आत्मसाक्षात्कार दिवस सत्संग अमृत

हरिद्वार ; 29 सप्टेम्बर 2011 

(पूज्यश्री बापूजी  जब घर पर थे तब रोज नियम से शिव जी के मंदिर जाते..एक दिन उन्हो ने देखा की  रास्ते में कोई व्यक्ति मूर्छित पड़ी हुई थी… पूज्यश्री बापूजी ने उस व्यक्ति को मदद की, उस को खिलाया पिलाया…उस को घर ले गये…उम्मीद बढाई, धाडस बंधाया …और 2-3 दिन का खाना और पैसे दे कर उस को उचित स्थान पर भेजा…)

“आज मेरी पूजा हो गयी बेटे !आज मेरी पूजा हो गयी….”

मैने कहा,  “कौन बोल रहे हो?”

बोले,  “वो ही जिस को तुम रोज जल और दूध चढ़ाते हो ना वो मैं शिव जी बोल रहा हूँ….”

मैने कहा,  “महाराज आप कैसे बोल रहे हो?”

मुझे कोई आकृति दिखी ये बात नही है; भीतर से ही आवाज़ आई…. “मैं  बोल रहा हूँ!अब तुम घर में नही रहोगे…अब तुम साधु बन जाओगे…आज तुम्हारी पूजा सफल हो गयी !” 

🙂  बार बार अकेले में यही आवाज़ आए…  “मैं वोही शिव बोल रहा हूँ जिस की तुम पूजा करते हो…”

कुछ  दिन के बाद ऐसा चक्र चला की घर से भागा भागी हुई , शादी का चक्र चला ..कुलमिला के शादी का चक्र पूरा हुआ..  लेकिन कही रुकने नही दिया उस देव ने…. हम अपने बल से घर छोड़ के बापू बने इस बात में कोई दम नही है …  🙂  .. सच्ची बात ये बताता हूँ… मैं अपने बल से गुरु को रिझाया अथवा आत्म साक्षात्कार किया इस बात में हमारा कोई आर्ग्युमेंट  नही, आरज़ू नही, जुस्तजूं  नही है….

ये तो बस गुरु की कृपा रही..भगवान की कृपा रही…

सो जाने जासू देव ही जना ही l  

जानत तुम ही , तुम ही हो जाई ll

जिस का वो परमेश्वर वरण करता है ..जिस पर वो देव रिझता है ..हमारे कोई सत्कर्म , कोई सेवा..ना जाने कौन सी बात उस अंतर्यामी द्रष्टा को जँच जाती है …हम उन को जँच जाते है तो वो हमारा हाथ पकड़ के ले जाते है …. ऐसी ऐसी जगहो पर ऐसी ऐसी प्रेरणा और चमत्कार  देखे की उस का वर्णन करेंगे तो बाबा फिर अपन भाव-विभोर हो जाएँगे… आप इतने देश विदेशों से लोग टिकटिकी  लगा के देख रहे हो आप को लगेगा की बापू को क्या हो गया…. इसलिए मन को ज़रा  इधर नीचे लाकर वर्णन  कर रहे है…

एक बार तो दौड़ के पहुँचे गाड़ी में की गुरु की खोज करते कराते नैनीताल पहुँचे… आज आएँगे कल आएँगे ऐसे करते करते 25-30 दिन बीत गये फिर मेरे गुरुदेव आए…जिन को मैने हृदय से गुरुदेव मान लिया था… तो वहा भी महाराज जो सीनियर जूनियर का होता है ऐसा था… आज कल का आया घर छोड़ के बोलते ..पूछते – घर में कौन कौन है? 2 भाई है.. मां है …बहेनों  की शादी हो गयी…छोटी बहेन की भी शादी हो गयी…मेरी भी उन्हों ने शादी करा दी लेकिन मैं तो भाग के आ गया हूँ उस (मेरी मां  की बहू ) को समझा बुझा के … मेरे गुरुजी तो दूर द्रष्टा थे लेकिन बाकी नही..तो गुरुजी को बोलते की समाज में कितनी बदनामी होगी की शादीशुदा एक लड़का औरत छोड़  के इधर आके रहे..नाम खराब होगा …आदि क्या का क्या वो बोलते रहेते थे… गुरुजी का मेरे उपर विशेष कृपा रही,प्रेम रहा … तो उन को लगा की हम तो इतने पुराने और ये आज कल का आया छोरा  और आज ही शास्त्र पढ़ने दे दिया साई जी ने ..आज ही उस के द्वारा  चिठ्ठियाँ लिखाने लग गये…  …

