स्थान, तिथि, समय और दर्शन की विशेषता और महात्म्य


बम्बई का सेठ कही सत्संग सुनने गया…सत्संग सुनने जाते आते चप्पल टूट गया ….मोची से चप्पल सिला रहा है …

मोची बोला, ‘सेठ तुम हमारे गाँव के नहीं लगते… दुसरे जगह से आये हो?’
सेठ बोले, ‘हां.. मैं  बम्बई से आया हूँ… वहाँ  तो दूध भी बासी, पानी भी बासी और हवा भी समुद्री हवाएं  मिलती..’

अभी अभी जो राजस्थान से गए वे इतना स्वास्थ्य नहीं खोएंगे,ठीक रहेंगे..लेकिन 1-2 जनरेशन  गए तो स्वास्थ्य जबाब दे देगा, आने वाली संतान भी वैसे होगी…. ज्यादा समय उधर रहे तो रुपिया तो दिखेगा लेकिन जनरेशन  तो गया…
जो राजस्थानी साल में 1-2 महीने राजस्थान आते, अपना स्वास्थ्य ठीक करते, वो समझदार है..वो राजस्थानी मुर्ख है जो यहाँ आते नहीं …समुद्र तट-वर्ती जमीन  4 थे  क्लास की  है ..उस के ठीक ठाक मध्यवर्ती जमीन  है..जहां  नदी ,  पहाड़,  झरने हो ऐसा जंगल का जमीन  स्वास्थ्य के लिए सब से अच्छा है ..
ऐसी जगह में एक घन स्केअर  मीटर में 5 करोड़ ऋण आयन होते है..जो जीवनी शक्ति बढाते है..देहात के खेत खली है वहाँ  5 लाख अर्थात सौ वां हिस्सा  धन आयन हो जाते… कसबे तहेसिल में 1 लाख से 75 हजार तक …बड़ी बस्ती  में 50 हजार तक हो जाते…
5 करोड़ कहाँ  और 50 हजार कहाँ  है!
शहेरो में बड़ी  बस्तियों में रहेनेवालों के पास  फैसिलिटी ज्यादा दिखे लेकिन रोग प्रतिकारक शक्ति नहीं होती..मनो बल इतना नहीं होता..

उस में भी धरती में ऐसी जगह है – जहाँ  कर्क रेखा जाती है…वहाँ  शिव जी का मंदिर बना उज्जैन में… कर्क रेखा पर.. तो महा काल के नाम से प्रसिद्ध हुआ …लोग आते-जाते तो उन को सुकून मिलता है ..
हरिद्वार का महात्म्य है.. कुछ भूमि के ऐसे प्रभावशाली तन-मात्राए होती है, जहाँ  जाने से लोगो को शारीरिक मानसिक लाभ होते है..

3 दोष होते है शरीर में.. कफ,वायु और पित्त दोष …. ..सूरत और बम्बई में वायु और कफ़ का प्रधानता है..
सूरत के डॉक्टर है एक .. अच्छी  प्रैक्टिस  है …उन की पत्नी आई हुयी है यहाँ.. उन की बेटी डॉक्टर है, बेटा डॉक्टर है.. दुसरे भी बहोत डॉक्टर है जो मदद में है…इन को चलने में तकलीफ है…हम ने कहा- सुमेरपुर आ जाना… अभी 2 दिन में ठीक हो गयी, बिना दवाई की तबियत खिल गयी..!

7 जगह ऐसी स्थान की विशेषता है – अयोध्या, माया (हरिद्वार), मथुरा, काशी, कांची, अवन्तिका(उज्जैन), पूरी द्वारका ये 7 स्थान मुक्ति प्रदायक है.

जीव को जो बंधन करता है- राग, द्वेष, मोह वो उन जगह पर पृथ्वी में विशेष तन-मात्राए होने से राग द्वेष मोह छोड़ने में सफल होते है …घर में गंगा का पानी लाओ तो भी चलता लेकिन हर की पौड़ी पर गंगा जी में जा के स्नान करेंगे तो विशेष फायदा होता है.

