Sab se Thos:CHID-GHAN!

ओक्ट 8th 2008; भारतीय समय शाम के 5 बजे  ; मोरादाबाद सत्संग_लाइव
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सदगुरुदेव संतशिरोमणि परमपूज्य श्रीआसाराम बापूजी  की अमृत वाणी  :-
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सब से ठोस :चिद-घन

ॐ भद्रं कर्णेभी शृणुयाम  देवः
भद्रं पश्येमाक्षभिजत्रा 
स्थिरैरंगैस्तुष्टुवांसस्तनुभि :
व्यशेम देवहितं यद्याहू: ll 1 ll
ॐ स्वस्तिनः इन्द्रो वृध्दा:श्रवा: 
स्वस्ति नः पूषा  विश्ववेदाः
स्वस्तिनास्ताक्क्षों  अरिष्टनेमि: 
स्वस्ति नो ब्रुहस्पतिर्दा धातु   ll2ll

हरि ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म……हरि ॐ
हरि ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म……हरि ॐ

मंगलम भगवान विष्णु मंगलम् गरुड़ ध्वज  
मंगलम पुंडरिकाक्ष  सर्व मंगलाय तन्नो हरी…..

हरि ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म……हरि ॐ
सब मिलाकर बोलो..
हरि ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म……हरि ॐ 

भय नाशन दुरमति हरण
कलि में हरी को नाम l
निशि दिन नानक जो जपे
सफल होवई सब काम ll
हरि  ……हरि ॐ…………… ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म  हरि ॐ


जनम जनम भरमत फिरयो मिट्यो ना मन को ताप l
कहे नानक हरि  भज मना निर्भय पाव ही  वास ll

हरि  ……हरि ॐ…………… ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म  हरि ॐ

ना हम वसामि वैकुंठे योगिनां ह्रुदयेन्वयि  l
मद भक्ता  यत्र गायंत्री तत् प्रतिष्टामी नारदा..ll
हरि  ……हरि ॐ…………… ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म  हरि ॐ
हरि  ……हरि ॐ…………… ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म  हरि ॐ
हरि  ……हरि ॐ…………… ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म  हरि ॐ
हरि  ……हरि ॐ…………… ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म  हरि ॐ

सब से ज्यादा सुदृढ़ क्या है?
बुध्द को शिष्यों ने पूछा..
सब से ज्यादा ठोस क्या है …शीला ठोस है?लेकिन लोहा शीला को तोड़ सकता है तो लोहा मजबूत है?लोहा ठोस है?
बुध्द ने कहा… “हां”
तो बोले, लोहे से भी ज्यादा ठोस क्या है?
बुध्द बोले, “ इस से प्रभावशाली है अग्नि…..अग्नि लोहे के पिघला देता ….अग्नि से प्रभावशाली  जल है ….जो अग्नि को बुझा देता….जल प्राणियों का जीवन है.. अन्न औषधि जल से ही पुष्ट होती… जल से प्रभावशाली है वायु …..जल से भरे  मेघों को जहा चाहे उड़ा के ले जाता..वायु के बिना प्राणियों का जीवन नही चलता….मेघों को भी वायु ले जाता ..”
“इस से भी ज्यादा ठोस चीज है क्या? ….”
बुध्द ने कहा , “हां..इस से ज्यादा ठोस है संकल्प बल…!
दृढ निश्चय…. संकल्प बल सब से ठोस है….”

एक भाई विकलांग था…संकल्प बल मिला…विद्वान् हुआ…. महा-निदेशक बना…. फौज का निदेशक बना ..
ग्रंथो में भी संकल्प बल की बहोत महिमा गाई है…

लेकिन इस से भी ठोस है , जहाँ  से संकल्प उठता है वो….. संकल्प बल से से भी ज्यादा ठोस है वो “चिद-घन”!…..भगवान को “घन” कहा है …पथ्थर को तोड़नेवाला लोहा…लोहे को तपानेवाला अग्नि ..अग्नि में शीतलता देनेवाला जल ..और जल के मेघों को वायु उड़ा के ले जाएगा.. और वायु की गति को भी घुमा देगा ऐसा है मनुष्य का संकल्प बल…तो संकल्प बल सब से शक्तिशाली है…..
मैं इस बात को आगे ले चलता…..सब से ज्यादा ठोस है वो “चिद-घन विभु” ….संकल्प जहाँ  से उठता है ..

वो आत्मा परमात्मा है “घन… चैत्यन्य..!”

संकल्प बल से महा निदेशक की कुर्सी मिली…कुर्सी चली गई… फिर भी जो नही गया….कुर्सी पे बैठनेवाला शरीर मर गया , फिर भी जो मरा नही वो है आत्मा ..!
महा शक्तिशाली!….
महा शाश्वत तत्व है !!
और उस आत्मा में प्रीति हो जाए, विश्रांति हो जाए…उस को “मैं” के रूप में स्वीकार कर लिया जाए …..
..अभी तो शरीर को “मैं”मानते…. वो तो छुट जाएगा …..शरीर मर जाएगा तो मरने के बाद भी नही मिटता वो कितना ठोस है!!