जो भी काम आता वो मेरे हवाले करते..गुरुजी तो मेरे से पढ़ने और सत्संग  करवाते …लेकिन जो भगाने वाले थे वो मेरे से पानी की सेवा करवाते, बर्तन माँजने की सेवा करवाते …सब्जिया ले आओ आदि ऐसा काम थोपते  की ना चाहे तो भी हम भाग जाए ! 🙂 

ऐसी उन की बड़ी कृपा रही …विरोधी भी बड़ी कृपा करते … हम ईश्वर की तरफ जाए और जितना विरोध हो वो विरोधियों की कृपा माननी चाहिए… आग्रे के कुछ  लोग आए थे तो उन्हो ने ख्वाहिश की की हमें चाइना पीक देखने जाना है …

(गुरु आज्ञा  को शिरोधार्य करने से शिष्य का कैसे परम कल्याण होता है ये पूज्यश्री बापूजी के संस्मरण से निवेदित है : कृपया लिंक देखिए :  http://wp.me/P6Ntr-Mb  )

 

गुरुदेव बोले :  “पिउ ! … जो गुरु की आज्ञा मानता है , फिर प्रकृति भी उस की आज्ञा मानेगी!”

मैने सुना तो मेरी तो झोली भर गयी!..ऐसी भर गयी की झोले से बाहर ओवरफ्लो हो रहा है ! 🙂 

 …सर्प विषैले प्यार से वश में बाबा तेरे  आगे …..

आप तो सब जानते ही है..

इस में मेरा कुछ भी नही है..ये भगवान अंतर्यामी ईश्वर की गुरु की ऐसी ऐसी  कृपा है ….की ऐसा ऐसा कुछ  हम ने देखा, अनुभव किया की वो  वाणी में ही नही आ सकता …. मैं बयान नही कर सकता…ऐसी घटनाएँ देखी..ऐसे ऐसे चमत्कार देखे…

अबू की नल गुफा में ऐसे साप होते की उस की फूँक भी लगे तो कुछ  का कुछ  हो जाए….मैं प्राइमस पे कुछ  बनाता तो उस के नीचे साप छुपा है लेकिन काटे नही… एक बार तो हम ओम ओम करते घूम रहे थे तो सांप   पर रबर की चप्पल के साथ पैर पड  गया अंधेरे में दिखा नही तो… फूं किया…अर्रे s कर के मैं हट गया…फिर वो ही साप मेरी गुफा में आता था..लेकिन कभी काटा नही ! क्या उस की उदारता रही !! अब इतना मेरा वजन..और साप की गोलाई पर बीचोबीच मेरा पैर पड़ा चप्पल के साथ..उस को पीड़ा हुई तो फूं किया …2 दिन के बाद उसी को हम ने हमारी गुफा में देखा लेकिन काटा नही उस ने…

ऐसे रीछ …पहेले तो गुफा में गये तो रीछ  की आवाज़ सुन के ज़रा डर लगा ..तो छोटा मोटा  डेढ़ बाइ अढाई  का जो भी दरवाजा था ..झुक को जाना पड़ता था ..उस दरवाजे को बराबर खूटी लगाई …फिर सोचा की रीछ से डरते तो मौत आएगी तो क्या होगा? डर ही को तो भगाना है …उपनिषदों का शास्त्रों का वचन है की :

अभयं सत्व संशुध्दी ..

हम तो अभी डर रहे …मृत्यु आएगी तो शरीर की होगी तो फिर भय किस बात का? फिर कुण्डा खोल कर ही रात सोते थे.. पहाड़ों में जो गुफा होती है वो ऐसी ही होती है की मुक्का मारो तो दरवाजा उस पार… फिर रात को 2-3 बजे गुफा के पास से आवाज़ आया रिच्छ का तो मैने कहा चलो भाई रिच्छ के पास…देखो क्या होता है…सुना था की जंगलों में माइया लकड़िया इकठ्ठा करने जाती तो रीछ खड़ा होकर हमला करता है …और कई लोग मार गये ये सुना भी था…मैने कहा की अब देखते है की क्या उस की मर्ज़ी है..गये तो हम ने उस को देखा , उस ने हम को देखा… कुछ  नही किया…अभी तक ज़िंदा हूँ ! 🙂 

