रामराज्य में हँसी पर बंदिश Ban On Laugh in RaamRaajya!

देल्ही पूनम सत्संग अमृत;

10 दिसंबर 2011  ( सुबह का सत्र)

 

हरि हरि बोल!

भगवान राम ने बैन लगा दी थी …अयोध्या के पुलिस  के नाक में दम कर  दिया था इस बैन ने की जो भी हँसे तो तुरंत एफ़आरआई दर्ज कर दो…कोई भी हसता हुआ  दिखे तो उस पर एफ़आरआई कर दो..पुलिस के नाक में दम कर दी..सब पर ये  क़ानून लागू था. आईजी,  डीआईजी , मंत्री , महा मंत्री कोई भी हो..हसेगा तो  तुरंत एफ़आरआई दर्ज !

क्यों की राम रावण का युध्द हुआ था तो रावण को शिव जी का वरदान  था..रावण ने वरदान माँगा था की मेरा सीर कटे , हाथ कटे  तो फिर  से लग जाए..शिव जी ने “तथास्तु” बोला था…तो जब राम जी बाण मारते तो रावण के सीर कटे, हाथ कटे…लेकिन कटे हुए सीर आकाश में जाते..हसते हाः  हाः हाः… और फिर से नए सीर नए हाथ लग जाते..राम जी फिर  बाण से रावण के सीर काटते…लेकिन फिर वो कटे हुए  सीर आकाश में जा कर ज़ोर ज़ोर से हसते ..राम जी की मस्करी  करते…हाः हाः हाः कर के हसते….

अयोध्या में राज सिंहासन पर राम जी आते ही उत्सव मनाया..खुशी खुशी में कोई हसता तो राम जी को रावण के कटे सीरों की याद दिलाता…तो राम राज्य आते ही राम जी ने पहेला क़ानून पारित कर दिया की अयोध्या में हँसी पर बंदिश लगाई जाती  है!..इस का कोई भी उल्लंघन करेगा वो चाहे मंत्री हो, महा मंत्री हो ..चाहे लखन हो,चाहे  राम खुद हो (राम जी अपने को राम बोलते) उन पर  वो ही क़ानून लगेगा जो प्रजा पर लगेगा…

हँसी पर बैन लगा दी..

1 दिन गुजरा…  5 -25 दिन बीते….  कुछ महीने की कतारे गुज़री…लेकिन हँसी पर बैन  लगाई तो प्रजा उदास रहेने लगी..अनुशासन तगड़ा था…उन दिनों ऐसे देस  परदेस में पैसे जमा करनेवाले मंत्री तो थे नही राम राज्य में..फिर भी लोग उदास रहेने लगे..परिणाम बहोत  विचित्र आया…लोगो की हँसी चली गयी तो लोग मायूस रहेने लगे..अस्वस्थ रहेने लगे..तो लोग अपने ईष्ट देव को पूजने लगे..उस समय प्रजा तो राम जी को  भगवान राम नहीं ; राजा राम मानते थे..वर्तमान में भगवान आए तो उस समय लोग उन को 

इतना नही मानते जितना जाने के बाद मानते….

शिर्डी वाले साई बाबा भिक्षा माँगने जाते तो लोग हुड दूत करते…दिवाली का दिया जलाने के लिए ज़रा सा तेल भी नही देते..और अभी उन के लिए 10 करोड़ का सिंहासन बनता है !

हम भी जब साधना करते थे तब कहीं भूक लगी तो अहंकार मिटाने के  लिए सोचा की अब भिक्षा माँगेंगे…भिक्षा माँगने गये तो माई ने कहा, “शरम नही आती..इतना लाल टमाटर जैसा जवान भिक्षा माँगता है!”

तब हम साडे 22 साल के थे..परसनालिटी थी! अभी भी है! 🙂 तो तभी  कैसे होगी?  🙂   ..तो माई ने सुना दिया की , “पहेली रोटी पर खड़ा हो गयाजा  आगे  जा !…तो फिर मेरे मन को बोला की दुख होता है तो अहम को होता  है, शरीर को तो पता नही और आत्मा को  दुख सुख होता नही..अभी अहम  है..तू अहम छोड़ेगा तभी ईश्वर मिलेगा..मन को सिखाने के लिए भिक्षा मांगी..वरना हमारे पिता तो नगर सेठ थे..

