्यता का धनी हो जाता है… ऐसे संत पुरुष परमात्मा में  विश्रांति  पा कर बोलते तो वो वाणी सत्संग हो जाती है..

सामान्य आदमी बोलता है तो बोलना हो जाता है..

नेता , प्रोफ़ेसर बोलता तो भाषण हो जाता..

पोथीवाले पंडित बोलते तो कथा हो जाती..

लेकिन परमात्मा में विश्रान्ति पाए हुए महा पुरुष जब बोलते तो सत्संग हो जाता है…

एक घड़ी आधी घड़ी आधी में पुनी आध

तुलसी संगत साधु की हरे कोटि अपराध..

करोड़ो करोड़ो काले कौवे, पाप संस्कार मिट जाते है सत्संग सुनने से…सत्संग से जो विवेक होता है वो दुनिया के सारे स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटी, विश्व विद्यालयो से वो विवेक नही होता जो सत्संग से होता … रामायण में आता है बिना सत्संग के विवेक नही होता…

 

इस ब्रम्हज्ञान के सत्संग में विश्रान्ति मिल जाए तो उस ने सारे तीर्थों में स्नान कर लिया… स्नातम तेन सर्व  तीर्थम

उस ने सब कुछ  दान कर डाले.. दातम तेन सर्व दानम्  l

उस ने सारे यज्ञ  कर लिए .. कृतम  तेन सर्व यज्ञम  l

ये न क्षणम मन ब्रम्‍ह विचारें स्थिरम कृत्वा ll

 

उस ब्रम्‍ह परमात्मा के विचार में अपने मन को विश्रान्ति दिलाई; उस ने सारे तीर्थो में स्नान कर लिए..सब कुछ  दान कर लिया..उस ने सारे पितरो को तृप्त कर दिया…

 

भगवान राम के गुरु वशिष्ठ  जी कहते है की : राम ! मैं गंगा किनारे दिन में साधना करता और शाम को शिष्यो को शास्त्र ज्ञान और सत्संग सुनाता …एक दोपहेरी को हम वृक्ष के नीचे बैठे थे ..गंगाजी और तमाल आदि वृक्षो की शांत शोभा देख ही रहे थे की इतने में  आकाश में  दिन दहाड़े प्रकाश पुंज देखा…जान लिया की साक्षात शिव जी माँ पार्वती जी के साथ पधार रहे है…मन ही मन प्रणाम किया..आसन लगाया… अर्घ्य पाद से पूजन किया..

 

देखो आवभगत कैसे की जाती है..क्षेम कुशल कैसे पुछा  जाता है..

 

शिव जी ने पुछा  :  मुनि शार्दुल तुम्हारी तपस्या कैसी है ? आप का मन आप के आत्मा में विश्रान्ति तो पाता है ना? कैसा है आप का चित्त ? आप का चित्त  अपने मूल स्थान में विश्रान्ति तो पाता है ना? …राग द्वेष आप के उपर हावी तो नही है ना? ..अपने चिदघन चैत्यन्य  स्वभाव में तृप्त तो है ना?

 

वशिष्ठ जी बोले : हे महादेव एक बार भी कोई  शिव कहेता है तो उस का अ-शिव हट जाता है… सब आनंद है, तृप्ति है ..हे सांब सदाशिव आप मिले है तो मुझे ख़ास गुह्य  प्रश्न पुछने का मन हुआ है..आप सहेमती दे तो माँ पार्वती और अरुंधती आपस में सत्संग करने जाए..बुध्दी मती देव पत्नी पार्वती और ऋषि पत्नी अरुंधती विचार विमर्श करने चली गयी..

 

वशिष्ठ जी बोले : हे देवाधिदेव महादेव ऐसा कौन सा  देव है जिस की उपासना करने से मन की कुटिलता, चित्त की चंचलता मिट कर जीव अपने दोषो से छूटकारा पा कर मनुष्य जीवन सफल कर सकता है,  दोषो से उपर उठ सकता है… विधी वचन तो बहोत है की ये करो, ये मत करो.. ये धर्म है पता होता है फिर भी हमारी प्रवृत्ति नही होती.. ये अशुद्ध  है, पाप है समझते  फिर भी हम बचते नही…क्यूँ  नही बचते की सुख की लालच से अथवा दुख के भय से झूठ कपट में हम फिसल जाते तो ऐसा कौन सा देव है जिस की उपासना करने से जीव सुख की लालच से  अथवा दुख के भय से  बचे… बुध्दी के राग द्वेष से बचे ..इंद्रियो के आकर्षण से बचे..मन की चंचलता से बचे..

 

बुध्दी  का राग द्वेष मिट जाए  तो बुध्दी बलवान  होती..फिर मन को नियंत्रित करती…फिर मन के आकर्षणों  में बुध्दी नही फसती.. शरीर स्वस्थ होता, मन प्रसन्न रहेता है और बुध्दी में राग द्वेष नही होता तो बुध्दी में चमचम चमकता है परमात्म ग्यान ..इतना सरल है! इतना सुगम है परमात्म ग्यान …केवल ये थोडासा समझ में आ जाए तो..और करने लगे तो ईश्वर प्राप्ति बहोत  सरल है…

 

शिव जी और वशिष्ठ जी का संवाद वशिष्ठ जी राम जी को सुना रहे.. मैं आप को सुना रहा हूँ…

ऐसा कौन सा देव है जो शीघ्र प्रसन्न हो और हमारा परम मंगल हो जाए..

भगवान चंद्र शेखर बोले : तुमने सभी के कल्याण वाला प्रश्न पुछा  है..सभी संप्रदाय के लिए परम मंगलकारी प्रश्न पुछा है..हे मुनि शार्दुल स्वर्ग में जो देव है वो भी वास्तविक देव नही.. सृष्टि हुई तब से कल्प के आरंभ से जो देव स्वर्ग में है उन को आजानू देव बोलते …दूसरे योग कर्म कर के देवता बनते उन को कर्मज  देव बोलते.. तीसरे देव ब्रम्ह ज्ञानी  गुरुओं  के सत्संग सुनते, साधक बन जाते… साधक  साध्य तक जल्दी पहुँच जाते है..ये धरती के देवता है..

 

मुझे बहोत  प्रसन्नता है की मेरे साधक जीतने सहज में  रहते,  दुख सुख के सिर पर पैर रखने मे सफल हो जाते,  दीक्षा के बाद साधकों में माधुर्य  आ जाता है, मेरे साधक जीतने  स्वाभाविक  रहेते है इतने नीगुरे नही रहेते..

 

दिले तस्वीरे है यार जब भी गर्दन झुका ली मुलाकात कर ली

बंदगी का था कसूर बंदा मुझे बना दिया।

मैं खुद से था बेखबर तभी तो सिर झुका दिया।।

वे थे न मुझसे दूर न मैं उनसे दूर था।

आता न था नजर तो नजर का कसूर था।।

 

मौलाना जलालौद्दीन रोमी ने आत्म शांति के लिए बहोत  कोशिश किये … फकीर मिलते ही साध्य को पा लिया..उस ने लिखा : ये इंसान ! पचासो वर्ष की नमाज़ अदा  करने से 2 क्षण फकिरो का सत्संग तुझे बुलंदियो पर पहुँचा देगा..

 

श्रीकृष्ण ने कहा : जल से भरे हुए जलाशय वास्तविक तीर्थ नही, धातु पत्थर की  मूर्ति वास्तव में देव नही.. उन तीर्थो की मूर्तियों की सेवा करने से कालांतर में पुण्य लाभ होता है.. लेकिन ब्रम्‍हवेत्ता संत के सत्संग से पुण्य लाभ , ग्यान  लाभ,  भगवत प्राप्ति का साफ सुथरा मार्गदर्शन मिलता है ..देवता बोलते नही, संत  बोलते भी है.. आप के कल्याण का संकल्प करते… सारे पूजा स्थलो की यात्रा का  फल ये है की सत्संग में पहुँचा दिया…

 

धरती के देवता कौन है जो सत्संग सुनते वे धरती के देवता है..अंतरात्मा का रस पाते पाते अमरता की यात्रा करते वे धरती के देवता होते है…सत्संग के लिए गाड़ी मोटर से उतर के एक एक कदम चल के  आते तो एक एक यज्ञ  का पुण्य होता है..भक्ति का मीटर चालू हो जाता है..सत्संग सुनते तो 72 करोड़ 72 लाख नादियां  पावन होती.. सप्त रंग , सप्त धातु पावन हो जाते है ….सत्संग में  आने से पहेले खून परीक्षण करने दे फिर सत्संग में आए और 2/3 सत्संग करने के बाद फिर से खून परीक्षण करे तो एक घन मिली रक्त में 1600 श्वेत कण बढ़ जाते है…

ये तो परीक्षण के द्वारा पता चलता , लेकिन जो परीक्षण में  नही आ सकता वो तो अमूल्य है ..किसी का भी कल्याण मंगल करना चाहे तो उस को  सत्संग में  ले आओ…

सत्संग में बुलाया और व्यक्ति नही आया , विषय विकार से सुख चाहता तो समझो वो बड़ा कंगाल है..

