भगवान का आश्रय लो…

 

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चंडीगढ़ ; 18 सप्टेंबर 2011

भगवान का आश्रय लेकर चलो तो कौन से कौन से फायदे होते इस का मैं वर्णन करूँ तो मैं वर्णन नहीं कर पाऊँगा …. ऐसा कौनसा फायदा रहे जाता है जो भगवान का आश्रय लेनेवाले को , भगवान को प्रीति करने वाले को नहीं मिला ?…..

तुलसीदास जी महाराज प्रसिध्द हुये तो लोग उन को गुरु महाराज मानने लगे… गुरु पूनम को पत्रम,पुष्पम, सन्मान में कोई कुछ तो कोई कुछ सामान ले आए …. चोर उचक्के की नजर पड़ी की गुरु पूनम के लिए बाबा के पास बहोत माल होगा …. चोर आए चोरी करने के लिए …. ज्यों ही तुलसीदास जी की वाटिका में चोर आए तो देखा की 2 द्वारपाल हैं – एक शाम वर्ण और एक गौर वर्ण ….. और बड़े सजाग है … धनुष्य बाण लेकर तैयार खड़े है …. चोर घबराये … सोच की ये चौकीदार आगे पीछे हो जाये , जरा नींद का झोका खाये तब हम जाये …. जब जब मोका देख कर आते की चौकीदार सोये की नहीं तब तब वे चौकीदार सजाग ही थे ….. ऐसे एक रात में वे चोर कई बार आए…. तो जितनी बार आए उतनी बार उन को उन चौकीदार अर्थात राम जी और लक्ष्मण जी के दर्शन हुये …..तो मूर्ति के दर्शन से मन पवित्र हो जाता है … संत के दर्शन से तो और अधिक पवित्र हो जाता है ; क्यो की मूर्ति बेचारी बोलती नहीं , संकल्प करती नहीं , हम को पहेचानती नहीं ….संत तो बोलते भी है , पहेचानते भी है और संकल्प भी करते है …तो मूर्ति से भी हजार गुना साक्षात संत के दर्शन से फायदा होता है …. मूर्ति से तो अपने भावना का ही फल मिलता है ; लेकिन संत के दर्शन से भावना के उपरांत उन की निगाहों का , उन के ज्ञान का , उन के तनमात्राओं का , वातावरण का ऐसे कई लाभ होते है …. संत के यहा तो जागृत परमात्म चैत्यन्य है… इसलिए कबीर जी कहेते की संत के दर्शन दिन में कई बार करो …. कई बार नहीं कर सकते तो 2 बार कर लो …दिन में 2 बार भी नई कर सकते तो 1 बार कर लो …. एक बार भी नहीं कर सकते तो दूजे दिन कर लो, दूजे भी नहीं कर सकते तो चौथे दिन कर लो …. चौथे दिन भी नहीं कर सकते तो सप्ताह मे कर लो ….सप्ताह मे भी नहीं कर सके तो पाख पाख – 15 दिन मे कर लो … 15 दिन में भी संत दर्शन नहीं कर पाते हो मास मास कर लो …. कहे कबीर काल दगा नहीं देवे …..

साधु नाम दर्शनम पातक नाशनम l

कबीरा दर्शन साधु के साहिब आवे याद ….

लेखे में वो ही घड़ी , बाकी के दिन बाद ll

नर्स को देखते तो अस्पताल याद आता , पुलिस की वर्दी को देखते तो ठाना याद आता , काले कोट वाले को देखते तो कोर्ट याद आता , लेकिन संत को देखते तो प्रभु तेरी याद आती है ….. ॐ ॐ आनंद ॐ …..

चोर सुबह तुलसीदास जी के पास आकर फुट फुट के रोये की महाराज हम आए थे आप के यहा चोरी करने के लिए …. अब चोरी का तो इरादा बादल गया …. अब केवल आप अपने चौकीदारों का एक बार और दर्शन करा दो …..

तुलसीदास जी चकित हुये की कौन चौकीदार ?

बोले एक शाम वर्ण थे , एक गौर वर्ण थे , और धनुष्यधारी थे … उन के दर्शन करने से हमारा मन चोरी करने से उपराम हो गया ….. लेकिन उन के एक बार और दर्शन करा दो महाराज …..

तुलसीदास जी समझ गए की मेरे पास गुरु पूनम का इतना सामान आया – भगवान आश्रय दाता है लेकिन कार्य निर्वाहक और वस्तु के रक्षक भी भगवान है …. मैं इतना संग्राही हो गया हूँ की भगवान को चौकीदारी करने के लिए आना पड़ता है …. गरीब गुरबों को बुला कर सब सामान बाट दिया ….

उस जमाने में ऐसी समितियां नहीं बनी होंगी शिष्यों की …. यहा तो जो भी सामान आए वो जरूरत मंदो को भेजने का काम समितियां कर लेती है … J

अभी उड़ीसा में बाढ़ आई तो समिति के लोगो ने मदद और जरूरी सामान पहुंचाने की सुंदर व्यवस्था की ….

नारायण हरि…हरि ॐ हरि…..

