Prabhu ki su-vyavasthaa!

15th March 2009, ahmadabad ekant satsang

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Sant Shiromani Param Pujya Shri Asaramji Bapu ki Amrutwani

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 ..कुदरत ने कितना ख़याल रखा है..कितना उपकार मने और कितनी परमेश्वर  की करूणा कृपा और  कार्यकुशलता  माने..बच्चा माँ के पेट में आते ही माँ के शरीर में दूध बन जाता है और बच्चा खाने पिने लगता तो माँ का दूध बंद हो जाता है..
-वो सर्जनहार कण कण में है और कण कण में अनजान नहीं है…
-अनजान नहीं है और पुरे जानकार है..
-असमर्थ नहीं है..पुरे समर्थ…
-पराये नहीं है , पुरे सभी के है..
 
..प्रभु की ऐसी सुन्दर सु-व्यवस्था है की उन के बारे में कण-कण में है ऐसा बोलना अल्प मति का परिचय है ..वो सर्वत्र है ऐसा बोलना भी अल्प मति है..
-वास्तव में वो ही है केवल और कुछ है ही नहीं..
कण कण का अस्तित्व ही नहीं है, उसी का अस्तित्व है…
-कण कण में है , सर्व व्यापक है ऐसा बोलना पड़ता है ..लेकिन कण तो है ही नहीं, भगवान ही भगवान है..!
 
ये तो हमारी मति अंधी हो गई तो  भगवान को दूर और पराया मानते.. क्या सर्जन है , क्या विसर्जन है…. क्या विश्रांति है..
तुम्हारी गत मत तुम ही जाने
नानक दास सदा कुर्बान
सकल सामग्री का सुत्तरधारी
तुम सोवई  सो आज्ञाकारी
हे  सूत्रधार!
हे सकल रूप!
हे अच्युत !
हे गोविन्द !
हे अनंत….क्या करुना है!..क्या कृपा है !!.. क्या सुझ और सुव्यवस्था है आप की….!!!
 
..ऋतु परिवर्तन होती है होली के दिनों में तो धरती पे सूर्य का सीधा ताप पङता है..जठरा में मन्दाग्नि होता है..शरीर का कफ्फ़ पिघलता है..जिस की  रोग प्रतिकारक-ता कम है उस को भारी असर भी होती है..
 लेकिन उस दाता ईश्वर ने पलाश के फूल , केसुरे के फूल पैदा कर के मानव जात की कितनी सुरक्षा की है ….तुम्हारी लीला अपरम्पार है हे देव…….
.. मुन्ने का मुख देख के माँ अपनी प्रसूति की पीडा भूल जाती.. गाय अपने बछडे को चाटने लगती, गन्दगी की पर्वा नहीं करती.. कैसा वात्सल्य भर देता है माँ के ह्रदय में!!
…और नन्हे मुन्नों में कैसी निरागसता की जरा सा ‘माँ माँ’ करते तो, ‘माँ-पापा’ बोलते है तो दिन-भर की थकान मिटा देते…
 
लेकिन हम  ऐसे ना-समझ नन्हे है की जैसे बच्चा गन्दी चीजे मुंह में डालते..ऐसे  ये हम लोगो की अपनी नालायकी है की ईश्वर के दिए हुए नैसर्गिक रंगों को छोड़कर गंदे रंगों से होली खेलते तो ऐसे मनुष्य को पीडा  सताएगी..
..ग्रीष्म ऋतु में चिडचिडापन बढेगा..खिन्नता बढती तो प्रभु ने होली के पहेले ही अपने बच्चो को पित्त प्रकोप शमन के लिए कसूर का रंग , पलाश का रंग बना दिया! होली के बाद  मनुष्य में  सप्त रंग , सप्त धातु असंतुलित  होने वाले है तो उस के पहेले ही  प्रभु ने कैसे ये कुदरती फूलो का रंग पैदा कर दिया है…कैसी लीला है..!
होली के दिनों में तापमान बढेगा, तो पलाश के फूल, कसूर के फूल, गेंदे के फूलो का रंग बनाए..फूल सुखाये..एक रात पहेले  फूल पानी में भिगाए ..दुसरे दिन सुबह २-४ बुँदे तेल की डाले और उबाले तो  रंग छोडेगा… उसी रंग से अपने को.  मित्रो को रंगों..
पलाश के फूलो का रंग शरीर को लगाने से जीवन में आल्हादनीय शक्ति जागृत होती..
 