 

शिव जी बोलते है : इंद्र देव , वरुण देव भी वास्तविक देव नही.. ब्रम्हा जी  भी देव नही..विष्णु भी देव नही…साक्षात  शिव जी बोलते मैं शिव जी भी वास्तविक देव नही हूँ …लेकिन मुझ में,  विष्णु में,  ब्रम्‍हा में और कीड़ी में भी जो चिद्घन चैत्यन्य  है वो वास्तविक देव है….

 

 

दूसरा कहे तो शिव भक्त उस की हालत बुरी कर देते..लेकिन साक्षात शिव जी कहेते अब क्या करेंगे ..मेरे ईष्ट देव शिव जी थे…साधना करता तो अंदर से आवाज़ आती की गुरु के चरणों  में जाओ , मैं तुम्हे वहां  मिलूँगा..गुरु कृपा से जाना की वास्तविक देव वो ही है- जो देवोके देव  महादेव का आत्मा और मेरा आत्मा एक है …

 

13 निमिष उस परमात्म देव मे शांत होने से गौ-दान का फल होता है …. 100 निमिष उस परमात्म देव में विश्रांति पाने से अश्वमेघ यज्ञ का फल होता है  ..आधी घड़ी से 1000 अश्वमेघ यज्ञ  का पुण्य होता है..आधी घड़ी   साडे 22 मिनट की होती ..इस देव में एक घड़ी शांति पाने से राजसूय यज्ञ  का फल होता है.. मध्यान्ह काल तक- सुबह से दोपहेर तक  परमात्मा मे स्थिति होती है  तो 1 लाख राजसूय यज्ञ  करने का फल होता है..

ऐसा वाल्मीकि रामायण में लिखा है.

ओंकार मंत्र की बड़ी महिमा है..

(पूज्यश्री बापूजी ने ओंकार मंत्र के 19 लाभ बताए..ऋषि प्रसाद के अप्रैल 2011 के अंक में इस का सुंदर वर्णन है )

आप के बुध्दी  के सामने भगवान हो तो वो ब्रम्ह ग्यान  बन जाता है..

आप के प्रीति के सामने  भगवान है तो वो प्रेमा भक्ति बन जाती है..

आप के  कर्म के सामने भगवान का उद्देश्य है तो वो आप का कर्म योग बन जाता है..

अपनी उन्नति चाहते हो तो 5 बातों का त्याग कर दो:

1) अपने को कोसना छोड़  दो : क्या करे अपने भाग्य  में नही..अपन ग़रीब है..पापी है..अपन ऐसे है वैसे ऐसा निराशावादी सोच छोड़  दो..

निराशावाद का त्याग

2) दीनता का त्याग : मुझे कोई बोलता की आशीर्वाद दो तो मैं उस को आँख दिखाता हूँ..अर्रे ये तो ऐसी बात है की सूर्य को बोले रोशनी दो, रोशनी तो जुगनू से मांगी  जाती है!..गंगाजी को बोले पानी दो..संतों  से आशीर्वाद माँगा जाता है क्या? बोले ‘जुग जुग जियो इतना दक्षिणा दो’ तू स्वयं मर जाएगा आशीर्वाद देनेवाला!..ये तो मूर्खो का काम है..तो दीनता का त्याग करो..

 

3)आलस्य का त्याग

4)कटुता का त्याग

5)क्रोध का त्याग

 

अक्रोध, मधुरता, उद्यम, साहस, ओंकार का जप परमात्मा के साथ सीधा संबंध जोड़ देगा..

 

आप के जीवन में  मोह  सभी व्याधियो का मुल है..मोह माने बाहर से सुखी होने का प्रयास..इस को भव का शूल कहेते..  ये साधना(ओंकार की साधना) करोगे तो परमात्म प्रेम प्रगट होगा..आप सब के हितेशी होते और आप का हीत  होता है..आप आनंदित रहेते..

मोह  में सीमित जीवन होता है..सत्संग से विशाल जीवन बन जाता है..भोग से आदमी भोगी होता है , अपनी स्वार्थ की सोचता है..और ओंकार की साधना से ,प्रेमाभक्ति से आदमी भक्त बन जाता, योगी बन जाता है..संत बन जाता है..

 

आप रोज ओंकार की 15 मिनट की साधना करो तो बड़ा फ़ायदा है…सुबह दोपहेर शाम करो 15-15 मिनट तो बहोट अच्छा..आप जीतने उन्नत होते जाएँगे उतना आप के कुटुंबियों का भला होता जाएगा..आप के रिश्तेदारों  का भला होगा और आप से मिलनेवालों का भला होगा..बिल्कुल पक्की बात है..

मोरादाबाद में सत्संग के निमित्त किसी ने ज्योति जगवाई..वो ज्योत किसी ने घर रखवाई और आशारामायण का पाठ, कीर्तन और ध्यान किया.. घर में बहोत इज़ाफा हुआ, प्रसन्नता हुई..कली के दोष मिटे ..घर वाले खुशहाल हुए..पड़ोसी ने कहा ये ज्योत हमारे घर 7 दिन रहेगी..फिर दूसरे पड़ोसी, तीसरे..चौथे ऐसे करते करते पूरा मोरादाबाद दीप ज्योति से आनंदित , आल्हादित , निरोगी और मनोकामना पूर्ति करने में सक्षम होने लगा..लेकिन 1 ज्योत किस किस के घर कहा तक जाए?…हरिद्वार में दूसरी ज्योति जगवा के गये… अब 2-2 ज्योतियां  चलती है..पूरब पश्चिम  उत्तर दक्षिण चारो तरफ ..फिर भी लोगों की माँग ऐसी बढ़ गयी की नवंबर माह की 17 तारीख 2013 तक ज्योति का ऑर्डर बुक हो गया है!

किसी के घर ज्योति का ऑर्डर बुक था..साधक ने कहा की परसो आप के घर ज्योति आएगी..तो घरवाली माई ने कहा, ‘नही नही..मेरे घर कैसे ज्योति लाऊं ?..मेरा बच्चा अपहरण हो गया है..हम सब रो रहे..ये उत्सव हमारे घर कैसे होगा?’

साधक ने कहा, ‘अरे माई ! जिस के घर ज्योति जाती है वहा सुख जगमगाता है..कितने इंतजार के बाद ये शुभ घड़ी तुम्हारे नसीब हुयी की ज्योत तुम्हारे घर आ रही … बेटा चला गया है – किडनॅप हो गया है लेकिन तुम ज्योति आने दो घर में ..पुण्य बढ़ने दो..पाप मिटने दो..देख लेना चमत्कार क्या होता है…देख लेना बापू क्या करते है..’

उस माई ने कहा, ‘अच्छा ज्योति की जो तिथि है उस दिन आए ज्योति हमारे घर में..लेकिन मेरा बेटा अपहरण हो गया है..’

बोले , ‘माई सब भला होगा..’

ज्योति जिस घर से निकल के इस घर आनी है, उस समय जो किडनॅप कर के चले गये थे वो उस लड़के को टॉर्चर कर रहे थे की 50 लाख बिना तू ज़िंदा घर नही पहुँचेगा…हाः हाः हाः..’ कर के..चलो 50 लाख का मुर्गा फँसा है…खुशी खुशी में 5-10 शराब की बोटले खोली और पीने लगे..पीते पीते सब बेहोश हो गये..आउट हो गए ..अपहरण किए हुए बेटे के गले में बापू का लोकेट पड़ा था… मानो बापू कहे रहे की अब क्या देखता है..उठ धीरे धीरे..और बाहर चला जा …..बाहर से कुण्डा लगा के तू भाग जा  ..तू अपने घर पहुँच…वो लड़का ऑटो कर के कैसे भी कर के अपने घर पहुँचा…इधर ज्योति घर पहुँची और उधर बेटा ‘माँ माँ’ करता हुआ घर मे आया..ज्योति के ज्योत जगानेवालों के चारो तरफ जयकारा हुआ..