…. हजारो जनम से शरीर मिले..मिल मिल के मिट गए…. लेकिन आप का आत्मा कभी नही मिटा….
.. ‘ “मैं” हूँ  की नही?’ ऐसा सवाल कभी नही उठता…. भगवान है की नही ये सवाल उठ सकता है … 🙂
“मैं” हूँ की नही ये सवाल नही उठेगा ..सब से ज्यादा जीवात्मा का वास्तविक “मैं” ठोस है…. जहाँ  से संकल्प उठता है… संकल्प तो हो हो के मिट जाते….संकल्पों को सफलता विफलता मिल कर चली जाती…. फिर भी नही जाता इसी को उपनिषद बोलते “पूर्ण मिदं !”…

..वो अपने आप में पूर्ण है…. परमात्मा की तरह जीवात्मा.भी पूर्ण है ..पूर्ण से ही उत्पत्ति होती….एक बिज में कितने बिज छिपे है? ….वैज्ञानिक ऐसे गणित नही लगा सकते……

एक “मैं” में कितने “मैं” के कर्ता छुपे है !!…. “मैं”का ‘मेरा बेटा’… बेटे का बेटा…..बेटे का बेटा….बेटे का बेटा….बेटे का बेटा….. चलता जाएगा…… एक “मैं” से कितने “मैं” होंगे….एक “मैं” में कितने बिज छुपे है और कितने कुछ हो गए सब बोल दिए तो कहा जाके इस का छेड़ा मिलेगा …कोई अंत नही……..!

कितना ठोस है अपना आपा…!
“मैं” कितना “घनीभूत” है…कितना अनंत और व्यापक है….!

… रेती का एक दाना ले लो… उस को नष्ट नही कर सकते हो.. हजार बन्दे मिलकर भी नही कर सकते….नजरो से ओझल कर सकते..उस की पाउडर कर सकते है….लेकिन उस का अस्तित्व नष्ट नही कर सकते .. !

..कितने संकल्प सफल विफल हो गए…. आ आ के मिट गए…. सफलता विफलता आई गई..लेकिन उस को जाननेवाला
है भी सत ..हो से भी सत….जुगात सत !!
वो “सत” कितना सत है …!!

उस पूर्ण स्वरुप प्रभु के आश्रय में विकसित होने के लिए 3 चीजे जरुरी है…
एक : प्रभु के विषय का ज्ञान ,
दूसरा : प्रभु में प्रीति और
तीसरा : प्रभु में विश्रांति हो जाए तो अद्भुत सामर्थ्य शान्ति मिलती है….
उस प्रभु का आश्रय लेने में सफल हो जाओगे……

अपने शरीर में 72 करोड़ 72 लाख 10 हजार 201 नाडियाँ होती है… उस में 22 नाडियाँ मुख्य है…10 नाडी मस्तक के दाई तरफ़ और 10 नाडियाँ मस्तक के बायीं तरफ़ होती है….मस्तक के बिच में होती है 21 वी   नाडी….ब्रम्ह नाडी …….साधना में ब्रम्हचर्य पालन करने से ब्रम्हानंद की प्राप्ति इस नाडी से होती .. 22 वी नाडी “स्मृति नाडी” है..तालू में होती है….

इसलिए किसी बात को याद करो तो जीभ तालू में लगा के याद करो…

अभी मैं करवा दूंगा..
आप बोलो.
जहाजो को डुबाते उसे तूफान कहेते है…
तुफानो से टक्कर ले उसे इंसान कहेते है ….

जीभ तालू में लगाओ .
मैं बोलता हूँ तुम मन में दोहराओ.. (सभी को याद हो गया!)
🙂 ऐ  हैई !!

तो अपने बच्चो को नकारात्मक विचारों से परिस्थिति के आगे घुटने टेकने वाली मानसिकता से बचाओ ..

नेगेटिव सोचा तो समझो बुढापा आ गया !…वो 40 साल का है , नकाराया है तो बुढ्ढा  हो गया……

जो सकारात्मक सोचता है, जिस के पास उत्साह, धैर्य है वो 90 साल का हो कर भी जवानों को भी मात कर देता है….

बीमार हम नही होते, बीमार शरीर होता है ..
दुखी हम नही होते, दुखाकार वृत्ति होती…मन में दुखाकार भावः होता है …वृत्ति आई- गई… उस को जानते है वो “मैं” दुखी नही होता….
“मैं दुखी हूँ” बोलकर दुःख को गहेरा नही करो
….दुःख आता है सावधानी बढ़ाने के लिए…. बिमारी आती है स्वस्थ के प्रति सजाग करने के लिए……
शरीर ने खाया… पाचन क्षमता से अधिक खाया तो बिमारी आती ….उपवास कर दे…निम्बू सुंठ  मिला के पी ले ….

दुःख आया तो आसक्ति मिटाने के लिए….
बिमारी आई लापरवाही मिटाने के लिए….
सुख आया उदार होने के लिए….
सुख दुःख को सीढ़ी पे पैर देकर ऊपर पहुँच जाते ..इसीलिए सुख दुःख का ताना बुना है जीवन का… की सुख दुःख को सीढ़ी बनाकर उस पे पैर देकर चढते चढते जीवन दाता तक पहुँच सकते हो……!!

