POONAM VRATDHAARI SPECIAL

अहमदाबाद पूनम सत्संग ; 10 -11 सप्टेंबर 2011

 

to read this post in ITRANS(HINGLISH) please skroll down this page.

सब को जो जानता है उस में स्थित हो जाओ  तो कपट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी , आँसू बहाने की जरूरत नहीं पड़ेगी …… झूठ बोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी , छिप के फिल्म देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी…. आप अपने आप में तृप्त रहेंगे ….

अगर मैं फिल्म देखना चाहूँ तो मुझे कौन रोक सकता है ? बताओ आप …. कोई रोक सकता है क्या मेरे को ? किसी को पता न चले इस ढंग से भी मैं फिल्म देख सकता हूँ … लेकिन फिल्म देखने से मुझे क्या घाटा होगा मैं जानता हूँ ….. मैं जहां रहेता हूँ ना , टीवी आदि नहीं है मेरे कमरे में …. इतनी बड़ी संस्था है तो चलो दुनिया में क्या चल रहा है देखे , नहीं नहीं ! कोई जरूरत नहीं !!…. जितना भी सहयोग है…जितना भी बाहर के वस्तु से परिस्थिति से आप सुखी होना चाहते है , उतने आप पराधीन है !…. और पराधीन स्वपने सुख नाही …. आप स्वाधीन होना सीखिये …..हे बीड़ी तू सुख दे , हे तमाखू तू सुख दे , हे पान मसाला तू सुख दे , हे काम विकार तू सुख दे , हे धन संग्रह तू सुख दे इसी गलत समझ से हम परेशान होते है …..

सब कुछ छोड़ने के बाद रात्री का सुख कैसे मिलता है ? क्यो की वो आप अपने आप का सुख है …आप स्वयं सुख रूप हो ! आप स्वयं चैत्यन्य रूप है … आप का स्वयं भगवान से नित्य योग है … तो आप कपट करे और सफाई भी मारे तो वो कपट और गहेरा उतरेगा , साक्षात्कार नहीं हो सकेगा …. फिर कितना भी ॐ और सोहम जप लो …. सोहम सिर्फ जपना नहीं है , सोहम समझना है ….. सब में मेरा परमेश्वर है , सब में मेरा आत्म देव है … धन का चसका और धन के चसके के लिए कपट होता है …

मन करम वचन छानदी छल जब लग मार

तब लगे स्वपने हूँ करे कोटी उपचार

मन से, करम से , वचन से छल कपट छोड़ दे … द्वेष छोड़ दे , भोग की इच्छा वासना छोड़ दे …. आप ईश्वर हो जाएँगे ! क्यो की ईश्वर तुम्हारा असली स्वभाव है !

जैसे पानी का स्वभाव है पानी  , सोने का स्वभाव है सोना , ऐसे जीव का स्वभाव चैत्यन्य  हैं …. खाली आप पराधीनता छोड़ दो बस …. ये मिले तो सुखी हो जाऊं, ये पाउं तो सुखी हो जाऊं ये पराधीनता छोड़ दो , आप अपने में थोड़ा एकांत में रहिए … आप अपने भगवत स्वभाव का असली स्वभाव का आस्वादन करिए …..

हम अभी चले गए थे तो भगवत रस का घूंट पी के आए ! तृप्त हो के आए …. आप भूखे रहेंगे तो दूसरों को क्या खिलाएँगे ? … अरे ! आप भी खाओ और दूसरों को भी खिलाओ !  🙂  आप भी तृप्त रहो और दूसरों को भी तृप्ति का अनुभव कराओ ! ऐसा आत्म रस तुम्हारे पास है … खामखा परेशान हो रहे हो …. खोटी कल्पनाओं में पड के  क्यो अपना और दूसरों का समय बरबाद करते हो ? …

तो आदि शंकराचार्य भगवान ने कहा कि, एकांत वास हो … क्यों कि इंद्रियों के द्वारा मन के द्वारा बाहर भटकने कि कई युगों कि आदत है … आप का कसूर नहीं …. इस लिए साधन कि जरूरत पड़ती है … नहीं तो भगवान साधन साध्य नहीं है …. भगवान तो स्वत: सिध्द है … सतचिदानंद चैत्यन्य स्वत: सिध्द है …. साधन से भगवान को बनाओगे नहीं , साधन से भगवान के पास जाना नहीं , साधन से भगवान को बुलाना नहीं है …. अगर बुलाते तो भगवान सर्व व्यापक नहीं इसलिए बुलाते हो … भगवान सर्व व्यापक नहीं है तो हमारा क्या भला करेगा ? एक जगह ही है , दूसरी जगह है तो वो मर जाएगा … तो जो मर जाएगा उस को बुलाओगे ?

ईश्वर को बुलाना नहीं , ईश्वर के पास जाना नहीं …. 

हरि व्यापक सर्वत्र समाना !

प्रेम ते प्रगट होई ते जाना ll

भगवान तो सर्वत्र है …. तो उसे अपना मान कर , प्रीति करे तो ईश्वर का स्वभाव प्रगट होगा आप के अंदर … जो भी छुपा हुआ है आप में , वो प्रगट होगा … हलका स्वभाव बदल जाएगा और ऊंचा स्वभाव प्रगट होगा बस !

जाने जीव तब जागा l

हरी पद रुची,विषय विलास त्यागा ll

अपने आप में तृप्त रहेना इस में रुची होगी … पोथे पढ़ के जो ज्ञान आयेगा वो बाहर से आप ने थोपा है …. दवाई औषधिया टोनीके लेकर जो बल आयेगा वो बाहर का लिया हुआ है … नाच गान से खुशी बाहर से ली है … अपना स्व का ज्ञान हो जाये , स्व का रस उत्पन्न हो … स्व से स्वास्थ्य लाभ हो … स्व ही आप का सम्पूर्ण औषधियों की खान है ! जिन को डाईबिटिस होती उन को इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है लेकिन आप योग आसन क्रिया करते तो आप का शरीर इंसुलिन बनाता है … आप को तकलीफ होती तो दवाई लेते लेकिन आप परोपकार करो तो वो औषध अपने शरीर में से ही बन जाता है …. जो ब्रम्हांड में है वो तुम्हारे अंदर है केवल भूल मिटा दो !…. बाहर का आश्रय छोड़ते जाओ …

अनाश्रिता कर्म फलम कार्यम करोतीय

ससन्यासी च योगीच न रागमिचापनुयात

क्रिया आदि छोड़ के हम संन्यासी हो गए तो ये संन्यास नहीं … आसक्ति को छोड़ दो , आशाओं को छोड़ दो की मैं  ये पाउं तो सुख मिले …ये वहेम है …हम स्वत: सुख रूप है …. जिस वस्तु पर सुख की नजर डालते तो उस पर हम अपना सुख छिटकते … पान मसाले में हम अपना सुख छिटकते , नहीं तो पान मसाले में कहा सुख छुपा है ? अगर उस में सुख होता तो वो हम को सुख देता … दारू में दारुडिया अपना सुख डालता है , की विस्की बढ़िया ब्रांडी बढ़िया …. अगर बढ़िया होती तो हम को मजा देती ! 🙂  नहीं ….

