Ek Omkar ! (sadhak special)

 

 
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सदगुरूदेव संतशिरोमणि परमपूज्य श्री आसारामजी बापू की अमृतवाणी  :-
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 ओक्ट. 3rd   2008; भारतीय समय  शाम के 7.30 , एकांत सत्संग 

(for Hinglish please scroll down )

एक ओमकार !


 (पूज्य बापूजी ने जो लोग बार बार बीमार पड़ते उन के लिए टिप्स दिए है :- )
 
*** जरुरत से ज्यादा खाना खाया तो मोटापा बढ़ता….फिर घुटने का दर्द , इधर का दर्द, उधर का दर्द शुरू हो जाता…..
 
*** जो मोटे नही तो शक्कर ज्यादा खाते….. ऐसे नही करे…..मोटे नही भी हो तो भी शक्कर ज्यादा नही डाले….(पतले होते तो भी ब्लड में शुगर ज्यादा हो सकती है)
 
*** रोटी बनाते तो काले दाग वाली रोटी कब्जियात करती …पाचन ख़राब करती….काले दाग वाली रोटी नही बने, इसलिए  रोटी को अग्नि कम दो और रोटी को घुमाओ…
 
*****सफाई से रहे…अपने कपडे, कमरा , आसपास का परिसर साफसुथरा रखे.
 
 
नारायण हरी नारायण हरी
 
..कमरे से बाहर जाते तो लाईट पंखा  बंद करे….1 रुपये  का भी फालतू खर्च नही हो इस का ध्यान रखें ….
 
….जो जिम्मेदारी से अपना कर्त्यव्य करते उन का  कल्याण होता है ….जो गैर-जिम्मेदारी से काम  करता है वो समय बरबाद करता….
 
 अपना समय बरबाद ना करे…..भगवत स्मरण,  भगवत कार्य या समाज सेवा करनी चाहिए….. समय बर्बाद नही करना चाहिए..
 
कोई बोला ‘मैं तो इम्प्रेस हो गया’……ज़रा ज़रा बात में क्या इम्प्रेस हो जाना? गधे भी आज कल इम्प्रेस नही होते ….तुम संसारी लोग क्यो हो जाते? …जितना इम्प्रेस हो जाते उतना ही फस मरोगे….
 
भगवान  हमारे हितेषी है…. सब से  बड़ा भगवान ही  है….
कोई   टोयोटा   वाला है तो सब अंत वाला है, सब छुटनेवाला है…… टोयोटा वाला….फलानेवाला….अरे कुछ भी नही!…. गुरु के ब्रम्ह ज्ञान के आगे क्या होता है ये सब..?
 
पृथ्वी, जल , वायु, आकाश, अग्नि ….५ भूतो में ये सब बना….. वो जिस परमात्मा की सत्ता से दिखता… उस आत्मदेव को छोड़ के कौन सी  बात प्रभावशाली हो सकती है…..कुछ भी सदा नही रहेता… सदा तो अपना परमेश्वर है…. उसी से प्रीति करो!
 
 नारायण हरि नारायण हरि…
 
 ओम 
हरि ओम…..
 
हरि  ओम…
 
हरि ओम….
 
हरि ओम……
 
हरि ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म्म्म 
हरि ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म्म्म
हरि ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म्म्म
 
हरि ओऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽम्म्म्म्म्म्म्म्म्म
 
हरि ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ  ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ हरि ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ हरी ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ  ॐ ॐ ॐ ॐ  ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ हरी ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ …….
 
हरी ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ  ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ हरी ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ हरी ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ हरी ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ हरी ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ हरी ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ हरी ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ओमओम ॐ ॐ हरी ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ
ये जो उच्चारण करते, उन को बहोत लाभ होते….ये कोई  साधारण मंत्र नही है….१५ प्रकार की शक्तियां  मिलती है इस मंत्र को जपने से….पेट की खराबियां  मिटती है ….दिमाग  की खराबियां  बिल्कुल  ठीक होती…..
“ॐ नमः शिवाय” इस मंत्र में (ओमकार के साथ)  भगवान का भी मंत्र मिलाया है.. उस मंत्र की शक्ति कई गुना हो जाती…..
“ॐ  गम गणपतये नमः”  इस मंत्र में  बिज मंत्र भी है ….गायत्री मंत्र अपने आप में बहोत प्रभावी मंत्र है … उस में भी ओमकार  मंत्र जोड़ देते है ..  “ॐ भुर भुवस्वः….”
 