आगरा वालों ने इस ज्योत की महिमा जानी … आगरा सत्संग के सुबह के सत्र में आगरा में 3 ज्योतियां  जगमगाई..शाम के सत्र में 7 ज्योतियां  जगमगाई है…और 8 तारीख को भी कई ज्योतियां  जगमगाई है …. आगरा और आसपास के इलाक़े के लोग अपने घरों में भक्ति की , ज्ञान  की, प्रभु प्रीति की ज्योत जगमगाएँगे…

( पूज्यश्री बापूजी के परम पावन कर कमलो से सभी ज्योतियो का दीप  प्रागट्य हुआ…ब्रांहणों ने वैदिक मंत्र घोष किया…

ओम श्री परमात्मने नमः

ओम दीप ज्योति परब्रम्‍ह

दीप ज्योति जनार्दनम

दीपो हरतू मे पापं

दीपज्योति नमोस्तुते

 

शुभम करोती कल्याणम  आरोग्यम सुख संपदा

शत्रु बुध्दी  विनाशंच  दीप ज्योति नमोस्तुते

 

आत्म ज्योति की महिमा भगवान ने कही है लेकिन दीप ज्योति की भी महिमा पुराणो में शास्त्रों में आती है…

 

…इन दिनों में दीप ज्योति जहां  भी हो वे लोग रात को खजूर भीगा के अगर शाम को कार्यक्रम है तो सुबह खजूर भीगा दे..3 से 5 दाने खजूर के प्रसाद में बाटे.. अगर बाटना चाहे तो ..लेकिन 5 से ज़्यादा नही..और मिठाइयां  बाटने की आदत नही डालना..खोपरा+मिशरी अथवा खजूर अथवा सीजन के अनुसार जैसा भी प्रसाद बनाना हो तो बनाओ ..भक्तो को तो ज्योति से लाभ होता ही है…

 

इस ज्योति में शीतलता चाहिए तो एरंडीए का तेल, कपासिया का तेल, सोयाबीन का तेल अथवा नारियल का तेल डाले…और गरमी चाहिए तो तिलों का तेल, सरसो का तेल ये गरमी करेगा..

ज्योति से आरोग्य  बढ़ेगा और घर का हवामान भी सुंदर होगा..भक्तिभाव भी बढ़ेगा.. दीप ज्योति घर में रखी उतने दिन ब्रम्हचर्य का पालन किया तो और ज़्यादा प्रभाव पड़ेगा….. मौन , श्वासोश्वास  का जप ,  आशारामायण का  पाठ, हे प्रभु आनंद दाता का पाठ आदि करे..

 

तांशु के अनुभव का वीडियो दिखाया जा  रहा है..

 

बीरबल  के जमाने में सारस्वत्य मंत्र था तो बीरबल चमका..लेकिन इस जमाने में भी तो सारस्वत्य मंत्र है! घर घर में बीरबल  बन रहे है!!

उस जमाने में शरद पूनम की  रात को श्रीकृष्ण के गोप गोपियां  अमृतपान किए थे ..अभी इस जमाने में बापू के साधक गोप गोपियां भी  अमृत पान  कर रहे है…उस जमाने में श्रीकृष्ण को स्वयं बंसी बजानी पड़ती थी…इस जमाने में हमारे बच्चे बंसी बजाते, काम वोही हो रहा है!

 

ओम शांति..

 

श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो!!!!!

ग़लतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे…

 

 

 

AAGRAA SATSANG AMRUT ; 7-8 DEC 2011

 

 

hari om….hari hari bol….

 

om vishwaani dev

savit duritaani paraasuv

yat bhadram tanno aasuv

hari om…..

 

 

om durjano sajjano bhuryaat

sajjano shaanti maapnuyaat

shanto muchyet bandhyebhyo

muktascho anya vimuktaye

 

 

bhay naashan durmati haran kali me hari ko naam

nishi din saadhak jo jape

saphal hovayi sab kaam

 

hari om…….

 

 

janam janam bharamat phiryo

mityo naa man ko traas

kahe naanak hari bhaj manaa

nirbhay paav hi waas ll

 

nirbhav jape sakal bhay mite l

sant krupaa te praani chhute ll

 

 

nirbhay kaun hai ?

jis ke jap se saare bhay mit jaate aisa kaun hai?

vo tum hi ho!

tum apane ko jaanate nahi ..

tumhaare aage koyi bhay farak nahi sakataa…bhay man men aataa hai , us ko tum jaanate ho..

chinta chitt men aati us ko tum jaanate ho.. bimaari sharir men aati hai  us ko bhi tum jaanate ho..dukh man men aataa us ko tum jaanate ho… tum gyaan swarup paramaatmaa ke amar aatm-chaityany ho !

jaise ghade kaa aakaash mahaa aakaash ka  amar ang  hai;  aise jivaatmaa paramaatmaa kaa amar ang hai..

sharir marane ke baad bhi tum nahi marate to tum bhay kis baat kaa?.sharir mar jaaye, jal jaaye..bail ghode gadhe ke yoni men jaaye ..phir bhi tumhare nirbhay swabhaav men koyi phark nahi padataa !

ek sachche guru ke sachche sewak the..satsang sunate aur guru ne jaisaa kahaa waisaa unho ne apane jeevan men utaaraa thaa..

‘nirbhav jape sakal bhay mite sant krupaa te praani chhute’ is kadi ko saarthak kar diyaa… matalab vo mahaan aatmaa ban gayaa…

jo tuchh chijon men ulajhataa hai vo tuchh aatmaa hai..jo madhyan chijo men aasakti karataa vo madhyam aatmaa hai..

jo mahaan paramaatmaa kaa satsang sunataa hai aur us ka chintan karataa hai vo  mahaan aatmaa ban jaataa..

jaise keshavaraam bhagavan ne lilaaraam prabhu ko mahaan aatmaa banaa diyaa..Lilaashaah prabhu ban gaye!

aur Lilaashaah Prabhu ne aasumal ko kya banaa diyaa tum dhundh lenaa… 🙂

 

jogi re kyaa jaadu hai tere gyaan men!

kyaa jaadu hai tere jog men!!

 

aise hi bhagavaan shankar ne paarvati ko nirbhav jape sakal bhay mite ki mahaan sampadaa vaamdev guru ke charano men paane ki dikshaa dilaayi..

 

kalakatte ki maa kaali ne pragat ho kar pujari gadaadhar ko totapuri guru ke paas jaane ki aagyaa di..pujaari bole , ‘maa tum pragat ho kar mujhe darshan deti ho ..mere haath ka banaa gajaraa tum sunghati ho..kabhi baalon men lagaati ho..main tumhaaraa baalak ho ke dusare ka shishy kyu banungaa?’

maa kaali ne gadaadhar pujaari ko samajhaayaa:

  5 sharir hote ..ek ye dikhataa hai us ko ann may sharir bolate..is ke andar praan may sharir hai, praan may sharir nikal jaaye to aadami murdaa ho jaayegaa..us ke andar hai manomay sharir… ann may sharir aur praan may sharir dono ke hote huye bhi  man so gayaa to munh men pethaa rakho to swaad nahi aayegaa..aagraa men bo lrahaa hun isliye pethaa kaa naam liyaa..dusari jagah hotaa to rasgullaa bolataa 🙂 …pethaa jyaadaa nahi khaaye, pethaa se bhukh marati hai ..to man so gayaa to munh me pethaa mithaa nahi lagegaa…paas me saap so jaaye to pataa nahi lagegaa..to ye manomay sharir… chauthaa hotaa  hai mati sharir 5 gyaanendriyaa aur budhdi ke mel se ye banataa hai..is ko vigyaan may sharir bhi bolate.. 5 vaa hotaa hai aanand may sharir…dekhaa aankh ne aanand hruday men aataa hai, aankh men aanand nahi aataa… chakhaa jibh ne aanand hruday men aayegaa..suna akaan se aanand yahaa aayegaa..bachche ki pappi lenge to hothon men aanand nahi aayegaa, hruday men aanand aayegaa..to maananaa padegaa ki paanchavaa sharir aanand may hai…

 

ye ekadam divya gyaan hai …ye gyaan sunane maatr se hajaaro kapila gau-daan karane ka phal hotaa hai..is gyaan men 13 nimish  shaant ho jaaye to jag daan karane kaa phal hotaa hai.. is gyaan men koyi 17 nimish sthiti ho  jaaye to baajapeyi yagya  kaa phal hotaa hai… 1 muhurt athavaa ek praher is gyaan me ekaakaar ho jaaye to ashwamegh yagya kaa phal hotaa hai..