 
.. अखबारों में आया था की होली के रंगों से(केमिकल रंगों से) बीमार हुए ९० बच्चे बीमार हुए , दुकानदार को हिरासत में लिए ..९० बच्चे तो मुंबई में हुए.. ..देश भर में कितने हुए होंगे.. (ईश्वर जैसे बच्चे के लिए दूध देता है माँ के शरीर में ऐसे गरमी से बचने के लिए ईश्वरीय रंग भी है लेकिन..)बच्चा गन्दगी मुंह में डाले ऐसे हम नकली रंग से ख़राब करते.सेहत..
 
-काले रंग में लैण्ड ऑक्साइड होता है, किडनी ख़राब होती..
-हरे रंग में कोप्पर सल्पेट होता जिस से आँखों में सुजन, जलन, अंधत्व आदि आँखों को तकलीफ होती..
-सिल्वर रंग में अलुम्नियम बोमैड होता उस से कैंसर की बीमारी होती..
-नीले रंग में  क्रुसैन ब्लू होता , उस से  खुजलाहट आदि त्वचा के रोग होते..
-लाल रंग में मर्क्युरी सल्फेट होता,  उस से शरीर की गरमी बढती..गुस्सा बढ़ता है..त्वचा के रोग और दुसरे भी कई रोग होते ..
-ग्रीष्म ऋतु में स्वभाव में  खिन्नता बढती है..बाजारू रंगों से उत्तेजना बढती..(कुदरती रंगों से ये खिन्नता कम होती और उल्हास आनंद बढ़ता है)..
बाजारू रंगों से   चिडचिडा-पन बढेगा , संक्रामक रोग पकडेंगे..
 
-पलाश के फूलो का रंगा हुआ कपडा शरीर को लगे तो  सप्त धातु और सप्त रंग संतुलित  होते..आल्हाद मिलता है..
-बच्चे को दूध पिलानेवाली माताओँ का दूध बढ़ता है..
-पलाश के फूलो का रंग उत्तेजना नहीं देता , उत्साह देता है..
 
-पलाश के रंग से होली खेलना अथवा कुदरती रंग में रंग कपडा शरीर को लगे ..तो उत्तेजना शांत करता ..
-संक्रामक रोग दूर रहेते..
-मांस पेशियों में शक्ति और उत्साह होता..
-सप्त रंगों का संतुलन होता..
-चिडचिडापन दूर होता ..
-मूत्र और वायु सम्बन्धी रोग का ये सुन्दर उपाय है….
-इच्छाशक्ति संकल्प शक्ति बढ़ने की ये ईश्वरीय व्यवस्था है..
जैसे
अनार का जूस रोज पिने वाला  कैंसर के रोग से सुरक्षित हो जाता ऐसे ही पलाश के रंगों से होली खेलनेवाला बहोत सारे रोगों से सुरक्षित हो जाता..
 
  ….राजा  अकबर का राज्य था देल्ही में तब की बात है..जहाँगीर नाम का  सेनापति को लाहौर के पास राजसत्ता भोगने के लिए दिया गया था..उस को शिकार की आदत थी..शिकार  खेलने जाता और पक्षियों का शिकार करता..एक बार उस ने ७ दिन तक वन विचरण का प्लान बनाया.. सैनिक  रखे साथ में ..पक्षियों का मांस बहोत प्यारा था  जहाँगीर को.. आखेत(शिकार) करते करते २ हिस्से पड़ गए.. कुछ सैनिक  पूर्व की दिशा  में और  कुछ सैनिक जहाँगीर के साथ उत्तर में चले गए..रास्ता भटक गए… तो उस जंगल में भगवानदास महाराज अपने शिष्यों के साथ रहेते… जंगल में आश्रम था.. ईश्वर चर्चा होती…भगवान दास महाराज का एक शिष्य था नारायण दास .. महाराज ने उस को कहा की , ‘तुम आश्रम में रहेना.. जब तक हम नहीं आए तब तक मौन रहेना..’
 
