12 saadhan aur prashn-uttar

अम्बाला (हरियाणा ) ; 25 सप्टेम्बर 2011
( for hinglish please scroll down )
ये सत्संग जहा जहा जा  रहा है वे सभी श्राध्द  मंत्र का फ़ायदा उठाए और शरद पूनम की रात को खीर बना कर चंद्रमा की किरणों में रखे….रात को 12 बजे के आसपास चंद्र देव को अर्घ्य  देकर वो खीर खूब चबा चबा के थोड़ी मात्रा में खीर खाए…देर रात को भोजन जठरा पर दबाव डालता है ; पाचन तंत्र पर प्रभाव डालता है…रात को देर से भोजन नही करना चाहिए…लेकिन शरद पूनम की रात को ये खीर खा लेनी चाहिए…

देव कार्य में तो ब्राम्हण  की परीक्षा नही करनी चाहिए , लेकिन श्राध्द जिस ब्राम्हण को खिलाते वो ब्राम्हण व्यसनी तो नही, कर्म कांड को जानता है की धड़ाधड़ करता है.ब्राम्हण की परीक्षा कर के ही श्राध्द कार्य में उस को बुलाना चाहिए…
अब ऐसे ब्राम्हण मिलना तो मुश्किल हो गया है लेकिन देल्ही अहमदाबाद सूरत आदि आश्रमों में सर्व पितृ अमावस्या के दिन श्राध्द की व्यवस्था की गयी है…तो जहा ब्राम्हण आदि व्यवस्था नही हो सकती वहा सूर्य नारायण को अर्घ्य  देकर श्राध्द मंत्र बोल कर अपने पितरों का तर्पण करे… 

भक्त के हृदय में भगवान के लिए वियोग का जो दुख हो रहा है उस के सामने शरीर के रोगों की कोई कीमत ही नही है… भगवान के लिए तड़प सारे संसार के लिए विकारों की तड़प हटा देती है… अपने पास योग्यता,  बल है , अपने पास  ज्ञान  है तो भगवान में विश्वास और भगवान के स्वरूप को समझने में लगाना चाहिए… 

भगवत रस पाने के लिए श्रीमद् भागवत मे 12 बातों की तरफ संकेत किया है… 
1) संत महात्मा को  पूर्व काल में जहाँ भी भगवान मिले है ऐसे जगहों को तीर्थ कहा जाता है..तो बड़ी उमर हो तो तीर्थ का सेवन करना चाहिए…अर्थात तीर्थों में जाना चाहिए.. 
2) महापुरुषों का सान्निध्य और उन के दैवी कार्य की सेवा करनी चाहिए.
3) श्रध्दा –  जिस से भगवत रस प्रगटे ..
4) भगवत लीलाओं का रसपान  करना, भगवत कथा सुनना…
5) हृदय में भगवान के नाम का जप कर के भगवत स्फुरना करना ..चुप बैठे बैठे भगवान  की स्फुरना हो ऐसा प्रयत्न करे…
6) हृदय में भगवान के मिलन की भावना बढ़ाना… मलिन वासनाओं का , छल  कपट का त्याग करना….
7) भगवान को पाने की निष्ठा और अपने  नियम जप में निष्ठा बढ़ाए…
8)  सावधानी से काम, क्रोध, लोभ, मोह ,  अहंकार को निवृत्त करनेवाला बनना चाहिए…
9) हृदय को स्थिर कर के भगवत भक्ति और भगवत रस में लगाना चाहिए…
10) अनासक्त होना चाहिए..किसी भी पुत्र परिवार  संबंधों से आसक्ति नही जोड़े …नहीं तो मरने के बाद वही आना पड़ता है..
11) तत्व ज्ञान  का सत्संग सुनना और उस पर विचार करना.
12) मैं शरीर हूँ और ये मेरी चीज़े है इस प्रकार की बेवकूफी की ग्रंथि खोल देना… शरीर हम नही है , अगर हम शरीर होते तो मरने के बाद शरीर को साथ में ले जाते…शरीर यहा पड़े रहेता है फिर भी हम रहेते है …. बचपन चला गया फिर भी हम है, जवानी चली गयी फिर भी हम है और ये शरीर नही रहेता फिर भी हम रहेते तो हम शरीर नही है…इस प्रकार विवेक कर के ना-समझी की ग्रंथि खोल देनी चाहिए..
तो भागवत में ये 12 उपाय है .. मनुष्य जीवन में भगवत सुख , भगवत ज्ञान , भगवत रस, और भगवत साक्षात्कार का उपाय बताने में ये 12 साधन बड़े उपयोगी माने गये है..
तीर्थ सेवन, महापुरुषों की सेवा, श्रध्दा , भगवत लीला रसपान , हृदय में भगवान को पाने की स्फुरना , मलिन कर्मों से संयम, काम-क्रोध आदि से संयम, हृदय में स्थिर निश्चय  , ईश्वर के सिवाय कहीं भी मन लगाया तो अंत में रोना पड़ेगा…. 