तो महाराज राम जी ने आदेश दे दिया की इस क़ानून का पालन हो…तो लोग देवी देवताओं को, संतों को प्रार्थना करने लगे…आख़िर  बात पहुँची  देवताओ के पास ..और देवताओं के शिरोमणि  ब्रम्‍हा जी तक बात पहुँच  गयी..

ब्रम्हाज़ी ने देखा की भगवान राम तो मेरे उदगम स्थान है..अब मैं कैसे चैलेंज  करूँ?..थानेदार की बात हो तो एसएसपी चैलेंज  कर देगा…

लेकिन सीएम का ऑर्डर आया तो कैसे चैलेंज  करेगा…

ब्रम्‍हा जी ने देखा की भगवान का क़ानून है क्या करे? ..ब्रम्‍हा जी को एक  युक्ति सूझी..

3 प्रकार की दुनिया होती..ये जो दुनिया दिखती उस को आधिभौतिक जगत बोलते..लेकिन ये आँखो से या हाथ पैर से संचालित नही होती..अंदर के आधिदैविक  सत्ता से संचालित होती..जैसे कार दिखती लेकिन पहिए अपनी सत्ता से नही घूमते, हॉर्न अपनी सत्ता से नही बजता…अंदर की  मशीनरी से संचालित होता है..तो उस को आधिदैविक  सत्ता बोलते.. आधिभौतिक पर जिस का प्रभाव चलता है उस को आधिदैविक  सत्ता बोलते…व्यक्ति व्यक्ति में आधिदैविक  सत्ता है और समष्टी में भी आधिदैविक सत्ता है…व्यक्ति व्यक्ति का आधिभौतिक शरीर है..समष्टी  में  भी आधिभौतिक है पृथ्वी,जल, तेज, वायु, आकाश आदि सब आधिभौतिक है…तो जो इंद्रियों से दिख जाए, उस को आधिभौतिक कहेते है..लेकिन इंद्रियों से  ना दिखे फिर भी आधिभौतिक पर जिस की सत्ता  है उस को आधिदैविक बोलते…लेकिन ये सत्ता बदलती रहेती फिर भी जो  ना बदले उस को अध्यात्मिक कहेते..

जैसे आप का शरीर बदल गया..बीमारियाँ बदल गयी..दुख सुख बदला…ये आधिभौतिक बदला…लेकिन मन बदला, बुध्दी बदली ये आधिदैविक बदला है… बचपन की बुध्दी  अभी नन्ही लगती है..उस समय जो बढ़िया  लगता था कोई समझाए फिर भी नही मानते थे..लेकिन अब समझते..तो  वो मन बुध्दी  बदल गया फिर भी जो नही बदले वो अध्यात्मिक हमारा आत्मा है…

 बचपन की बेवकूफी अभी हम मानते है..बचपन के शरीर का  बदलाहट (आधिभौतिक) , मन बुध्दी का बदलाहट , सोच विचार का बदलाहट (आधिदैविक) इन  को जो  जानता है (साक्षी आत्मा ), जो नही बदला है वो है अध्यात्म …

उस को कही लेने नही जाना पड़ता, उस के पास जाना नही पड़ता..उस को  भगाना नही पड़ता…

और वो दूर नही, दुर्लभ नही..लेकिन वो आधिभौतिक और आधिदैविक दोनो का  आधार है..

जैसे सभी गहेनों का आधार सोना है..

जैसे तरंग, झाग, बुलबुले सभी का आधार पानी है..

.. ऐसे ही आधिभौतिक और आधिदैविक का जो आधार है वो  आत्मा  है..इस आत्मा से ही मैं‘ ‘मैं‘..निकलता है..

भगवान है की नही इस में संदेह हो सकता है लेकिन मैंहूँ की नही  इस मे संदेह नही  हो सकता…तो ये मैंपना जहा से स्फुरित  होता वो है अध्यात्म!

तो इस अध्यात्म ज्ञान  के सिवाय भगवान साथ में है , अर्जुन की घोड़ा गाड़ी चला रहे फिर भी अर्जुन का दुख नही मिटा..

लेकिन भगवान ने जब अध्यात्म ज्ञान दिया तो अर्जुन का सुख मिटा नही और  दुख टीका नही…

दुनिया की सारी पढ़ाई कर लो , सारी भौतिकता की उँची शिखरो को सर  कर लो..और आधिदैविक जगत की सारी शक्तियां पा लो फिर भी  दुख  मिटेगा नही.. दुख दबेगा..दुख भूल जाओगे ..लेकिन दुख  फिर आएगा..