“हरी ॐ”   ….ये भगवान का नाम है सीधा रास्ता भगवान तक पहुँचने का…
“हरी ॐ ……एक ओमकार ….”
 
गुरु नानक नदी में गोता मारे….३ दिन के बाद बाहर निकले…. पहेला अक्षर मुख से निकला…  “एक ओमकार!”
…सब को लगा कि नानक जी  नदी में खो गए, कही  चले गए, या डूब गए…. भगवान के समाहित हो गए ….
लेकिन नानक जी तो  ध्यान की नदी में डूब गए….सब की आँखों से ओझल हो गए… ३ दिन के बाद  नानक जी जब बाहर आए तो बोले  “एक ओमकार!”
 
परमात्मा का  स्वाभाविक ध्वनि है “ओमकार”….
 
 …. कुत्ता भी बीमार होता तो “औउउयम  औऊऊम ” बोलता..(बापू जी  ने आवाज निकाली 🙂  )… मैं उन को सिखाता नही हूँ! 🙂  ..
बीमारी में कराते  तो   ‘ऊऊऊऊम्म्म्म  ऊऊऊऊउम्म्म्म ’ करते……
परमात्मा का स्वभाव है  ह्रदय को शीतलता देना….
जैसे  दरिया में  स्वाभाविक लहेरे आए …ऐसे  परब्रम्ह का स्वाभाविक नाद है ..ब्रम्ह का स्वर नाद है “ॐ!”
 
 
 
ओमकार मंत्र… गायत्री छंद ..परमात्मा  ऋषी…. अंतर्यामी  देवता ..परमात्मा प्राप्तिअर्थे ….जपे विनियोग …..अथवा स्वास्थ्य लाभ अर्थे …..उसी में सब शक्ति है…
हरि ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ आनंद देवा..ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ माधुर्य  देवा….ॐ ॐ ॐ शान्ति देवा..हरी ॐ ॐ ॐ ॐ प्रीति देवा….हरि ॐ ॐ ॐ हरी ॐ ॐ ॐ ..हा हाहा ..हरि ॐ ॐ ॐ हा हः हां 🙂  (बापूजी हास्य करवाए)
 
ऐसा २/४ बार करना स्वास्थ्य के लिए बहोत जरुरी है….
 
(श्री सुरेश महाराज “श्री योग वशिष्ठ”  का पठन कर रहे है..)
 
“हे राम जी …मेरे वचनों को ग्रहण करो …ये वचन सदभाव के समान है ….संकट के समय तुम्हारे परम मित्र होंगे….. दुःख से रक्षा करेंगे….. हे राम जी , तुम मेरे वचनों के अधिकारी हो ..”

(बापूजी) ……मुर्ख गधे ब्रम्ह ज्ञानी के वचनों के अधिकारी नही होते ..जिन को भोजन  करने   की अकल  नही , जिन को  कमरा साफ करने की अकल नही.. वो मेरे वचनों के अधिकारी नही होते ….इन को क्या ब्रम्हज्ञान देना..?
 
ब्रम्हज्ञान के लिए शम  दम तितिक्षा चाहिए….तितिक्षा माने कठिनाई सहने का अभ्यास …..चित्त में समाधान चाहिए…तब उपरति आएगी बुध्दी में…..ये सदगुण बढाओं….
 