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आदि शंकराचार्य जी ने प्रश्नो उत्तर द्वारा दिव्या ज्ञान  का प्रसार किया है … आम आदमी की बुध्दी  का सात्विक-करण और वैदिक-करण हो इस लिए ये मदद करते है…

प्रश्न : कीं दुर्लभं? इस जगत में दुर्लभ क्या है?…
उत्तर : सत-गुण, सत्संग, ब्रम्‍ह विचार , सर्व वासना और  अहम्  का त्याग , परमात्म ज्ञान  ये सर्व कल्याण कारी दुर्लभ चीज़ है…

प्रश्न : संसार में पथ्य  क्या है? सेवन करने योग्य   क्या है?अतिशय  हीतकारी क्या है?
उत्तर : सनातन धर्म ..ये किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत धर्म नही है…वो सनातन है, अ-पौरुष है, वैदिक है….सनातन धर्म सब से उँचा पथ्य  है…

प्रश्न : ग्रहण  करने योग्य  क्या है?
उत्तर : गुरु वचन ग्रहण  करने योग्य  है…सतपुरुषों के वचन ही अपने जीवन में लाने  योग्य  है…..सतपुरुषों का संग अनंत लाभ देनेवाला है…

प्रश्न : त्याग करने जैसा क्या है?
उत्तर : बुरे कर्म और बुरे विचार.

प्रश्न : जहेर क्या है?
उत्तर : जहेर है  आत्म ग्यानी  महापुरुषों में  अश्रध्दा  और उन के सत-विचारों का तिरस्कार कर के मन-मुख नारकिय जीवों की बातों में फसना  ये विष है , जहेर है… 

प्रश्न : नरक क्या है?
उत्तर : विकारों के वश होना नरक है …

प्रश्न : कीं मरणं ?मरण क्या है ?
उत्तर : बेवकूफी ही मरण  है..मूर्खत्व मरणं …बीमार होता है शरीर- मूर्ख बोलते मैं बीमार हूँ…दुख आता है मन में- मूर्ख बोलते मैं दुखी हूँ…. चिंता होती है चित्त में- मूर्ख बोलते मैं चिंतित हूँ… अरे चिंता को मैं जानता हूँ, बीमारी को मैं जानता हूँ ..बेवकूफी छोड़  दे ! … मूर्खता ही मरण  है…

प्रश्न : अँधा कौन है?
उत्तर : पाप कर्म में जो प्रीति करनेवाला है वो अँधा है..पाप कर्म में जो पश्चाताप  नही करता है और पापी आचरण , पापी चिंतन को जो अपनी होशियारी मानता है वो अँधा है…

प्रश्न : बहिरा कौन है?
उत्तर : जो  हितकर  वचनों को नही सुनता, नही मानता वो बहिरा है… 

