Ek hath de, Ek hath le..

3rd March2009 ; Yawatmaal(M.S.) satsang-part -2

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Sant Shiromani Param Pujya Shri Asaramji Bapu ki Amrutwani

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 ..एक लड़की थी..उस का नाम कमला..मंत्र लिया..शादी हो गई..ससुराल गई..तो उस की सासू बड़ी झगडालू थी..कमल की सासु अपनी सासु को (कमला के दादे सासु को) बहुत दुःख देती थी..तो कमला ने देखा मेरी सासु तो अपने सासु को बहोत दुःख देती है..अब मैं बोलूंगी की, “सासु जी मेरे दादे सासु को दुःख ना दो” तो बोलेगी की “कल की लड़की मेरे को अकल देती है..तू उस की चमची है..ऐसी है वैसी है” तो घर में झगडा होगा..और मेरी भी दुश्मन बनेगी..तो घर में अशांति होगी..तो मैं क्या करू?यहाँ(भ्रूमध्य में ) तिलक किया…गुरूजी ने मंत्र दिया था..जप करे….फिर अन्दर से ‘असली मै’ से भगवान की प्रेरणा हुयी की ऐसा ऐसा कर…वो क्या करे की पहेले  जरा दादे सासु के पास बैठे..दादे सासु के जरा पैर दबावें, उस से बातें करे..तो ज्यादा ज्यादा दादे सासु के पास बैठे तो उस के सासु को गुस्सा लगे की मेरे को तो पूछती नही और ये बुढिया के पास बैठी है..तो बोली की, “काहें को उधर बैठती?”
तो कमला बोली, “सासु जी मै आप को हाथ जोड़ती हूँ..मेरे माँ बाप ने मेरे को बोला की जवान लड़को के बिच, जवान लोगो के बिच जवान बहु को नही बैठना चाहिए…” ..तो सासु बोली, “हां, ये तो अच्छा है”
“तो घर में जो बूढे बुजुर्ग हो उन के पास बैठना चाहिए..”
जवान लड़को के साथ जवान लड़कियों को नही बैठना चाहिए ..नही तो ठठा मस्करी और फालतू बातें होती है…तो जवान बहु और बेटी को दादी, नानी, जो घर में बूढे बुजुर्ग है ना उन के नजदीक बैठना चाहिए..तो उन का ज्ञान मिलता है, उन का अनुभव मिलता है और उन का आदर करने से उन का आशीर्वाद मिलता है…

कमला बोली, ..सासु जी आप बुरा नही मानना की ..मेरे माँ बाप ने बोला है की अपने घर की रीतिरिवाज तेरे ससुराल में मत चलाना ..तुम्हारे ससुराल को जो रीत रिवाज है वो ही ससुराल में चलाना…नही तो अपने घर का(माइके का) रीतिरिवाज चलाएगी तो  घर में झगडे होंगे…इसलिए बेटी तुम वहा के बुढे बुजुर्ग की सेवा करना और उन का रीत रिवाज सिखना… और वो ही उधर चलाना…अपने घर का नही चलाना…”
तो सास बोली, “अच्छा है”
 
कमला की  सासु दादे सासु को ठीकरे में भोजन देती..तो कमला ठीकरे इकठ्ठे करती..सासु बोली, “तू क्यो ठीकरे इकठ्ठे करती?”
बोली, “हम सिख रही हूँ की सासु जब बुढ्ढी हो जाए तो उस को ठीकरे में खाना देना चाहिए..तो आप जब बुढ्ढी हो जाओगी तो आप जैसे अपनी सासु को ठीकरे में खाना देती ऐसा मेरे को भी करना पड़ेगा ना…!”
 
सासु बोली, ” ओह्ह..अरे नही नही..ऐसा नही करना..थाली कौन माँजे इसलिए मैं ठीकरे में दे देती”
कमला बोली, “थाली तो मैं माँज लुंगी”
सासु बोली, “तो ठीक है जा..दादी सासू को थाली में खाना देकर आ..”
 