तो मनुष्य जीवन केवल दुख मिटाने के लिए नही..

सुबह से शाम से आप क्या  करते की जो भी करते सुख पाने के लिए और दुख मिटाने के लिए  करते…शादी करते तो सुख पाने के लिए, तलाक़ भी देते तो सुख पाने  के लिए..जॉब करते तो सुख पाने के लिए और रिटायरमेंट लेते तो भी सुख के लिए..  रिश्वत लेते सुख के लिए और ईमानदारी करते तो भी सुख के लिए..तो जो भी करते सुख पाने  के लिए और दुख मिटाने के लिए..

एक डॉक्टर थी..एमडी स्री रोग विशेषग्य थी  …एबोरशन करना, खूब पैसा लेना, खाना पीना, मौज करना ऐसा जीवन ..लेकिन सत्संग सुना तो ये छोड़ दिया… तो सब डॉक्टर उस का मज़ाक उड़ाते , उस पर हसते की अब क्या कमाएगी..लेकिन अब उस की 2-2 अस्पताले चलती है..बापू के आशीर्वाद से ये हो गया बोलती ..लेकिन ये तो कुछ  भी नही…ये बहोट छोटी चीज़ है.. अध्यात्म तत्व सब का सार है..सब का आधार है..शिव जी इस में ज़्यादा समय टिकते तो शिव जी , ‘महादेव’ है..

अध्यात्म नित्या

विनिवृत्त कामा

द्वंद मुक्ता

सुख दुख संगे ll

अध्यात्म तत्व सब से उँचा है..

मेरे पास कई प्रधानमंत्री आए..कई मुख्या मंत्री आए… बड़े बड़े  धनाढ्य लोग आए.. अमेरिका के धनाढ्य भक्त बोले 22 मिलियन डॉलर  अर्पण 

करेंगे बोले तो मैं अभी तक नही गया..भगवान और सच्चे संतों को  पैसो से नही खरीद सकते…तुम्हारी दुनिया कुछ  भी महत्व नही  रखती..

आप यहा बैठे है ना तो सूरज आप को इतना थाल जैसा दिखता  है…लेकिन सूरज थाल जितना नही है..सूरज पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है..लेकिन दूरी के कारण वो छोटा दिखता है…आकाशगंगा मे 400 करोड़ सूरज है.. उस में ये सब से छोटा सूरज अपनी सृष्टि का है जो  हम को दिखता है.. वो भी पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है लेकिन हमे दिखता कितना छोटा दिखता है…बहोत  दूर है इसलिए हमे छोटा  दिखते … 1 सूर्य नीचे आ जाता – है ऐसे 12 सूरज आ जाते तो पृथ्वी सारी  बाष्पीभूत हो जाती है …प्रलय हो जाता है ..

तो 4 अरब सूर्य जिस आकाशगंगा में है वो आकाशगंगा  आधिदैविक  सत्ता से चलती है और उस को सत्ता मिलती है  अध्यात्म से…उसी अध्यात्म की सत्ता से तुम्हारे अन्न में से खून बनता है…वो ही अध्यात्म सत्ता से  तुम्हारी हमारी सब की नाभि माँ की जेर से जुड़ती है.. ..और माँ की गोद  में आते तो माँ के शरीर में उसी अध्यात्म सत्ता से दूध बन जाता  है..हम खाने पीने के काबिल होते तो माँ  के शरीर में दूध बंद हो जाता  है…

तो वो आध्यात्मिक शक्ति बिजली की नाई जड़ नही है..उस में चेतना है..उस में ज्ञान  है..और वो प्राणी मात्र की सुहुर्द है….उस में 12 दिव्य शक्तियाँ है…सारी शक्तियों का मूल वो ही है..जितना भी कोई जाने अंजाने आध्यात्मिक शक्ति के करीब आता है उतना उस के जीवन में  दिव्यतायेँ आती है..

