international saajish se bhaarat kamajor nahi ho..

बेहरोर (राजस्थान) ; 4ऑक्टोबर.2011

नारायण हरि …नारायण हरि…. हरि  ओम.. हरि ओम ..

भगवान कहेते है की मनुष्य तेरे अंदर  मैं ही बैठा हूँ…तू मेरा वंशज है…हम पिता के वंशज तो है लेकिन हम नहीं, हमारा शरीर पिता माता का वंशज है….लेकिन आत्मा तो परमात्मा का वंशज है…ये शरीर पति का तो वो  पत्नी है,  ये शरीर पत्नी का तो वो पति है, लेकिन आत्मा किसी की पत्नी नही होता..होती है क्या? नहीं!…
नाथद्वारा आमेट  के बीच में एक छोटासा गाँव है….वहा एक 13 साल की छोकरी  की शादी हो गयी..बाल विवाह …लड़की का नाम था फूली… उस का पति सुतार था…शादी के बाद 6 महीने होते होते वो सुतार तो मर गया… लड़की तो बहोत  रोवे , माथा  कूटे…छोरी  चुप करे नही तो माइके ले आए…जब भाग्य ज़ोर करे तो संत मिलते है और पुण्य और ज़ोर करे तो संत का वचन सुनने को मिले है…पापी आदमी संत के वचन नहीं सुन सकता…..जिस के अंदर में पाप बैठा है , संत के वचन सुन के उस का पाप उस को भगा के ले जाएगा…अगर नही  भागा तो पाप अकेला भाग जाएगा और वो व्यक्ति  पुण्यात्मा  हो जाएगा…ऐसी सत्संग की महिमा है… 
तुलसी पूर्व के पाप से हरि चर्चा ना सुहावे…
जिन के पहेले के पाप है वो कथा में नही आ सकते…आ भी गया तो संत आते ही वो भाग जाएगा…
पाप वंत कर सहेज स्वभाऊ l
राम कथा ते ना भाव लगाओ  ll
पापी का ये सहज स्वभाव है की भगवान की कथा उस को नहीं भाति …
तो फूली बाई रोवे  रोवे ..तो उस को पिता किसी संत महात्मा के पास ले गये…और बोले की बापजी ये मेरी बेटी है..शादी कराई थी लेकिन वो बेचारी विधवा हो गयी….
संत बोले : अरे  विधवा काहे की हुई?
जगत का पति तो साथ में है…शरीर विधवा हुआ..बाई विधवा नहीं हुई..तो बेटी तू विधवा नहीं है..तू तो सदा सुहागन है…तेरा  पति तो है आत्मा परमात्मा…. शरीर विधवा हो तो हो… 
बापजी ने (संत महात्मा ने) फूली बाई को मंत्र दे दिया..
बोले तू अब जगत पति का चिंतन कर, जो तेरा अंतरात्मा है… 
फूली बाई ग़रीब बहोत  थी..तो गाय भैस रखते थे…
(पूज्यश्री बापूजी ने फूली बाई की कथा सुनाई… फूली बाई गोबर के कंडे बनाती ..उन की पड़ोसन फूली बाई के कंडे चुरा लेती..एक दिन फूली बाई ने बड़े प्रेम से उस बहेन को समझाया की चोरी नही करो , चाहिए तो पूछ  कर ले जाओ…तो पड़ोसन ने झगड़ा कर के गाँव इकठ्ठा कर लिया और गाँव के पंचों  को कहा की फूली बाई ही मेरे कंडे चुराती है…तो इस पर फूली बाई ने कहा की , मैने बनाए हुए कंडे में “राम राम”  सुनाई देगा ..आप खुद ही जाँच कर लो की किस ने किस के कंडे चुराए है… पंचों   ने जाँच की तो पड़ोसन की चोरी खुल गयी और फूली बाई की जयजयकार हुई की फूली बाई की कैसी भक्ति की गोबर के कंडों  में से राम नाम सुनाई देता है!… )
गाँव के लोग फूली बाई का जयजयकार करने लगे..
फूली बाई बोली , “मेरी जय  ना बोलो ..सत्संग भगवान की जय  बोलो !मैं तो विधवा हो कर माथा  कूट कूट कर रोने से पागल हो जाती..मेरे को सत्संग भगवान मिला और सत्संग भगवान से गुरु भगवान मिला ; गुरु भगवान से आत्म भगवान का प्रभाव है …मेरी जय  मत बोलो..परमात्मा की जय  बोलो..राम राम की जय ! ”
राम राम राम राम …ओम ओम ओम ओम ओम ..शिव शिव शिव शिव शम्भो भोलेनाथ … हा हा हा हा …
उस परमात्मा की जय बोलो …उस भगवान की जय बोलो ..उसी में फ़ायदा है…तुम बोली बहेन  की तुमने  चोरी की इसलिए पंचायत के सामने बोला बहेन…भूल चूक हो गयी तो माफ़ कर देना बहेन…