आप अपने चैत्यन्य का सुख बिखेरते …

शरणानन्द जी ने बताया था की घर में सभी लोग खुश थे… पिताजी खुश है , माताजी खुश है , बहन खुश है , जीजाजी खुश है … तो बाबा ने पूछा की किस बात की खुशी है ? तो बोले बाबा पुछो मत ! ये हमारा भैया B.A. पास हो गया … बाबा ने कहा, ठीक है बी ए  पास हो गया , जिस डिवीजन में पास हो गया उसी में रहेगा … लेकिन ये खुशी ऐसी की ऐसी कल रहेगी क्या ? फस्ट डिवीजन वाला है तो सेकंड में नहीं जाएगा , सेकंड वाला है तो थर्ड में नहीं जाएगा … तो भी अभी ये जो खुशी है ऐसी 2 घंटे के बाद रहेगी क्या ? तो ये खुशी कहाँ से आई? भैया पास हो ये इच्छा थी , इच्छा हटी तो तुम्हारी अंतरात्मा की खुशी तुम्हारे अंतकरण में प्रतिबिम्बित हुयी … फिर से दूसरी इच्छा उत्पन्न होगी तो तो अंतरात्मा की खुशी ढक जाएगी …. तो आप की एक इच्छा हटती है तो आप इतना खुश होते है… तो जिस की सभी इच्छायें हटी तो उस की अंतरात्मा की खुशी कैसी बनी रहेती !… उस को शराब नहीं पीनी पड़ती खुश होने के लिए …. उस का अंतरात्मा का खुशी का रस छलकता रहेता है !… ऐसा ज्ञानी धीर गंभीर दिखे तो भी अंदर आत्म सुख में तृप्त होता है …. जब बाहर उन का आनंद उछलता रहेता तो उस को कहेते  ‘नित्य नवीन रस’  … श्रीकृष्ण के पास अपने आप की तृप्ति थी … हर परिस्थिति में श्रीकृष्ण आनंदित रहेते , आल्हादित रहेते… ऐसा भी नहीं था की जो श्रीकृष्ण चाहते वैसा ही होता…  ऐसा नहीं था …श्रीकृष्ण के बेटे भी उन के अनुसार नहीं चलते थे … श्रीकृष्ण नहीं चाहते थे की वे आपस में लड़े , लेकिन लड़े … लड़ के मर गए … बाप के होते बच्चे आपस में लड़ के मर गए … श्रीकृष्ण को तो दुखी होना चाहिए , लेकिन श्रीकृष्ण की तो पूर्ण समता में है ….  पूर्ण सदगति है , सद्गति दाता बन गए …  कितना बड़ा आश्चर्य है…. कितना सीखने को मिलता है ! कोई कैसा भी हो , हम अपने आप में सुखी रहे … ये अटकल श्रीकृष्ण ने जान ली थी , कबीर जी ने जान ली थी…. महा पुरुषों ने जान ली थी  ….

सूर्य से अग्नि प्रगट होती तो अग्नि की लो ऊपर जाती है ….. समुद्र से पानी आया तो कही पानी ढुले वो नीचे की ओर ही जाएगा …. ऐसे ही जीव ब्रम्ह का सनातन अंश है …. ब्रम्ह आनंद स्वरूप है तो जीव भी आनंद चाहता , सुख चाहता है … आप सुख छोड़ दो – ऐसा वेदान्त नहीं कहेता ; लेकिन गलत जगह से सुख लेने की आदत छोड़ कर सही जगह से सुख पाने की युक्ति जान लो बस ….

जैसे बच्चा मिट्टी का आम चूसता है तो एक माँ कहेती है थप्पड़ मारूँगी , छोड़ दे – तो बच्चे ने आम छोड़ दिया  लेकिन हृदय से नहीं निकला…. दूसरी माँ कहेती की बेटा ये आम सच्चा नहीं , ये तो खिलौना है…. बेटा तू ये आम चूस ….बच्चे को असली आम का जरा चसका लगा दिया …. तो बच्चे अपने आप आम निचोएगा , अपने आप आम दबोचेगा , अपने आप आम का मजा लेगा …. ऐसे ही गुरु ने हमारे मन रूपी बच्चे को जरा सत्संग सुना दिया , हम को चसका लगा तो हम अपने आप वो आम चूस के गुठली छिलका अलग कर के आनंद लेते … ऐसे ही तुम भी नए नए आए थे तो जरा सा चसका लगा सत्संग के आनंद का तो अपने आप आनंद रस पा रहे हो… घंटो भर इंतजार करते हो … ये रस है न सत्संग का ? … तो इस रस को छोड़ो नहीं … कच्चे मत बनो … आधे में मत छोड़ो …. इस रस को पूर्ण रूप से पाओ … अपने आप में तृप्ति पाओ …. दुख सुख को महत्व ही मत दो …

बोले 50 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट है , आप का आशीर्वाद चाहिए …अरे सोने की लंका के आगे तेरे 50 हजार करोड़ क्या है ? हिरण्यकश्यपू के आगे तेरे प्रोजेक्ट की ऐसी तैसी …. लाख करोड़ का भी हो तो भी तेरा आत्मा उस से भी ऊंचा है ! तू उस में मत उलझ … बाहर का कर ले , लेकिन अंदर का खजाना पा ले …अंदर का लिया तब बाहर का आया है …असली व्यक्ति आती तब उस के पीछे उस की छाया आती है  ऐसे ज्यो ज्यो आप ईश्वर की तरफ चलते त्यो त्यो प्राकृतिक चीजे तो आती रहेती है … उस में उलझे नहीं , आगे बढ़ो तो दोनों हाथ में लड्डू हो गए ….भगवान का सुख भी मिला और संसार की विपदाएं संपदा में बदल गयी …. अगर ईश्वर को छोड़ कर संसार को ही पाने  चलते तो संसार हाथ में आता ही नहीं …

गधी की पुंछ पकड़ते तो गधी की लातें खानी पड़ती है , और गधी को नियंत्रित करते तो अपने कहेने में चलेगी …

माया ऐसी नागिनी जगत रही लिपटाए l

जो तीस की सेवा करे उस को फिर खाये ll

ज्यो ज्यो आप जगत को चाहते हो त्यो त्यो जगत आप को लताड़ता है … और ज्यो ज्यो तुम अपने अंतरात्मा के सुख में रहेते हो त्यो त्यो जगत आप के आगे पाला हुआ प्राणी बन जाता है …

यश नहीं चाहो तो भी आप को यश देने के लिए लोग पीछे पीछे घूमेंगे … मान नहीं चाहो तो भी आप को मान देने के लिए लोग लालायित होंगे …. संसारी सुख नहीं चाहो तो भी संसारी सुख आगे पीछे आप का इंजार करेगा ….

ये वस्तुएं किस से डरती है पता है ?

ये वस्तुएं जो उन का भोग करना चाहता है उस से ये वस्तुएं डरती है …. जो इन वस्तुओं को दबोच के रखना चाहता है उस से वस्तुएं डरती है … जो वस्तुएं पा कर घमंडी बनाना चाहता है उस से वस्तुएं डरती है … लेकिन जिस को भोग वासना नहीं , घमंड नहीं उस के आगे ये वस्तुएं आकर अपने को धन्य बनाती है … वस्तु देनेवाला भी अपने को धन्य मानता की स्वीकार हो गया …

बस एक सिध्दांत समझ लो … आप स्वयं नित्य है … शरीर , वस्तु और भोग अनित्य है … आप अमर है , शाश्वत है , ये शरीर , वस्तु और भोग मरने वाले और नश्वर है… इंद्रिय शरीर वस्तु का नित्य उपयोग है , लेकिन आप के आत्मा-परमात्मा का नित्य योग है !