 

bahot unchaa gyaan sun rahe ho…is divyaa gyaan ko sunane maatr se jagat daan karane ka phal, saare tirthon men snaan karane ka phal ho jaataa hai…saare yagya karane ka phal, saare pitar ka tarpan kar ke trupt karane  ka phal ho jaataa hai ye vo divya gyaan hai..

aisaa divyaa gyaan ke satsang men koyi VVIP bhi aaye to ab pichhe bithaanaa taa ki auron ko distarb naa ho..kayi pantapradhaan bhi aaye the ye divya satsang sunane ko..mere dil men sabhi ke liye pyaar hai to main atal ji ki bhi claas le liyaa tha.. khush ho jaate ki bapu ne apanaa maanaa..

 

divya prerana pustak me Atal ji kaa anubhav likhaa hai ..is pustak  men ek mantr likhaa hai us ka mahatv padh lenaa ..

 

to kalakatte ki kaali maataa ne gadaadhar pujaari ko samajhaayaa ki 5 shariro ke paar jo chaityany aatmaa hai, jo  sadaa nirbhay hai..us kaa anubhav raam ji kaa hai, krushn ji kaa hai..tum ko guru ki krupaa milegi to tum ko bhi wo hi anubhav hogaa …gadaadhar pujaari ne totaapuri guru se dikshaa li..satsang sunaa..guru ji ki krupaa hajam ki ..jo raam kaa aatmaa hai vo meraa aatmaa hai; jo krushn kaa aatmaa hai vo meraa aatma ahai aisaa anubhav kiyaa….guru ki krupa milegi to tum ko bhi ye anubhav hogaa..

 

ghade ke aakash, makaan ka aakaash mahaa aakaash kaa hai.. tarang apane ko paani maane aur bole ki ‘mai to saaraa samudr hun’ to sachchi baat hai ..aise jiv apane jiv nahi, aatmaa maane…main paramtmaa kaa hun, paramaatmaa mere hai.. dukh meraa nahi,sukh  mera anahi..dukh sukh aa ke chale jaate..dukh sukh man ki vrutti hai.. bimaari bhi meri nahi ..bimaari aa ke chali jaati..bimaari bhi sharir ki hai…man badalataa us ko main jaanataa hun..chhote the tab 4 paise ki chij koyi chhin lete to rote aise the bachapan men …aisa ab nahi hai ..ab karoge aisaa? to bachapan ki bewkufi mar gayi …sukh dukh mar gayaa..ye sab marate, lekin  tum marate ho kya?… tum vo nirbhay aatmaa hai… daro nahi… ho ho ke kyaa hogaa? mar jaayegaa to sharir maregaa… aatmaa ko paramaatmaa bhi nahi maar sakataa ..kyo ki paramaatmaa kaa aatmaa aur meraa aatmaa ek hai…tarang ki aakruti ko to samudr maar degaa.. lekin paani ko samudr maar sakataa hai kyaa? …ghade ko to koyi bhi tod degaa, lekin ghade ke aakaash ko koyi tod nahi sakataa hai..bhagavaan bhi nahi tod sakataa..mahaa aakaash bhi nahi tod sakataa….

aise aatmaa ko bhagavaan bhi nahi maarate…sharir to bhagavaan bhi nahi rakhate… krushn bhagavan ka sharir nahi rahaa… raam bhagavaan kaa sharir nahi rahaa.. aise hamaaraa sharir to chalaa jaayegaa lekin ham nahi marenge… is prakaar kaa gyaan gadaadhar purjaari ko totaapuri guru se milaa ..gadaadhar pujaari ko saakshaatkaar huaa…raam krushn paramhans ban gaye!

braamhi sthiti praapt kar kaary rahe naa shesh…moh kabhi naa thag sake ichchaa nahi lavalesh…purn guru krupaa mili purn guru kaa gyaan…aasumal se ho gaye….ummmm main un kaa naam nahi letaa hun..aap samajh gaye? 🙂  (saai aashaaram…)

 

 

gadaadhar pujari ne aagyaa maani kaali maataa  ki …gadaadhar me se raam krushn paramahans ban gaye..un ke shishy narendr men se vivekaanand bane…

 

is ko aatm gyan bolate…. ye divya gyaan hai..

 

aatm gyaanat param gyaanam na muchyate (aatm gyaan se badaa koyi gyaan nahi)

 

aatmsukhaat param sukham na muchyate (aatm sukh se badaa koyi sukh nahi)

 

aatm laabhaat param laabham na muchyate (aatm laabh se badhakar koyi laabh nahi)

 

 

aatm gyaan, aatm laabh, aatm sukh mile isliye vaamdev guru se paarvati ko dikshaa dilaayi shiv ji ne..aise to shiv ji bhi dikshaa de sakate the lekin jaise doctor apane marijo ka ilaaj nahi karate aise shiv ji ne paarvati ko swayam gyaan nahi diyaa..maine apane bhaai ko dusare guru se diksha dilaayi..

 

 mathuraa ka raajaa dashaahar ka kashi ke raajaa ke putri kalaavati se vivaah huaa…dashaahar ne bolaa , aa jaanaa mere mahel men…kalaavati gayi nahi..raah dekhate dekhate aakhir raajaa dashaahar kalaavati ke mahel men aayaa…bolaa ki tum kyu nahi aayi?..

kalaavati boli :  naath sree maasik men ho to purush ko us ke haath kaa bhojan, us kaa sparsh nahi karanaa chaahiye;  purush kaa prabhaav naash hotaa hai..

to raajaa bolaa : to kyaa tum maasik men ho?

kalaavati boli: nahi naath.. main jhuth kyu bolu?..jhuth bolane se gruhasthi jeevan bekaar ho jaataa main jaanati hun..aur jhuth bolane se vishwaas bhi uth jaataa hai.. lekin sree bimaar ho to bhi bimaar sree ka sahavaas pati ko nahi karanaa chaahiye…sree kaa vrat upawaas rakhaa ho to bhi pati kaa sahavaas karane se dono ki  aayushya naash  karataa hai.. lekin mujh men aisaa kuchh bhi nahi..phir bhi naath main isliye nahi aayi ki…

 

dekho mahilaaon men kaisi kunji hai ki haraami se haraami pati ko bhi kaise badalati hai…

 

‘naath aap to sab jaanate hai ..maine bachapan men guru ji se mantr liyaa thaa… durwaasaa rushi se… is mantr kaa jap karane se mere andar ke kaale kauwe sab mar gaye…. aap ke sharir men bahut kaale kauwe chhupe hai ..laakho laakho kaale kauwe hai..

raajaa dashaahar bolaa: kyaa kaheti ho? …chhodo ye sab baat…chal mere saath priye …aisaa bol ke kalaavati ke baalo ko haath lagaayaa to shock lagaa ..raajaa bolaa : kalaavati ye kyaa hai?

phir se kalaavati ko chhune ki koshish karane lagaa..  ‘tu to swarg ki pariyon  ko sharmindaa karane ko janami hai…’ kandhe pe haath rakha ato phir se shock lagaa..phir puchhaa: kalaavati ye kyaa hai?

 

kalaavati boli : naath ye kaale karmo ko shock lagataa hai…hamaari  mangani ke dino men bhi aap ne …ab buraa nahi maananaa, haath jodati hun… lekin aap ne kaale karm kiye… veshyaao ke saath sharaab piyaa aur kaale karm kiye ..

dashaahar chillaayaa : kalaavati is baat ko mere siwaa aur koyi nahi jaanataa… tum ko kis ne bataayaa?

kalaavati boli : shwaasoshwaas men mantra jap karane se amin dusare ke man ki awasthaa jaan jaati hun ..

dashaahar bolaa: ab jo tum bologi wo hi karungaa…

kalaavati boli :ab  durwaasaa rishi to nahi hai ; lekin yamunaapaar gaargaachaary rishi kaa aashram hai… un se dikshaa lijiye..