 
नारायण हरि नारायण हरि…
 
ओम जय जगदीश हरे….(आरती हो रही है….जो लोग इस आरती के अंत में “शाम सुंदर जी की आरती जो कोई गावे, मनवांछित फल पावे” ऐसा गाते उन के लिए पूज्य बापूजी बोले ….)
बस….आत्मा में शांत  हो जाओ…
 
भगवान को प्रेम करते …आरती गाते तो ये मांगे , वो मांगे क्यो?
 
 “मन वांछित फल”   माँगते ….भिक मांगे क्यो बनते?
जो मिला है, सब  छुटता है….ज्यो छुटता नही वो तो मिला मिलाया है.. ..ज्यो मिला मिलाया है उस के लिए मस्का  क्यो मारो? फालतू पॉइंट गाने में क्यो शक्ति खर्च  करना?
 
 फालतू खाना नही,  फालतू बोलना नही, फालतू गाना नही, फालतू सोचना नही…. क्या खयाल है?
 
 चुप बैठो शांत आत्मा में…….
 
बोलते तो वैखरी वाणी से…उस के अन्दर मध्यमा..उस के अन्दर होती है पश्चन्ति  और उस के अन्दर होती है  परा…..उस परा के  चैत्यन्य  में बैठे है….शांत…
 
… ना ज्यादा कहो…. न जादा बोलो.. ..बापू जितना चुप रहेते ..उतनी मौज है ..
 
नाम नशे में नानका , छटा रहे दिन रात l
 
भगवान के ‘हां’ में ‘हां’ मिलाओ….(पूज्य बापूजी ने उस साधुबाबा की कहानी बतायी जो नाव डूबनेवाली थी तो नदी का पानी कमंडलू  से भरकर नाव में डाल रहा था, और जब नाव डूबने से बचने लगी तो साधू बाबा भी नाव से पानी बाहर फेकने लगे…तो जब सब ने पूछा की ऐसा उलटा व्यवहार क्यो? तो साधू बाबा बोले….नही , मैं तो भगवान के हां में हां मिला रहा था…!)
ईश्वर प्राप्ति के लिए १ साल तो बहोत लंबा समय है….(सही प्लानिंग के अनुसार चले तो)
 
..फिर भी सत्संग के लिए श्रध्दा है ये बहोत बड़ी बात है….
 
कु-प्रचार वाले कितना भी कुप्रचार करे..उन को घटा पङता…मेरे को क्या घटा पङता?वो कु-प्रचार करते तो उन का बिगड़ता…..मैं उन का कु-प्रचार करू तो मेरा बिगडेगा ….
जो देता है वो ही लेता है..!
 इसलिए गुलाबी  रंग देते..(भगवान नाम संकीर्तन यात्रा में , या उत्सव में गुलाबी रंग डालते) ….तो  आप जो देते वो ही भगवान आप को देता  है ….
 
….भगवान का ज्ञान, भगवान से  प्रीति और भगवान में विश्रांति :-  ३ चीजे है …..भगवत ज्ञान से भगवान से प्रीति  हो जायेगी…और भगवान से प्रीति हो जायेगी तो भगवान में  विश्रांति हो जायेगी…. ..चादर का एक  छेडा पकडा तो बाकि के ३ छेडे अपने आप हाथ आ जायेगा……..भगवान को पाने का इरादा करते है  तो सदगुण आने लगते …और संसार को  पाने की इच्छा रखते तो  विकार, बे-इमानी , सुकडना ….ये सब आते है ……
 
क्यो सुकडना ? …ज्यादा सुकडो नही… मानसिकता दब्बू हो जायेगी…. तुम को नचायेगी..काय को सिकुड़ना…..!
 
शत्रु सामने से सताते , मित्र मना के सताते ..शत्रु भी दुःख देता , मित्र भी दुःख देता ….ईश्वर के सिवाय कही भी मन लगाया तो रोने के सिवा कुछ नही मिलता… संसार ऐसा  ही है…. अकेले ही आए,….जाना भी अकेले है…आए अकेले जाना अकेले तो अकेले  में भगवान में बैठने की आदत डाल लो….ठीक है?
 
