aasan maalaa TIPS: saadhwi Rekhaadidi

सहारनपुर (उ.प.) ; 26 सप्टेम्बर  2011

साध्वी रेखा दीदी

साध्वी रेखा दीदी का सत्संग :- (for Hinglish please scroll down)
एक विरक्त संत थे..चोर उन के चारो तरफ घूम रहा था लेकिन उस को चोरी करने के लिए कुछ  मिला ही नही..तो उस महात्मा के आगे कुछ बाँधा सा पड़ा था…महात्मा तो आँखे बंद कर के जप कर रहे थे…
कई साधक जप करते , उस के बाद गौ-मुखी आसन पर रख देते…आसन के उपर गौ-मुखी ना रखिए… क्यो की हम जब आसन पर बैठते तब हमारी चरणों की धूलि (पैर की मिट्टी) आसन पर लग जाती है..और जो आप पाठ करते है गुरुगिता, गजेन्द्र  मोक्ष, आदित्यहृदय स्तोत्र आदि तो उन पाठ करने की पुस्तकों को भी  आप आसन पर ना रखे…अपने आसन से इन चीज़ों को थोड़ी उँची रखे…
कई साधक भाई बहेनों  को ये नही पता होता की आसन और गौ-मुखी हम धो भी सकते है… कितने वर्षों तक गौ-मुखी को मैला रखते है… साफ सुथरा साबुन लेकर गौमुखी को हाथ में लेकर धो सकते है..आसन यदि मैला हो जाए तो साफ सुथरा बर्तन लेकर उस में आसन डाल के, भिगो के  अलग  से धो सकते है… कभी यात्रा आदि पर जाना पड़े तो भी अपना आसन और गौमुखी धो लेनी   चाहिए..
जप की माला को भी 3-6 महीने में पिपल के 9 पत्ते रख के उस के बीच माला रख के विधि सहित माला स्नान और माला पवित्रता भी कर लेनी चाहिए.. (माला धोने  की विधि  मंत्र दीक्षा पुस्तक में दी हुई है…)प्रयत्न करना चाहिए की माला और आसन पवित्र रखे..   

तो वे बाबा आँखें बंद कर के जप कर रहे थे…चोर आया और बाबा के सामने बाँधा हुआ सामान था वो लेकर भाग गया…
बाबा वृध्द  थे, भाग नही पाए…बगीचे में चारों ओर  नज़र डाली.. पर चोर नही मिला… इतने में थानेदार मिल गया…. बाबा ने उस को कहा की, ‘मेरी शिकायत लिखो की मेरा सामान चोरी हो गया’ 
…थानेदार ने कहा,  ‘बताओ बाबा क्या क्या चोरी हो गया?’
बाबा बोले : एक रज़ाई चोरी हो गयी, एक छाता  चोरी हो गया, एक तकिया चोरी हो गया, एक गालीचा चोरी हो गया, मेरे कपड़े चोरी हो गये, मेरी शॉल चोरी हो गयी….
चोर वहीं पेड़ के उपर बैठा था… उस ने सोचा की मैने तो सिर्फ़  इन की रज़ाई ली है और इल्ज़ाम मेरे पर 5 -5 का लगा रहे है !… ऐसी चोरी से तो ये रज़ाई भी वापस करना अच्छा है… बाबा जी फिर से जप करने बैठे तो चोर बाबा के पिछे  रज़ाई  फेंक कर चला गया की लिया एक और इल्ज़ाम 5-5 का….

बाबा थानेदार के पास गये और बोले की मेरा सामान मिल गया , मैं अपनी शिकायत वापिस ले रहा हूँ…
थानेदार ने पूछा : बाबा  सामान मिल गया? 
बाबा बोले : हाँ  ये देखो!
थानेदार बोला : ये तो एक रज़ाई है …आप ने तो 5 वस्तुएँ लिखाई थी…
बाबा : हाँ ..ये रज़ाई तो है , पर ठंडी के दिन आते तो मैं  इस को रज़ाई कर के ओढता हूँ..और गरमी के दिन आते तो मैं इस को लपेट  के तकिया कर देता हूँ…बारिश के दिन आते तो मैं इस को प्लास्टिक डाल के कोट कर लेता हूँ.. जब संत मिलने आते तो गालीचा कर के बिछा  लेता हूँ… और कपड़े धोता हूँ तो इस को पहेन  कर भी बैठता हूँ… तो रज़ाई तो एक है लेकिन यही मेरी सब कुछ  है ! इस के अलावा मेरे पास और कुछ  नही है…
ये एक है पर मेरी सब है …ऐसे ही सदगुरु एक है पर वो हमारे  सब है….

Sadgurudev Santshri Ashaaraam Baapu

इसलिए तो हम सभी साधक रोज गाते है की :

त्वमेव माता च पिता त्वमेव
 त्वमेव बंधूसच सखा त्वमेव 
त्वमेव विद्या द्रविडम त्वमेव
त्वमेव सर्वम  मम  देव देव..
वो महात्मा की रज़ाई एक थी लेकिन उस की सब कुछ  थी ऐसे ही साधक की निष्ठा जब सदगुरु में बढ़ जाती है तब वो संसार में तो रहेता है …लेकिन जैसे कमल जल में रहेता है ऐसे….भीतर से वो  पक्का कर लेता है की मेरा सच्चा रिश्ता तो मेरे सदगुरु से है..मेरा सच्चा नाता तो मेरे सद्गुरुदेव से है …इसलिए ये गुरु का ज्ञान  धीरे धीरे हमें संसार में कमल के नाई जीना सीखा देता है…
हर हाल में खुश रहेना  बापू सीखा रहे है..
जल में कमल सा रहेना  बापू सीखा रहे है…
आश्रम आएँ तो रविवार को ऐसा थान ले की आए है तो 51 माला कर के ही जाएँगे… विशेष तिथि और पर्व हो तो अधिक से अधिक माला करने का संकल्प कर के पूरा कर लेना चाहिए… और हर साल में तो ये ज़रूर कर ही लेना चाहिए की जीतने हमारे गुरु मंत्र में अक्षर है उतने लाख जप हो जाए… कई बार दीक्षा के बाद 10 -12 साल हो जाते फिर भी साधक अनुष्ठान नही करते… समय आए या नही आए ; समय निकाल कर भी अनुष्ठान करना ही चाहिए…
माताएँ हार्दिक आमंत्रित है अहमदाबाद महिला आश्रम में … आप जैसी कितनी बहेने आती है और वहा पर मौन मंदिर और अनुष्ठान का लाभ लेती है… कभी आप समय निकाल कर जैसे माईके चली जाती है ऐसे ही समय निकाल कर व्यवस्था कर दो की हम 7 दिन पूज्य बापूजी के आश्रम में जाकर अनुष्ठान  करेंगे , मौन मंदिर का लाभ लेंगे…कई लोगों को कहो की थोड़ा मौन रखो जप करो , थोडासा किनारा करो संसार से … तो वो सोचते की हमारे बिना घर कैसे चलेगा …हम आ जाएँगे तो घर के काम कौन करेगा?… लेकिन बुरा नही मानना की एक दिन आप इस संसार में भी नहीं रहोगे ना तो आप का घर भी चलेगा और संसार भी चलेगा…
अपना कल्याण हमें खुद करना है…माँ  दया कर के भोजन की थाली परोस के देती है …और माँ  दयालु होती है तो  नीवाला उठा के मुँह में डाल देती है, ‘ले बेटा खा ले!’… पर भोजन चबाना  तो हम को ही है… ऐसे ही सदगुरु ने दया की की  हमें दीक्षा का दान दिया … और कृपा करने में कहीं कमी नही रखी की नगर नगर जा  कर ये संदेश ब्रम्‍ह ज्ञान  का दे रहे है जैसे माँ  नीवाला मुँह में डाल रही है मानो… लेकिन उस के बाद भी तो चबाने का कर्त्यव्य हमारा ही  है ….
कोई पेट को बाहर से हलवे  का लेप करे तो पेट नही भरता … ऐसे ही केवल कोई नाम लेकर बैठ जाए तो कल्याण नही होगा.. नाम का खूब खूब अभ्यास करना पड़ेगा … इसलिए भगवान के वचन गीता के भूलना नही …भगवान ने अर्जुन को कहा की : निसंदेह मन  को वश करना कठिन है लेकिन अभ्यास से ये तू कर सकता है ..
अभ्यासेन तू कौन्तेय  वैराग्येनच  गृहते…
बार बार संसार को देखो और वैराग्य लाओ… की कितना अच्छा चले फिर भी क्या हुआ..इस शरीर को कितना भी खिलाओ तो क्या हुआ?..आख़िर अंत में कुछ  नही आने वाला… सोमवार को जन्म हुआ , मंगलवार को बड़े हुए , बुधवार को शादी हुई , गुरुवार को बच्चे हुए , शुक्रवार को बीमार हुए, शनिवार को अस्पताल गये , रविवार को राम नाम सत्य है …. आठवा दिन तो कहीं दिख ही नही रहा … 
लोग मानते है की परीक्षित राजा के पास 7 दिन थे .. पर संत कहेते है की हम सब के पास भी 7 दिन है.. इसलिए अभ्यास को खूब बढ़ाए.. 

एक बहेन  रोज दुकान पर जाती थी ..भाई ज़रा ये उपरवाली पीली साडी दिखाना.. नहीं वो नीली वाली निकालना… ज़रा वो नीचे वाली ..वो निकालना… वो दुकानवाला साडी निकालता और वो चली जाती… ऐसे वो एक दिन आई, 2 दिन आई, 3 दिन आई … दुकान वाला इस की बात मान जाता की निकालनी है तो ख़रीदेगी ज़रूर … आख़िर चौथे दिन आई तो दुकानदार ने कहा बहेन जी आप रोज आती हो, साड़ियाँ निकलवाती हो पर कुछ  लेती तो हो नही…
तो वो बहेन धीरे से बोली : मैं रोज लेती हूँ , पर तेरे को पता ही नही चलता !!!
इस का मतलब वो रोज चोरी कर के जाती लेकिन दुकानवाले को पता ही नही चलता … 
ऐसे ही साधक ऐसे नाम का अभ्यास करे की मैं अपना चित्त अपना मन   भगवान को सौप चुका हूँ… 
गुरु नानक  साब के वचन है की :
जो बेचे अपना मन   संतन के पास l
तीस साधक के सब कारज रास ll
 उस साधक के सब कारज रास है जो अपना मन   संतों के पास बेच देता है… 
कभी ये मन में विचार नही लाए की मेरी गुरु देव से आज तक बात नही हुई…
कभी मन में ये विचार नही लाना की हम तो बापूजी के यहा बहोत   दूर बैठे थे… इस कलियुग में , इस मोह  माया के वातावरण में सदगुरु के दरबार में आना , हरी नाम जपने की इच्छा  रखना ये ईश्वर और गुरु के कृपा के सिवाय नही हो सकता… आप आए हो , ये उन्ही की कृपा आप को लेकर आई है… 
गुरु गोविन्द  सिंग जी महाराज कभी कभी नाव की सैर करते थे.. सभी नाव में बैठते..लेकिन एक टूटी-फूटी नाव थी किसी की… वो नाव नज़दीक नही लाता था…उस को खुद को संकोच होता था की मैं गुरुदेव कैसे बोलू  की टूटी फूटी नाव में बैठो… और पैसे इतने थे नही की नाव को ठीक करवाए… इसलिए हमेशा थोड़ा  पिछे  रहेता की मेरी नाव टूटी  फुटी है… लेकिन जो पिछे  रहेता है ना , कई बार वो गुरु देव के सब से आगे  हो जाता है… कई बार जो बहोत  दूर रहेता है ना उस पर संत कि नजर सीधी पड़  जाती है… 
लघुता में प्रभुता बसे;प्रभुता से प्रभु दूर..
तो वो नाविक नम्र हो के किनारे खड़ा रहेता था.. एक बार सब नाविक के साथ ये भी खड़ा था. आपस में सब बोल रहे थे की गुरु मेरे नाव में 2 बार बैठे..किसी ने बोला मेरे नाव में तो 3 बार बैठे…कोई बोला आज गुरुदेव मेरे नाव में बैठने वाले है…ऐसे सब आपस में चर्चा कर रहे थे लेकिन ये बोल नही पाया की मेरे नाव में भी गुरु बैठेंगे… चेहरा छोटा  हो गया..मन मुरझा गया.. और मायूस हो कर नदी के बीच में जा  कर रोने लगा.. नाव खड़ी कर दी..सोचा सब की आगे क्या रोना?… और आँसू बहाते हुए गुरु गोविंद सिंग जी महाराज को याद करने लग गया…
चिंटी के पर नेवर वाजे ते भी साहिब सुन लेत  … 
तो क्या सच्चा साधक – भगवान  भक्त की पुकार भगवान नही सुनेगा? चाहे डुबो दे, चाहे तिरा  दे..मेरे जीवन की नैय्या है तेरे हवाले…
वो बीच नदी में जा  कर रोने लग गया..
गुरु गोविंदसिंग जी आए तो सब ने अपनी सजी सवारी नाव लाये  की गुरु महाराज पधारे… महाराज जी सब पर दृष्टि डाले….बोले आज एक नाव कम है …. 
सब बोले , ‘हाँ  गुरुजी कम है लेकिन वो टूटी  फुटी है ..उस में आप नहीं बैठ  सकते’ …
गुरुजी ने कहा,  ‘लेकिन वो है कहाँ ?’  
बोले : गुरुजी पता नही अभी तो यही था… वो बीच नदी में जा  कर खड़ा हो गया है….
गुरु गोविंद सिंग जी महाराज ने किनारे से आवाज़ लगाई : ओ गुरु  प्यारे !ओ प्रीतम प्यारे !!
इतनी आवाज़ लगानी ही थी की वो अपनी   नाव बीच मझधार से दौड़े दौड़े ले आया …तब तक किसी को पता नही था की गुरु महाराज किस नाव में बैठेंगे…जैसे ही वो नाव आई , गुरु गोविंदसिंह जी महाराज उस के नाव में बैठे … उस का टूटा भाग्य जोड़ दिया…. ये संत महा पुरुषों की कृपा है… 
इतना अनुभव तो हम सब का है की : 
टूटे भाग्य को संत देते  है जोड़….
संसार से उठा कर हमें 
ईश्वर की ओर  देते है मोड़…
हृदय में गुरु नाम की ज्योत जला कर
 पुराने कर्मों को देते है तोड़
टूटे फूटे  भाग्य को संत देते  है जोड़….

