Isht granth: Yog Vashisht

16th March 2009, ahmdabad ekant satsang

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Sant Shiromani Param Pujya Shri Asaramji Bapu ki Amrutwani

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 ॐ सदबुध्दी दाताय नमः
ॐ आनंद दाताय नमः
ॐ ज्ञान रुपाय नमः
ॐ मम रुपाय नमः
ॐ नमो भगवते वाशुदेवाय..
हरि ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म ..हरि : ॐ
 हरि ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म ..हरि : ॐ
हरि ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म ..हरि : ॐ
 
भयनाशन दुरमति हरण कलि में हरि को नाम l
निशि दिन नानक जो जपे सफल होवई सब काम ll
 
हरि ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म ..हरि : ॐ
हरि ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म ..हरि : ॐ
 
(योग वशिष्ट जी का पठन हो रहा है..)
पठन : “जिस में यह सब है और जिस से ये सब है उस सत्ता को तुम परमात्मा जानो..उस की भावना से मनुष्य उसी को प्राप्त होता है इस में संशय नहीं ..”
 
सदगुरुदेव जी भगवान:-
बहोत ऊँची बात भगवान वशिष्ट जी कहे रहे और भगवान राम उस को सीधा समझ कर  स्थिति में पहुँच रहे..
जिस में यह सब है और जिस में  सब है उस को तुम परमात्मा जानो..
ध्यान देना बहोत ऊँची बात है ..
नहीं तो मंदिरो में, तीर्थो में ,  चर्चो में घूम घूम  कर कई जिंदगिया  बीत जायेगी लेकिन परमात्मा  नहीं मिलेंगे.. भावनात्मक होगा मंदिरो में , चर्चो में जायेंगे तो….बाकि परमात्मा तो तत्वज्ञान से ही प्राप्त होंगे..
 
…जैसे ओमकार का मंत्र ये जो 1000 बार जप नहीं करता उस को कलियुग के दोष झपट के ले जाते..जन्मो की वासना है… काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ, मत्सर … सब छुट जाएगा ..ये विकार है , अ-स्थायी है ..सदा नहीं रहेते फिर भी  थपेडे दे दे कर जिंदगी पुरी कर देते..इसलिए अपनी सुरक्षा चाहने वाले को किसी भी कीमत पर १००० बार भगवान नाम जप करना ही चाहिए ..तुम परमात्मा को जानो..
 
एक देश में , एक जगह में समाधी लगा के परमात्मा  को नहीं जान सकते लोक लोकान्तर  में जाकर परमात्मा  को नहीं जान सकते..संसार में ऐश कर के परमात्मा  प्राप्ति की योग्यता ही नाश हो जायेगी..
परमात्मा पाये बिना कुछ भी पाया तो मुसीबत ही पायी..
 
तो परमात्मा को जानने के लिए वशिष्ट जी समझा रहे की जिस से सब है और जिस में सब है उस सत्ता को परमात्मा जानो..
वशिष्ठ जी बोलते की जिस को शीघ्र परमात्मा को पाना है तो
– एक प्रहर माने ३ घंटे  ओमकार स्वरुप ईश्वर के नाम का  जप करे..
– एक प्रहर सत्संग करे
– एक प्रहर ईश्वर स्वभाव में ध्यानस्थ रहे
और
– एक प्रहर ईश्वर प्राप्त महापुरुष की चाकरी में रहे
क्षिप्रं भवति परमात्मा l
जल्दी ही वो जीवन के फल को पा लेगा..
…दुनिया में जितना  भी कुछ  पाकर  पच पच के मर रहे है फिर भी कुछ टिकता नहीं ..लेकिन उस को पाने से सारी चीजे दासी की नाई पीछे पड़ेगी ..
धन, यश , सफलता , प्रसन्नता , दिव्यता ….अब कितना बताऊ…
ईश्वर को छोड़कर जगत को पाने को जाते तो जगत की लाते  खा खा के थक जाते तो ना ईश्वर मिलता  ना जगत मिलता….
लेकिन  जगत का आकर्षण छोड़कर ईश्वर की तरफ़ चल पड़ते है तो ईश्वर तो मिल ही जाते है  लेकिन  जगत की चीजे पीछे पीछे  मंडराती है… दोनों हाथ में लड्डू !
 ..ध्रुव, जनक के दोनों हाथो में लड्डू हो गए.. नानक जी , कबीर जी , शबरी , मीरा सभी ने पा लिया…
अरे ईश्वर प्राप्ति तक नहीं चलते, थोड़ा सा ही ईश्वर प्राप्त  महापुरुष से दीक्षा लेते तो भी बहोत कुछ मिल जाता है…..निगुरे आदमियों को मेहनत करते करते भी सर्विस नहीं मिलती…
..
 