गुरु की आग्या , गुरु की सेवा साधू जाने.. मूढ़ क्या पहेचाने…
नारायण दास आग्या सुनकर मौन हो गया.. भगवान दास महाराज बाकी के शिष्यों के साथ विचरण करने चले गए..
 
..रास्ता भटके हुए सैनिको ने भगवानजी महाराज का आश्रम देखा तो आ कर पूछा की फलाना रास्ता किधर जाता…हम रास्ता भटक गए ..बताओ.. आश्रम में और कोई नहीं था..अकेला नारायणदास..मौन… बोले नहीं …सैनिक बोलते रहे..बोलो , बोलो…ये कुछ नहीं बोले..सैनिक डांटे ..लेकिन नारायणदास पर कुछ असर नहीं.. आखिर थके मांदे सैनिको ने सोचा इस को जहाँगीर के पास ले चलते.. दंड देंगे तो अपने आप बोलेगा..
जो कुछ अप-शब्द,  डांटना-बोलना था नारायणदास जी को सब हो गया , लेकिन नारायणदास ने ठान लिया की जब तक गुरु जी आए नहीं , बोले नहीं..तमाचे सहे लिया..लेकिन मौन नहीं तोडा..
.. अध्यात्मिक जगत में कुछ न कुछ नियम निष्टा कर के परीक्षा से उत्तीर्ण हुए बिना दिव्य उपहार नहीं पा सकते..
 
..आश्रम का एक साधक को  दिव्य अनुभूति हुयी …लेकिन दिव्य अनुभवी बुध्दी संभाल नहीं सका ..फिर भी दिव्य अनुभूति वापस आई थोडी बहोत प्रसादी से..
 
..जहांगीर  थके मांदे थे, बोले सुबह देखेंगे..
मुर्ख सिपाही हिंदू साधू के सतशिष्य को नहीं समझे…तो रात को  कैसा खाना , कैसा रहेना दिया होगा ये कल्पना करो.. हिंदू साधू का शिष्य था,  रास्ता भटके हुए हम को सताता है तो दुश्मन है.. …नारायण दास मार झेलने वाला अकेला..
गाली और मार मारनेवाले अनेक ..
लेकिन कैसी उस की दृढ़ता !..
.. मुजरिम जिस ने कुछ  भी गुनाह नहीं किया था ऐसे नारायण दास को सुबह जहाँगीर के सामने पेश किया..जहाँगीर ने भी डांटा ..फटकारा ..उन के कहेने से सिपाहियों ने फिर से नारायण दास को मारा ….लेकिन नारायण दास बोलता नहीं… जहांगीर  का गुस्सा बढ़ गया…  ‘कुछ नहीं बोलता ..कैसा है काफर…आखिर समझता क्या है’ …सोच के और मारे…नारायण दास  कुछ बोले नहीं…
आख़िर  जहाँगीर ने बोला की,  जहर घोल कर पिला दो इस को….कटोरा आया , कटोरे में जहर घोला  गया… नारायण दास ने  ग्लास में जहर को देखा , गुरु का सुमिरन किया … ‘हे मेरे से वफादार जहर तुम  मेरी रक्षा ही करोगे, और जहर पी लिया…. जहाँगीर की आँखे फटी…. अभी मरेगा ….लेकिन नारायण दास तो खड़ा है…जहाँगीर बोला,  ‘दूसरा ग्लास दे दो..’
 
जहाँगीर को शक पैदा हुआ की जहर  नकली तो नहीं!
 
..एक ग्लास बिल्ली को पिलाया गया… बिल्ली उसी समय कराहते मर गई….तीसरा ग्लास.  चौथा …पाचवा …छटा ग्लास पिलाया गया..जैसा हारा हुआ जुआरी दुगुना खेले ऐसे जुलुम का परिणाम नहीं आ रहा तो और जुलुम किए जा रहा है…
भगवान तुम कैसे हो!!शब्द नहीं…!
शब्द तो  चतुराई से बनाए  है…..(शब्दों में इतनी ताकद कहां की भगवान कैसे है बताये…)
..नारायण दास को ७ वां ग्लास पिलाया गया …सर्वेश्वर परमेश्वर विश्वेश्वर की लीला कैसी!!…भगवान दास का शिष्य नारायण दास जहर का ७ वां प्याला  पीया और पीडा जहाँगीर को हो रही है …
‘तोबा तोबा… ला इल्लाह…’  झटपटाता हुआ जहाँगीर निचे गिर पड़ा ..नोकर चाकर ‘जहापन्हा जहापन्हा’ करते रहे… जहापन्हा तो मर गया ..
 