यहा ठाकुर जी को चौकीदारी तो नहीं करनी पड़ती लेकिन फिर भी ठाकुर जी ही सभी के रूप में समिति वालों के प्रेरक , उन के कार्य के निर्वाहक , सभी के रक्षक ठाकुर जी ही तो है !!!

समितियों के द्वारा मेरा कार्य ठाकुरजी ही कर रहे है …. जय राम जी की ! 🙂

ठाकुर जी माना वो अंतर आत्मा ठाकुर जी परमेश्वर !…. तो आप ईश्वर को चाहते तो ईश्वर आप को चाहते , आप के कार्य  को सुगम बनाते , सुरम्य बनाते और कार्य का निर्वाह भी करते…. मैं अकेला 17 हजार बाल संस्कार नहीं खड़ा कर सकता था …. इतने आश्रम नहीं बना सकते  थे  … मैंने कोई आश्रम नहीं बनाया …जो भी आश्रम है समिति वालों ने बनाए है …. आज्ञा दे दो बोलते तो करो बाबा …. तो कार्य के प्रेरक ,कार्य निर्वाहक वो ईश्वर है …. आप अपने को कर्ता मान कर , अपने को सुखी और दुखी मान कर पचड़े में मत पड़िये ….

आप अपने को भगवान का मानिए और भगवान को अपना मानिए … भगवान का आश्रय लीजिये …. सुबह उठते ही भगवान के नाम में थोड़ी देर शांत हो जाइए और रात को सोते समय भी श्वास अंदर जाये तो ॐ , श्वास बाहर आए तो गिनती , इस प्रकार श्वासोश्वास में भगवान का नाम लीजिये … ॐ , राम अथवा जो भी भगवान का नाम आप को रुचता हो ….

जब ही नाम हृदय धरयो भयो पाप को नाश l

जैसे चिनगी आग की पड़ी पुराने घास ll

आप पूर्व काल में चाहे कैसे भी पापी है , कितने भी आप में ऐब है लेकिन उन ऐबों को अपने पर थोप कर आप परेशान ना होईए ….. ऐब है तो मन में है , रोग है तो तन में है …. राग द्वेष है तो बुद्धी में है ; लेकिन ये जीवात्मा तो वास्तव में परमात्मा का ही है …..

ऐसा कोई तरंग नहीं जो पानी का ना हो …. ऐसा कोई सोने का गहेना नहीं है जो सोने का ना हो …. ऐसा कोई घड़े का आकाश , अथवा मठ मकान केबिन का आकाश नहीं है जो महा आकाश का ना हो …. ऐसा कोई जीव नहीं जो ईश्वर का ना हो …..

जीव जब ईश्वर का होकर ईश्वर को पुकारता है तो भक्तो के कारज , संतों के कारज भगवान स्वयं ही सवारते है …..

गुजरात में संत नरसी मेहता हो गए …. भजन कीर्तन करते… अच्छे लोग उन का आदर करते… नास्तिक लोग उन का मज़ाक उड़ाते …. उस जमाने में यात्रा में जाते तो रास्ते में चोर डकैत पैसे लूट लेते इसलिए लोग सावकारो की अथवा सुवर्णकारों की पेढ़ी पर पैसे देकर हुंडी बनवा लेते , हुंडी ऐसे होती थी की जैसे आज कल डिमांड ड्राफ्ट बनता है ….

तो एक आदमी यात्रा में जा रहा था …. पूछा की यहा कौन है ऐसा की जिस की पेढ़ी द्वारका मे भी है …. तो मज़ाक करने वालों ने उस आदमी को बोला की अरे नरसी मेहता की बहोत बड़ी पेढ़ी है , उन की द्वारिका में भी पेढ़ी है … नरसी मेहता तो ठनठन पाल थे …

वो आदमी नरसी मेहता के पास आया …. बोला की आप ये 100 रुपैया लो और मेरे को द्वारिका की हुंडी लिख दो …मतलब मुझे ये हुंडी दिखा कर द्वारिका में पैसे मिल जाये खर्चा करने के लिए … रास्ते में चोरी का दर नहीं रहेगा … मैं द्वारिका मे तीर्थ यात्रा करने जा रहा हूँ ….

संत नरसी मेहता जी तनिक शांत हुये …सोचे की पैसों की तो मुझे भी जरूरत है …….. मेरी तो कोई पेढ़ी नहीं फिर आया तो इस आदमी को मेरे पास भगवान ने ही भेजा है…. तो बोले की ठीक है लाओ पैसे हुंडी लिख देता हूँ … उस आदमी ने सोचा की नरसी मेहता आदमी  तो सच्चा लगता है … 100 रूपिये की जगह 1000 रूपिये की हुंडी बनवा लेता हूँ , यात्रा मे काम आयेगा पैसा , और बच गया तो आते समय वापिस वहा से हुंडी बनवा के आऊँगा … द्वारिका में भी तो इन की पेढ़ी है ही …उस आदमी ने 1000 रूपिये नरसी मेहता जी को दे दिये और नरसी मेहता जी ने चिट्ठी पे लिख दिया की मेरी पेढ़ी का नाम है सावरिया सेठ … वाहा आप को पैसे मिल जाएँगे …. वो आदमी यात्रा मे चला गया …द्वारिका मे आया …. वहा सावरिया सेठ की पेढ़ी पुछे तो सभी बोलते की इस नाम की कोई पेढ़ी नहीं है …. नरसी मेहता जी का तो सावरिया सेठ माने सावला सलोना कृष्ण … J  … द्वारिका के दुकानदार बोले सावरियाँ सेठ नाम की कोई पेढ़ी नहीं तो वो आदमी सोचे की अब क्या करूंगा क्या खाऊँगा परदेस में …. ऐसा सोच ही रहा था की उस के सामने एक प्रभावशाली व्यक्ति आया …. बोला तुम किस को ढूंढ रहे हो ? बोले सावरियाँ सेठ को ….वो प्रभावशाली व्यक्ति बोला , सावरियाँ सेठ तो मैं ही हूँ !  लाओ तुम्हारी हुंडी …. उस ने यात्री को 1000 रूपिये थमा दिये …वो आदमी तो खुश हो गया ….