हर की पौड़ी का महत्त्व है की वहाँ  राजा मान्धाता ने ध्यान भजन किया और ब्रम्हाजी से वरदान माँगा की यहाँ जो स्नान करेगा उस को तुरंत आनंद और आल्हाद मिले..गंगाजी तो कानपुर से भी जाती… ऋषिकेश  के ऊपर से भी आती..लेकिन वहा के भी सभी लोग हरिद्वार आ के नहाते…ये स्थान का महत्त्व- विशेषता होती है… ऐसी मन्त्र की विशेषता होती… समय की विशेषता होती..
जैसे अमावस्या पोर्णिमा है तो चन्द्रमा के किरणों का प्रभाव ऐसा पड़ता की समुद्र में ज्वार-  भाटा  (भरती-ओहोट) ज्यादा आती है..ऐसे  हमारे शरीर के सप्त धातु, रक्त, मन, बुध्दी में भी ऐसा प्रभाव होता इसलिए अमावस्या पूनम के दिनों में बुढ्ढे  व्यक्ति की मृत्यु होने की संख्या अधिक होती ऐसे अस्पताल वाले भी कहेते…पागलो को दौरे ज्यादा आते…

तो इन दिनों में जीवनी शक्ति कमजोर होती है इसलिए एकादशी पूनम का उपवास करते तो जीवनी शक्ति पाचन में ना लगे ध्यान भजन में लगे तो ज्यादा लाभ होता है …
इन्ही दिनों में डायरिया  उलटिया जुलाब दस्त की शिकायत होती है …पाचन कमजोर होने से..इन्ही दिनों में ऋशियों ने कहा की एक टाइम भोजन करे एक टाइम उपवास करे..
भगवान नारायण देव शयनी एकादशी से हरी प्रबोधिनी एकादशी तक चातुर्मास में क्षीर सागर में ध्यानमग्न  रहेते …इन दिनों में सकाम कर्म वर्जित है ..चातुर्मास में किसान अन्न धन-धान्य  से अपना खेत खली भरता है..ऐसे मनुष्य को चातुर्मास में पुण्य , व्रत, जप, दान से अपनी अध्यात्मिक तिजोरी भरनी चाहिए..

9 अगस्त 2010 को सोमवती अमावस्या को विशेष तिथि है…आने वाले रविवार को 8 तारीख को सोते समय संकल्प कर लो की कल का दिन मेरा ध्यान भजन जप में बीते…अपनी अध्यात्मिक तिजोरी भरने का है..
सोमवती अमावस्या के दिन व्रत जप ध्यान करेंगे, ग्रन्थ पढेंगे तो उस का फल लाख गुना हो जाएगा.

तो स्थान, तिथि और समय की विशेषता होती है..

ऐसे भजन जो इधर होगा वो बम्बई में नहीं होगा , यहाँ स्थान की विशेषता है..(सुमेरपुर शिव गंज से कर्क रेखा जाती है..इसलिए उस स्थान का महत्त्व है)

ऐसी  दर्शन की भी विशेषता है…आप किस का दर्शन करते हो? लोभी का करते, कामी का करते हो , मोही  का करते हो, अहंकारी का करते हो की भक्त ह्रदय का करते हो…इस का भी असर मन बुध्दी पर पड़ता है…

उदयपुर के राणा  चतुरसिंह थे…वे राजा  थे, उन्ही के राज्य में सत्संग चलता था…. लेकिन वे पीछे आकर चुप के से बैठ जाते …बड़े भक्त ह्रदय थे… संत का ह्रदय ढल पडा की राजा  हो कर भी इतना भक्त है… राणा  चतुर सिंह ने आत्म परमात्मा का साक्षात्कार कर लिया!

तो संत के दर्शन का सत्संग का फायदा लौकिक भी होता है, अधि दैविक और अध्यात्मिक भी होता है.. जैसे नोकरी मिल गयी, तबियत ठीक हो गयी, बेटा नहीं होता तो गया आदि लौकिक लाभ तो होते ही है..
लेकिन अध्यात्मिक लाभ भी होते है..सुख  दुःख  में सम रहेने का बल मिल जाता है…
तीसरा लाभ है अधिदैविक लाभ …मनुष्य का स्वभाव सुधर जाए ..जिस का स्वभाव बिगड़ा है उस के परिवार वाले भी उस को  नहीं चाहते… बढ़िया स्वभाव वाले को सभी चाहते ..स्वभाव बढ़िया करने के लिए परमात्मा का चिंतन करे..परमात्मा सब के हितेषी है, दिव्य है तो आप का भी दिव्य स्वभाव हो जाएगा… दिव्यता से एकात्मता हो जायेगी..
महान आत्मा कौन है जिन की देव के साथ एकात्मता हो गयी ….दैविक प्रकृति का आश्रय लेना ये बहोत सुन्दर बात है…

लोग मकान दूकान कपडे तो बढ़िया करते लेकिन स्वभाव बढ़िया नहीं करते..तो मरने के बाद नीची योनियों में भटकते… मुसोलीन अभी भी मरने के बाद पिसाच हो के भटक रहा है..