धन मिला तो “मैं बड़ा धनवान” …धन का बडप्पन हुआ.. तू दब गया….सत्तावन हुआ तो सत्ता का बड़प्पन हुआ….सतत वाहवाही का गुलाम हो गया…… धन, सत्ता और वाहवाही का गुलाम बना ये शरीर भी मिटनेवाला है….लेकिन फिर भी रहेता है वो आत्मा बड़ा महान है.. पवित्र है….
दुनिया के सभी लोग तुम को बुरा कहे दे…. सारी दुनिया  तुम को ख़राब साबित कर दे…तो भी आप के आत्म देव के आगे आप ख़राब नही , तुम इतने ठोस हो ! इतने पूर्ण हो !
क्यों की बुराई तन में है…. गिरावट मन  में है….. आत्मा में बुराई नही होती….. वास्तव में तुम सत्चिदानन्द के सनातन सपूत हो….. कितने ठोस!
…..संकल्प आता- जाता ….मौत भी आती , चली जाती….. बुध्द कहेते संकल्प बल सब से ठोस है…लेकिन यहाँ तक ही नही ….. मेरा विचार है की अपना आपा कितना ठोस है!!

 

आप की आयु कितनी है ये श्वासों श्वास पर निर्भर होती है….. अगर आप के जिंदगी के 19 श्वास बाकी है तो 20 नही ले सकते ….इसलिए दीर्घ प्राणायाम करते तो 13 श्वास की जगह 12 श्वास लेते, एक पसार करते …. जप ध्यान प्राणायाम साधना के रास्ते गया तो श्वास कम खर्च करते है..हर प्राणी के श्वासोश्वास निश्चित गति से चलते…..
जैसे कुत्ता 50 श्वास लेता 1 मिनट में..
घोड़ा 35 श्वास लेता 1 मिनट में तो 30 वर्ष तक जीता…
हाथी 20 श्वास लेता 1 मिनट में तो हाथी की आयु 100 वर्ष तक होती..
कछवा 5 श्वास लेता ..उस की उमर 400 साल तक भी होती कुछ कछावो की..
साँप 2 /3 श्वास लेता 1 मिनट में …..50  हजार वर्ष तक भी कोई कोई योनी के साँप जीवित होते….

..जो श्वास कम खर्च करते  उन को प्राणायाम कर के, उन की उमर भी लम्बी होती….. दुखों के समय वो डगमगाते नही….दुखों के सर पे पैर रखने वाले हो जायेंगे….
इसलिए दीक्षा के समय गर्दन पीछे कर के 25 श्वास कराता हूँ तो ब्रेन के पासवाली नाडियों से विशेष मदद मिलती है….
बुध्दी का कार्यालय साफ-सुथरा हो जाता है…. कुशल कार्य क्षमता बुध्दी पे आधारित है …
जीतनी बुध्दी कुशलता , कार्यक्षमता अधिक ..उतना आदमी ऊपर उठेगा……

शरीर का सौन्दर्य तो छूटने वाला है…शरीर जिस जीवन से सुंदर दिखता है वो जीवन दाता कितना ठोस है !…. चिद घन है….सत्चिदानन्द है …..वो इतना घन है की उस की घनता के आगे ब्रम्हांड का घनत्व भी कोई माना नही रखता …..ब्रम्हांड भी पैदा हो हो के नष्ट हो जाते …फिर भी जो रहेता ऐसे सत्चिदानन्द नष्ट नही होता ….ऐसा तुम्हारा आत्मा है ..!!

 

ब्राम्ही स्थिति परत कर कार्य रहे न शेष l
मोह कभी न ठग सके , इच्छा नही लवलेश ll
प्रून गुरु कृपा मिली, पूर्ण गुरु का ज्ञान l
आसुमल से हो गए साईं आसाराम ll
हर ओ म हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ
जागृत स्वप्न शुशुप्ती चेते, ब्रम्हानंद का आनंद लेते l
खाते पिटे मौन या कहेते , ब्रम्हानंद मस्ती में रहेते ll
रहो गृहस्थ गुरु का आदेश,गृहस्थ साधू करो उपदेश l
किए गुरु ने वारे न्यारे , गुजरात दिसा गाँव पधारे ll
मृत गाय दीना जीवन दाना, तब से लोगो ने पहेचाना l
द्वार पे कहेते नारायण हरी, लेने जाते कभी मधुकरी l
तब से वे सत्संग सुनाते , सभी आरती शान्ति पाते ll
जो आया उध्दार कर दिया, भक्त का बेडा पार कर दिया l
कितने मरणासन्न जिलाए , व्यसन मांस और मद्य छुडाये ll
हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ ..