…ये समझो और वस्तुओं का उपयोग करो , खाओ पियो लेकिन उस में मजा लेने के भाव से नहीं , उपयोग के लिए … बहुत सुंदर सिध्दांत है …

… विकार मजा लेने के लिए भोगा तो हानी होगी … धन कमाया ठीक है लेकिन और और के चक्कर में खप्पे खप्पे में ही खप जाते …. दुख तो ये नासमझी के कारण ही पैदा होता है …. उपभोग करने वाले , नोचने वाले दुखी रहेते और उपयोग करने वाले सुखी रहेते है…

तो क्या काम करना है ? की विषय विकारो से , छल कपट से , बेईमानी से अपने चित्त को बचाना है …एकांतवास, लघु भोजन , देखना सुनना थोड़ा संयत कर के ध्यान बढ़ा के अंतरात्मा के रस में रहे …अंतरात्मा के रस के साथ अंतरात्मा के ज्ञान में रहे …अंतरात्मा का ज्ञान क्या है ? की ये आत्मा जैसे सारे शरीर में फैला है तो इतना ही नहीं है , जैसे अभी तुम महेसूस करते हो… अंतकरण में है इसलिए उस का नाम आत्मा है … घड़े में है इसलिए उस का नाम घटाकाश है … लेकिन घड़ा ना रहेने पर भी आकाश ज्यू  का त्यू रहेता है … तो आप का आत्मा ब्रम्ह है … ब्रम्ह इतने व्यापक है की उसी क्षण सूर्य को देख लेते …तो आप केवल शरीर है उतने ही नहीं है … विवेकानंद बोलते थे की मैं दिखता हूँ उतना ही नहीं हूँ … ऐसे आप भी जो दिखते वो आप नहीं है …. जो मरते वो आप नहीं है… मरने के बाद भी जो रहेते वो आप है … आप दुखी नहीं है …दुख को आप जानने वाले है … आप बीमार नहीं है , बीमारी को आप जानने वाले है …. आप चिंतित नहीं है , चिंता को आप जाननेवाले है … इस ज्ञान को पकड़ लो तो बापू बन जाएँगे….  🙂  बाहर से कोई कहे ना कहे … सुख के दाता बन जाएँगे … तुम्हारे दर्शन से लोगों को सुख होगा , तुम्हारी वाणी से लोगों को सुख होगा …तुम दर्शन ना दो , वाणी ना बोलो , एकांत में अपने सुख स्वभाव में रहो तो भी आप की व्यापक चेतना दूसरों को सुख देने में मदद करेगी … जैसे हिमालय में बरफ गिरती तो यहाँ टेम्परेचर डाउन हो जाता है ऐसे ही आप सुख स्वरूप में रहोगे तब भी वातावरण में खुशी रहेगी … क्यों की आप का आत्मा आनंद स्वरूप है , सत रूप है, चेतन स्वरूप है … शरीर जड़ है … शरीर दुख रूप है …

खमण में देखो तो बेसन और पानी है … ऐसे जगत सारा खेल है प्रकृति और पुरुष का…… प्रकृति बदलती है और पुरुष ज्यो का त्यो है … 

पूनम व्रत धारियों के लिए खास ऊंची बात है ये…शांभवी मुद्रा में विश्रांति योग करे… 

एकांत वास, लघु भोजन , खाना पीना बोलना सुनना संयत हो …. आशा आकांक्षा वासना को बढ़ाओ नहीं , मौन रखे , चित्त में परमात्म तत्व का साक्षात्कार का प्रसाद रहे ….. यही प्रसाद है…बाहर का प्रसाद ले दे कर तुम भी थक जाएँगे , हम भी थक जाएँगे …. मैं तो समझता हूँ की ये बाहर के प्रसाद के डिब्बे लाना के जी जैसी तुच्छ बातें है …. क्यो धक्के खाते हो , क्यो परेशान होते हो?….  हाईस्कूल चलाता हूँ  , कॉलेज चलाता हूँ उस में तो बैठते नहीं … ये खाओ, ये संभालो – ये सब छोड़ो अब …. जो सत्संग और ज्ञान में फायदा है वो लाईन लगाने में फायदा नहीं है … लेकिन आदत पड गयी है की चाहे 100 -100 जूता खाये तमाशा घुस के देखेंगे ….. के जी में भटकने की आदत पड़ गयी … आत्म कॉलेज में जाओ ….

लंबा श्वास लेकर रोके … मन में बोले … ईश्वर आनंद स्वरूप है तो मैं कहाँ दुख रूप हूँ … ईश्वर चैत्यन्य स्वरूप है तो मैं कहाँ जड़ हूँ …. दुख मन की नालायकी से आता है , जड़ता बुद्धि की कमजोरी से आती है … ईश्वर का अनुदान है , गुरु का अनुदान है … शास्त्र का अनुदान है … अब मैं दुख नहीं बनाऊँगा … चिंता नहीं बनाऊँगा … दुख सुख में सम  रहूँगा …गर्दन आगे पीछे करते हुये कंठ में ॐ का गुंजन करते हुये श्वास बाहर छोड़े …

पद्मासन लगा कर जीभ को ऊपर अथवा नीचे के दाँतों में आधा घंटा कोई घुमाए तो ऐसा कुछ दिन करे तो कैसा भी रोग हो मीट जाता है … दमम दम्मैय्या एकदम ठमम ठम्मैय्या हो जाता है ! ये एकदम स्वास्थ्य की कुंजी है …

शरद ऋतु में खट्टा आचार , छांस, दही , ताली हुयी चीजों से परहेज रखना … मीठी चीजे खाना , गन्ने का रस हितकारी है …. सेब फल खाओ … बाजार के ज्यूस में प्रिजरवेटिव पड़ता है , वो कैन्सर जैसी आपदाओं को लेकर आता है … घर का ताजा रस पियो अथवा फल खाना हितकारी है … खीर खाना हितकारी है … और खीर अकेले नहीं खाना , थोड़ा मुझे भी भाव से खिला दिया करना तो उसी समय आनंद भेजूँगा मैं ! चाहे आप कितने भी दूर हो …. J  आप दूर हो ही नहीं सकते …. आप का चैत्यन्य विभु व्यापक है … आप के मन में इस चैत्यन्य के 6 दिव्य गुण है ॥सूर्य की किरण चलती है 1 लाख 86 हजार माईल की गति से तब 8 मिनट में धरती पर पहुँचती है …और आप उसी समय सूर्य देख लेते … कितनी दिव्यता है आप के चेतनता की … आप विषयों को प्रकाशित करते… विषयों को जिस भाव से देखते उसी भाव के हो जाते है …जिस में सुख भाव से देखते वो सुखरूप हो जाता है … शराब को प्यार से देखते तो शराबी बन जाते , मांस को प्यार से देखते तो मांसाहारी बन जाते … और इन सब बेवकूफी से पार होते तो अपने आप में आनंदित होते है …. ये सब मन के ही खेल है ….

आप को ईश्वर से योग करना है की ईश्वर से योग करना है बोलो ….. जिस को भोग करना है वो हाथ ऊपर करो … कोई हाथ ऊपर नहीं करते… सब फेल हो गए ….

