‘प्राणी मात्र सुखाय प्रवृत्ति’ (praani maatr sukhaay pravritti)

लुधियाणा (पंजाब) सत्संग अमृत  ; 23 नवम्बर 2011

 

भय नाशन दुरमती हरण , कली में रि को नाम l

निशी दिन नानक जो जपे , सफल होवई सब काम ll

गुरूवाणी  ने अपनी ओर से नही कहा है ये वचन; ये शास्त्र की बात कही है.. शास्त्र में आता है:-

 

 ये वदंती नरा नित्या

रि इति अक्षरम द्वयं l

तस्य उच्चारे मात्रेन

विमूक्तस्यस्ते ना संशया ll

जो मनुष्य “हरि” इस 2 अक्षर का सदा उच्चारण करता है , उस के उच्चारण करने मात्र से उच्चारण कर्ता को मुक्ति के मार्ग में अग्रसर होने का अवसर मिलता है…

वो पापों से मुक्त हो जाता है..विषाद से मुक्त हो जाता है…ममता से मुक्त हो जाता है..अहंता से मुक्त हो जाता है…

जीवात्मा को 3 चीज़े सताती है..उन 3 चीज़ो को सतानेवाली समझ कर अगर ये जीवात्मा सावधान हो जाए तो उस का तो मंगल हो जाए…उस के दर्शन , स्पर्श, उस को छू कर हवा लगती वे स्री पुरुष भी नारकिय यातनाओ से छूट जाते है..

 

 वस्तु में होती है ममता…. शरीर में होती है अहंता.. शरीर में अहंता हटा कर आत्मा में अहंता करे..

वस्तु में ममता हटा कर उस वस्तु को भगवान की माने…

 

तो अहंता  ममता आसक्ती ताप – ज्वर पैदा करती है..जीव को तपाती है ..

बिन रघुवीर पद जीव की जरनी ना जा  ll

अंतरात्मा जो रोम रोम में बस रहा है वो चैत्यन्य के पद में जाने के सिवाय जीवात्मा की जरनी – तपन नही मिटती..दुख नही मिता..

सुबह से शाम तक और जीवन से मौत तक सारे जीव  2 ही काम करते ..मनुष्य, पशु, पक्षी जीव,जन्तु सारे 2 ही काम करते :

1) दुख को मिटाने का..पशु पक्षी भी अपनी दुखद अवस्था हटाते..

2) और सुखद अवस्था में स्थित होने की कोशिश करते..

 

 दुख को भगाना और सुख को थामना ये 2 ही काम करते…

 

शादी करते सुखी होने के लिए तलाक़ करते तो भी सुखी करते..बहू को दुलार करती तो भी सुखी होने के लिए आँख दिखती तो भी सुखी होने के लिए..माथा टेकते तो भी सुखी होने के लिए और किसी को रुबाब दिखाते तो भी सुख के लिए…

 

तो   प्राणी मात्र सुखाय प्रवृत्ति

 

केवल मनुष्य मात्र नही, प्राणी मात्र  सुख के लिए प्रवृत्ति करते है..लेकिन जीवन भर ये करते करते अंत में उस के पल्ले में  चिंता, दुख और रुदन ही रहे जाता है..

 

 जनमता है तो रोता हुआ जनमता है, जीता है तो फ़रियाद करता हुआ जीता है और अंत में निराश हो कर मर जाता है..

 रानी एलिज़ाबेथ का क्या सौंदर्य था, क्या वैभव था, क्या प्रसिध्दी थी!..एकाएक खाने के टेबल पर भोजन करते समय पीड़ा हुई और डॉक्टर ने बोला की अब एक घंटा भी जीवित नही रहे सकती….रानी छटपटायी

प्लीज़ मेरा सब कु ले लो, मेरा राज्य, वैभव,संपदा ले लो ..लेकिन मुझे और 1 घंटा ज़िंदा रहेने दो..मैं मरने के बाद कहा जाऊंगी कुछ  व्यवस्था कर लूँ!” 

… अर्रे बबली! पूरा जीवन मिला, तब व्यवस्था नही कर पाई अब मौत आ कर छाती पर बैठी है अब क्या व्यवस्था करोगी?

करने हतो  सो ना कियो

पड़े मो के फंl

कहे नानक समय रम गयो

अब क्या रोवत अंध!

हे अंधी ती अब क्या रोवे ..मृत्यु आकर एकाएक दबोच ले उस के पहेले जहा मृत्यु की दाल नही ग़लती उस अमर आत्म पद में अपने अंतकरण को ले चले..

 

 ‘मैं आत्मा हूँये मान लो…

बचपन आया चला गया, जवानी आई चली गयी..चिंता आई चली गयी..भय आता वो भी चला जाता है..लेकिन उस को जानने वाला आत्मा सदा रहेता है.. मेरा रब!

प्रभु मेरे , मैं प्रभु का!

बस ऐसा पक्का मान लो … मैं हाथ जोड़ता हूँ आप को..इस से आप को जो फ़ायदा होगा ना इस का नाप-तौल ब्रम्हाजी भी नही कर सकते….आप सचमुच में भगवान के थे, भगवान के है, और भगवान के ही रहोगे…..

शरीर आप का नही है..वस्तुएँ भी आप की नही है…मन भी आप का नही है..अगर आप का मन होता तो आप के कहेने में चलता…आप नही चाहते काम विकार में फिसले लेकिन मन फिसलाता रहेता..आप नही चाहते ये शरीर बीमार हो लेकिन हो जाता है..आप नही चाहते की बाल सफेद हो , लेकिन हो जाते है..तो शरीर आप के कहेने में नही है..है क्या?

मन और  बुध्दी भी हमारी नही..

आप अपने को कितना भी चतुर समझो लेकिन नही बता सकते की 5 मिनट के बाद आप को क्या ख़याल आएगा.. आप को नही पता.. लेकिन परमात्मा को पता है..

मैं सब कुफेंक कर बैठ गया नर्मदा किनारे…रात तो बी गयी..सुबह नहा के आया.. भूख लगी तो सोचा की अब मैं कही नही जाऊंगा..चोरी, डकैती, खून करने वाले को भी जैल में रोटी मिलती है..और मैं तेरा भजन करूँ और भीक माँगने जाऊं ? मैं नही जाऊंगा !…क्यों की हम ब्राम्‍ह नही है की माँगना आसान हो जाए..क्षत्रिय खून है…पिताजी बड़े धनाढ़्य आदमी थे…

सोचा मैं ना कहीं जाऊंगा

यही बैठ के अब खाऊँगा

जिस को गरज होगी आएगा..

सृष्टि कर्ता खुद लाएगा !

जो ही मन विचार ये लाए,

त्यो  2 किसान वहा आए..

दोनो सीर पर बाँधे साफ़ा

खाद्य पे लिए दोनो हाता

बोले जीवन सफल है आज..

अर्घ्य स्वीकारो हे महाराज !

 हम तो बोले, हमारा तो कोई परिचय नही..तुम्हारा कोई परिचित संत होंगे उन के पास ले जाओ.. तब उन्हों ने कहा की , स्वप्न में रात को मार्ग देखा!!

 

मुझे तो विचार सुबह आए! लेकिन मुझे ऐसे विचार आएँगे उस के पहेले कैसा उन को स्वपना दिखा दिया..आकृति दिखा दी..घुंघराले बाल वाला , सफेद धोती वाला ऐसा ऐसा युवक है… कैसा अंतर्यामी परमात्मा है !…मेरे मन में आएगा ये तो मुझे पता नही था; उस के पहले ही किसानो को स्वपना दे दिया!…मेरे को जो व्याप रहा उस अंतरात्मा को तो पता है..जैसे घड़े का आकाश केवल लुधियाना तो क्या अमेरिका के घरों में भी वो ही आकाश है!..ऐसे ही अंतरात्मा केवल हमारा अंतरात्मा नही है; सभी का अंतरात्मा है..सर्व व्यापक है… इसलिए उस को परब्रम्‍ह परमात्मा बोलते…अकाल पुरुष!.. मूर्ति की स्थापना होती, मंदिर , चर्च की स्थापना होती… परमात्मा की स्थापना नही होती..

