Aatm Sakshatkar Din

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सदगुरूदेव संतशिरोमणि परमपूज्य श्री आसाराम बापूजी की अमृतवाणी  :-

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 ओक्ट 1st  2008; भारतीय समय  : शाम के 5  ; चंडीगढ़  सत्संग_लाइव

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आत्म साक्षात्कार दिन
ब्राम्ही स्थिति प्राप्त कर , कार्य रहे ना शेष l
मोह कभी ना ठग सके, इच्छा नही लवलेश ll
पूर्ण गुरु कृपा मिली,  पूर्ण गुरु का ज्ञान l
आसुमल से हो गए, साईं आसाराम  ll
पूर्ण गुरु की कृपा मिली ….मोह कभी न ठग  सके…


भगवान का दर्शन हुआ,  फिर भी अर्जुन का दुःख नही गया तो पूर्ण गुरु के रूप में भगवान ने ज्ञान दिया तब अर्जुन का दुःख मिटा….

रामकृष्ण परम हंस के सामने माँ काली प्रगट हो जाती, उन के  हाथ का गजरा  काली माता स्वीकार करती….फिर भी काली माता ने रामकृष्ण जी को  तोतापुरी गुरु से दीक्षा लेने को कहा….रामकृष्ण जी  बोले, ‘माँ तुम मुझ से बातचीत करती हो,  मेरे हाथ का प्रसाद खाती हो …गुरु करने की क्या आवश्यकता है ?’

माँ काली बोली, “तुम मुझे भाव से बुलाते तो आती हूँ , लेकिन फिर  अंतर्धान होती तो तुम ज्यों की त्यों हो जाते… वोही के वोही हो जाते….जो तुम्हारे अन्तर में जो नित्य है उस  अकाल पुरूष  का , उस अनंत का ज्ञान पा लो…”
‘मन तू ज्योति स्वरुप , अपना मूल पहचान’ ..ये  अंतर्यामी के साक्षात्कार से, गुरु की कृपा से होगा ….”

तोतापुरी गुरु ने रामकृष्ण को रामकृष्ण परमहंस बना दिया !… नरेंद्र को रामकृष्ण परमहंस जी ने स्वामी विवेकानंद बना दिया ….आसुमल ने लीलाशाह जी की जी शरण ली तो आसुमल से बन गए साईं आसाराम !
पूर्ण सिध्द है वो  अपने आत्मा  !

आसोज सूद दो दिवस, संवत बीस इक्कीस  l
मध्यान्ह ढाई बजे,मिला ईश से ईश ll
देह सभी मिथ्या हुयी , जगत हुआ निस्सार l
गुरु वर जगत हुआ निस्सार l
हुआ आत्मा से तभी पना साक्षात्कार ll
परम स्वतंत्र पुरूष दर्शाया, जिव गया और शिव को पाया l
जान लिया हूँ शांत निरंजन , लागु मुझे ना कोई बंधन l
यह जगत सारा है नश्वर, मैं ही श्वाश्वत एक अनश्वर ll
दीद है दो पर दृष्टी एक है, लघु गुरु में वही एक है l
सर्वत्र एक किसे बतलाये, सर्व व्याप्त कहा आए जाए  ll
अनंत शक्तिवाला अविनाशी, रिध्दी सिध्दी उस की दासी l
सारा ही ब्रम्हांड पसारा, चले उस की इच्छा  नुसारा ll
यदि वो संकल्प चलाये, मुर्दा भी जीवित हो जाए l
हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ
ब्राम्ही स्थिति प्राप्त कर , कार्य रहे ना  शेष l
मोह कभी ना ठग सके, इच्छा  नही लवलेश ll
पूर्ण गुरु कृपा मिली, पूर्ण गुरु का ज्ञान l
आसुमल से हो गए साईं आसाराम ll

जागृत स्वप्नी सुषुप्ति चेते  , ब्रम्हानंद का आनंद लेते…..

जागृत आया चला गया, स्वप्ना आया.. चला गया, सुषुप्ति आई ..चली गई…  लेकिन उस को जाननेवाला , देखने वाला चला गया क्या?

आज मैं स्नान किया  १ बजे!… रात को १० बजे सोया ,सुबह १० बजे उठा… मंजन किया १० बजे ……ऐसा बाबा होता है क्या? .. ऐसे बाबा के चक्कर में मत आओ..कोई  और बाबा खोज ले…मैं सच बोल रहा हूँ..  🙂
सदगुरुदेव जी भगवान की जय हो!
(सभ भक्तगण सदगुरूदेव जी भगवान की जयजयकार  कर रहे है….)

…..तो जागृत , स्वप्नी या सुषुप्ति किसी भी अवस्था में जो ब्रम्हानंद का आनंद लेते… जागृत आया गया , स्वप्न आया –गया…सुषुप्ति आई –गयी ….ये ज्ञान जिस रब से दिखता , उसी में शांत..उस में समाधी…..
सदा समाधि संत की ..आठो प्रहर आनंद l
अकल माता कोई उपजा, गिने इन्द्र को रंक ll

…. गन्धर्व गान करे, अप्सरा नाचे तब इन्द्र को आनंद आए ..लेकिन जिस ने आत्मा का साक्षात्कार किया है ऐसे महापुरुषो को थकान होती तो नींद में नही तो आत्मा में चले जाते ….. ‘आत्म लोक’ से बाहर आने की  उन को जरुरत नही…
भगवन नारायण देवशयनी एकादशी से ४ महिना उसी में विश्रांति पाते है….इन ४ महीनो में शादी ब्याह आदि सत्कर्म नही किए जाते..क्यों की भगवान सो रहे है.. ‘सो’ कैसे रहे? साधारण आदमी नींद करते ऐसा नही….. अकाल पुरूष में …हम परब्रम्ह परमात्मा में होते….. ऐसी समाधी होती संत की…. भगवान नारायण उसी में विश्रांति पाते भगवान शिव जी उसी में समाधी लगाते….
..हम भी लेटे लेटे उसी परमात्म विश्रांति में ..समाधी में रहे…उसी में लेटे रहे….

….नाम नशे में नानका , छटा रहे दिन रात ..

सुबह के १० बजे  तक हम छटे रहे….. अब जय राम जी  बोलना पड़ेगा!  🙂

…..और इस परमात्म मस्ती केवल संतो के छटने के लिए नही…..इस में  माई-भाई सभी छट सकते है ..:-)
ये तो परमात्म प्रसाद है….
भगवान कृष्ण कहेते,
 “प्रसादे सर्व दुखानाम , हानि रस्योप जायते..”
 सभी इस प्रसाद का रस चख सकते है…. सारे कर्म बंधन कट जाए…. ‘प्रसन्न चेतसे ’ …!

परमात्मा  आत्मा के ध्यान से ओज देते…. ईश्वर  चित्त में 13 निमिष भी छटे तो जगत दान करने का फल होता !
17 निमिष परमात्म ध्यान में छटे रहे तो अश्वमेध यज्ञ का पुण्य होता है ….
घुटने को दाहे बाहें हाथ घुमा के चुटकी बजायी ….ये हुआ एक निमिष !
ये भगवान शिव जी ने वशिष्ट महाराज को कहा, “ हे मुनि शार्दुल उस को अश्वमेध यज्ञ करने का फल होता…. (जिन संतो ने ऐसी आत्म शान्ति पाई है ) , जिन संतो का संसार का ज्ञान मोह टूटता है ..वो संत भी मनुष्य का पाप ताप काटने की शक्ति पाते .. दूसरो के  पाप ताप हरते…!”