सिल्की नाम की लड़की का अनुभव आया है की, ‘मैं अमेरिका पढ़ने गई ..तो पढाई में भी अच्छे मार्क आए और यहाँ कईयों को  २ साल से जॉब नहीं मिली..लेकिन मुझे  फलानी कंपनी में एक  लाख $ पगार भी है ..मेनेजर की पोस्ट है..’
पहेले मैं पूछती की ,  क्यो जाते लोग सत्संग में रोजरोज?… ऐसा बोलती..
माँ ने बोला की , ‘तू भी चल’
 तो कैसे भी आ गई तो ऐसे आ गई की पढाई में अच्छे मार्क आए ..सर्विस भी मिली …अभी अमेरिका में है ..बॉम्बे की लड़की है …साल में आ जाती है माँ बाप सहित… पहेले बोलती थी की , दीक्षा लुंगी तो ड्रिंक,  मीट , क्लब में जाना छोड़ दो बोलेंगे…तो माँ ने बोला की , ‘ऐसा नहीं बोलते तू चल तो सही..बाकि का सब बापूजी करेंगे..’
 
तो आई और दीक्षा ले ली…बाद में जब ड्रिंक्स लेने लगी  तो उलटी होने लगी, मीट भी छुट गया…
 
जहा तक मुझे  पक्का याद है की ९० ०००$ पगार मिलता है….
दीक्षा लेने आई तो  मेरे को पता भी नहीं है… अब जब वो अपना अनुभव बता रही तो पता चला…
 
 ..थोड़ा भी ईश्वर की तरफ़ चलते,  ईश्वर प्राप्ति की दीक्षा लेता तो भी बहोत कुछ मिलता..
९०,०००$ सैलरी तो करीब ४५ लाख साल का पगार तो पौने ४ लाख महीने का हो गया..ईश्वर की तरफ़ थोडासा  ही चले… ऐसा नहीं की ईश्वर को प्राप्त कर लिया..
लेकिन दीक्षा लेकर जप करती नियम से १०माला तो  कलियुग का प्रभाव  छुट गया…
जिस से सब कुछ है जिस में सब है..उस को तुम परमात्मा जानो..
 कितने सुगम है!
..कितने सरल है !
और कितने भरपूर है !!
जिस से सब कुछ है जिस में सब है..उस को तुम परमात्मा जानो..
… कैसा परमात्मा का विभु व्यापक रूप युँ कहे दिया महापुरुष ने..
जिस से सब कुछ है जिस में सब है..उस को तुम परमात्मा जानो..उस परमात्मा में विश्रांति हो जायेगी ..परमात्म योग हो जाएगा..परमात्मा के ज्ञान से बुध्दी सूक्ष्म हो जायेगी…
 
नाहक हम दुखी हो रहे, नाहक हम परेशान हो रहे..
नाहक झूठ,  कपट कर के सुखी होने  की मजूरी कर रहे ..
ये ओमकार का जप करो..धमाधम ! बास्!
 थोडी विश्रांति पाओ …थोड़ा योग वशिष्ठ पढो….बास्! हो गया काम!!
नहीं तो लाखो करोडो जनम मजूरी कर के थके अभी और भी करने पड़ेंगे..अंत नहीं आएगा..
 स्वामी रामतीर्थ योग वशिष्ठ पढ़े और उन को आत्म शान्ति मिली…आत्म साक्षात्कार हुआ…उन्हों ने कहा योग वशिष्ठ बार बार पढो ..आत्म साक्षात्कार नहीं हुआ तो  राम बादशाह सिर कटाएगा!
 घाटवाले बाबा को भी योग वशिष्ट से  परमात्म प्राप्ति हुयी..मेरे गुरुदेव  का इष्ट ग्रंथ ..प्रिय ग्रंथ योग वशिष्ट था..
* अपने सभी आश्रमों में  इष्ट ग्रंथ योग वशिष्ट ही है ..
* गुरुगीता पाठ ग्रंथ है और
* भगवत गीता सत्संग ग्रंथ है..
 