प्रश्न : गूंगा कौन है?
उत्तर : जो समय पर प्रिय भाषण नही करता , प्रिय बात नही बोलना जानता है वो गूंगा है…

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अंबाला सत्संग अमृत बिंदु  :
1) संत के हृदय में कोई एक बार बात आती है ना तो शेर के मुँह में आया शिकार तो विफल हो सकता है लेकिन संत के हृदय में कोई बंदा आ गया तो फिर देर सबेर उस की जाँच पड़ताल  तो संत करते ही है…संत कबीर जी ने एक व्यक्ति को सत्संग में आने का आग्रह किया था, लेकिन वो व्यक्ति कुछ  ना कुछ  बहाना कर के संसार के लोभ मोह  में फस कर आख़िर ज़मीन जायदाद और कुटुम्ब के चिंतन   में मरा तो अपने ही घर में बैल बन कर जन्मा और जमीन खेड़ता  …उस की कथा सुना कर पूज्यश्री बापूजी ने कबीर जी की साखी सुनाई : 

बैल बने हल में जुते 
 ले गाड़ी में दीन 
तेली के कोलू बने
फिर कसाई घर लीन 
माँस कटा , बोटी बिकी
चमडन  मढ़ी  नगार
कुछ  कर्म बाकी रहे गये 
उस पर पड  रही मार….
2)  जिन्हो ने ओंकार बीज मंत्र सहित गुरु मंत्र की दीक्षा ली है उन को मरने के बाद नरक में नही जाना पड़ता… अगर यम  दूतों की गड़बड़ी से ग़लती से नरक में जाना पड़ा तो डरना नही; यमराज अथवा यमदूतों  को निर्भय होकर  बोले की आप ने ओंकार मंत्र की दीक्षा ली है, जप किया है, हम को नरक में क्यो लाए? तो मरने के बाद भी आप नरक से वापस आ सकते है…ये पूज्यश्री बापूजी ने अपनी नानी का उदाहरण देकर स्पष्ट किया है..

3) जिन्हो ने दीक्षा ली है ; जो ज़्यादा उमर वाले है वे घर वालों को बोल दे की हमारी दीक्षा की माला हमारे गले में पड़ी रहे, मर जाए तो भी समशान में भी शरीर में माला बनी रहे…  
4)  जो मर जाता है उस के गले में तुलसी की माला है अथवा तुलसी की लकड़ी से उस का अग्नि संस्कार कर दिया जाए  तो उस की दुर्गति  से रक्षा होती है… इसलिए घर घर में तुलसी  के पौधे लगावाओ और दूसरों से तुलसी लगावाओ… 
5)  शरीर के 7 केंद्रो विकास , उन के विकास का विशेष समय , केंद्र विकसित होने पर व्यक्तित्व पर होने वाला प्रभाव.
6) विश्वामित्र मुनि ने विशुध्याख्या  केन्द्र पर सिध्दी  पाई थी ..जिन की ऐसी सिध्दी  है वे महापुरुष अगर क्रोध में कुछ  बोल दे तो पृथ्वी कमपायमान हो सकती है और ऐसे   महापुरुष   विशुध्याख्या  केंद्र में स्थित होकर आशीर्वाद  दे तो कहेना ही क्या!…पूज्यश्री बापूजी ने ये रहस्य राजा दशरथ और विश्वामित्रा  मुनि का उदाहरण देकर समझाया है.
7) ओंकार की साधना, हृदयपूर्वक सुमिरन  के लाभ;  मंत्र का रस्व उच्चारण,  दीर्घ उच्चारण, प्लुत  उच्चारण और उन के लाभ…50 दिन की ओंकार साधना के लाभ.
8)  जो लोग बोलते ये मेरी साथी है, ये मेरा साथी है वो कान खोल के सुन ले उन को नानक जी की बात लिख लेनी चाहिए की जगत में झूठी देखी प्रीत… ..काम की प्रधानता, स्वार्थ से प्रीति दर्शाना ये झूठी प्रीति है…ये सब उल्लू बनाने की बाते है..वास्तव में  ‘मेरे रब और मैं रब का’-  यही सच्ची प्रीति है बाकी सारी झूठी प्रीति है..