तो ऐसी कई घटनाएँ है … फिर डीसा में गुरुजी ने आज्ञा दी तो गये… तो डीसा में  बनास नदी के किनारे एक कुटीर थी…… 

झोपड़पट्टी के बीच ही किसी ने कमरा बना दिया था..वो कहानी अलग है..तो फिर उस के विरोधियों ने बोला की ये कार्पोरेटर ज़मीन हड़प करने के लिए कब्जा करता है तो फिर उस ने सोचा की मेरे उपर मुसीबत आएगी तो लिख दिया की साईं लीलशाह बापू कुटीर.. तो फिर आया की कोई साधक को भेजो…. तो भाई जानो ने हम को  धड़क दे दी की साईँ ये नया साधक ये ठीक रहेगा.. साईँ ने आज्ञा कर दी ..तो हम गये…  कुटीर भी ऐसी जगह की चारों तरफ बस्ती… झोपड़पट्टी  ..कोलाहल दिन-रात…. ऐसी जगह की एक दिन भी हम रहे ना सके….हम को नर्मदा किनारे हमारे परिचित  संत ने गुफा दिलाई थी वो बहोत बढ़िया थी…तो मैने गुरुजी को चिठ्ठी लिखी की हम यहा तो रहे नही सकेंगे ..बहोत शोरगुल है … हम ने गुरुजी को पत्र लिखा की आप की आज्ञा के अनुसार इधर 5-7 दिन हो गया…मेरी गुफा वहा है..आप आज्ञा दे तो मैं वहा चला जाऊं?…

वहा बाथरूम आदि कुछ नही..लोटा लेके झोपड़पट्टी के बस्ती वाले जैसे जाते वैसे जाना होता था…. झोपड़पट्टी  की  जमात  जहा बैठती है उसी जमात में जाना होता था.. 

गुरुजी को लिखा की : दिन भर गालियों की आवाज़ आती है ध्यान भजन में भी विघ्न होता है…

गुरुजी बोले : गालियाँ तो आकाश में चली गयी..तुम्हारा क्या?

हम ने कहा : वो दीवारों पर गालियां  लिख के जाते है…

गुरुजी बोले : लिख के जाए तो क्या है?

हम ने चिठ्ठी में लिखा : रात भर कुत्ते भोँकते है..

गुरुजी ने लिखा : कुत्ते भोँकते तो ओम ओम बोलते ऐसा सोचा कर….

हम बोलते : जो आज्ञा !…

ऐसे करते करते 7 साल गुरुजी के आज्ञा से वही रहे…!

ऐसा पक्का बना दिया महाराज की अब तो भीड़ भाड़ हो तो भी तू ही है..एकांत हो तो भी तू ही है…नाच हो तो तू ही है, गान हो तो तू ही है… जीवन है तो तू ही है, मृत्यु  है तो तू ही है.. तेरे सिवा कुछ था ही नही, है नही , हो सकता नही.. ये भ्रम है की हमें एकांत चाहिए अथवा हमें ये चाहिए, वो चाहिए..चाह मात्र ही बेवकूफी थी..

चाह चमारी तूहरी, अती नीचन की नीच l

तू तो पूरण ब्रम्‍ह था, जो चाह ना होती बीच ll

 

दिन भर कुटीर में रहेते फिर शाम को बनास नदी के किनारे चले जाते ..खूब मस्ती से खेलते कूदते नाचते…एकांत की मस्ती होती थी..उछल कूद होती थी खूब….कभी इधर को चल देते तो कभी उधर को… एक बार देखा की अंधेरी रात में कही आग जल रही है तो उधर चल दिए..  गुजरात में दारू बंदी थी…अपराधी लोग चोरीछुपे दारू बना रहे थे..मैं वहा ही  चला गया…उन की मेरे पर नज़र पड़ी की देर रात को कौन इधर आ गया तो शेर – 2 शेर – 4 शेर की बड़ी बड़ी गालियाँ दी…  🙂  ..बोले इधर आओ… गया तो उठा के रख दिया मेरे गले पर धारिया …. धारिया उस को बोलते की ज़रा सा पेड़ को यूँ घुमाते पेड़ की डाल को तो नीचे आ जाए …ऐसा तेज होता है वो हथियार की 4 फीट की लठ्ठ होती और डेढ़ फीट का लोहे का लंबा धारिया चमचमाता होता है..तलवार कुछ नही उस के आगे … 

और गाली सुना के बोला, “खेंचू?”