 

raajaa dashaahar ne gaargaachaary rishi se dikshaa le kar mantra jap kiyaa …us ke sharir se laakho laakho kaale kauwe nikal kar nasht ho rahe the aisaa shaastron men likha ahai…lekin aaj kal ke vigyaani bolenge ye jhuthi baat hai…main kahungaa ki  kale karm hote to su vyakti ki kaali aabhaa hoti hai…ek ghunt paani piyo to glaas men laakho bacteriyaa hamaare munh se nikalate aise aadami ke kaale karm hote to kaale oraa hoti… isliye puraano ke shaastriy bhaashaa men alankaarik kar ke kaale kauwe bolaa gayaa ..arthaat samarth sadguru se dikshaa lekar mantr kaa jaap karane se us vyakti kaa malin-panaa mitataa jaataa hai..

 

jab hi naam hrudaya dharyo

bhayo paap ko naash l

jaise chinagi aag ki

padi purani ghaas ll

 

mathuraa ke raajaa dashaahar  ke mantr saadhanaa ke baad kaale kauwe nasht huye..sharir men  divya kan utpann huye..

 

jap dhyan se divyataa aati hai..isliye  santon ki charan raj, santon  kaa sparsh,  athavaa santon ko  ghar me bulaate …is se duscharitra,dushakarm aur  durwaasanaa, halaki oraa nasht hokar saatvik oraa banati hai..

jitani saatvik oraa paidaa hoti hai aur jitanaa saatvik jivan hotaa hai utanaa hi aadami nirbhay hotaa hai ..

nirbhav jape sakal bhay mite..nirbhay swarup aatma ki saadhanaa karo.

 

 

shwaas andar jaaye to ‘om’ ; baahar aaye to 1 ..

shwaas andar jaaye to ‘guru’ ; baahar aaye to 2..

aise shwaaso shwaas ki maalaa  se saadhak kaa itanaa teji se kalyaan hotaa hai ki us kaa varnan nahi kiyaa jaa sakataa..

aur omkaar jap se saadhak men aisi sushupt shaktiyaa jagati hai ki ….

 

amerika ke j morgan bolataa hai ki omkaar therapy se dimaag , pet aur hruday ke sabhi rog mitate ..main j morgan ke khoj ko sachchaa maanataa hun kyu ki ye khoj hamaare rushiyon ne hajaaro saal pahele hi bolaa hai.. ye to kewal omkaar ki mahimaa ka ek shlok hai..aise omkaar mahimaa ke bodhaayan sanhitaa men 22 hajaar shlok hai..theosophical society men ye granth anuwaad kar ke rakhaa hai..

 

dono nathuno se shwaas le..roke..bhagavan naam jape…phir munh band kar ke kanth me omkar jap kare..aisaa 2 baar karo, bachcho ko karaao…to  bachcho ke achhe maarks aayenge…phephaso ki shakti badhegi, rog pratikaar ki shakti badhegi…jaraa jaraa baat me chidanaa, jaraa jaraa baat men ruth jaanaa.. ye bewkufi mit jaayegi..

bachcho ko aadat daalo..’tu kar’ aisaa nahi bolo.. ‘mai bhi karataa hun’aisaa bolo…to aap kaa bhalaa hogaa, aap ke bachcho kaa bhalaa hogaa aur meraa bhi bhalaa hogaa..main haath jodataa hun!

baapu aap ka bhalaa kaise hoga?

bhaarat ke , duniyaa ke bachche mahaan banenge to duniyaa kaa bhalaa hogaa to meraa bhi bhalaa hogaa..!

 

dusaraa prayog:  bachcho ki athavaa aap ki yaad shakti badhaane ke liye karaao..gaheraa shwaas bharo…kaano men ungali daal kar munh band kar ke kanth me omkar jap karanaa hai..aisaa 10 baar kare to bachche achche maark se paas honge..aap karenge to yaad shakti badhegi..

 

( Pujyashri Baapuji ne omkaar mantr ki sankalp ke saath saadhanaa karavaayi… )

bhagavaan jis men se awataar lete, tikate, phir vilay ho jaate ; phir bhi jyo jyu kaa tyu rahetaa vo antaraatmaa sarvopari hai..vo bramha paramaatmaa sarvopari hai..

shrikrushn apane aap ko bramh paramaatma maanate ..shri raam bhi aur bramhvetta bhi apane aap ko bramh paramaatmaa maanate..

shrikrushn ke vachan aap bolanaa:

bhoktaaram yagy tapsaam

sarv lok maheshwaram

 

jaise ye srushti aisi srushtiyaa bhi bahot hai..sabhi srushtiyon ke apane apane ishwaar bhi bahot hai..sab ishwaro ke ishwar jo aatmaa hai vo ek hai..vo ishwaro ka ishwar maheshwar hai …bhagavaan bolate , yagy ka bhoktaa main hun…guru ke yahaa sewaa karate ho to sukh paate ho to guru ke rup me sukh ka ehasaas karaane waalaa main hi hun..saasu sasure ki sewaa, garibo ki sewaa,  samaaj ki sewa kar ke jo sukh milataa us ki gaheraayi men bhi  main hi hun..jo dusaro ko sukh-daan karaataa us kaa antaraatmaa prasann hotaa hai.. aanandit aalhadit ho jaataa hai..

 

bahot sundar, divya omkaar dhyaan ho rahaa hai..

 

kya mangalamay satsang hai…aap ki jay ho prabhu…

is ki cassette le jaanaa..

 

aisi khushi aap ke janam diwas par aayi thi kyaa? aisaa sukh aap ke shaadi ke din aisa sukh milaa thaa? aisa sukh to abhi hi mila hai! ye adharaamrut kaa paan hai!..asuvidhaaon men bhi aisaa sukh milaa hai…  chinmay sukh mila hai..

ghar ki koyi suvidhaa nahi…. chinmay sukh, chinamy aanand milaa hai chinmay gyaan milaa hai..

 

..28 july 2006 ki baat hai..raajasthaan ke jodhapur se 60 kimi ki duri par pipaad men satsang thaa…baadal aaye , jaa rahe…purab se baadal aate paschim ki aor chale jaate…log bole : baabaa.. 8 saal se aise hi ho rahaa hai…akaal padaa hai..

maine bolaa: praarthanaa karo…mere ko jo karanaa hai vo main karungaa..

logo ne praarthanaa ki..saare naachane lage…aaandhi chali..bhumandal chalaa..baadal aisaa barasaa aisaa barasaa ki pipaad ke pandaal men se paani barasane  lagaa !!

us ilaake kaa naam pipaad kaise padaa?

wahaa pipaaji naam kaa raajaa ho gayaa..

maataa ko savvaa man prasaad chadhaate the…dharmaatma the… sadhu sant aaye to prasaad bhijavaa diyaa…

sadhu santo ne dekhaa ki ye raja kewal murti ki pujaa men ruk jaaye aisa nahi ho; is ko sant ka sang de do aisi krupa karo aisi praarthanaa ki…kg ke baad ka middle claass mile ..usi raat raja ko swapnaa aayaa ki devi maataa swapne me aayi..

devi maataa boli ki  murti ki pujaa kab tak karegaa? murti naa leti hai naa deti hai…naa sankalp karati hai..tumhaari bhaavanaa se tumhe thoda phal milataa hai…lekin jo lete dete, tumhaare bhale kaa sankalp karate  aise guru ke charano me jaao..guru ki krupa paa lo..

pipaa ko devi ne swapnaa diyaa…subah  pipaa ji ne sant ka swaagat kiyaa…santo ne kahaa ki hamaare guru raamaanand swaami hai.. un ke aap darshan karoge, 2 vachan sunoge to  aap ki 7 pidhi tar jaayegi pipaaji!