खिचडी में निचे कंकड़ रहे जाते तो दादी सास को वो ही देते..तो कमला देख रही थी..सासु बोली, “क्या देखती है कमला?”
बोली, “मैं ये देखती  की दादी सासु को कैसा खाना देना चाहिए..तो जब मेरा बेटा होगा, मैं भी सासु बनूँगी तो आप दादे सासु बनेगी तब मेरे को भी ऐसा खाना देना पड़ेगा न आप के लिए..”
 
तो बोली, “नही नही..ऐसा नही…ऊपर ऊपर से उन को दिया करो…पहेले पहेले उन को दिया करो…”
 
तो दादे सासु के तो भाग खुल गए…ठीकरे के बदले थाली कटोरी में खाना मिले और आखरीवाला कचरा पट्टी कंकड़ वाले के बदले अच्छा खाना मिलने लगा..
 
एक दिन फिर वो कपडे के लिरिया देखने लगी..
सासु बोली,” क्या देखती बहु?”
कमला बोली, ” दादे सासु के कपडे पुराने पुराने गले गले से है..एकदम पुराने कपडो में से इन के कपडे बनते..”
 
सासु बोली, “हां ये बुढ्ढी है ना..क्या करना है इन को नया कपडा?तो पुरानी चादर से इन का कपडा बना देते..”
 
कमला बोली, “मैं देख रही हूँ..मेरे सासु के लिए भी ऐसे कपडे बनने पड़ेंगे ना मेरे को…!”
 
सासु बोली, “अरे नही नही अभी तो नए कपडे लेकर बना के देना तो मेरे को भी नया मिलेगा..!”
 
एक हाथ दे , एक हाथ ले..मैंने कई ऐसे बहुओं  को देखा है जो अपनी सासु को दुःख दिया तो उन की बहुओं  ने उन को बहोत दुःख दिया..जो दूसरो को सताते उन को भी सताने वाले कोई मिल जाते…और जो दूसरो का भला करते तो उन का भला करने के लिए दसो हाथो से लोग भला करते….
तुम दुसरे का मंगल सोचते जाओ तो तुम्हारी अन्दर की शक्ति विकसित होगी..हम किसी का बुरा सोचे, बुरा चाहे तो उस का बुरा हो चाहे ना हो लेकिन मेरा दिल तो बुरा होता है ना…!मेरा अंतर्यामी देखता की ये किसी का बुरा सोच रहा है तो बुध्दी हमारी कुंठित होती…
 
‘हे प्रभु आनंद दाता..’ ये  रोज प्रार्थना करे तो घर में निंदा द्वेष, कलह , बीमारिया भाग जाए और घर में आरोग्य , प्रसन्नता , आनंद आवे..
…एक तो बन्दर चंचल है (मन)   , फिर उस को बिच्छू काटे क्रोध इर्षा का ..वो कम है क्या?….फिर उस को दारू पिलाओ( निंदा )…तो हद हो गई…  फिर उस को भुत लगाओ झगडे का !..ऐसा अपने को दुःख का भुत काहे को लगाना? तो घर में इर्षा, झगडा, द्वेष , चुगली ये सचमुच में भुत लगने जैसा है…इस भजन से घर में सुख शान्ति हो ऐसा फायदा होता है…. ये आप याद करना , रोज बोलना और बच्चो को भी सिखाना….
 
 
–         अभी आंवला का सीज़न है ..आंवले ले लेना २/३ किलो..आंवले धोकर कुकर में डालो.उस में २ से ५ ग्राम पानी डालो बास्..आधी सिटी बजे की आंवला उतार दे..थोडी देर शिजे.. बाद में कुकर खोलो… आंवले के टुकडे कर के बिज निकाल दे..उस में शक्कर पीसकर मिला दे..और सुखा दे ..तो वो कॅण्डी बन जायेगी आंवले की मीठी..बाजार में ९० रुपये किलो मिलती है, तुम्हारे को तो १८ – २० रुपये किलो पड़ेगी कॅण्डी !
 