ईश्वर का भोग नहीं करोगे  तो क्या गधे कुत्ते बिल्ली का भोग करते हो ? दिन रात ईश्वर का ही तो भोग करते हो ….जब सर्वत्र ईश्वर ही है तो भोग किस का कर रहे हो ? जबान पर एक इंजेक्शन मार दे की ज्ञान ना हो तो क्या भोग होगा ? नहीं होगा … ज्ञान क्या है ? सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रम्ह … ईश्वर का ही भोग हो रहा है …. चीज वस्तु सब ईश्वर की ही है … यहा भी ईश्वर है ….पति पत्नी सब ईश्वर ही है , ईश्वर का ही भोग हो रहा है और ईश्वर से ही योग हो रहा है … लेकिन भोग संयत करो तो ईश्वर के भोग में और ईश्वर के योग में पास हो जाओगे ….. भोग अधिक करोगे तो ठूस हो जाओगे …. वासुदेव सर्वं इति है तो भोग किस का करते हो ? ईश्वर का ही भोग करते हो लेकिन पता नहीं …ईश्वर का भोग करने वाले हो तो क्या तुम ईश्वर से बड़े हो ? नहीं … ईश्वर का ही स्वरूप है …तो हम अपने आप का भोग कर रहे है … अपने आप का भोग करो संयम  से तो अपने आप को जानोगे .. अपने आप का भोग करोगे बे-संयम से तो  अपने को अज्ञानी मूर्ख मान कर नीच योनि में जाओगे … ऐसा कभी सुना है ? की हम अपने आप का भोग कर रहे …. सत्संग से नित्य नवीन ज्ञान मिलता है ….

बुद्धि को प्रखर करो … ज्ञान को प्रखर करो ….

जो योग समाधि लगाते उन को धन्यवाद है , प्रणाम है …लेकिन व्यवहार में जो सम रहेते उन को 2 प्रणाम है …. लेकिन दूसरे के दुख से जो द्रवित होते है , दूसरे के सुख से जो प्रसन्न होते है वो तो परम योगी है … वो हमारे आत्मा है …

सुखम वा यदि वा दुखम स योगी परमो मत:   

सुख दुख मे सम रहे , दुख में मन को उद्विग्न मत करो …. सुख में फँसो मत …जिस के दुनिया में जितने प्यारे उतने उस को कांटे चुभेंगे … जीतने प्यारे ज्यादा उतनी मुसीबत ज्यादा …. लेकिन अनेकों में एक प्यारे की नजर से सब से समता का व्यवहार करते उस को कोई दुख नहीं …उस को आनंद है … आप के कितने प्यारे होंगे ? 100 -200 -500 लेकिन मेरे तो करोड़ो है प्यारे … ममता के कारण प्यारे माने तो मुसीबत है , लेकिन आत्मा के कारण प्यारे माने तो अई हई !

तुम्हारे सामने कई दुख आ कर चले गए … कई सुख आकार चले गए … भगवान को भी तुम्हारे सामने आना होता है ….  प्रलय को भी तुम्हारे सामने आना होता है… सृष्टि को भी तुम्हारे सामने आना होता है … तुम इतने अजर अमर हो …. बचपन को तुम्हारे सामने आना पड़ा – गयी … जवानी को तुम्हारे सामने आना पड़ा – गयी …. लेकिन तुम कब गए ? तुम अपने आप को छोड़ सकते हो क्या ? जिस को तुम छोड़ नहीं सकते उस को पहेचान ने में देर क्यो करते ? क्यो मूढ़ता करते ? जब भी दुख आया तो मन में आया , सुख आया तो मन में आया … इन दोनों को जानने वाला कौन है ? मैं हूँ अपने आप हर परिस्थिति का बाप …. ऐसा कर के अहंकार  भी नहीं करना है  और विकारों में भी नहीं गिरना है …. अपने में आत्म विश्रांति पाना है … ऐसा चिंतन करे … शांभवी मुद्रा में ओमकार का जप करना है …यूं आगे बढ़ेंगे …

श्राध्द पक्ष में पितरों का श्राध्द करना है लेकिन केवल माता पिता, दादा दादी , नाना नानी नहीं …जिन का किसी ने श्राध्द नहीं किया , जो अवगत हो कर घूम रहे है उन के लिए भी तर्पण करे …

ॐ ॐ ॐ ॐ पहेले होठों से जपो … फिर कंठ से जपो ….अब हृदय से जपो …. मैं  प्रभु आप का हूँ …आप गुरु रूप है…. ‘गुरु’  आप है … जो लघु नहीं है …. ईश्वर को भोगता है वो लघु साधनों में जाता है … लेकिन जो ईश्वर को भोगते हुये जानता है तो लघुता से पार हो जाता है , गुरुता को पाता है … हृदय पूर्वक जपो ॐ ॐ ॐ ॐ …. मैं गुरुजी को मानसिक स्नान कराता … तिलक करता …. गुरु जी को ध्यान कर के गुरुजी को प्यार करता तो गुरुजी की आनंद मेरा आनंद एक हो गया … 2 सरोवर है और पार टूट गयी तो दोनों सरोवरों का पानी एक हो गया ….

भगवान कृष्ण कहेते है की जो लोग जल से भरे हुये जलाशय को तो तीर्थ मानते और पत्थर की मूर्ति और धातु की मूर्ति को भगवान मानते लेकिन महा पुरुषों के प्रति जिन की श्रद्धा नहीं हैं वे बोज़ा उठा उठा के रहे जाते …. ऐसे लोग पैदल यात्रा करेंगे , कष्ट सहेंगे लेकिन महा पुरुषों के सत्संग से वंचित रहेंगे … सत्संग सुनते वो जानते की शरीर को सताने की कष्ट देने की जरूरत नहीं है … और खा खा के पेटु होने की भी जरूरत नहीं है …. संयम से खाये संयम से रहे …

भोग में भी ईश्वर है , योग में भी ईश्वर है … लेकिन जब योग में ईश्वर दिखेगा तब भोग के ईश्वर में आनंद रहेगा …. फिर भोग भोग नहीं रहेगा , ईश्वर ही ईश्वर रहेगा ….

मैंने नतो पियो नि मैंने पायो रे

हरि रस पीवा जाईवो छे ….

मैं तो थोड़ों पिदों नि ज्यादा चढ़ियों रे …

हरि रस पीवा जाईवो छे ….

ॐ शांति ॐ आनंद ।

श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो !!!!!

गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे …..

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

ahamadabad punam satsang ; 10-11 Sept 2011

saba ko jo jaanataa hai usa me sthita ho jaao  to kapaT karane kii jaruurata nahii paDegii …. aa.Nsuu bahaane kii jaruurata nahii pa.Degii….  jhuuTha bolane kii jaruurata nahii pa.Degii….  chhipa ke philma dekhane kii jaruurata nahii pa.Degii… aapa apane aapa me tR^ipta rahenge  ….

agar mai philma dekhanaa chaahuu  to mujhe kauna roka sakataa hai  bataao aapa ….. koii roka sakataa hai kyaa mere ko  kisii ko pataa na chale isa Dhanga se bhii mai philma dekha sakataa huu….  lekina philma dekhane se mujhe kyaa ghaaTaa hogaa mai jaanataa huu……  mai jahaa rahetaa huu naa wahaa  Tiivii aadi nahii  hai mere kamare me….  itanii ba.Dii sansthaa hai to chalo duniyaa me kyaa chala rahaa hai dekhe….  nahii nahii !  koii jaruurata nahii…..  jitanaa bhii sahayoga hai , jitanaa bhii baahara ke vastu se paristhiti se aapa sukhii honaa chaahate hai  utane aapa paraadhiina hai  aura

paraadhiina svapane sukha naahii  aapa svaadhiina honaa siikhiye ….. hey bii.Dii tuu sukha de, hey   tuu tamaakhuu tuu sukha de,   hey paana masaalaa tuu sukha de ,  hey kaama vikaara tuu sukha de,  he dhana sangraha tuu sukha de….. isii galata samajha se hama pareshaana hote hai  …..