नारायण हरि नारायण हरि
 
ॐ शान्ति.
 
हरि ओम!सदगुरुदेव जी भगवान की जय हो!!!!!
गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे…..

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om sadbudhdi daataay namah

om aanand daataay namah

om gyan rupaay namah

om mam rupaay namah

om namo bhagavate vashudevay..

hari ooooooooooooooooooooooommmmm..Hari : OM

 

hari ooooooooooooooooooooooommmmm..Hari: OM

 

hari ooooooooooooooooooooooommmmm..Hari : OM

 

bhaynashan durmati haran kali me hari ko naam

nishi din nanak jo jape saphal hovayi sab kaam

 

hari oooooooooooooooooooooommmmmm..Hari : OM

 

hari oooooooooooooooooooooommmmmm..Hari Om

 

(yog vashisht ji ka pathan ho raha hai..)

Pathan : “jis me yah sab hai aur jis se ye sab hai us satta ko tum paramatma jano..us ki bhavana se manushy usi ko prapt hota hai is me sanshay nahi ..”

 

Sadgurudev ji Bhagavan:-

bahot unchi baat bhagavan vashisht ji kahe rahe aur bhagavan ram us ko sidha samajh kar  sthiti me pahunch rahe..

jis me yah sab hai aur jis se sab hai us ko tum paramatma jano..

dhyan dena bahot unchi baat hai ..

nahi to mandiro me, tirtho me ,  charcho me ghum ghum  kar kayi jindagiyaa  beet jayegi lekin paramatam nahi milenge.. bhavanatmak hoga mandiro me , charcho me jayenge to….baki paramatma to tatvgyan se hi prapt honge..

 

jaise omkaar ka mantr ye 1hajar baar jap nahi karata us ko kaliyug ke dosh jhapet ke le jaate..janmo ki wasana hai… kaam, krodh, mad, moh, lobh, matsar … sab chhut jayega ye vikaar hai , a-sthayi hai ..sada nahi rahete phir bhi  thapede de de kar jindagi puri kar dete..isliye apani suraksha chahane wale ko kisi bhi kimat par 1000 baar bhagavan naam jap karana hi chahiye ..tum paramatma jano..

 

ek desh me ek jagah me samadhi laga ke paramataam ko nahi jan sakate lok-lokantar me jaakar paramatma ko nahi jaan sakate..sansar me aish kar ke paramatma prapti ki yogyata hi nash ho jayegi..

paramatma paaye bina kuchh bhi paya to musibat hi paayi..

 

to paramatma ko janane ke liye vashisht ji samajha rahe ki jis se sab hai aur jis me sab hai us satta ko paramatma jano..

vashishth ji bolate ki jis ko shighr paramatm ko pana hai to

– ek prahar maane 3 ghante  omkaar swarup ishwar ke naam ka  jap kare..

– ek prahar satsang kare

– ek prahar ishwar swabhav me dhyanasth rahe

aur

– ek prahar ishwar prapt mahapaurush ki chakari me rahe

kshipram bhavati paramatma

jaldi hi vo jeevan ke phal ko paa lega..

…duniya me jitana  bhi kuchh pach pach ke mar rahe hai phir bhi kuchh tikata nahi ..lekin us ko pane se sari chije dasi ki nayi pichha padegi ..

dhan, yash, saphalata, prasannata, divyata ….ab kitana bataau…

ishwar ko chhodkar jagat ko pane ko jate to jagat ki laate  kha kha ke thak jaate to naa ishwar milata  naa jagat milataa….

lekin  jagat ka aakarshan chhodkar ishwar ki taraf chal padate hai to ishwar to mil hi jaate hai  lekin  jagat ki chije pichhe pichhe  mandaraati hai… dono hath me laddu !