अब ये चंद्र ग्रहण है..सूर्य और चंद्र तब नही दिखते जब बादलों से  ढके होते है…हक़ीकत ये है की बादल सूरज और चाँद को नही  ढकते..हमारे आँखो की एरिया में चाँद और सूरज ढका दिखता  है..और दूसरी जगह में दिखते है..ऐसे ही वो अध्यात्म सत्ता को कोई ढक नही सकता…वो नित्य हमारे साथ है परमेश्वर सत्ता…लेकिन राग और  द्वेष, वासना और बेवकूफी की चदरिया से वो ढकी सी मालूम होती  है…फिर भी उस की सत्ता सतत काम कर रही है..

Guru Darshan Express!

लेकिन अयोध्या में तो अभी भी हँसी की बंदिश चालू है.. 🙂

राम जी और ब्रम्हाज़ी के बीच का खेल शुरू है..आनंद रामायण में ये कथा आती है…राम जी के राज्य में  हँसी पर बंदिश थी वो ब्रम्हाज़ी  ने कैसे हटाई ये सुनोगे तो सचमुच आप को हँसी आएगी..

हसने पर बंदिश होने से लोगों की बोझिली जीवनी शैली हो गयी…हाजमा खराब होने लगा..चिड़चिड़ा पन बढ़ गया..लोग भगवान से  प्रार्थना  करने लगे की हमारे बच्चे, हम अस्वस्थ हो गये ..देवताओं को मानुषी जगत का पता चलता है..देवता के अग्रणी ब्रम्‍हा जी को भी पता  चला…ब्रम्‍हा जी ने देखा की राम जी का बनाया क़ानून को हटाना है  तो क्या करे ?

ब्रम्‍हा जी अध्यात्म में चले गये..आधिभौतिक सृष्टि के तो ब्रम्हाज़ी रचेयेता है.आधिदैविक सत्ता के धनी है ही है.. लेकिन इन को जहा से वो सत्ता आती वहा जाना ब्रम्हाज़ी जानते है..जैसे  ब्रम्हज्ञानी  संत जानते है ऐसे ब्रम्‍हाजी भी जानते है..तो थोड़ी देर में ब्रम्‍हा जी के चेहरे पर मुस्कान आई..बोले , “देवता तुम्हारा मंगल होगा..ये समस्या का समाधान मिल गया है..”

तो जहा अयोध्या का जो प्रवेश द्वार था वहा पर एक विशाल पीपल  वृक्ष था..आता जाता सभी को दिखाई देता जो भी नगर में प्रवेश करे…ब्रम्‍हाजी पीपल में प्रविष्ट हो गये…भूत पिशाच प्रविष्ट होते तो ब्रम्हाज़ी के शक्ति के आगे पीपल में प्रविष्ट होना क्या कठिन ?

उस जमाने मे लकड़ियों से गुज़ारा होता था..एक लकड़हारा लकड़ी का बोज़ा उठा के चला..तो ब्रम्हाज़ी पीपल में से हंस पड़े..लकड़हारा चौका..और उस की  दबी हुई मानवी हँसी छूट पड़ी…..84 लाख योनियों में केवल मनुष्य के पास हसने की कला है … दूसरे प्राणी नही हस सकते 

और उसी पर राम जी ने बैन लगा दी….

ब्रम्हाज़ी का संकल्प था तो लकड़हारा भी हस पड़ा…हस पड़ा लेकिन कौन हसा रहा है दिखता नही..अरे भाई कौन हो?.. कौन हो कौन हो, करते हुए हसते जाए.. हसते जाए..सामने से कोई दिखे नही तो ताज्जुब  लगे…ताज्जुब करते हसते हसते आगे गया तो गाव का कोतवाल मिला…कोतवाल को हसते हसते बोला की पीपल के पास हँसी की आवाज़ आ रही..  

कोई हस रहा था दिखाई नही दे रहा..

कोतवाल बोला,  ‘लेकिन हसना  मना है..

लकड़हारा बोला,    हाँ पता है ..लेकिन क्या करू

क्या करू..क्या करू..करते करते कोतवाल भी हसने लगा.. संक्रामक बीमारी जैसे  फैलती ऐसे ये हँसी फैलते गयी… कोतवाल हासे तो उस का ऑफीसर 

हासे..ऐसे करते करते थाने वाले आए.. एसपी  , आईजी  , डीआईजी  सब हसने  लगे..मंत्री, महा मंत्री तक ये हँसी पहुँच गयी…

अब एफ़आईआर किस पर लगाओगे? लकड़हारे पर लगाओगे तो फिर  सब पर लगाने पड़ेगी ..राम जी का आदेश है..पूरे प्रजा में हँसी हँसी हँसी फैल 

गयी..