saba kuchha chho.Dane ke baada raatrii kaa sukha kaise milataa hai ? …. kyo kii vo aapa apane aapa kaa sukha hai ….aapa svayam sukha ruupa ho….  aapa svayam chaityanya ruupa hai….  aapa kaa svayam bhagavaana se nitya yoga hai  to aapa kapaT kare aura saphaaii bhii maare to vo kapaT aura gaheraa utaregaa…..  saakShaatkaara nahii ho sakegaa … phira kitanaa bhii OM aura sohama japa lo  ….sohama sirpha japanaa nahii hai,   sohama samajhanaa hai…  saba me meraa parameshvara hai .. saba me meraa aatma deva hai … dhana kaa chasakaa aura dhana ke chasake ke lie kapaT  hotaa hai….

mana karama vachana chhaanadii chhala jaba laga maara l

taba lage svapane huu kare koTii upachaara ll

mana se karama se  vachana se chhala kapaTa chho.Da de  dveSha chho.Da de  bhoga kii ichchhaa vaasanaa chho.Da de  aapa iishvara ho jaae.Nge  kyo kii iishvara tumhaaraa asalii svabhaava hai …..

jaise paanii kaa svabhaava hai paanii  ….. sone kaa svabhaava hai sonaa ….. aise jiiva kaa svabhaava chaityanya  hai….  khaalii aapa paraadhiinataa chho.Da do basa ! ye mile to sukhii ho jaauu,  ye paau to sukhii ho jaauu  — ye paraadhiinataa chho.Da do…..  aapa apane me  tho.Daa ekaanta me rahiye….  aapa apane bhagavata svabhaava kaa -asalii svabhaava kaa aasvaadana kariye…. 

hama abhii chale gaye the to bhagavata rasa kaa ghuunTa pii ke aaye …. tR^ipta ho ke aaye…  aapa bhuukhe rahenge to duusaro ko kyaa khilaae.Nge…..   are  aapa bhii khaao , aura duusaroM ko bhii khilaao! 

 aapa bhii tR^ipta raho aura duusaro ko bhii tR^ipti  kaa anubhava karaao!  aisaa aatma rasa tumhaare paasa hai ! khaamakhaa pareshaana ho rahe ho!!  khoTii kalpanaao  me paDa ke  kyo apanaa aura duusaro kaa samaya barabaada karaate ho ?    

to aadi shankaraachaarya bhagavaana ne kahaa ki ekaanta vaasa ho…  kyo ki indriyon ke dvaaraa, mana ke dvaaraa baahara bhaTakane ki kaii yugo  ki aadata hai …. aapa kaa kasuura nahii…..  isaliye saadhana ki jaruurata pa.Datii hai …. nahii to bhagavaana saadhana saadhya nahii  hai….  bhagavaana to svata sidhda hai …. satachidaananda chaityanya svata sidhda hai  ….saadhana se bhagavaana ko banaaoge nahii…..  saadhana se bhagavaana ke paasa jaanaa nahii…..  saadhana se bhagavaana ko bulaanaa nahii hai….  agara bulaate to bhagavaana sarva vyaapaka nahii isaliye bulaate ho  sochate ki bhagavaana sarva vyaapaka nahii hai to aisaa bhagavaana hamaaraa kyaa bhalaa karegaa ?  jo eka jagaha hii hai,   duusarii jagaha  nahi hai to vo mara jaaegaa  to jo mara jaaegaa usa ko bulaaoge  kya ?

iishvara ko bulaanaa nahii….  iishvara ke paasa jaanaa nahii….

 hari vyaapaka sarvatra samaanaa

prema te pragaTa hoii te jaanaa

bhagavaana to sarvatra hai ….. to use apanaa maana kara  priiti kare ..to iishvara kaa svabhaava pragaTa hogaa   aapa ke andara…..  jo bhii chhupaa huaa hai aapa me  vo pragaTa hogaa …. halakaa svabhaava baadala jaaegaa aura uunchaa svabhaava pragaTa hogaa basa …..

jaane jiiva taba jaagaa

harii pada ruchiiviShaya vilaasa tyaagaa

apane aapa me  tR^ipta rahenaa isa me ruchii hogii  …..pothe pa.Dha ke jo j~naana aayegaa vo baahara se aapa ne thopaa hai…  davaaii auShadhiyaa Toniike lekara jo bala aayegaa vo baahara kaa liyaa huaa hai ….. naacha gaana se khushii baahara se lii hai  apanaa sva kaa j~naana ho jaaye…  sva kaa rasa utpanna ho  sva se svaasthya laabha ho….  sva hii aapa kaa sampuurNa  auShadhiyoM kii khaana hai …. jina ko DaaiibiTisa hotii una ko insulina kaa injekshana lenaa pa.Dataa hai ; lekina aapa yoga aasana kriyaa karate to aapa kaa shariira insulina banaataa hai …. aapa ko takaliipha hotii to davaaii lete lekina aapa paropakaara karo to vo auShadha apane shariira me se hii bana jaataa hai….  jo bramhaaNDa me hai vo tumhaare andara hai kevala bhuula miTaa do….  baahara kaa aashraya chho.Date jaao….

anaashritaa karma phalama kaaryama karotiiya

sasanyaasii cha yogiicha na raagamichaapanuyaata

kriyaa aadi chho.Da ke hama sannyaasii ho gaye to ye sannyaasa nahii…  aasakti ko chho.Da do …. aashaao-aakaankshaa  ko chho.Da do kii mai  ye paau to sukha mile ye vahema hai….. hama svata sukha ruupa hai….  jisa vastu para sukha kii najara Daalate to usa para hama apanaa sukha chhiTakate ….. paana masaale me hama apanaa sukha chhiTakate  nahii to paana masaale me  kahaa sukha chhupaa hai ? agara usa me sukha hotaa to vo hama ko sukha detaa ….. daaruu me daaruDiyaa apanaa sukha Daalataa hai  kii viskii ba.Dhiyaa braaMDii ba.Dhiyaa ….. agara ba.Dhiyaa hotii to hama ko majaa detii  … nahii ! 

aapa apane chaityanya kaa sukha bikherate  !

sharaNaa nanda jii ne bataayaa thaa kii ghara me sabhii loga khusha the… pitaajii khusha hai …. maataajii khusha hai….  bahana khusha hai,  jiijaajii khusha hai …. to baabaa ne puuchhaa kii kisa baata kii khushii hai ?  to bole baabaa puchho mata !  ye hamaaraa bhaiyaa  paasa ho gayaa  !!