ओम शांति.

श्री सद्गुरुदेवजी  भगवान की महा जयजयकार हो!!!!!
ग़लतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे…

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

Ye satsang jahaa jaa rahaa hai ve sabhi shradhd mantr ka phaayadaa uthaaye aur sharad poonam ki raat ko khir banaa kar chandramaa ki kiranon men rakhe….raat ko 12 baje ke aasapaas chandr dev ko arghya dekar vo khir khub chabaa chabaa ke thodi maatraa men khir khaaye…der raat ko bhojan jatharaa par dabaav daalataa hai ; paachan tantr par prabhaav daalataa hai…raat ko der se bhojan nahi karanaa chaahiye…lekin sharad poonam ki raat ko ye khir khaa leni chaahiye…

 

Dev kaary men to braamhan ki parikshaa nahi karani chaahiye , lekin shraadhd jis braamhan ko khilaate vo braamhan vyasani to nahi, karm kaand ko jaanataa hai ki dhadaadhad karataa hai..braamhan ki parikshaa kar ke hi shraadhd kaary men us ko bulaanaa chaahiye…

Ab aise braamhan milanaa to mushkil ho gayaa hai lekin delhi ahamadaabaad surat aadi aashramon men sarv pitri amaavasyaa ke din shraadhd ki vyavasthaa ki gayi hai…to jahaa braamhan aadi vyavasthaa nahi ho sakati wahaa sury narayan ko arghya  dekar shradhd mantr bol kar apane pitaron kaa tarpan kare…

 

Bhakt ke hruday men bhagavaan ke liye viyog kaa jo dukh ho rahaa hai us ke saamane sharir ke rogon ki koyi kimat hi nahi hai… bhagavaan ke liye tadap saare sansaar ke liye vikaaron ki tadap hataa deti hai… apane paas yogyataa,  bal hai , apane paas  gyaan hai to bhagavaan men vishwaas aur bhagavaan ke swarup ko samajhane men lagaanaa chaahiye…

 

Bhagavat ras paane ke liye shrimad bhaagavat me 12 baaton ki taraf sanket kiyaa hai…

1) Sant mahaatmaa purv kaal men jahaan bhi bhagavaan mile hai aise jagahon ko tirth kahaa jaataa hai..to badi umar ho to tirth ka sewan karanaa chaahiye…arthaat tirthon men jaanaa chaahiye..

2) mahaapurushon kaa saannidhya aur un ke daivi kaary ki sewaa karani chaahiye.

3) Shradhdaa  jis se bhagavat ras pragate..

4) Bhagavat lilaaon kaa ras paan karanaa, bhagavat kathaa sunanaa…

5) Hruday men bhagavaan ke naam kaa jap kar ke bhagavat sphuranaa karanaa ..chup baithe baithe bhagavaan  ki sphuranaa ho aisaa prayatn kare…

6) Hruday men bhagavaan ke Milan ki bhaavanaa badhaanaa… malin waasanaaon kaa , chhal kapat kaa tyaag karanaa….

7) Bhagavaan ko paane ki nishthaa aur apane  niyam jap men nishthaa badhaaye…

8)  Saawadhaani se kaam, krodh, lobh, moh,  ahankaar ko nivrutt karanewaalaa banana chaahiye…

9) Hruday ko sthir kar ke bhagavat bhakti aur bhagavat ras men lagaanaa chaahiye…

10)                  Anaasakt honaa chaahiye..kisi bhi putra pariwaar  sambandhon se aasakti nahi jode …nahin to marane ke baad wahi aanaa padataa hai..