ऐसी ही मथुरा की महारानी खचरी बनी..जम्भेश्वर महाराज तालाब खुदवा रहे तो मिटटी उठाने की सेवा कर के करम कटा..

  • स्वभाव सुधारने का प्रयत्न करे
  • स्थान विशेषता का फायदा ले
  • तिथि उचित का फायदा ले
  • चौथा फायदा ले की संसार का कोई चीज ले नहीं जायेंगे तो इस का सदुपयोग करो इन चीजो में मोह करता है उस को बड़ा दुःख देती है ये चीजे… जो इन का उपयोग करता है उन को आत्म संतोष होता.. जो इस को भगवान के काम में लगाते तो भगवान से कई गुना मिलता है… एक साधक ने पैसा लोकार्पण कर दिया तो सत्संग हॉल बना और अब उस को संभालने वाले लोग होंगे, समिति वाले होंगे..


सेठ ने मोची से चप्पल सिलाई ..

बम्बई में ताजा दूध नहीं, ताजा  पानी नहीं….यहाँ संत के दर्शन भी हुए, सत्संग भी मिला.. मोची के आँखों से पानी आने लगा की आप बम्बई से आकर सत्संग सुन रहे…. मेरी ऐसी गरीबी की दिन भर मजूरी ना करी भूक से मरू… मैं  तो एक दिन उपवास कर लू सत्संग सुनने के लिए लेकिन बूढी माँ को कैसे भूका रखु?..
चप्पल सिलने के 50 पैसे हो रहे थे…सेठ ने 50 पैसा की जगह 10 की नोट पकड़ा दी… मोची बोला,   ‘मैं  नहीं लूंगा..10 पैसा भी नहीं लूंगा… संत का दर्शन नहीं कर सकता तो जो संत के दर्शन करते उन की सेवा करने से कुछ तो करम कटेंगे मेरे..’

सेठ बोला, ‘मेरी मुलजी  जेठा मार्केट में दूकान है… कई लोग मेरे पास काम करते… मैं  गरीब से क्यों मोफत में चप्पल सिलाऊ..?’

मोची पैसे ना ले..भीड़ इकठठी   हो गयी ….मोची ने पक्का इरादा किया की मैं  ये सेवा का मौक़ा नहीं छोडूंगा …आखिर सेठ को हार माननी पड़ी..अधि-दैविक जगत में सफल हो गया भारत का मोची!!

कई अभागो के पास अधि-भौतिक तो खूब होता है, लेकिन आधी दैविक की कमाई नहीं करते तो ऐसा धन आधी-भौतिक में शराब कबाब इन्कम टैक्स में इधर उधर में जाएगा , बड़ा दुःख देगा..

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STAAN , TITHI, SAMAY AUR DARSHAN KA MAHAATMYA

bambai ka seth kahi satsang sunane gayaa…satsang sunane jate aate chappal toot gayaa ….mochi se chappal silaa rahaa hai …

mochi bola, ‘seth tum hamaare gaanv ke nahi lagate… dusare jagah se aaye ho?’
seth bole, ‘haa.. mai bambai se aayaa hun… wahaa to dudh bhi baasi, pani bhi baasi aur havaa bhi samudri havaaye milati..’

abhi abhi jo raajsthan se gaye ve itanaa swasthy nahi khoyenge,thik rahenge..lekin 1-2 generatoin gaye to swasthy jabaab de degaa, aane wali santaan bhi waise hogi…. jyada samay udhar rahe to rupiyaa to dikhegaa lekin generation to gayaa…
jo raajasthani saal men 1-2 mahine raajasthaan aate, apanaa swasthy thik karate, vo samajh daar hai..vo raajasthaani murkh hai jo yahaa aate nahi …samudr tat-varti jamin 4 th claass hai ..us ke thik thaak madhyavarti jamin hai..jaha naidya pahaad jharane ho aisa jangle ka jamin swasthy ke liye sab se achhaa..
aisi jagah me ek ghan sqaure miter me 5 karod rin aayan hote hai..jo jeevani shakti badhaate hai..dehaat ke khet khali hai wahaa 5 lakh arthaat sauvva hisaa dhan aayan ho jaate… kasabe tahesil me 1 laakh se 75 hajaar tak …badi basati me 50 hajar tak ho jaate…
5 karod kahaa aur 50 hajaar kahaa hai!
shahero me badi abstiyon me rahenewalon ke paas facility jyada dikhe lekin rog pratikaarak shakti nahi hoti..mano bal itana nahi hota..