सो साहिब सदा हुजुरे ,  अँधा जानत  ताको दुरे  l

आप समझते रब दूर है ….जो हजुरे  हजूर है !!

आदि सत् जुगात सत्
है भी सत, हो से भी सत…..

आप सोचते की  अगर ३ जन्मो के  बाद मिलेगा तो आप अपने पे बहोत जुलुम  कर रहे ….

अपने आप के प्रति जैसा सोचते वैसा फल मिलता….

भयनाशन दुरमति  हरण….
भगवान का नाम भयनाशन करनेवाला है , दुरमति हुयी तो  भय देनेवाला भी है…..रावण  साधू बनकर सीताजी के कुटीर में भिक्षा मांगने गया…लक्ष्मण जी ने मंत्र पढ़कर  लकीर खिंची थी ..तो बाहर से कोई अन्दर प्रवेश करे तो  अग्नि प्रगट होती….. तो रावण सीताजी को बोला, ‘मैं अन्दर आकर भिक्षा  नही लूँगा ….तुम बाहर आओ!”…. इतने में पत्ता हिलता तो रावण डरता….!
दुष्कर्म करते तो भगवान  भय देता है…
कंस  चबर चबर  खाना खाता तो अपने ही खाना खाने की आवाज से डरता की , “कृष्ण आए!”….. खाली उस में आवाज आया तो उस को लगता कृष्ण आया …दुष्कर्म करते तो अंतर्यामी ईश्वर से अपने आप भय पैदा हो जाता…
वो हजुरे  हजूर है! जागंदी ज्योत है !!सभी में है!!

जैसे आकाश में सब और सब में आकाश है ….. सब में आकाश है., ऐसा लोहे में भी आकाश है..लोहे में आकाश नही  होता तो भट्टी में डालने पर अग्नि-मय कैसे हो जाता?
सब चीजो में आकाश है….और  सब चीज आकाश में है…ऐसे ही वो अकाल पुरूष सर्वेश्वर परमेश्वर सर्व-व्यापक है..सब के अंतर्यामी है .. हमारे परम सुहुर्द है ….(उन के नाम की शक्ति अपरम्पार है..)

धन्वन्तरी महाराज बोलते की,  “जब कोई दवाई काम नही करती तब 

“अच्युताय,  गोविन्दाय,  अनंताय”

ये नाम ले..मैं सत्य कहेता हूँ ..वो अंतर्यामी देव आप की  रक्षा करेगा !!”

(सदगुरूदेव भगवान जी ने ये बात पहेले भी सत्संग में कही थी तो  किसी ने मकराना में  सुनी तो उस को फायदा हो गया..रोग मिट गया…)

..ये जरुरी नही  है की मेरा सत्संग  मेरे भगत ही सुनते होंगे…. और(दुसरे) लोग भी सुनते और उन को भी फायदे होते….

तो लन्दन  से आया एक व्यक्ति बोला मैं आप का सत्संग सुनता हूँ  ….अच्छा लगता है, ऐसा फायदा हुआ ऐसा बता रहे थे…. 156 देशो में सत्संग सुनते है ..

“अच्युताय, गोविन्दाय, अनंताय” ये भगवान का नाम लेते  तो  सर्व रोग का नाश होता है .. भगवान अच्युताय  ‘गुन – निधान’ है… उस का नाम लेने से ज्ञान मिलता…. ‘गोविन्दाय’ बोलने से  शरीर के सब रोग मिटेंगे  …. ‘अनंताय’ बोलने से मन के  रोग भी मिटेंगे…मन  के रोग होते है  काम,  क्रोध , मोह , लोभ …ये रोग भी मिटेंगे..

‘अच्युताय , गोविंदाय अनंताय’ नाम उच्चताम  l’
(ये नाम उच्चारण करने से सर्व रोग मिटेंगे…)

अनेक में जो एकात्म देव छुपा है …उस आत्म देव में विश्रांति पाये….
सोते समय भगवान का ध्यान कर के सीधे लेट जाए… सीधे ‘अच्युत’ में जाना  …..नींद में भी बहोत आनंद मिलता …बहोत फायदा होता… ऐसे  ही सोना… जब मैं सोता हूँ तो सोने से पहेले आखरी में  भी उच्चार करता हूँ और सुबह भी उठते ही उस का ही उच्चार….. रात को उपनिषदो का ध्यान कर के सोता और सुबह उठते ही उसी का नाम ….ऐ  हैई….:-)

मेरे बेटे की माँ एकदम बीमार थी… इंटर कॉम पे बोला “ऐ हैई” …तो उस ने बोला .. “एई हाई”

तो मैंने जरा दम मारकर बोला, “चंद्रमा की जगह मेरे को अर्घ्य देकर व्रत करती ..मेरे को गुरु मानती , भगवान मानती और मैं  बात कर रहा हूँ तो अच्छे से बोलो, “ऐ हैई..!”

वो  मेरी शिष्या  भी है ..तो मैंने इंटर कॉम  पे बोला, “ऐसे प्यार से कहे ना ऐ हैई!”
तो उस ने बोला…
…शाबास है …और सुनाओ… “ऐ हैई!” बहोत अच्छा लगता है….!”

ऐसा बुलवाया और वो भी बोली….तो मैं बिल्कुल  सच बता रहा हूँ  कि वो बिल्कुल ठीक हो गई..जो  ठीक  से खाना पचा नही सकती थी… चल नही सकती थी..  अब तो ऐ हैई ..!
अब 35 साल के बाद मायके  जा के आई….बम्बई घूमी ….कहा कहा घूमी…चल फिर सकती है ..एकदम  ठीकठाक!:-)
(जय हो सदगुरूजी भगवान की !जय हो श्री गुरुदेवी माँ की!!)

ये विदेशियों की सिख  और हिंदू को लड़ाने की गन्दी चाल है की बोलते :-  ‘गुरु नानक कहेते , “राम गए , रावण गए, ताको दिया बिसार …. कहे नानक सपने ज्यूँ संसार”…..श्रीराम कोई साधारण आदमी है क्या?जो नानक ऐसा बोलते’….
तो ये बिल्कुल ग़लत बात है…तो ये पक्का जान लो की नानक जी के ह्रदय  राम के लिए नफरत नही थी ….नानक जी के एक एक दोहे पढ़ के सुनाऊ तो दंग रहे जायेंगे की हिंदू के लिए क्या लिखा है…
ऐसा ग़लत धारणा पैदा कराने वाले लोग हिंदू और  सीखो को लड़ाने की कोशिश करते …
नानक जी कहेते,
संगी साथी कोई नही दे साथ l
कहे नानक एक एक रघुनाथ ll

… विदेशी हमारे देश में धर्मान्तरण कराने के लिए कोशिशे करते… भारत को तोड़ने के लिए कुछ भी करने को तैयार है..