मैने कहा : “तेरी मर्ज़ी पूरण हो!”

तो वो ज़रा सा यूँ करे तो भी जैसे चाकू से आलू की चिप्स कटती उस से भी कम मेहनत में गर्दन नीचे आ जावे ऐसा हथियार.. पेड़ को मारे तो लकड़ी का डाल गिर जाए..कुल्हाड़ी से बहोत लंबा चौड़ा होता है धारिया, कुल्हाड़ी तो एक टुकड़ा काटे , एक को छोड़ देवे… लेकिन धारिया तो एक बार खेंचे  तो गर्दन को धड़ से अलग कर देवे…

तो बोला, “खेंचू?”

मैने कहा :  “तेरी मर्ज़ी पूरण हो!”

 🙂   तेरी मर्ज़ी माना वो नियंता की मर्ज़ी !!.. उस के हाथ कापें..धारिया कहीं पड़ा.. और वो मेरे पैरों में गिर पड़ा…..

बोले : “बापजी माफ़ करना …आप  तो महाराज हो” ….

ऐसे तो कई अनुभव है…

सुना था की जो नर्मदा किनारे तपस्या करता है नर्मदा जी  प्रगट हो कर उन को दर्शन देती है…चलो अब ये भी कर ले…उस समय बहोत  उछल  कूद थी तो ये करो वो करो… 🙂  .. हनुमान जी की सिध्दी का मंत्र भी है की हनुमान जी प्रगट होते… 🙂 


हरि ओम… नारायण हरि..परमात्मने हरि..

दिल का हाल सुना दिया और क्या? 🙂 

आज साक्षात्कार दिवस है तो क्या कोई धड़ाका भिडाका नहीं होता… ऐसा नही की  हम कोई 4 हाथ वाले भगवान बन जाएँगे ! 🙂  .. या फिर बढ़िया कपड़ा पहेन लेंगे ऐसा नही … 🙂   वो ही रिदम चलता है …

उत्सव जीव के लिए होता है… ब्रम्‍ह के लिए अथवा ब्रम्‍ह वेत्ता के लिए उत्सव नही है… सारे उत्सव , पर्व, तप ये सारे जीव के लिए है… आत्म साक्षात्कार वाले के लिए कुछ नही ..मौज !

लाख चोरासी के चक्कर से थका

खोली कमर तो अब रहा आराम पाना

काम क्या बाकी रहा?

जानना था सो ही जाना

काम क्या बाकी रहा?

लग गया पूरा निशाना 

काम क्या बाकी रहा?

देह की प्रारब्ध से मिलता है सब को सब कुछ 

नाहक जग को रिझाना ..

काम क्या बाकी रहा?

समय आवे तथु जाशे

प्रभु तू करतार छे न्यारो

करू हूँ हूँ के बधू शाने

नाती कोई ने काई कहेऊू

समझी ने स्वरूप मा रहेऊू

अनुभवे  ने एटला आनंद मा रहेऊू

आत्मा ना ज्ञान सिवाय काय नाती कहेऊू

सुख दुख आवे तो वीरा सही लेवु रे

अनुभवे रे एटला आनंद मा रहेऊू रे..

 

ग्यानी आत्मा परमात्मा का आनंद स्वभाव में रहेता है… आनंद में ही लीन  हो जाएगा… उस का फिर पुनर्गमन नही होता…

तपस्वी का पुनर्गमन होगा..जिस को देह में “मैं पना” है उस का पुनर्गमन होता है… जिस को आत्म ब्रम्‍ह में साक्षात्कार हो गया उस का पुनर्गमन नही होता… फिर ब्रम्‍हा हो के वो ही सृष्टि करता है..विष्णु हो के वो ही पालन करता है …शिव हो कर वो ही संहार करता है …

और जीव हो कर वो ही संसार में सुखी दुखी होने की लीला करता है ….

ऐसा उस को अनुभव हो जाएगा..