 ..pipaaji ko santo ne guru ji ke baare men anubhav sunaayaa..

pipaaji ne raajya men vyavastha chalaaye aise mantriyon ko vyavasthaa di , raaj kaaj  sopaa aur khaas mantri aur raajaa ki shaan se  kaashi  gaye..

raamanand swaami ko samaachaar  bhejaa ki raajaa pipaaji milanaa chaahataa hai..

raamaanand swaami ji ne kahaa : bhagaa do us ko..raajaa ko to raaniyaa, waahwaahi aur prajaa kaa tax chaahiye..aise raajaaon ko ham nahi milate, hamaaraa samay kharaab hotaa hai…dusaro ko ullu banaane ki atakal hoti aise raajkaarani se main nahi milataa..

pipaaji ko dukh huaa ki dhikkaar hai mere jeevan ko! jodhapur se main chal kar aayaa hun aur guruji ka darshan nahi huaa….haathi,ghode,unt,  senaa sab waapas bhej diyaa..kayi dino tak guru ke aashram ke baahar pade rahe the..bhakt to tha ..sandeshaa bhejaa ki pipaa ne sab kuchh waapas kar diyaa hai…kewal guru ji ke darshan ke liye dwaar ke baahar chaukidaar kaho , athavaa dwaar kaa kuttaa hi maan lo ..aap ke darshan ke liye baithaa hai..bola main aap kaa hi hun..

kabir ji ne bhi kahaa thaa:

kabiraa kutta ram kaa

motiyaa meraa naam

gale naam ki jewari

jit khenchu tit jaaye

tu tu kare to baawaraa

huddut kare to hat jaaun

jo dewe so khaaun

jo raakhe rahe jaaun

 

swaami bole : bolane se kyaa hotaa hai? agar meraa aagyaakaari ho to jaao kuwe me dub ke maro..

pipaaji dubane ko gaye to bhakto ko bataa diye aur sukshm sharir se wahaa pipaaji ko rok diye ..swaami ji bole : paas ho gaye! jaao… ab raaj karo… darshan kiyaa , satsang sunaa ..guru aagyaa maan kar pipaaji gaye..

(pujyashri baapuji ne sant pipaaji ki kathaa sunaayi..

pipaaji ki kahaani padhane ke liye krupayaa is link par klik kijiyegaa..

http://wp.me/P6Ntr-rR   )

 

 

 

– ghar me attached shauchaalay naa ho..ho to exos fan kaa upayog karo..

– shaampu se baal dhona gyaan tantu kaa satyaansah karanaa hai…sapt dhaan kaa ubatan bana ake usi se nahaao..mai aaj usi se nahaa ke aayaa..is se sharir ki garami kam hoti hai, aarogya aur prasannataa milati hai..

sapt dhaan ubatan se nahaao – genhu+ chaawal+ jau+ til+ chanaa+ mung+ udad  samaan bhaag powder kar ke rakhe ..ye ubatan thodaasaa katori me lekar rabadi jaisa banaa ke us se nahaaye..

pahele lalaat ko lagaaye.. om aanand.. om namah shivaay.. kar ke nahaao..main hafte me 4 baar to us se nahaa leta hun..

perfume bekar chij hoti hai..saabun se bhi aap ke shair kaa to nuksaan hotaa hi hai lekin nahaane ka apaani jahaa jaataa wahaa naali ke nirdosh jeev bhi tadap ke marate saabun shampu se.. ye ubatan se nahaayenge aap to  un naali ke jivon ki bhi yaatraa hogi is ubatan se ..ye ubatan paap naashak hai..

aap ka swasthy achhaa rahegaa..

 

– baalo ke liye aawale ka juice banaa ke rakh do..subah nahaane ke aadhaa ghantaa pahele taal pe lagaao..baalon ki jade majabut rahegi…aadhaa kilo naariyal tel me ghode ki lid jitani us me aa sakati daal de..us ko ubaalate ubaalate lid jal jaaye utanaa ubaale, wo tel baalon ko lagaaye ..aur roj subah chawanpraash le.. taal par baal aa jaayenge…yauwan aayegaa….shiwaani naam ki ladaki ke baal jhad gaye..ekdam takali ho gayi..sharam ke maare seer dhak ke ghumati…us ko bataayaa to khub achhe baal aaye..

 

 

– khajur rakt badhati …maas peshiyaa banaati ..chehare par laali aayegi ..raat ko 2-4 daane bachcho ko, bado ko 5-6 daaane raat ko bhigaa ke subah khaaye..pachane me aasaan rahegi ..khajur me protins, loh, urjaa bahut maatra me hai ..hruday mashtishk ko taakad deti hai, pet ko saaph rakhegi.. dudh ke sath athavaa ghee ke saath khaa sakate hai ..

sharir swasth rahe, man prasann rahe, budhdi me budhdi daataa kaa aanand rahe… jaisaa abhi aanand aaya us ki purnata me pahuncho..

(shri sureshaanand ji gaa rahe hai:

gitaa jaisaa naa granth hai koyi gangaa si naa nadiyaa

jogi jaisaa nahi hiteshi , sukho kaa  jogi dariyaa )

 

jeevan aalas nahi, palaayan vaaditaa nahi..lekin shram raheet aatmik vishraam hai…

sharir se shram chhod kar palang par pade rahenaa ye koyi vishraam nahi hai..lekin sankalp vikalp shaant kar ke aatmaa men nisankalp naaraayan men 1-2 minat  ki vishraanti badaa vaibhav hai..

shram ke pahele vishraam hotaa hai aur shram ke baad bhi vishram hotaa hai..

shram aisaa karo ki vishraam men gati ho jaaye…

nind ko vishraam nahi bolate… sankalp vikalp raheet man ki dashaa ko vishraam bolate hai..man ko vishraam milegaa to budhdi ko bhi vishraam milegaa …man ke saath budhdi bhi bhaagati daudati ,indriyaa bhi daudati,..man ko vishraam dilaane ke liye ye parameshwa rk aanaam jo hai jis ki khoj bahagavaan naaraayan ne ki  us omkaar kaa plut uchchaaran karanaa hai..

 

om om om om om jaldi jaldi uchchaaran se paap nashini rog naashini shaktiya abanaataa hai rasw uchcharan

 

dirgh uchchaaran kaary saaphaly shakti banaataa hai…

ooooooooommmmmmmmmm oooooooooooommmmmmmm ooooooooommmmmmmmm…..

is se kaary saaphaly urjaa banegi..

 

3) tisaraa hotaa hai plut(lambaa) uchchaaran… kushaa ka jamaanaa nahi , mrug charm ka jamaanaa nahi hai to plastik par athavaa uni shawl par suti kapadaa bichhaa ke baithe..

oooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooommmmmmmmmmmmmmmmmmmm(‘m’ ke samay hoth band )

plut uchchaaran karane se tumhaari aatm vishraanti banegi..aatm vishraanti banane se aap ko paramaatm  shaanti kaa, paramaatm aanand kaa, paramaatm maadhury kaa aanand may kosh se bhi pare paramaatm chetanaa kaa prasaad milegaa….

us prasaad se aap ke saare dukh mit jaayenge..

 

bhagavaan ne kahaa hai :

prasaade sarv dukhaanaam

haani rasyop jaayate

prasann chetaso yaasu

budhdi parivitishtate

 

aap ki chetanaa prasann hogi aur budhdi us aanand swarup men pratishtit hogi..

 

arjun ne puchhaa aap bolate mahaan aatmaa banataa hai..sab se badaayi hai bramha gyaani ki .. sthiti pragy mahaapruush ki aap mahimaa gaate..to aisaa kyaa hai… indra bhi jis kaa aadar karate…devataa jis ke darshan kar ke bhaagy banaa lete…saadhaaran aadami bhi sthiti pragy ke darshan au rvachan sun kar  apanaa bhagy banaa letaa.. paap nash kar letaa… kayi yogyataa kaa dhani ho jaataa hai… aise sant purush paramaatmaa me vishrnaati paa kar bolate to vo waani satsang ho jaati hai..

saamaany aadami bolataa hai to bolanaa ho jaataa hai..

netaa , profesar bolataa to bhaashan ho jaataa..

pothiwaale pandit bolate to kathaa ho jaati..

lekin paramaatmaa men vishraanti paaye huye mahaa purush jab bolate to satsang ho jaataa hai…

 

ek ghadi aadhi ghadi aadhi men puni aadh

tulasi sangat saadhu ki hare koti aparaadh..

 

karodo karodo kaale kauwe, paap sanskaar mit jaate hai satsang sunane se…satsang se jo vivek hotaa hai vo duniyaa ke saare school college univarsity, vishwa vidyaalayo se vo vivek nahi hotaa jo satsang se hotaa … raamaayan men aata hai binaa satsang ke vivek nahi hotaa…

 

is bramhgyaan ke satsnag me vishraanti mil jaye to us ne saare tirthon men snaan kar liyaa… snaatam ten sarv tirtham

us ne sab kuchh daan kar daale.. daatam ten sarv daanam l

us ne saare yagy kar liye .. kruten ten sarv yagyam l

ye na kshanam man bramh vichaaren sthiram krutvaa ll

 

us bramh paramatma ke vichaar me apane man ko vishraanti dilaayi; us ne saare tirtho men snaan kar liye..sab kuchh daan kar liyaa..us ne saare pitaro ko trupt kar diyaa…

 

bhagavaan raam ke guru vashisht ji kahate hai ki : raam main gangaa kinaare din men saadhanaa karataa aur shaam ko shishyo ko shastr gyan aur satsang sunaataa …ek dopaheri ko ham vruksh ke niche baithe the ..gangaaji aur tamaal aadi vruksho ki shaant shobhaa dekh hi rahe the ki itane me aakaash me din dahaade prakaash punj dekhaa…jaan liyaa ki saakshat shi ji maa paaravti ji ke saath padhaar rahe hai…man hi man pranaam kiyaa..aasan lagaayaa… arghy paad se pujan kiyaa..