 

स्थाप्या ना जाई, कट्ट्या ना होइ

आपे आप निरंजन सोइ

 

जिन सेव्या तीन पाया मान

नानक गावे गुण निधान

 

 जिस ने उस का सुमिरन चिंतन किया, उस ने पाया… वो सारे गुनो का मूल है..

जैसे धरती को खोदो तो कोई रस, फल, फूल नही दिखेगा..

सब प्रकृति में होता है, लेकिन आप के करने से नही होता..आप खाना हजम  नही करते..फिर भी  खाना हजम हो रहा है..आप नींद नही करते, आप पलके नही गिराते..अगर आप पलके खोले और गिराए तो परेशान हो जाओगे..ये सब अपने आप होता है..आप के श्वास को  चलाना, रक्त का संचार, भूक-प्यास ऐसे सारे कर्म प्रकृति में हो रहे है..लेकिन  ग़लती से हम अपने को कर्ता मानते… शरीर में अहंता करते…वस्तु में ममता करते….बीती हुई पर शोक करते क्यू की ममता है…जो  नही है उस की चाह करते…नही है उस में आसक्ति, वर्तमान में ममता, बीती हुई में स्पृहा… इस से हम बड़े  परेशान हो जाते ..सभी… एक या दो नही..

 

एक भुला दूजा भुला, भुला सब संसार

बिन भुला एक गुरखा उस को गुरु का आधार..

जिस को गुरु के ज्ञान  का आधार है वो अपनी भूल निकाल कर यही निहाल हो जाता है….बाकी सब भूल भुलैया..

 

 मुझे तो आज कल के युवक युवती पर बड़ा तरस आता है…विकास का युग बोलते लेकिन युवक युवतियों  के लिए सत्यानाश वाला युग ऐसा पहेले  कभी नही सुना शास्त्रो में..देसी गाय का दूध, घी , मख्खन इन से छिन गया..और सही दूध भी नही मिलता.॥ फैट वाला और बासी दूध…शुध्द हवा भी छीन गया…शुध्द ज्ञान  देनेवाला गुरुकुल भी छीन  गया..अब तो पढ़ो पढ़ो और रटो रटो …कौन सी कक्षा पढ़ता तो बोलते फिफ्थ..अभी से अँग्रेज़ी का गुलाम हो गया..पाँचवी नही बोलता…

तो जो ऋषियो की परंपरा का ज्ञान  था..जो अपनी संस्कृति का वजूद था उस के उपर तो पर कुल्हाड़ा चल रहा हैं स्कूलों में, कॉलेज में, व्यवहार में…..

स्वास्थ्य की जो दिव्य वैदिक बातें थी भारतीयों के जीवन में, वो बातें भी छीन  गयी है..  जैसे आप ने अभी दूध पिया है, आप बज़ार में गये तो आप को  बाजार में नमकीन दिखा, मुँह में पानी आया तो चलो खा लिया..लेकिन अगर ये संस्कार होते की स्वास्थ्य की बात आप को सिखाई गयी है की दूध के उपर अढ़ाई घंटे तक नमकीन जैसा विरोधी कु नही खाना चाहिए चाहे अमृत मिल जाए तो आप स्वस्थ रहेंगे ..पनीर के पकोडे ! पनीर और काजू ड्राइ फ्रूट के समोसे!!पैसा देकर बीमारी पेट में भर रहे..क्या खाना ये भी छीन गया है जवानो से..

 

हम घर जाते थे तो मां गरम गरम रोटी बना देती थी..उस पर मख्खन लगा कर हम मख्खन रोटी खाते थे…अभी तो रोटी की जगह डबल रोटी जो बासी होती जिस से बुध्दि कमजोर और आंते खराब होती..बिस्कुटे, डबल रोटी बच्चों के लिए मुसीबत है…चोकोलेट महा मुसीबत..और फास्ट फुड का तो कहेना ही क्या?…ऐसे तबीयत खराब करते…केवल हिन्दुस्तान के ही नही सारे विश्व के बच्चों का बहोबुरा हाल है….फिर थोड़े बड़े हुए ना हुए तो एक दूसरे का बॉय फ्रेंड गर्ल फ्रेंड… जिस उमर में हड्डिया मजबूत हो, शरीर सुदृढ़ हो उस के पहेले ही लीकेज  प्रोब्लेम शुरू हो जाती..सपदोष, कुकर्म प्रोब्लेम युवको को बावरा बना देता..सर्टिफिकेट लेके भटकते रहेते..बेचारो को रोज़ी नही मिलती..नोकरी नही मिलती ..मिली तो इधर बदली उधर बदली..जैसे बंदर बंदरियों को नचाया जाता ऐसे कंपनीयों के आदमी भारत के युवक युवतियों को नचाते रहेते…..रात पाली करते..बहू बेटियों के साथ बड़े ऑफीसर मनचाहा कुकर्म करना चाहते , नहीं माने तो बदली कर देते नही तो निकाल देंगे धमकी देते..मुझे पता चला तो हल्ला पुकारा की बहू बेटी को कोई सताएगा , कॉल सेंटर वाला हो , मॅनेजर हो या कंपनी का मालिक हो ..कोई भी बहू बेटियों की इज़्ज़त लूटने की कोशिश करे तो  महिला उत्थान आश्रम में खबर करो; हम वहा हल्ला पुकारेंगे …उन को पता है की बापू हल्ला पुकारना जानते है!

नारायण हरी …नारायण हरी..

 

ये तो मालूम पड़ा इसलिए.. लेकिन छिप  छिप  के कितने बेचारे अन्याय सहेते होंगे…किसी पर अन्याय हो तो मैं उन बहू बेटियों को कथा सुनाया करता हूँ…

( पूज्यश्री बापूजी ने किरण देवी की कथा सुनाई..ये कहानी पढ़ने के लिए कृपया यहा पधारे : http://wp.me/P6Ntr-M0   )

 

 अकबर महिलाओं का मसीहा बनने का स्वांग कर रहा था..वास्तव में क्या था?…

 

जो विकारी आदमी होता है उस का मन कमजोर होता है..जिस का मन कमजोर उस की नाडियाँ कमजोर..अकबर किरण देवी के आगे जीवन दान माँगने लगा…उस को डबल और सिंगल भी हो गयी..

 

किरण को पता ही नही था की उस के संयम और सादगी की बात आशाराम बापू तक पहुचेगी और अकबर का पोल खोलनेवाली कन्याओं में मेरा नाम आएगा!

पंडित नेहरू ने 1 पुस्तक लिखा भारत की खोज‘ ..आचार्य विनोबा भावे ने वो पुस्तक पढ़ कर पंडित जी को खत लिखा..की ये आप ने कैसे लिखा की : अकबर के जमाने में तुलसीदास हुए ….

 विनोबा भावे ने पंडित नेहरू को सावधान किया की ये युक्ति युक्त नहीसिध्दांत के खिलाफ है…जमाना या तो भगवान का है या भगवान को पाए हुए संत  का जमाना है..तुलसीदास जी के जमाने में अकबर हुआ लिखना उचित  है..

नानक जी को 2 बार जैल में डाला बाबर की बबरता ने..फिर भी नानक जी का जमाना अभी भी मौजूद है! बाबर का जमाना नही है..

आदि सत, जुगात सत,

नानक होसे भी सत

शरीर नही था , सृष्टि नही थी तभी जो सत था वो अभी भी है..पहेले भी था, बाद में भी रहेगा…उस सत को आप अपना मन और अपना  मैं  समर्पित करो..आप का मनोरथ तो फलेगा, आप का जीवन धन्य  होगा, लेकिन आप का दर्शन , आप की वाणी , आप को छू कर जानेवाली हवा भी लोगो का मंगल करेगी…

 

 मैं घर में था तो मुझे एक ब्राम्‍ह मिला था… बोले हम पुष्करना ब्राम्‍ह है…जैसे बिश्नोई होते ऐसे पुष्करना ब्राम्‍ह भी होते..