भारत के पास आत्मज्ञानी महापुरुषो ने  दिए उत्सव है…. सत्संग मिलता ….सुझबुझ मिलती…. इसलिए  साजिश करनेवालों की साजिशे विफल हो गई…
आत्मसाक्षात्कार क्या है?
…भगवान  ब्रम्हाजी  जिस में समाधिस्त रहेते ,भगवान विष्णु ४ महीने जिस में विश्रांति पाते , भगवान  शिव जी जिस में समाहित रहेते उस “मैं रूप” की घडिया है “साक्षात्कार”!
वशिष्ठ महाराज शाम को अपने शिष्यों को सत्संग  सुनाते….बोले , हे  राम जी…. एक संध्या को आकाश मार्ग से प्रकाश पुंज दिखाई दिया ….भगवान चंद्रशेखर माँ पार्वती  सहित पधार रहे थे..अरुंधती  के साथ हम ने  मनोमन प्रणाम किया… आसन तैयार किया ..जब वे आए तो वहा  बिठाया …उन के चरण धोये…. अर्घ्य पाद से पूजन किया…. भगवन चंद्रशेखर ने कुशल पूछा ,
“हे मुनि शार्दुल यहा एकांत में वरुण विक्षेप तो नही करते? वृक्ष फल फूल तो देते?”
मैंने कहा, “आप के स्मरण मात्र से सब  कुशल होने लगता है ….मेरी इच्छा  है की माँ पार्वती अरुंधती के साथ ज्ञान की चर्चा करे और  मैं आप से कुछ सुनना चाहता हूँ….”
मैंने शिव जी को प्रश्न किया की , “वास्तविक में देव कौन है जो सब का हितकारी है..थोडी सी पूजा करने से प्रसन्न हो जाते है..”
भगवान चंद्रशेखर बोले,  “स्वर्ग के देव भी वास्तविक देव नही…. तुम्हारे भीतर जो आत्मदेव है , वो ही वास्तविक में देव है उन की सत्ता से आँखे देखती….   बुध्दी उसी की सत्ता से निर्णय कराती…मन में उस की सत्ता से सोच की फुरना उठती…उसी की सत्ता से  बुध्दी  निर्णय बदलती …. आँखों का देखना बदलता…. इस  सब को जो जानता है , फिर भी  ज्यों का त्यों रहेता है वो ही वास्तविक देव है !”

उसी को भगवान कहते, अकाल पुरूष कहेते….. भगवती आदिशक्ति कहेते…. देव की लीला अनंत है!!… वास्तविक देव इतने सहज है ….उन को पुत्र मान के पूजा करो तो भी वो आने को तैयार है… वासुदेव देवकी के यहाँ आए …!

वो ही सकल अंतर्यामी है….जल में उसी की सत्ता है ..थल में उसी की सत्ता है… माँ में वात्सल्य उसी का है…. बाप में अनुशासन  उसी का है… संत में  संतत्व उसी की सत्ता से चमकता है.. भक्त की  भक्ति फलती ..मेरे स्वामी ऐसे मेरे रब में सारी  सृष्टि है…

निर्भव जपे…. संत कृपा से प्राणी छूटे

भय को देने वाले वो ही , भय  नाश कराने वाला भी वो ही है … दुष्कर्म करते तो भयभीत भी करता ..संकट समय उस को पुकारने वाले की पतवार संभालता है….

इसलिए आप कभी अपने को तुच्छ मत मानिये…अनाथ मत मानिए ….दुखी मत मानिये…. अगर आप अपने को दुखी मानेंगे  तो चित्त दुखाकार होकर चैत्यन्य से दूर हो जाएगा..

रामायण में बन्दर राम जी के लिए लड़े और  मेघनाद , कुम्भकरण राक्षस आदि रावण के लिए लड़े….लड़ने की सत्ता देनेवाला वो ही का वोही…वो ही  दे रहा है ….. हथियार घुमाने के लिए एक सत्ता से शक्ति मिल रही है….राम जी  के मन में रावण के लिए  राग है और रावण के मन में राम के लिए द्वेष है….
चेहरा वो ही है ,  शीशा अलग अलग है…
विद्युत् का करंट वो ही है , उपकरण अलग अलग है ..
गिझर  में पानी गरम होता और फ्रीज  ठंडा होता , बिजली एक ही एक है … ऐसा अकाल पुरूष वो ही का वोही है…. सज्जन की वकालत करो तो भी वो ही बोलेगा…. और  दुर्जन के लिए भी वो ही बोलने की सत्ता देता है..

जो इसी जनम में साक्षात्कार करने को  तैयार है, उन के लिए वो  सुलभ है….जो  3 जनम के बाद ,  1 जनम के बाद सोच रहे उन के लिए  कठिन है….
भगवान बोलते,  अगर आप सोचते कठिन है तो कठिन है….और जो सोचते मैं सुलभ हूँ उन के लिए मैं सुलभ हूँ  !
“तस्याहम सुलभं पार्थ!”
जो मुझे पाना सुलभ मानते है, उन के  लिए मैं  सुलभ हूँ …. लेकिन जैसा मानोगे ऐसे हो जाता ….
जो जिस रूप में ईश्वर को  चाहेगा उसी रूप में ईश्वर को  पा लेगा….जो जैसी   भावना करता उस की भावना  के अनुसार उस का  कल्याण करने  में भगवान  कोई कसर नही छोड़ते….