us me bhi dharati me aisi jagah hai jahaa kark rekha jaati hai…wahaa shiv ji kaa mandir banaa ujjain me… kark rekha par.. to mahaa kaal ke naam se prasidh huaa …log aate-jaate to un ko sukun milataa hai ..
haridwar ka mahaatmya hai.. kuchh bhumi ke aise prabhaavshaali tan-maatraye hoti hai, jahaa jaane se logo ko shaaririk maansik laabh hote hai..

3 dosh hote hai sharir me.. kaf,vayu aur pitt dosh aur jagah 2 dosh hote vayu aur kuf ka pradhanata surat aur bambayi me..

surat ke doctor hai achhi practice hai …un ki patni aayi huyi hai yahaa.. un ki beti doctor hai, betaa doctor hai.. dusare bhi bahot doctor hai jo madad me hai…in ko chalane me taklif hai…ham ne kahaa- sumerpur aa jana… abhi 2 din me thik ho gayi, binaa davaayi ki tabiyat khil gayi..!

7 jagah aisi sthaan ki visheshataa hai – ayodhyaa, maya (haridwar), mathuraa, kaashi, kaanchi, avantikaa(ujjain), puri dwarakaa ye 7 sthan mukti pradaayak hai.

jeev ko jo bandhan karataa hai- raag, dwesh, moh vo un jagah par pruthvi me vishesh tan-maatraaye hone se raag dwesh moh chhodane me saphal hote hai …ghar me ganga ka paani laao to bhi chalataa lekin har ki paudi par gangaa ji me jaa ke snaan karenge to phayadaa hotaa hai.

har ki paudi ka mahatv hai ki wahaa raajaa maandhaataa ne dhyan bhajan kiyaa aur bramhaaji se varadaan maangaa ki yahaa jo snaan karegaa us ko turant aanand aur aalhaad mile..gangaaji to kaanpur se bhi jaati… hrurikesh ke upar se bhi aati..lekin wahaa ke bhi sabhi log haridwaar aa ke nahaate…ye sthan ka mahatv- visheshataa hoti hai… aisi mantr ki visheshataa hoti… samay ki visheshataa hoti..
jaise amaavasyaa pornima hai to chandramaa ke  kirano ka prabhaav aisa padata ki samudra me jwaar-bhaataa(bharati-ohot) jyaadaa aati hai hamaare sharir ke sapt dhaatu, rakt, man, budhdi me bhi aisaa prabhaav hota isliye amaavasyaa poonam ke dino me budhde vyakti ki mrutyu hone ki sankhyaa adhik hoti aise aspataal wale bhi kahete…paagalo ko daure jyada aate…

to in dino me jeevani shakti kamjor hoti hai isliye ekaadashi poonam kaa upawas karate to jeevani shakti paachan me naa lage dhyan bhajan me lage to jyada labh hotaa hai …
inhi dino me diaeriyaa ulatiyaa julaab dast ki shikaayat hoti hai …paachan kamajor hone se..inhi dino me rushiyon ne kahaa ki ek time bhojan kare ek time upwaas kare..
bhagavan narayan dev shayani ekadashi se hari prabodhini ekadashi tak chaaturmaas  me kshir saagar me dhyaan mang rahete …in dinon men sakaam karm varjit hai ..chaturmaas men kisaan ann dhan-dhany se apanaa khet khali bharataa hai..aise manushy ko  chaturmaas men puny, vrat, jap,  daan se apani adhyaatmik tijori bharani chaahiye..

9 august 2010 ko somavati amaavasyaa ko vishesh tithi hai…aane wale ravivaar ko 8 taarikh ko sote samay sankalp kar lo ki kal ka din mera dhyan bhajan jap me beete…apani adhyaatmik tijori bharane kaa hai..
somavati amaavasyaa ke din vrat jap dhyan karenge, granth padhenge  to us kaa phal laakh gunaa ho jaayegaa.

to sthan, tithi  aur samay ki visheshataa hoti hai..