कई लोगो को  कुछ पूछो तो उत्तर कुछ देते….
क्या कर रहे? पूछो तो बोले,  “कुछ नही”
 झूठ बोल रहे!
 कुछ तो कर रहा है…फिर नही काय को बोला?
 
“किधर जाता है”…तो बोलेंगे.. “कही नही”….. ऐसा टाइम बरबाद करते है …..
फ़ोन पे भी ऐसी ही बात करेंगे …लम्बी  चौडी बात करेंगे..
 
तुलसीदास जी कहेते मूर्खो से संसार भरा पड़ा है..जिन को देख के ह्रदय ठहर जाए ऐसो का बड़ा अकाल है…
 
 
नारायण  हरि नारायण हरि 
ॐ शान्ति.
 
हरि ओम !सदगुरुदेव जी भगवान की जय हो!!!!!
गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे…..

 

Oct 3rd   2008; IST : 7.30 pm , ekant satsang

 

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Sadgurudev SantShiromani ParamPujya ShriAsaramBapuji ki Amrutwani :-

 

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(pujya bapuji ne jo log baar baar bimaar padate un ke liye tips diye hai :- )

 

*** jarurat se jyada khana khaya to motaapaa badhataa….phir ghutane ka dard , idhar ka dard, udhar ka dard shuru ho jata…..

 

*** jo mote nahi to shakkar jyada khate….. aise nahi kare…..mote nahi bhi ho to bhi shakkar jyada nahi daale….(patale hote to bhi blood me sugar jyada ho sakati hai)

 

*** roti banate to kale daag wali roti kabjiyaat karati …paachan kharaab karati….kale daag wali roti nahi bane, isliye  agni kam do aur roti ko ghumaao…

 

*****saphaayi se rahe…apane kapade, kamaraa , aaspaas ka parisar saphsutharaa rakhe.

 

 

narayan hari narayan hari

 

..kamare se baahar jate to light pankha band kare….1rupiye ka bhi phaalatu kharch nahi ho is kaa dhyan rakhe….

 

….jo jimmedaari se apana kartyavy karate un ka  kalyan hota hai ….jo gair-jimmedaari se kaam  karataa hai vo samay barbaad karataa….

 

 apanaa samay barbaad naa kare…..bhagavat smaran,  bhagavat kary yaa samaj sewa karani chahiye….. samay barbad nahi karanaa chaahiye..

 

koyi bola ‘mai to impress ho gaya’……jaraa jaraa baat me kya impress ho jana? gadhe bhi aaj kal impress nahi hote ….tum sansari log kyo ho jate? …jitanaa impress ho jaate utanaa hi phas maroge….

 

bhagavan  hamaare hiteshi hai…. sab se  bada bhagavan hi  hai….

koyi  toyaato walaa hai to sab ant wala hai, sab chhutanewala hai……toyaatowala….phalaanewala….arre kuchh bhi nahi!…. guru ke bramh gyan ke aage kya hota hai ye sab..?

 

pruthvi, jal , vayu, akash, agni ….5 bhuto me ye sab banaa….. vo jis paramatma ki sattaa se dikhataa… us aatmdev ko chhod ke kaun si  baat prabhavshali ho sakati hai…..kuchh bhi sada nahi rahetaa… sada to apana parameshwar hai…. usi se priti karo!

 

 

narayan hari narayan hari…

 

 

om

hari om…..

 

hari om…

 

hari om….

 

hari om……

 

hari ooooooooooooooommmmmmmmmmm

 

hari oooooooooooooooommmmmmmmmm

 

hari ooooooooooooooommmmmmmmm

 

hariii ooooooooooommmmmmmmmm

 

hari om om om om om om om om om om om om om om om omom om om om om om om om om om om om om hari om om om om om om om om hari om om om om om om om om om omom om om om om omom om om om om om om hari om om om om om om om om om om om om om …….