11)                  Tatvgyaan kaa satsang sunanaa aur us par vichaar karanaa.

12)                  Main sharir hun aur ye meri chije hai is prakaar ki bewkufi ki granthi khol denaa… sharir ham nahi hai , agar ham sharir hote to marane ke baad sharir ko saath men le jaate…sharir yahaa pade rahetaa hai phir bhi ham rahete hai …. bachapan chalaa gayaa phir bhi ham hai, jawaani chali gayi phir bhi ham hai aur ye sharir nahi rahetaa phir bhi ham rahete to ham sharir nahi hai…is prakaar vivek kar ke naa-samajhi ki granthi khol deni chaahiye..

To bhaagavat men ye 12 upaay hai .. manushy jeevan men bhagavat sukh , bhagavat gyaan, bhagavat ras, aur bhagavat saakshaatkaar kaa upaay bataane men ye 12 saadhan bade upayogi mane gaye hai..

Tirth sewan, mahaapurushon ki sewaa, shradhdaa, bhagavat leela rasapaan , hruday men bhagavaan ko paane ki phuranaa, malin karmon se sanyam, kaam-krodh aadi se sanyam, hruday men sthir nischay , iishwar ke siwaay kahin bhi man lagaayaa to ant men ronaa padegaa….

 

*********

Aadi shankaraachaary ji ne prashno uttar dwaara divya gyaan ka prasaar kiyaa hai … aam aadami ki budhdi kaa saatvik-karan aur vaidik-karan ho is liye ye madad karate hai…

 

Prashn : kim durlabham? Is jagat men durlabh kyaa hai?…

Uttar : sat-gun, satsang, bramh vichaar , sarv waasana aura ham ka tyaag , paramaatm gyaan ye sarv kalyaan kaari durlabh chij hai…

 

Prashn : sansaar men pathya kyaa hai? Sewan karane yogya kyaa hai?atishay heetkaari kyaa hai?

Uttar : sanaatan dharm ..ye kisi vyakti kaa vyaktigat dharm nahi hai…vo sanaatan hai, a-paurush hai, vaidik hai….sanaatan dharm sab se unchaa pathya hai…

 

Prashn : graham karane yogya kyaa hai?

Uttar : guru vachan graham karane yogya hai…satpurushon ke vachan hi apane jeevan men lane yogya hai…..satpurushon kaa sang anant laabh denewaalaa hai…

 

Prashn : tyaag karane jaisaa kyaa hai?

Uttar : bure karm aur bure vichaar.

 

Prashn : jaher kyaa hai?

Uttar : jaher hai aatmgyaani mahaapurushon men ashradhdaa aur un ke sat-vichaaron kaa tiraskaar kar ke man-mukh naarakiy jivon ki baton men phasanaa  ye vish hai , jaher hai…

 

Prashn : narak kyaa hai?

Uttar : vikaaron ke vash honaa narak hai …

 

Prashn : kim maranam?

Uttar : bewkufi hi maran hai..murkhatvam maranam…bimaar hotaa hai sharir- murkh bolate main bimaar hun…dukh aataa hai man men- murkh bolate main dukhi hun…. chintaa hoti hai chitt men- murkh bolate main chintit hun… are chintaa ko main jaanataa hun, bimaari ko main jaanataa hun ..bewkufi chhod de…murkhataa hi maran hai…

 

Prashn : andhaa kaun hai?

Uttar : paap karm men jo priti karanewaalaa hai vo andhaa hai..paap karm men jo paschaataap nahi karataa hai aur paapi aacharan , paapi chintan ko jo apani hoshiyaari maanataa hai vo andhaa hai…

 

Prashn : bahiraa kaun hai?

Uttar : jo heetkar vachanon ko nahi sunataa, nahi maanataa vo bahiraa hai…

 

Prashn : gungaa kaun hai?