आख़िर वो हँसी महा मंत्री से राम जी तक पहुँची…

महा मंत्री बोले

प्रभु अयोध्या में ना जाने कौन सी हवा आई की आप की आज्ञा  क़ानून पैरो तले कुचल के सभी हंस रहे..

राम जी बोले, ‘सिपाही क्या कर रहे?’

बोले ,  ‘वो खुद ही हस रहे‘…

सिपाहियों पर क़ानूनी कारवाही होनी चाहिए…3 स्टार  वाले कहाँ  गये?…

बोले वो भी हस रहे …सारे के सारे हसने लग गये..

राम जी बोले, ‘सुमंत जाओ… किस ने अवग्या की है?..राज अवग्या राज द्रोह माना जाता है ..

सुमंत भी हस रहे थे..बोले, ‘प्रभुजी  राज द्रोह सभी ने किया है … लेकिन मैं  भी अद्रोही नही हूँ

ज़्यादा बात मत करो… लखन और भरत युध्द  की तैयारी से जाओ…जहां  से हँसी आई उस को ख़तम करो..

लखन भरत गए ….  जाँच करते करते पता चला की सब से पहेले लकड़हारा हंसा था..लकड़हारा से इंक्वाइरी की….उस ने बोला पीपल से हँसी निकली  थी…पीपल के पास गये..इस पीपल से हँसी निकली थी?.. बोले हाँ‘..

हाँबोलते ही पीपल से फिर हँसी निकली..लक्ष्मण और भरत भी हसने  लगे..

भरत बोले, अरे लक्ष्मण तुम क्यो हसते?

बोले, ‘भरत तुम क्यो हसा रहे?’

सभी हसने लगे..अब क्या करे?…

सेनापति, मंत्री जो भी आए  सभी हसने लग जाए…

अब करे तो क्या करे?क्या उपाय है?

आख़िर राम जी के पास एक ही उपाय बचा..राम जी ने कहा, ‘पवन सूत जाओ … अपनी गंभीरता का परिचय दो!..अयोध्या नरेश की आज्ञा है..कोई हासेगा नही..जो ऐसे वैसे है उन को अलग कर दो

हनुमान जी गये…हनुमान जी ने  देखा की हँसी वहा से आ रही है..हनुमान जी को भी हँसी आ रही थी..लेकिन हँसी को रोका…अपना बल लगाया… हसीं दबा के जैसे ही आगे बढ़े  हनुमानजी मूर्छित  हो गये..

क्यो? की वायु देवता तो ब्रम्‍हाजी के बेटे लगते है..वायु देवता का  पुत्र हनुमानजी  के तो ब्रम्‍हाजी दादा लगते..दादा के सामने आँख  दिखाता है? ब्रम्‍हाजी अंदर से थोड़ा आँख दिखाते ही हनुमान जी  मूर्छित हो गये..

प्रभुजी प्रभुजी हनुमान जी भी  मूर्छित हो गये…

राम जी बोले, ‘तो आख़िर वो हसने वाला कौन पुरुष है?..’

राम जी बोले , ‘रथ तैयार  करो..हम स्वयं जाएँगे

राम जी स्वयं पीपल के पास गये…ब्रम्हाजी  हाथ जोड़ कर प्रगट हुए और  राम जी की स्तुति गाने लगे..हसने लगे..

तो राम जी भी हसने लगे ..अब सज़ा दे तो किस को दे कौन दे?

ब्रम्‍हाजी प्रगट हो कर राम जी की स्तुति किए..हाथ जोड़ कर बताए की आप  के राज्य की प्रजा के  स्वास्थ्य के लिए हसी जैसी दूसरी औषधि नहीं  थी..

राम जी ने हसी पर की बंदिश हटा दी…

हरि ओम ओम ओम ओम ओम प्रभुजी ओम..प्यारे जी ओम आनंद ओम हा हा हा 🙂

पूज्यश्री बापूजी के पावन कर कमलो द्वारा आनंद सुख शांति की ज्योतियों का प्रागट्य हुआ… पूज्यश्री बापूजी ने धारण की हुई किशमिश की माला जमनापार समिति को देते हुए पूज्यश्री बापूजी बोले, “अब ये ज्योत आप के घरों में भक्ति, ज्ञान , आरोग्य, प्रीति और सुख शांति का उजाला करेगी..जहां पाठ होगा वहां  ये प्रसाद  बटेगा..”

लोग बोलते है की जमानापार का वातावरण ऐसा है की,

नानक दुखिया सब संसार

ताते अधिक दुखिया जमुनापार!

लेकिन अभी उस सूत्र को हटाना पड़ेगा…

दुखिया सब संसार..

ज्योत के द्वारा

हुआ सुखिया जमुनापार !

ओम शांति.

श्री सद्गुरुदेवजी भगवान की महा जयजयकार हो!!!!!

ग़लतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे…

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

Delhi Poonam Satsang Amrut; 10Dec 2011 – part 1 subah ka satra.

Hari Hari BOL!

bhagavaan raam ne ban lagaa di thi …ayodhyaa ke pulic ke naak men dam kar 

diyaa ki jo bhi hanse to turant F.R.I. darj kar do…koyi bhi hasataa huaa 

dikhe to us par F.R.I. kar do..pulic ke naak men dam kar di..sab par ye 

kaanun laagu thaa.IG, D.I.G. , mantri , mahaa mantri koyi bhi ho..hasegaa to 

turant F.R.I. darj !

kyo ki ram raawan kaa yudhda tha to raawan ko shiv ji ka varadaan 

thaa..Raawan ne vardaan maangaa thaa ki meraa seer kat, haath kate  to phir 

se lag jaaye..shiv ji “tathaastu” bolaa thaa…to jab raam ji baan maarate 

to seer kate, haath kate…kate huye seer aakaash men jaate..hasate haah 

haah haah… phir se lag jaate..

raam ji phir se baano se raawan ke seer kaatate…lekin phir vo kate huye 

seer aakaash men jaa kar jor jor se hasate ..raam ji ki maskari 

karate…haah haah haah kar ke hasate….

ayodhya men raaj sinhaasan par raam ji aate hi utsav manaayaa..koyi hasataa 

to ram ji ko raawan ke kate seeron ki yaad dilaataa…to ram ji ne pahelaa 

kanun paarit kar diyaa ki Ayodhyaa men hansi par bandish lagaayi jaati 

hai!..is kaa koyi bhi ullanghan karegaa vo chaahe mantri ho, mahaa mantri ho 

..chaahe lakhan ho,chaahe  ram khud ho (ram ji apane ko raam bolate) un par 

vo hi kaanun lagegaa jo prajaa par lagegaa…

hansi par ban lagaa di..

1 din 5 -25 din bite kuchh mahine ki kataare gujari…lekin hansi par ban  

lagaayi to prajaa udaas rahene lagi..anushaasan tagadaa thaa…un dino des 

pardes men paise jamaa karanewale mantri to the nahi raam raajy men..phir 

bhi log udaas rahene lage..parinaam bahot vichitra aayaa…logo ki hansi 

chali gayi to log maayus rahene lage..aswasth rahene lage..

to logo ne apane isht dev ko pujane lage..us samay prajaa to raam ji ko 

raajaa maanate the..vartamaan men bhagavaan aaye to us samay log un ko 

itanaa nahi maanate jitanaa jaane ke baad maanate….

shirdiwaale saaii baba bhikshaa maangane jaate to log hud dut karate…diyaa 

jalaane ke jaraa saa tel bhi nahi dete..aur abhi un ke liye 10 karod ka 

sinhaasan banataa hai !

ham bhi jab saadhanaa karate the tab kahin bhuk lagi to ahankaar mitaane ke 

liye sochaa ki ab bhikshaa maangenge…bhikshaa maangane gaye to maayi ne 

kahaa, “sharam nahi aati..itanaa laal tamaatar jaisaa bhikshaa maangataa 

hai!”

tab ham saade 22 saal ke the..personaality thi!abhi bhi hai! 🙂 to tabhi 

kaise hogi? ..to maayi ne sunaa diyaa ki paheli roti par khadaa ho gayaa, 

jaa aage jaa… to phir mere man ko bolaa ki dukh hotaa hai to aham ko hotaa 

hai, sharir ko to pataa nahi aur aatmaa ko  dukh sukh hotaa nahi..abhi aham  hai..tu aham chhodegaa tabhi iishwar milegaa..man ko sikhaane ke liye 

bhiksha amaangi..waranaa hamaare pitaa to nagar seth the..