कल विजया दशमी है….दशहरा है…. दस इन्द्रियों में रमण करता, अपने को बड़ा मानता , अपने को सुखी कराने के लिए दुसरे की पत्नी, दुसरे का हक, दुसरे का धन छिनता वो रावण पराजित होता ..
…..विजया दशमी राम जी का विजय है और रावण की परास्त है….हर विजया दशमी  को रावण को दियासलाई देके जला देते…. ताकि समाज को ये पता चले इसलिए….जो शरीर को सुखी कराने को कुछ भी करते…(उन का अंत क्या है ये समाज को पता चले)

सच्चे विजय का मार्ग क्या है ये समझ लो…. किसी को कपट से पराजित कर के उस का धन , पत्नी, संपत्ति  हड़प के बड़ा बनना ये विजय का लक्षण नही है…ये महा पराधीनता है…

विजय दशमी का मतलब जहा पुरुषार्थ है, ठोस से ठोस आत्मा परमात्मा का आश्रय है..और उद्यम , साहस, धैर्य, बुध्दी, शक्ति और पराक्रम ये 6 सदगुण है ..उस के जीवन में कदम कदम पर विजया दशमी का दर्शन हो जाता है….

उद्यमं , साहसं, धैर्यम ,बुध्दी शक्ति , पराक्रम ..ये 6 सदगुण जिस के जीवन में होते…..तत्र देव सहायकृत …!

“विजय विजय” बोलते….लेकिन विजय का सही अर्थ समझ ले….जहां भगवान का वास्तविक स्वरुप, भगवत आश्रय , अपना पुरुषार्थ और 6 सदगुण लेकर चले तो भगवान तुम्हारे विजय में सहायकृत होते है…. …..लेकिन जहा छल , कपट , दुराचार , आसक्ती लेके चलते और कुछ भी करते वहा  पाप, संघर्ष , विनाश , दूर-गति और पराजय होती है…..

जहां सब की वास्तविक भलाई है ….जिस में दुसरे का भला हो और परिणाम भी भला हो वो वास्तविक भलाई है ,ऐसा काम करे ये विजय दशमी का संदेश है…..
जहां दिखावटी भला और परिणाम बुरा हो तो वो पराजय है… दिखावटी भला भी खोकला होता है…..रावण इतना बड़ा राक्षस है , फिर भी सीता जी को कपट से लाने गया तो सीता जी को भिक्षा देने के लिए लक्ष्मण  रेखा पार करने को बोला..तो ज़रा सा पत्ता हिलता तो भी वो डर जाता… वो ही पराजय है!कपट में भय है…पराजय है…

धनुषधारी राम और लक्ष्मण 14 साल वन में रहे लेकिन कभी डरते नही… क्योकि दुसरे का कभी बुरा नही करते, दुसरे का बुरा नही सोचते.. ..ऐसे गुरु का ज्ञान है इसलिए उन का विजय है…
और रावण अपने ही इलाके में भी भयभीत होता रहा ये उस की पराजय है…दुसरे का अधिकार, दुसरे की पत्नी छिनकर सुखी होऊ ये पराजय है…..
देह को मैं मानना ये पराजय है….
संसार स्वप्ना  और परमात्मा अपना… अपनी भक्ति से उस को पाना और अपने कर्मो से दुसरे का भला हो ये वास्तविक विजया दशमी है ..कर्तव्य परायण रहे..
कर्त्यव्य में तत्परता रहे….शास्त्र अनुकूल व्यवहार करे….तो पुरुषार्थ फलता है..विजय तुम्हारे पीछे पीछे घूमेगी….!:-)

….. चंदन की एक चुटकी भी शीश पे लगा लो तो शरीर शीतल और सुगन्धित कर देती है …. ऐसे ये चुटकी भर सदगुण से तुम्हारा जीवन चमचम चमकेगा….. सब शुभ मंगलमय होता ….भगवत आश्रय, भगवत प्रेम और भगवान में विश्रांति में ही विजयादशमी छुपी है…… आसक्ति में पराजय है….

ध्यान देकर सूना है तो रोज विजयादशमी होगी!

दिवाली में ४ चीजे करते…(आप अध्यात्मिक दिवाली मनाओ)
१)घर का कचरा बाहर निकाल कर साफसुथरा करते ऐसे फालतू वासना का कचरा बाहर निकालो … अध्यात्मिक दिवाली मनाओ….
२)घर में नई चीजे लाते … “दुसरे का हीत , दुसरे का मंगल कैसे हो” ये आप के जीवन में नई चीज लाओ… दुसरे सुख, प्रसन्नता और सन्मानित कैसे रहे ऐसा हीत का चिंतन करो तो आप लोक लाडले हो जायेंगे..
३)दिए जलाते… अपने को परिस्थितियों में पीसो मत….ज्ञान का दिया जलाओ …..दुःख आया तो गलती हुयी है, गलती कैसे मिटे …धन के संग्रह में लगे तो गलती हुयी तो इनकम  टैक्स का दुःख हुआ….संसार दुखालय है….आसक्ति से पंगा छुडाओ ….सुख आया तो बाटों ..सुख उदार होने के लिए आता ..ऐसा ज्ञान का दिया जलाओ  ..
४) मिठाई खाते और खिलाते…. प्रभु का आनंद अपने जीवन में भरो…ख़ुद भी प्रसन्न रहो….दूसरो को भी मधुरता दो..मधुराधिपतये मधुरं मधुरं… अर्थात मधुमय व्यवहार  करो ..
(किसी गरीब बस्ती में जाकर मिठाई खिलाना और गरीब के घर में भी दिया जला के आना)

.. मैं दिवाली में आदिवासी एरिया में जाऊँगा…जहा गरीब गुरबे है… कपडे, बर्तन, मिठाई बाटूंगा ….हम दिवाली नए कपडे पहेन के नही मनाते… मेरी तो रोज दिवाली है.. 🙂

(आरती हुयी….
प्रार्थना हुयी..)