 

hari om om om om om om om om om om om om om om om om om om om om om omom om om om om om hari om om om om om om om om om om om om om om om hari om om om om om om om om om om om om om hari om om om om om om om om om om om om om om om hari om om om om om om om om om om om om hari om om om om om om om om om om om om om hari om om om om om om om om om omom om om hari om om om om om om om om om om om om om om

ye jo uchcharan karate, un ko bahot labh hote….ye koyi  saadhaaran mantr nahi hai….15 prakar ki shaktiya milati hai is mantr ko japane se….pet ki kharaabiyaa mitati hai ….dimaag  ki kharaabiyaa bilkul  thik hoti…..

“om namah shivay” is mantr me (omkaar ke sath)  bhagavan ka bhi mantr milaya hai.. us mantr ki shakti kayi guna ho jati…..

“om  gam ganapataye namah”  is mantr me  bij mantr bhi hai ….gayatri mantr apane aap me bahot prabhavi mantr hai … us me bhi omkaar  mantr jod dete hai ..  “om bhur bhuvaswahaa….”

 

“hari om”   ….ye bhagavan ka naam hai sidha raastaa bhagavan tak pahunchane ka…

“hari om ……ek omkar ….”

 

guru naanak nadi me gotaa mare….3 din ke baad baahar nikale…. pahela akshar mukh se nikala…  “ek omkar!”

…sab ko lagaa ki nanak ji  nadi me kho gaye, kahi  chale gaye, yaa dub gaye…. bhagavan ke samaahit ho gaye ….

Lekin nanak ji to  dhyan ki nadi me dub gaye….sab ki aankho se ojhal ho gaye… 3 din ke baad  nanak ji jab bahar aaye to bole  “ek omkar!”

 

Paramatmaa ka  swabhavik dhwani hai “omkar”….

 

 …. kutta bhi bimaar hota to “om om” bolata..(bapuj ne aawaj nikaali J )… mai un ko sikhaataa nahi hun! J ..

Bimari me karaahate to   ‘aummmm aummmm’ karate……

paramatma ka swabhaav hai  hruday ko shitalataa dena….

jaise  dariya me  swabhavik lahere aaye …aise  parabramh ka swabhavik naad hai ..bramh ka swar naad hai “om!”

 

 

 

omkar mantr… gayatri chhand ..paramtam rushi…. antaryami  devata paramatmaa praptyarthe….jape viniyoga …..athavaa swasthy labh arthe …..usi me sab shakti hai…

hari om om om om om om om aanand deva..om om om om om om om om om om om om madhury deva….om om om shanti deva..hari om om om om priti deva….hari om om om hari om om om ..ha haha ..hari om om om ha hah haa J (bapuji hasy karavaaye)

 

aisa 2/4 baar karana swasthy ke liye bahot jaruri hai….

 

(Shri suresh maharaj “shri yog vashishth”  ka pathan kar rahe hai..)

 

“hey ram ji …mere vachano ko grahan karo …ye vachan sadbhaav ke samaan hai ….sankat ke samay tumhare param mitr honge….. dukh se rakshaa karenge….. hey ram ji , tum mere vachano ke adhikari ho ..”

(bapuji) ……murkh gadhe bramh gyani ke vachano ke adhikari nahi hote ..jin ko bhojan  karane   ki alakl nahi , jin ko  kamaraa saph karane ki akal nahi.. vo mere vachano ke adhikari nahi hote ….in ko kya bramhgyan dena..?

 

Bramhgyan ke liye Sam dam titiksha chahiye….titiksha maane kathinaayi sahane ka abhyas …..chitt me samadhaan chahiye…tab uparati aayegi budhdi me…..ye sadgun badhaao….

 

 

narayan hari narayan hari…

 

om jay jagdish hare….(aarati ho rahi hai….jo log is aarati ke ant me “sham sundar ji ki aarati jo koyi gaave,manvanchhit phal paave” aisa gaate un ke liye pujya bapuji bole ….)

bas….aatma me shant  ho jaao…

 

bhagavan ko prem karate …aarati gaate to ye mange , vo mange kyo?