और ग्यानी को ऐसा भी नही होता की चलो हम मुक्त है , ये बंधन में है ऐसा भी नही होता…

नारायण हरी …

उड़ीसा में बाढ़ ग्रस्तो को भोजन तो दे रहे है लेकिन और भी चीज़ो की ज़रूरत तो होती है…तो उन को कपड़े आदि जीवन आवश्यक वस्तुओं की कीट बना कर देंगे… स्वामी विवेकानंद का हृदय पासिजता था की रुग्ण व्यक्ति और ग़रीबों के लिए, दुखी व्यक्यियों के लिए की आश्रम आदि बेच कर भी उन के काम आवे ..अभी भी उन के सेवा कार्य चल रहे है… ज्ञान  प्रैक्टिकल  होना चाहिए ! व्यावहारिक ज्ञान होना चाहिए…


ॐ शांती.


श्री सदगुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो !!!!!

गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करें ….. 

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

Haridwaar , 29th Sept2011

(Pujyashri Baapuji  jab ghar par the tab roj niyam se shiv ji ke mandir jaate..ek din unho ne dekhaa ki  raaste men koyi vyakti murchhit padi huyi thi… pujyashri bapuji ne us vyakti ko madad ki, us ko khilaayaa pilaayaa…us ko ghar le gaye…ummid badhaayi, dhaadas bandhaayaa…aur 2-3 din kaa khaanaa aur paise de kar us ko uchit sthaan par bhejaa…)

“Aaj meri pujaa ho gayi bete !aaj meri pujaa ho gayi….”

Maine kahaa,  “kaun bol rahe ho?”

Bole,  “vo hi jis ko tum roj jal aur dudh chaadhaate ho naa vo mai shiv ji bol rahaa hun….”

Maine kahaa,  “mahaaraaj aap kaise bol rahe ho?”

Mujhe koyi aakruti dikhi ye baat nahi hai; bhitar se hi aawaaj aayi…. “mai bol rahaa hun!ab tum ghar men nahi rahoge…ab tum saadhu ban jaaoge…aaj tumhaari pujaa saphal ho gayi !”  

🙂  baar baar akele men yahi aawaaj aaye…  “main wohi shiv bol rahaa hun jis ki tum pujaa karate ho…”

Kuchh din ke baad aisaa chakr chalaa ki ghar se bhaagaa bhaagi huyi , shaadi ka chakr chalaa ..kulmilaa ke shaadi ka chakr puraa huaa..  lekin kahi rukane nahi diyaa us dev ne…. ham apane bal se ghar chhod ke baapu bane is baat men koyi dam nahi hai … 🙂   .. sachchi baat ye bataataa hun… main apane bal se guru ko rijhaayaa athavaa aatm saakshaatkaar kiyaa is baat men hamaaraa koyi aargument nahi, aarazoo nahi, justaju nahi hai….

Ye to bas guru ki krupaa rahi..bhagavaan ki krupaa rahi…

So jaane jaasu dev hi janaa hi

Jaanat tum hi , tum hi ho jaaii

Jis kaa vo parameshwar varan karataa hai ..jis par vo dev rijhataa hai ..hamaare koyi satkarm , koyi sewaa..naa jaane kaun si baat us antaryaami drashtaa ko janch jaati hai …ham un ko janch jaate hai to vo hamaaraa haath pakad ke le jaate hai …. aisi aisi jagaho par aisi aisi preranaa aur chamatkaar  dekhe ki us ka varnan karenge to baabaa phir apan bhaav-vibhor ho jaayenge… aap itane desh videshon se log tiktike lagaa ke dekh rahe ho aap ko lagegaa ki baapu ko kyaa ho gayaa…. isliye man ko jaraa  idhar niche laakar vranan kar rahe hai…

Ek baar to daud ke pahunche gaadi men ki guru ki khoj karate karaate nainitaal pahunche… aaj aayenge aayenge aise karate karate 25-30 din bit gaye phir mere gurudev aaye…jin ko maine hruday se gurudev maan liyaa thaa… to wahaa bhi mahaaraaj jo senior junior kaa hotaa hai aisaa thaa… aaj kal kaa aayaa ghar chhod ke ..ghar men kaun kaun hai? 2 bhaai hai.. maa hai …bahenon ki shaadi ho gayi…chhoti bahen ki bhi shaadi ho gayi…meri bhi unhon ne shaadi karaa di lekin main to bhaag ke aa gayaa hun us (meri maa ki bahu ) ko samajhaa bujhaa ke … mere guruji to dur drashtaa the lekin baaki nahi..to guruji ko bolate ki samaaj men kitani badanaami hogi ki shaadishudaa ek ladakaa aurat chhod ke idhar aake rahe..naam kharaab hogaa …aadi kyaa kaa kyaa vo bolate rahete the… guruji kaa mere upar vishesh krupaa rahi,prem rahaa … to un ko lagaa ki ham to itane puraane aur ye aaj kal kaa aayaa chhoraa aur aaj hi shaastr padhane de diyaa saai ji ne ..aaj hi us ke dwaaraa  chiththiyaa  likhaane lag gaye…  …