ॐ शान्ति.

हरि ॐ!सदगुरुदेव जी भगवान की जय हो!!!!!
गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे…..

  

 

 

 

 

Oct 8th  2008; IST : 5 pm ; Moradabad satsang_live 

 

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Sadgurudev SantShiromani ParamPujya ShriAsaramBapuji ki Amrutwani :-

 

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Om Bhadram Karnebhi Shranuyam devah |

 Bhadram pashyemakshabhijatra ||

sthireerangestushutuvanstnubhi: |

vyshem devhitam yadayhu: ||1||

Om swasti nah Indro vradhashravah |

 Swasti nah pukha vishwavedah ||

swatinastakshryo arishnemih |

 swasti no brahspatidradhatu  ll2ll

 

hari ooooooooommmmmmmm….Hari Om……….

hari oooooooooommmmmmmm……Hari Om

hari oooooooooommmmmmmm……Hari Om

 

mangalam bhagavan vishnu mangaalm garuddwaj

mangalam pudarikash sarv mangalaay tanno hari…..

 

hari oooooooooommmmmmmm……Hari Om

sab milakr bolo..

hari oooooooooommmmmmmm……Hari Om

 

bhay naashan durmati haran

kali me hari ko naam l

nishi din nanak jo jape

saphal hovayi sab kaam  ll

hari om ……hari om……………

 

 

janam janam bharamat phiryo mityo naa man ko taap l

kahe naanak har  bhaj manaa nirbhay paav jhi  vaas ll

 

hari ommmmmmmmmmmmm hari om..

 

naa ham vasaami vaikunthe yoginaam hrudanvayi l

mad bhaktay yatr gaayantri tat pratishtami naaradaa..ll

 

 

hari ommmmmmmmmmmmmmm hari om ..

hari ooooooooooooooommmmmmm hari om

hari oooooooooommmmmmmm……Hari Om

hari oooooooooommmmmmmm……Hari Om

 

sab se  jyada sudrudh kya hai?

budhd ko shishyo ne puchha..

sab se jyada thos kya hai …sheela thos hai?lekin loha sheela ko tod sakataa hai to loha  majbut hai?loha thos hai?

Budhd ne kaha… “haa”

To bole, lohe se bhi jyada thos  kya hai?

Budhd bole, “ is se prabhaavshali hai agni…..agni  lohe ke pighalaa deta ….agni se prabhaavshaal jal hai ….jo agni ko bujhaa detaa….jal praniyo ka jeevan hai.. ann aushadhi jal se hi pusht hoti… jal se prabhaavshali hai vayu …..jal se bhar megho ko jahaa chaahe udaa ke le jaataa..vayu ke bina praniyo ka jeevan nahi chalataa….megho ko bhi vayu le jaata ..”

“is se bhi jyada thos chij hai kya? ….”

budhd ne kaha , “haa..is se jyadaa thos hai sankalp bal…!

drushd nischay…. sankalp bal sab se thos hai….”

 

ek bhai vikalang tha…sankalp bal mila…vidwaan huaa…. mahaa-nideshak banaa…. phauj ka nideshak banaa ..

grantho me bhi  sankalp bal ki bahot mahimaa gaayi hai…

 

lekin is se bhi thos hai jaha se sankalp uthata hai vo….. sankalp bal se  se bhi jyada hai vo “chid-ghan”!…..bhagavan ko “ghan” kaha hai …paththar ko tadanewala loha…lohe ko tapaanewala agni ..agni me shitalataa denewala jal ..aur jal ke megho ko vayu uda ke le jayega.. aur vayu ki gati ko bhi ghuma dega aisa hai manushy ka sankalp bal…to sankalp bal sab se shaktishali hai…..

 mai is baat ko aage le chalata…..sab se jyadaa thos hai vo “chid-ghan vibhu” ….sankalp jaha se uthata hai ..

 

 

vo aatma parmatma hai “ghan… chaityany..!”

 

sankalp bal se maha nideshak ki kursi mili…kursi chali gayi… phir bhi  jo nahi gayaa….kursi pe baithanewala sharir mar gayaa , phir bhi jo mara nahi  wo hai aatma ..!

maha shaktishali!….

maha shashwat tatv hai !!

aur us aatma me priti ho jaaye, vishraanti ho jaaye…us ko “mai” ke rup me sweekar kar liya jaaye …..