baabaa ne kahaa Thiika hai …B.A.  paasa ho gayaa  jisa Diviijana me paasa ho gayaa usii me rahegaa;   lekina ye khushii aisii kii aisii kala rahegii kyaa?   First  Diviijana vaalaa hai to sekanDa Diviijana me  nahii jaayegaa …  sekanDa vaalaa hai to tharDa me nahii jaayegaa….  to bhii abhii ye jo khushii hai aisii  ghanTe ke baada rahegii kyaa ?   to ye khushii kahaa.N  se aaii? bhaiyaa paasa ho ye ichchhaa thii;  ichchhaa haTii to tumhaarii  antaraatmaa kii khushii tumhaare antakaraNa me  pratibimbita huyii….  phira se duusarii ichchhaa utpanna hogii  to antaraatmaa kii khushii Dhaka jaaegii …. to aapa kii eka ichchhaa haTatii hai to aapa itanaa khusha hote hai …to jisa kii sabhii ichchhaaye  haTii to usa kii antaraatmaa kii khushii kaisii banii rahetii  !! usa ko sharaaba nahii piinii pa.Datii khusha hone ke liye …. usa kaa antaraatmaa kaa khushii kaa rasa chhalakataa rahetaa hai !…. aisaa j~naanii dhiira gaMbhiira dikhe to bhii andara aatma sukha me  tR^ipta hotaa hai  jaba baahara una kaa aananda uchhalataa rahetaa…. to usa ko kahete  nitya naviina rasa…

   shriikR^iShNa ke paasa apane aapa kii tR^ipti thii  …..hara paristhiti me shriikR^iShNa aanandita rahete .. aalhaadita rahete….. aisaa bhii nahii  thaa kii jo shriikR^iShNa chaahate vaisaa hii hotaa  aisaa nahii thaa …..shriikR^iShNa ke  beTe bhii una ke anusaara nahii chalate the …. shriikR^iShNa nahii chaahate the kii ve aapasa me la.De … lekina la.De …. la.Da ke mara gaye  ….baapa ke hote bachche aapasa me  la.Da ke mara gaye … shriikR^iShNa ko to dukhii honaa chaahiye …. lekina shriikR^iShNa kii to puurNa samataa me  hai….   puurNa sadagati hai…  sadgati daataa bana gaye….   kitanaa ba.Daa aashcharya hai …kitanaa siikhane ko milataa hai ! …. koii kaisaa bhii ho,  hama apane aapa me sukhii rahe  ye  aTakala shriikR^iShNa ne jaana lii thii ….. kabiira jii ne jaana lii thii mahaa puruSho ne jaana lii thii …. 

suurya se agni pragaTa hotii to agni kii lo uupara jaatii hai ……. samudra se paanii aayaa to kaahii paanii Dhule vo niiche kii ora hii jaayegaa … aise hii jiiva bramha kaa sanaatana ansha hai,  to  bramha aananda svaruupa hai to jiiva bhii aananda chaahataa…..  sukha chaahataa hai …. aapa sukha chho.Da do  aisaa vedaanta nahii kahetaa….  lekina galata jagaha se sukha lene kii aadata chho.Da kara sahii jagaha se sukha paane kii yukti jaana lo basa ! 

jaise bachchaa miTTii kaa aama chuusataa hai to eka maa  kahetii hai thappa.Da maaruu.Ngii  chho.Da de  to bachche ne aama chho.Da diyaa…  lekina hR^idaya se nahii nikalaa…. duusarii maa  kahetii kii beTaa ye aama sachchaa nahii  ye to khilaunaa hai beta;  tuu ye aama chuusa…. bachche ko asalii aama kaa jaraa chasakaa lagaa diyaa …. to bachche apane aapa aama nichoyegaa..  apane aapa aama dabochegaa …. apane aapa aama kaa majaa legaa…  aise hii guru ne hamaare mana ruupii bachche ko jaraa satsanga sunaa diyaa  ….hama ko chasakaa lagaa to hama apane aapa vo aama chuusa ke guThalii chhilakaa alaga kara ke aananda lete….  aise hii tuma bhii naye naye aaye the to jaraa saa chasakaa lagaa satsagan ke aananda kaa to apane aapa aananda rasa paa rahe ho ghanTo bhara intajaara karate ho ….. ye rasa hai na satsaMga kaa !   to isa rasa ko chho.Do nahii…..  kachche mata bano …. aadhe me mata chho.Do….  isa rasa ko puurNa ruupa se paao …. apane aapa men tR^ipti paao  dukha sukha ko mahatva hii mata do …

bole  hajaara karo.Da kaa projekTa hai…  aapa kaa aashiirvaada chaahiye… are! sone kii lankaa ke aage tere  hajaara karo.Da kyaa hai ? hiraNyakashyapuu ke aage tere projekTa kii aisii taisii ! … laakha karo.Da kaa bhii ho to bhii teraa aatmaa usa se bhii uuNchaa hai….  tuu usa men mata ulajha …. baahara kaa kara le,  lekina aNdara kaa khajaanaa paa le …aNdara kaa liyaa taba baahara kaa aayaa hai …..asalii vyakti aatii taba usa ke piichhe usa kii chhaayaa aatii hai….  aise jyo jyo aapa iishvara kii tarapha chalate;  tyo tyo prakR^itika chiije to aatii rahetii hai …. usa me ulajhe nahii …. aage ba.Dho… to dono haatha me laDDuu ho gaye !… bhagavaana kaa sukha bhii milaa aura sansaara kii vipadaaye  saMpadaa me  badala gayii….  agara iishvara ko chho.Da kara saNsaara ko hii paane  chalate to saNsaara haatha me aataa hii nahii….

gadhii kii puNchha paka.Date to gadhii kii laate khaanii pa.Datii hai…  aura gadhii ko niyaNtrita karate to apane kahene me chalegii….

  maayaa aisii naaginii jagata rahii lipaTaae l

jo tiisa kii sevaa kare usa ko phira khaaye ll

jyo jyo aapa jagata ko chaahate ho tyo tyo jagata aapa ko lataa.Dataa hai  …..aura jyo jyo tuma apane antaraatmaa ke sukha me rahete ho tyo tyo jagata aapa ke aage paalaa huaa praaNii bana jaataa hai …

yasha nahii chaaho to bhii aapa ko yasha dene ke liye loga piichhe piichhe ghuumenge….  maana nahii chaaho to bhii aapa ko maana dene ke liye loga laalaayita hoNge ….. saNsaarii sukha nahii chaaho to bhii saNsaarii sukha aage piichhe aapa kaa iNjaara karegaa…. 

ye vastuye kisa se Daratii hai pataa hai ?

ye vastuye jo una kaa bhoga karanaa chaahataa hai usa se ye vastuye  Daratii hai …. jo ina vastuo ko dabocha ke rakhanaa chaahataa hai usa se vastuye  Daratii hai  jo vastuye  paa kara ghamaNDii banaanaa chaahataa hai usa se vastuye Daratii hai….  lekina jisa ko bhoga vaasanaa nahii ,  ghamaNDa nahii,  usa ke aage ye vastuye  aakara apane ko dhanya banaatii hai…  vastu denevaalaa bhii apane ko dhanya maanataa kii sviikaara ho gayaa …..

basa eka sidhdaaNta samajha lo….  aapa svayaM nitya hai ! shariira,  vastu aura bhoga anitya hai….  aapa amara hai,  shaashvata hai  …..ye shariira,  vastu aura bhoga marane vaale aura nashvara hai….. iNdriya, shariira, vastu kaa nitya upayoga hai  ; lekina aapa ke aatmaa-paramaatmaa kaa nitya yoga hai….

ye samajho aura vastuo kaa upayoga karo …. khaao, piyo lekina usa me majaa lene ke bhaava se nahii;  upayoga ke liye…..  bahuta suNdara sidhdaaNta hai…. 

 vikaara majaa lene ke liye bhogaa to haanii hogii  ….dhana kamaayaa Thiika hai;  lekina aura aura ke chakkara me khappe khappe me  hii khapa jaate…  dukha to ye naasamajhii ke kaaraNa hii paidaa hotaa hai … upabhoga karane vaale ,  nochane vaale dukhii rahete… aura upayoga karane vaale sukhii rahete hai….