..जहर तो गुरु के आज्ञाकारी शिष्य नारायणदास ने पिया…  भक्त तो जुलुम सहते जाए..जहर को पिए जाते तो ईश्वर से नहीं रहा जाता..
मेरे साथ किसी ने जुलुम किया तो मैंने तो कुछ नहीं कहा , लेकिन कैसा क्या हो जाता ..आप जुलुम सहते ईश्वर के नाते आप अडिग रहेते है ..ईश्वर से फिर दंड दिए बिना रहा नहीं जाता है …
सातवे प्याले का असर परमेश्वर ने जहाँगीर को दे दिया…६ ग्लास तो नारायण दास को हजम करा दिया… ७ वां ग्लास पिलाया तो परमेश्वर  की लीला से  ७ वां प्याला का असर जहाँगीर को  हुआ…जहाँगीर तो  मर गए…. हाकिम को बुलाया… कोई इलाज नहीं…जहाँगीर तो  मर गए…. अब क्या होगा?.  सब थर-थर कापने लगे..
इतने में भगवानदास  महाराज आश्रम वापस आए…देखा की नारायण दास नहीं है..आग्या का उल्लंघन करनेवाला तो नहीं है… ‘नारायण नारायण.. नारायण…’ गुरु ने आश्रम में ढूँढा…फिर  गुरु चुप होकर ध्यान समाधी में बैठ गए…
आत्मा के आगे भुत काल, वर्तमान काल और भविष्य काल ये तीनो  काल नहीं होते… समाधिस्त  २० -५० साल पहेले का देख सकता , वर्तमान का देख सकता या २०-५०- १०० साल बाद का भी  देखना हो तो उन के लिए कठिनाई नहीं होती…
 
 महाराज जी ने देखा की , नारायण दास ने गुरु की आग्या मानी तो उस को इस प्रकार मारते पिटते जहाँगीर के सैनिक ले गए और  जहर पिलाया है…चलकर जायेंगे तो देर होगी..गुरु  सूक्ष्म शरीर से वह प्रगट हो गए…
 राजा को दिखे बिना वहां प्रगट हो गए..हाथ लगाये तो छूने में नहीं आए…
जहाँगीर का आत्मा बोले..’ये मेरा शरीर का  क्या हाल हुआ महाराज रहेम करो..’
महाराज बोले, ‘तुमने ६ प्याले जहर पिलाया नारायण दास को…प्रकृति ने ,  ईश्वर ने तुम्हारे तरफ़ भेज दिया सातवा ग्लास.. ७ वे ग्लास के जहर तुम्हारी तरफ़ भेजा.. उसी से तुम मरे..’
 सिपाही हाथ जोड़ने लगे.. ‘महाराज रहेमत कर दो’
.. नारायण दास  को क्यो सताया? – महाराज बोले…
तुंरत नारायण दास को बा-इज्जत छोड़ दिया…
महाराज बोले,  ‘राज वैद्य इधर आओ.. जहाँगीर को  कुछ नहीं हुआ ..कातिल से   कातिल जहर से जो नुकसान होता है  शरीर के अंगो को तो उस का तुम उपचार करो ..भगवान की दया से जहाँगीर ठीक हो जाएगा’
 ..सिपाहियों ने हाथ जोड़े कुछ करो महाराज…तो महाराज ने जहाँगीर के  अन्तवाहक  शरीर पर नजर डाली…जहाँगीर ने हाथ पैर हिलाए… सैनिको में खुशी छा गई.. महाराज का अभिवादन हुआ..
भगवान दास महाराज अपने शिष्य नारायण को लेकर जंगल  की तरफ़ चले गए…
जहाँगीर को तो  हिंदू साधुओ के लिए प्रिती हो गई.. जहर के कारन बुढापे में कोई तकलीफ ना हो इसलिए आशीर्वाद मांगे…अपने नोकर चाकरों से खूब सारा धन लाया..महाराज को  सौगात दिलाई..महाराज को बोले  मुझे प्रायश्चित्त दो…मुस्लिमो में प्रायश्चित्त शब्द ही नहीं होता …फिर भी जहाँगीर ने महाराज को प्रार्थना किया की मुझे  दंड दीजिये ..प्रायश्चित्त दो बोला..
तो महाराज बोले की, ‘तुम्हारा प्रायश्चित्त  ये की दुबारा किसी संत को अ-कारण सताना नहीं.. संत  की निंदा करने वाला, संत से धोका करनेवाला  या उन को सतानेवाला  खूब तबाह हो जाता… ऐसी तबाही को कोई रोक नहीं सकता…तो ऐसी गलती  को दुबारा नहीं करना ..मुझे तुम्हारा ये धन नहीं चाहिए ..इस धन को गरीबो में बाटों …जरुँरत मंदों में बांट देना..
 महाराज को प्रणाम किया…जहाँगीर नतमस्तक हुआ…
 जो  दुष्ट व्यवहार करता उन के आत्मा को कुचलता है..सभी सैनिक माफी मांगने गए..
ये कथाओं से लगता है कैसी सुन्दर व्यवस्था है ईश्वर की…कैसा न्याय देवता है वो  प्रेमदेवता !!
 