..abhi to sharir ko “mai”maanate…. wo to chhut jayega …..sharir mar jayega to marane ke baad bhi nahi mitataa wo kitanaa thos hai!!

 

…. hajaaro janam se sharir mile..mil mil ke  mit gaye…. lekin aap ka aatma kabhi mita….

 .. “mai” hu ki  nahi aisa sawaal kabhi nahi uthataa…. bhagavan hai ki nahi ye sawaal uth sakataa hai … J

“mai” hun ki nahi ye sawaal nahi uthegaa ..sab se jyada jivaatmaa ka vastvik “mai”  thos hai…. jaha se sankalp  uthataa hai… sankalp to ho ho ke mit jaate….sankalpo ko saphalataa viphalataa  mil kar chali jati…. phir bhi nahi jata isi ko upnishad bolate “purn midam !”…

 

..vo apane aap me purn hai…. paramaatma ki tarah  jivaatmaa.bhi purn hai ..purn se hi utpatti hoti….ek bij me kitane bij chhipe hai? ….vaigyanik aise ganit nahi lagaa sakate……

 

ek “mai” me kitane “mai” ke kartaa  chhupe  hai !!…. “mai”ka mera  beta… bete ka beta…..bete ka betaa….bete ka betaa….bete ka betaa….. chalataa jayega…… ek “mai” se kitane “mai” honge….ek “mai” me  kitane bij chhupe hai aur kitane kuchh ho gaye sab bol diye to  kahaa jaake is ka chheda milega …koyi ant nahi……..!

 

kitana thos hai apana aapaa…!

“mai” kitanaa “ghanibhut” hai…kitanaa  anant aur vyaapak hai….!

 

… reti ka ek  dana le lo… us ko nasht nahi kar sakate ho.. hajaar bande milkar bhi nahi kar sakate….najaro se  ojhal kar sakate..us ki  powder kar sakate hai….lekin us ka  asthitv nasht nahi kar sakate ..

 

..kitane sankalp saphal viphal ho gaye…. aa aa ke mit gaye…. saphalataa viphalataa aayi gayi..lekin us ko jaananewala  

hai bhi sat ..ho se bhi sat….jugat sat !!

vo  “sat” kitanaa sat hai …!!

 

 

purn swarup prabhu ke ashray me vikasit hone ke liye 3 chije jaruri hai…ek : prabhu ke vishay ka gyan , dusara : prabhu me priti aur  tisara :  prabhu me vishranti ho jaaye to adbhut saamarthy shanti milati hai….

us prabhu ka  aashray  lene me saphal ho jaaoge……

 

apane sharir me  72 karod 72 lakh 10hajaar 201 nadiya hoti hai… us me 22 nadiya mukhya hai…10 nadi mastak ke daayi taraf aur 10 nadiyaa mastak ke baayi  taraf hoti hai….mastak ke bich me hoti hai 21 naadi….bramhnadi …….saadhanaa me bramhchary paalan karane se bramhaanand ki prati hoti .. 22 vi naadi  “smruti naadi” hai..taloo me hoti hai….

 

isliye kisi baat ko yaad karo to jibh taaloo me laga ke yaad karo…

 

abhi mai karavaa dunga..

 

 

aap bolo.

 

jahaajo ko dubaate use tuphaan kahete hai…

tuphano se takkar le use insaan kaheteh ai….

 

jibh taloo me lagaooo.

mai bolata hun tum man me doharaao.. (sabhi ko yaad ho gayaa!)

J  aii haiii

 

to apane bachcho ko  nakaaraatmak vichaaro se paristhiti  ke aage ghutane tekane wali mansikataa se bachaao ..

 

negative socha to samajho budhaapaa aa gaya !…wo  40 saal ka hai , nakaaraayaa hai to budhdha ho gaya……

 

jo sakaaraatmak sochataa hai, jis ke paas utsaah, dhairy hai vo 90 saal ka ho kar  jawano ko bhi maat kar deta hai….

 

 

bimar ham nahi hote, bimaar sharir hota hai ..

dukhi ham nahi hote, dukhaakaar vrutti hoti…man me dukhaakaar  bhav hota hai …vrutti aayi- gayi… us ko janate hai vo “mai” dukhi nahi hota….

“mai  dukhi hun” bolakar dukh ko gaheraa nahi karo ….dukh aata hai sawadhaani badhaane ke liye…. bimaari aati hai swasth ke prati sajaag karane ke liye……

sharir ne khaya… paachan kshamataa se adhik khaya to bimaari aati ….upwas kar de…nimbu sunth mila ke  pi le ….

 

 dukh aaya to aasakti  mitaane ke liye….

bimaari aayi laaparvaahi mitane ke liye….

sukh aayaa  udaar hone ke liye….

sukh dukh ko sidhi pe pair dekar upar pahunch jaate ..isiliye sukh dukh ka taana buna hai jeevan ka… ki sukh dukh ko sidhi banaakar us pe pair dekar chadhate chadhate jeevan data tak pahunch sakate ho……!!