 

 “man vanchhit phal” bhik mange kyo banate?

jo mila hai, sab  chhutataa hai….jyo chhutataa nahi wo to mila milayaa hai.. ..jyo mila milaya hai us ke liye maksa kyo maro? phaalatu point gaane me kyo shakti kharch  karana?

 

 phaalatu khana nahi,  phaalatu bolanaa nahi, phaalatu gaanaa nahi, phaalatu sochanaa nahi…. kya khayal hai?

 

 chup baitho shant aatma me…….

 

bolate to vaikhari wani se…us ke andar madhyamaa..us ke andar hoti hai paschanti aur us ke andar hoti hai  paraa…..us paraa ke  chaityan me baithe hai….shant…

 

… naa jyada kaho…. na jada bolo.. ..bapu jitana chup rahete ..utani mauj hai ..

 

naam nashe me nanakaa , chhataa rahe din raat l

 

bhagavaan ke haa me haa milaao….(pujya bapuji ne us sadhubaba ki kahaani bataayi jo naav dubanewali thi to nadi ka pani kamanadaloo se bharkar naav me daal raha tha, aur jab naav dubane se bachane lagi to sadhu baba bhi naav se pani baahar phekane lage…to jab sab ne puchha ki aisa ulataa vyavhaar kyo? To sadhu baba bole….nahi mai to bhagavan ke haa me haa milaa raha tha…!)

ishwar prapti ke liye 1 saal to bahot lamba samay hai….(sahi planning ke anusaar chale to)

 

..phir bhi satsang ke liye shradhda hai ye bahot badi baat hai….

 

Ku-prachaar wale kitana bhi kuprachar kare..un ko ghata padataa…mere ko kya ghataa padataa?vo ku-prachar karate to un ka bigadataa…..mai un ka ku-prachar karu to mera bigadega ….

jo deta hai wo hi leta hai..!

 isliye gulabi  rang dete..(bhagavan naam sankirtan yatra me , yaa utsav me gulaabi rang daalate) ….to  aap jo dete wo hi bhagavaan aap ko deta  hai ….

 

….bhagavan ka gyaan, bhagavan se  priti aur bhagavan me vishranti :-  3 chije hai …..bhagavat gyan se bhagavan se prirti ho jayegi…aur bhagavaan se priti ho jayegi to bhagavan me  vishranti ho jayegi…. ..chaadar ka ek  chheda pakadaa to baki 3 chhede apane aap hath aa jayegaa……..bhagavan ko pane ka iraadaa karate hai  to sadgun aane lagate …aur sansaar ko  pane ki ichcha rakhate to  vikaar, be-imani sukdanaa ….ye sab aate hai ……

 

Kyo sukadanaa? …jyada sukado nahi… mansikataa dabbu ho jayegi…. tum ko nachaayegi..kay ko sikudana…..!

 

shatru samane se sataate , mitr manaa ke sataate ..shatru bhi dukh deta , mitr bhi dukh deta ….ishwar ke siway kahi bhi man lagaaya to rone ke siwa kuchh nahi milataa… sansar aisa  hi hai…. akele hi aaye,….jaana bhi akele hai…aaye akele jana akele to akele  mey bhagavan me baithane ki aadat daal  lo….thik hai?

 

kayi logo ko  kuch puchho to uttar kuchh dete….

kya kar rahe? Puchho to bole,  “kuch nahi”

 jhuth bol rahe!

 kuchh to kar rahaa hai…phir nahi kay ko bola?

 

“kidhar jata hai”…to bolenge.. “kahi nahi”….. aisa time barbaad karate hai …..

phone pe bhi aisi hi baat karenge …lambi  chaudi baat karenge..

 

tulasidaas ji kahete murkho se sansar bhara pada hai..jin ko dekh ke hruday thaher jaaye aiso ka bada akaal hai…

 

 

narayan hari narayan hari

 

om shanti.

 

Hari Om !Sadgurudev ji bhagavan ki Jay ho!!!!!

Galatiyo ke liye prabhuji kshama kare…..

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