वो बहेन तो पानी पानी हो गयी…सोचा की चोर तो मैं थी, और फूली बाई को चोर बोल रही थी..फिर भी फूली बाई सब के सामने मुझे बोल रही भूल चूक माफ़ कर दो…वाह रे वाह फूली बाई…तुम धान्य हो!…
 धन्य  है तेरी भक्ति अमर रहे …
फूली बाई रोज रात को सोते  समय श्वासो श्वास में नाम जपती थी…श्वास अंदर जाए तो ओम बाहर आए तो 1…श्वास अंदर जाए तो राम..श्वास बाहर आए तो 2…ऐसे श्वासो श्वास की माला जपने से  जल्दी आत्मा परमात्मा की जागृति होती है…ईश्वर के साथ जो शाश्वत संबंध है वो जल्दी समझ में आता है..जैसे बादल हटते तो जल्दी सूरज दिखता ऐसे हमारा अंतरात्मा परमात्मा के साथ जुड़ा है .. 
नाम जपत मंगल दिशा दस l
दसो दिशाओं में मंगल होता है…फूली बाई को शांति आनंद मिलता…गाँव के लोगों में कही झगड़ा हो तो फूली बाई  को बुलाते..
किसी को घर का झगड़ा मिटाना है तो रात को सोते समय घर का मुखिया अपने पलंग के नीचे एक लोटा पानी का भर के रखे..फिर सुबह उठ के उस जल में देख कर प्रार्थना करे की हमारे घर के झगड़े मिट जाए और वो पानी पीपल में, तुलसी में अथवा किसी पेड़ में या ऐसी जगह की जहा किसी का पैर ना पड़े ऐसी जगह डाल दो….ऐसा जो भी करेगा उस के घर में सुख शांति रहेगी…
घर के लोग मिलकर रसोई घर में बैठ के भोजन करे…घर में और रसोडे में खड़ा नमक का पोता  लगवाए…ऐसा करने से घर की निगेटिव एनर्जी चली जारी है.. घर में पॉज़िटिव एनर्जी बढ़ती है…घर में झगड़े होते तो घर में  निगेटिव एनर्जी होती है…नमक का पोता  लगाने से वो  निगेटिव एनर्जी चली जाती है….

दशहरे के दिन बिना मुहूरत का मुहूरत होता है..4 जगहो पर हेलिकॉप्टर से जाउंगा  और उद्घाटन करूँगा…खिलचीपुर में स्कूल खोली है, वो समाज को अर्पण करनी है…कपासिया में ग़रीबों के लिए मकान बनाए है…पुष्कर में वृध्दाश्रम खोला है , उस का उद्घाटन करना है..इंदौर  से 100 किमी पर शाजापुर है वहा भी उद्घाटन है…

“उद ” माना ब्रम्‍ह…उस ब्रम्‍ह परमात्मा की तरफ जाने के लिए कर्म योग करो तो उद्घाटन हो गया..लोकार्पण करो तो उद्घाटन हुआ..अपने स्वार्थ के लिए करे तो उद्घाटन नहीं है, वो तो बंधन है…लेकिन दूसरे के हित  के लिए जो काम करते  है उस को यज्ञार्थ  करम बोलते है  भगवान गीता में…
यज्ञार्थ कर्म कौन्तेय …
हे कुंती नंदन! मनुष्या को यज्ञार्थ कर्म करना चाहिए…. 
बच्चे को जनम दिया..बच्चा बड़ा हो जाएगा , मेरे को सुख देगा सोचते तो ये विकारार्थ स्वार्थ हुआ…मेरे को माँ  बाप ने जनम दिया, मैने भी बच्चे को जनम दिया..उस का पालन पोषण कर दिया..लेकिन स्वार्थ के लिए की वो मेरे को सुख देगा ऐसी भावना से नही  किया तो बच्चे का गर्भ धारण करना, प्रसूति, बच्चे को जनम देना, उस का पालन पोषण करना ये सभी यज्ञार्थ है..जो भी आप करते  लेकिन अपने स्वार्थ के लिए नही करते बल्कि ; माता पिता परिवार के पालन पोषण के लिए करते …बदले में वो हम को सुख दे ये भाव छोड़  दे तो आप के अंतरयामी आत्मा का सुख प्रगट होगा… आप का कर्म यज्ञार्थ हो जाएगा…कर्म योग हो जाएगा…
भोजन बनाते तो अच्छा  बनाओ..जो अच्छा लगे वो ही खाऊं  ऐसा नही….कुटुम्ब का- पति का परिवार का तंदुरुस्ती अच्छा रहे ऐसा खाना बनावे तो ये यज्ञार्थ करम हो गया…कुछ  माइया रोटी बनाती तो तवा ज़्यादा गरम होगा अथवा रोटी को घुमाया नही तो रोटी को काला काला दाग हो जाता है..ऐसी रोटी खाने से पेट में गैस होता है..छाती  जलती है…ऐसी रोटी नही बनाए…तवा ज़्यादा गरम हो गया तो थोड़ा  पानी छिटके  फिर रोटी सेंके…सत्संग में क्या क्या ज्ञान  मिलता है ! 🙂  
आज तक तो करते थे अपने साथ गड़बड़ी… अब नही करना…
हफ्ते में एक दिन करेले की सब्जी खानी चाहिए…तो डायेबीटीस भी नही होगी और पेट भी अच्छा रहेगा…
होली के दिनों में 20-25 नीम  के पत्ते एक काला मिर्च चबा के खाए और पानी पिए तो फोड़ी फुंसी नही होती और 12 महीने तबीयत ठीक रहेती है…
11 तारीख को शरद पूनम के दिन खीर बना के चंद्रमा की चाँदनी में रख के , थोड़ा  भोग लगा के फिर खाए…भोजन नही बनाए…शरद पूनम की रात चंद्रमा के किरण ब़ल प्रदान करते है, आरोग्य  प्रदान करते..
8 तारीख से चंद्रमा को देखना और आँखें  फटफटाना…(आँखे जल्दी जल्दी खोलो बंद करो)…तो आँखों की रोशनी बढ़ेगी….
कइयों के मुँह में छाले  होते है…कइयों की आँखे जलती है…तो चंद्रमा को देखना…8, 9, 10 और 11 तारीख ऐसे 4 दिन रोज देखना…
आँखो की जलन में आराम हो जाएगा…मुँह के छालों  में आराम हो जाएगा…
जिस को 12 महीने मुँह में छालें  रहेते, रात को 12 बजे नींद टूट जाती है तो उन के शरीर में पित्त  है..पित्त  के कारण जलन होती है , गुस्सा आता है, मासिक अधिक आता है…फोड़ी फुनसी होता है..ऐसे लोगों को क्या करना चाहिए की 100 ग्राम आँवले का चूर्ण  + 100 ग्राम धनिए का पाउडर + 100 ग्राम बड़ीसौफ़ + 100 ग्राम मिशरी ये चारों मिला दिया और रोज सुबह 10-12 ग्राम  सुबह 1-2 घंटा पहेले भीगा दिया , फिर मसल के पी लिया तो शरीर में जो भी गरमी है निकल जाएगी…और नींद अच्छी आएगी…
भोजन करे तो पेट पर ऐसे हाथ घुमावे (एंटी क्लॉक वाइज़ – घड़ी चलती उस की विपरीत दिशा में)  और अगस्त्य ऋषि, कुम्भकर्ण , शमी, वड़वानल इन को सुमिरन कर के प्रार्थना करें की मेरा पाचन ठीक हो…
सुबह सुबह सूरज के किरण पड़े नाभि पे, शरीर पे तो खून बढ़ेगा…शरीर ऐसे पीले पीले कमजोर नही होने चाहिए .. डॉक्टर  के चक्कर में दवाई भी ज़्यादा नही खाएँ…ये डॉक्टर वो डॉक्टर करते…वो भी नुकसान करेगा …डॉक्टर का डॉक्टर भगवान है …..भगवान का नाम ले.. ‘हे राम ! हे नारायण !’…शरीर पर  सूर्य नारायण के किरण पड़े…तनदूरूस्ती अच्छी रहेगी…फिर   ‘हे राम ..हे गोविंद…हे माधव’ ऐसा करो..हरि ओम ओम ओम ओम दोनो हाथों से तालिया बजाते हुए बोलते बोलते हाथ उँचा कर के हँसे ….ऐसा दिन में 2-4 बार करो तो खून बढ़ेगा…घर में खुशी बढ़ेगी..झगड़े मिट जाएँगे…
‘हे प्रभु आनंद दाता’  ये  प्रार्थना रोज घर में करे… किसी से किसी की निंदा  ना करे..
बचपन बदल गया, बचपन की बुध्दी  बदल गयी..लेकिन उस को जाननेवाला भगवान नही बदला…वो सदा अपने साथ में है… बचपन का शरीर अभी नही है…7 साल में तो हड्डियाँ भी बदल जाते..हर रोज कुछ  नया खाते , रोज सुबह मल निकलता तो रोज कई  कण  बदल जाते…फिर भी जो नहीं बदलता उसी का नाम है भगवान…वो भगवान परम दयालु है..परम हितेशी है…सुहुर्द है ..और शक्तिमान है…उसी अंतर्यामी भगवान ने हमारी नाभि हमारी माँ  के जेर से जोड़ दी थी..हम जब माँ  की गोद में आए तो दूध हम ने नही बनाया ….जिसने बनाया वो ही भगवान है…दूध भी कैसा?ज़्यादा गरम नही, ज़्यादा ठंडा नही, ज़्यादा मीठा नही, जूठा  नही माना जाता, फ्रिज  नही करना पड़ता, खट्टा नही होता….हे भगवान तेरी कैसी लीला है!…भगवान अंतर्यामी है..अच्छा  काम करते तो हमारे हृदय में बल देते हो…चरपरा काम करते तो हृदय की धड़कने बढ़ाते हो..हे भगवान तुम हमारे सुहुर्द हो….
रात को सोते समय  भगवान को अपना और अपने को भगवान का मान के भगवान के प्रेम पूर्वक प्रार्थना करे की हम को शरण में लो…
रिझे जब रघुनाथ तब देवयि साधु संगति…
भगवान तुम्हारा कितना मंगल चाहते है…
नारायण नारायण नारायण नारायण..
वो भगवान हमारे अंतरात्मा है…बचपन बदला, जवानी बदल, सब कुछ  बदला लेकिन भगवान बदला क्या? नहीं बदला…तो आप बोल देना भगवान अब तुम्हारा एड्रेस मिल गया है … बेटी तो दामाद की डेपॉज़िट है, बेटा बहू का है, शरीर समशान की डिपॉज़िट है..लेकिन भगवान आप मेरे और मैं  आप का ऐसा जैसे माँ  की साडी  का  बच्चा पल्ला पकड़ ले ऐसे भगवान को रिझाओ…जो भगवान अंदर है वो बाहर भी है..जैसे कृष्ण भगवान यशोदा मैय्या को रिझाते ऐसे करे…यशोदा माना क्या? जो बुध्दी   भगवान को यश दे…वाह प्रभु जो तू करता है अच्छा करता है…वाह वाह …जो भगवान को यश देनेवाली बुध्दी  है वो यशोदा है….और जो बुध्दी  भगवान में प्रीति करे वो बुध्दी  ऋतंभरा प्रज्ञा  हो जाती है…यशोमति बुध्दी  को ही ऋतंभरा प्रज्ञा  बोलते..तो जैसे 2 सरोवर का पाल टूट  जाए तो 2 सरोवर का पानी एक हो जाता है ऐसे आप भगवान को प्रीति करो तो आप के “मैं” का पाल टूट जाएगा तो जीवात्मा परमात्मा एक रस हो जाते है..यही जीवन का सार है !
घर में, परिवार में एक दूसरे को प्यार से समझा कर घर के झगड़े मिटाओ…पत्नी माँ  की निंदा ना करे इसलिए पति समझाए , जेठानी देरानी की निंदा ना करे इसलिए जेठ समझाए..देरानी जेठानी की निंदा ना करे..ननंद भाभी की निंदा ना करे, भाभी है तो ननंद की निंदा ना करो….सासू को कोसेगी तो तेरी बहू भी तेरे को कोसेगी..इसलिए सासू का आदर करो..जो बड़ों का आदर करता है, बड़ों की सेवा करता है , उस का भाग्य बड़ा हो जाता है …जो बड़ों को सताता है , उन की सेवा नही करता उन को फिर जवानी में, बुढ़ापे में अशांति होती है…

जो बड़ों की, संतों की , बूढ़े बुजुर्गों की सेवा करते उन का आयु, यश, ब़ल और बुध्दी  बढ़ती है…

बड़े में बड़े तो मेरे भगवान है…तुम मेरे अंतरात्मा हो..शबरी के राम हो…भक्तों के भगवान हो..तुम अनेक रूपों में हो प्रभुजी…ऐसा प्रीति पूर्वक भगवान का सुमिरन करे…पश्चिम 
की तरफ सीर कर  के सोएंगे तो चिंता पिच्छा नही छोड़ेगी ..उत्तर के तरफ सीर कर के सोएंगे तो बीमारी और अकाल मृत्यु का ख़तरा रहेगा…पूरब की तरफ या तो दक्षिण की तरफ सीर कर के ही सोना चाहिए…

जब भी कोई महिला माँ  बननेवाली  हो तो डॉक्टर बोलेगा बच्चा कमजोर है..गर्भपात करा दो.. किडनी खराब है , ग्रोथ नही है ..ऐसा कुछ  भी डरा डरा हिंदुओं के बच्चे मारने की  गंदी राज नीति चल रही है विदेशी शक्तियों की … हिंदुओं की संख्या  अल्प हो अथवा हिंदुओं के बच्चे बुद्दू  हो इसलिए हिंदुओं के देश में बच्चों को, बच्चियों को हस्त -मैथुन करने का स्कूल और कोलेजों   में प्रचार हो रहा है..
हस्त-मैथुन करने से बच्चे बच्चियाँ निस्तेज होते है…अभी ओबामा को और बिल क्लिंटन को चिंता थी की भारत के 60 % लोग अमेरिका में बड़ी बड़ी पदों पे है..अमेरिका के लोग पिछड़  गये..अब अमेरिका कर रहा है या कोई दूसरा देश कर रहा है , लेकिन है तो ये इंटरनॅशनल साजिश के भारत कमजोर हो..भारत अंदर ही अंदर लड़े ….भारत के पड़ोसी देश और भारत भिड़ते  रहे…ये सारी कूट-नीति है..और उस से भी गंदी नीति है हम 5 और हमारे 25…और हिंदू बोलते हम दो हमारे 2 या पहेला अभी नही और दूसरा कभी नही…अरे मूर्ख!बेटी तो ससुराल चली  जाएगी , बेटा फॉरेन चला जाएगा, आक्सिडेंट में चला जाएगा तो? जो गीता को मानते, रामायण को मानते ऐसे बच्चों को पूरे विश्व को ज़रूरत है..ऐसे बच्चों को तो होने दो….विदेश जाएगा तो डॉलर भेजेगा…फौज में जाएगा तो देश के लिए वफ़ादारी करेगा…
मैने वर्ल्ड रिलिजियस पार्लमेंट  में कहा था की जो गीता को मानते , रामायण को मानते , भारत के संस्कार जिन पर है वो दुनिया के किसी भी देश में हो, 178 देशों में से किसी भी देश में ऐसा भारत की संस्कृतीवाला जाए तो जिस देश का अन्न खाए उस देश में बॉम्ब ब्लास्टिक नहीं कर सकता है…उन दिनों मुम्बई  में बॉम्ब ब्लास्टिक किया था मेमन बंधुओं ने…मैने कहा था की हिंदू संस्कार जिन पर है वो जिस देश का अन्न पानी खाते वहा बॉम्ब ब्लस्टिक नही करते…अगर किया तो बताओ मैं ज़िम्मेदारी लेता हूँ!… ‘एक में सब ; सब में एक’ ऐसी भारतीय संस्कृति है…..भारतीय संस्कृति के दुशमन है जो  हमारे देश में रहेते,  हमारे देश का ही खाते और हमारे ही निर्दोष व्यक्तियों  को धड़ाक से उड़ा देते ..