Uttar : jo samay par priy bhaashan nahi karataa , priy baat nahi bolanaa jaanataa hai vo gungaa hai…

 

*****************

 

AMBAALAA SATSANG AMRUTBINDU :

1) Sant ke hruday men koyi ek baar baat aati hai naa to sher ke munh men aayaa shikaar to vifal ho sakataa hai lekin sant ke hruday men koyi bandaa aa gayaa to phir der saber us ki jaanch padataal  to sant karate hai…sant kabir ji ne ek vyakti ko satsang men aane kaa aagrah kiyaa thaa, lekin vo vyakti kuchh naa kuchh bahaanaa kar ke sansaar ke lobh moh men phas kar aakhir jamin jaayadaad aur kutumb ke moh men maraa to apane hi ghar men bail ban kar janamaa…us ki kathaa sunaa kar pujyashri bapuji ne kabir ji ki saakhi sunaayi :

 

Bail bane hal men jute

 Le gaadi men din

Teli ke kolu bane

Phir kasaayi ghar lin

Maans kataa , boti biki

Chamadan madhi nagaar

Kuchh karm baaki rahe gaye

us par pad rahi maar….

2)  Jinho ne omkaar bij mantr sahit guru mantr ki dikshaa li hai un ko marane ke baad narak men nahi jaanaa padataa… agar yamduto ki gadabadi se Galati se narak men jaanaa padaa to daranaa nahi; yamaraaj athava ayamduto ko nirbhay hokar  bole ki aap ne omkaar mantr ki dikshaa li hai, jap kiyaa hai, ham ko narak men kyo laaye? To marane ke baad bhi aap narak se waapas aa sakate hai…ye Pujyashri Baapuji ne apani naani kaa udaaharan dekar spasht kiyaa hai..

 

3) Jinho ne dikshaa li hai ; Jo jyaadaa umar waale hai ve ghar waalon ko bol de ki hamaari dikshaa ki maalaa hamaare gale men padi rahe, mar jaaye to bhi samshaan men bhi sharir men mala bani rahe…  

4)  Jo mar jaataa hai us ke gale men tulasi ki mala hai athavaa tulasi ki lakadi se us kaa agni sanskaar kar diyaa jay to us ki durgati  se rakshaa hoti hai… isliye ghar ghar men tulasi  ke paudhe lagavaao aur dusaron se tulasi lagavaao…

5)  Sharir ke 7 kendro vikaas , un ke vikaas kaa vishesh samay , kendr vikasit hone par vyaktitv par hone waala prabhaav.

6) Vishwaamitra muni ne Vishudhyaakhyaa Kendra par sidhdi paayi thi ..jin ki aisi sidhdi hai ve mahaapurush agar krodh men kuchh bol de to pruthvi kampaayamaan ho sakati hai au raise mahaapurush  vishudhyaakhyaa kendr men sthit hokar aashirwaad  de to kahenaa hi kyaa!…pujyashri baapuji ne ye rahasya raja dasharath aur vishwaamitra  muni ka udaaharan dekar samajhaayaa hai.

7) Omkaar ki saadhanaa, hrudaypurvak sumiran  ke laabh;  mantr kaa rasw uchchaaran,  dirgh uchchaaran, plut uchchaaran aur un ke laabh.50 din ki omkaar saadhanaa ke laabh.

8)  Jo log bolate ye meri sathi hai, ye meraa saathi hai vo kaan khol ke sun le un ko naanak ji ki baat likh leni chaahiye ki jagat men jhuthi dekhi prit… ..Kaam ki pradhaanataa, swaarth se priti darshaanaa ye jhuthi priti hai…ye sab ullu banaane ki baate hai..vaastav men mere rab aur main rab kaa yahi sachchi priti hai baaki saari jhuthi priti hai..

 

 

Om shaanti.

 

Shri sadgurudevji  bhagavaan ki mahaa jayjaykaar ho!!!!!

Galatiyon ke liye prabhuji kshamaa kare…

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


 





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