to kyaa kaama karanaa hai ? .. kii viShaya vikaaro se  chhala kapaTa se  beiimaanii se apane chitta ko bachaanaa hai….. ekaaNtavaasa,  laghu bhojana,  dekhanaa-sunanaa tho.Daa saNyata kara ke dhyaana ba.Dhaa ke aNtaraatmaa ke rasa me rahe…. aNtaraatmaa ke rasa ke saatha aNtaraatmaa ke j~naana me rahe…. aNtaraatmaa kaa j~naana kyaa hai ?  kii ye aatmaa jaise saare shariira me phailaa hai to itanaa hii nahii  hai…  jaise abhii tuma mahesuusa karate ho….. aNtakaraNa me hai ,  isaliye usa kaa naama aatmaa hai …. gha.De meM hai isaliye usa kaa naama ghaTaakaasha hai…  lekina gha.Daa naa rahene para bhii aakaasha jyuu  kaa tyuu rahetaa hai …. to aapa kaa aatmaa bramha hai…..  bramha itane vyaapaka hai kii usii kShaNa suurya ko dekha lete….. to aapa kevala shariira hai utane hii nahii hai…..  vivekaanaNda bolate the kii mai dikhataa huu.N utanaa hii nahii huu…..  aise aapa bhii jo dikhate vo aapa nahii hai  …..jo marate vo aapa nahii hai…. marane ke baada bhii jo rahete vo aapa hai….  aapa dukhii nahii hai, dukha ko aapa jaanane vaale hai…..  aapa biimaara nahii hai,  biimaarii ko aapa jaanane vaale hai…  aapa chiNtita nahii  hai,   chiNtaa ko aapa jaananevaale hai …. isa     j~naana ko paka.Da lo to baapuu bana jaae.Nge… J   

  baahara se koii kahe naa kahe ….

 aap sukha ke daataa bana jaaye.Nge….  tumhaare darshana se logo ko sukha hogaa  …..tumhaarii  vaaNii se logo ko sukha hogaa… tuma darshana naa do,  vaaNii naa bolo;  ekaaNta me apane sukha svabhaava me  raho to bhii aapa kii vyaapaka chetanaa duusaro ko sukha dene me madada karegii…..  jaise himaalaya me barapha giratii to yahaa  Temparechara Daauun ho jaataa hai ….aise hii aapa sukha svaruupa me rahoge taba bhii vaataavaraNa me khushii rahegii….  kyo kii aapa kaa aatmaa aanaNda svaruupa hai….  sata ruupa hai chetana svaruupa hai  shariira ja.Da hai  shariira dukha ruupa hai ….

khamaNa me dekho to besana aura paanii hai  …aise jagata saaraa khela hai  prakR^iti  aura puruSha kaa ….prakR^iti  badalatii hai aura puruSha  jyo kaa tyo hai…..  

puunama vrata dhaariyo ke liye khaasa uuNchii baata hai ….ye   shaaMbhavii mudraa me vishraaNti yoga kare …..

ekaaNta vaasa,  laghu bhojana,  khaanaa-piinaa -bolanaa -sunanaa saNyata ho….  aashaa-aakaaNkShaa vaasanaa ko ba.Dhaao nahii…..  mauna rakhe  ….chitta me paramaatma tatva kaa saakShaatkaara kaa prasaada rahe….  yahii prasaada hai….baahara kaa prasaada le de kara tuma bhii thaka jaaye.Nge…  hama bhii thaka jaaye.Nge….  mai to samajhataa huu.N kii ye baahara ke prasaada ke Dibbe laanaa K.G. jaisii tuchchha baate  hai….  kyo dhakke khaate ho?  kyo pareshaana hote ho?….  main  highschool   chalaataa huu.N   , college chalaataa huu.N ….usa me to baiThate nahii…..  ye khaao, ye saMbhaalo-  ye saba chho.Do aba ….. jo satsaNga aura j~naana me phaayadaa hai…. vo laaiina lagaane me phaayadaa nahii hai…..  lekina aadata paDa gayii hai kii chaahe  -100 -100  juutaa khaaye, tamaashaa ghusa ke dekheNge….  K.G. me bhaTakane kii aadata pa.Da gayii….  aatma college  me aao…. 

laMbaa shvaasa lekara roke…  mana me bole  iishvara aanaNda svaruupa hai to mai kahaa dukha ruupa huu ?…  iishvara chaityanya svaruupa hai to mai kahaa ja.Da huu ?  dukha mana kii naalaayakii se aataa hai …. ja.Dataa buddhi kii kamajorii se aatii hai….  iishvara kaa anudaana hai ,  guru kaa anudaana hai ,  shaastra kaa anudaana hai  , aba mai dukha nahii banaauu.Ngaa … chiNtaa nahii banaauu.Ngaa….  dukha sukha me sama  rahuu.Ngaa …..gardana   aage piichhe karate huye kaNTha me OM kaa guNjana karate huye shvaasa baahara chho.De…. 

padmaasana lagaa kara jiibha ko uupara athavaa niiche ke daa.Nto  me  aadhaa ghaNTaa koii ghumaaye – aisaa kuchha dina kare to kaisaa bhii roga ho miiTa jaataa hai…..  damama dammaiyyaa ekadama Thamama Thammaiyyaa ho jaataa hai !! ye ekadama svaasthya kii kuNjii hai  ….

sharada   R^itu me  khaTTaa aachaara ,  chhaasa,  dahii,   taalii huyii chiijo se paraheja rakhanaa….  miiThii chiije khaanaa…  ganne kaa rasa hitakaarii hai … seba phala khaao….  baajaara ke jyuusa me prijaraveTiva pa.Dataa hai  …vo  cancer  jaisii aapadaao  ko lekara aataa hai  …..ghara kaa taajaa rasa piyo athavaa phala khaanaa hitakaarii hai …. khiira khaanaa hitakaarii hai….  aura khiira akele nahii khaanaa ,  tho.Daa mujhe bhii bhaava se khilaa diyaa karanaa …  J to usii samaya aanaNda bhejuu.Ngaa mai……  chaahe aapa kitane bhii duura ho…. 

  aapa duura ho hii nahii sakate….  aapa kaa chaityanya vibhu vyaapaka hai…  aapa ke mana me isa chaityanya ke  divya guNa hai ..suurya kii kiraNa chalatii hai  1 laakha 86 hajaara maaiila kii gati se taba 8 minaTa me.. dharatii para pahu.Nchatii hai ….aura aapa usii samaya suurya dekha lete !… kitanii divyataa hai aapa ke chetanataa kii … aapa viShayoN ko prakaashita karate…. viShayo  ko jisa bhaava se dekhate usii bhaava ke ho jaate hai ….jisa me sukha bhaava se dekhate vo sukharuupa ho jaataa hai  …sharaaba ko pyaara se dekhate to sharaabii bana jaate….  maaNsa ko pyaara se dekhate to maaNsaahaarii bana jaate…  aura ina saba bevakuuphii se paara hote to apane aapa me aanaNdita hote hai !!  ye saba mana ke hii khela hai…. 

aapa ko iishvara se yoga karanaa hai kii iishvara se yoga karanaa hai bolo …… jisa ko bhoga karanaa hai vo haatha uupara karo ….. koii haatha uupara nahii karate…. saba FAIL  ho gaye 

iishvara kaa bhoga nahii  karoge  to kyaa gadhe kutte billii kaa bhoga karate ho ? …  dina-raata iishvara kaa hii to bhoga karate ho….. jaba sarvatra iishvara hii hai to bhoga kisa kaa kara rahe ho ? jabaana para eka iNjekshana maara de kii j~naana naa ho to kyaa bhoga hogaa?  nahii hogaa…..to   j~naana kyaa hai? 

satyama j~naanama anaNtama bramha….

  iishvara kaa hii bhoga ho rahaa hai…  chiija vastu saba iishvara  hii hai ….. yahaa bhii iishvara hai… pati patnii saba iishvara hii hai….  iishvara kaa hii bhoga ho rahaa hai ….aura iishvara se hii yoga ho rahaa hai … lekina bhoga saNyata karo to iishvara ke bhoga me  aura iishvara ke yoga me PASS ho jaaoge ….. bhoga adhika karoge to Thuusa ho jaaoge ….