जब मैं  अनुष्टान करता नर्मदा किनारे तो  मंत्र की पुरी संख्या नही होती तब तक  कभी रात्रि के 11 बजते तो कभी 12……और भी देर हो जाती  नियम पुरा करने में तो सोना भी देर से हो जाता… जवानी थी, 22 साल की उमर थी…तो नींद  भी ऐसे आती की …. जिस गुफा में जप करता उस गुफा में रात को छुछुंदर फुक मारकर पैरो के तलवे खा जाता पता ही नही चलता  ..दुसरे दिन चलता तो उस में कंकर रेती घुस जाती तब पता चलता…..किसी संत ने देखा… बोले, “अरे, ये तो  छुछुंदर ने खाया है,  पता नही चलता!”
हम ने बोला, “पता नही ….. अनुष्ठान में हूँ!”
…. शिव मन्दिर में जल चढाते  तो श्री विग्रह से फूल पड़ता , माला पड़ती  तो ये तो शगुन है की भगवान प्रसन्न है……
तो मैं बोलता, “भगवान आप प्रसन्न है , लेकिन कैसे मिलेंगे ये बताओ…. बार बार ध्यान में अन्दर से  आवाज आती की लीलाशाह बापूजी के पास जाओ ! “
मैं बोलता , “तुम कौन बोल रहे हो?”
जिस को तुम मिलना चाहते हो , मैं वोही बोल रहा हूँ..तुम लीलाशाह महाराज के पास जाओ..मैं तुम्हे मिलूँगा!”
मैं बोलता, “ये मेरे मन  की आवाज है की  देव की  – ये  कैसे पता चले?”
तो अन्दर से आवाज आती कि , “नही बेटा,  मैं वो ही बोल रहा हूँ… तुम लीलाशाह जी महाराज के पास जाओ ….शिवजी , पार्वती, गणपति सभी के रूप में  मैं वहा  मिलूँगा…!”
ऐसा कई बार भाव आता था …. 40 दिन पुरे होते ही मैं  चल पड़ा .. माँ और उस की बहु आ धमकी थी मेरे एक मित्र के साथ…..माँ  और उस की  बहु  मुझे घर ले जाना  चाहते , समझाता तो  हल्लागुल्ला होगा…इसलिए मित्र से  चुपचाप अहमदाबाद के 3 टिकेट और बम्बई का एक टिकेट मंगवाया….मियागांव जंक्शन पे दोनों ट्रेन आमने  सामने खड़ी होती….तो बातचीत करूँगा और ट्रेन चल पड़ेगी तो मैं भाग के बम्बई के ट्रेन में चला जाऊंगा…. तो मियागाँव जंक्शन में ऐसा करेंगे….  माँ और माँ की बहु की टिकेट मित्र के पास थी… सामने बम्बई जानेवाली गाड़ी खड़ी थी…उस का सिग्नल हुआ तो “मैं अभी आया” ऐसा  कर के भागा….. “क्या हुआ?” …मैं  गाड़ी में बैठा…. माँ चिल्लाई…. फिर क्या क्या हुआ….. “पकडो पकडो!” “क्या लेके भागा?”..माँ बोली , “कुछ लेके नही भागा..मेरा बेटा था” …..चालू गाड़ी में हम तो बैठ गए….गुरूजी से मिलने  कि  अन्दर से प्रेरणा हो रही थी….शिवजी बार बार बोलते , “मैं वो ही मिलूँगा!”….  माँ रुदन करेंगी..माँ को  समझाऊ तो माँ की बहु के दिल पर क्या गुजरेगी…..हमारे ह्रदय में कैसी शक्ति दिया….  कितना मेहेरबान हुआ होगा… उसी का फल है ये!
….रात भर ट्रेन चली… दुसरे दिन सुबह स्टेशन पे उतरे …गणेशपुरी गए…वहा  से वज्रेश्वरी गए…. किसी सेठ का मकान  था…गुरूजी के लिए था.. सुबह सवा 9 बजे होंगे….गुरु जी घूमने निकले थे…हम चरणों में गिर पड़े….
गुरु जी बोले, “क्या हुआ?वापस क्यों आया?”
वाणी से तो कुछ न निकला…..आँखों से आंसू निकल पड़े….
गुरूजी बोले, “अच्छा…. भगवान सब ठीक करेंगे…”
पानी गरम हुआ तो उफलना ही है…. घर में बिजली का सारा सामान फिट हो गया और पॉवर हाउस से बिजली भी आ गई तो फ्यूज  को दबाना और  स्विच  ऑन करना है…..
गुरु जी बोले, “भगवान सब ठीक करेंगे…. आसन नियम ध्यान कर..आराम कर…”
तो हम नहाये, आसन नियम ध्यान किए… आराम कर रहे थे की करीब २ बजे होंगे…
गुरु जी का  एक सेवक था वो आया ..बोला, “साईं ने बुलाया…”
साईं बैठे थे..मेरे को इशारा किया की बैठ…. पंचलक्षी  उपनिषद का ७ वा अध्याय चल रहा था….
“ध्यान से सुन…”(साईं ने इशारा किया)
पंचलक्षी  उपनिषद का ज्ञान तो हाई लेवल का होता है… सेवक पढ़ रहा था…
“ध्यान से सुन…”  गुरूजी  ने  इशारा किया…
मैं सुन रहा था…गुरूजी बैठे थे ..घटना ऐसी घटी…. ऐसे तो कई बार ध्यान में बैठते तो  आनंद होता…ध्यान में आनंद आता …..लेकिन ये  और कुछ विशेष था…. अब वहा  शब्द नही मेरे पास ……फिर जो भी हुआ  ना …शब्द से बाहर निकल गए……

गहेरी नींद में बोला जाता है क्या?
कोई सवाल करे की , “गहेरी नींद में हो?” तो  आप बोले , “ हां , मैं  ठीक से गहेरी नींद में सोया हूँ…”  ये हो सकता है क्या?

ऐसे   ‘साक्षात्कार हुआ तो क्या हुआ’  आप इस विषय में बोल नही सकते…. इस के इर्द  गिर्द के बोल सकते !!
आज  वो ही साक्षात्कार दिन है….
सेवक पढ़ते..गुरूजी  व्याख्या करते…. मैं ध्यान देकर सुन रहा था…. मेरे नासमझी  का परदा दूर हुआ… अढाई दिन तक  उस में रहे….गुरूजी की कृपा से होश संभाले…. आज इस घटना को 46 साल हो गए….

किसी ने पूछा , “ब्रम्हज्ञानी की पहेचान क्या?”
.. मैंने कहा , सच्चे शराबी की  क्या पहेचान है? जो दुसरे को शराबी बना दे….ऐसे  सच्चे ब्रम्हज्ञानी की ये पहेचान है की संत के संग सत्संग के मस्ती में आ जाए ऐ हैईई  !.. 🙂

वो चाहते सब झोली भर ले…निज आत्मा का दर्शन कर ले l
एक सौ आठ  जो पाठ करेंगे ,  उन के सारे काज सरेंगे ll

नारायण नारायण नारायण नारायण

रब का ज्ञान जिन को मिला है, वो दिन बड़ा है…. जनम दिन, शादी का  दिन  तो कईयों का होता…आत्म – साक्षात्कार दिवस किसी  किसी का हुआ होगा…..जिनका आत्म-साक्षात्कार हुआ उन को इच्छा  ही नही होती की साक्षात्कार दिन मनाये ….ऐसी स्थिति  हो जाती है… ..

आप मुझे चंडीगढ़ में सुन रहे है….देश विदेश में कई जगह लोग सुन रहे देल्ही, अमदाबाद , बनारस, बम्बई,  नागपुर,  नाशिक, औरंगाबाद  , आगरा,  भावनगर,  जयपुर उल्हासनगर,  नांदेड  , वर्धा,   रायपुर, इंदौर ,  कोटा , भोपाल , छत्तीसगढ़ ,  बरोड़ा,  गोधरा, हैदराबाद, बालाघाट और भी कई जगह और विदेशो में भी  कई जगह में सुन रहे….सिंगापूर, केनिया , कनाडा, इटली , होन्गकोंग , अमेरिका , दुबई और यूरोप  में कई जगह लोग सुन रहे  है…

 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय…

(परम दयालू कृपासिंधु सदगुरूदेव जी भगवान ने सभी को पुनश्च याद दिलाया कि :-
********** 10 ओक्ट से 14 ओक्ट 2008 तक(दशेरा से शरद पूनम तक) रोज चंद्रमा 10/15 मिनट  टिक टिकी  लगा के देखे….प्रसन्नता बढेगी…आँखों की रोशनी बढेगी…स्वभाव में चिडचिडापन नही रहेगा…पित्त दोष से आराम मिलेगा..
**********शरद पूनम की  रात को 200gram चावल और 1 लीटर दूध ऐसी मात्र में खीर बनाये, खाना नही बनाये…खीर में चारोली, किशमिश , बादाम काजू कुछ भी नही डाले…ऐसी खीर बना के रात को 9 बजे से 12 बजे तक चाँदनी में रखे….और 12 बजे (सदगुरू देव जी भगवान को मानसिक नैवेद्य अर्पण कर के) खीर खाए….साल भर निरोगी रहेंगे..(ऐसा नही  किया  तो सदगुरूदेव भगवान जी सपने में आके आँखे दिखाएँगे ! 🙂
***** घर से बाहर निकलने से पहेले  “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टि वर्धनम उर्वारू कमिव बंधनात्मृत्योर   मोक्षीय मामृतात ” ये मंत्र बोले तो अकाल मृत्यु  , एक्सीडेंट से बचेंगे…
)

हरि ॐ हरि ॐ ..ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ  प्रभुजी ॐ ॐ ॐ प्यारे जी ॐ ॐ अच्युताय  गोविन्दाय अनंताय हरि ॐ ॐ माधुर्य देवाय   ॐ ॐ प्यारे जी ॐ ॐ प्रभुजी ॐ ॐ हा हा हा हा  🙂

(किसी ने अखबार पढ़ के सुनाया की , किसी बुरखेवाली महिला ने बापूजी पे झूठा आरोप लगाया था उस महिला को पुलिस ने गिरफ्तार किया है….वो किसी गुनहगार की पत्नी है….उस का नाम सरोज है….हरियाणा  की रहेनेवाली है…उस ने झूठ  बोला है…)

भगवान सब का भला करे….

नेकी का बदला नेकी  है …

ये कैसा है जादू समझ में ना आया
तेरे प्यार ने जीना हम को जीना  सिखाया
नारायण श्रीमन  नारायण श्रीमन नारायण

सभी के लिए प्रसाद तैयार  है ..

आरती हुयी..
सदगुरूदेव जी भगवान  ने आरती का दीपक हाथ में लेकर प्राणायाम कर के सभी साधको से  प्रार्थना  करवाई ..
“इसी जनम में साक्षात्कार हो जाए !”

बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद् के पदाधिकारियों का भाषण हुआ…
नारायण नारायण नारायण नारायण

नारायण नारायण नारायण नारायण ……..आनंद है ? मंगल है?

माखन माखन साधू  खाए छास जगत को  पिलाये..!

…ये तो छास है…. जब छास में इतना दम है तो माखन में कितना  होगा? तो बोलना पड़ेगा… ऐ  हैई! 🙂

मेहमान  को माखन खिलाना चाहिए….. साधू तो उदार होते है …तो भाई माखन माखन  ख़ुद खाते…. ऐसा क्यो?
माखन पचेगा नही इसलिए!
छास  में भी माखन के  कण आते… ऐसा छास पचा लेंगे तो माखन भी खिला देंगे …..
साधो साधो साधो साधो…

सदगुरू भगवान की जय हो!!
(सदगुरूदेव जी भगवान की जयजय कर हो रही है..)

ॐ शान्ति.

हरि ओम !सदगुरूदेव जी भगवान की जय हो!!!!!
गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे……

 

 

Oct 1st  2008; IST : 5 pm  ; Chandigardh satsang_live

 

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Sadgurudev SantShiromani ParamPujya ShriAsaramBapuji ki Amrutwani :-

 

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Bramhi sthiti prapt kar , kary rahe naa shesh l

Moh kabhi naa thag sake, ichcha nahi lavlesh ll

purn guru krupaa mili,  purn guru ka gyaan l

aasumal se ho gaye, saai Asaram  ll

 

purn guru ki krupa mili ….moh kabhi na thug sake…

bhagavan ka darshan huaa,  phir bhi arjun ka dukh nahi gaya to purn guru ke rup me bhagavan ne gyan diya tab arjun ka dukh mita….

 

ramkrushn param hans ke samane maa kali pragat ho jati, un ke  hath ka gajara  kali mata sweekar karati….phir bhi kali mata ne ramkrushn ji ko  totaapuri guru se diksha lene ko kaha….ramkrushn ji  bole, ‘maa tum mujh se baatchit kar ke prasad khati ho …guru karane ki kya aavashyakata hai ?’

 

maa kali boli, “tum mujhe bulaate to aati hu, lekin phir  antardhan hoti to tum jvo ki tyo ho jaate… wohi ke wohi ho jaate….jo tumhare antar me nity hai us  akaal purush  ka , us anant ka gyan paa lo…”

 ‘man tu jyoti swarup , apanaa mul pehchaan’ ..ye  antaryami ke sakshatkar se, guru ki krupa se hoga ….

 

totapuri guru ne ramkrushn ko ramkrushn paramhans bana diya !… narendr ko Ramkrushn paramhans ji ne swami vivekaanand bana diya ….aasumal ne lilaashah ji ki ji sharan li to aasumal se ban gaye Saai Asaram !

purn sidhd hai wo apane aatma !

 

aasoj sud do divas, sanvat bis eikkis l

madhyanh dhaayi baje,mila eis se eis ll

deh sabhi mithya huyi , jagat nissaar l

guru var jagat huaa nissar ll

huaa aatma se tabhi aapana saakshatkar l

param swatantr purush darshaya, jiv gaya aur shiv ko paya l

jaan liya hun shant nashwar, lagu mujhe naa koyi bandhan ll

yah jagat sara hai nashwar, mai hi shwashwat ek anashwar l

did hai do par drushti ek hai, laghu guru me wahi ek hai ll

sarvatr ek kise batalaaye, sarv vyapt kahaa aaye jaaye  l

anant shaktiwala avinashi, ridhdi sidhdi us ki dasi ll

sara hi bramhaand pasaaraa, chale us ki eichcha nusaral

yadi vo sankalp chalaaye, murda bhi jivit ho jaaye ll

hari om hari om hari om hari om hari om hari om

bramhi sthiti prapt kar , kary rahe naa naa shesh l

moh kabhi naa thag sake, eichcha nahi lavlesh ll

purn guru krupa mili, purn guru ka gyan l

aasumal se ho gaye saai Asaram ll

 

jagrut swapni sushupti cheti , bramhanand ka aanand lete…..

 

jagrut aaya chala gaya, swapanaa yaa chala gaya, sushupti aayi chali gayi…  lekin us ko jananewala , dekhane wala chala gaya kya?

 

aaj mai snan kiya  1 baje!… raat ko 10 baje soya ,subah 10 baje utha… manjan kiya 10 baje ……aisa baba hota hai kya? .. aise baba ke chakkar me mat aao..koyi  aur baba khoj le…mai sach bol raha hun.. J

sadgurudev ji bhagavan ki jay ho!

(sabh bhakt gan sadgurudev ji bhagavan ki jayjaylkaar kar rahe hai….)

 

…..to jagrut , swapni ya sushupti kisi bhi avastha me jo bramhaanand ka aanand lete… jagrut aaya gaya , swapana aaya –gaya…sushupti aayi –gayi ….ye gyan jis rab se dikhata , usi me shant..us me samadhi…..

sada samaadhi sant ki ..aatho praher aanand l

akal mataa koyi upajaa, gine indr ko rank ll

 

…. gandharv gaan kare, apsaraa nache tab indr ko aanand aaye ..lekin jis ne aatma ka saakshatkar kiya hai aise mahapurusho ko thakan hoti to nind me nahi to aatma me chale jaate ….. ‘aatm lok’ se baahar aane ki  un ko jarurat nahi…

bhagvan narayan devshayani ekadashi se 4 mahina usi me vishranti paate hai….in 4 mahino me shadi byaah aadi satkarm nahi kiye jate..kyo ki bhagavan so rahe hai.. ‘so’ kaise rahe? sadharan aadami nind karate aisa nahi….. akal purush hum parbramh paramtma me hote….. aisi samadhi hoti sant ki…. bhagvan narayan usi me vishranti paate bhagavan shiv ji usi me samadhi lagaate….

..hum bhi lete lete usi paramtm vishranti me ..samadhi me rahe…usi me lete rahe….

….naam nanaka chhata rahe din raat ..

Subah ke 10 baje tuk hum chhate rahe….. ab jay ram ji i bolana padega! J

 …..aur is paramatm masti kewal santo ke chhatane ke liye nahi…..is me  maai-bhai sabhi chhut sakate hai ..:-)

Ye to paramatm prasad hai….

bhgavan krushn kahete,

 “prasade sarv dukhanam, hani rasyop jaayate..”

 sabhi is prasad ka ras chakh sakate hai…. sare karm bandhan kat jaye…. ‘prasann chetase’ …!

 

paramtama aatma ke dhyan se Oj dete…. ishwar  chitt me 13 nimish bhi chhate to jagat daan karane ka phal hota !

17 nimish paramatm dhyan me chhate rahe to ashwamedh yagy ka punya hota hai ….

 ghutane ko dahe bahe hath ghumaa ke chutaki bajayi ….ye huaa ek nimish !

ye bhagavan shiv ji ne vashisht maharaj ko kaha, “ he muni shardul us ko ashwamedh yagy karane ka phal hota…. (jin santo ne aisi aatm shanti payi hai ) , jin santo ka sansar ka gyan moh tutata hai ..vo sant bhi manushy ka paap taap kaatane ki shakti paate .. dusaro ke  paap taap harate…!”

 

so sahib sada hujure andha janart tako dure l

 

aap samajhate rab door hai ….jo hajura hajur hai !!

 

hai bhi sat, ho se bhi sat…..

 

aap sochate ki  agar 3 janmo me bad milega to aap apane pe abhot  julum  kar rahe ….

 

apane aap ke prati jaisa sochate waisa phal milata….

bhaynashan durmati haran….

bhagavan ka naam bhaynashan karanewala hai , durmati huyi to  bhay denewala bhi hai…..ravan  sadhu banakar sitaji ke kutir me bhiksha mangane gaya…lakshman ji ne mantr padhakatr lakir khinchi thi ..to bahar se koyi andar pravesh kare to  agni pragat hoti….. to ravan sitaji ko bola, ‘mai andar aakar bhiksha  nahi lunga ….tum baahar aao!”…. itane me patta hilata to ravan darata….!

 dushkarm karate to bhagavan  bhay deta hai…

kans  chabar chabar  khana khata to apane hi khana khane ki aawaj se darata ki , “krushn aaye!”….. khali us me aawaj aaya to us ko lagata krushn ayaa …dushkarm karate to antaryami ishwar se apane aap bhay paida ho jata…

wo hajura hajur hai! jaagandi jyot hai !!sabhi me hai!!

 

 jaise aakash me sab aur sab me aakash hai ….. sab me aakash hai…. aisa lohe me bhi aakash hai..lohe me aakash nahi  hota to bhatti me daalane par agni-may kaise ho jata?

 sab chijo me aakash hai….aur  sab chij aakash me hai…aise hi vo akal purush sarveshwar parmeshwar sarv-vyapak hai..sab ke antaryami hai .. hamare param suhurd hai ….(un ke naam ki shakti aparampaar hai..)

 

dhanvantari maharaj bolate ki,  “jab koyi davayi kaam nahi karati tab  “achyutaay,  govindaay,  anantaay” ye naam le..mai saty kaheta hun ..vo antaryami dev aap ki  raksha karega !!”

 

(sadgurudev bhagavan ji ne ye baat satsang me kahi aur kisi ne makarana me  suni to us ko phayada ho gaya..rog mit gaya…)

 

..ye jaruri nahi  hai ki mera satsang  mere bhagat hi sunate honge…. aur log bhi sunate aur un ko bhi phayade hote….

 

to landaon se ayaa ek vyakti bola mai aap ka satsang sunata hu ….achha lagata hai, aisa phayada huaa aisa bata rahe the…. 156 desho me sunate hai ..

 

“Achyutaay, Govindaay, Anantaay” ye bhagavan ka naam lene to  sarv rog ka nash hota hai .. bhagavan Achyutaay  ‘gun – nidhan’ hai… us ka naam lene se gyan milata…. ‘govindaay’ bolane se  sharir ke sab rog nitenge …. ‘anantaay’ bolane se man ke  rog bhi mitenge…mann ke rog hote hai  kaam,  krodh , moh , lobh …ye rog bhi mitenge..

 

‘achyutay , govinadaay anantaay’ naam uchchataam l

(ye naam uchcharan karane se sarv rog mitenge…)

 

anek me jo ekaatm dev chhupa hai …us aatm dev me vishranti paaye….

sote samay bhagavan ka dhyan kar ke sidhe let jaaye… sidhe ‘achyut’ me jana …..nind me bhi bahot aanand milata …bahot phayada hota… asie hi sona… jab mai sota hun to sone se pahele aakhari me  bhi uchchar karata hun aur subah bhi uthate hi us ka hi uchchar….. raat ko upnishado ka dhyan kar ke sota aur subah uthate hi usi ka naam aii haiii….

 

mere bete ki maa ekdam bimar thi… inter com pe bola “aii haii” …to us ne bola ..”eai hai”

 

to maine jara dam maarkar bola, “chandrama ki jagah mere ko arghy dekar vrat karati ..mere ko guru manati , bhagavan manati aur mai  baat kar raha hun to achhe se bolo, “aii haiii..!”

 

vo  meri shishya bhi hai ..to maine iintercom pe bola, “aise pyar se kahe naa aii haii!”

to us ne bola…

…shabaas hai …aur sunaao… “aii haii!” bahot achha lagata hai….!”

 

 aisa bulavaaya aur wo bhi boli….to mai bilkul  sach bata raha hu ki wo bilkul thik ho gayi..jo  thik  se khana pacha nahi sakati thi… chal nahi sakati thi..  ab to aii haii ..!

ab 35 saal ke baad maike  jaa ke aayi….bambayi ghumi ….kaha kaha ghumi…chal phir sakati hai ..ekdam  thikthak!:-)

(Jay ho Sadguruji Bhagavan ki !Jay ho shri Gurudevi maa ki!!)

 

Ye videshiyo ki sikh ko aur hindu ko ladaane ki gandi chaal hai ki bolatae….guru nanak kahete , “ram ravan gaye, tako diya bosaar…. kahe nanak sapane jyu sansar”…..shriram koyi sadharan adami hai kya?jo nanak aisa bolate….

to ye bilkul galat baat hai…to ye pakka jaan lo ki nanak ji ke hruday  ram ke liye napharat nahi thi ….nanak ji ke ek ek dohe padh ke sunaau to dang rahe jayenge ki hindu ke liye kya likha hai…

aisa galat dharana paida karane wale log hindu aur  sikho ko ladaane ki koshish karate …

nanak ji kahete,

sangi sathi koyi nahi de sath l

kahe nanak ek ek raghunath ll

… videshi humare desh me dharmantaran karane ke liye koshishe karate… bharat ko todane ke liye kuchh bhi karane ko taiyar hai..

 

 Bharat ke pas aatmgyani mahapurusho ne  diye utsav hai…. satsang milata ….sujhbujh milati…. isliye  sajish karanewalo ki sajishe viphal ho gayi…

 aatmsakshatkar kya hai?…bhagavan  barmhaji   jis me samadhist rahete bhagavan vishnu 4 mahine jis vishranti paate , bhagavan  shiv ji jis me samaahit rahete us “mai rup” ki ghadiyaa hai “sakshatkar”!

 vashishth maharaj sham ko apene shishyo ko satsag sunaate….bole , hey  ram ji…. ek sandhya ko akash marg se prakash punj dikhayi diya ….bhagavan chandrashekhar maa parvati sahit padhar rahe the..arundhari ke sath ham ne  manoman pranam kiya… asan taiyar kiya ..jab ve aaye to waha bithaya …un ke charan dhoye…. arghy paad se poojan kiya…. bhagavn chandrshekhar ne kushal puchha ,

“hey muni shaardul yaaha ekant me varun vikshep to nahi karate? vruksh phal phul to dete?”

Maine kaha, “aap ke smaran matr se sab  kushal hone lagata hai ….meri eichha hai ki maa parvati arundhati ke sath gyan ki charcha kare aur  mai aap se kuchh sunana chaahataa hun….”

 maine shiv ji ko prashn kiya ki , “vastvik me dev kaun hai jo sab ka hitakari hai..thodi si puja karane se prasann ho jate hai..”

bhagavan chandrshekhar bole,  “swarg ke dev bhi vastvik dev nahi…. tumhare bhitar jo aatmdev hai , wo hi vastvik me dev hai un ki satta se aankhe dekhati….   budhdi usi ki satta se nirnay karati…man me us ki satta se soch ki phurana uthati…usi ki satta se  budhdi  nirany badalati …. aankho ka dekhana badalata…. eis sab ko jo janata hai , phir bhi  jyo ka tyo raheta hai wo hi vastavik dev hai !”

 

usi ko bhagavan kahate, akal purush kahete….. bhagavati aadishakti kahete…. dev ki lila anant hai!!… vastavik dev itane sahaj hai ….un ko putr maan ke pooja karo to bhi vo aane ko taiyyaar hai… vasudev devaki ke yaha aaye …!

 

wo hi sakal antaryami hai….jal me usi ki satta hai thal me usi ki satta hai… maa me vatsaly usi ka hai…. baap me anushasan  usi ka hai… sant me  santatv usi ki satta se chamakata hai.. bhakt ki  bhakti phalati ..mere swami aise mere rab me sari srushti hai…

 

nirbhav jape…. sant krupa se prani chhute

 

bhay ko dene wale wo hi , bhay  nash karane wala bhi wo hi hai … dushkarm karate to bhaybhit bhi karata ..sankat samay us ko pukarane wale ki patwaar sambhalataa hai….

 

isliye aap kabhi apane ko tuchh mat maniye…anath mat maaniye ….dukhi mat maniye…. agar aap apane ko dukhi manenge  to chitt dukhaakaar hokar chaityany se door ho jayega..

 

 

ramayan me bandar ram ji ke liye lade aur  meghnaad kumbhkaran rakshas aadi ravan ke liye lade….ladane ki satta denewal wo hi ka wohi…wo hi  de raha ha….. hathiyar ghumane ke liye ek satta se shakti mil rahi hai….ram ji  ke man me ravan ke liye  raag hai aur ravan ke man me ram ke liye dwesh hai….

chehara wo hi hai ,  shisha alag alag hai…

vidyut ka current wo hi hai , upkaran alag alag hai ..

gyser me pani garam hota aur fridge  thanda hota , bijali ek hi ek hai  aisa akal purush wo hi ka wohi hai…. sajjan ki vakaalat karo to bhi wo hi bolega…. aur  durjan ke liye bhi wo hi bolane ki satta deta hai..

 

 jo isi janam me sakshatkaar karane ko  taiyyar hai, un ke liye vo  sulabh hai….jo  3 janam ke baad ,  1 janam ke baad soch rahe un ke liye  kathin hai….

bhagavan bolate,  agar aap sochate kathin hai to kathin hai….aur jo sochate mai sulabh hun un ke liye mai sulabh hu !

“tasyaham sulabham parth!”

Jo mujhe pana sulabh maanate hai, un ke ke liye mai  sulabh hu…. lekin jaisa manoge aise ho jate….

Jo jis rup me ishwar ko  chahega usi rup me ishwar ko  paa legaa….jo jaisi   bhavana karata us ki bhavana  ke anusar us ka  kalyan karane me koyi kasar nahi chhodate….

 

 

jab mai  anushtan karata narmada kinaare to  mantr ki puri sankhya nahi hoti tab tak  kabhi ratri ke 11 bajate to kabhi 12……aur bhi der ho jati  niyam pura karane me to  sona bhi der se ho jata… jawani thi, 22 saal ki umar thi…to nind  bhi aise aati ki …. jis gupha me jap karata us gupha me raat ko chhuchhundar phuk markar pairo ke talave khaa jata pataa hi nahi chalaa ..dusare din chalataa to us me kankar reti ghus jaati tab pata chalataaa…..kisi sant ne dekha… bole, “arre, ye to  chhuchhundar ne khaya hai,  pataa nahi chalataa!”

 hum ne bola, “pataa nahi ….. anushthan me hun!”

…. shiv mandir me jal chadaate to shri vigrah se phul padata , mala padati  to ye to shagun hai ki bhagavan prasann hai……

To mai bolata, “bhagavan aap prasann hai , lekin kaise milenge ye bataao…. baar baar dhyaan me andar se  aawaj aati ki lilaashah bapuji ke paas jaao ! “

mai bolta , “tum kaun bol rahe ho?”

jis ko tum milana chahate ho , mai wohi bol raha hun..tum lilashah maharaj ke paas jaao..mai tumhe milunga!”

mai bolata, “ye mere mann ki aawaj hai ki  dev ki ye  kaise pata chale?”

to andar se aawaj aati ki , “nahi beta,  mai wo hi bol raha hun… tum lilashah ji maharaj ke paas jaao ….shivji , parvati, ganapati sabhi ke rup me  mai waha milunga…!”

 aisa kayi baar bhav aata tha …. 40 din pure hote hi mai  chal pada .. maa aur us ki bahu aa dhamaki thi mere ek mitr ke sath…..maa ko aur us ki  bahu  mujhe ghar le jana chahate , samjhata to  hallagulla hoga…isliye mitr se  chupchap ahmdabaad ke 3 ticket aur bambai ka ek ticket mangavaya….miyaagaanv junction pe dono train aamane  samane khadi hoti….to baatchit karunga aur train chal padegi to mai bhag ke bambai ke train me chala jaunga…. to miyaaganv junction me aisa karenge….  maa aur maa ki bahu ki ticket mitr ke paas thi… samane bambai jaanewali gadi khadi thi…us ka signal huaa to “mai abhi aaya” aisa  kar ke bhaga….. “kya huaa?” …mai  gadi me baithaa…. maa chillaayi…. phir kya kya huaa….. “pakado pakado!” “kya leke bhaga?”..maa boli kuchh leke nahi bhaga..mera beta tha…..chalu gadi me hum to baith gaye….guruji se milan eki andar se prerana ho rahi thi….shivji baar baar bolate , “mai wo hi milunga!”….  maa rudan karengi..maa ko  samjhaau to maa ki bahu ke dil par kya gujregi…..hamare hruday me kaisi shakti diya….  kitana meherban huaa hoga… usi ka phal hai ye!

….raat bhar train chali… dusare din subah station pe utare …ganeshpuri gaye…waha se vajreshwari gaye…. kisi seth ka makan tha…guruji ke liye tha.. subah savaa 9 baje honge….guru ji ghumane nikale the…ham charano me gir pade….

Guru ji bole, “kya huaa?wapas kyo aaya?”

Wani se to kuchh na nikalaa…..aankho se aansu nikal pade….

Guruji bole, “achha…. bhagavn sab thik karenge…”

 pani garam huaa to uphalanaa hi hai…. ghar me bijali ka sara saman phit ho gaya aur power house se bijali bhi aa gayi to fuse ko dabaanaa aur  switch on karana hai…..

 guru ji bole, “bhagavan sab thik karenge…. aasan niyam dhyan kar..aaram kar…”

to ham nahaye, aasan niyam dhyan kiye… aaram kar rahe the ki karib 2 baje honge…

guru ji ka  ek sewak tha wo aaya ..bola, “sai ne bulaya…”

 sai baithe the..mere ko ishara kiya ki baith…. panchlakshi upnishad ka 7 vaa adhyay chal raha tha….

“dhyan se sun…”(saai ne ishara kiya)

Panchlakshi upnishad ka gyan to high level ka hota hai… sewak padh raha tha…

“dhyan se sun…”  guruji  ne  ishara kiya…

 mai sun raha tha…guruji baithe the ..ghatana aisi ghati…. aise to kayi baar dhyan me baithate to  aanand hota…dhyan me aanand aata …..lekin ye  aur kuchh vishesh tha…. ab waha shabd nahi mere paas ……phir jo bhi huaa na …shabd se baahar nikal gaye……

 

gaheri nind me bola jata hai kya?

Koyi sawal kare ki , “gaheri nind me ho?” to  aap, “ haa , mai  thik se gaheri nind me soya hun…”  ye ho sakata hai kya?

 

Aise   sakshatkaar hua to kya huaa  aap is vishay me bol nahi sakate…. is ke eird gird ke bol sakate !!

Aaj  wo hi sakshatkar din hai….

Sewak padhate..guruji  vyakhya karate…. mai dhyan dekar sun raha tha…. mere nasamajhi  ka pardaa door huaa… adhaayi din tuk us me rahe….guruji ki krupa se hosh sambhale…. aaj is ghatana ko 46 saal ho gaye….

 

Kisi ne puchha , “Bramhgyani ki pahechan kya?”

.. maine kaha , sachhe sharabi ka kya pahechan hai? Jo dusare ko sharabi bana de….aise  sachche bramhgyani ki ye pahechan hai ki sant ke sang satsang ke masti me aa jaye aii haiiiii  !..

 

wo chaahate sab jholi bhar le…nij aatma ka darshan kar le l

ek sau aanth  jo path karenge ,  un ke sare kaaj sarenge ll

 

narayan narayan narayan narayan

rub ka gyan jin ko mila hai, wo din bada hai…. janam din, shadi ka  din  to kayiyo ka hota…aatm – sakshatkar divas kisi  kisi ka huaa hoga…..jinaka aatm-sakshatkar huaa un ko eichha hi nahi hoti ki sakshatkar din manaye aisi stiti ho jati hai… ..

 

Aap mujhe chandigadh me sun rahe hai….desh videsh me kayi jagah sun rahe delhi, amdaabaad , banaaras, bambai,  nagpur,  nashik, aurangabad  , aagra,  bhavnagar,  jaypur ulhasnagar,  nadned , vardha,   raipur, indore ,  kota , bhopal , chhattisdgadh,  baroda,  godharaa, haidrabad, balaghat aur bhi kayi jagah aur videsho me bhi  kayi jagah me sun rahe….singapur, keniya canada, itali , hongkong , amerika , dubai aur europe me kayi jagah log sun rah e hai…

 Om namo bhagavte vasudevay…

 

(param dayaloo krupasindhu Sadgurudev ji bhagavn ne sabhi ko punasch yaad dilaya ki

********** 10 Oct se 14 Oct 2008 tak(dashera se shard poonam tak) roj chandrama 10/15 minutes titiki laga ke dekhe….prasannata badhegi…aankho ki roshani badhegi…swabhav me chidchida pan nahi rahega…pitt dosh se aaram milega..

**********sharad poonam koi raat ko 200gram chawal aur 1 liter dudh aisi matra me khir banaye, khana nahi banaye…khir me charoli, kishmish , badam kaju kuchh bhi nahi daale…aisi khir bana ke raat ko 9 baje se 12 baje tak chandani me rakhe….aur 12 baje (sadguru dev ji bhagavan ko mansik naivaidy arpan kar ke) khir khaaye….saal bhar nirogi rahenge..(aisa nah ikiya to sadgurudev bhagavan ji sapane me aake aankhe dikhaynge J 

***** ghar se bahar nikalane se pahele  “om tryambak yajamahe sugandhim pushti vardhanam urvaru kamiv bandhanat mrutyor mokshiy mamrataat” ye mantr bole to akal mrutu , accident se bachenge…

)

 

hari om hari om ..om om om om om om om o prabhuji om om om pyare ji om om achutaay govindaaay anantaay hari om om madhury om om pyare ji om om prabhuji om om ha ha ha ha J

 

(kisi ne akhabaar padh ke sunaya ki , kisi burakhewali mahila ne Bapuji pe juthe  aarop lagaya tha us mahila ko pulice ne giraftar kiya hai….wo kisi gunahgaar ki patni hai….us ka naam saroj hai….hariyan ki rahenewali hai…us ne jhut bola hai…)

 

bhagavan sab ka bhala kare….

 

neki ka badala neki  hai …

 

ye kaisa hai jaadoo samajh me naa aaya

tere pyar ne jina hum ko jeena  sikhaya

narayan shrima narayan shriman narayan

 

 

sabhi ke liye prasad taiyyar  hai ..

 

aarati huyi..

sadgurudevji  bhagavan  ne aarati ka deepak hath me lekar pranayam kar ke sabhi sadhako se  prathana karaayi..

“eisi janam me sakshatkar ho jaaye !”

 

Bajarang dal aur vishw hindu parishad ke padaadhikariyo ka bhashan huaa…

 narayan narayan narayan narayan

 

narayan narayan narayan narayan aanand hai ? mangal hai?

 

 makhan makhan sadhu  khaye chhas jagat ko  pilaye..!

 

…ye to chhas hai…. jab chhas me itanaa dam hai to makhan me kitana  hoga? To bolana padega… aii haii ! J

 

Mehamaa n ko makhan khilana chahiye….. sadhu to udaar hote hai …to bhai makhan makhan  khud khate…. aisa kyo?

 makhan pachega nahi isliye!

 chhas  me bhi maakhan ke  kan aate… aisa chhas pachaa lenge to maakhan bhi khila denge …..

sadho sadho sadho sadho…

 

sadguru bhagavan ki jay ho!!

(sadgurudev ji bhagavan ki jayjay kar ho rahi hai..)

 

 

Om shanti.

 

Hari Om !Sadgurudev ji bhagavan ki Jay ho!!!!!

Galatiyo ke liye prabhuji kshama kare……

 

 

 

 

 

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4 Comments on “Aatm Sakshatkar Din”

  1. ekantsatsang Says:

    sadho sadho

  2. Hariom Says:

    Wonderful satsang, It is a really a great seva, it is just like listening to the satsang directly.

    Jai Gurudev..

  3. Vinai Srivastava Says:

    sadho sadho sadho…

    Gurudev, kripa kar do hum par..
    hume apni sharan me rahne do…
    shareer se dur rahte hue bhi..
    apni chhavi nayano me basane do…

    narayan narayan

  4. anju Says:

    narayana hari,

    Ram kripa bin sulbh na sohi.


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