bhakt aur bhagavaan kaa hi jamaanaa !

सहारनपुर (उ.प.) ; 26  सप्टेम्बर   2011 
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ओम दुर्जनो सज्जनो भुर्यात
सज्जनो शांति माप्नुयात 
शान्तो मुस्च्येत बंधेभ्यो 
मुक्तश्च  अन्य विमूक्तए 
ह —रि—————-ओ ——————-म ——————
नारायण नारायण नारायण नारायण
जो दूर बैठे है उन के नज़दीक  मैं आता हूँ रेलगाड़ी में बैठ कर…ये बापू और भक्तों के बीच की दूरी कम करनेवाली रेलगाड़ी है ! 🙂

bhakton ko baapuji se jodanewaali relgaadi

अभी जो मंत्र  पढ़ा वो वैदिक मंत्र  है….
जो भी जगत में अपने पड़ोस में , अपने संपर्क में जो बुरे आदमी दिखते हो उन के लिए मन में सदभाव लाओ… दुर्जनो सज्जनो भुर्यात : दुर्जन सज्जन हो….सज्जनो शांति माप्नुयात  : सज्जनों को परमात्म शांति मिले…
बड़े भाग्य से मनुष्य जनम मिला है … उस से भी ज़्यादा तपस्या और भाग्य ज़ोर मारता है तभी सत्संग मिलता है …ऐसे सत्संग में जो खड़ा होकर दूसरों की कथा में विघ्न डालता है उस को भारी पाप लगता है…कोई हिम्मत से बैठा रहेता है तो उस को भारी पुण्य होता है … 
पंडित नेहरू ने  पुस्तक लिखी की अकबर के जमाने में एक बड़े प्रसिध्द  महापुरुष हो गये जिन का नाम संत तुलसीदास जी महाराज था.. अकबर के जमाने में हो गये…. आचार्य विनोबा भावे ने वो पुस्तक पढ़ी और तुरंत नेहरू को टोका की आप ने ये क्या लिख दिया? ‘अकबर के जमाने में संत तुलसीदास हुए’ – बिलकुल ग़लत नज़रिया  है.. हक़ीकत में संत तुलसीदास अभी भी करोड़ो हृदयों में है …और उस समय भी करोड़ो हृदय में थे..राज्य तो उन्ही का था लोगो के हृदयों पर… तो तुलसीदास जी महाराज के जमाने में अकबर हुआ ऐसा लिखना चाहिए था… जय  राम जी की ! 🙂 
और अकबर के कुकर्मों से त्रस्त  हुए एक युवती कन्या ने अकबर को बाँह पुकरवा दी थी … 
 ( पूज्यश्री बापूजी ने प्रसंग सुनाया : पृथ्वीराज चौहान का भाई शक्तिसिंह चौहान की कन्या किरण ने वीरता से   अकबर के कुकरमो का सिला दिया … क्षत्राणी  किरण ने  लंपट अकबर  से वचन लिया की खुशरोज़  मेला बंद करवाएगा और किसी बहु बेटी पर बुरी नज़र डाल कर जाल बिछा  कर उस को अपने चुंगल में फ़साएगा नही…  इस  प्रसंग को डीटेल में पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक कीजिएगा : 
बहुबेटियों को खुशरोज़  मेले की आड़ लेकर अपने चुंगल में फसाने वाला  अकबर… और ऐसे अकबर  के जमाने में तुलसीदास हुए ये पंडित नेहरू जी का लिखना आचार्य विनोबा भावे को नही जंचा  …उन्हों ने पंडित नेहरू को चिठ्ठी  लिखी की – ‘अकबर के जमाने में तुलसीदास नही हुए ; तुलसीदास जी के जमाने में अकबर हुआ’…और ऐसे काई राजे आएँगे और चले जाएँगे .. जमाना तो सच्चे संतों का ही रहेगा …. 