–         थोड़े आंवले ऐसे ही सुखा दो..आंवले कुटोगे तो पाउडर बन जाएगा…तो इस आंवले के पाउडर में २०% हल्दी डाल दो..फिर ३-४ ग्राम रोज सुबह पानी से फांक लो.. तो धातुक्षय की बीमारी , खुजली की बीमारी, आँख जलने की तकलीफ, गुस्सा आने की तकलीफ, बाल झड़ने की तकलीफ सब ठीक होता है… आंवले का घोल बना के सर पे लगा दिया और शरीर पे रगड़ के स्नान किया तो शरीर की गरमी सब खिंच लेता है आंवला…
 
–         १ किलो आंवले का मावा बना दिया.तो उस में एक किलो शक्कर का चासनी बना के उस में मिक्स कर दिया..फिर मिर्ची, जरा सा निमक, धनिया , जीरा का बगार  कर के उस मावे को सेंक लिया.. रोज सुबह १०-१५ ग्राम वो मावा कटोरी में दाल के थोड़ा सा पानी डाल के घोल बना के पिया तो चाय से १० प्रकार के रोग होते और इस से तो १० प्रकार के रोग मिटते..चेहरे  पे लाली आती है..तबियत ठीक रहेती है.. 
 
.. काविल /पीलिया जौंडिस की बीमारी और दम्मे की बीमारी का अलोपथी में उपाय नही है…फिर भी भरती कर लेते..लुट लुट के फिर बोलते कसाई जैसे..
‘अब ले जाओ’…
दाहुद में अपना आश्रम है, उस का अध्यक्ष की पत्नी बद्रीनाथ जाना चाहती थी..तो बोले जरा घुटने में दर्द है तो चलो डॉक्टर को दिखा देते..डॉक्टर ने देखा, दवाई दी, गोली दिया ..जितना लुटना था लुटा..फिर बोला..मेरा फ्रेंड है उस से एक्स-रे कराओ और उस के हॉस्पिटल में भरती हो जाओ….तो भरती हुआ, फिर दुसरे जगह भेजते ऐसे करते करते ११, ००००० रूपया लिया…और पत्नी का लाश दे दिया २ महीने में..जरा सा घुटने का दर्द तो ये चेक करो ऐसा करो वैसा करो…और ऊपर से बाई का लाश दे दिया..बद्रीनाथ तो उस का हॉस्पिटल में ही पुरा कर दिया….अंग्रेजी दवाईयों की ऐसी दुर्दशा है…
 
 
आइस -क्रीम में जानवरों के  हड्डियों की पाउडर पड़ती है और इस पाउडर के बिना आइस-क्रीम नही बनती…..
ऐसे पेप्सी कोकाकोला में जानवरों के हड्डियों का तेल पड़ता है..
आप नीबू पानी पियो..आंवले का शरबत पियो..अंगूर का रस पियो..
 
होली कुदरती रंगों से खेलो..पलाश के फूलो के रंगों से..गेंदों के फूलो के रंग से खेलो..केमिकल के बाजारू रंगों से होली खेलना बहोत हानी करता है..
 
ॐ शान्ति.

हरि ओम!सदगुरुदेव जी भगवान की जय हो!!!!!
गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे…….

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..ek ladaki thi..us ka naam kamala..mantr liya..shadi ho gayi..sasural gayi..to us ki saasu badi jhagadaalu thi..kamal ki sasu apani sasu ko (kamala ke dade sasu ko) bahut dukh deti thi..to kamala ne dekha meri sasu to apane sasu ko bahot dukh deti hai..ab mai bolungi ki, “sasu ji mere dade sasu ko dukh naa do” to bolegi ki “kal ki ladaki mere ko akal deti hai..tu us ki chamachi hai..aisi hai waisi hai” to ghar me jhagada hoga..aur meri bhi dushman banegi..to ghar me ashanti hogi..to mai kya karu?yaha(bhrumadhy me ) tilak kiya…guruji ne mantr diya tha..jap kare….phir andar se asali se bhagavan ki prerana huyi ki aisa aisa kar…vo kya kare ki pahe;e jara dade sasu ke paas baithe..dade sasu ke jara pair dabaave, us se baate kare..to jyada jyada dade sasu ke paas baithe to us ke sasu ko gussa lage ki mere ko to puchhati nahi aur ye budhiya ke pas baithi hai..to boli ki, “kahe ko udhar baithati?”