 ..dhruv, janak ke dono hatho me laddu ho gaye.. nanaak ji , kabir ji , shabari mira sabhi ne paa liyaa…

are ishwar prapti tak nahi chalate, thoda sa hi ishwarprapt mahapurush se diksha lete to bhi bahot kuchh mil jata hai…..nigure aadamiyo ko mehanat karate karate bhi sarvice nahi milati…

..

 

silky naam ki ladaki ka anubhav aaya hai ki, ‘mai amerika padhane gayi ..to padhayi me bhi achhe mark aaye aur yaha kayiyo ko  2 saal se job nahi mili..lekin mujhe  phalani company me ek  lakh $ pagaar bhi manager ki post hai..’

pahele mai puchhati ki ,  kyo jaate log satsang me rojroj?… aisa bolati..

maa ne bola ki , ‘tu bhi chal’

 to kaise bhi aa gayi to aise aa gayi ki padhayi me achhe mark aaye ..service bhi mili …abhi amerika me hai ..bombay ki ladaki hai …saal me aa jati hai maa baap sahit… pahele bolati thi ki , diksha lungi to drink,  meat , club me jana chhod do bolenge…to maa ne bola ki , ‘aisa nahi bolate tu chal to sahi..baki ka sab bapuji karenge..’

 

to aayi aur diksha le li…baad me jab drinks lene lagi  to ulati hone lagi, meat bhi chhut gaya…

 

jaha tak mujhe  pakka yaad hai ki 90 000$ pagaar milata hai….

diksha lene aayi to  mere ko pata bhi nahi hai… ab jab vo apana anubhav bata rahi to pata chala…

 

 ..thoda bhi ishwar ki taraf chalate,  ishwar prapti ki diksha leta to bhi bahot kuchh milata..

90,000$ salary to karib 45 lakh saal ka pagaar to paune 4 lakh mahine ka ho gaya..ishwar ki taraf thodosa hi chale… aisa nahi ki ishwar ko prapt kar liya..

lekin diksha lekar jap karati niyam se 10mala to  kaliyug ka prabhav chhut gaya…

jis se sab kuchh hai jis me sab hai..us ko tum paramatma jano..

 kitane sugam hai!

..kitane saral hai !

aur kitane bharpur hai !!

jis se sab kuchh hai jis me sab hai..us ko tum paramatma jano..

… kaisa paramatma ka vibhu vyapak rup yu kahe diya mahapurush ne..

jis se sab kuchh hai jis me sab hai..us ko tum paramatma jano..us paramatm me vishranti ho jayegi ..paramatm yog ho jayega..paramatma ke gyan se budhdi sukshm ho jayegi…

 

naahak hum dukhi ho rahe, naahak ham pareshan ho rahe..

naahak jhuth,  kapat kar ke sukhi hone  ki majuri kar rahe

ye omkaar ka jap karo..dhamaadham ! baas!

 thodi vishranti paao …thoda yog vashishth padho….baas! ho gaya kaam!! 🙂

nahi to lakho karodo janam majuri kar ke thake abhi aur bhi karane padenge..ant nahi aayega..

 swami ramtirth yog vashisth padhe aur un ko aatm shanti mili…aatm sakshatkar huaa…unho ne kaha yog vashishth baar baar padho ..aatm sakshatkaar nahi hua to ram badshah sir kataayega!

 ghatwale baba ko bhi yog vashisht se  paramaatm prapti huyi..mere guruduev ka isht granth ..priy granth yog vashisht tha..

* apane sabhi ashramo me  isht granth hai yog vashisht hi..

* gurugita path grath hai aur

* bhagavat gita satsang granth hai..

 

narayan hari narayan hari

 

Om shanti.

 

Hari Om!sadgurudev ji bhagavan ki jay ho!!!!!

galatiyo ke liye prabhuji kshama kare…..

 

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One Comment on “Isht granth: Yog Vashisht”


  1. बहुत सारा साधुवाद


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