पैसे थमाने वाला पैसे थमाते उस के पहेले नरसी मेहता गाते :

म्हारी हुंडी स्वीकार जो महाराज शामला गिरिधारी ॥

म्हारों एकज तमारों आधार हो  शामला गिरिधारी ll

हे सावले गिरिधारी मैंने तो हजार रूपिये ले लिए , अब उस आदमी को आप ही भरपाई करना , आप के नाम की चिट्ठी लिखी है ….

तो भगवान का आश्रय लेने से भगवान छोटे मोटे काम भी कर लेते है … बड़े में बड़ा काम है अपने स्वरूप का ज्ञान  !!!!

दान 3 प्रकार का होता है …एक तो होता है द्रव्य दान रूपिये पैसे चीज वस्तु आदि का …इस को बोलते  धर्म दान….. इस के 3 उप प्रकार है : सात्विक दान (देश, काल, वस्तु , पात्र को देख कर किया जाता है वो सात्विक दान ) , राजस दान (कोई आया है , देना पड़ता है नहीं तो इज्जत का सवाल है ऐसे दान को बोलते राजस दान ) और तमस दान (किसी से जान छुड़ाने के दिया जाता की खून पीने आ गया जा ले –इस प्रकार का दान तमस दान होता है  …. )

दूसरा होता है भक्ति दान …..  भगवान के प्रति आस्था जगा दी …. भगवान के प्रति प्रीति जगा दी …. भगवान के स्वभाव का वर्णन कर के भगवान हमारे परम सुहूर्द है , हितेशी है ऐसा भाव भर दिया तो ये भक्ति दान हुआ …भक्ति दान धरम दान से हजारो गुना ऊंचा है … भक्ति दान लेने वाले व्यक्ति ने इस लोक में और मरने के बाद भी भगवान का आश्रय लिया तो उस व्यक्ति की रक्षा इस लोक मे और मरने के बाद  पर लोक में भी होती है …

लेकिन भक्ति दान से भी श्रेष्ठ दान है ब्रम्ह्ज्ञान का दान …. ब्रम्ह ज्ञान माने भगवान जिस से भगवान है , तरंग जिस से तरंग है , बुलबुला जिस से बुलबुला है , झाग जिस से झाग है , भंवर जिस से भंवर है वो पानी है ….इन  सब का मूल तत्व पानी है … ऐसे ही सभी का मूल तत्व पर ब्रम्ह परमात्मा – साक्षी ब्रम्ह ही है … ऐसा ब्रम्ह ज्ञान का दान तो कोई ब्रम्ह ज्ञानी सद्गुरु ही दे सकते है , ये भक्तो के बस का नहीं ….

तो धरम दान से भक्ति दान हजारो गुना ऊंचा है , लेकिन भक्ति दान से भी श्रेष्ठ दान है ब्रम्ह्ज्ञान का दान …. इस का कोई वर्णन नहीं कर सकता ….

आप भगवान के आश्रय को स्वीकार करते है तो आप को इतना फायदा होता है की जिस का मैं वर्णन नहीं कर सकता हूँ …. मेरे को जो फायदा हुआ उस की  मैं कल्पना नहीं कर सकता ….तो आप भगवान का आश्रय लो … जितना हृदय पूर्वक भगवत आश्रय लेंगे उतना आप की बुध्दी में भगवत ज्ञान  प्रगट होता है ….

ज्ञान के लिए पोथे नहीं पढ़ने पड़ते , मजा लेने के लिए क्लबों में नहीं जाना पड़ता , स्वास्थ्य के लिए गोलियां नहीं खानी पड़ती … मैं अपने आप में तृप्त हूँ !

जैसे नारायण अपने आप में तृप्त है …. इन्द्र को आनंद के लिए अप्सराओं नाच गाना देखना पड़ता है …लेकिन भगवान नारायण अपने आप में तृप्त है …ऐसे ही ब्रम्ह्ज्ञान से आप अपने आप में तृप्त रहेते ….

सा तृप्तों भवति – वो तृप्त होता है l

सा  अमृतों भवति – वो अमृतमय होता है l

स्व तरती , लोकान तारिती – स्वयं तर जाता है , लोगों को तारता है ….

तो जो ईश्वर का आश्रय लेते है , ईश्वर उन को अपने स्वभाव से तदाकार कर देते है ….