बिश्नोई मतलब 20 और 9 सिध्दांतों को (गुरु के सिध्दांतों को ) जो मानते वो बिश्नोई संप्रदाय के होते…( पूज्यश्री बापूजी ने बिश्नोई संप्रदाय के संत जम्बेश्वर जी  महाराज तलाव खुदवा रहे थे उस की कहानी सुनाई..सत्कर्म का फल सच्चा होता और दुष्कर्म का फल दुखद होता है.. ये कहानी पढ़ने के लिए कृपया यहा पधारे :     http://wp.me/P6Ntr-s2    )

 

 दुख मिटाते मिटाते लोग मिट जाते दुख नही मिटता .. सुख टिकता नही , दुख हटता नही…लेकिन इस बात को समझ लो तो सुख मिटता नही और दुख टिकता नही…

लुधियाना की एक लड़की शादी कर के स्पेन में गयी..बोली 12 ऑपरेशन हो चुके है, अब कल 13 वा ऑपरेशन हुआ..डॉक्टर बोलते शायद और भी ऑपरेशन करने पड़े ..वो लुधियाना आश्रम में कभी कभार आती थी, इस कारण थोड़ी बहुत श्रध्दा थी..उस ने बहुत पुकार की तो आज उस से फोन पर बात की मै ने…रो रही थी बेचारी…स्पेन गयी थी सुखी होने के लिए लेकिन ऑपरेशन करा करा के परेशान है..जरूरत नही होती बच्चे को जनम देने के लिए पेट चिराने की कोई ज़रूरत नही होती..लेकिन डरा के ऑपरेशन करवाते है..

 

बहू बेटियो के साथ और युवक युवतियों से जितना अत्याचार इस युग में हुआ ऐसा कभी नही हुआ..इस मे कु कम हुई तो और वेलंटिन डे भेज दिया है..निर्लज्जता से एक दूसरे को आइ लोव यु बोलते.. ऐसा कोई नककट्टा पना दिखावे तो उस के लिए शूर्पणखा की कहानी सुनाते.. रावण की बहे शूर्पणखा राम जी और लक्ष्मण को बारी बारी से बोलती की तुम इतने सुंदर हो की मैं तुम से प्रेम करती हूँ..लक्ष्मण ने उस की निर्लज्जता देख कर उस के नाक कान काट कर उस के हाथ में दिए और बोला की स्री जात का भूषण लज्जा ही है..तू ऐसी निर्लज्जता दिखाती की तुम्हारे नाक कान होना दोनो ही व्यर्थ्य है..अपने भाई रावण को दिखा..

ये नककट्टा पना विदेशी टीवी चनेलो के द्वारालेक्ट्रॉनिक माध्यम के द्वारा वेलिंटाइन डे के रूप में हमारे युवक युवतियों में घुस गया..तो मैने इस बात से भारत के लोगो को बचाना चाहा..विश्व के लोगो  को बचाना चाहा की युवक युवतिया आइ लोव यू कर के एक दूसरे को छूएँगे तो रज-वीर्य नाश होगा..आँखों के चश्मे बढ़ जाएँगे, कमर की तकलीफे बढ़ जाएँगी..बुढ़ापा जल्दी आएगा और जो संतान आएगी वो कमजोर होगी..मैं किसी धर्म संप्रदाय का विरोधी नही लेकिन मानवता का विनाश देखता हूँ तो मानवता की सेवा करता हूँ की मनुष्यत्व मिला है..प्राणी मात्र की सेवा हो तो अच्छा है लेकिन मनुष्य शरीर मिला है तो मनुष्य की तो ज़रूर सेवा हो..तो मैने वेलिंगटाइन डे  14 फेब को मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाने का आवाहन किया..

 

(  मातृ पितृ पूजन दिवस के  पुस्तक लिए लिंक :   http://www.hariomgroup.org/hariombooks/satsang/Hindi/MatriPitriPoojan.htm  )

 

बच्चे बच्चियां  अपने माँ बाप का पूजन करे और माँ बाप अपने बच्चो को चिरंजीवी भव यशस्वी भव ऐसा आशीर्वाद देते हुए तिलक करे..

इस से विदेशी शक्तियों ने बहो कू-प्रचार शुरू किया, करोड़ो रूपीए खर्च डाले..लेकिन ..

बापू के दुलारे बहकाये नही जाते

कदम रखते आगे  तो लौटाए नही जाते

 

वो तो पक्के हो जाते है, उन को देख के जो नये आते वो भी सोचते की हम ने तो टीवी चेनेलो पर कुगंदा ग़लत सुना था..यहा तो एकदम आनंद मंगल हैं ..ईश्वर के सिवाय कोई बात ही नही है…न तंदुरुस्ती की बाते है! मन प्रसन्न रखने की बाते है!! बुध्दी  में बुध्दी  दाता का प्रकाश हो गया, तनाव मुक्त हो गया ऐसा कइयों को लाभ मिला ..तो कू-प्रचार वालों को बेचारों को तो मुँह की खानी पड़ी…

लुधियाना की बच्ची जो स्पेन में है उस को हिन्दुस्तान वापस बुला के ओकार के मंत्र से एकदम ठीक कर देंगे अपन ..लुधियाना की बच्ची हमारी बच्ची नही है क्या? 🙂

प्रसूति के समय सीजेरियन कराने की कोई ज़रूरत नही, देसी गाय के गोबर का रस 10-12 ग्राम लेकर उस में देख कर भगवान का नाम जपो और प्रसूति वाली महिला को पिलाओ..आराम से 1 घंटे के अंदर प्रसूति होती है…

 

गर्भवती महिला के गर्भ का विकास नही हो रहा ऐसा डॉक्टर बोले तो घबराना नही..गर्भपात करवाना नही..400 ग्राम दूध में 400 ग्राम पानी डाल कर उबालो..उबाल उबाल के 410 ग्राम रहे जाए तब उस में थोड़ा घी डाल के, मिशरी डाल के गर्भवती महिला को पिलाओ..बच्चे की ग्रोथ भी होगी और बच्चा सुंदर भी होगा…पेट में बच्चा है तो नारियल और मिशरी चबा के खाया करो तो बच्चा गोरा, सुंदर और पुष्ट होगा…गर्भवती के नाभि पर चंद्रमा की चाँदनी  पड़े तो बच्चे की ग्रोथ होगी..

 

 नारायण हरी … हरी ओम हरी…

 

 ये कथा भगवान राम जी के गुरुदेव वशिष्ठ जी महाराज  ने कही है..ये  कथा जो भी सुनेगा उन के पाप नाश होंगे भविष्य मंगल म होगा..ज्ञान बढ़ेगा…

 

 पुष्कर नाम का ब्राम्‍ह नित्य हरि का नाम लेता ..हरि , गोविंद , माधव, केशव ..सुबह नींद में से उठ कर थोड़ी देर भगवान का चिंतन करता…श्वासोश्वास में भगवान का  नाम लेता ..रात को सोते समय श्वास अंदर जाता तो ओम श्वास बाहर आता तो 1 गिनता ..श्वास अंदर जाता तो शांति..श्वास बाहर आता तो 2 ऐसे अजपा जाप करते सो जाता ..उँचे गुरु के शिष्य थे पुष्कर ब्राम्‍ह

 

 ‘पुष्कर नाम के ब्राम्‍ह को ले आओऐसी यमराज ने आज्ञा  दी..तो यमदूत इस पुष्कर ब्राम्‍ह को ले गये..यमदुतो के द्वारा यमराज के सामने पेश किया गया तो यमराज अपने आसन से उठ कर खड़े हो गये !

 

यमराज बोले :  इस महान पुण्यात्मा  को गुरु दीक्षित ब्राम्हण  को यहा कैसे ले आए? …

 

मदूत  बोले : पुष्कर ब्राम्‍ह यही है..

 

यमराज बोले : ये पुष्कर ब्राम्‍ह को लाने की आज्ञा  नही दी थी..इन को देख कर मैं खड़ा हो गया हूँ! मेरे हाथ जोड़े गये है…ये भगवान को पाए हुए ब्रम्हग्यानी संतों ने दिया भगवान का नाम लेते है, सत्संग सुनते है.. ब्रम्हग्यानी  संग धर्मराज करे सेवा..इन के आदर सत्कार में तो मैं स्वयं लग जाता हूँ..इन को तुम नरकों में कैसे लाए?… इन के नाम का दूसरा पुष्कर ब्राम्‍ह है , जो दुराचारी है, शराब पिता है,जो दूसरों का ह छिनता है..एकादशी का व्रत नहीं  करता… उस को लाने के लिए कहा था…

 

यमराज पुष्कर ब्राम्‍ह को बोले की हमारे दूतों से ग़लती हो गयी, हम क्षमा याचना चाहते है….आप की पत्नी रो रही है, परिवार वाले चिंतित हुए है.. आप को जल्दी वहा छोड़ के आएँगे..

 

पुष्कर ब्राम्‍ह बोला: यमराज! नही नही..आप के दूतो ने ग़लती की तो आप मायूस ना हो.. लेकिन मुझे आप का नरक दिखाओ ..बोलते है कुंभी पाक नरक है, रौरव नरक है..और भी नरक है..मुझे नरक दिखाइए..

 

यमराज बोले : हमारे दूतो ने ग़लती की हैं ..तो चलिए हम आप की बात रखते है..

 

नरक दिखाया..तो कु लोग अस्सी नरक में तप रहे थे..जिस ने अपनी पत्नी होते हुए दूसरी महिलाओं से दुराचार किया उन को ऐसे लोहे के तपे  हुए पुतले से आलिंगन करवाते..क्या क्या हाल ..

 

रौरव नरक में माँस खानेवालों का शरीर वो जीव जन्तु खाते, काटते..शुलों पर चलाते…क्या क्या बुरा हाल करते…ना जाने कितने कष्ट…हाय कष्ट..हाय दुख की आहें चारो ओर थी…

पाप का फल नही चाहते लेकिन पाप करते ..ऐसे लोगों को नारकों में ला कर  भोग मे शरीर दिया जाता…आग में जलाते , कष्ट दुख सहेना पड़ता लेकिन शरीर मरेगा नही , मर गया तो जान छूटेगी , इसलिए मरेगा नही..क्यो की भोग म शरीर होता.. जीव को पानी में दबोच के  डूबने की पीड़ा होगी लेकिन शरीर मरेगा नही क्यो की भोग म शरीर है..

यमराज की नारकिय व्यवस्था देख कर पुष्कर ब्राम्‍हण   ने नारकिय जीवों को पूछा  की  भाइयों तुम इधर कैसे आए ?

 

 नारकिय जीव बोले : हम नारकिय जीव इसलिए हुए की हम ने एकादशी का व्रत नही रखा..गुरु दीक्षा नही लिया..

 

 पुष्कर ब्राम्‍ह ने पुछा : तो क्या तुम ने  सत्संग कभी नही सुना !

 

बोले : नही ..हम शराबी थे..कोई बोला हम जुआरी थे..कोई बोला हम अहंकारी थे…ऐसे नीगुरे, धोखेबाज है .. दुनिया दारी में सुखी होने के लिए सब कुछ  कर लिए फिर भी सुखी नही हुए ..जो जीते जी सुखी नही हुए वो मरने के बाद क्या सुखी होंगे?..

वे नारकिय जीव बोले : महाराज हम यहा बहुत दुखी है, हमारी रक्षा हो..बचाओ…

 

..वशिष्ठ जी कहेते है की तब पुष्कर  ब्राम्‍ह ने थोड़ी देर अंतरात्मा में विश्रान्ति पाई..जो श्वास चल रहा है वो श्वास अंदर जाता तो सो बाहर आता तो हम‘… वो ही परमात्मा है जिस की सत्ता से साँसे चलती है …मैं मन नही हूँ..मैं शरीर नही हूँ…मन मेरा नहीशरीर मेरा नही ..मैं आत्मा हूँ..मैं चैत्यन्य  हूँ..मैं शाश्वत हूँ…अगर ऐसी मेरी सत्संग की समझ है…मेरी वासना, मेरी आसक्ति ना हो …सतशास्त्रों  को मैने शिरोधार्य किया है ..मैने सदगुरु की वचनो को शिरोधार्य किया है तो इन नारकिय जीवों  को सुख शांति मिले..इन की सदगति हो…..

 

 नारकिय जीव बोले : पुष्करणा महाराज की ज हो! आप की  ज हो!!

 

 पुष्कर ब्राम्‍हबोला: क्यो?

 

 …नारकीय जीव बोले : महाराज आप ने श्वर में गोता मारा ..और हमारी तरफ देखा तो आप की आँखो से जो अध्यात्मिक तनमात्राएँ मिली वो हमारे पाप ताप मिटाए..आप को छू कर जो हवा आ रही उस ने हमारे पापो का शमन कर दिया है..महाराज  नरक होते हुए भी अब नारकिय पीड़ा और दुख नही है…

 

 पुष्कर ब्राम्‍ह को देख कर अथवा राजा जनक को देख कर नारकिय जीवों का पाप ताप मिट जाता है तो  लुधियाना के सत्संग में सत्संग रूपी जनक और पुष्कर ब्राम्‍ह को देख कर हमारा भी तो पाप ताप मिट रहा है.. रक्त पवित्र हो रहा है..आनंद आ रहा है..शांति मिल रही है…दुख दूर  हो रहे है…

 

कबीरा दर्शन संत के साहिब आवे याद

लेखे में वो ही घड़ी बाकी के दिन बाद ll..

 

संत के दर्शन से आप आत्मा को मैं मानोगे..परमात्मा को मेरा मानोगे.. …तो आप को आत्मा परमात्मा की प्रीति मिलेगी…

 

 अभी शरीर में प्रीति है…शरीर में प्रीति है तो अहंकार मिलता है…और आत्मा परमात्मा में प्रीति है तो भगवत प्रेम, भगवत शांति मिलती है..

 

 अहंकार वाले का क्या बुरा हाल होता है आप  सुन के दंग होंगे..

 

जगत के  सुख से संतोष नही होता..भगवत प्रेम से संतोष होता है..

 

जगत का सुख लेने के लिए वस्तुए इकठ्ठि करो और फिर इंद्रिया शिथिल हो जाए, मन कमजोर हो जाए और  वासना की ऐसी अंधी  आग लगे की मरने के बाद भी ऐसी ही नीच योनियों में घूमते…जिस को दूसरो का रूप लावण्य सौंदर्य देखने की आदत प गयी वे मरने के बाद पतंगे बनते..दिए की लौ पर जल मरते फिर भी वासना नही मिटती..स्वाद की वासना वाले मली जैसी और भी कई नीच योनियों में जाते और कुंडे में तड़प तड़प के मरते..जिन को सुगंध  परफ्यूम  की वासना होती है वे मरने के बाद भंवरे जैसी और कई नीच योनियों में जाते…भँवरा  तो लकड़े को चिर कर सुराख कर सकता है, लेकिन कमल के सुगंध में बावरा हो कर पड़ा रहेता और सुबह जंगल  के जीव उस को दबोच के मार देते है…ऐसे ही नकली हाथिनी खड्डे पर बना देते है, हाथी काम विकार से उस के पास जाता और खड्डे में गिर पड़ता है..माहुत उस को पकड़ते और दर दर के भीक मँगवाते…

 

 जो 5 विकारो से घिरे रहेते, जिन के जीवन में संयम का अभाव होता, जिन को निर्विकार नारायण की गति नही उन की यही गति होगी..अब्राहि लिंकन व्हाइट हाउस में प्रेत होकर भटक रहा है…मिथिला का राजा अज्ज मरने के बाद अजगर हो गया…

 

 ओम ओम ओम ओम … ( पूज्यश्री बापूजी ओंकार का दिव्य ध्यान करा रहे है…)

 

 प्रेमाभक्ति का रास्ता  पकडो, अहंकार का द्वार छोड़ो …भक्ति तब मिलती जब संत अनुकूल हो..संतों  के हृदय में तुम्हारे लिए अहोभाव हो जाए तो भक्ति मिल जाती है..

 

बच्चा ऐसे ही माँ  को प्यारा होता है..शिष्य ऐसे ही गुरु को प्यारा होता है..लेकिन जब बच्चा बोलता है, ‘माँ माँ .. लो ये चाबी!‘..अब देखो तो चाबी भी माँ  की है..बरामदा भी माँ का है.. 🙂 लेकिन बच्चा  उठा के माँ को देता है तो माँ खुश हो जाती है!पिता खुश हो जाते..ऐसे हे महाराज लो मेरे मन की चाबी आप ले लोबोले तो मन तो आप का ही है, न भी आप का है.. 🙂 …. हम सत है.. चि है आनंद है और आप के है ..हे प्रभु आनंद दाता ज्ञान  हम को दीजिए…मैं  तेरा तू मेरा हे प्रभु…बिन फेरे हम तेरे….ओम ओम ओम ओम ओम…

 

 

ओम शांति.

 

 श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो!!!!!

ग़लतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे…

Ludhiyaanaa (Panjab) Satsang Amrut  ; 23 Nov 2011

bhay naashan durmati haran kali men hari ko naam l

nishi din naanak jo jape, saphal hovayi sab kaam ll

 

guruwaani ne apani aor se nahi kahaa hai ye vachan; ye shaashtr ki baat kahi hai..shaashtr men aataa hai:-

 

ye vadanti naraa nityaa

hari iti aksharam dwayam l

tasya uchchaaren maatren

vimuktasyaste na sanshayaa ll

 

 

jo manushya “HARI” is 2 akshar ka sadaa uchchaaran karataa hai , us ke uchchaaran karane maatr se uchchaaran kartaa ko mukti ke maarg men agrasar hone kaa awasar milataa hai…

 

paapon se mukt ho jaataa hai..vishaad se mukt ho jaataa hai…mamataa se mukt ho jaataa hai..ahantaa se mukt ho jaataa hai…

 

 

jivaatmaa ko 3 chije sataati hai..un 3 chijo ko sataanewaali samajh kar agar ye jivaatmaa saawadhaan ho jaaye to us kaa to mangal ho jaaye…us ke darshan , sparsh, us ko chhu kar havaa lagati ve sree purush bhi naarakiy yaatanaao se chhut jaate hai..

 

vastu men hoti hai mamataa…. sharir men hoti hai ahantaa..

sharir men ahantaa hataa kar aatmaa men ahanataa kare..

vastu men mamataa hataa kar us vastu ko bahagavan ki maane…

to ahanta mamataa aasakti taap – jwar paidaa karati hai..jiv ko  tapaati hai ..

bin raghuvir pad jiv ki jarani naa jaayii  ll

 

antaraatmaa jo rom rom men bas rahaa hai vo chaityany ke pad men jaane ke siwaay jivaatmaa ki jarani tapan nahi mitati..dukh nahi mitataa..

subah se shaam tak aur jeevan se maut tak saare jiv  2 hi kaam karate ..manushy, pashu, pakshi jeev,jantu saare 2 hi kaam karate :

1) dukh ko mitaane kaa..pashu pakshi bhi apani dukhad awasthaa hataate..

2) aur sukhad awasthaa men sthit hone ki koshish karate..

 

dukh ko bhagaanaa aur sukh ko thaamanaa ye 2 hi kaam karate…

shaadi karate sukhi hone ke liye talaak karate to bhi sukhi karate..bahu ko dulaar karati tobhi sukhi hone ke liye aankh dikhati to bhi sukhi hone ke liye..maththaa tekate to bhi sukhi hone ke liye aur kisi ko rubaab dikhaate to bhi sukh ke liye…

to   ‘praani maatr sukhaay pravritti’

– kewal manushya maatr nahi, praani maatr  sukh ke liye pravrutti karate hai..lekin jeevan bhar ye karate karate ant men us ke palle men  chintaa, dukh aur rudan rahe jata hai..

 

janamataa hai to rotaa huaa janamataa hai, jeetaa hai to phairyaad karata huaa jitaa hai aur ant men niraash ho kar mar jaataa hai..

 

 rani elizaabeth kaa kyaa saundary tha, kya vaibhav thaa, kyaa prasidhdi thi!..ekaaek khaane ke table par bhojan karate samay pidaa huyi aur doctor ne bolaa ki ab ek ghantaa bhi jivit nahi rahe sakati….rani chhatapataayi…

“please meraa sab kuchh le lo,meraa raajy, vaibhav,sampadaa le lo ..lekin mujhe aur 1 ghantaa jindaa rahene do..main marane ke baad kahaa jaaungi kuchh vyavasthaa kar lun!”  … arre babali! puraa jeevan milaa, tab vyavasthaa anahi kar paayi ab maut aa kar chhati par baithi hai ab kyaa vyavasthaa karogi?

karane hato so naa kiyo

pade moh ke phand l

kahe naanak samay ram gayo

ab kyaa rowat andh!

 

hey andhi mati ab kyaa rowe..mryityu aakar ekaaek daboch le us ke pahele jahaa mrutyu ki daal nahi galati us amar aatm pad men apane antkaran ko le chale..

 ‘main aatmaa hun’ ye maan lo…

bachapan aayaa chalaa gayaa, jawaani aayi chali gayi..chintaa aayi chali gayi..bhay aataa vo bhi chalaa jaataa hai..lekin us ko jaanane waalaa aatmaa sadaa rahetaa hai.. MERAA RAB!

‘PRABHU MERE , MAIN PRABHU KAA!’

main haath jodataa hun aap ko..is se aap ko jo phaayadaa hogaa naa is kaa naap-taul bramhaaji bhi nahi kar sakate….aap sachamuch men bhagavaan ke the, bhagavaan ke hai, aur bhagavaan ke hi rahoge…..

 

sharir aap ka nahi hai..vastuyen bhi aap ki nahi hai…man bhi aap kaa nahi hai..agar aap kaa man hotaa to aap ke kahene men chalataa…aap nahi chaahate kaam vikaar men phisale lekin man phisalaataa rahetaa..aap nahi chaahate ye sharir bimaar ho lekin ho jaataa hai..aap nahi chaahate ki baal saphed ho , lekin ho jaate hai..to sharir aap ke kahene men nahi hai..hai kyaa?

 

man, budhdi bhi hamaari nahi..

aap apane ko kitanaa bhi chatur samajho lekin nahi bataa sakate ki 5 min ke baad aap ko kyaa khayaal aayegaa.. aap ko nahi pataa.. lekin paramaatmaa ko pataa hai..

main sab kuchh phenk kar baith gayaa narmadaa kinaare…raat to beet gayi..subah nahaa ke aayaa.. bhukh lagi to sochaa ki ab main kahi  nahi jaaungaa..chori, dakaiti, khun karane waale ko bhi jail men roti milati hai..aur main teraa bhajan karun aur bhik maangane jaaun? main nahi jaaungaa!…kyo ki ham braamhan nahi hai ki maanganaa aasaan ho jaaye..kshatriy khun hai…pitaaji bade dhanaadhya aadami the…

sochaa main na kahin jaaungaa

yahi baith ke ab khaaungaa

jis ko garaj hogi aayegaa..

srushtikartaa khud laayegaa!

jo hi man vichaar ye laaye,

 tyo  2 kisaan wahaa aaye..

dono seer par baandhe saaphaa

khaadya pey liye dono haathaa

bole jeevan saphal hai aaj..

arghya sweekaro hey mahaaraaj !

 

 

ham to bole hamaaraa to koyi parichay nahi..tumhaaraa koyi parichit sant honge un ke paas le jaao.. tab unhon ne kahaa ki , swapn men raat ko maarg dekhaa!!

…mujhe to vichaar subah aaye! lekin mujhe aise vichaar aayenge us ke pahele kaisaa un ko swapnaa dikhaa diyaa..aakruti dikha di..ghunghraale baal waalaa , saphed dhoti wala aisaa aisaa yuwak hai… kaisaa antaryaami paramaatmaa hai!…mere man men aayegaa ye to mujhe pataa nahi thaa; us ke pahale hi kisaano ko swapnaa de diyaa!…mere ko jo vyaap rahaa us antaraatmaa ko to pataa hai..jaise ghade kaa aakaash kewal ludhiyaanaa to kyaa amerikaa ke gharon men bhi wo hi aakaash hai!..aise hi antraatmaa kewal hamaaraa antaraatmaa nahi hai; sabhi kaa antaraatmaa hai..sarv vyaapak hai… isliye us ko par bramh paramaatmaa bolate…akaal purush!.. murti ki sthaapanaa hoti, mandir , charch ki sthaapanaa hoti… paramaatmaa ki sthaapanaa nahi hoti..

 

sthaapyaa na jaaii, kittaa naa hoii

aape aap niranjan soii

jin sevyaa tin paayaa maan

naanak gaave gun nidhaan

 

jis ne us ka sumiran chintan kiyaa, us ne paayaa… vo saare guno kaa mul hai..

 

jaise dharati ko khodo to koyi ras, phal, phul nahi dikhegaa..

 

sab prakruti men hotaa hai, lekin aap ke karane se nahi hotaa..aap khaanaa hajam  nahi karate..phir bhi  khaanaa hajam ho rahaa hai..aap nind nahi karate, aap palake nahi giraate..agar aap palake khole aur giraaye to pareshaan ho jaaoge..ye sab apane aap hotaa hai..aap ke shwaas kaaa chalaanaa, rakt ka sanchaar, bhuk-pyaas aise saare karm prakruti men ho rahe hai..lekin  galati se ham apane ko kartaa maanate… sharir men ahantaa karate…vastu men mamataa karate….biti huyi par shok karate kyu ki mamataa hai…jo  nahi hai us ki chaah karate…nahi hai us men aasakti, vartmaan men mamataa, biti huyi men sprihaa is se ham bade  pareshaan ho jaate ..sabhi… ek yaa do nahi..

ek bhulaa dujaa bhulaa, bhulaa sab sansaar

bin bhulaa ek gurakhaa us ko guru kaa aadhaar..

 

jis ko guru ke gyaan kaa aadhaar hai vo apani bhul nikaal kar yahi nihaal ho jaataa hai….baaki sab bhul bhulaiyaa..

 

mujhe to aaj kal ke yuwak yuwati par badaa taras aataa hai…vikaas kaa yug bolate lekin yuwak yuwatiyon  ke liye satyaanaash waala yug aisaa pahel e kabhi nahi sunaa shaastro men..desi gaay ka dudh, ghee, makhkhan in se chhin gayaa..aur sahi dudh bhi nahi milataa..fatwaalaa aur baasi dudh…shudhd havaa bhi chhin gayaa…shudhd gyaan denewaalaa gurukul bhi chhin gayaa..ab to padho padho aur rato rato…kaun si kakshaa padhataa to bolate fifth..abhi se angreji kaa gulaam ho gayaa..paanchavi nahi bolataa…

 

to jo rishiyo ki paramparaa ka gyaan thaa..jo apani sanskruti ka avajud thaa us ke upar to par kulhaadaa chal rahaa hain skulon men, college men, vyavahaar men…..

swaasthy ki jo divya vaidik baaten thi bhaaratiyon ke jeevan men, vo baaten bhi chhin gayi hai..  jaise aap ne abhi dudh piyaa hai, aap bazaar men gaye to aap ko  bajaar me namakin dikhaa, munh men paani aayaa to chalo khaa liyaa..lekin agar ye sanskaar hote, swaasthya ki baat aap ko sikhaayi gayi hai ki dudh ke upar adhaayi ghante tak namakin jaisaa virodhi kuchh nahi khaanaa chaahiye chaahe amrut mil jaaye to aap swasth rahenge ..panir ke pakode ! panir aur kaaju dry fruit ke samose!!paisaa dekar bimari pet men bhar rahe..kyaa khaanaa ye bhi chhin gayaa hai jawaano se..

ham ghar jaate the to maa garam garam roti banaa deti thi..us par makhkhan lagaa kar ham makhkhan roti khaate the…abhi to roti ki jagah double roti jo baasi hoti jis se budhdi kamjor aur aante kharaab hoti..biscute, double roti bachchon ke liye musibat hai…chocolet mahaa musibat..aur fast food kaa to kahenaa hi kyaa?…aise tabiyat kharaab karate…kewal hindusthaan ke hi nahi sare vishw ke bachchon kaa bahot buraa haal hai….phir thode bade huye naa huye to ek dusare kaa boy friend girl friend…jsi umar men haddiyaa majbut ho, sharir sudrudh ho us ke pahele hi lickeage problem shuru ho jaati..sapandosh, kukarm problem yuwako ko baawaraa banaa detaa..certificate leke bhatakate rahete..bechaaro ko roji nahi milati..nokari nahi milati ..mili to idhar badali udhar badali..jaise bandar bandariyon ko nachaayaa jaataa aise copmaniyon ke aadami bhaarat ke yuwak yuwatiyon ko nachaate rahete…..raat paali karate..bahu betiyon ke saath bade officer man chaahaa kukarm karaanaa chaahe to badali kar dete nahi to nikaal denge dhamaki dete..mujhe pataa chalaa to halla pukaaraa ki bahubeti ko koyi sataayegaa , call center waalaa ho , manager ho yaa company kaa maalik ho ..koyi bhi bahu betiyon ki ijjat lutane ki koshish kare to  mahilaa uththaan aashram men khabar karo; ham wahaa halla pukaarenge …un ko pataa hai ki baapu hallaa pukaaranaa jaanate hai!

 

NAARAAYAN HARI …NAARAAYAN HARI..

ye to maalum padaa isliye lekin chhup chhup ke kitane bechaare anyaay sahete honge…kisi par anyaay ho to main un bahu betiyon ko kathaa sunaayaa karataa hun…

pujyashri baapuji ne kiran devi ki kathaa sunaayi..ye kahaani padhane ke liye krupayaa yahaa padhaare : http://wp.me/P6Ntr-M0

 

akabar mahilaaon kaa masihaa banane kaa swaang kar rahaa thaa..waastav men kyaa tha?…

jo vikaari aadami hotaa hai us kaa man kamjor hotaa hai..jis kaa man kamjor us ki naadiyaan kamjor..akabar kiran devi ke aage jeevan daan maangane lagaa…us ko double aur single bhi ho gayi..

 

kiran ko pataa hi nahi thaa ki us ke sanyam aur saadagi ki baat aashaaraam bapu tak pahuchegi aur akabar kaa pol kholanewaali kanyaan men meraa naam aayegaa!

 

pandit neharu ne 1 pustak likha ‘bhaarat ki khoj’ ..aachaary vinobaa bhaave ne vo pustak padh kar pandit ji ko khat likhaa..ki ye aap ne kaise likhaa ki : akabar ke jamaane men tulasidaas huye ….

 vinobaa bhaave ne pandit neharu ko saawadhaan kiyaa ki ye yukti yukt nahi;  sidhdaant ke khilaaf hai…jamaanaa yaa to bhagavana kaa hai yaa bhagavaan ko paaye huye sant  kaa jamaanaa hai..tulasidaas ji ke jamaane men akabar huaa likhanaa uchit  hai..

 

naanak ji ko 2 baar jail men daalaa baabar ki babarataa ne..phir bhi naanak ji kaa jamaanaa abhi bhi maujud hai! baabar ka jamaanaa nahi hai..

 

aadi sat, jugaat sat,

naanak hose bhi sat

 

sharir nahi thaa srushti nahi thi tabhi jo sat thaa vo abhi bhi hai..pahele bhi thaa, baad men bhi rahegaa…us sat ko aap apanaa man aur apanaa main samarpit karo..aap kaa manorath to phalegaa, aap kaa jeevan dhany hogaa, lekin aap ka darshan , aap ki waani , aap ko chhukar jaanewaali havaa bhi logo kaa mangal karegi…

 main ghar men thaa to mujhe ek braamhan milaa thaa… bole ham pushkaranaa braamhan hai…jaise bishnoyi hote aise pushkaranaa braamhan bhi hote..

 

bishnoyi matalab 20 aur 9 sidhdaanto ko (guru ke sidhaanto ko ) jo maanate vo bishnoyi sampradaay ke hote…( Pujyashri Baapuji ne bishnoyi sampradaay ke sant jambeshwarji mahaaraj talaav khudawaa rahe the us ki kahaani sunaayi..satkarm kaa phal sachchaa hotaa aur dushkarm kaa phal dukhad hotaa hai.. ye kahaani padhane ke liye krupayaa yahaa padhaare :   http://wp.me/P6Ntr-s2    )

 dukh mitaate log mit jate dukh nahi mitataa sukh tikata nahi dukh hatataa nahi is baat ko samjh lo to sukh mitata nahi aur dukh tikataa nahi…

 ludhiyana ki ek ladaki shaadi kar ke spain men gayi..boli 12 operation ho chuke hai, ab kal 13 vaa operation huaa..doctor bolate shayad aur bhi operation karane pade ..vo ludhiyaanaa aashram men kabhi kabhaar aati thi, is kaaran thodi bahut shradhdaa thi..us ne bahut pukaar ki to aaj us se phone par baat ki maine…ro rahi thi bechaari…spain gayi thi sukhi hone ke liye lekin operation karaa karaa ke pareshan hai..jaraurat nahi hoti bachche ko janam dene ke liye pet chiraane ki koyi jarurat nahi hoti..lekin daraa ke operation karavaate hai..

bahu betiyo ke sath aur yuwak yuwatiyon se jitanaa atyaachar is yug men huaa aisaa kabhi nahi huaa..is me kuchh kam huyi to aur velantine day bhej diyaa hai..nirlajjataa se ek dusare ko i love u bolate.. aisaa koyi nakakttaa panaa dikhaave to us ke liye shurpanakhaa ki kahaani sunaate.. raawan ki bahen shurpanakhaa ram ji aur lakshman ko baari baari se bolati ki tum itane sundar ho ki main tum se prem karati hun..lakshman ne us ki nirlajjataa dekh kar us ke naak kaan kaat kar us ke haath men diye aur bolaa ki sree jaat ka lajjaa hi bhushan hai..tu aisi nirlajjataa dikhaati ki tumhaare naak kaan honaa dono hi vyarthy hai..apane bhaai raawan ko dikhaa..

ye nakakattaa panaa videshi tv chanelo ke dwaaraa,  electronic maadhyam ke dwaaraa valentine day ke rup men hamaare yuwak yuwatiyon men ghus gayaa..to maine is baat se bhaarat ke logo ko bachaanaa chaahaa..vishw ke logo  ko bachaanaa chaahaa ki yuwak yuwatiya i love u kar ke ek dusare ko chhuyenge to raj viry naash hogaa..aankhon ke chashme badh jaayenge, kamar ki taklife badh jaayengi..budhaapaa jaldi aayegaa aur jo santaan aayegi vo kamjor hogi..main kisi dharm sampradaay ka virodhi nahi lekin maanavataa kaa vinaash dekhataa hun to maanavataa ki sewaa karataa hun ki manushyatv milaa hai..praani maatr ki sewaa ho to achchaa hai lekin manushy sharir milaa hai to manushy ki to jarur sewaa ho..to maine valengtine day 14 Feb ko maatru-pitru pujan divas manaane kaa aaawaahan kiyaa..

( link to maatru pitru pujan divas : http://www.hariomgroup.org/hariombooks/satsang/Hindi/MatriPitriPoojan.htm   )

bachche bachchiyaa apane maa baap ka pujan kare aur maa baap apane bachcho ko chiranjivi bhav yashaswi bhav aisa aashirwaad dete huye tilak kare..

is se videshi shaktiyon ne bahot ku-prachaar shuru kiyaa, karodo rupiye kharch daale..lekin ..

baapu ke dulaare bahakaaye nahi jaate

kadam rakhate aage to lautaaye nahi jaate

vo to pakke ho jaate hai, un ko dekh ke jo naye aate vo bhi sochate ki ham ne to tv chaanelo par kuchh gandaa galat sunaa thaa..yahaa to ekadam aanand mangal iishwar ke siwaay koyi baat hi nahi hai…tan tandurusti ki baate hai! man prasann rakhane ki baate hai!! budhdi men budhdi daataa ka prakaash ho gayaa, tanaav mukt ho gayaa aisaa kayiyon ko laabh milaa ..to ku-prachaar waalon ko bechaaron ko to munh ki khaani padi…

 

ludhiyaanaa ki bachchi jo spain men hai us ko hindusthan waapas bulaa ke omkaar ke mantr se ekdam thik kar denge apan ..ludhiyaanaa ki bachchi hamaari bachchi nahi hai kyaa? 🙂

 

prasuti ke samay sijeriyan karaane ki koyi jarurat nahi, desi gaay ke gobar kaa ras 10-12 graam lekar us men dekh kar bhagavaan kaa naam japo aur prasuti waali mahilaa ko pilaao..aaraam se 1 ghante ke andar prasuti hoti hai…

garbhavati mahilaa ke garbh kaa vikaas nahi ho rahaa aisaa doctor bole to ghabaraanaa nahi..garbhapaat karawaanaa nahi..400 gram dudh men 400 graam paani daal kar ubaalo..ubaal ubaal ke 410 graam rahe jaaye tab us men thoda ghee daal ke, mishri daal ke garbhvati mahilaa ko pilaao..bachche ki groth bhi hogi aur bachchaa sundar bhi hogaa…pet men bachchaa hai to naariyal aur mishri chabaa ke khaayaa karo to bachchaa goraa, sundar aur pusht hogaa…garbhavati ke naabhi par chandramaa ki chaanadani pade to bachche ki groth hogi..

 naarayan hari hari om hari…

 ye kathaa bhagavaan raam ji ke gurudev vashishth ji mahaaraaj  ne kahi hai..ye  kathaa jo bhi sunegaa un ke paap naash honge bhavishy mangal may hogaa..gyan badhegaa…

 pushkar naam kaa braamhan nitya hari ka naam letaa ..hari, govind , maadhav, keshav ..subah nind men se uth kar thodi der bhagavaan ka chintan karataa…shwaasoshwaas men bhagavaan kaa  naam letaa ..raat ko sote samay shwaas andar jaata to om shwaas baahar aataa to 1 ginate..shwaas andar jaata to shaanti..shwaas baahar aataa to 2 aise ajapaa jaap karate so jaate..unche guru ke shishy the pushkar braamhan …

 ‘pushkar naam ke braamhan ko le aao’ aisi yamraaj ne aagyaa di..to yamdut is pushkar braamhan ko le gaye..yamaduto ke dwaaraa yamaraaj ke saamane pesh kiyaa gayaa to yamaraaj apane aasan se uth kar khade ho gaye !

yamaraaj bole :  is mahaan punyatmaa ko gurudikshit braaman ko yahaa kaise le aaye? …

yamdur bole : pushkar braamhan yahi hai..

yamaraaj bole : ye pushkar braamhan ko laane ki aagyaa nahi di thi..in ko dekh kar main khadaa ho gayaa hun! mere haath jode gaye hai…ye bhagavaan ko paaye huye bramhagyaani santo se paayaa huaa bhagavaan kaa naam lete hai, satsang sunate hai.. bramhagyaani sang dharmaraaj kare sewaa..in ke aadar satkaar men to main swayam lag jaataa hun..in ko tum narakon men kaise laaye?… in ke naam kaa dusaraa pushkar braamhan hai , jo duraachaari hai, sharaab pitaa hai,jo dusaron kaa hakk chhinataa hai..ekaadashi kaa vrat nahikarataa… us ko laane ke liye kahaa thaa…

yamaraaj pushkar braamhan ko bole ki hamaare duton se galati ho gayi, ham kshamaa yaachanaa chaahate hai….aap ki patni ro rahi hai, pariwaar waale chintit huye hai.. aap ko jaldi wahaa chhod ke aayenge..

pushkar braamhan bolaa: yamaraaj! nahi nahi..aap ke duto ne galati ki to aap maayus naa ho.. lekin mujhe aap ka narak dikhaao ..bolate hai kumbhi paak narak hai, raurav narak hai..aur bhi narak hai..mujhe narak dikhaayiye..

yamaraaj bole : hamaare duto ne galati ki..chaliye ham aap ki baat rakhate hai..

narak dikhaayaa..to kuchh log assi narak men tap rahe the..jis ne apani patni hote huye dusari mahilaaon se duraachaar kiyaa un ko aise lohe ke tape huye putale se aalingan karavaate..kyaa kyaa haal ..

raurav narak men maans khaanewaalon ka sharir vo jiv jantu khaate, kaatate..shulon par chalaate…kyaa kyaa buraa haal karate…naa jaane kitane kasht…haay kasht..haay dukh ki aahen chaaro aor thi…

 paap ka phal nahi chaahate lekin paap karate ..aise logon ko narakon men laa kar  bhog may sharir diyaa jaataa…aag men jalaate , kasht dukh sahenaa padataa lekin sharir maregaa nahi , mar gayaa jaan chhutegi, isliye maregaa nahi..kyo ki bhog may sharir hotaa.. jiv ko paani men dubane ki pidaa hogi lekin sharir maregaa nahi kyo ki bhog may sharir hai..

 yamraaj ki naarakiy vyavasthaa dekh kar pushkar braamhan ne naarakiy jivon ko puchchaa ki  bhaaiyon tum idhar kaise aaye ?

 naarakiy jiv bole : ham naarakiy jeev isliye huye ki ham ne ekaadashi kaa vrat nahi rakhaa..guru dikshaa nahi liyaa..

 pushkar braamhan ne puchhaa: to kyaa tum ne  satsang kabhi nahi sunaa !

bole : nahi ..ham sharaabi the..koyi bola ham juaari the..koyi bolaa ham ahanakaari the…aise nigure, dhokhebaaj, duniyaa daari men sukhi hone ke liye sab kuchh kar liye phir bhi sukhi nahi huye ..jo jite jee sukhi nahi huye vo marane ke baad kya sukhi honge?..

 ve naarakiy jeev bole : mahaaraaj ham yahaa bahut dukhi hai, hamaari rakshaa ho..bachaao…

..vashishth ji kahete hai ki tab pushakr bramhan ne thodi der antaraatma men vishranti paayi..jo shwaas chal rahaa hai vo shwaas andar jaataa to so baahar aataa to ‘ham’… vo hi paramaatmaa hai…main man nahi hun..main sharir nahi hun…man meraa nahi,  sharir meraa nahi ..main aatmaa hun..main chaityany hun..main shaashwat hun…agar aisi meri satsang ki samajh hai…meri waasanaa, meri aasakti naa ho …satshaastro ko maine shirodhaary kiyaa hai ..maine sadguru ki vachano ko shirodhary kiya hai to in naarakiy jivo ko sukh shanti mile..in ki sadgati ho…..

 naarakiya jeev bole : pushakaranaa mahaaraaj ki jay ho! aap ki  jay ho!!

 pushkar braamhan bolaa: kyo?

 …naarkiy jeev bole : maharaaj aap ne iishwar men gotaa maaraa ..aur hamaari taraf dekhaa to aap ki aankho se jo adhyaatmik tanmaatraayen mili vo hamaare paap taap mitaaye..aap ko chhu kar jo havaa aa rahi us ne hamaare paapo kaa shaman kar diyaa hai..mahaaraaj ab narak hote huye bhi ab naarakiy pidaa aur dukh nahi hai…

 pushkar bramhan ko dekh kar athavaa raajaa janak ko dekh kar naarakiy jivo kaa paap taap mit jaataa hai to  ludhiyaanaa ke satsang men satsang rupi janak aur pushkar braamhan ko dekh kar hamaaraa bhi to paap taap mit rahaa hai.. rakt pavitr ho rahaa hai..aanand aa rahaa hai..shaanti mil rahi hai…dukh door ho rahe hai…

 kabiraa darshan sant ke saahib aawe yaad

lekhe men vo hi ghadi baaki ke din baad ll..

sant ke darshan se aap aatmaa ko main maanoge..paramaatmaa ko meraa maanoge.. …to aap ko aatmaa paramaatmaa ki priti milegi…

 abhi sharir men priti hai…sharir men priti hai to ahankaar milataa hai…aur aatmaa paramaatmaa men priti hai to bhagavat prem, bhagavat shaanti milati hai..

 ahankar waale ka kya buraa haal hotaa hai aap  sun ke dang honge..

 jagat ka sukh se santosh nahi hotaa..bhagavat prem se santosh hota hai..

jagat kaa sukh lene ke liye vastuye ikaththi karo aur phir indriyaa shithil ho jaaye, man kamjor ho jaaye aur  waasanaa ki aise andhi aag lage ki marane ke baad bhi aisi hi nich yoniyon men ghumate…jis ko dusaro ka rup laavany saundary dekhane ki aadat pad gayi ve marane ke baad patange banate..diye par marate phir bhi waasanaa nahi mitati..swaad ki waasanaa waale machchali jaisi aur bhi kayi nich yoniyon men jaate aur kunde men tadap tadap ke marate..jin ko sugandh  parfum ki waasanaa hoti hai ve marane ke baad bhanvare jaisi aur kayi nich yoniyon men jaate…bhavaraa to lakade ko chir kar suraakh kar sakataa hai, lekin kamal ke sugandh men baawaraa hkar padaa rahetaa aur subah jangle ke jeev us ko daboch ke maar dete hai…aise hi nakali haathini khadde par banaa dete hai, haathi kaam vikaar se us ke paas jaataa aur khadde men gir padataa hai..maahut us ko pakadate aur dar dar ke bhik mangavaate…

 jo 5 vikaaro se ghire rahete, jin ke jeevan men sanyam kaa abhaav hotaa, jin ko nirvikaar narayan ki gati nahi un ki yahi gati hogi..abraahim linkan white house men pret hokar bhatak rahaa hai…mithilaa kaa raajaa ajj marane ke baad ajagar ho gayaa…

 om om om om … ( Pujyashri Bapuji omkaar ka divya dhyaan karaa rahe hai…) 

 premaabhakti kaa raastaa  pakado, ahankaar kaa dwaar chhodo…bhakti tab milati jab sant anukul ho..santo ke hruday men tumhaare liye ahobhaav ho jaaye to bhakti mil jaati hai..

bachchaa aise hi maa ko pyaaraa hotaa hai..shishy aise hi guru ko pyaaraa hotaa hai..lekin jab bachchaa bolataa hai, ‘maa maa lo ye chaabi!’..ab dekho to chaabi bhi maa ki hai..baraamadaa bhi maa kaa hai.. 🙂 lekin bachcaa uthaa ke maa ko detaa hai to maa khush ho jaati hai!pitaa khush ho jaate..aise ‘hey mahaaraaj lo mere man ki chaabi aap le lo’ bole to man to aap kaa hi hai, tan bhi aap kaa hai.. 🙂 ham sat hai chit hai aanand hai aur aap ke hai ..hey prabhu aanand daataa gyaan ham ko dijiye…mai tera tu mera hey prabhu…bin phere ham tere….om om om om om…

 

OM SHAANTI.

 

SHRI SADGURUDEV JI BHAGAVAAN KI MAHAA JAYAJAYAKAAR HO!!!!!

Galatiyon ke liye Prabhuji kshamaa kare…

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One Comment on “‘प्राणी मात्र सुखाय प्रवृत्ति’ (praani maatr sukhaay pravritti)”

  1. Deepak Says:

    Mere Sadguru dev ki maha jai jai kaar He mere gurudev hamari umar bhi apko lag jaye.


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