 
 
ॐ शान्ति.
 
हरि ओम!सदगुरुदेव जी भगवान की जय हो!!!!!
गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे…..

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..kudarat ne kitana khayaal rakha hai..kitana upkaar mane aur kitani parameshwar  ki karuna krupa aur  karykushalata  maane..bachcha maa ke pet me aate hi maa ke sharir me dudh ban jata hai aur bachcha khane pine lagata to maa ka dudh band ho jata hai..

-vo sarjanhaar kan kan me hai aur kan kan me anjaan nahi hai…

-anjaan nahi hai aur pure jaankaar hai..

-asamarth nahi hai..pure samarth…

-paraaye nahi hai pure sabhi ke hai..

 

..prabhu ki aisi sundar su-vyavastha hai ki un ke baare me kan-kan me hai aisa bolana alp mati ka parichay hai ..vo sarvatr hai aisa bolana bhi alp mati hai..

-vastav me wo hi hai kewal aur kuchh hai hi nahi..

kan kan ka aasthitv hi nahi hai usi ka asthitv hai…

-kan kan me hai , sarv vyapak hai aisa bolana padata hai ..lekin kan to hai hi nahi, bhagavan hi bhagavan hai..!

 

ye to hamaari mati andhi ho gayi to  bhagavan ko dur aur paraya maanate.. kya sarjan hai , kya visarjan hai…. kya vishranti hai..

tumhari gat mat tum hi jaane

nanak das sada kurbaane

sakal samagri ka sutardhari

tum sovayi  so aagyakari

hey  sutr dhar!

hey sakal rup!

hey achyut !

hey govind !

hey aanant….

kya karuna hai!..kya krupa hai !!.. kya sujhh aur suvyavastha hai aap ki….!!!

 

..rutu parivartan hoti hai holi ke dino me to dharati pe sury ka sidha taap padataa hai..jathara me mandagni hota hai..sharir ka kuff pighalata hai..jis ki  rog pratikaarak-ta cum hai us ko bhari asar bhi hoti hai..

 lekin us data ishwar ne palash ke phul , kesure ke phul paida kar ke manav jaat ki kitani surksha ki hai ….tumhari lila aparampaar hai hey dev…….

.. munne ka mukh dekh ke maa apani prasuti ki pida bhul jati.. gaay apane bachhade ko chaatane lagati, gandagi ki parva nahi karati.. kaisa vaatsaly bhar deta hai maa ke hruday me!!