aise bhajan jo idhar hoga vo bambayi me nahi hogaa , yahaa sthan ki visheshataa hai..(Sumerpur shiv ganj se kark rekhaa jaati hai..isliye us sthan ka mahatv hai)

aisaa darshan ki bhi visheshataa hai…aap kis kaa darshan karate ho? lobhi ka karate, kaami, mohi ka karate ho,  ahankaari ka karate ho ki bhakt hruday ka karate ho…is kaa bhi asar man budhdi par padataa hai…

udaypur ke rana chatursinh the…ve raja the, unhi ke rajy me satsang chalataa thaa…. lekin ve pichhe aakar chup ke se baith jaate …bade bhakt hruday the… sant ka hruday dhal padaa ki raja ho kar bhi itanaa bhakt hai… rana chatur sinh  ne aatm paramaatmaa kaa saakshaatkaar kar liyaa!

to sant ke darshan ka satsang ka phaaydaa laukik bhi hota hai, adhi daivik aur adhyaatmik bhi hotaa hai.. jaise nokari mil gayi, tabiyat thik ho gayi, beta nahi hota to gayaa aadi laukik laabh to hote hi hai..

lekin adhyaatmik laabh bhi hote hai..sukh udkh me sam rahene ka bal mil jata hai…
tisara labh hai adhi daivik labh manushy ka swabhav sudhar jaaye ..jis ka swabhav bigada hai us ke pariwar wale bhi us k nahi chaahate… badhiyaa swabhaav wale ko sabhi chaahate ..swabhaav badhiyaa karane ke liye paramaatmaa ka chintan kare..paramaatma sab ke hiteshi hai, divya  hai to aap ka bhi divya swabhav ho jaayegaa…  divyata se ekaatmataa ho jaayegi..
mahaan aatmaa kaun hai jin ki dev ke sath ekaatmataa ho gayi ….daivik prakruti ka aashray lenaa ye bahot sundar baat hai…

log makaan dukaan kapade to badhiya karate lekin swabhaav badhiyaa nahi karate..to marane ke baad nichi yoniyon me bhatakate… musolin abhi bhi marane ke baad pisach ho ke bhatak rahaa hai..

aisi hi mathuraa ki mahaaraani khachari bani..jambheshwar maharaj taalaab khudawaa rahe to mitti uthaane ki sewa kar ke karam kata..

  • swabhav sudharane ka prayatn kare
  • sthan visheshataa ka phayada le
  • tithi uchit ka phayada le
  • chautha phayda le ki sansaar ka koyi chij le nahi jaayenge to is ka sadupayog karo in chijo me moh karataa hai us ko badaa dukh deti hai ye chije… jo in ka upayog kartaa hai un ko aatm santosh hotaa.. jo is ko bhagavaan ke kaam me lagaate to bhagavaan se kayi gunaa milata hai… ek saadhak ne paisaa lokaarpan kar diyaa to satsang hall banaa aur ab us ko sambhaalane wale log honge, samiti wale honge..


seth ne mochi se chappal silaayi ..

bambayi me taajaa dudh nahi, taja paani nahi….yahaa sant ke darshan bhi huye, satsang bhi milaa.. mochi ke aankho se pani aane lagaa ki aap bambayi se aakar satsang sun rahe…. meri aisi garibi ki din bhar majuri naa kari  bhuk se maru…  mai to ek din upwaas kar lu satsang sunane ke liye lekin budhi maa ko kaise bhukaa rakhu?..
chappal silane ke 50 paise ho rahe the…seth ne 50 paisa ki jagah 10 ki note pakadaa di… mochi bola, mai nahi lungaa..10 paisaa bhi nahi lungaa… sant ka darshan nahi kar sakataa to jo sant ke darshan karate un ki sewaa karane se kuchh to karam katenge mere..

seth bolaa, ‘meri mulaji jethaa market  me dukaan hai… kayi log mere paas kaam karate… mai garib se kyu mophat me chappal silaau..?’

mochi paise naa le..bhid ikkaththi ho gayi ….mochi ne pakkaa iraadaa kiyaa ki mai ye sewaa ka maukaa nahi chhodungaa…aakhir seth ko haar maanani padi..adhi-daiavik jagat me saphal ho gayaa bhaarat ka mochi!!

kayi abhaago ke paas adhi-bhautik to khub hotaa hai, lekin aadhi daivik ki kamaayi nahi karate to aisaa dhan aadhi-bhautik me sharab kabaab income tax me idhar udhar me jaayegaa , badaa dukh degaa..

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One Comment on “स्थान, तिथि, समय और दर्शन की विशेषता और महात्म्य”

  1. Aadi Says:

    Totally agree with your satsang,,
    thanx


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