 

dhan mila to “mai bada dhanwaan” …dhan ka badppan huaa.. tu dab gaya….sattaawan huaa to satta  ka badappan huaa….satat waahwaahi ka gulam ho gayaa…… dhan, satta aur wahwahi ka gulam bana ye sharir bhi mitanewala hai….lekin phir bhi raheta hai wo aatma  bada mahaan hai.. pavitr hai….

 duniya ke sabhi log tum ko buraa kahe de…. sari dunayaa tum ko  kharaab saabit kar de…to bhi aap ke aatm dev ke aage aap kharaab nahi , tum itane thos ho ! itane purn ho !

kyo ki buraayi tan me hai…. giraavat mann me hai….. aatma me buraayi  nahi hoti….. vaastav me tum satchidaanand ke sanaatan saput ho….. kitane thos!

…..sankalp aataa- jata ….maut bhi aati , chali jaati….. Budhd kahete sankalp bal sab se  thos hai…lekin yaha tak hi nahi ….. mera vichar hai ki apanaa apaa kitanaa thos hai!!

 

 

 

Aap ki aayu kitani hai ye shwaso  shwas par nirbhar hoti hai….. agar aap ke jindagi ke 19 shwas baaki  hai to 20 nahi le sakate ….isliye dirgh pranayam karate to 13 shwas ki jagah  12 shwas lete, ek pasaar karate …. jap dhyan paranayaam sadhanaa ke  raste gayaa to shwaas kam kharch karate hai..har prani ke shwasoshwas nischit gati se chalate…..

jaise kutta 50 shwas leta 1 minute me..

ghoda 35 shwaas leta  1 minute me to 30 varsh tak jitaa…

hathi 20 shwaas leta  1 min me to hathi ki aayu100 varsh tak hoti..

kachhawaa 5 shwaas leta ..us ki umar  400 saal tak bhi  hoti kuchh kachhavo ki..

saap 2 /3 shwas leta 1 minute me …..50 hajaar varsh tak bhi koyi koyi yoni ke saap jivit hote….

 

..jo  shwaas kam kharch kararte un ko pranayaam kar ke, un ki  umar bhi lambi hoti….. dukho ke samay vo dagmagaate nahi….dukho ke  sir pe pair rakhane wale ho jayenge….

Isliye diksha ke samay  gardan pichhe kar ke 25 shwas  karaataa hun to brain ke paaswali nadiyo se vishesh madad milati hai….

budhdi ka karyaalay saaph-sutharaa ho jata hai…. kushal kary kshamataa  budhdi pe aadharit hai …

jitani budhdi kushalata , karykshamataa adhik ..utana  aadami upar uthegaa……

 

sharir  ka saundary to chhutane wala hai…sharir jis jeevan se sundar dikhataa hai vo  jeevan data kitanaa thos hai !…. chid ghan hai….satchidaanand hai …..vo itanaa  ghan hai ki  us ki  ghanataa ke aage bramhand ka ghanatv bhi koyi maanaa nahi rakhataa …..bramhaand  bhi  paidaa ho ho ke nasht ho jaate …phir bhi jo rahetaa  aise satchidaanand nasht nahi hotaa ….aisa tumhaaraa aatmaa  hai ..!!

 

 

 

bramhi sthiti prat kar kary rahe na shesh l

moh kabhi na thag sake , ichchaa  nahi lavlesh ll

prun guru krupaa mili, purn guru ka gyan l

aasumal se ho gaye saai asaaaram ll

har o m hari om hari om hari om hari om

jagrut swapn shushupti chete, bramhanand ka aanand lete l

khaate pite maun ya kahete , bramhaanand mast me rahete ll

raho gruhasth guru ka aadesh,grahasth sadhu  karo updesa l

kiye guru ne vaare nyaare , gujraat Disaa gaanv padhaare l

mrut gaay deena jeevan dana, tab se  logo ne pahechaanaa ll

dwar pe kahete narayan hari, lene jaate kabhi  madhurkari l

tab se ve satsang sunaate , sabhi aarati shanti paate l

jo aaya udhdaar kar diya, bhakt ka beda paar kar diya l

kitane maranaasann jilaaye , vyasan maans aur mady chhudaaye ll

hari om hari om hari om hari om hari om hari om hari om hari om ..

 

 

kal vijayaa dashami hai….dashharaa hai…. das indriyo me raman karataa,  apane ko badaa maanate, sukhi karane ke liye dusare ki patni, dusare ka haq, dusare ka dhan chhinata wo ravan paraajit hota ..

…..vijayaa dashami ram ji ka vijay hai aur ravan ki paraasth hai….har vijayaa dasahmi ko ravan ko diyaasalaayi  deke jalaa dete…. taaki samaaj ko ye pata chale isliye….jo sharir ko sukhi karane ko kuchh bhi karate…(un ka ant kya hai ye samaaj ko pataa chale)

 

 sachche vijay ka marg kya hai ye samajh lo…. kisi ko kapat se paraajit kar ke us ka dhan ,  patni,  samaptti hadap ke badaa bananaa ye vijay ka lakshan nahi hai…ye maha paraadhinataa hai…

 

vijaya dashami ka matalab jaha purusharth hai, thos se thos aatma  paramaatma ka  aashray hai..aur  udyam , saahas, dhairy,  budhdi, shakti aur parakram ye  6 sadgun hai ..us ke jeevan me kadam kadam par vijayaa dashami ka darshan ho jata hai….