to kamala boli, “sasu ji mai aap ko hath jodati hun..mere maa baap ne mere ko bola ki jawan ladako ke bich, jawan logo ke bich jawan bahu ko nahi baithana chahiye…” ..to sasu boli, “haa, ye to achha hai”

“to ghar me jo budhe bujurg ho un ke pas baithana chahiye..”

jawan ladako ke sath jawan ladakiyo ko nahi baithana chahiye ..nahi to thathha maskari aur phalatu baate hoti hai…to jawan bahu aur beti ko dadi, nani, jo ghar me budhe bujurg hai na un ke najdik baithana chahiye..to un ka gyan milta hai, un ka anubhav milata hai aur un ka aadar karane se un ka ashirvad milata hai…..sasu ji aap bura nahi manana ki ..mere maa baap ne bola hai ki apane ghar ki reetiriwaaj tere sasuraal me mat chalana ..tumhare sasural ko jo reet riwaaj hai vo hi sasural me chalana…nahi to apane ghar ka(maike ka) reetiriwaj chalayegi to  ghar me jhagade honge…isliye beti tum waha ke budhe bujurg ki sewa karana aur un ka reet rivaj sikhana… aur wo hi udhar chalana…apane ghar ka nahi chalana…”

to saas boli, “achha hai”

 

sasu dade sasu ko thikare me bhojan deti..to kamala thikare ikaththe karati..sasu boli, “tu kyo thikare ikaththe karati?”

boli, “hum sikh rahi hun ki sasu jab budhdi ho jaye to us ko thikare me khana dena chahiye..to aap jab budhdi ho jaaogi to aap jaise apani sasu ko thikare me khana deti aisa mere ko bhi karana padega naa…!”

 

sasu boli, ” ohh..are nahi nahi..aisa nahi karana..thali kaun manje isliye mai thikare me de deti”

kamala boli, “thali to mai maanj lungi”

sasu boli, “to thik hai jaa..dadi saasu ko thali me khana dekar aa..”

 

khichadi me niche kankad rahe jate to dadi saas ko wo hi dete..to kamala dekh rahi thi..sasu boli, “kya dekhati hai kamala?”

boli, “mai ye dekhati  ki dadi sasu ko kaisa khana dena chahiye..to jab mera beta hoga, mai bhi sasu banungi to aap dade sasu banegi tab mere ko bhi aisa khana dena padega na aap ke liye..”

 

to boli, “nahi nahi..aisa nahi…upar upar se un ko diya karo…pahele pahele un ko diya karo…”

 

to dade sasu ke to bhag khul gaye…thikare ke badale thali katori me khana mile aur aakhariwala kachara patti kankad wale ke badale achha khana milane laga..

 

ek din phir wo kapade ke liriyaa dekhane lagi..

sasu boli,” kya dekhati bahu?”

kamala boli, ” dade sasu ke kapade purane purane gale gale se hai..ekdum purane kapado me se in ke kapade banate..”

 

sasu boli, “haa ye budhi hai naa..kya karana hai is ko naya kapada?to purani chaadar se in ka kapada banaa dete..”

 

kamala boli, “mai dekh rahi hun..mere sasu ke liye bhi aise kapade banane padenge naa mere ko…!” 🙂

 

sasu boli, “are nahi nahi abhi to naye kapade lekar bana ke dena to mere ko bhi naya milega..!”

 

ek hath de , ek hath le..maine kayi aise bahuo ko dekha hai jo apani sasu ko dukh diya un ki bahuo ne un ko bahot dukh diyaa..jo dusaro ko sataate un ko bhi sataane wale koyi mil jaate…aur jo dusaro ka bhala karate to un ka bhala karane ke liye daso hatho se log bhala karate….

tum dusare ka mangal sochate jaao to tumhari andar ki shakti vikasit hogi..hum kisi ka bura soche, bura chahe to us ka bura ho chahe na aho lekin mera dil to bura hota hai naa…!mera antaryami dekhata ki ye kisi ka bura soch raha hai to budhdi humhari kunthit hoti…

 

‘hey prabhu aanand data..’ ye  roj prarthana kare to ghar me ninda dwesh, kalah , bimariya bhag jaaye aur ghar me aarogy prasannata aanand aawe..