एक मोह रूप रावण है , मोह का अर्थ है की उलटा ज्ञान … वास्तव मे आप जो है उस को भूल कर , आप जो नहीं है उस को आप  मैं मानते हो – इस को बोलते है मोह …. मोह सब व्याधियों का मूल है … मोह होते  ही  अहंकार उभरता है … अहंकार में फिर कामनाए आती है की मुझे ये मिले, वो मिले…  

जब ये मिले , वो मिले ऐसी कामनाएँ होती तो कामना पूर्ति में दंभ आ जाता है …रावण ने भी दंभ किया ….रूप लेकर सीता को हरण किया  और दंभ में अगर विघ्न पड़ता है तो हिंसा आ जाती है … जैसे रावण ने जटायु के पंख काट डाले …

तो मोह , मोह से अहंकार , अहंकार से कामना , कामना से दंभ और दंभ से हिंसा …. जटायु की हिंसा कर डाली , पंख काट डाले … तो अपने आत्मा का ज्ञान नहीं है इसलिए शरीर को मैं मान कर सुख होने की गलती करते तो ये मोह हो गया ….

दुनिया में अगर सुख शांती लाना है तो मोह मिटा कर परस्पर भावयंतों हो ….

आज के नेताओं को ये पता ही नहीं …लचीले भाषण देकर ऐसा दिखाते की उन को वोट देने से स्वर्ग जैसा बना देंगे ….  हिरण्यकश्यपू की 60 हजार वर्ष की तपस्या के बल से बिना जोते, बिना बोये , बिना खेड़े फसल लहेलहाने लगती , ऐसा तो कोई नेता दे नहीं सकता …. रावण ने सोने की लंका बनाई थी , कोई नेता जनता को सोने के मकान तो बना कर नहीं दे सकता … फिर भी उन की प्रजा तो दुखी हो कर मरी … क्यो की भगवान का आश्रय नहीं लिया था …

वोट नहीं दो ऐसा मेरा कहेना नहीं, वोट तो देना ही चाहिए …. लेकिन सूझ बुझ हो … श्रध्दा  नहीं रखों ऐसा नहीं , यकीन तो होना चाहिए , श्रध्दा तो होनी ही चाहिए , लेकिन श्रध्दा के साथ बुध्दी योग भी होना जरूरी है ….

वोट दो तो बुध्दी योग से , श्रध्दा करो तो बुध्दी योग से … जियो तो बुध्दी योग से की आखिर कब तक? मकान बन गया , बेटे हो गए आखिर कब तक ? नोकरी गयी  फिर क्या? जिन को नोकरी मिली है उन के दुख दूर हो गए क्या ? नोकरी मिल जाये , शादी हो जाये , बच्चा हो जाये , बच्चा बीमार न हो …फिर क्या ? तत: किम तत: किम ? आखिर तो मृत्यु आएगी …मृत्यु आने के पहेले जहा मृत्यु की दाल नहीं गलती उस परमात्मा अंतर्यामी देव का आश्रय ले लो …. हाथ जोड़ कर प्रार्थना करता हूँ …बहुत फायदा होगा … तुम्हें इतना ऊंचा  फायदा होगा की तुम्हारे सर्ट्फिकेट, तुम्हारे रूपिये पैसे , तुम्हारा नाक रगड़ना , तुम्हारी ज्वेलरी सब अपनी जगह पर नन्ही हो जाएगी …. इतना ऊंचा फायदा होगा कि दुनिया के सारे सुख सुविधा , हार सिंगार , स्वर्ग का वैभव फीका हो जाएगा … ऐसा आप को आत्म वैभव मिलेगा …. और वो दूर नहीं , दुर्लभ नहीं , परे नहीं पराया नहीं …

दिले तसबीरे है यार , जब भी गर्दन झुका ली , मुलाक़ात कर ली ….

वो थे ना मुझ से दूर ना मैं उन से दूर था , आता न था नजर तो नजर का कसूर था ….

सद्गुरु के ज्ञान दान से नजरिया मिल गयी ! मुझे लीलाशाह प्रभुजी से नजरिया मिल गयी ऐसे आप भी नजरिया पा लो …..

नजरे बदली तो नजारे बदले

किश्ती ने बदला रुख तो किनारे बदले ….

आप के जीवन के किश्ती का थोड़ा रुख बदल दो …बाहर से अंदर सुख भरने की मोहमयी चाल है ना , इसी से अपन दुखी होते है ….सुख के लिए बाहर भटकोगे तो चंचल हो जाओगे …. मजा लेने के लिए खाओगे तो बीमार हो जाओगे … सुख के लिए जहा सचमुच सुख है वहा पहुँच जाओ …बाबा कैसे पहुंचे ? चलो मैं ले चलता हूँ …. (पुज्यश्री बापुजी ने दिव्य ओंकार साधना  करवाई…. )    

ॐ शांती ।

श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जय जयकार हो !!!!!

गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे ….. 

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

CHANDIGADH; 18 SEPT 2011

bhagavAna  kA Ashraya  lekara  chalo to kauna se kauna se phAyade hote isa kA mai  varNana karU.N to mai varNana nahI  kara pAU.NgA ;……. aisA kaunasA  phAyadA rahe jAtA hai jo bhagavAna kA Ashraya lenevAle ko , bhagavAna ko prIti karane vAle ko nahI  milA ?……

 

tulasIdAsa jI mahArAja prasidhda huye to loga una ko guru mahArAja mAnane lage……guru pUnama ko patrama,puShpama, sanmAna meM koI kuChha to koI kuChha sAmAna le Aye …… chora uchakke kI najara pa.DI kI guru pUnama ke lie bAbA ke pAsa bahota mAla hogA …… chora Ae chorI karane ke lie …… jyoM hI tulasIdAsa jI kI vATikA meM chora Ae to dekhA kI 2 dvArapAla haiM – eka shAma varNa aura eka gaura varNa ……. aura ba.De sajAga hai ……dhanuShya bANa lekara taiyAra kha.De hai …… chora ghabarAye ……socha kI ye chaukIdAra Age pIChe ho jAye , jarA nIMda kA jhokA khAye taba hama jAye …… jaba jaba mokA dekha kara Ate kI chaukIdAra soye kI nahIM taba taba ve chaukIdAra sajAga hI the ……. aise eka rAta meM ve chora kaI bAra Ae…… to jitanI bAra Ae utanI bAra una ko una chaukIdAra arthAta rAma jI aura lakShmaNa jI ke darshana huye …….to mUrti ke darshana se mana pavitra ho jAtA hai ……saMta ke darshana se to aura adhika pavitra ho jAtA hai ; kyo kI mUrti bechArI bolatI nahIM , saMkalpa karatI nahIM , hama ko pahechAnatI nahIM ……saMta to bolate bhI hai , pahechAnate bhI hai aura saMkalpa bhI karate hai &8230;to mUrti se bhI hajAra gunA sAkShAta saMta ke darshana se phAyadA hotA hai …… mUrti se to apane bhAvanA kA hI phala milatA hai ; lekina saMta ke darshana se bhAvanA ke uparAMta una kI nigAhoM kA , una ke j~nAna kA , una ke tanamAtrAoM kA , vAtAvaraNa kA aise kaI lAbha hote hai …… saMta ke yahA to jAgR^ita paramAtma chaityanya hai……isalie kabIra jI kahete kI saMta ke darshana dina meM kaI bAra karo …… kaI bAra nahIM kara sakate to 2 bAra kara lo &8230;dina meM 2 bAra bhI naI kara sakate to 1 bAra kara lo …… eka bAra bhI nahIM kara sakate to dUje dina kara lo, dUje bhI nahIM kara sakate to chauthe dina kara lo …… chauthe dina bhI nahIM kara sakate to saptAha me kara lo ……saptAha me bhI nahIM kara sake to pAkha pAkha – 15 dina me kara lo ……15 dina meM bhI saMta darshana nahIM kara pAte ho mAsa mAsa kara lo …… kahe kabIra kAla dagA nahIM deve …….

 

sAdhu nAma darshanama pAtaka nAshanama l

 

kabIrA darshana sAdhu ke sAhiba Ave yAda ……

 

lekhe meM vo hI gha.DI , bAkI ke dina bAda ll

 

narsa ko dekhate to aspatAla yAda AtA , pulisa kI vardI ko dekhate to ThAnA yAda AtA , kAle koTa vAle ko dekhate to korTa yAda AtA , lekina saMta ko dekhate to prabhu terI yAda AtI hai ……. oM oM AnaMda oM …….

 

chora subaha tulasIdAsa jI ke pAsa Akara phuTa phuTa ke roye kI mahArAja hama Ae the Apa ke yahA chorI karane ke lie …… aba chorI kA to irAdA bAdala gayA …… aba kevala Apa apane chaukIdAroM kA eka bAra aura darshana karA do …….

 

tulasIdAsa jI chakita huye kI kauna chaukIdAra ?

 

bole eka shAma varNa the , eka gaura varNa the , aura dhanuShyadhArI the ……una ke darshana karane se hamArA mana chorI karane se uparAma ho gayA ……. lekina una ke eka bAra aura darshana karA do mahArAja …….

 

tulasIdAsa jI samajha gae kI mere pAsa guru pUnama kA itanA sAmAna AyA – bhagavAna Ashraya dAtA hai lekina kArya nirvAhaka aura vastu ke rakShaka bhI bhagavAna hai …… maiM itanA saMgrAhI ho gayA hU.N kI bhagavAna ko chaukIdArI karane ke lie AnA pa.DatA hai …… garIba guraboM ko bulA kara saba sAmAna bATa diyA ……

 

usa jamAne meM aisI samitiyAM nahIM banI hoMgI shiShyoM kI …… yahA to jo bhI sAmAna Ae vo jarUrata maMdo ko bhejane kA kAma samitiyAM kara letI hai …… 🙂 

 

abhI u.DIsA meM bA.Dha AI to samiti ke logo ne madada aura jarUrI sAmAna pahunchAne kI sundara vyavasthA kI ……

 

nArAyaNa hari&8230;hari oM hari…….

 

yahA ThAkura jI ko chaukIdArI to nahIM karanI pa.DatI lekina phira bhI ThAkura jI hI sabhI ke rUpa meM samiti vAloM ke preraka , una ke kArya ke nirvAhaka , sabhI ke rakShaka ThAkura jI hI to hai !!!