तो कलियुग में कहा तो बिना आग के संसार जल रहा है …….वहा गुरु ने हमें सत्संग की ठंडी छाया  दी है…ये सत्संग कल्प वृक्ष है …यहा बैठो तो मन को शांति मिलती है…हृदय की इच्छा  पूरी होती है वो तो छोटी  बात है…लेकिन ये मनुष्य जीवन कितना अनमोल रतन है…इस को अभ्यास कर के जीवन सफल कैसे बनाए ये संत महापुरुषों के चरणों  में बैठने से ही समझ आती है….
आप सभी के श्रध्दा  भक्ति को प्रणाम है …
झोली हम फैलाते है ; वो दयालु दाता दया किए बिना रहे नही सकते….

ओम नमो भगवते वासुदेवाय…


श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो!!!!!
ग़लतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे…
 

 

 

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

Sahaaranpur (U.P.) ; 26 Sept 2011

Ek virakt sant the..chor un ke chaaro taraf ghum rahaa thaa lekin us ko chori karane ke liye kuchh milaa hi nahi..to us mahaatmaa kea age kuchh bandhaa saa padaa thaa…mahaatmaa to aankhe band kar ke jap kar rahe the…

Kayi saadhak jap karate , us ke baad gau-mukhi aasan par rakh dete…aasan ke upar gau-mukhi naa rakhiye… kyo ki ham jab aasan par baithate tab hamaari charanon ki dhuli (pair ki mitti) aasan par lag jaati hai..aur jo aap path karate hai gurugitaa, gajendra moksh, aadityahruday stotra aadi to un path karane ki pustakon ko bhi  aap aasan par naa rakhe…apane aasan se in chijon ko thodi unchi rakhe…

Kayi saadhak bhaai bahenon  ko ye nahi pataa hotaa ki aasan aur gau-mukhi ham dho bhi sakate hai… kitane varshon tak gau-mukhi ko mailaa rakhate hai… saaph sutharaa saabun lekar gaumukhi ko haath men lekar dho sakate hai..aasan yadi mailaa ho jaaye to saaph sutharaa bartan lekar us men aasan daal ke, bhigo kea lag se dho sakate hai… kabhi yaatraa aadi par jaanaa pade to bhi apanaa aasan aur gaumukhi dho lejaa chaahiye..

Jap ki maalaa ko bhi 3-6 mahine men papal ke 9 patte rakh ke us ke bich maalaa rakh ke vidhi sahit maalaa snaan aur maalaa pavitrataa bhi kar leni chaahiye.. (malaa dhone ki vidhi mantradikshaa pustak men di huyi hai…)Prayatn karanaa chaahiye ki maalaa aur aasan pavitr rakhe..   

To ve baabaa aankhen band kar ke jap kar rahe the…chor aayaa aur baabaa ke saamane bandhaa huaa saamaan thaa vo lekar bhaag gayaa…

Baabaa vudhd the, bhaag nahi paaye…bagiche men chaaron aor najar daali.. par chor nahi milaa… itane men thaanedaar mil gayaa…. baabaa ne us ko kahaa ki meri shikaayat likho ki meraa saamaan chori ho gayaa…thaanedaar ne kahaa bataao baabaa kya kyaa chori ho gayaa?

Baabaa bole ek rajaayi chori ho gayi, ek chhataa chori ho gayaa, ek takiyaa chori ho gayaa, ek galichaa chori ho gayaa, mere kapade chori ho gaye, meri shawl chori ho gayi….

Chor wahin ped ke upar baithaa thaa… us ne sochaa ki maine to sirf  in ki rajaayi li hai aur iljaam mere par 5 -5 kaa lagaa rahe hai !… aisi chori se to ye rajaayi bhi waapas karanaa achhaa hai… baabaa ji phir se jap karane baithe to chor rajaayi baabaa ke pichhe phenk kar chalaa gayaa ki liyaa ek aur iljaam 5-5 kaa….

Baabaa thaanedaar ke paas gaye aur bole ki meraa saamaan mil gayaa , main apani shikaayat waapis le rahaa hun…

thaanedaar : Baabaa saamaan mil gayaa?

Baabaa bole : haan ye dekho!

Thaanedaar bola : ye to ek rajaayi hai …aap ne to 5 vastuyen likhaayi thi…

baabaa : Haa..ye rajaayi to hai , par thandi ke din aate to mai is ko rajaayi kar ke odhataa hun..aur garami ke din aate to main is ko lappet ke takiyaa kar detaa hun…baarish ke din aate to main is ko plaastik daal ke kot kar letaa hun.. jab sant milane aate to gaalichaa kar ke bichhaa letaa hun… aur kapade dhotaa hun to is ko pahen kar bhi baithataa hun… to rajaayi to ek hai lekin yahi meri sab kuchh hai ! is ke alaawaa mere paas aur kuchh nahi hai…

Ye ek hai par meri sab hai aise hi sadguru ek hai par vo mere sab hai….

Isliye to ham sabhi saadhak roj gaate hai ki :

tvamev maataa ch pitaa tvamev

 tvamev bandhusch sakhaa tvamev

tvamev vidyaa dravidam tvamev

tvamev sarvam mam dev dev..

vo mahaatmaa ki rajaayi ek thi lekin us ki sab kuchh thi aise hi saadhak ki nishthaa jab sadguru men badh jaati hai tab vo sansaar men to rahetaa hai …lekin jaise kamal jal men rahetaa hai aise….bhitar se vo  pakka kar letaa hai ki meraa sachchaa rishtaa to mere sadguru se hai..meraa sachchaa naataa to mere sadgurudev se hai …isliye ye guru kaa gyaan dhire dhire hamen sansaar men kamal ke naayi jina sikhaa detaa hai…

har haal men khush rahenaa ye baapu sikhaa rahe hai..

jal men kamal saa rahenaa ye baapu sikhaa rahe hai…

aashram aayen ravivaar ko aisaa than le ki aaye hai to 51 maalaa kar ke hi jaayenge… vishesh tithi aur parv ho to adhik se adhik maalaa karane kaa sankalp kar ke puraa kar lenaa chaahiye… aur har saal men to ye jarur kar hi lenaa chaahiye ki jitane hamaare guru mantr men akshar hai utane laakh jap ho jaaye… kayi baar dikshaa ke baad 10 -12 saal ho jaate phir bhi saadhak anushthaan nahi karate… samay aaye yaa nahi aaye ; samay nikaal kar bhi anushthaan karanaa hi chaahiye…

maataayen haardik aamantrit hai ahmdaabaad mahilaa aashram men aap jaisi kitani bahene aati hai aur wahaa par maun mandir aur anushthaan kaa labh leti hai… kabhi aap samay nikaal kar jaise maaiike chali jaati hai aise hi samay nikaal kar vyavasthaa kar do ki ham 7 din pujya baapuji ke aashram men jaakar anushtaan karenge , maun mandir kaa laabh lenge…kayi logon ko kaho ki thodaa maun rakho jap karo , thodaasaa kinaaraa karo sansaar se to vo sochate ki hamaare binaa ghar kaise chalegaa …ham aa jaayenge to ghar ke kaam kaun kaergaa?… lekin buraa nahi maananaa ki ek din aap is sansaar men bhi nahin rahoge naa to aap kaa ghar bhi chalegaa aur sansaar bhi chalegaa…

apanaa kalyaan hamen khud karanaa hai…maan dayaa kar ke bhojan ki thaali paros ke deti hai …aur maa dayaalu hoti hai niwaalaa uthaa ke munh men daal deti hai le beta khaa le… par bhojan chabaabaa to ham ko hi hai… aise hi sadguru ne dayaa ki hamen dikshaa kaa daan diyaa … aur krupaa karane men kahin kami nahi rakhi ki nagar nagar jaa kar ye sandesh bramh gyaan kaa de rahe hai jaise maa niwaalaa munh men daal rahi hai maano… lekin us ke baad bhi to chabaane kaa kartyavy hamaaraa hai ….

koyi pet ko baahar se haluwe kaa lep kare to pet nahi bharataa … aise hi kewal koyi naam lekar baith jaaye to kalyaan nahi hogaa.. naam kaa khub khub abhyaas karanaa padegaa … isliye bhagavaan ke vachan gitaa ke bhulanaa nahi …bhagavaan ne arjun ko kahaa ki : nisandeha man ko vash karanaa kathin hai lekin abhyaas se ye tu kar sakataa hai ..

abhyaasen tu kauntey vairaagyanech gruhate…

baar baar sansaar ko dekho aur vairaagy laao… ki kitanaa achhaa chale phir bhi kyaa huaa..is sharir ko kitanaa bhi khilaao to kyaa huaa?..aakhir ant men kuchh nahi aane waalaa… somawaar ko janm huaa , mangawaar ko bade huye , budhawaar ko shaadi huyi , guru waar ko bachche huye , shukrwaar ko bimaar huye, shaniwaar ko aspataal gaye , raviwaar ko raam naam saty hai …. aathavaa din to kahin dikh hi nahi rahaa …

log maanate hai ki parikshit raajaa ke paas 7 din the .. par sant kahete hai ki ham sab ke paas bhi 7 din hai.. isliye abhyaas ko khub badhaaye..

ek bahen roj dukaan par jaati thi ..bhaai jaraa ye uparwaali pili saadi dikhaanaa.. nahin vo nili waali nikaalanaa… jaraa vo niche waali ..vo nikaalanaa… vo dukaanawaalaa saadi nikaalataa aur vo chali jaati… aise vo ek din aayi, 2 din aayi, 3 din aayi … dukaan waala is ki baat maan jaataa ki nikaalani hai to kharidegi jarur … aakhir chauthe din aayi to dukaanadaar ne kahaa bahen ji aap roj aati ho, saadiyaan nikalavaati ho par kuchh leti to ho nahi…

to vo bahen dhire se boli : main roj leti hun , par tere ko pataa hi nahi chalataa !!!

is kaa matalab vo roj chori kar ke jaati lekin dukaanwaale ko pataa hi nahi chalataa … aise hi saadhak aise naam kaa abhyaas kare ki main apanaa chitt apanaa man bhagavaan ko saup chukaa hun…

guru naanak ke saab ke vachan hai ki :

jo beche apanaa man santan ke paas

tis saadhak ke sab kaaraj raas

 us saadhak ke sab kaaraj raas hai jo apanaa man santon ke paas bech detaa hai…

kabhi ye man men vichaar nahi laaye ki meri guru dev se aaj tak baat nahi huyi…

kabhi man men ye vichaar nahi laanaa ki ham to baapuji ke yahaa bahot dur baithe the… is kaliyug men , is moh maayaa ke waataavaran men sadguru ke darbaar men aanaa , hari naam japane ki iichchhaa rakhanaa ye iishwar aur guru ke krupaa ke sivaay nahi ho sakataa… aap aaye ho ye unhi ki krupaa aap ko lekar aayi hai…

guru givind singh ji mahaaraaj kabhi kabhi naav ki sair karate the.. sabhi naav men baithate..lekin ek tuti-futi naav thi kisi ki… vo naav najadik nahi laataa thaa…us ko khud ko sankoch hotaa thaa ki main gurudev ki tuti futi naav men baitho… aur paise itane the nahi ki naav ko thik karavaaye… isliye hameshaa thodaa pichhe rahetaa ki meri naav tutifuti hai… lekin jo pichhe rahetaa hai naa , kayi baar vo guru dev ke sab se aage ho jaataa hai… kayi baar jo bahot dur rahetaa hai naa us par sant ki najar sidhi pad jaati hai…

laghutaa men prabhutaa base;prabhutaa se prabhu dur..

to vo naavik namr ho ke kinaare khadaa rahetaa thaa.. ek baar sab naavik ke saath ye bhi khadaa thaa. Aapas men sab bol rahe the ki guru mere naav men 2 baar baithe..kisi ne bola mere naav men to 3 baar baithe…koyi bola aaj gurudev mere naav men baithane waale hai…aise sab aapas men charchaa kar rahe the lekin ye bol nahi paayaa ki mere naav men bhi guru baithenge… cheharaa chhotaa ho gayaa..man murajhaa gayaa.. aur maayus ho kar nadi ke bich men jaa kar rone lagaa.. naav khadi kar di..sochaa sab ke aage kyaa ronaa?… aur aansu bahaate huye guru govind singh ji mahaaraaj ko yaad karane lag gayaa…

chinti ke par nevar vaaje tebhi sahib sun let …

to kyaa sachchaa saadhak – bhagavaan  bhakt ki pukaar bhagavaan nahi sunegaa? Chaahe dubo de, chaahe tiara de..mere jivan ki naiyya hai tere hawaale…

vo bich nadi men jaa kar rone lag gayaa..

guru govind singh ji aaye to sab ne apani saji sawaari naav aage ki guru mahaaraaj padhaare… mahaaraaj ji sab par drushti daale….bole aaj ek naav kam hai …. sab bole haa guruji kam hai lekin vo tutifuti hai ..us men aap nahin baith sakate … guruji ne kahaa lekin vo hai kahaa? Bole guruji pataa nahi abhi to yahi thaa… vo bich nadi men jaa kar khadaa ho gayaa hai….

guru govind singh ji mahaaraaj ne kinaare se aawaaj lagaayi : o guru  pyaare !o pritam pyaare !!

itani aawaaj lagani nahi thi ki vo apan inaav bich majhadhaar se daude daude le aayaa …tab tak kisi ko pataa nahi thaa ki guru mahaaraaj kis naav men baithenge…jaise hi vo naav aayi , guru govindsingh ji mahaaraaj us ke naav men baithe … us kaa tutaa bhaagy jod diyaa…. ye sant mahaa purushon ki krupaa hai…

itanaa anubhav to ham sab ka hai ki

tute bhaagy ko sant det hai jod….

sansaar se uthaa kar hamen

iishwar ki aor dete hai mod…

hruday men guru naam ki jyot jalaa kar

 puraane karmon ko dete hai tod

tute phute  bhaagy ko sant det hai jod….

to kaliyug men kahaa to binaa aag ke sansaar jal rahaa hai …….wahaa guru ne hamen satsang ki thandi chhaayaa di hai…ye satsang kalp vruksh hai …yahaa baitho to man ko shaanti milati hai…hruday ki iichchhaa puri hoti hai vo to chhoti baat hai…lekin ye manushy jeevan kitanaa anamol ratan hai…is ko abhyaas kar ke jivan saphal kaise banaaye ye sant mahaapurushon ke charano men baithane se hi samajh aati hai….

aap sabhi ke shradhdaa bhakti ko pranaam hai …

jholi ham failaate hai ; vo dayaalu daataa dayaa kiye binaa rahe nahi sakate….

om namo bhagavate vaasudevaay…

shri sadgurudev ji bhagavaan ki mahaa jayjaykaar ho!!!!!

Galatiyon ke liye prabhuji kshamaa kare…

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One Comment on “aasan maalaa TIPS: saadhwi Rekhaadidi”

  1. shekhar Says:

    nice post!!

    Sadhu waad for ur seva!!


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