…aur nanhe munno me kaisi niraagasataa ki jara sa ‘maa maa’ karate to, ‘maa-papa’ bolate hai to din-bhar ki thakaan mitaa dete…

 

Lekin hum  aise naa-samajh nanhe hai ki jaise bachcha gandi chije munh me daalate..aise  ye hum logo ki apani nalaayaki hai ki ishwar ke diye huye naisargik rango ko chhodkar gande rango se holi khelate to aise manushy ko pida  sataayegi..

..grishm rutu me chidchidapan badhega..khinnata badhati to prabhu ne holi ke pahele hi apane bachcho ko pitt prakop shaman ke liye kesure ka rang , palaash ka rang banaa diya! holi ke baad  manushy me  sapt rang , sapt dhatu asantulit  hone wale hai to us ke pahele hi  prabhu ne kaise ye kudarati phulo ka rang paida kar diya hai…kaisi lila hai..!

Holi ke dino me tapamaan badhega, to palaash ke phul, kesure ke phul, gende ke phulo ka rang banaaye..phul sukhaye..ek raat pahele  phul pani me bhigaaye ..dusare din subah 2-4 bunde tel ki daale aur ubaale to  rang chhodega… usi rang se apane ko.  mitro ko rango..

palash ke phulo ka rang sharir ko lagane se jeevan me aalhadaniy shakti jagrut hoti..

 

 

.. akhabaro me aaya tha ki holi ke rango se(chemical rango se) 90 bachche bimar huye.. dukanadar ko hiraasat me liye ..90 bachche to mumbai me huye.. ..desh bhar me kitane huye honge.. (ishwar jaise bachche ke liye dudh deta hai maa ke sharir me aise garami se bachane ke liye ishwariy rang bhi hai lekin..)bachha gandagi munh me dale aise hum nakali rang se kharab karate.sehat..

 

-kale rang me lend oxide hota hai, kideny kharab hoti..

-hare rang me copper salpet hota jis se aankho me sujan, jalan, andhatv aadi aankho ko taklif hoti..

-silver rang me alumnium bomaid hota us se cancer ki bimari hoti..

-nile rang me  crusain blue hota , us se  khujlaakaht aadi tvacha ke rog hote..

-laal rang me marcury salphait hota,  us se sharir ki garami badhati..gussa badhata hai..tvacha ke rog aur dusare bhi kayi rog

hote..

-grishm rutu me swabhav me  khinnata badhati hai..bajaru rango se uttejana badhati..(kudarati rango se ye khinnata cum hoti aur ulhas aanand badhata hai)..

bajaaru rango se   chidchida-pan badhega sankramak rog pakdenge..

 

-palash ke phulo ka ranga huaa kapada sharir ko lage to  sapt dhatu aur sapt rang santilit hote..aalhad milata hai..

-bachche ko dudh pilanewali matao ka dudh badhataa hai..

-palash ke phulo ka rang uttejanaa nahi deta utsaah deta hai..

 

-palash ke rang se holi khelana athava kudarati rang me ranga kapada sharir ko lage ..to uttejana shant karata ..

-sankramak rog dur rahete..

-maans peshiyo me shakti aur utsah hota..

-sapt rango ka santulan hota..

-chidchidapan dur hota ..

-mutr aur vayu sambandhi rog ka ye sundar upaay hai….

-ichhashakti sankalp shakti badhane ki ye ishwariy vyavastha hai..

jaise

anaar ka juice roj pine wala cancer ke rog se surakshit ho jata aise hi palash ke rango se holi khelanewala bahot sare rogo se surakshit ho jata..

 

  ….raja  akabar ka rajy tha delhi me tab ki baat hai..jahangir naam ka  senapati ko lahore ke paas rajsatta bhogane ke liye diya gaya tha..us ko shikaar ki aadat thi..shikaar  khelane jata aur pakshiyo ka shikar karata..ek baar us ne 7 din tak van vicharan ka plan banaayaa.. sainik  rakhe sath me ..pakshiyo ka maans bahot pyara tha  jahangir ko.. aakhet(shikar) karate karate 2 hisse pad gaye.. kuchh sainik  purv ki disha  me aur  kuchh sainik jahangir ke sath uttar me chale gaye..rasta bhatak gaye… to us jungle me bhagavandas maharaj apane shishyo ke sath rahete… jangle me ashram tha.. ishwar charcha hoti…bhagavan das maharaj ka ek shishy tha narayan das .. maharaj ne us ko kaha ki , ‘tum aashram me rahena.. jab tak hum nahi aaye tab tak maun rahena..’