दशहरे के दिन जप ध्यान करना, दीवाली के दिन जप ध्यान करना…शरद पूनम को खीर खाना , चंद्रमा को देखना और मोका मिले तो चंद्रमा में देखते देखते थोड़ी आँखे बंद करना ,फिर देखना तो देखना की चंद्रमा और बापू की कैसे दोस्ती होती है ! 🙂 
जय जय  श्री राधे !
ओम शान्ति 

श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महाजयजयकार हो!!!!!
ग़लतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे….
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

Behror (Rajsthaan) ; 4Oct.2011

 

Naaraayan hari …naaraayan hari…. hari om.. hari om ..

 

Bhagavaan kahete hai ki manushya tere andar  main hi baithaa hun…tu meraa vanshaj hai…ham pitaa ke vanshaj to hai lekin ham nahin, hamaaraa sharir pitaa maataa ka vanshaj hai….lekin aatmaa to paramaatmaa kaa vanshaj hai…ye sharir pati ka to patni hai,  ye sharir patni kaa to pati hai, lekin aatmaa kisi ki patni nahi hotaa..hoti hai kyaa? Nahin!…

Naathadwaaraa aameth ke bich men ek chhotaasaa gaanv hai….wahaa ek 13 saal ki chhokari ki shaadi ho gayi…ladaki kaa naam thaa phuli… us kaa pati sutaar thaa…shaadi ke baad 6 mahine hote hote vo sutaar to mar gayaa… ladaki to bahot rowe, maathaa kute…chhori chup kare nahi to maayike le aaye…jab bhaagy jor kare to sant milate hai aur punya aur jor kare to sant kaa vachan sunane ko mile hai…paapi aadami sant ke vachan nahin sun sakataa…..jis ke andar men paap baithaa hai , sant ke vachan sun ke us kaa paap us ko bhagaa ke le jaayegaa…agar nahi  bhaagaa to paap akelaa bhaag jaayegaa aur vo vyakti punyaataa ho jaayegaa…aisi satsang ki mahimaa hai… tulasi purv ke paap se hari charchaa naa suhaave…

Jin ke pahele ke paap hai vo kathaa men nahi aa sakate…a a bhi gayaa to sant aate hi vo bhaag jaayegaa…

Paap vant kar sahej swabhaavu l

Raam kathaa te naa bhaav lagaau ll

Paapi ka ye sahaj swabhaav hai ki bhagavaan ki kathaa us ko nahin bhaati…

To phuli baai rowe rowe..to us ko pitaa kisi sant mahaatmaa ke paas le gaye…aur bole ki baapaji ye meri beti hai..shaadi karaayi thi lekin vo bechaari vidhavaa ho gayi….

Are  vidhavaa kaahe ki huyi?

Jagat kaa pati to saath men hai…sharir vidhavaa huaa..baai vidhavaa nahin huyi..to beti tu vidhavaa nahin hai..tu to sadaa suhaagan hai…t eraa pati to hai aatmaa paramaatmaa…. sharir vidhavaa howe to howe… baapaji ne (Sant mahaatmaa ne) phuli baai ko mantr de diyaa..

 

Bole tu ab jagat pati kaa chintan kar, jo teraa antaraatmaa hai… phuli baai garib bahot thi..to gaay bhais rakhate the…

(pujyashri baapuji ne phuli baai ki kathaa sunaayi… phuli baai gobar ke kande banaati ..un ki padosan phuli baai ke kande churaa leti..ek din phuli baai ne bade prem se us bahen ko samajhaayaa ki chori nahi karo chaahiye to puchh kar le jaao…to padosan ne jhagadaa kar ke gaanv ikaththaa kar liya aur gaanv ke pancho ko kahaa ki phuli baai hi mere kande churaati hai…to is par phuli baai ne kahaa ki , maine banaaye huye kande men “ram ram” nahi sunaayi degaa ..aap khud hi jaanch kar lo ki kis ne kis ke kande churaaye hai…pancho ne jaanch ki to padosan ki chori khul gayi aur phuli baai ki jayjaykaar huyi ki kandon men se raam naam sunaayi detaa hai!…  )

Gaanv ke log phuli baai kaa jayjaykaar karane lage..

Phuli baai boli , “meri jay naa bolo ..satsang bhagavaan ki jay bolo !main to vidhavaa ho kar maathaa kut kut kar rone se paagal ho jaati..mere ko satsang bhagavaan milaa aur satsang bhagavaan se guru bhagavaan milaa ; guru bhagavaan se aatm bhagavaan kaa prabhaav hai …meri jay mat bolo..paramaatmaa ki jay bolo..raam raam ki jay! ”

Ram ram ram ram …om om om om om ..shiv shiv shiv shiv shambho bholenaath… haa haa haa haa …

Us paramaatmaa ki jay bolo …us bhagavaan ki jay bolo ..usi men phaayadaa hai…tum boli bahen ki tumane  chori ki isliye panchaayat ke saamane bolaa bahen…bhul chuk ho gayi to maaph kar denaa bahen…

 

Vo bahen to pani pani ho gayi…sochaa ki chor to main thi, aur phuli baai ko chor bol rahi thi..phir bhi phuli baai sab ke saamane mujhe bol rahi bhul chuk maaph kar do…waah re waah phuli baai…tum dhanya ho!…Dhanya hai teri bhakti amar rahe …

Phuli baai roj raat ko sate samay shwaaso shwaas men naam japati thi…shwaas andar jaaye to om baahar aaye to 1…shwaas andar jaaye to raam..shwaas baahr aaye to 2…aise shwaaso shwaas ki maalaa japane jaldi aatmaa paramaatmaa ki jaagruti hoti hai…ishwar ke saath jo shaashwat sambandh hai vo jaldi samajh men aataa hai..jaise baadal hatate to jaldi suraj dikhataa aise hamaaraa antaraatmaa paramaatmaa ke saath judaa hai ..

Naam japat mangal dishaa das l

Daso dishaaon men mangal hotaa hai…phuli baai ko shaanti aanand milataa…gaanv ke logon men kahi jhagadaa ho to phuli baaii ko bulaate..

Kisi ko ghar kaa jhagadaa mitaanaa hai to raat ko sote samay ghar kaa mukhiyaa apane palang ke niche ek lotaa paani ka bhar ke rakhe..phir subah uth ke us jal men dekh kar prarthanaa kare ki hamaare ghar ke jhagade mit jaaye aur vo paani pipal men, tulasi men athavaa kisi ped men yaa aisi jagah ki jahaa kisi kaa pair naa pade aisi jagah daal do….aisaa jo bhi karegaa us ke ghar men sukh shaanti rahegi…

Ghar ke log milakar rasoyi ghar men baith ke bhojan kare…ghar men aur rasode men khadaa namak kaa potaa lagavaaye…aisaa karane se ghar ki negative energy chali jaari hai.. ghar men positive energy badhati hai…ghar men jhagade hote to ghar men negative energy hoti hai…namak kaa potaa lagaane se vo negative energy chali jaati hai….

 

Dashahare ke din binaa muhurat kaa muhurat hotaa hai..4 jagaho par helicopter se jaaungaa aur udghaatan karungaa…khilachipur men school kholi hai, wo samaaj ko arpan karani hai…kapaasiyaa men garibon ke liye makaan banaaye hai…pushkar men vrudhdaashram kholaa hai , us kaa udghaatan karanaa hai..indore se 100 kimi par shaajaapur hai wahaa bhi udghaatan hai…

 

“ud” maanaa bramh…us bramh paramaatmaa ki taraf jaane ke liye karm yog karo to udghaatan ho gayaa..lokaarpan karo to udghaatan huaa..apane swaarth ke liye kare to udghaatan nahin hai, vo to bandhan hai…lekin dusare ke heet ke liye jo kaam karate  hai us ko yagyaarth karam bolate hai  bhagavaan gitaa men…

Yagyaarth karm kauntey…

Hey kunti nandan! manushya ko yagyaarth karm karanaa chaahiye….

Bachche ko janam diyaa..bachchaa badaa ho jaayegaa , mere ko sukh degaa sochate to ye vikaaraarth swaarth huaa…mere ko maa baap ne janam diyaa, maine bhi bachche ko janam diyaa..us kaa paalan poshan kar diyaa..lekin swaarth ke liye ki vo mere ko sukh degaa aisi bhaavanaa se nahi  kiyaa to bachche kaa garbh dhaaran karanaa, prasuti, bachche ko janam denaa, us kaa paalan poshan karanaa ye sabhi yagyaarth hai..jo bhi aap karate  lekin apane swaarth ke liye nahi; maataa pitaa pariwaar ke paalan poshan ke liye…badale men wo ham ko sukh de ye bhaav chhod de to aap ke antarayaami aatmaa kaa sukh pragat hogaa… aap kaa karm yagyaarth ho jaayegaa…karm yog ho jaayegaa…

Bhojan banaate to achchhaa banaaun..jo achhaa lage vo hi khaaun aisaa nahi….kutumb kaa- pati ka pariwaar ka tandurusti achhaa rahe aisaa khaanaa banaave to ye yagyaarth karam ho gayaa…kuchh maayiyaa roti banaati to tavaa jyaadaa garam hogaa athavaa roti ko ghumaayaa nahi to roti ko kaalaa kaalaa daag ho jaataa hai..aisi roti khaane se pet men gais hotaa hai..chhati jalati hai…aisi roti nahi banaaye…tavaa jyaadaa garam ho gayaa to thodaa paani chhitake phir roti senke…satsang men kyaa kyaa gyaan milataa hai ! J

Aaj tak to karate the apane sath gadabadi… ab nahi karanaa…

Hafte men ek din karele ki sabji khaani chaahiye…to dia bitis bhi nahi hogi aur pet bhi achhaa rahegaa…

Holi ke dinon men 20-25 neem ke patte ek kaalaa mirch chabaa ke khaaye aur paani piye to phodi phunsi nahi hoti aur 12 mahine tabiyat thik raheti hai…

11 taarikh ko Sharad poonam ke din khir banaa ke chandramaa ki chaandani men rakh ke , thodaa bhog lagaa ke phir khaaye…bhojan nahi banaaye…sharad poonam ki raat chandramaa ke kiran bal pradaan karate hai, aarogya pradaan karate..

8 taarikh se chandramaa ko dekhanaa aur aankhe phatphataanaa…(aankhe jaldi jaldi kholo band karo)…to aankhon ki roshani badhegi….

kayiyon ke munh men chhaale hote hai…kayiyon ki aankhe jalati hai…to chandramaa ko dekhanaa…8, 9, 10 aur 11 taarikh aise 4 din roj dekhanaa…

aankho ki jalan men aaraam ho jaayegaa…munh ke chhalon men aaraam ho jaayegaa…

jis ko 12 mahine munh men chhaale rahete, raat ko 12 baje nind tut jaati hai to un ke sharir men pitt hai..pitt ke kaaran jalan hoti hai , gussaa aataa hai, maasik adhik aataa hai…phodi phunasi hotaa hai..aise logon ko kyaa karanaa chaahiye ki 100 graam aanwale kaa churn + 100 graam dhaniye kaa powder + 100 graam badisauf + 100 graam mishri ye chaaron milaa diyaa aur roj subah 10-12 graam  subah 1-2 ghantaa pahele bhigaa diyaa , phir masal ke pi liyaa to sharir men jo bhi garami hai nikal jaayegi…aur nind achhi aayegi…

bhojan kare to pet par aise haath ghumaave (anti clock wise ghadi chalati us ki viparit dishaa men)  aur agastya rishi, kumbhakarn, shami, vadawaanal in ko sumiran kar ke prarthanaa karen ki meraa paachan thik howe…

subah subah suraj ke kiran pade naabhi pe, sharir pe to khun badhegaa…sharir aise pile pile kamajor nahi howe.. doctoron ke chakkar men davaayi bhi jyaadaa nahi khaayen…ye doctor vo doctor karate…vo bhi nukasaan karegi…doctor kaa doctor bhagavaan hai …..bhagavaan kaa naam le..hey raam hey naaraayan…sharir par  sury naaraayan ke kiran pade…tanadurusti achhi rahegi…phir  hey raam ..hey govind…hey maadhav aisaa karo..hari om om om om dono haathon se taaliyaa bajaate huye bolate bolate haath unchaa kar ke hanse ….aisa din men 2-4 baar karo to khun badhegaa…ghar men khushi badhegi..jhagade mit jaayenge…

hey prabhu aanand daataa   ye  praarthanaa roj ghar men kare… kisi se kisi ki nindaa  naa kare..

bachapan badal gayaa, bachapan ki budhdi badal gayi..lekin us ko jaananewaalaa bhagavaan nahi badalaa…vo sadaa apane saath men hai… bachapan kaa sharir abhi nahi hai…7 saal men to haddiyaan bhi badal jaate..har roj kuchh nayaa khaate , roj subah mal nikalataa to roj kayi kan badal jaate…phir bhi jo nahin badalataa usi kaa naam hai bhagavaan…vo bhagavaan param dayaalu hai..param hiteshi hai…suhurd hai ..aur shaktimaan hai…usi antaryaami bhagavaan ne hamaari naabhi hamaari maa ke jer se jod di thi..ham jab ma aki god men aaye to dudh ham ne nahi banaayaa ….jisane banaayaa vo hi bhagavaan hai…dudh bhi kaisaa?jyadaa garam nahi, jyaadaa thandaa nahi, jyaadaa mithaa nahi, juthaa nahi maanaa jaataa, fridge nahi karanaa padataa, khattaa nahi hotaa….hey bhagavaan teri kaisi lila hai!…bhagavaan antaryaami hai..achhhaa kaam karate to hamaare hruday men bal dete ho…charaparaa kaam karate to hruday ki dhadakane badhaate ho..hey bhagavaan tum hamaare suhurd ho….

raat ko sote samay  bhagavaan ko apanaa aur apane ko bhagavaan kaa maan ke bhagavaan ke prem purvak praarthanaa kare ki ham ko sharan men lo…

rijhe jab raghunaath tab devayi saadhu sangati…

bhagavaan tumhaaraa kitanaa mangal chaahate hai…

naaraayan naaraayan naaraayan naaraayan..

vo bhagavaan hamaare antaraatmaa hai…bachapan badalaa, jawaani badal, sab kuchh badalaa lekin bhagavaan badalaa kyaa? Nahin badalaa…to aap bol denaa bhagavaan ab tumhaaraa address mil gayaa hai … beti to daamaad ki deposit hai, betaa bahu ka hai, sharir samshaan ki deposit hai..lekin bhagavaan aap mere aur mai aap kaa aisaa jaise maa ki saadi kaa  bachchaa pallaa pakad le aise bhagavaan ko rijhaao…jo bhagavaan andar hai vo baahar bhi hai..jaise krushn bhagavaan yashodaa maiyyaa ko rijhaate aise kare…yashodaa maanaa kyaa? Jo budhdi bhagavaan ko yash de…waah prabhu jo tu karataa hai achhaa karataa hai…waah waah …jo bhagavaan ko yash denewaali budhdi hai vo yashodaa hai….aur jo budhdi bhagavaan men priti kare vo budhdi ritambharaa pragyaa ho jaati hai…yashomati budhdi ko hi ritambharaa pragyaa bolate..to jaise 2 sarovar kaa paal tut  jaaye to 2 sarovar kaa paani ek ho jaataa hai aise aap bhagavaan ko priti karo to aap ke “main” kaa paal toot jaayegaa to jivaatmaa paramaatmaa ek ras ho jaate hai..yahi jeevan kaa saar hai !

ghar men, pariwaar men ek dusare ko pyaar se samajhaa kar ghar ke jhagade mitaao…patni maa ki nindaa naa kare isliye pati samajhaaye , jethaani deraani ki nindaa naa kare isliye jeth samajhaaye..deraani jethaani ki nindaa naa kare..nanand bhaabhi ki nindaa naa kare, bhaabhi hai to nanand ki nindaa naa karo….saasu ko kosegi to teri bahu bhi tere ko kosegi..isliye saasu kaa aadar karo..jo badon kaa aadar karataa hai, badon ki sewaa karataa hai , us kaa bhaagy badaa ho jaataa hai …jo badon ko sataataa hai , un ki sewaa nahi karataa un ko phir jawaani men, budhaape men ashaanti hoti hai…

 

jo badon ki, santon ki , budhe bujurgon ki sewaa karate un kaa aayu, yash, bal aur budhdi badhati hai…

 

bade men bade to mere bhagavaan hai…tum mere antaraatmaa ho..shabari ke raam ho…bhakton ke bhagavaan ho..tum anek rupon men ho prabhuji…aisaa priti purvak bhagavaan kaa sumiran kare…paschim ki taraf seer kae ke soyenge to chintaa pichhaa nahi chhodegi..uttar ke taraf seer kar ke soyenge to bimaari aur akaal mrutyu kaa khataraa rahegaa…purab ki taraf yaa to dakshin ki taraf seer kar ke hi sonaa chaahiye…

 

jab bhi koyi mahilaa maa bananewaali  ho to doctor bolegaa bachchaa kamjor hai..garbhapaat karaa do.. kidany kharaab hai , groth nahi hai ..aisaa kuchh bhi daraa daraa hinduon ke bachche maarane ki  gandi raaj niti chal rahi hai videshi shaktiyon ki … hinduon ki sankhyaa  alp ho athavaa hinduon ke bachche buddu ho isliye hinduon ke desh men bachchon ko, bachchiyon ko hast-maithun karane kaa school aur collegon men prachaar ho rahaa hai..

hast-maithun karane se bachche bachchiyaan nistej hote hai…abhi obaamaa ko aur bill clintan ko chintaa thi ki bhaarat ke 60 % log amerikaa men badi badi padon pe hai..amerikaa ke log pichhad gaye..ab amerikaa kar rahaa hai yaa koyi dusaraa desh kar rahaa hai , lekin hai to ye international saajish ke bhaarat kamajor ho..bhaarat andar hi andar lade….bhaarat ke padosi desh aur bhaarat bhidate rahe…ye saari kut-niti hai..aur us se bhi gandi niti hai ham 5 aur hamaare 25…aur hindu bolate ham do hamaare 2 yaa pahelaa abhi nahi aur dusaraa kabhi nahi…are murkh!beti to sasuraal chalaa jaayegaa, beta foren chalaa jaayegaa, accident men chalaa jaayegaa to? Jo gitaa ko maanate, raamaayan ko maanate aise bachchon ko pure vishw ko jarurat hai..aise bachchon ko to hone do….videsh jaayegaa to dollar bhejegaa…fauj men jaayegaa to desh ke liye wafaadaari karegaa…

maine world religious parlment men kahaa thaa ki jo gitaa ko maanate , raamaayan ko maanate , bhaarat ke sanskaar jin par hai vo duniyaa ke kisi bhi desh men ho, 178 deshon men se kisi bhi desh men aisaa bhaarat ki sanskrutiwaalaa jaaye to jis desh kaa ann khaaye us desh men bomb blaastik nahin kar sakataa hai…un dinon bombay men bomb blaastik kiyaa thaa memon bandhuon ne…maine kahaa thaa ki hindu sanskaar jin par hai vo jis desh kaa ann paani khaate wahaa bomb blastik nahi karate…agar kiyaa to bataao main jimmedaari letaa hun!… ‘ek men sab ; sab men ek’ aisi bhaaratiy sanskruti hai..jo hamaare desh men rahete,  hamaare desh kaa hi khaate aur hamaare hi nirdosh vyaktiyon  ko dhadaak se udaa dete ..

dashhare ke din jap dhyaan karanaa, diwaali ke din jap dhyaan karanaa…sharad poonam ko khir khaanaa , chandramaa ko dekhanaa aur mokaa mile to chandramaa men dekhate dekhate thodi aankhe band karanaa ,phir dekhanaa to dekhanaa ki chandramaa aur Bapu ki kaise dosti hoti hai !  🙂 

jay jay shri raadhe !

OM SHAANTI.

 

SHRI SADGURUDEV JI BHAGAVAAN KI MAHAAJAYAJAYKAAR HO!!!!!

Galatiyon ke liye Prabhuji kshamaa kare….

 


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2 Comments on “international saajish se bhaarat kamajor nahi ho..”

  1. Aadi Says:

    Awesome,,,simply awesome,,,!!!

  2. BHARAT PARTY Says:

    very good article


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