 

dekho aawabhagat kaise ki jaati hai..kshem kushal kaise puchhaa jaataa hai..

 

shiv ji ne puchhaa :  muni shaardul tumhaari tapasyaa kaisi hai?aap kaa man aap ke aatmaa men vishraanti to paataa hai naa? kaisaa hai aap kaa chitt ? aap kaa chitt  apane mul sthaan men vishraanti to paataa hai naa? …raag dwesh aap ke upar haavi to nahi hai naa? ..apane chidghan chaityany swabhaav men trupt to hai naa?

 

vashishth ji bole : hey mahaadev ek baar bhi koyi  SHIV kahetaa hai to us kaa A-shiv hat jaataa hai… sab aanand hai, trupti hai ..hey saamb sadaashiv aap mile hai to mujhe khaas guhya prashn puchhane ka man huaa hai..aap sahemati de to maa paarvati aur arundhati aapas men satsang karane jaaye..budhdimati dev patni paarvati aur rishi patni arundhati vichaar vimarsh karane chali gayi..

 

vashishth ji bole : hey devaadhidev mahaadev aisaa kaun se dev hai jis ki upaasanaa karane se man ki kutilataa, chitt ki chanchalataa mit kar jeev apane dosho se chhutakaaraa paa kar manushy jeevan saphal kar sakataa hai,  dosho se upar uth sakataa hai… vidhdi vachan to bahot hai ki ye karo, ye mat karo.. ye dharm hai pataa hota hai phir bhi hamaari pravrutti nahi hoti.. ye ashudhd hai, paap hai samajhate  phir bhi ham bachate nahi…kyu nahi bachate ki sukh ki laalach se athavaa dukh ke bhay se jhuth kapat men ham phisal jaate to aisaa kaun sa dev hai jis ki upaasanaa karane se jeev sukh ki laalach se  athavaa dukh ke bhay se  bache… budhdi ke raag dwesh se bache ..indriyo ke aakarshan se bache..man ki chanchalataa se bache..

 

budhdi kaa raag dwesh mit jaaye  to budhdi balawaan  hoti..phir man ko niyantrit karati…phir man ke aakarshano men nahi phasati.. sharir swasth hotaa, man prasann rahetaa hai aur budhdi men raag dwesh nahi hotaa to budhdi men chamcham chamaakataa hai paramaatm gyaan..itanaa saral hai! itanaa sugam hai paramaatm gyaan…kewal ye thodaasaa samajh men aa jaaye to..aur karane lage to iishwar praapti bahot saral hai…

 

shiv ji aur vashisht ji kaa sanwaad vashisth ji raam ji ko sunaa rahe.. mai aap ko sunaa rahaa hun…

aisaa kaun saa dev hai jo shighr prasann ho aur hamaaraa param mangal ho jaaye..

bhagavaan chandr shekhar bole : tumane sabhi ke kalyaan waalaa prashn puchhaa hai..sabhi sampradaay ke liye param mangal kaari prashn puchha hai..hey muni shaardul swarg me jo dev hai vo bhi vaastavik dev nahi.. srushti huyi tab se kalpa ke aarambh se jo dev swarg men hai un ko aajaanu dev bolate …dusare yagy karm kar ke devataa banate un ko karmaj dev bolate.. tisare dev bramhagyani guruo ke satsang sunate saadhak ban jaate saadhy tak jaldi pahunch jaate hai..ye dharati ke devataa hai..

 

mujhe bahot prasannataa hai ki mere saaadhak jitane sahaj me rahate dukh sukh ke sir par pair rakhane me saphal ho jaate.. diksha ke baad saadhakon men maadhury aa jaata hai..jitane  swabhavaik rahete hai itane nigure nahi rahete..

 

dile tasvire hai yaar jab bhi gardan jhukaa li mulaakaat kar li

बंदगी का था कसूर बंदा मुझे बना दिया।

मैं खुद से था बेखबर तभी तो सिर झुका दिया।।

वे थे न मुझसे दूर न मैं उनसे दूर था।

आता न था नजर तो नजर का कसूर था।।

 

maulana jalaaluddin romi ne aatm shaanti ke liye bahot koshish kiye.. phakir milate hi saadhy ko paa liyaa..us ne likhaa : ye insaan … pachaaso varsh ki namaaj adaa karane se 2 kshan fakiro ka satsang tujhe bulandiyo par pahunchaa degaa..

 

shrikrushn ne kahaa jal se bhare huye jalaashay vaastavik tirth nahi, dhaatu paththar ki  murti vaastav men dev nahi.. un tirtho ki murtiyon ki sewaa karane se kaalaantar men punya laabh hotaa hai.. lekin bramhavettaa sant ke satsang se punya labh , gyaan laabh,  bhagavat praatpi ka saaph sutharaa maarg darshan milataa hai ..devataa bolate nahi..sant  bolate bhi hai.. aap ke kalyaan kaa sankalp karate… saare pujaa sthalo ki yaatraa ka  phal ye hai ki satsang men pahunchaa diyaa…

 

dharati ke devataa kaun hai jo satsang sunate ve dharati ke devataa hai..antaraatmaa kaa ras paate paate amarataa ki yaatraa karate ve dharati ke devataa hote hai…satsang ke liye gaadi motar se utar ke ek ek kadam chal kae aate to ek ek yagy ka punya hotaa hai..bhakti kaa mitar chalu ho jaataa hai..satsang sunate to 72 karod 72 laakh naadiyaa paavan hoti.. sapt ranh sapt dhaatu paawan ho jaate hai ….satsang me aane se pahele khun parikshan karane de phir satsang men aaye aur 2/3 satsang karane ke baad phir se khun parikshan kare to ek ghan mili rakt men 1600 shwet kan badh jaate hai…

ye to parikshan ke dwaaraa pataa chalataa , lekin jo parikshan me nahi aa sakataa vo to amulya hai ..kisi ka bhi kalyaan mangal karanaa chaahe to us ko  satsang me le aao…

satsang men bulaayaa aur vyakti nahi aayaa , vishay vikaar se sukh chaahataa to samajho vo badaa kangaal hai..

 

shiv ji bolate hai : indr dev , varun dev bhi vaastavik dev nahi.. bramhaaji bhi dev nahi..vishnu bhi dev nahi…saakshaat  shiv ji bolate main shiv ji bhi vaastavik dev nahi hun …lekin mujh men,  vishnu men,  bramha men aur kidi men jo chidghan chaityany hai vo vaastavik dev hai….

 

 

dusaraa kahe to shiv bhakt haalat buri kar dete..lekin saakshaat shiv ji kahete ab kyaa karenge ..mere isht dev shiv ji the…saadhanaa karataa to andar se aawaaj aati ki guru ke charano men jaa main tumhe wahaa milungaa..guru krupaa se jaanaa ki vaastavik dev vo hi hai jo devo ke dev  mahaadevo kaa aatmaa aur meraa aatmaa ek hai …

 

13 nimish us paramaatm dev me shant hone se gau-daan ka phal hota hai…  100 nimish se ashwmegh ..aadhi ghadi se 1000 ashwamegh yagya kaa punya hota hai..aadhi ghadi   saade 22 minat ki hoti ..is dev men ek ghadi shanti paane se raaj suy yagy kaa phal hotaa hai.. madhyaanh kaal tak- subah se dopaher tak  paramaatmaa me sthiti hoti hai  to 1 laakh raajsuy yagya karane ka phal hotaa hai..

 

aisaa vaalmiki raamaayan men likhaa hai.

omkaar mantr ki badi mahimaa hai..

(Pujyashri Bapuji ne omkaar mantr ke 19 Laabh bataaye..is kaa sundar varnan aap rishi prasaad ke April2011 issue men bhi padh sakate hai.)