 

samitiyoM ke dvArA merA kArya ThAkurajI hI kara rahe hai …… jaya rAma jI kI ! 

 

ThAkura jI mAnA vo aMtara AtmA ThAkura jI parameshvara !…… to Apa Ishvara ko chAhate to Ishvara Apa ko chAhate , Apa ke kArya  ko sugama banAte , suramya banAte aura kArya kA nirvAha bhI karate…… maiM akelA 17 hajAra bAla saMskAra nahIM kha.DA kara sakatA thA …… itane Ashrama nahIM banA sakate  the  ……maiMne koI Ashrama nahIM banAyA ….jo bhI Ashrama hai samiti vAloM ne banAe hai …… Aj~nA de do bolate to karo bAbA …… to kArya ke preraka ,kArya nirvAhaka vo Ishvara hai …… Apa apane ko kartA mAna kara , apane ko sukhI aura dukhI mAna kara pacha.De meM mata pa.Diye ……

 

Apa apane ko bhagavAna kA mAnie aura bhagavAna ko apanA mAnie ……bhagavAna kA Ashraya lIjiye …… subaha uThate hI bhagavAna ke nAma meM tho.DI dera shAMta ho jAie aura rAta ko sote samaya bhI shvAsa aMdara jAye to oM , shvAsa bAhara Ae to ginatI , isa prakAra shvAsoshvAsa meM bhagavAna kA nAma lIjiye ……oM , rAma athavA jo bhI bhagavAna kA nAma Apa ko ruchatA ho ……

 

jaba hI nAma hR^idaya dharayo bhayo pApa ko nAsha l

 

jaise chinagI Aga kI pa.DI purAne ghAsa ll

 

Apa pUrva kAla meM chAhe kaise bhI pApI hai , kitane bhI Apa meM aiba hai lekina una aiboM ko apane para thopa kara Apa pareshAna nA hoIe ……. aiba hai to mana meM hai , roga hai to tana meM hai …… rAga dveSha hai to buddhI meM hai ; lekina ye jIvAtmA to vAstava meM paramAtmA kA hI hai …….

 

aisA koI taraMga nahIM jo pAnI kA nA ho …… aisA koI sone kA gahenA nahIM hai jo sone kA nA ho …… aisA koI gha.De kA AkAsha , athavA maTha makAna kebina kA AkAsha nahIM hai jo mahA AkAsha kA nA ho …… aisA koI jIva nahIM jo Ishvara kA nA ho …….

 

jIva jaba Ishvara kA hokara Ishvara ko pukAratA hai to bhakto ke kAraja , saMtoM ke kAraja bhagavAna svayaM hI savArate hai …….

 

gujarAta meM santa narasI mehatA ho gaye …… bhajana kIrtana karate……achChe loga una kA Adara karate……nAstika loga una kA majAka u.DAte …… usa jamAne me yAtrA meM jAte to rAste me chora Dakaita paise looTa lete isaliye loga sAvakAro kI athavA suvarNakAro kI pe.DhI para paise dekara huNDI banavA lete , huNDI aise hotI thI kI jaise Aja kala DimAnDa DrAphTa banatA hai ……

 

to eka AdamI yAtrA meM jA rahA thA …… pUChA kI yahA kauna hai aisA kI jisa kI pe.DhI dvArakA me bhI hai …… to maXAka karane vAloM ne usa AdamI ko bolA kI are narasI mehatA kI bahota ba.DI pe.DhI hai , una kI dvArikA meM bhI pe.DhI hai ……narasI mehatA to ThanaThana pAla the….

 

vo AdamI narasI mehatA ke pAsa AyA …… bolA kI Apa ye 100 rupaiyA lo aura mere ko dvArikA kI huMDI likha do &8230;matalaba mujhe ye huNDI dikhA kara dvArikA meM paise mila jAye kharchA karane ke lie ……rAste meM chorI kA dara nahIM rahegA ……maiM dvArikA me tIrtha yAtrA karane jA rahA hU.N ……

 

saMta narasI mehatA jI tanika shAnta huye …..soche kI paiso kI to mujhe bhI jarUrata hai ……. merI to koI pe.DhI nahI phira AyA to isa AdamI ko mere pAsa bhagavAna ne hI bhejA hai…… to bole kI ThIka hai lAo paise huNDI likha detA hU.N ……usa AdamI ne sochA kI narasI mehatA AdamI  to sachchA lagatA hai ……100 rUpiye kI jagaha 1000 rUpiye kI huNDI banavA letA hU.N , yAtrA me kAma AyegA paisA , aura bacha gayA to Ate samaya vApisa vahA se huNDI banavA ke AU.NgA ……dvArikA meM bhI to ina kI pe.DhI hai hI usa AdamI ne 1000 rUpiye narasI mehatA jI ko de diye aura narasI mehatA jI ne chiTThI pe likha diyA kI merI pe.DhI kA nAma hai sAvariyA seTha ……vAhA Apa ko paise mila jAe.Nge …… vo AdamI yAtrA me chalA gayA ..dvArikA me AyA …… vahA sAvariyA seTha kI pe.DhI puChhe to sabhI bolate kI isa nAma kI koI pe.DhI nahI hai …… narasI mehatA jI kA to sAvariyA seTha mAne sAvalA salonA kR^iShNa …… 🙂   ……dvArikA ke dukAnadAra bole sAvariyA.N seTha nAma kI koI pe.DhI nahIM to vo AdamI soche kI aba kyA karUMgA kyA khAU.NgA paradesa meM …… aisA socha hI rahA thA kI usa ke sAmane eka prabhAvashAlI vyakti AyA …… bolA tuma kisa ko DhUNDha rahe ho ? bole sAvariyA.N seTha ko ……vo prabhAvashAlI vyakti bolA , sAvariyA.N seTha to maiM hI hU.N !  lAo tumhArI huNDI …… usa ne yAtrI ko 1000 rUpiye thamA diye &8230;vo AdamI to khusha ho gayA ……