 

guru ki aagya , guru ki sewa sadhu jane.. mudh kya pahechane…

narayan das aagya sunakar maun ho gaya.. bhagavan das maharaj baki ke shishyo ke sath vicharan karane chale gaye..

 

..rasta bhatake huye sainiko ne bhagavanji maharaj ka ashram dekha to aa kar puchha ki phalana rasta kidhar jata…hum rasta bhatak gaye ..bataao.. ashram me aur koyi nahi tha..akela narayandas..maun… bole nahi …sainik bolate rahe..bolo , bolo…ye kuchh nahi bole..sainik daante ..lekin narayandas par kuchh asar nahi.. akhir thake mande sainiko ne socha is ko jahangir ke paas le chalate.. dand denge to apane aap bolgea..

jo kuch ap-shabd,  daatana-bolana tha narayandas ji ko sab ho gaya lekin narayandas ne than liya ki jab tak guru ji aaye nahi bole nahi..tamaache sahe liya..lekin maun nahi toda..

.. adhyatmik jagat me kuchh na kuchh niyam nishta kar ke pariksha se uttirn huye bina divy uphaar nahi paa sakate..

 

..ashram ka ek sadhak  divya anubhuti huyi …lekin divy anubhavi budhdi sambhal nahi saka ..phir bhi divy anubhuti wapas aayi thodi bahot prasadi se..

 

..jahangir thake mande the, bole subah dekhenge..

murkh sipaahi hindu sadhu ke satshishy ko nahi samajhe…to raat ko  kaisa khana kaisa rahena diya hoga ye kalpana karo.. hindu sadhu ka shishy tha,  rasta bhatake huye hum ko satata  hai to dushman hai.. …narayan das maar jhelane wala akela..

gali aur maar maranewale anek ..

lekin kaisi us ki drudhataa !..

.. mujrim jis ne kuchhh bhi gunah nahi kiya tha aise narayan das ko subah jahangir ke samane pesh kiya..jahangir ne bhi daanta ..phatakara ..un ke kahene se sipahiyo ne phir se narayan das ko mara ….lekin narayan das bolata nahi… jahaganir ka gussa badh gaya…  kuchh nahi bolata ..kaisa hai kaafar…akhir samajhata kya hai …soch ke aur maare…narayan das  kuchh bole nahi…

Aakhir  jahangir ne bola ki,  jaher ghol kar pila do is ko….katoraa aaya katore me jaher hola gaya… narayan das ne  glass me jaher ko dekha guru ka sumiran kiya …hey mere se waphadar jaher tum  meri raksha hi karoge.. jahangir ki aankhe phati…. abhi marega ….lekin narayan das to khada hai…jahangir bola,  ‘dusara glass de do..’

 

jahangir ko shak paida huaa ki jeher nakali to nahi!

 

..ek glass billi ko pilaya gaya… billi usi samay karaahate mar gayi….tisara glass.  Chautha …pachava …chhata glass pilaya gaya..jaisa hara huaa juaari duguna khele aise julum ka parinam nahi aa raha to aur julum kiye jaa raha hai…

bhagavan tum kaise ho!!shabd nahi…!

shabd to  chaturayi se banaaye  hai…..(shabdo itani taakad kaha ki bhagavan kaise hai bataaye…)

..narayan das ko 7 va glass pilaya gaya …sarveshwar parameshwar vishweshwar ki lila kaisi!!…bhagavan das ka shishy narayan das jaher ka 7 vaa pyala  piyaa aur pida jahangir ko ho rahi hai …

‘toba toba… laa illah…’  jhatpataata huaa jahangir niche gir pada ..nokar-chaakar ‘jahapanha jahapanha’ karte rahe… jahapanha to mar gaya ..