आप का क्या ख़याल है?  🙂  
इतिहास साक्षी है … शबरी मातंग ऋषि के चरणों में गयी.. उस समय कोई राजा राज्य कर रहा होगा , वो भूमि किसी राजा के शासन में तो होगी ही … मुझे उस राजा का नाम पता नही..शबरी जिस समय गुरु के द्वार पर गयी , भगवान रामचंद्रजी शबरी से मिलने गये …उस समय भी उस इलाक़े का कोई राजा रहा होगा ..उन राजाओं का नाम इतिहास में कही नही आता है … लेकिन शबरी का नाम अभी भी आप के दिलों में दिमाग़ों में है तो मानना पड़ेगा की उन राजाओं का समय थोडासा दबाव और अदब के कारण होता है..लेकिन राजाधीराज परमात्मा के भक्तों का समय अकाल होता है !
नानक जी के जमाने में कई राजा हो गये, उन को हम नहीं पहेचानते …लेकिन आज भी हम सभी नानक जी को जानते, मानते, पहेचानते है … 
तो मानना पड़ेगा की पंडित नेहरू का ऐसा लिखना की ‘अकबर के जमाने में तुलसीदास हुए’ ऐसा लिखना उचित नही था और इस पर आचार्य विनोबा भावे ने लिखा की तुलसीदास के जमाने में अकबर हुआ…तो आप को ये जँचता है?
तुलसीदास का जमाना था की अकबर का जमाना था? अकबर का जमाना नही था..तुलसी दास जी का जमाना था…
तो वास्तव में तो भक्त और भगवान का ही जमाना होता है ..बाकी के लोग तो आते है – जाते है …ठूस  हो जाते है….
राजा रामचंद्रजी का जमाना अभी चल रहा है..राम भक्त हनुमान का जमाना अभी चल रहा है… लेकिन रावण का जमाना अभी चल रहा है ऐसा मैं स्वीकार नही करता हूँ … आप का क्या ख़याल है?
तो मानना पड़ेगा की सत्यस्वरूप ईश्वर के तरफ जो चलता है ..अथवा ईश्वर के तरफ चलाने वाले संतो  के संग में  जो रहेता है उस का जमाना लंबा समय रहेता है और असत्य संसार की तरफ  जो चलता है उस का जमाना भले ही थोड़ी देर चमकता हुआ दिखे लेकिन आतशबाज़ी के अनार की तरह थोड़े समय के लिए … आतश बाजी का अनार दूर तक चमकता हुआ दिखाई देता है लेकिन नज़दीक जाओ तो अहंकार के अंगारे लगे होते है… असली अनार दूर तक चमक नही दिखाएगा लेकिन नज़दीक जाओ तो प्यास बुझाएगा और तुरंत रुष्टि पुष्टि सब दे देगा…
तो असली जीवन है परमात्म शांति, परमात्म सुख , परमात्म ज्ञान , परमात्म प्रसादज़ा  बुध्दी  …और नकली है ये बनाओ वो बनाओ ये पाओ वो पाओ…. उस को हराओ  इस को हराओ  और नंबर 1 हो जाओ… अर्रे बुद्दू  .. नंबर 1 होगा तो जो नंबर 3 में गये या लास्ट नंबर पर गये वो सब तेरे हारीफ बने रहेंगे …. 
श्रीरामचंद्रजी क्या करते थे? गुरुकुल में जब पढ़ते थे तो सामने का पक्ष हारने की कगार पर होता  तो अपने पक्ष को बोलते वो बेचारे हार जाएँगे , उन का दिल मायूस हो जाएगा..अपन जान बुझ के हारो तो उन को प्रसन्नता   होगी … रामचंद्रजी सहीत उन के साथी हार जाते थे और सामने वाले लोग जीत जाते थे ..राम जी को  संतोष होता था .. ये राम का जमाना अभी चल रहा है…
दूसरो को दबा कर हरा कर बड़ा बनानेवालों का जमाना नही टिकता … 
दूसरों को पोषित कर के और आप प्रसन्न होनेवालों का जमाना मिटता  नही ऐसा मेरा अनुभव है ….
आप का क्या ख़याल है?
अपने दुख में रोने वाले तू मुस्कुराना सिख ले..
औरों के दुखदर्द में तू आँसू बहाना सिख ले ….
आप खाने में मज़ा नहीं जो औरों को खिलाने में है…
जिंदगी है 4 दिन की , तू किसी के काम आना सिख ले…
 अपने दुख में रोने वाले तू मुस्कुराना सिख ले..
कई ऐसे लोग है की 8-10 घंटे मेहनत करते लेकिन रहेने की कोठी ठीक ठाक  नही… खाने का , बच्चों को पढ़ाने का भी भविष्य उज्ज्वल नही … और कई ऐसे है की हरामखोरी कर के देस-परदेस में पैसे जमाएँ है..1-2 करोड़ नही, 5 करोड़ नही, 50 करोड़ नही, लाख लाख करोड़ रुपये जमा किए है … 
देखो मैं कोई आन्दोलनवालों के साथ में नही;  लेकिन बात जब जमाने की  चली तो ऐसे लोगों का जमाना  लंबा समय नही टिकता …. और साद  का जमाना मिटता  नही…
भरम निकाल देना की सच्चे लोग दुखी है…हरामी लोग मौज करते .. ये बिलकुल ग़लत बात है.. भगवान की सृष्टि में अन्याय चल रहा है बोले… अन्याय होता तो सृष्टि अभी तक टिकती ही नही…  
एक घटित घटना….
सदना नाम का भक्त जगन्नाथ जी की यात्रा करने गया…
(पूज्यश्री ने ये घटित घटना सुनाई की पूर्व जन्म के कर्म का अच्छा हो या बुरा फल  तो होता ही है…  इस घटना को पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक कीजिएगा :
ये सारा रील देखा तो अहोभाव  से भर गया सदना की प्रभु आप की सृष्टि में अन्याय है अथवा देर है ? नही नही… हमारी समझ में अन्याय है अथवा देर है… मेरे जगन्नाथ मुझे क्षमा करना.. मैं आप पर आरोप कर रहा था लेकिन हमारी बुध्दी  मारी हुई थी, सत्संग का अभाव था… जगन्नाथ जगन्नाथ करते करते उस के कटे हुए दोनो हाथों के पंजे उभर के आ गये !हज़ारो लोग उस समय इस के साक्षी रहे होंगे ..आज भी इस घटना की चर्चा होती है…  
***************
1) आप जो दूसरो को देते हो वोही आप के पास वापस आता है…
कबीरा आप ठगाइए,
और ना ठगिए कोए
आप ठगे  सुख उपजे 
और ठगे  दुख होये..
ग्राहक का भला चाहता हुआ व्यापारी बड़ा संतुष्ट रहेता है… लेकिन ग्राहक को लूट कर बड़ा बननेवाला व्यापारी बड़ी सुविधाओं में तो रहेता है लेकिन संतोष नही रहेगा, शांति नही रहेगी.. प्रजा का मंगल चाहनेवाला नेता प्रजा के हृदयों पर राज्य करेगा..लेकिन प्रजा को फुसला कर धौंस देकर आया हुआ नेता आतशबाज़ी का अनार होकर थोड़े समय रावण के नाई चमकेगा फिर ठूस  हो जाएगा ये सिध्दांत  है…
आप जो देते वो घूम फिर के आप के पास आता है … गुलाब गुलाबी क्यो है? क्यो की उस ने 7 रंगों में से 6 तो इस ने शोषित किए..गुलाबी वापस किया सूर्य को इसलिए ये गुलाबी है…हरा पत्ता हरा क्यो है की हरा रंग उस ने दे दिया है इसलिए…
आप जो देते हो , वो ही हो जाते हो…
आप दूसरो को ठगोगे  तो आप ठगे  जाओगे..
आप दूसरों का मंगल चाहोगे तो देर  सबेर आप का मंगल होगा ही..
*****************
इस सत्संग के अन्य अमृत बिंदु :-
2)प्रार्थना में बड़ी ताकद होती है ….मद्रास में अकाल पड़ा था तब राजगोपालाचारी की प्रार्थना से मद्रास में ऐसी बारिश हुई थी की रेड स्टोन लेक ऐसा छलक  उठा की मद्रास की सड़कों पर नावे चलानी पड़ी थी…ऐसे ही राजस्थान में और जहा बारिश की बहोत  ज़रूरत थी ऐसी जगहो पर जहाँ जहाँ पूज्यश्री बापूजी का सत्संग हुआ वहा बारिश हुई…
3) ब्रम्हज्ञान पाने के लिए पहेले जमाने में राजे सम्राट राज पाट छोड़ कर सद्गुरु के पास जाते …उज्जैन का सम्राट  राजा भर्तृहरि और गुरु गोरखनाथ जी महाराज  की कथा .
4)  अपने शरीर मे स्थित  7 केंद्रो का विकास कब और कैसे होता है, उस के लाभ और प्रभाव.
5) 7 से 14 वर्ष के उमर में बच्चों में जैसे संस्कार भरोगे वैसे वे बनाते है …  इस उमर के बच्चो को कभी डराओ  नही.. राजा महासिंह ने अपने बेटे रणजीत के मन में संस्कार भर दिए तो उस ने भारत का कोहिनूर हीरा अफ़गाणीस्थान  से  जीत कर वापिस अपने देश में लाया और पहेना… 
6)  विज्ञानियों ने रिसर्च किया की टेबल कुर्सी पर भोजन करते समय प्राण नीचे की ओर  होते तो हमारे जठरा, लिवर और किडनी पर तनाव आता है..और इन 3नो के तनाव के बीच हम भोजन करते तो हमारा पाचन जैसा होना चाहिए वैसा नही होता … प्राण की रिदम जैसी होनी चाहिए उस में विघ्न पड़ता है…तो एसिडिटी, गॅस, लिवर की तकलीफे होकर स्वास्थ्य लड़खडाता है… अगर आप पलथी  मार कर भोजन करते तो ये 3नो तकलीफे आप के अंदर के यंत्र को नही होंगी.. आप अच्छी तरह स्वस्थ रहे सकते हो… किसी मेहमानो के सामने टेबल कुर्सी पर बैठना ही पड़े तो कुर्सी पर पलथी  मार के बैठ जाओ…  
7) भारत के संतों की , भारत के महापुरुषों की गाथाएँ बच्चे बच्चियों में भरो ताकि भारत को विश्वगुरू बनाने का काम हो.. पुज्यश्री बापूजी  तो वर्षो पहेले बताया था की भारत विश्वगुरू बनाने के रास्ते करवट लेगा तो देखो 2011 में भारत करवट ले रहा है…
8  ) पूज्यश्री बापूजी ने नानी जी के प्रसंग से समझाया की जिन के पास ओंकार सहीत गुरु मंत्र मिला है , उन को मृत्यु के बाद नरकवास नही होता…ओंकार वाला गुरु मंत्र जीते जी तो बुलंदी  देता है लेकिन मौत से भी टक्कर देने की बुलंदी दे देता है …  
ॐ शांती
श्री सदगुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो !!!!!
गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे ….  
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

Sahaaranpur (U.P.) ; 26th Sept 2011

Om durjano sajjano bhuryaat

Sajjano shaanti maapnuyaat

Shanto muschyet bandhebhyo

Muktaschy anya vimuktaye

Hariiiiiiiiii ooooommmmmmmmmm

Naaraayan naaraayan naaraayan naaraayan

Jo dur baithe hai un ke najadik  main aataa hun relgaadi men baith kar…ye baapu aur bhakton ke bich ki duri kam karanewaali relgaadi hai ! 🙂

Abhi jo mantra padhaa vo vaidik mantra hai….

Jo bhi jagat men apane pados men , apane sampark men jo bure aadami dikhate ho un ke liye man men sadbhaav laao… durjano sajjano bhuryaat : durjan sajjan ho….sajjano shaanti maapnuyaat : sajjanon ko paramaatm shaanti mile…

Bade bhaagy se manushy janam milaa hai … us se bhi jyaadaa tapasyaa aur bhaagy jor maarataa hai tabhi satsang milataa hai …aise satsang men jo khada hokar dusaron ki kathaa men vighn daalataa hai us ko bhaari paap lagataa hai…koyi himmat se baithaa rahetaa hai to us ko bhaari punya hotaa hai …

Pandit neharu ne  pustak likhi ki akabar ke jamaane men ek bade prasidhd mahaapurush ho gaye jin kaa naam sant tulasidaas ji mahaaraaj thaa.. akabar ke jamaane men ho gaye…. aachaary vinobaa bhaave ne vo pustak padhi aur turant neharu ko tokaa ki aap ye kyaa likh diyaa? Akabar ke jamaane men sant tulasidaas huye – bilakul galat najariyaa  hai.. hakikat men sant tulasidaas abhi bhi karodo hrudayon men hai …aur us samay bhi karodo hruday men the..raajya to unhi kaa thaa logo ke hrudayon par… to tulasidaas ji mahaaraaj ke jamaane men akabar huaa aisaa likhanaa chaahiye thaa… jay raam ji ki ! 🙂 

Aur akabar ke kukarmon se trasta huye ek yuwati kanyaa ne akabar ko baanh pukarvaa di thi …

( Pujyashri baapuji ne prasang sunaayaa : pruthviraaj chauhaan kaa bhaai shaktisinh chauhaan ki kanyaa kiran ne virataa se   akabar ke kukarmo ka silaa diyaa … kshatraani kiran ne  lampat akabar  se vachan liyaa ki khushroz melaa band karavaayegaa aur kisi bahubeti par buri najar daal kar jaal bichhaa kar us ko apane chungal men phasaayegaa nahi…  is  ko detail men padhane ke liye krupayaa is link par klik kijiyegaa :

http://wp.me/P6Ntr-M0   )

Bahubetiyon ko khushroz mele ki aad lekar apane chungal men phasaane waalaa  akabar… aur aise akabar  ke jamaane men tulasidaas huye ye pandit neharu ji ka likhanaa aachaary vinobaa bhaave ko nahi janchaa …unhon ne pandit neharu ko chiththi likhi ki akabar ke jamaane men tulasidaas nahi huye ; tulasidaas ji ke jamaane men akabar huaa…aur aise kayi raaje aayenge aur chale jaayenge .. jamaanaa to sachche santon kaa hi rahegaa ….

Aap kaa kyaa khayaal hai? 🙂 

Itihaas saakshi hai … shabari matang rishi ke charanon men gayi.. us samay koyi raajaa raajya kar rahaa hogaa , vo bhumi kisi raajaa ke shaasan men to hogi hi … mujhe us raajaa kaa naam pataa nahi..shabari jis samay guru ke dwaar par gayi , bhagavaan raamchandra ji shabari se milane gaye …us samay bhi us ilaake ka koyi raajaa rahaa hogaa ..un raajaaon kaa naam itihaas men kahi nahi aataa hai … lekin shabari kaa naam abhi bhi aap ke dilon men dimaagon men hai to maananaa padegaa ki un raajaaon kaa samay thodaasaa dabaav aur adab ke kaaran hotaa hai..lekin raajaadhi raaj paramaatmaa ke bhakton kaa samay AKAAL hotaa hai !

Naanak ji ke jamaane men kayi raajaa ho gaye, un ko ham nahin pahechaanate …lekin aaj bhi ham sabhi naanak ji ko jaanate, maanate, pahechaanate hai …

To maananaa padegaa ki pandit neharu ka aisaa likhanaa ki ‘akabar ke jamaane men tulasidaas huye’ aisa likhanaa uchit nahi thaa aur is par aachaary vinobaa bhaave ne likhaa ki tulasidaas ke jamaane men akabar huaa…to aap ko ye janchataa hai?

Tulasidaas kaa jamaanaa thaa ki akabar kaa jamaanaa thaa? Akabar kaa jamaanaa nahi thaa..tulasi daas ji kaa jamaanaa thaa…

To vaastav men to bhakt aur bhagavaan kaa hi jamaanaa hotaa hai ..baaki ke log to aate hai – jaate hai …thus ho jaate hai….

Raajaa raamachandra ji kaa jamaanaa abhi chal rahaa hai..raam bhakt hanumaan ka jamaanaa abhi chal rahaa hai… lekin raawan kaa jamaanaa abhi chal rahaa hai aisa main sweekaar nahi karataa hun … aap kaa kya khayaal hai?

To maananaa padegaa ki satya swarup iishwar ke taraf jo chalataa hai ..athavaa iishwar ke taraf chalane waale santo ke sang men  jo rahetaa hai us kaa jamaanaa lambaa samay rahetaa hai aur asatya sansaar ki taraf  jo chalataa hai us kaa jamaanaa bhale hi thodi der chamakataa huaa dikhe lekin aatashbaaji ke anaar ki tarah thode samay ke liye … aatash baaji kaa anaar door tak chamakataa huaa dikhaayi detaa hai lekin najadik jaao to ahankaar ke angaare lage hote hai… asali anaar door tak chamak nahi dikhaayegaa lekin najadik jaao to pyaas bujhaayegaa aur turant rushti pushti sab de degaa…

To asali jeevan hai paramaatm shaanti, paramaatm sukh , paramaatm gyaan, paramaatm prasaadajaa  budhdi …aur nakali hai ye banaao vo banaao ye paao vo paao…. us ko haraao is ko haraao aur nambar 1 ho jaao… arre buddu .. nambar 1 hogaa to jo nambar 3 men gaye yaa laast nambar par gaye vo sab tere harif bane rahenge ….

Shriraamchandra ji kyaa karate the? Gurukul men jab padhate the to saamane kaa paksh haarane ki kagaar par hotaa  to apane paksh ko bolate vo bechaare haar jaayenge , un kaa dil maayus ho jaayegaa..apan jaan bujh ke haaro to un ko prasannaataa hogi … raamachandra ji saheet un ke saathi haar jaate the aur saamane waale log jeet jaate the ..raam ji ko  santosh hotaa thaa .. ye raam kaa jamaanaa abhi chal rahaa hai…

Dusaro ko dabaa kar haraa kar badaa bananewaalon ka jamaanaa nahi tikataa …

Dusaron ko poshit kar ke aur aap prasann honewaalon kaa jamaanaa mitataa nahi aisaa meraa anubhav hai ….

Aap kaa kyaa khayaal hai?

Apane dukh men rone waale tu muskuraanaa sikh le..

Auron ke dukhdard men tu aansu bahaanaa sikh le ….

Aap khaane men majaa nahin jo auron ko khilaane men hai…

Jindagi hai 4 din ki , tu kisi ke kaam aanaa sikh le…

Apane dukh men rone waale tu muskuraanaa sikh le..

Kayi aise log hai ki 8-10 ghante mehanat karate lekin rahene ki kothi thik thaak nahi… khaane kaa , bachchon ko padhaane kaa bhi bhavishya ujjwal nahi … aur kayi aise hai ki haraamkhori kar ke des-pardes men paise jamaayen hai..1-2 karod nahi, 5 karod nahi, 50 karod nahi, laakh laakh karod rupaye jamaa kiye hai …

Dekho main koyi aanadolan waalon ke saath men nahi lekin baat jab jamaane ke chali to aise logon kaa jamaanaa  lambaa samay nahi tikataa …. aur saad kaa jamaanaa mitataa nahi…

Bharam nikaal denaa ki sachche log dukhi hai…haraami log mauj karate .. ye bilakul galat baat hai.. bhagavaan ki srushti men anyaay chal rahaa hai bole… anyaay hotaa to srushti abhi tak tikati hi nahi…

Ek ghatit ghatanaa….

Sadanaa naam kaa bhakt jagannaath ji ki yaatraa karane gayaa…

(pujyashri ne ye ghatit ghatanaa sunaayi ki purv janm ke karm ka phal achhaa ho yaa buraa puraa hotaa hi hai…  is ghatanaa ko padhane ke liye krupayaa is link par klik kijiyegaa :

http://wp.me/P6Ntr-LU  )

Ye saaraa reel dekhaa to ahobhaav se bhar gayaa sadanaa ki prabhu aap ki srushti men anyaay hai athava der hai ? nahi nahi… hamaari samajh men anyaay hai athavaa der hai… mere jagannaath mujhe kshamaa karanaa.. main aap par aarop kar rahaa thaa lekin hamaari budhdi maari huyi thi, satsang kaa abhaav thaa… jagannaath jagannaath karate karate us ke kate huye dono haathon ke panje ubhar ke aa gaye !hajaaro log us samay is ke saakshi rahe honge us samay..aaj bhi is ghatanaa ki charchaa hoti hai…

***************

1) Aap jo dusaro ko dete ho wohi aap ke paas waapas aataa hai…

Kabiraa aap thagaayiye,

Aur naa thagiye koye

Aap thage sukh upaje

Aur thage dukh hoye..

Graahak kaa bhalaa chaahataa huaa vyaapaari badaa santusht rahetaa hai… lekin graahak ko loot kar badaa bananewaala vyaapaari badi suvidhaaon men to rahetaa hai lekin santosh nahi rahegaa, shaanti nahi rahegi.. prajaa kaa mangal chahanewala netaa prajaa ke hrudayon par raajy karegaa..lekin prajaa ko phusalaa kar dhauns dekar aayaa huaa netaa aatashbaaji ka anaar hokar thode samay raawan ke naayi chamakegaa phir thus ho jaayegaa ye sidhdaant hai…

Aap jo dete vo ghum phir ke aap ke paas aataa hai … gulaab gulaabi kyo hai? Kyo ki us ne 7 rangon men se 6 to is ne shoshit kiye..gulaabi waapas kiyaa sury ko isliye ye gulaabi hai…haraa pattaa haraa kyo hai ki haraa rang us ne de diyaa hai isliye…

Aap jo dete ho , vo hi ho jaate ho…

Aap dusaro ko thagoge to aap thage jaaoge..

Aap dusaron kaa mangal chaahoge to dersaber aap ka mangal hogaa hi..

*****************

Is satsang ke anya amrut bindu :-

2) Madraas men akaal padaa thaa tab raajgopaalaachari ki praarthanaa se madraas men aisi baarish huyi thi ki red stone lake aisaa chhalak uthaa ki madraas ki sadakon par naave chalaani padi thi…aise hi raajsthaan men aur jaahaa baarish ki bahot jarurat thi aisi jagaho par jahaan jahaan Pujyashri Bapuji ka satsang huaa wahaa baarish huyi…

3) Ujjain ka samraat  Raajaa bhartuari aur guru gorakhnaath ji mahaaraaj  ki kathaa . link : http://wp.me/P6Ntr-LX

4)  Apane sharir me sthit  7 kendro kaa vikaas kab aur kaise hoti hai, us ke laabh aur prabhaav.

5) 7 se 14 varsh ke umar men bachchon men jaise sanskaar bharoge waise ve banate hai …  is umar ke bachcho ko kabhi daraao nahi.. raaja mahaasinh ne apane bete ranajit ke man men sanskaar bhar diye to us ne bhaarat kaa kohinur heera afagaagaanisthaan se  jeet kar waapis apane desh men laayaa aur pahenaa…

6)  vigyaaniyon ne risarch kiyaa ki Table kursi par bhojan karate samay praan niche ki aor hote to hamaare jatharaa, liver aur kidany par tanaav aataa hai..aur in 3no ke tanaav ke bich ham bhojan karate to hamaaraa paachan jaisaa honaa chaahiye waisaa nahi hotaa … praan ki ridam jaisi honi chaahiye us men vighn padataa hai…to acidity, gas, liver ki takalife hokar swaasthy ladakhadaataa hai… agar aap palathi maar kar bhojan karate to ye 3no takalife aap ke andar ke yantr ko nahi hongi.. aap achhi tarah swasth rahe sakate ho… kisi mehamaano ke saamane table kursi par baithanaa hi pade to kursi par palathi maar ke baith jaao…

7) Bhaarat ke santon ki , bhaarat ke mahaapurushon ki gaathaayen bachche bachchiyon men bharo taaki bhaarat ko vishwaguru banaane kaa kaam ho.. maine to varsho pahele bataayaa thaa ki bhaarat vishwaguru banane ke raaste karavat legaa to dekho 2011 men bhaarat karavat le rahaa hai…

8) Pujyashri Baapuji ne Naani ji ke prasang se samajhayaa ki jin ke paas omkaar saheet guru mantr milaa hai , un ko mrutyu ke baad narakwaas nahi hotaa…omkaar waalaa guru mantr jite jee to bulandi  detaa hai lekin maut se bhi takkar dene ki bulandi de detaa hai …

Om shaanti.

Shri Sadgurudev ji Bhagavaan ki mahaa jayajaykaar ho!!!!!

Galatiyon ke liye prabhuji kshamaa kare….

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