 

udyamam , saahasam, dhairyam ,budhdi shakti , paraakram ..ye 6 sadgun jis ke jeevan me hote…..tatr dev sahaaykrut …!

 

“vijay vijay” bolate….lekin vijay ka sahi arth samajh le….jaha bhagavan ka vaastavik swarup,  bhagavat ashray , apanaa  purusharth aur 6 sadgun lekar chale to bhagavan tumhare vijay me sahaaykrut hote hai…. …..lekin jaha chhal ,  kapat , durachaar , aaasakti leke chalate aur kuchh bhi karate  waha paap,  sangharsh , vinaash , dur-gati aur paraajay hoti  hai…..

 

jaha sab ki vaastavik bhalaayi  hai ….jis me dusare ka bhala ho aur parinaam bhi bhalaa ho wo  vastavik bhalaayi hai ,aisa kaam kare  ye vijaya dashami ka sandesh hai…..

jahaa dikhaavati bhala aur parinam bura ho to vo paraajay  hai… dikhaavati bhalaa bhi khokalaa hota hai…..raavan  itanaa badaa rakshas hai , phir bhi  sita ji ko kapat se laane gaya to sita ji ko bhiksha dene ke liye lakshaman rekha paar karane ko bola..to jaraa sa pattaa hilata to bhi wo dar jaataa… wo hi paraajay hai!kapat me bhay hai…paraajay hai…

 

dhanushdhaari ram aur lakshman 14 saal van me rahe lekin kabhi darate nahi… kyoki  dusare ka kabhi bura nahi  karate, dusare ka bura nahi sochate.. ..aise guru ka gyan hai isliye un ka vijay hai…

aur raavan apane hi ilaake me bhi bhaybhit hotaa rahaa ye us ki paraajay hai…dusare ka adhikar, dusare ki patni chhinkar  sukhi hou ye  paraajay hai…..

 deh ko mai manana ye paraajay hai….

sansar swapana aur parmatma apanaa… apaani bhakti se us ko paanaa aur apane karmo se dusare ka  bhala ho ye vastavik vijayaa dashami  hai ..kartavy paraayan rahe..

kartyavy me tatparata rahe….shastr anukul vyavhaar kare….to purusharth phalataa hai..vijay tumhare pichhe pichhe ghumegi….!:-)

 

 ….. chandan ki ek chutaki bhi shish pe laga lo to sharir sheetal aur sugandhit kar deti hai …. aise ye chutaki bhar sadgun se tumhara jeevan chamcham chamkega….. sab shubh mangal may hota ….bhagavat ashray, bhavgat prem aur bhagavan me vishranti me hi  vijayaadashami chhupi hai…… aasakti me paraajay hai….

 

dhyan dekar sunaa hai to  roj vijayaadashami hogi!

 

diwali me 4 chije karate…(aap  adhyatmik deewali manaao)

1)ghar ka kacharaa baahar nikaal kar saphsutharaa karate aise  phaalatu waasanaa ka kacharaa baahar nikalaao … adhyaatmik diwali manaao….

2)ghar me  nayi chije laate … “dusare ka heet , dusare ka mangal  kaise ho” ye aap ke jeevan me nayi chij laao… dusare sukh, prasanna-taa aur  sanmaanit kaise rahe aisa heet ka chintan karo to aap lok laadale ho jayenge..

 

3)diye jalaate… apane ko paristhitiyo me piso mat….gyan ka diya jalaao …..dukh aaya to galati huyi hai, galati  kaise mite …dhan ke  sangrah me lage to  galati huyi to  income tax ka dukh huaa….sansaar dukhaalay hai….aasakti se panga chhudaao ….sukh aaya to baato..sukh udaar hone ke liye aisa gyan ka diya jalaoo ..

 

4) mithayi khate aur khilate…. prabhu ka aanand apane jeevan me bharo…khud bhi prasann raho….dusaro ko bhi madhurataa do..madhuraadhipataye madhuram madhuram… arthat madhumay  vayahaar karo ..

(kisi garib basti me jaakar mithayi khilaana aur garib ke ghar me bhi diyaa jalaa ke aana)

 

.. mai diwaali me adiwasi area me jaaunga…jaha garib gurabe hai… kapade, bartan, mithaayi baatunga ….ham diwaali naye kapade  pahen ke  nahi manaate…  meri to roj diwali hai.. J

 

(aarati huyi….

 prarthana huyi..)

 

Om Shanti.

 

Hari Om!Sadgurudev ji Bhagavan ki Jay ho!!!!!

Galatiyo ke liye prabhuji kshamaa kare…..

 

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One Comment on “Sab se Thos:CHID-GHAN!”

  1. N.Bhattacharyya Says:

    Hari om ji.

    Ap logon ka jitni prasansa ki jaye,woh kam hai.God bless u guys!


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