Jo bhi kaam aataa vo mere hawaale karate..guruji to mere se padhane aur satsang  kaakarawaate …lekin jo bhagaane waale the vo mere se paani ki sewaa karavaate, bartan maanjane ki sewaa karawaate …sabjiyaa le aao aadi aisaa kaam thopate  ki naa chaahe to bhi ham bhaag jaaye ! 🙂 

Aisi un ki badi krupaa rahi …virodhi bhi badi krupaa karate … ham iishwar ki taraf jaaye aur jitanaa virodh ho vo virodhiyon ki krupaa maanani chaahiye…  aagre ke kuchh log aaye the to unho ne khwaahish ki ki hamen chaainaa peak dekhane jaanaa hai …

(guru aagyaa ko shirodhaary karane se shishy ka kaise param kalyaan hotaa hai ye Pujyashri Bapuji ke sansmaran se nivedit hai : krupayaa link dekhiye :  http://wp.me/P6Ntr-Mb   )

Gurudev bole :  “piu ! … Jo guru ki aagyaa maanataa hai , phir prakruti bhi us ki aagyaa maanegi!”

Maine to sunaa to meri to jholi bhar gayi!..aisi bhar gayi ki jhole se bahi overflow ho rahaa hai ! J

 …sarp vishaile pyaar se vash men baabaa tere  aage…

Aap to sab jaante hi hai..

Is men meraa kuchh bhi nahi hai..ye bhagavaan antaryaami iishwar ki guru ki aisi aisi  krupaa hai ….ki aisaa aisaa kuchh ham ne dekhaa, anubhav kiyaa ki wo  vaani men hi nahi aa sakataa …. main bayaan nahi kar sakataa…aisi ghatanaayen dekhi..aise aise chamatkaar dekhe…

Abu ki nal guphaa men aise saap hote ki us ki phunk bhi lage to kuchh ka kuchh ho jaaye….main praaimas pe kuchh banaataa to us ke niche saap chhupaa hai lekin kaate nahi… ek baar to ham om om karate ghum rahe the to  us par rabar ki chappal ke sath pair pad gayaa andhere men dikhaa nahi to… phun kiyaa…arre kar ke main hat gayaa…phir vo hi saap meri guphaa men aataa thaa..lekin kabhi kaataa nahi ! kyaa us ki udaarataa rahi !! ab itanaa meraa vajan..aur saap ki golaayi par bichobich meraa pair padaa chappal ke sath..us ko pidaa huyi to phun kiyaa …2 din ke baad usi ko ham ne hamaari guphaa men dekhaa lekin kaataa nahi us ne…

Aise richh…pahele to guphaa men gaye to richh ki aawaaj sun ke jaraa dar lagaa ..to chhotaa motaa  dedh by adhaayi kaa jo bhi darwaajaa thaa ..jhuk ke jaanaa padataa thaa ..us darwaaje ko baraabar khuti lagaayi …phir sochaa ki richh se darate to maut aayegi to kyaa hogaa? Dar hi ko to bhagaanaa hai …upnishadon kaa shaasron kaa vachan hai ki :

Abhayam satv sanshudhdi..

Ham to abhi dar rahe …mrutyu aayegi to sharir ki hogi to phir bhay kis baat kaa? Phir kundaa khol kar hi raat sote the.. pahaadon men jo guphaa hoti hai wo aisi hi hoti hai ki mukkaa maaro to darwaajaa us paar… phir raat ko 2-3 baje guphaa ke paas se aawaaj aayaa richh kaa to maine kahaa chalo bhaai richh ke paas…dekho kyaa hotaa hai…sunaa thaa ki jangalon men maayiyaa lakadiyaa ikaththaa karane jaati khadaa hokar hamalaa karataa hai …aur kayi log mar gaye ye sunaa bhi thaa…maine kahaa ki ab dekhate hai ki kyaa us ki marji hai..gaye to ham ne us ko dekhaa , us ne ham ko dekhaa… kuchh nahi kiyaa…abhi tak jindaa hun !  🙂 

To aisi kayi ghatanaayen hai … phir disaa men guruji ne aagyaa di to diaa men gaye… to wahaa banaas nadi ke kinaare ek kutir thi…… ham ko narmadaa kinaare hamaare parichit  sant ne guphaa dilaayi thi vo bahot badhiyaa thi…to maine guruji ko chiththi likhi ki ham yahaa to rahe nahi sakenge ..bahot shorgul hai …

Jhopadpatti ke bich hi kisi ne kamaraa banaa diyaa thaa..vo kahaani alag hai..to phir us ke virodhiyon ne bolaa ki ye carporetar jamin hadap karane ke liye kabjaa karataa hai to phir us ne sochaa ki mere upar musibat aayegi to likh diyaa ki saaii lilashaah baapu kutir.. to phir aayaa ki koyi saadhak ko bhejo…. to bhaai jaano ne aagyaa de di ki saaii ye nayaa saadhak ye thik rahegaa.. saaii ne aagyaa kar di to ham gaye…  kutir bhi aisi jagah ki chaaron taraf basti… jhpadaptti..kolaahal din-raat…. aisi jagah ki ek din bhi ham rahe naa sake…. to ham ne guruji ko patra likhaa ki apa ki aagyaa ke anusaar idhar 5-7 din ho gayaa…meri guphaa wahaa hai..aap aagyaa de to main wahaa chalaa jaaun?…

Wahaa baathroom aadi kuchh nahi..lotaa leke jhopadapatti ke basti waale jaise jaate waise jaanaa hotaa thaa…. phopadpatti ki jamaat jahaa baithati hai usi jamaat men jaanaa hotaa thaa.. guruji ko  kahaa ke

Din bhar gaaliyon ki aawaaj aati hai dhyaan bhajan men bhi vighn hotaa hai…

Guruji bole : gaaliyaan to aakaash men chali gayi..tumhaaraa kya?

Ham ne kahaa : vo diwaaron par gaaliyaa likh ke jaate hai…

Guruji bole : likh ke jaaye to kyaa hai?

Ham ne chiththi men likhaa : raat bhar kutte bhonkate hai..

Guruji ne likhaa : kutte bhonkate to om om bolate aisaa sochaa kar….

Ham bolate : jo aagyaa…

Aise karate karate 7 saal guruji ke aagyaa se wahi rahe…!

Aisaa pakkaa banaa diyaa mahaaraaj ki ab to bhid bhaad ho to bhi tu hi hai..ekaant ho to bhi tu hi hai…naach ho to tu hi hai, gaan ho to tu hi hai… jeevan hai to tu hi hai, mrutyu  hai to tu hi hai.. tere siwaa kuchh thaa hi nahi, hai nahi , ho sakataa nahi.. ye bhram hai ki hamen ekaant chaahiye athavaa hamen ye chaahiye, vo chaahiye..chaah maatr hi bewkufi thi..

Chaah chamaari tuhari ati nichan ki nich l

Tu to puran bramh thaa jo chaah naa hoti bich ll

Din bhar kutir men rahete phir shaam ko banaas nadi ke kinaare chale jaate ..khub masti se khelate kudate naachate…ekaant ki masti hoti thi..uchhal kud hoti thi khub….kabhi idhar ko chal dete to kabhi udhar ko… ek baar dekhaa ki andheri raat men kahi aag jal rahi hai to udhar chal diye..  gujraat men daaru bandi thi…aparaadhi log chorichupe daaru bnaa rahe the..main wahaa hi  chalaa gayaa…un ki mere par najar padi ki der raat ko kaun idhar aa gayaa to sher – 2 sher – 4 sher ki badi badi gaaliyaan di… J ..bole idhar aao… gayaa to uthaa ke rakh diyaa mere gale par dhaariyaa …. dhaariyaa us ko bolate ki jaraa saa ped ko yun ghumaate ped ki daal ko to niche aa jaaye …aisaa tej hotaa hai vo hathiyaar ki 4 feet ki lathth hoti aur dedh feet ka lohe kaa lambaa dhaariyaa chamchamaataa hotaa hai..talwaar kuchh nahi us ke aage… aur gaali sunaa ke bolaa khenchu?

Maine kahaa : “teri marji puran ho!”

To wo jaraa saa yun kare to bhi jaise chaaku se aalu ki chips katati us se bhi kam mehanat men gardan niche aa jaawe aisaa hathiyaar.. ped ko maare to lakadi kaa daal gir jaaye..kulhaadi se bahot lambaa chaudaa hotaa hai dhaariyaa, kulhaadi to ek tukadaa kaate , ke chhod dewe… lekin dhaariyaa to ek baar khenche to gardan ko dhad se alag kar dewe…

To bolaa,  “khenchu?”

Maine kahaa, “teri marji puran ho!”

 🙂   teri marji maanaa vo niyantaa ki marji !!.. us ke haath kaapen..dhaariyaa kahi padaa.. aur vo pairon men gir padaa…..

Bole : baapaji maaph karanaa …aap  to mahaaraaj ho….

Aise to kayi anubhav hai…

Sunaa thaa ki jo narmadaa kinaare tapasyaa karataa hai narmadaa ji  pragat ho kar un ko darshan deti hai…chalo ab ye bhi kar le…us samay bahot uchhal kud thi to ye karo vo karo… J .. hanumaan ji ki sidhdi ka mantr bhi hai ki hanumaan ji pragat hote… J

Hari om… naaraayan hari..paramaatmaane hari..

Dil kaa haal sunaa diyaa aur kyaa? J

Aaj saakshaatkaar diwas hai to kyaa koyi dhadaakaa bidhaakaa nahin hotaa… aisaa nahi ki  ham koyi 4 haath waale bhagavaan ban jaayenge ! J .. yaa phir badhiyaa kapadaa pahen lenge aisaa nahi … J   wo hi ridam chalataa hai …

Utsav jeev ke liye hotaa hai… bramh ke liye athavaa bramh vetta ke liye utsav nahi hai… saare utsav , parv, tap ye saare jeev ke liye hai… aatm saakshaatakaar waale ke liye kuchh nahi ..mauj !

Laakh choraasi se chakkar se thakaa

Kholi kamar to ab rahaa aaraam paanaa

Kaam kyaa baaki rahaa?

Jaananaa thaa so hi jaanaa

Kaam kyaa baaki rahaa?

Lag gayaa puraa nichaanaa

Kaam kyaa baaki rahaa?

Deh ki praarabdh se milataa hai sab ko sab kuchh

Naahak jag ko rijhaanaa ..

Kaam kyaa baaki rahaa?

Samay aawe thatu jaashe

Prabhu tu kartaar chhe nyaaro

Karu hun hun ke badhu shaane

Nathi koyi ne kaayi kahevu

Samajhi ne swarup maa rahevu

Anubavu ne etalaa aanand maa rahevu

Aatmaa naa gyaan sivaay kaaii nathi kahevu

Sukh dukh aawe to viraa sahi levu re

Anubhave re etalaa aanand maa rahevu re..

Aatmaa paramaatmaa kaa aanand swabhaav rahetaa hai… aanand men hi leen ho jaayegaa… us kaa phir punargaman nahi hotaa…

Tapaswi kaa punargaman hogaa..jis ko deh men mai panaa hai us ka punargaman hotaa hai… jis ko aatmaa bramh men saakshaatkaar ho gayaa us kaa punargaman nahi hotaa… phir bramhaa ho ke wo hi srushti kartaa hai..vishnu ho ke wo hi paalan karataa hai …shiv ho kar wo hi sanhaar karataa hai …

Aur jeev ho kar wo hi sansaar men sukhi dukhi hone ki lila karataa hai ….

Aisaa us ko anubhav ho jaayegaa..

Aur gyaani ko aisa abhi nahi hotaa ki chalo ham mukt hai , ye bandhan men hai aisaa bhi nahi hotaa…

Naaraayan hari …

Udisaa men baadh grasto ko bhojan to de rahe hai lekin aur bhi chijo ki jarurat to hoti hai…to un ko kapade aadi jivan aawashyak vastuon ki kit banaa kar denge… swaami vivekaanand ka hruday pasijataa thaa ki rugn vyakti aur garibon dukhi vyakyiyon ke liye ki aashram aadi bech kar bhi un ke kaam aawe ..abhi bhi un ke sewaa kaary chal rahe hai…gyaan praactical honaa chaahiye ! vyaavahaarik gyaan honaa chaahiye…

Om shaanti.

Shri sadgurudev ji bhagavaan ki mahaa jay jaykaar ho!!!!!

Galatiyon ke liye prabhuji kshamaa kare…

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