 

..jaher to guru ke aagyakari shishy narayandas ne piya…  bhakt to julum sahate jaaye..jaher ko piye jaate to ishwar se nahi raha jata..

mere sath kisi ne julum kiya to maine to kuchh nahi kaha lekin kaisa kya ho jata ..aap julum sahate ishwar ke nate aap adig rahete hai ..ishwar se phir dand diye bina raha nahi jata hai …

saatave pyale ka asar parameshwar ne jahangir ko de diya…6 glaass to narayan das ko hajam kara diya… 7 vaa glass pilaya to parameshwar  ki lila se  7 va pyala ka asar jahangir ko  huaa…jahangir to  mar gaye…. hakim ko bulaya… koyi ilaaj nahi…jahangir to  mar gaye…. ab kya hoga?.  Sab thar-thar kaapane lage..

itane me bhagavanb das maharaj ashram wapas aaye…dekha ki narayan das nahi hai..aagya ka ullanghan karanewala to nahi hai… ‘narayan narayan.. narayan…’ guru ne ashram me dhundha…phir  guru chup hokar dhyan samadhi me baith gaye…

aatma ke aage bhut kaal, vartman kaal aur bhavishy kaal ye tino  kaal nahi hote… samahdist 20 -50 saal pahele ka dekh sakata , vartmaan ka dekh sakata yaa 20-50- 100 saal baad ka bhi  dekhana ho to un ke liye kathinayi nahi hoti…

 

 maharaj ji ne deka ki , narayan das ne guru ki aagya mani to us ko is prakar marate pitate jahangir ke sainik le gaye aur  jaher pilaya hai…chalkar jayenge to der hogi..guru  sukshm sharir se waha pragat ho gaye…

 raja ko dikhe bina waha pragat ho gaye..hath lagaye to chhune me nahi aaye…

jahangir ka aatma bole..’ye mera sharir kya haal huaa maharaj rahem karo..’

maharaj bole, ‘tumane 6 pyale jaher pilaya narayan das ko…prakruti ne ,  ishwar ne tumhare taraf bhej diya saatva glass.. 7 ve glass ke jaher tumhari taraf bheja.. usi se tum mare..

 sipahi hath jodane lage.. ‘maharaj rahemat kar do’

.. narayan das  ko kyo sataayaa?

Maharaj bole…

turant narayan das ko baa-ijjat chhod diya…

maharaj bole,  ‘raj vaidy idhar aao.. jahangir ko  kuchh nahi huaa katil se   katil jaher se jo nuksan hota hai  sharir ke ango ko to us ka tum upchar karo ..bhagavan ki daya se jahangir thik ho jayega’

 ..sipahiyo ne hath jode kuchh karo maharaj…to maharaj ne jahangir ke  antwahak  sharir par najar daali…jahangir ne hath pair hilaaye… sainiko me khushi chha gayi.. maharaj ka abhiwaadan huaa..

Bhagavan das maharaj apane shishy narayan ko lekar jungle  ki taraf chale gaye…

Jahangir ko to  hindu sadhuo ke liye priti ho gayi.. jaher ke karan budhape me koyi taklif naa ho isliye ashirvad mange…apane nokar chaakaro se khub sara dhan laya..maharaj ko  saugaat dilaayi..maharaj ko bole  mujhe prayaschitt do…muslimo me prayschitt shabd hi nahi hota …phir bhi jahangir ne maharaj ko prarthana kiya ki mujhe  dand dijiye prayashcitt do bola..

To maharaj bole ki, tumhara prayschitt  ye ki dubara kisi sant ko a-kaaran satana nahi.. sant  ki ninda karane wala, sant se dhoka karanewala  ya un ko sataanewala  khub tabaah ho jata… aisi tabaahi ko koyi rok nahi sakataa…to aisi galati  ko dubaaraa nahi karana ..mujhe tumhara ye dhan nahi chahiye ..is dhan ko garibo me baato …jaruarat mando me baat dena..

 maharaj ko pranam kiya…jahangir natmstak huaa…

 jo  dusht vyavahaar karata un ke aatma ko kuchalataa hai..sabhi sainik maphi mangane gaye..

ye kathaao se lagataa hai kaisi sundar vyavastha hai ishwar ki…kaisa nyay devata hai vo  premdevata !!

 

 

 

om shanti.

 

Hari Om!sadgurudev ji Bhagavan ki jay ho!!!!!

Galatiyo ke liye prabhuji kshama kare…..

 

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