 

paise thamAne vAlA paise thamAte usa ke pahele narasI mehatA gAte :

 

mhArI huNDI svIkAra jo mahArAja shAmalA giridhArI ||

 

mhAroM ekaja tamAroM AdhAra ho  shAmalA giridhArI ll

 

he sAvale giridhArI maiMne to hajAra rUpiye le lie , aba usa AdamI ko Apa hI bharapAI karanA , Apa ke nAma kI chiTThI likhI hai ……

 

to bhagavAna kA Ashraya lene se bhagavAna ChoTe moTe kAma bhI kara lete hai ……ba.De meM ba.DA kAma hai apane svarUpa kA j~nAna  !!!!

 

dAna 3 prakAra kA hotA hai &8230;eka to hotA hai dravya dAna rUpiye paise chIja vastu Adi kA &8230;isa ko bolate  dharma dAna……. isa ke 3 upa prakAra hai : sAtvika dAna (desha, kAla, vastu , pAtra ko dekha kara kiyA jAtA hai vo sAtvika dAna ) , rAjasa dAna (koI AyA hai , denA pa.DatA hai nahIM to ijjata kA savAla hai aise dAna ko bolate rAjasa dAna ) aura tamasa dAna (kisI se jAna Chu.DAne ke diyA jAtA kI khUna pIne A gayA jA le –isa prakAra kA dAna tamasa dAna hotA hai  …… )

 

dUsarA hotA hai bhakti dAna …….  bhagavAna ke prati AsthA jagA dI …… bhagavAna ke prati prIti jagA dI …… bhagavAna ke svabhAva kA varNana kara ke bhagavAna hamAre parama suhUrda hai , hiteshI hai aisA bhAva bhara diyA to ye bhakti dAna huA &8230;bhakti dAna dharama dAna se hajAro gunA UMchA hai ……bhakti dAna lene vAle vyakti ne isa loka meM aura marane ke bAda bhI bhagavAna kA Ashraya liyA to usa vyakti kI rakShA isa loka me aura marane ke bAda  para loka meM bhI hotI hai &8230;

 

lekina bhakti dAna se bhI shreShTha dAna hai bramhj~nAna kA dAna …… bramha j~nAna mAne bhagavAna jisa se bhagavAna hai , taraMga jisa se taraMga hai , bulabulA jisa se bulabulA hai , jhAga jisa se jhAga hai , bhaMvara jisa se bhaMvara hai vo pAnI hai ……ina  saba kA mUla tatva pAnI hai ……aise hI sabhI kA mUla tatva para bramha paramAtmA &8211; sAkShI bramha hI hai ……aisA bramha j~nAna kA dAna to koI bramha j~nAnI sadguru hI de sakate hai , ye bhakto ke basa kA nahIM ……

 

to dharama dAna se bhakti dAna hajAro gunA UMchA hai , lekina bhakti dAna se bhI shreShTha dAna hai bramhj~nAna kA dAna …… isa kA koI varNana nahIM kara sakatA ……

 

Apa bhagavAna ke Ashraya ko svIkAra karate hai to Apa ko itanA phAyadA hotA hai kI jisa kA maiM varNana nahIM kara sakatA hU.N …… mere ko jo phAyadA huA usa kI  maiM kalpanA nahIM kara sakatA ……to Apa bhagavAna kA Ashraya lo ……jitanA hR^idaya pUrvaka bhagavata Ashraya leMge utanA Apa kI budhdI meM bhagavata j~nAna  pragaTa hotA hai ……

 

j~nAna ke lie pothe nahIM pa.Dhane pa.Date , majA lene ke lie klaboM meM nahIM jAnA pa.DatA , svAsthya ke lie goliyAM nahIM khAnI pa.DatI ……maiM apane Apa meM tR^ipta hU.N !