 ‘vaasudeva sarvaM iti’  hai to bhoga kisa kaa karate ho ?  iishvara kaa hii bhoga karate ho…. lekina pataa nahii hai …… iishvara kaa bhoga karane vaale ho to kyaa tuma iishvara se ba.De ho ?  nahii…..  iishvara kaa hii svaruupa hai…. to hama apane aapa kaa bhoga kara rahe hai …. apane aapa kaa bhoga karo saMyama  se to apane aapa ko jaanoge …. apane aapa kaa bhoga karoge be-saMyama se to  apane ko aj~naanii muurkha maana kara niicha yoni me jaaoge…..  aisaa kabhii sunaa hai  kii hama apane aapa kaa bhoga kara rahe…..  satsaNga se nitya naviina j~naana milataa hai ….

buddhi ko prakhara karo …. j~naana ko prakhara karo…. 

jo yoga samaadhi lagaate una ko dhanyavaada hai  …. praNaama hai…. lekina vyavahaara me jo sama rahete una ko 100  praNaama hai….  aur  duusare ke dukha se jo dravita hote hai ,  duusare ke sukha se jo prasanna hote hai vo to parama yogii hai ! vo hi hamaare aatmaa hai …..

sukhama vaa yadi vaa dukhama sa yogii paramo matah  

sukha dukha me sama rahe …. dukha me mana ko udvigna mata karo…..  sukha me pha.Nso mata …..jisa ke duniyaa me jitane jyaadaa pyaare utane usa ko jyaadaa kaaNTe chubheNge…  jiitane pyaare jyaadaa utanii musiibata jyaadaa ….  lekina aneko  me  eka pyaare kii najara se saba se samataa kaa vyavahaara karate usa ko koii dukha nahii…. usa ko aanaNda hai  ….aapa ke kitane pyaare hoNge 100  -200 -500 …. lekina mere to karo.Do hai pyaare….  mamataa ke kaaraNa pyaare maane to musiibata hai….  lekina aatmaa ke kaaraNa pyaare maane to aii haii  ! J

tumhaare saamane kaii dukha aa kara chale gaye …. kaii sukha aakaara chale gaye….  bhagavaana ko bhii tumhaare saamane aanaa hotaa hai ….  pralaya ko bhii tumhaare saamane aanaa hotaa hai….. sR^iShTi ko bhii tumhaare saamane aanaa hotaa hai … tuma itane ‘ajara amara’   ho!  bachapana ko tumhaare saamane aanaa pa.Daa  ; gayaa….  javaanii ko tumhaare saamane aanaa pa.Daa ;   gayii….  lekina tuma kaba gaye?   tuma apane aapa ko chho.Da sakate ho kyaa ?…  jisa ko tuma chho.Da nahii sakate usa ko pahechaana ne me dera kyo karate ?  kyo muu.Dhataa karate ?  jaba bhii dukha aayaa to mana me  aayaa…  sukha aayaa to mana me  aayaa….  ina dono ko jaanane vaalaa kauna hai ? 

mai huu.N apane aapa

hara paristhiti kaa baapa

 aisaa kara ke ahaNkaara  bhii nahii karanaa hai…  aura vikaaro me  bhii nahii giranaa hai….  apane me aatma vishraaNti paanaa hai….  aisaa chiNtana kare..  shaaMbhavii mudraa me omakaara kaa japa karanaa hai…. yuu   aage ba.DheNge  (chutaki bajaate- very fast )  ….

shraadhda pakSha me pitaro  kaa shraadhda karanaa hai….. lekina kevala maataa, pitaa, daadaa , daadii ,  naanaa,  naanii nahii;  jina kaa kisii ne shraadhda nahii kiyaa  jo avagata ho kara ghuuma rahe hai , una ke lie bhii tarpaNa kare ……

OM OM OM OM pahele hoTho   se japo …. phira kaNTha se japo….. aba hR^idaya se japo…..  mai  prabhu aapa kaa huu…….aapa guru ruupa hai….. guru  aapa hai ….. jo ‘laghu’ nahii  hai….  iishvara ko bhogataa hai vo laghu saadhano  me  jaataa hai ;   lekina jo iishvara ko bhogate huye jaanataa hai to laghutaa se paara ho jaataa hai ….. ‘gurutaa’ ko paataa hai  …… hR^idaya puurvaka japo OM OM OM OM  ….. mai  gurujii ko maanasika snaana karaataa….  tilaka karataa….  guru jii ka dhyaana kara ke gurujii ko pyaara karataa …..to gurujii kii aanaNda aur  meraa aanaNda eka ho gayaa ! ….  2  sarovara hai aura paara TuuTa gayii to dono  sarovaro  kaa paanii eka ho gayaa …..

Bhagavaana  kR^iShNa kahete hai kii jo loga jala se bhare huye jalaashaya ko to tiirtha maanate aura patthara kii muurti aura dhaatu kii muurti ko bhagavaana maanate lekina mahaa puruShoM ke prati jina kii shraddhaa nahii  hai  ve boJaa uThaa uThaa ke rahe jaate  ….aise loga paidala yaatraa kareNge,   kaShTa  saheMge… lekina mahaa puruSho  ke satsaNga se vaNchita raheNge…..  satsaNga sunate vo jaanate kii shariira ko sataane kii kaShTa dene kii jaruurata nahii hai ….. aura khaa khaa ke peTu hone kii bhii jaruurata nahii  hai….  saNyama se khaaye saNyama se rahe … bhoga me  bhii iishvara hai….  yoga me bhii iishvara hai  ….lekina jaba yoga me iishvara dikhegaa taba bhoga ke iishvara me  aanaNda rahegaa…  phira bhoga bhoga nahii  rahegaa  iishvara hii iishvara rahegaa …..

maine nato piyo ni maine paayo re

hari rasa piivaa jaaiivo chhe 

mai  to tho.Do  pido ni jyaadaa cha.Dhiyo  re 

hari rasa piivaa jaaiivo chhe 

OM shaaNti….OM aanaNda ….

shrii sadgurudeva jii bhagavaana kii mahaa jayajayakaara ho !!!!!!

galatiyoN  ke liye Prabhujii kShamaa kare …..

Advertisements
Explore posts in the same categories: Pujya Bapuji

2 Comments on “POONAM VRATDHAARI SPECIAL”

  1. subhash chander Says:

    हरिओम नारायण नारायण नारायण

    हिंदी मै लिखने के लिये कोटी कोटी धन्यवाद

    जी श्री राम जी सीता मत
    जी बापू जी
    कृपया आगे से सभी सत्संग को हिंदी मै लिखने कि प्रार्थना हैं
    जी श्री राम जी
    हरिओम राम हरिओम राम

  2. Shrikant Says:

    Hariom


Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s


%d bloggers like this: