Gitaa se Param shaanti ke 6 upaay

मथुरा ; 9  ऑक्टोबर 2011( part 1)

 

शरद ऋतु की शरद पूनम !

प्रकाशमय  जीवन !!

सही निर्णय करनेवाली त्वरित मति  का जीवन…

दृढ़ निश्चय  करनेवाली मति  का धन कमानेवाला जीवन …..

संयम  , दृढ़ता और त्वरित निर्णय करने की मति  वाला व्यक्ति हसते खेलते परमात्मा सुख, परमात्मा शांति , परमात्मा ज्ञान  को पा लेता है…

नानक जी कहेते : नानक वो मोहे सदगुरु भावे- मुझे वो सदगुरु प्यारा लगता है ..कौन सा? 

हसंदियाँ, खेलंदियाँ, खावंदियाँ,  पहेंनंदियाँ विच कर दे मुगत…हसते खेलते, खाते पहेनते  , लेते देते  हमें मोक्ष का मार्ग दिखा दे, हमें मुक्त कर देवे..हमें बंधनों से रहीत कर देवे …बंधन क्या है? नहीं जानते तब तक सताए जाते है बंधनों से…जान लिया तो बंधन का कोई अस्तित्व ही नही था…नहीं जाना था तब तक प्याज ठोस थी..परते  हटाई तो उस का कोई अस्तित्व ही नहीं था..नहीं जाना था तब केले के पेड़ का महत्व था…परतें  हटाई तो उस का कोई महत्व ही नहीं…ऐसी परतें हटाई बेवकूफी की तो महाराज दुख चिंता और जनम मरण  का कोई सवाल  ही नहीं पैदा होता…जान लेते की : 

जन्म मृत्यु मेरा धरम नही है…

पुण्य  पाप कछु  कर्म नहीं है…

ऐसी उँची अवस्था का ज्ञान  और प्रेमा भक्ति ही है.. मत मत के परम पद का मख्खन  निकाला जाता है उसी स्थान का नाम है मथुरा..

अब देश विदेश वालों को खबर कर रहें है की जहाँ ज्ञान  और भक्ति  का माधुर्य मथ  कर मोक्ष रूपी मख्खन  प्रगट किया जाता है  उस का नाम है मथुरा…

जो भक्ति के रस से  नम्रता में जीवन बिता कर ज्ञान  का मंथन हो और जीवन का लक्ष दिखे ऐसी जगह को मथुरा कहा है…मथुरा, वृंदावन इस इलाक़े में भगवान की भक्तानी  वृंदा के नाम से वृंदावन बना…और भगवान के प्रागट्य  से इस मथुरा में 4 चाँद लगे गोकुल में … 

मथुरा के 4 नाम है…वेद में भी मथुरा स्थान की महिमा आई है…वेद ती प्राचीन है..श्रीकृष्ण से पहेले वेद है..श्री रामजी से पहेले वेद है…वेद अ-पौरुष है…व्यक्ति  की मति  मति  भिन्न होती है..इसलिए मत-मतांतर होता है..लेकिन वेद कोई मत नही है, कोई पंथ  नही है, कोई संप्रदाय नही है……वेद सनातन सत्य है..अ-पौरुष वेद है…

उस वेद की वाणी  उपनिषदों में है और उपनिषदों का प्रसाद श्रीकृष्ण ने गीता में प्रगट करवाया है…गीता श्रीकृष्ण के अनुभव की पोथी  है..या यूँ कहो की गीता श्रीकृष्ण का हृदय है…

“गीता मे हृदयं  पार्थ l ” 

भगवान कहेते है : गीता मेरा हृदय है..

गीता में शांती  पाने के 6 उपाय बताये  है..

तप  कर जो शांती  पा रहे है अथवा मानसिक भ्रमित हो कर मुझे आराम की ज़रूरत है बोलते वो शांती  नही है; आत्म शांती ही शांती है ….

ये मानसिक भ्रम होता है की ‘मुझे आराम करने दो’…ये मन की बदमाशी है की मुझे आराम करने दो…ये शांती  नही…

लब्धा ज्ञानम्  परम शांती  l  

भगवान गीता में कहेते है 6 उपाय है शांती  पाने के ..

अशांतसी कुत:   सुखम ?

किसी जगह पर जा  कर आप ने शांती  पाई तो आप ने शांती  को पहेचाना ही नही..सब छोड़ छाड़  कर फलानी जगह पर रहे, ज़रा शांती मिली लेकिन आप ने असली शांती पहेचानी ही नही है…असली शांती सदगुरु कृपा के बिना मिलती ही नही है…लब्धा ज्ञानम्  परम शांती….इस को परम शांती कहेते है..इस परम शांती के उपाय  जगत  गुरु बता रहे है …कौन से जगत गुरु ?  वन्दे  कृष्णम जगत गुरु ..श्रीकृष्ण बता रहे है गीता में…

1) आप का विवेक प्रखर हो..आप में वैराग्य हो ..आप में आकर्षिणी शक्तियाँ शांत हो जाए…वीत राग हो जाए … 

2)  आप के जीवन में श्रध्दा हो ….

श्रध्दा सूक्त  है वेदों में ..

श्रध्दा  पूर्वा मनोरथा  फल प्रदा: ll 

श्रध्दये  साधते सर्वं  श्रध्दये  त्वं शते  हरी ll

जीवन में श्रध्दा बहुत  ज़रूरी है …लेकिन श्रध्दा  के साथ तत्परता और इंद्रिया संयम बेड़ा पार कर देता है …

वैराग्य हो..विवेक से ही वैराग्य आता है …कुछ  जर्क लग गया और वैराग्य हो गया तो वो समशानी वैराग्य है..पत्नी ने कुछ  कहे दिया- वैराग्य हो गया..धंदे  में घाटा पड़ा – वैराग्य हो गया…राज नीति में टिकिट नही मिली –वैराग्य हो गया..ये वैराग्य  नही …सत्संग के द्वारा सूझ बुझ बढ़ी …संसार अनित्य वस्तु है ..हिरण्यकश्यपू जैसे वरदान पाने के बाद भी पतन है…रावण जैसी उपलब्धियाँ पाने के बाद भी जीवन नगण्य है…आख़िर कोई सार नही है…ऐसा विवेक के द्वारा वैराग्य जगे..

श्रध्दा  …शास्त्र , भगवान और आत्म वेत्ता महा पुरुषों  के प्रति श्रध्दा…श्रध्दा एक ऐसा अमृत रस है , श्रध्दा एक ऐसा संबल है की निराशा की खाई में गिरी हुई व्यक्ति को आशा की सीढ़ी  मिल जाती है….हतोत्साह को उत्साह मिल जाता है …

रूखे हृदय में मधुरता का संचार करने का काम श्रध्दा देवी का है…माँ  बच्चे की जैसी सुरक्षा कर देती इस से भी ज़्यादा सुरक्षा कर देती है श्रध्दा देवी…श्रध्दा देवी मन चाहे भगवान को प्रगट कर देती है..अगर मन चाहा भगवान सृष्टि में नही है तो उसे बना कर आप के सामने खड़ा कर दे ऐसी श्रध्दा की शक्ति  है…श्रध्दा ईश्वर से मिलाने में अद्भुत साथ-सहकार देती है…लेकिन वो श्रध्दा अगर सत्संग, ज्ञान  और गुरु के संकेत के बिना किया तो वो श्रध्दा बड़े पिर के टकराव में भी डाल देती है…

( बड़े पिर की कथा पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक कीजिएगा :  http://wp.me/P6Ntr-sG    ) 

 

सार में सार बात ये है की आप के जीवन में ये 6 चीज़े उभारो…

बुध्दी  में 3 चीज़े उभारो….

a)      विषय विकारों से संयम 

b)      दृढ़ निश्चय

c)      त्वरित निर्णय

और गीता के आदेशा नुसार परम शांती  का लाभ पाना है , जनम मरण  के चक्राव से पार होना है तो आप में विवेक के द्वारा वैराग्य हो..

तो आप के जीवन में विवेक हो  और आप के जीवन में सत्कर्म और सदभाव से आप के जीवन में श्रध्दा हो…

 बांके बिहारी के मंदिर में जाते थे एक भगत जी..बोलते , ‘बांके बिहारी लाल आप के दर्शन के बिना मैं पानी भी ना पियू..मुझे संतान प्राप्ति कर दो…बांके बिहारी मेरे घर लाला का जानम हो जाए’  …  संतान प्राप्ति की  इच्छा  से साल –डेढ़ साल चक्कर लगाए…..2 साल हो गये..कोई संतान नही हुई…मंदिर में जाना छोड़  दिया..इस का मतलब बांके बिहारी तुम्हारे कोई नोकर है ..तुम्हारे कहे अनुसार किया नही तो उन को हृदय से निकाल दो….आप के हाँ  में हाँ  मिलाया तो गुरु महाराज है; नहीं तो आप बोरी बिस्तर बाँध के चलते बने और भक्ति आप ही की करूँगा बोले तो ये श्रध्दा  के लक्षण नही है…ये तो आप मन के धोके में आ रहे हो…श्रध्येय के हृदय को चोट ना लगे ऐसा श्रध्दालु  का ध्यान होता है..और श्रध्येय  के सिध्दांत  में अपना मन अर्पण कर दे…वाह वाह वाह …ऐसा यश करे..तेरे फूलों से भी प्यार, तेरे काँटों से भी प्यार ..चाहे सुख दे चाहे दुख दे दोनो स्वीकार …क्यो की देनेवाले हाथ किस के है …

महमूद नाम का एक मुसलमान राजा था..उस का वज़ीर भी राजा का पक्का श्रध्दालु  था… एक बार जंगल में भटक गये…दिन भर भटकने के बाद कुछ  खाने पीने को नही मिला – एक कोई जंगली फल मिला…महमूद ने उस के 4 फांके कर दिए.. ज्यो प्यारा मंत्री साथ में था उस को बोले : ‘2 तेरे हिस्से के ..और 2 मेरे हिस्से के…’ 

 ..मंत्री ने 2 फांके  तो चट  कर दी.. मंत्री बोला :  ‘जहाँ पनाह आप तो स्वामी है..सेवक को थोड़ा  ज़्यादा मिल जाए ..एक फांका और दे दो’

 …75 % फल का मंत्री ने देखते देखते स्वाहा कर डाला…अब एक फाँक बची..बोले :  ‘जहाँ पनाह रूको..इस का आधा टुकड़ा मुझे दे दो’ ..   87 .5 % हो गया..

बाकी की इतनी लीरी बची तो मंत्री बोला :  ‘आप ज़रा सा खा कर मुँह क्यो खराब करते ? वो भी मुझे दे दो…’

राजा बोला, ‘क्या बात है?’

बोले , ‘बहोत  विलक्षण है!’

तो राजा बोला, ‘मैं भी तो चखूँ …’

‘नहीं आप ना चखे…’मंत्री बोला…ऐसा बोल के भाव में आकर महमूद  के हाथ से छिना झपटी करना चाहा तो राजा ने हिम्मत पूर्वक बची हुई फल की लीरी अपने मुँह में डाली तो  ‘याक..थू थू’   करते हुए मुँह से बाहर फेंक दिया.. मुँह का जायका बिगड़ गया…बड़ा परेशान हो गया राजा …बोला :  ‘इस फल के लिए तू इतना करता था?’…

मंत्री बोला : ‘फल कौन सा था, क्या था.. मैं नही जानता हूँ …जिन हाथों से खूब खूब मधुर फल मिले उन्ही हाथों का ये फल था इतना ही जानता हूँ…’

जिन हाथों से इतने मधुर फल मिले थे, उन्ही हाथों का ये कटु फल था….फल की कटुता का महत्व नही है..हाथों का महत्व है…श्रध्दा  इस का नाम है!

..भगवान और गुरु के प्रति ऐसी श्रध्दा  हो..मेरे गुरु जी ने जब भी मुझे कुछ  कहा तो बाहर के लोग समझते होंगे अथवा जो मुझे भगाना चाहते थे गुरु शरण से दूर   वो लोग सोचते होंगे की गुरु जी इस को कोसते है ..लेकिन मेरे गुरुजी मुझे कोसें ऐसे नहीं थे…किसी को नहीं कोसते…साप को प्यार कर सकते वे..बिच्छू नाम के पौधे  का भी हीत चाहते ऐसे मेरे गुरुजी  मेरे को क्यो कोसेंगे?…हाँ , मेरी ग़लती है अथवा किसी ने ग़लत रिपोर्ट दिया तो गुरु जी ने भले की भावना से कहा …. तो बस बात पूरी हो गयी….

साधु ते होवे ना कारज हानि…

ब्रम्ह ग्यानी  ते कछु  बुरा ना भया…

ऐसी श्रध्दा  हो… ‘मैं थक  गया हूँ, मुझे आराम करने दो’ ये आप  की श्रध्दा  का पोल खोल देता है..

नारायण हरि ..हरि  ओम हरि..

3 ) तीसरा गीताकार कहेते है की आप के जीवन में भगवत अर्थ करम हो…यश के लिए कर्म करते, सुविधा के लिए कर्म करते , वासना के अनुसार कर्म करते तो भाव बंधन में फसाते…लेकिन भगवत प्रीति के लिए कर्म करो…फिर चाहे वो कर्म बाहर से बढ़िया दिखे चाहे घटिया दिखे…जैसे एक ब्रम्हचारी  लंका में दर दर चक्कर काट रहे थे..हनुमान जी की गरिमा से महिमा से ये बहोत  छोटा  काम है , तुच्छ काम है लेकिन  राम काज बिन कहाँ विश्रामा?

लंका के गली गली खोजते, घर घर खोजते   की बिभीषण  कहाँ है….ना जाने  किन किन राक्षसियों को , माईयों को और गंदे गंदे लोगों को देखते देखते भी बिभीषण  की झोपड़ी खोजी…क्यो की काम किस का है? स्वामी का है….ऐसा भगवत अर्थ कर्म हो..मन चाहा काम तो कोई भी कर लेता है…जो काम गुरु का संकेत मिले , भगवत संकेत मिले वो काम आप को प्यारा लगे तब समझना की   आप का कर्म वासना रहित है…बतौर गुरु प्रसन्नता के लिए है..

4)  चौथी बात है आप के अंदर में  भक्ति हो…भक्ति ऐसी नही हो की बांके बिहारी के लिए भक्ति और बेटा नही दिया तो बांके बिहारी को दिल से निकाल दिया…ये भक्त के लक्षण नही है…

5)  पाँचवाँ है महापुरुषों की शरण …त्वमेव शरणं गच्छ सर्व भावेन भारता..

तत   प्रसादात परम शांती  स्थानम प्राप्तस्य  शाश्वतः ll

उस प्रसाद से परम शांती  मिलेगी..शाश्वत स्थान मिलेगा…

ना तत  भाव शशि ना सूर्यओ ना पावका 

यत  गत्वानी  वरतंते तव धामम परमम  मम  ll

6) भोग्यार्थम  यज्ञतापसाम सर्व लोक महेश्वरम …

मैं यज्ञ  का, तप का फल भोगने वाला सब का अंतरात्मा  महेश्वर हूँ …ईश्वरों का ईश्वर हूँ…देव की पूजा करते तभी भी उस के देव के द्वारा भी उस महेश्वर  अंतर्यामी देव की कृपा से ही आप का मनोरथ फलता है…गुरुदेव की प्रार्थना करते हो, उपासना करते हो..तभी भी गुरुदेव की अंतरात्मा के चैत्यन्य से ही फलता है..अर्थात जो भी देव है उन  सर्व देवों  में वास्तविक देव वो  सर्व अनुस्यूत परबरम्‍ह परमात्मा है ऐसा जो जानता है और मानता है की वो परमात्मा मेरा सुहुर्द है , उस को शांती  सहेज में मिलती है… 

आप दीन हीन  ग़रीब को देते तो ‘ये बेचारा ग़रीब है और मैं इस को नहीं देता तो क्या होता’ इस वहेम   में मत पड़ना…ग़रीब के रूप में भी वो ही मेरा जगत पति जगदीश्वर महेश्वर है …मन  के रूप में, बाप के रूप में , कंगले के रूप में , अरे कुत्ते के रूप में भी उपभोग करने वाला मेरा चैत्यन्य  है..वाह प्रभु वाह…ओम ओम ओम …वो नज़रियाँ बन जाए तो काम बन जाए… 

भोग्यार्थम  यज्ञ  तापसाम सर्व लोक महेश्वरम ll  

सुहुरदम सर्व भूतानाम  ग्यातवामाम  शांती  मृछत्ये   ll  

आप ऐसे भगवान का चिंतन कर के शांत होने का अभ्यास करो…

अशांतस्य कुतः  सुखम?

भत्रुहारी  की कथा सुनी होगी…भत्रुहारी गोरखनाथ के चरणों में गये तो गोरखनाथ जी ने पुराने चेलों को कहा : राजा भत्रुहारी आए है और हर परिस्थिति में कितने सम रहेते है ..और कितनी सजगता से सेवा करते है…तो पुराने चेले  को लगा की वो राज पाट  छोड़  के आए इसलिए उस की प्रशंसा  हो रही है…

( राजा भत्रुहारी की कथा पढ़ने के लिए कृपया यहा पधारे  :   http://wp.me/P6Ntr-LX  ) 

सामने वाला क्या कहे रहा इस का महत्व नही, कहेने वाला कौन है इस का महत्व है…

मैं अबू के पहाड़ों  में नल गुफा में रहेता था..वहा मनोहर लाल नाम का एक तार बाबू आया था..अंडे का नाश्ता करता था..शराब पिता था…वो कोई साधक नही था,  .. ‘मुझे किराए का अच्छा मकान मिल जाए’ ..ऐसा आशीर्वाद लेने सुबह सुबह आया था वो बंदा…मैने कहा, ‘अभी थोड़ी देर बैठो..आँखें बंद कर के भगवान का नाम लो फिर मैं बात करता हूँ…’

वो बैठा तो बैठा….सुबह के 7 बजे के आसपास आया होगा…सूर्योदय मैने लाल देखा था उस समय …  9 बज गये..10 बज गये..मैने कहा बैठा है तो बेचारों को बैठने दे…ऐसे करते करते मुझे शाम का लाल सूर्य दिखाई दिया…करीब 6 बजे होंगे…सुबह 6 बजे का बैठा शाम के 6 बाज गये …और वो कोई साधक नही था..शाखाहारी भी नही था..अंडा खाने वाला था, दारू पीने वाला था..आज्ञा मानी , बैठा…सुबह से बैठा तो शाम को सूर्यास्त के समय मैने उस को उठाया…बिल्कुल मैं विश्वास पूर्वक कहेता हूँ…झूठ बोलने से तपस्या नाश होती है, प्रभाव नाश होता है इस बात को मैं अच्छी तरह से जानता हूँ..तो स्थान धर्म अथवा कहेनेवाले का संकल्प और सामने वाले की श्रध्दा  ये बहुत  विलक्षण काम करते है…वो तो आया था किराए का मकान मिले इसलिए…लेकिन ऐसे मकान में अंजाने में गति हो गयी की बोले बस अब कुछ  नही चाहिए…अहो भाव से भर गया..धन्यवाद से भर गया…तो अपने मनमाना तपस्या क्या काम करेगी ? …हिरण्यकश्यपू ने 60 हज़ार वर्ष तपस्या की थी…रावण ने भी 60 हज़ार वर्ष तपस्या की थी..फिर भी वे संसार से हार के गये…तो आप की तपस्या उन के आगे  क्या माना रखती है?…शबरी भीलन, रहिदास चमार , धन्ना जाट , सदना कसाई संसार से जीत के गये.. क्योकी गुरु कृपा ही केवलम शिष्यस्य परम मंगलम…जय  जय  हनुमान गोसाई, कृपा करो गुरुदेव की नाई…गुरुदेव जैसी कृपा करते वो अपने आप अपने पर नही कर पाते…

मैं अपने अनुभव से कहेता हूँ की बड़ा वैराग्य था, ईश्वर मिले इसलिए घर छोड़ा था…और ईश्वर कैसे मिले की शिव जी मिले ..शिव जी प्रगट हो जाए और पूछेंगे,  “क्या चाहिए?” ..मैं बोलूँगा, “कुछ  नही चाहिए” …शिव जी खुश हो जाएँगे..यही इरादा था..यही नज़रिया लेके चले थे..पता ही नही था की हम भी सदा शिव में ही है..हमारा शिव और शिव जी का शिव अद्वैत ब्रम्‍ह है…इस बात की तो कल्पना भी नही थी…लेकिन महाराज गुरु की नज़रिया और गुरु की कृपा के आगे 60 हज़ार वर्ष की तपस्या भी कुछ माने नही रखती…ऐसा 60 हज़ार तपस्या वाला हिरण्यकश्यपू भी परमात्म शांती के बिना अशांत होकर मरता है..

अशांतस्य कुतः  सुखम?

शांतस्य कुतः  दुखम?

गीता में भगवान ने बहुत उँची बात कही…तो ये शांती पाने के 6 उपाय गीता में बताए…

 

शरद ऋतु में खीर खाना , हलवा खाना , गुलकंद खाना, केला खाना, घी खाना, इलायची , चंदन का उपयोग, चंद्रमा की चाँदनी में भ्रमण करना…ये हीतकारी होगा…आज , कल और परसो के चंद्रमा के किरणों  का फ़ायदा  लेना… अब ये शरद ऋतु का अंत होगा पूर्णिमा के दिन…

13 ऑक्टोबर से कार्तिक मास  प्रारंभ हो रहा है…स्कंध पुराण मे आया है कि कार्तिक मास  के समान दूसरा कोई मास नही है…सतयुग के समान कोई युग नही…वेद के समान कोई शास्त्र नही और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नही..कार्तिक मास में पालनीय नियम है की दीप  दान का महत्व है..तुलसी का वन अथवा तुलसी के पौधे लगाना हीतकारी है…तुलसी के पौधे को सुबह एक- आधा  ग्लास पानी देना एक मासा सुवर्ण दान का फल देता है…भूमि पर शैय्या अथवा गद्दा हटा कर कड़क तखत पर कंबल बिछा कर शयन , ब्रम्हचर्य  का पालन ये कार्तिक मास में करणीय नियम बताए है….इस से जीवात्मा का उध्दार  होता है…उड़द , मसूर  आदि भारी चीज़ो का त्याग करना चाहिए, तिल का दान करना चाहिए..कार्तिक मास में सत्संग, साधु संतों  का जीवन चरित्र का अध्ययन , मार्गदर्शन का अनुसरण करना चाहिए…मोक्ष प्राप्ति का इरादा बना देना चाहिए…

अभी शरद पूनम के बाद आवले वीर्यवान हो जाएँगे…कार्तिक मास में आवले के वृक्ष की छाया में भोजन करने से एक वर्ष के अनगिनत पाप नष्ट हो जाते है…आवले के उबटन से स्नान करने से लक्ष्मी प्राप्ति होती है …और अधिक प्रसन्नता मिलती है…संक्रांति , ग्रहण के समय आवले का उपयोग नही करना चाहिए…(पूज्यश्री बापूजी ने आवला सेवन की विधि बताई. आवले का मावा बना कर चटनी और मुरब्बा बना के रखे और परिवार वालों को भोजन से पहेले खाने के लिए देंगे तो मंदाग्नि दूर होगी…आवले में 5 रस है..आवले से कई रोगो से मुक्ति मिलती है …11 तारीख के बाद आवले का उपयोग  करना है…)

11 तारीख को खीर बनाएँगे तो उस में खीर पकाते समय असली चाँदी और सोना डालें और सुवर्ण क्षार  और रजत क्षार खीर में  उतरेंगे… फिर खीर को चंद्रमा के किरणों में रखे तो सात्विक प्रभाव भी पड़े…

 

गृहस्थ जीवन में उन्नति के उपाय बताते हुए शास्त्र कहेते है की आप अमृततुल्य  मीठी वाणी बोलिए..सौम्य दृष्टि रखिए…सौम्य मुख बनाइए…और सौम्य मन बनाइए…आप के जीवन में ऐसी सौम्यता आए की आप के किसी को भी मुलाकात हो जाए तो उस को कुछ  ना कुछ  प्रसन्नता , शांती  और सूझ बुझ का धन मिले ..आप ऐसे धन को प्रगट कर सकते है…

कभी भी जुठे  मुँह अपना हाथ सीर पर ना जाए , नहीं तो बुध्दी का विकास रुक जाता है..

कफ्फ की वृध्दि  बुध्दी के विकास को , श्रवण शक्ति को रोक देती है …

अती अभिमान, अती चिंतन, अती नकारात्मक अथवा अती मनमुखता जीव को बहुत  गिरावट की तरफ ले जाती है….

6 गंदगियों से यश और आयुष्य  नाश होती है…

और उन्ही गंदगियों को उलटा कर दो वो 6 सद्गुणो से  यश,  आयु और बुध्दी  बढ़ती है…

1)      अती अभिमान से यश आयु कम होती है.

निराभिमानता से यश आयु बढ़ती है.

2)       आसक्ति भरे वचन बोलना अथवा आसक्ति से चिंतन करना इस से यश और आयु का नाश होता है…

अनासक्त  होने से यश मान बढ़ता है.

3)      जिस के जीवन में भोग ही भोग है, संयम नही है..त्याग का अभाव है ..उस का भी यश और आयुष्य नष्ट होता है …

लेकिन जिस के जीवन में त्याग है, संयम है उस का आयुष्य  बढ़ता है.

4)      जो क्रोधी होता है उस का भी यश आयु नष्ट होता है ..

लेकिन जो क्रोध को पचा लेता है , उस का यश आयुष्य बढ़ता है.

5)      जो मित्रो से द्रोह करता है , धोखा करता है, अपने वालों से जो धोखा करता है उस का भी यश, विश्वास और आयुष्य  घटता है…इसलिए जो आप पर विश्वास करते है उन को धोका देकर कभी ना जाओ..जाओ तो बता कर जाओ की ऐसा ऐसा है..मेरे को ये काम है…मेरे मन में आता है की आप को धोखा दूं अब आप ही कृपा करो की मैं धोखेबाज ना होऊं ..नही तो इस से यश , प्रभाव और आयुष्य नाश होता है..   

6)      श्रीकृष्ण  ने युध्द के मैदान में कहा है :

आत्मेव आत्मनो बंधु आत्मे रिपुरात्मना: l  …(पूर्ण श्लोक)

ये जीव अपने आप का मित्र है और अपने आप का शत्रु है…जब मनमुख हो कर संसार को सच्चा मान कर अपनी मति गति के अनुसार निर्णय लेकर चल पड़ता है वो अपने आप का शत्रु है…उस बेचारे को पता ही नही चलता की मैं कहा जा रहा हूँ…और अगर गुरु , संत और वैदिक परंपरा के अनुसार चलता है तो वो अपने आप का मित्र है…

ये जगत अनात्मा है..इस जगत की परिस्थियों को सत्य ना मानो…

नारायण हरि  हरि ओम हरि…..

श्रीकृष्ण ने युध्द के मैदान में कहा है :

आत्मेव आत्मनो बंधु आत्मे रिपुरात्मना:  l …(पूर्ण श्लोक)

आप की सोच को आप उमदा बनाओ…जग में वैरी कोई नही…मनवा शीतल होये..अपनी अहंता छोड़ दे…गुरु प्रेम मूर्ति है..ऐसे प्रेम मूर्ति गुरु के हृदय को कभी ठेंस  ना पहुँचे…तकदीर तू सब कुछ छीन ले ;  लेकिन श्रध्दा, भक्ति प्रेम ना छीन… पति रूठ गया तो मान जाएगा, पत्नी रूठ गयी तो मान जाएगी…भगवान या गुरु रूठ  गये तो फिर सारा जगत आप से मिला हुआ क्यू ना हो फिर भी अंतरात्मा के लानत की बौछार से आप बच नही सकते….मैने ऐसे कइयों के जीवन को देखा…मेरे गुरुबंधुओं के जीवन में देखा, मेरे साधकों के जीवन में देखा, मेरे मित्र साधुओं के जीवन में देखा जिन के जीवन से अपनी मनमानी करने के कारण, अपना चाहा करने के कारण किसी निमित्त गुरु के हृदय से उन की जगह कम होने के कारण उन का करा कराया चौपट हो गया…इसलिए हम हाथ जोड़ के प्रार्थना करते है की आप अपने आप के मित्र ना बन सको तो कोई बात नही लेकिन आप अपने दुश्मन ना बने…

 

संतों में ताकद होती है सच्चाई कहेने की ….विनोबा भावे जी ने पंडित नेहरू को भी कहे दिया था की उन्होंने जो पुस्तक लिखी है उस में  ‘संत तुलसीदास के जमाने में अकबर हुआ था’ ऐसा लिखना उचित है, अकबर के जमाने में संत तुलसीदास हुए ये लिखना मुनासिब नही….तो संतों में सच्चाई बोलने की ताकद होती है…

संत किसी पार्टी के , किसी व्यक्ति के, किसी समाज के विरोध में नही होते…लेकिन बेवकूफी को निकालने में उन की सजगता रहेती है…संत वाणी हमारी बेवकूफी निकाल कर हमें सावधान करती है…संत अगर आप को टोकते है तो आप का सौभाग्य है…और आप को स्नेह करते है तो आप का सौभाग्य है..आप को संत के द्वारा कुछ भी मिलता है तो आप उस को सकारात्मक लीजिए …. अगर नकारात्मक लिया तो फिर आप अशांत हो जाएँगे…अशांति के साथ चिंता, भय शोक की होम डिलेव्हरी  हो जाएगी…

इसलिए कहा है की :

श्रध्दा  पूर्वा मनोरथा  फल प्रदा: ll 

श्रध्दये  साधते सर्वं  श्रध्दये  त्वं शते  हरि  ll

 

ॐ शांती 


श्री सदगुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो !!!!!

गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे ….

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Mathuraa ; 9Oct.2011

Sharad rutu ki sharad poonam !

Prakaash may jeevan !!

Sahi nirnay karanewaali tvarit mati kaa jeevan…

Drudh nischay karanewaali mati kaa dhan kamaanewaalaa jeevan …..

Sanyaam , drudhataa aur tvarit nirnay karane ki mati waalaa vyakti hasate khelate paramaatma sukh, paramaatma shaanti , paramaatma gyaan ko paa letaa hai…

Naanak ji kahete : naanak vo mohe sadguru bhaave- mujhe vo sadguru pyaaraa lagataa hai ..kaun saa?

Hasandiyaan, khelandiyaan, khaavandiyaan,  phaenandiyaan vich kar de mugat…hasate khelate, khaate pahenate , lete dete  hamen moksh kaa marg dikhaa de, hamen mukt kar dewe..hamen bandhanon se raheet kar dewe …bandhan kyaa hai? Nahin jaanate tab tak sataaye jaate hai bandhanon se…jaan liyaa to bandhan kaa koyi asthitv hi nahi thaa…nahin jaanaa thaa tab pyaj thos thi..parate hataayi to us kaa koyi asthitv hi nahin thaa..nahin jaanaa thaa tab kele ke ped kaa mahatv thaa…parate hataayi to us ka akoyi mahatv hi nahin…aisi paraten hataayi bewkufi ki to mahaaraaj dukh chintaa aur janam maran kaa koyi swaal hi nahin paidaa hotaa…jaan lete ki :

janm mrutyu meraa dharam nahi hai…

punyaa paap kachhu karm nahin hai…

aisi unchi awasthaa kaa gyaan aur premaa bhakti hi hai.. math math ke param pad kaa makhkhan nikaalaa jaataa hai usi sthaan kaa naam hai mathuraa..

ab desh videsh waalon ko khabar kar rahen hai ki jahaan dnyaan aur bhakti  kaa maadhury math kar moksh rupi makhkhan pragat kiyaa jaataa hai  us kaa naam hai mathuraa…

mathuraa ke 4 naam hai…ved men bhi mathuraa sthaan ki mahimaa aayi hai…ved ati praachin hai..shrikrushn se pahele ved hai..shri raam ji se pahele ved hai…ved a-paurush hai…vaykti ki mati mati bhinn hoti hai..isliye mat-mataantar hotaa hai..lekin ved koyi mat nahi hai, koyi panth nahi hai, koyi sampradaay nahi hai……ved sanaatan satya hai..a-paurush ved hai…

us ved ki waani upanishadon men hai aur upnishadon kaa prasaad shrikrushn ne gitaa men pragat karavaayaa hai…gitaa shrikrushn ke anubhav ki pothi hai..yaa yun kaho ki gitaa shrikrushn kaa hruday hai…

gitaa me hrudayam paarth l

bhagavaan kahete hai : gitaa meraa hruday hai..

gitaa men shaanti paane ke 6 upaay bayaate hai..

thak kar jo shaanti paa rahe hai athavaa maansik bhramit ho kar mujhe aaraam ki jarurat hai bolate vo shaanti nahi hai; aatm shaanti !

ye maansik bhram hotaa hai ki mujhe aaraam karane do…ye man ki badamaashi hai ki mujhe aaraam karane do…ye shaanti nahi…

labdhaa gyaanam param shaanti l

jo bhakti ke ras se  namrataa men jeevan bitaa kar gyaan kaa manthan ho aur jeevan kaa laksh dikhe aisi jagah ko mathuraa kahaa hai…mathuraa, vrundaavan is ilaake men bhagavaan ki bhaktaani vrundaa ke naam se vrundaavan banaa…aur bhagavaan ke praagatya se is mathuraa men 4 chaand lage gokul men … bhagavaan gitaa men kahete hai 6 upaay hai shanti paane ke ..

ashaantasy kut sukham ?

kisi jagah par jaa kar aap ne shaanti paayi to aap ne shaanti ko pahechaanaa hi nahi..sab chhod chhaad kar phalaani jagah par rahe, jaraa shaanti mili lekin aap ne asali shaanti pahechaani hi nahi hai…asali shaanti sadguru krupaa ke binaa milati hi nahi hai…labdhaa gyaanam param shaanti….is ko param shaanti kahete hai..is param shaanti ke upaat jagar guru bataa rahe hai …kaun se jagat guru ?  vande krushnam jagat guru..shrikrushn bataa rahe hai gitaa men…

1) Aap kaa vivek prakhar ho..Vairaagy ho..Vairaagy se hi vivek aataa hai… Aakarshini shaktiyaan shaant ho jaaye..jeevan men Veet raag aaye…

2) aap ke jeevan men shradhdaa ho …satkarm aur sadbhaav ke saath shradhdaa ho..

Shradhdaa sukt hai vedon men ..

shradhdaa purvaa manorathaa phal pradaahaa l shradhdayaa saadhate sarvam shradhdayaa tvam shate hari ll

jeevan men shradhdaa bahot jaruri hai …lekin shradhdaa ke saath tatparataa aur indriyaa sanyam bedaa paar kar detaa hai …

vairaagy ho..vivek se hi vairaagy aataa hai …kuchh jark lag gayaa aur vairaagy ho gayaa to vo samshaani vairaagy hai..patni ne kuchh kahe diyaa- vairaagy ho gayaa..dhande men ghaataa padaa – vairaagy ho gayaa…raaj niti men tikit nahi mili –vairaagy ho gayaa..ye vairagya nahi …satsang ke dwaaraa sujh bujh badhi …sansaar anitya vastu hai ..hiranyakashyapu jaise vardaan paane ke baad bhi patan hai…raawan jaisi upalabdhiyaan paane ke baad bhi jeevan nagany hai…aakhir koyi saar nahi hai…aisaa vivek ke dwaaraa vairaagy jage..

shradhdaa …shaashtr, bhagavaan aur aatm vettaa mahaa prurushon ke prati shradhdaa…shradhdaa ek aisaa amrut ras hai , shradhdaa ek aisaa sambal hai ki niraashaa ki khaayi men giri huyi vyakti ko aashaa ki sidhi mil jaati hai….hatitsaah ko utsaah mil jaataa hai …

rukhe hruday men madhurataa kaa sanchaar karane kaa kaam shradhdaa devi kaa hai…maa bachche ki jaisi surakshaa kar deti is se bhi jyaadaa surakshaa kar deti hai shradhdaa devi…shradhdaa devi man chaahe bhagavaan ko pragat kar deti hai..agar man chaahaa bhagavaan srushti men nahi hai to use banaa kar aap ke saamane khadaa kar de aisi shradhdaa ki shakti  hai…shradhdaa iishwar se milaane men adbhut saath-sahakaar deti hai…lekin vo shradhdaa agar satsang, gyaan aur guru ke sanket ke binaa kiyaa to vo shradhdaa bade peer ke takaraav men bhi daal deti hai…

( bade peer ki kathaa padhane ke liye krupayaa is link par clik kijiyegaa :  http://wp.me/P6Ntr-sG  )

Saar men saar baat ye hai ki aap ke jeevan men ye 6 chije ubhaaro…

Budhdi men 3 chije ubhaaro….

a) Vishay vikaaron se sanyam

b) Drudh nishchay

c) Tvarit nirnay

Aur gitaa ke aadeshaa nusaar param shaanti kaa laabh paanaa hai , janam maran ke chakraav se paar honaa hai to aap men vivek ke dwaaraa vairaagy ho..satkarm aur sadbhaav se aap ke jeevan men shradhdaa ho…

Baanke bihaari ke mandir men jaate the ek bhagat ji..baanke bihaari laal aap ke darshan ke binaa main paani bhi naa piyu..mujhe santaan praapti kar do..santaan praapti ke iichchha se saal –dedh saal chakkar lagaaye..baanke bihaari mere ghar laalaa kaa janam ho jaaye….2 saal ho gaye..koyi santaan nahi huyi…mandir men jaanaa chhod diyaa..is kaa matalab baanke bihaari tumhaare koyi nokar hai ..tumhaare kahe anusaar kiyaa nahi to un ko hruday se nikaal do….aap ke haan men haan milaayaa to guru mahaaraaj hai; nahin to aap bori bistar baandh ke chalate bane aur bhakti aap hi ki karungaa bole to ye shradhdaa ke lakshan nahi hai…ye to aap man ke dhoke men aa rahe ho…shradhyey ke hruday ko chot naa lage aisaa shradhdaalu kaa dhyaan hotaa hai..aur shradhyay ke sidhdaant men apanaa man arpan kar de…waah waah waah …aisaa yash kare..tere phulon se bhi pyaar, tere kaanton se bhi pyaar ..chaahe sukh de chaahe dukh de dono sweekaar …kyo ki denewaale haath kis ke hai …

Mehamud naam kaa ek musalmaan raajaa thaa..us kaa vajir bhi raajaa ka pakkaa shradhdaalu thaa… ek baar jangal men bhatak gaye…din bhar bhatakane ke baad kuchh khaane pine ko nahi milaa – ek koyi jangali phal milaa…mehmud ne us ke 4 phaanke kar diye.. 2 tere hisse ke jyo pyaara mantri saath men thaa..aur 2 mere hisse ke bolaa..mantri ne 2 paahnke to chat kar di..jahaan panaah aap to swaami hai..sewak ko thodaa jyaadaa mil jaaye ..ek phaankaa aur de do…75 % phal kaa mantri ne dekhate dekhate swaahaa kar daalaa…ab ek phaank bachi..bole jahaan panaah ruko..is kaa aadhaa tukadaa mujhe de do..87 .5 % ho gayaa..baaki ki itani liri bachi to mantri bolaa aap jaraa saa khaa kar munh kyo kharaab karate ? vo bhi mujhe de do…

raajaa bolaa, ‘kyaa baat hai?’

Bole , ‘bahot vilakshan hai!’

To raajaa bolaa, ‘main bhi to chakhun…’

‘Nahin aap naa chakhe…’mantri bola…aisaa bol ke bhaav men aakar mehmud  ke haath se chhinaa jhapati karanaa chaahaa to raajaa ne himmat purvak bachi huyi phal ki liri apane munh men daali to  ‘chhi chii..yaak..thu thu …’ karate huye munh se baahar phenk diyaa.. munh kaa jaaykaa bigad gayaa…badaa pareshaan ho gayaa raajaa …bolaa :  ‘is phal ke liye tu itanaa karataa thaa?’…

Mantri bola : ‘phal kaun saa thaa, kyaa thaa main nahi jaanataa hun …jin haathon se khub khub madhur phal mile unhi haathon kaa ye phal thaa itanaa hi jaanataa hun…’

Jin haathon se itane madhur phal mile the, unhi haathon kaa ye katu phal thaa….phal ki katutaa kaa mahatv nahi hai..haathon kaa mahatv hai…shradhaa is kaa naam hai..bhagavaan aur guru ke prati aisi shradhdaa ho..mere guru ji ne jab bhi mujhe kuchh kahaa to baahar ke log samajhate honge athavaa jo mujhe bhagaanaa chaahate the guru sharan se door  vo log sochate honge ki guru ji is ko kosate hai ..lekin mere guruji mujhe kosen aise nahin the…kisi ko nahin kosate…saap ko pyaar kar sakate ve..bichhu naam ke puadhe ka bh iheet chaahate aise mere guruji  mere ko kyo kosenge?…haan, meri galati hai athavaa kisi ne galat report diyaa to guru ji ne bhale ki bhaavanaa se kahaa …. to bas baat puri ho gayi….

saadhu te hove naa kaaraj haani…

bramhagyaani te kachhu buraa naa bhayaa…

aisi shradhdaa ho… ‘main thak gayaa hun, mujhe aaraam karane do’ ye aap  ki shradhdaa kaa pol khol detaa hai..

naaraayan hari..hari om hari..

3 ) tisaraa gitaa kaar kahete hai ki aap ke jeevan men bhagavat arth karam ho…yash ke liye karm karate, suvidhaa ke liye karm karate , waasanaa ke anusaar karm karate to bhav bandhan men phasate…lekin bhagavat priti ke liye karm karo…phir chaahe vo karm baahar se badhiyaa dikhe chaahe ghatiyaa dikhe…jaise ek bramhachaari lankaa men dar dar chakkar kaat rahe the..hanumaan ji ki garimaa se mahimaa se ye bahot chhotaa kaam hai , tuchh kaam hai lekin  raam kaaj bin kahaan vishraamaa?

Lankaa ke gali gali khojate, ghar ghar chhaatate ki bibhishan kahaan hai….naa jaan ekin kin raakshasiyon ko , maayiyon ko aur gande gande logon ko dekhate dekhate bhi bibhishan ki jhopadi khoji…kyo ki kaam kis kaa hai? Swaami kaa hai….aisaa bhagavar arth karm ho..man chaahaa kaam to koyi bhi kar letaa hai…jo kaam guru kaa sanket mile , bhagavat sanket mile vo kaam aap ko pyaaraa lage tab samjhanaa ki   aap kaa karm waasanaa rahit hai…bataur guru prasannataa ke liye hai..

4) Chauthi baat hai aap ke andar men  bhakti ho…bhakti aisi nahi ho ki baanke bihaari ke liye bhakti aur betaa nahi diyaa to baanke bihaari ko dil se nikaal diyaa…ye bhakt ke lakshan nahi hai…

5) Paanchavaan hai mahaapurushon ki sharan …tvamev sharanam gachch sarv bhaaven bhaarataa..

Tat prasaadaat param shaantim sthaanam praaptasye shaashwatah ll

Us prasaad se param shaanti milegi..shaashwat sthaan milegaa…

Na tad bhaavo shashi na suryo naa paawakaa

Yad gatvaani vartante tav dhaamam param mam ll

6) Bhotaaram yagyatapsaam sarv lok maheshwaram …aap din hin garib ko dete to ‘ye bechaaraa garib hai aur main is ko nahin detaa to kyaa hotaa’ is vahem men mat padanaa…garib ke rup men bhi wo hi meraa jagat pati jagadishwar maheshwar hai …maan  ke rup men, baap ke rup men , kangale ke rup men , are kutte ke rup men bhi upbhog karane waalaa meraa chaityany hai..waah prabhu waah…om om om …wo najariyaan ban jaaye to kaam ban jaaye…

Main yagya kaa, tap kaa phal bhogane waalaa sab kaa antaraatmaa  maheshwar hun …iishwaron kaa iishwar hun…dev ki pujaa karate tabhi bhi us ke dev ke dwaaraa bhi us maheshwar  antaryaami dev ki krupaa se hi aap kaa manorath phalataa hai…gurudev ki praarthanaa karate ho, upaasanaa karate ho..tabhi bhi gurudev ki antaraatmaa ke chaityany se hi phalataa hai..arthaat jo bhi dev hai un  sarv devon men waastavik dev vo  sarv anusyut parabramh paramaatmaa hai aisaa jo jaanataa hai aur maanataa hai ki vo paramaatmaa meraa suhurd hai , us ko shaanti sahej men milati hai…

Bhotaaram yagyatapsaam sarv lok maheshwaram

Suhurdam sarv bhutaanaam Gyaatvaa maam shaanti mruchhate  ll

Aap aise bhagavaan kaa chintan kar ke shaant hone kaa abhyaas karo…

Ashaantasya kutah sukham?

Bhartuhaari ki kathaa suni hogi…bhartuhaari gorakhnaath ke charanon men gaye to gorakhanaath ji ne puraane chelon ko kahaa : raajaa bharat aaye hai aur har paristhiti men kitane sam rahete hai ..aur kitani sajagataa se sewaa karate hai…to puraane chele ko lagaa ki vo raaj paat chhod ke aaye isliye us ki prasansaa ho rahi hai…

( raajaa bhartuhaari ki kathaa padhane ke liye krupayaa yahaa padhaare :  

http://wp.me/P6Ntr-LX  )

Saamane waalaa kya kahe rahaa is ka mahatv nahi, kahene waalaa kaun hai is kaa mahatv hai…

Main abu ke pahaddon men nal guphaa men rahetaa thaa..wahaa manohar laal naam kaa ek taar baabu aayaa thaa..ande kaa naashtaa karataa thaa..sharaab pitaa thaa…vo koyi saadhak nahi thaa,  .. ‘mujhe kiraaye kaa achhaa makaan mil jaaye’ ..aisaa aashirwaad lene subah subah aayaa thaa vo bandaa…maine kahaa, ‘abhi thodi der baitho..aankhen band kar ke bhagavaan kaa naam lo phir main baat karataa hun…’

Vo baithaa to baithaa….subah ke 7 baje ke aaspaas aayaa hogaa…suryoday maine laal dekhaa thaa us samay …  9 baj gaye..10 baj gaye..maine kahaa baithaa hai to bechaaron ko baithane de…aise karate karate mujhe shaam kaa laal sury dikhaayi diyaa…karib 6 baje honge…subah 6 baje kaa baithaa shaam ke 6 baj gaye …aur vo koyi saadhak nahi thaa..shaakhaahaari bhi nahi thaa..andaa khaane waalaa thaa, daaru pine waalaa thaa..aagyaa maani , baithaa…subah se baithaa to shaam ko suryaast ke samay maine us ko uthaayaa…bilkul main vishwaas purvak kahetaa hun…jhuth bolane se tapasyaa naash hoti hai, prabhaav naash hotaa hai is baat ko main achhi tarah se jaanataa hun..to sthaan dharm athavaa kahenewaale kaa sankalp aur saamane waale ki shradhdaa ye bahot vilakshan kaam karate hai…vo to aayaa thaa kiraaye kaa makaan mile isliye…lekin aise makaan men anjaane men gati ho gayi ki bole bas ab kuchh nahi chaahiye…aho bhaav se bhar gayaa..dhanyawaad se bhar gayaa…to apane manmaanaa tapasyaa kyaa kaam karegi…hiranyakashyapu ne 60 hajaar varsh tapasyaa ki thi…raawan ne bhi 60 hajaar varsh tapasyaa ki thi..phir bhi ve sansaar se haar ke gaye…to aap ki tapasyaa un ke aage kyaa maanaa rakhati hai?…shabari bhilan, rahidaas chamaar , dhannaa jaat, sadanaa kasaayi sansaar se jeet ke gaye kyo ki guru krupaa hi kewalam shishyasy param mangalam…jay jay hanumaan gosaayi, krupaa karo gurudev ki naayi…gurudev jaisi krupaa karate vo apane aap apane par nahi kar paate…

Main apane anubhav se kahetaa hun ki badaa vairaagy thaa, iishwar mile isliye ghar chhodaa thaa…aur iishwar kaise mile ki shiv ji mile ..shiv ji pragat ho jaaye aur puchhenge kyaa chaahiye..main bolunga akuchh nahi chaahiye…shiv ji khush ho jaayenge..yahi iraadaa thaa..yahi najariya leke chale the..pataa hi nahi thaa ki ham bhi sadaa shiv men hi hai..hamaaraa shiv aur shiv ji kaa shiv adwait bramh hai…is baat ki to kalpanaa bhi nahi thi…lekin mahaaraaj guru ki najariyaa aur guru ki krupaa ke aage 60 hajaar varsh ki tapasyaa bhi kuchh maane nahi rakhati…aisaa 60 hajaar tapasyaa waalaa hiranyakashyapu bhi paramaatm shaanti ke binaa ashaant hokar marataa hai..

Ashantasya kut sukham?

Shantasya kut dukham?

Gitaa men bhagavaan ne bahot unchi baat kahi…to ye shaanti paane ke 6 upaay gitaa men bataaye…

Sharad rutu men khir khaanaa , halawaa khaanaa , gulkand khaanaa, kelaa khaanaa, ghee khaanaa, ilaayachi , chandan kaa upayog, chandramaa ki chaandani men bhraman karanaa…ye heetkaari hogaa…aaj , kal aur paraso ke chandramaa ke kirano kaa phaaydaa lenaa… ab ye sharad rutu kaa ant hogaa purnimaa ke din…

13 oct se kaartik maas praarambh ho rahaa hai…skandh puraan me aayaa haiki kaartik maas ke samaan dusaraa koyi maas nahi hai…satyug ke samaan koyi yug nahi…ved ke samaan koyi shaastr nahi aur gangaaji ke samaan koyi tirth nahi..kaartik maas men paalaniy niyam hai ki deep daan kaa mahatv hai..tulasi kaa van athavaa tulasi ke paudhe lagaanaa heet kaari hai…tulasi ke paudhe ko subah ek- aadhaa  glaas paani denaa ek maasaa suwarn daan kaa phal detaa hai…bhumi par shaiyyaa athavaa gaddaa hataa kar kadak takhat par kambal bichhaa kar shayan , bramhachary kaa paalan ye kaartik maas men karaniy niyam bataaye hai….is se jivaatmaa kaa udhdaar hotaa hai…udad , masur aadi bhaari chijo kaa tyaag karanaa chaahiye, til kaa daan karanaa chaahiye..kaartik maas men satsang, saadhu santo kaa jivan charitra ka adhyayan , maarg darshan kaa anusaran karanaa chaahiye…moksh praapti kaa iraadaa banaa denaa chaahiye…

Abhi sharad punam ke baad aawale viryawaan ho jaayenge…kaartik maas men aawale ke vruksh ki chaayaa men bhojan karane se ek varsh ke anginat paap nasht ho jaate hai…aawale ke ubatan se snaan karane se lakshmi praapti hoti hai …aur adhik prasannataa milati hai…sankaanti , grahan ke samay aawale kaa upyog nahi karanaa chaahiye…(pujyashri baapuji ne aawalaa sewan ki vidhi bataayi. aawale kaa maawaa banaa kar chatany aur murabbaa banaa ke rakhe aur pariwaar waalon ko bhojan se pahele khaane ke liye denge to mandaagni dur hogi…aawale men 5 ras hai..aawale se kayi rogo se mukti milati hai …11 taarikh ke baad aawale ka aupyog karanaa hai…)

11 tarikh ko khir banaayenge to us men khir pakaate samay asali chaandi aur sonaa daalen aur suwarn kshaar  aur rajat kshaar khir men  utarenge… phir khir ko chandramaa ke kiranon men rakhe to saatvik prabhaav bhi pade…

Gruhasth jeevan men unnati ke upaay bataate huye shaastr kahete hai ki aap amrut tulya mithi waani boliye..saumya drushti rakhiye…saumya mukh banaayiye…aur saumya man banaayiye…aap ke jeevan men aisi saumyataa aaye ki aap ke kisi ko bhi mulaakaat ho jaaye to us ko kuchh naa kuchh prasannataa , shaanti aur sujh bujh kaa dhan mile ..aap aise dhan ko pragat kar sakate hai…

kabhi bhi juthe munh apanaa haath seer par naa jaaye , nahin to budhdi kaa vikaas ruk jaataa hai..

kuff ki vrudhdi budhdi ke vikaas ko , shravan shakti ko rok deti hai …

ati abhimaan, ati chintan, ati nakaaraatmak athavaa ati man mukhataa jeev ko bahot giraavat ki taraf le jaati hai….

6 gandagiyon se yash aur aayushy naash hoti hai…

Aur unhi gandagiyon ko ulataa kar do vo 6 sadguno se  yash,  aayu aur budhdi badhati hai…

1) Ati abhimaan se yash aayu kamhoti hai.

nirabhimaanataa se yash aayu badhati hai

2)  Aasakti bhare vachan bolanaa athavaa aasakti se chintan karanaa is se yash aur aayu kaa nash hotaa hai…

Anaaskat hone se yash maan badhataa hai.

3) Jis ke jeevan men bhog hi bhog hai, sanyam nahi hai..tyaag kaa abhaav hai ..us kaa bhi yash aur aayushy nasht hotaa hai …

Lekin jis ke jeevan men tyaag hai, sanyam hai us kaa aayushya badhataa hai.

4) Jo krodhi hotaa hai us ka abhi yash aayu nasht hotaa hai ..

Lekin jo krodh ko pachaa letaa hai , us kaa yash aayushy badhataa hai.

5) Jo mitro se droh karataa hai , dhokhaa karataa hai, apane waalon se jo dhokhaa karataa hai us kaa bhi yash, vishwaas aur aayushy ghatataa hai…isliye jo aap par vishwaas karate hai un ko dhokaa dekar kabhi naa jaao..jaao to bataa kar jaao ki aisaa aisaa hai..mere ko ye kaam hai…mere man men aataa hai ki aap ko dhokhaa dun ab aap hi krupaa karo ki main dhokhebaaj naa huvu..nahi to is se yash , prabhaav aur aayushy naash hotaa hai..  

6) Shrirkushn ne yudhd ke maidaan men kahaa hai :

Aatmev aatmano bandhu aatmey ripuraatmanaah l…(purn shlok)

Ye jeev apane aap kaa mitr hai aur apane aap kaa shatru hai…jab man mukh ho kar sansaar ko sachchaa maan kar apani mati gati ke anusaar nirnay lekar chal padataa hai vo apane aap kaa shatru hai…us bechaare ko pataa hi nahi chalataa ki main kahaa jaa rahaa hun…aur agar guru , sant aur vaidik paramparaa ke anusaar chalataa hai to vo apane aap kaa mitr hai…

Ye jagat anaatmaa hai..is jagat ki paristhiyon ko satya naa maano…

Naaraayan hari hari om hari…..

Aap ki soch ko aap umadaa banaao…jag men vairi koyi nahi…manavaa sheetal hoye..apani ahantaa chhod de…guru prem murti hai..aise prem murti guru ke hruday ko kabhi thens naa pahunche…takdir tu sab kuchh chhin le ;  lekin shradhdaa, bhakti prem naa chhin… pati ruth gayaa to man jaayegaa, patni ruth gayi to man jaayegi…bhagavaan yaa guru ruth gaye tophir saaraa jagat aap se milaa huaa kyu naa ho phir bhi antraatmaa ke laanat ki bauchhaar se aap bach nahi sakate….maine aise kayiyon ke jeevan ko dekhaa…mere gurubandhuon ke jeevan men dekhaa, mere saadhakon ke jeevan men dekhaa, mere mitr saadhuon ke jeevan men dekhaa jin ke jeevan se apani manmaani karane ke kaaran, apanaa chaahaa karane ke kaaran kisi nimitt guru ke hruday se un ki jagah kam hone ke kaaran un kaa karaa karaayaa chaupat ho gayaa…isliye ham haath jod ke praarthanaa karate hai ki aap mitr naa ban sako to koyi baat nahi lekin aap apane dushman naa bane…

Santon men taakad hoti hai sachchaayi kahene ki ….vinobaa bhaave ji ne pandit neharu ko bhi kahe diyaa thaa ki sant tulasidaas ke jamaane men akabar huaa thaa aisaa likhanaa uchit hai, akabar ke jamaane men sant tulasidaas huye ye likhanaa munaasib nahi….to santon men sachchaayi bolane ki taakad hoti hai…

Sant kisi paarti ke , kisi vyakti ke, kisi samaaj ke virodh men nahi hote…lekin bewkufi ko nikaalane men un ki sajagataa raheti hai…sant waani hamaari bewkufi nikaal kar hamen saawadhaan karati hai…sant agar aap ko tokate hai to aap kaa saubhaagy hai…aur aap ko sneh karate hai to aap kaa saubhaagy hai..aap ko sant ke dwaaraa kuchh bhi milataa hai to aap us ko sakaaraatmak lijiye …. agar nakaaraatmak liyaa to phir aap ashaant ho jaayenge…ashaanti ke saath chintaa, bhay shok ki home dilevary ho jaayegi…

Isliye kahaa hai ki :

shradhdaa purvaa savr dharmaa manoarathaa phal pradaa

shradhdayaa saadhyate sarvam shradhyayaa tu shate hari ll

OM SHANTI.

SHRI SADGURUDEV JI BHAGAVAAN KI MAHAA JAYJAYKAAR HO !!!!!

Galatiyon ke liye Prabhuji kshmaa kare…

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