 

aap ke budhdi ke saamane bhagavaan ho to vo bramhagyaan ban jaataa hai..

aap ke priti ke samaane bhagavaan hai to vo premaa bhakti ban jaati hai..

aap ke  karm ke saamane bhagavaan ka uddeshy hai to vo aap kaa karm yog ban jaataa hai..

apani unnati chaahate ho to 5 baaton kaa tyaag kar do:

1) apane ko kosanaa chhod do : kya akare apane bhagay men nahi..apan garib hai..paapi hai..apan aise hai waise aisaa niraashaawadi soch chhod do..

niraashaawaad ka tyaag

2) dinataa ka tyaag : mujhe koyi bolataa ki aashirwaad do to main us ko aankh dikhaataa hun..arre ye to aisi baat hai ki sury ko bole roshani do, roshani to juganu se managi jaati hai!..gangaaji ko bole paani do..santo se aashirwaad maangaa jaataa hai kya? bole ‘jug jug jiyo itana dakshinaa do’ tu swayam mar jaayegaa aashirwaad denewaalaa!..ye to murkho kaa kaam hai..to dinataa kaa tyaag karo..

 

3)aalasya kaa tyaag

4)katutaa kaa tyaag

5)krodh ka tyaag

 

akrodh, madhurataa, udyam, saahas, omkaar ka jap paramaatmaa ke sath sidha sambandh jod degaa..

 

aap ke jeevan me moh  sabhi vyadhiyo ka mukl hai..moh maane baahar se sukhi hone kaa prayaas..is ko bhav kaa shul kahete..  ye saadhanaa(omkaar ki saadhanaa) karoge to paramaatm prem pragat hogaa..aap sab ke hiteshi hote aur aap kaa heet hotaa hai..aap aanandit rahete..

moh men simit jeevan hotaa hai..satsang se vishaal jeevan ban jaataa hai..bhog se aadami bhogi hotaa hai , apani swaarth ki sochataa hai..aur omkaar ki saadhanaa se ,premaabhakti se aadami bhakt ban jaataa, yogi ban jaataa hai..sant ban jaataa hai..

 

aap roj omkaar ki 15 minat ki saadhanaa karo to badaa phaayadaa hai…subah dopaher shaam karo 15-15 minat to bahot achhaa..aap jitane unnat hote jaayenge utanaa aap ke kutumbiyon kaa bhalaa hotaa jaayegaa..aap ke rishtedaarn kaa bhala ahogaa aur aap se milanewaalon kaa bhalaa hogaa..bilkul pakki baat hai..

 

moraadaabaad men satsang ke nimitt kisi ne jyoti jagavaayi..vo jyot kisi ne ghar rakhavaayi aur aashaaraamaayan ka paath, kirtan aur dhyaan kiyaa.. ghar men bahot ijaafaa huaa, prasannataa huyi..kali ke dosh mite..ghar waale khushahaal huye..padosi ne kahaa ye jyot hamaare ghar 7 din rahegi..phir dusare padosi, tisare..chauthe aise karate karate puraa moraadaabaad deep jyoti se aanandit , aalhaadit, nirogi aur mano kaamanaa purti karane men saksham hone lagaa..lekin 1 jyot kis kis ke ghar kahaa tak jaaye?…haridwaar men dusari jyoti jagavaa ke gaye… ab 2-2 jyotiyaa chalati hai..purab paschim uttar dakshin chaaro taraf ..phir bhi logon ki maang aisi badh gayi ki navambar maas ki 17 taarikh 2013 tak jyoti kaa order book ho gayaa hai!

kisi ke ghar jyoti kaa order book thaa..saadhak ne kahaa ki paraso aap ke ghar jyoti aayegi..to gharwaali maayi ne kahaa, ‘nahi nahi..mere ghar kaise jyoti laaun?..meraa bachchaa apaharan ho gayaa hai..ham sab ro rahe..ye utsav hamaare ghar kaise hogaa?’

saadhak ne kahaa, ‘are maayi ! jis ke ghar jyoti jaati hai wahaa sukh jagamaataa hai..betaa chalaa gayaa hai kidnap ho gayaa hai lekin tum jyoti aane do ghar men ..punya badhane do..paap mitane do..dekh lenaa chamatkaar kyaa hotaa hai…dekh lenaa baapu kyaa karate hai..’

us maayi ne kahaa, ‘achchaa jyoti ki jo tithi hai us din aaye jyoti hamaare ghar men..lekin mera betaa apaharan ho gayaa hai..’

bole , ‘maayi sab bhalaa hogaa..’

jyoti jis ghar se nikal ke is ghar aani hai, us samay jo kidnap kar ke chale gaye the vo us ladake ko torcher kar rahe the ki 50 laakh binaa tu jindaa ghar nahi pahunchegaa…haah haah haah..’ kar ke..chalo 50 laakh ka murgaa phansaa hai…khushi khushi men 5-10 sharaab ki botale kholi aur pine lage..pite pite sab behosh ho gaye..out hogaye..apaharan kiye huye bete ke gale men baapu ka loket padaa thaa… maano baapu kahe rahe ki ab kyaa dekhataa hai..uth dhire dhire..aur baahar chalaa jaa.baahar se kundaa lagaa ke tu bhaag jaa ..tu apane ghar pahunch…vo ladakaa auto kar ke kaise bhi kar ke apane ghar pahunchaa…idhar jyoti ghar pahunchi aur udhar betaa ‘maa  maa’karataa huaa ghar me aayaa..jyoti ke jyot jagaanewaalon ke chaaro taraf jayakaaraa huaa..

aagraa waalon ne is jyot ki mahimaa jaani … aagraa satsang ke subah ke satr men aagraa men 3 jyotiyaa jagamagaayi..shaam ke satra men 7 jyotiyaa jagamagaayi hai…aagraa aur aaspaas ke ilaake ke log apane gharon men bhakti ki , gyaan ki, prabhu priti ki jyot jagamagaayenge…

pujyashri baapuji ke param paawan kar kamalo se sabhi jyotiyo ka deep praagatya huaa…braamhano ne vaidik mantr ghosh kiyaa…

 

om shri paramaatmane namah

om deep jyoti parabramh

deep jyoti janaardanam

deepo haratu me paapam

deepjyoti namostute

 

shubham karoti kalyaanam aarogyam sukh sampadaa

shatrubudhdi vinaashamch deep jyoti namostute

 

aatm jyoti ki mahimaa bhagavaan ne kahi hai lekin deep jyoti ki bhi mahimaa puraano men shaastron men aati hai…

 

…in dinon men deep jyoti jahaa bhi ho ve log raat ko khajur bhigaa ke agar shaam ko kaaryakram hai to subah khajur bigaa de..3 se 5 daane khajur ke prasaad men baate… agar baatanaa chaahe to ..lekin 5 se jyaadaa nahi..aur mithaayiyaa baatane ki aadat nahi daalanaa..khoparaa+mishri athavaa khajur athava sijan ke anusaar jaisaa bhi prasaad banaanaa ho to banaao ..bhakto ko to jyoti se laabh hotaa hi hai…

 

is jyoti men shitalataa chaahiye to erandiye ka tel, kapaasiyaa ka tel, soyaabin ka tel athavaa naariyal ka tel daale…aur garami chaahiye to tilon ka tel, saraso ka tel ye garami karegaa..

jyoti se aarogya badhegaa aur ghar kaa havaamaan bhi sundar hogaa..bhaktibhaav bhi badhegaa..deep jyoti ghar men rakhi utane din bramhachary kaa paalan kiyaa to aur jyaadaa prabhaav padegaa..maun , shwaasoshwaas kaa jap , aashaaraamaayan kaa paath, hey prabhu aanand daataa kaa paath aadi kare..

 

taanshu ke anubhav ka video dikhaayaa jaa rahaa hai..

 

birbal ke jamaane men saaraswatya mantr thaa to birbal chamakaa..lekin is jamaane men bhi to saaraswatya mantr hai! ghar ghar men birbal ban rahe hai!!

us jamaane men sharad pornimaa ke raat ko shrikrushn ke gop gopiyaa amrutpaan kiye the ..abhi is jamaane men baapu ke saadhak gop gopiyaa amrut paan kar rahe hai…us jamaane men shrikrushn ko swayam bansi bajaani padati thi…is jamaane men hamaare bachche bansi bajaate, kaam vohi ho rahaa hai!

 

om shaanti..

 

SHRI SADGURUDEV JI BHAGAVAAN KI MAHAA JAYAJYAKAAR HO!!!!!

Galatiyon ke liye Prabhuji kshamaa kare…

 

 

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