…ek to bandar chanchal hai (man)  🙂 , phir us ko bichhu kate krodh irsha ka ..vo cum hai kya?….phir us ko daru pilaao( ninda )…to hud ho gayi…  phir us ko bhut lagaao jhagade ka !..aisa apane ko dukh ka bhut kay ko laganaa? to ghar me irsha, jhagada, dwesh , chugali ye sachmuch me bhut lagane jaisa hai…is bhajan se ghar me sukh shanti ho aisa phayada hota hai…. ye aap yaad karana , roj bolana aur bachcho ko bhi sikhana….

 

 

         abhi aanwala ka season hai ..aanwale le lena 2/3 kilo..aanwale dhokar cooker me daalo.us me 2 se 5 gram pani daalo baas..aadhi siti baje ki aanwala utaar de..thodi der shije baad me cooker kholo… aanwale ke tukade kar ke bij nikaal de..us me shakkar piskar mila de..aur sukhaa de ..to vo candy ban jayegi aanwale ki mithi..bajaar me 90 rupiye kilo milati hai, tumhare ko to 18 – 20 rupiye kilo padegi candy ! 🙂

 

         thode aanwale aise hi sukhaa do..aanwale kutoge to powder ban jayega…to is aanwale ke powder me 20% haldi daal do..phir 3-4 gram roj subah pani se phaank lo.. to dhatukshay ki bimari , khujali ki bimari, aankh jalane ki taklif, gussa aane ki taklif, baal jhadane ki taklif sab thik hota hai… aanwale ka ghol bana ke sir pe laga diya aur sharir pe ragad ke snan kiya to sharir ki garami sab khinch leta hai aanwala…

 

         1 kilo aanwale ka mava bana diya.to us me ek kilo shakkar ka chasani bana ke us me mix kar diya..phir mirchi, jara sa nimak, dhaniya , jira ka bagaar kar ke us mave ko senk liya.. roj subah 10-15 gram vo mava katori me daal ke thoda sa pani daal ke ghol bana ke piya to chay se 10 prakar ke rog hote aur is se to 10 prakar ke rog mitate..chehare pe lali aati hai..tabiyat thik raheti hai.. 

 

.. kavil /piliya jaundice ki bimari aur damme ki bimari ka alopathy me upaay nahi hai…phir bhi bharti kar lete..lut lut ke phir bolate kasayi jaise..

‘ab le jaao’…

daahud me apana ashram hai, us ka adhyaksh ki patni badrinath jana chahti thi..to bole jara ghutane me dard hai to chalo doctor ko dikha dete..doctor ne dekha, davayi di, goli diya ..jitana lutana tha lutaa..phir bola..mera friend hai us se x-ray karao aur us ke hospital me bharati ho jaao….to bharti huaa, phir dusare jagah bhejate aise karate karate 11, 00000 rupiya liya…aur patni ka lash de diya 2 mahine me..jara sa ghutane ka dard to ye check karo aisa karo waisa karo…aur upar se bai ka lash de diya..badrinath to us ka hospital me hi pura kar diya….angreji davayiyo ki aisi durdasha hai…

 

 

ice -cream me janavaro ka haddiyo ka powder padati hai aur is powder ke bina ice-cream nahi banati…..

aise pepsi cocakola me jaanavaro ke haddiyo ka tel padata hai..

aap nibu pani piyo..aanwale ka sharbat piyo..angur ka ras piyo..

 

holi kudarati rango se khelo..palash ke phulo ke rango se..gendo ke phulo ke rang se khelo..chemical ke bajaaru rango se holi khelana bahot hani karata hai..

 

Om shanti.

Hari om!Sadgurudev ji Bhagavan ki Jay ho!!!!!

Galatiyo ke liye prabhuji kshama kare…….

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