 

jaise nArAyaNa apane Apa meM tR^ipta hai …… indra ko AnaMda ke lie apsarAoM nAcha gAnA dekhanA pa.DatA hai &8230;lekina bhagavAna nArAyaNa apane Apa meM tR^ipta hai &8230;aise hI bramhj~nAna se Apa apane Apa meM tR^ipta rahete ……

 

sA tR^iptoM bhavati – vo tR^ipta hotA hai l

 

sA  amR^itoM bhavati – vo amR^itamaya hotA hai l

 

sva taratI , lokAna tAritI – svayaM tara jAtA hai , logoM ko tAratA hai ……

 

to jo Ishvara kA Ashraya lete hai , Ishvara una ko apane svabhAva se tadAkAra kara dete hai ……

 

eka moha rUpa rAvaNa hai , moha kA artha hai kI ulaTA j~nAna ……vAstava me Apa jo hai usa ko bhUla kara , Apa jo nahIM hai usa ko Apa  maiM mAnate ho – isa ko bolate hai moha …… moha saba vyAdhiyoM kA mUla hai ……moha hote  hI  ahaMkAra ubharatA hai ……ahaMkAra meM phira kAmanAe AtI hai kI mujhe ye mile, vo mile…… 

 

jaba ye mile , vo mile aisI kAmanAe.N hotI to kAmanA pUrti meM daMbha A jAtA hai &8230;rAvaNa ne bhI daMbha kiyA ……rUpa lekara sItA ko haraNa kiyA  aura daMbha meM agara vighna pa.DatA hai to hiMsA A jAtI hai ……jaise rAvaNa ne jaTAyu ke paMkha kATa DAle &8230;

 

to moha , moha se ahaMkAra , ahaMkAra se kAmanA , kAmanA se daMbha aura daMbha se hiMsA …… jaTAyu kI hiMsA kara DAlI , paMkha kATa DAle ……to apane AtmA kA j~nAna nahIM hai isalie sharIra ko maiM mAna kara sukha hone kI galatI karate to ye moha ho gayA ……

 

duniyA meM agara sukha shAMtI lAnA hai to moha miTA kara paraspara bhAvayaMtoM ho ……

 

Aja ke netAoM ko ye patA hI nahIM &8230;lachIle bhAShaNa dekara aisA dikhAte kI una ko voTa dene se svarga jaisA banA deMge ……  hiraNyakashyapU kI 60 hajAra varSha kI tapasyA ke bala se binA jote, binA boye , binA khe.De phasala lahelahAne lagatI , aisA to koI netA de nahIM sakatA …… rAvaNa ne sone kI laMkA banAI thI , koI netA janatA ko sone ke makAna to banA kara nahIM de sakatA ……phira bhI una kI prajA to dukhI ho kara marI ……kyo kI bhagavAna kA Ashraya nahIM liyA thA &8230;

 

voTa nahIM do aisA merA kahenA nahIM, voTa to denA hI chAhie …… lekina sUjha bujha ho ……shradhdA  nahIM rakhoM aisA nahIM , yakIna to honA chAhie , shradhdA to honI hI chAhie , lekina shradhdA ke sAtha budhdI yoga bhI honA jarUrI hai ……

 

voTa do to budhdI yoga se , shradhdA karo to budhdI yoga se ……jiyo to budhdI yoga se kI Akhira kaba taka? makAna bana gayA , beTe ho gae Akhira kaba taka ? nokarI gayI  phira kyA? jina ko nokarI milI hai una ke dukha dUra ho gae kyA ? nokarI mila jAye , shAdI ho jAye , bachchA ho jAye , bachchA bImAra na ho &8230;phira kyA ? tata: kima tata: kima ? Akhira to mR^ityu AegI &8230;mR^ityu Ane ke pahele jahA mR^ityu kI dAla nahIM galatI usa paramAtmA aMtaryAmI deva kA Ashraya le lo …… hAtha jo.Da kara prArthanA karatA hU.N &8230;bahuta phAyadA hogA ……tumheM itanA UMchA  phAyadA hogA kI tumhAre sarTphikeTa, tumhAre rUpiye paise , tumhArA nAka raga.DanA , tumhArI jvelarI saba apanI jagaha para nanhI ho jAegI …… itanA UMchA phAyadA hogA ki duniyA ke sAre sukha suvidhA , hAra siMgAra , svarga kA vaibhava phIkA ho jAegA ……aisA Apa ko Atma vaibhava milegA …… aura vo dUra nahIM , durlabha nahIM , pare nahIM parAyA nahIM &8230;

 

dile tasabIre hai yAra , jaba bhI gardana jhukA lI , mulAqAta kara lI ……

 

vo the nA mujha se dUra nA maiM una se dUra thA , AtA na thA najara to najara kA kasUra thA ……

 

sadguru ke j~nAna dAna se najariyA mila gayI ! mujhe lIlAshAha prabhujI se najariyA mila gayI aise Apa bhI najariyA pA lo …….

 

najare badalI to najAre badale

 

kishtI ne badalA rukha to kinAre badale ……

 

Apa ke jIvana ke kishtI kA tho.DA rukha badala do …..bAhara se aMdara sukha bharane kI mohamayI chAla hai nA , isI se apana dukhI hote hai …..sukha ke lie bAhara bhaTakoge to chaMchala ho jAoge….. majA lene ke lie khAoge to bImAra ho jAoge ……sukha ke lie jahA sachamucha sukha hai vahA pahu.Ncha jAo ……bAbA kaise pahuMche ? chalo maiM le chalatA hU.N &……. (pujyashrI bApujI ne divya oMkAra sAdhanA  karavAI…… )    

 

oM shAntI |

 

shrI sadgurudeva jI  bhagavAna  kI  mahA   jaya jayakaar ho !!!!!

 

galatiyo ke lie prabhujI kShamA kare …… 

 

 

 

 

 

 

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