to maharaaj ram ji ne aadesh de diya ki is kaanun kaa paalan ho…to log  devi devataaon ko santo ko praarthanaa karane lage…aakhir  baat pahunchi 

devataao ke paas ..aur devataaon ke shiromani  bramhaa ji tak baat pahunch  gayi..

bramhaaji ne dekhaa ki bhagavaan raam to mere udgam sthan hai..ab main kaise  chaallange karun?..thaanedaar ki baat ho to S.S.P. chaallenge kar degaa…lekin C.M. kaa order aayaa to kaise chaalenge karegaa…

bramhaa ji ne dekhaa ki bhagavaan ka kaanun hai kyaa kare..bramhaa ji ko ek  yukti sujhi..

3 prakaar ki duniyaa hoti..ye jo duniyaa dikhati us ko adhi bhautik jagat  bolate..lekin ye aankho se yaa haath pair se sanchaalit nahi hoti..andar ke  aadhi daivik sattaa se sanchaalit hoti..jaise caar dikhati lekin pahiye 

apani sattaa se nahi ghumate, horn apani sattaa se nahi bajataa…andar ki  mashinary se sanchalit hotaa hai..to us ko adhi daivik sattaa bolate..adhi  bhautik par jis kaa prabhaav chalataa hai us ko aadhi daivik sattaa 

bolate…vyakti vyakti men aadhidaivik sattaa hai aur samasthi men bhi aadhi  daivik sattaa hai…vyakti vyakti kaa aadhi bhautik sharir hai..samasthi men  bhi aadhi bhautik hai pruthvi,jal, tej, vaayu, aakaash aadi sab aadhi  bhautik hai…to jo indriyon se dikh jaaye, us ko aadhi bhautik kahete  hai..lekin indriyon se  naa dikhe phir bhi aadhi bhautik par jis ki sattaa   hai us ko aadhi daivik bolate…lekin ye sattaa badalati raheti phir bhi jo 

naa badale us ko adhyaatmik kahete..jaise aap kaa sharir badal gayaa..bimaariyaan badal gayi..dukh sukh 

badalaa…ye adhi bhautik badalaa…lekin man badalaa, budhdi badali ye adhi 

daivik hai… bachapan ki budhdi abhi nanhi lagati hai..us samay jo badhiyaa  lagataa thaa koyi samjhaaye phir bhi nahi maanate the..lekin ab samjhate..to 

vo man budhdi badal gayaa phir bhi jo nahi badale vo adhyaatmik hamaaraa  aatmaa hai…

 bachapan ki bewakufi abhi ham maanate hai..bachapan ke sharir kaa  badalaahat, man budhdi kaa badalaahat, soch vichaar ka badalaahat ko jo 

jaanataa hai, jo nahi badalaa hai vo hai adhyaatm – aatmaa .us ko kahi lene nahi jana padataa, us ke paas jaanaa nahi padataa..us ko  bhagaanaa nahi padataa…

aur vo dur nahi, durlabh nahi..lekin vo adhibhautik aur adhi daivik dono kaa  aadhaar hai..

jaise sabhi gahenon kaa aadhaar sonaa hai..

jaise tarang, jhaag, bulbule sabhi kaa aadhaar paani hai..

.. aise hi aadhi bhautik aur aadi daivik kaa jo aadhaar hai  vo  aatmaa  hai..is aatmaa se hi ‘main’ ‘main’..nikalataa hai..bhagavaan hai ki nahi is men sandeh ho saktaa hai lekin ‘main’ hun ki nahi 

is me sandeh nai ho sakataa…to jo ‘main’panaa jahaa se spurit hotaa vo hai  adhyaatm!

to is adhyaatm gyaan ke sivaay bhagavaan saath men hai , arjun ki ghodaa  gaadi chalaa rahe phir bhi arjun kaa dukh nahi mitaa..

lekin bhagavaan ne jab adhyaatm gyaan diyaa to arjun kaa sukh mitaa nahi aur 

dukh tikaa nahi…

duniyaa ki saari padhaayi kar lo , saari bhautik taa ki unchi shikharo ko sar  kar lo..aur aadhi daivik jagat ki saari shaktiyaa paa lo phir bhi  dukh  mitegaa nahi.. dukh dabegaa..dukh bhul jaaoge ..lekin dukh  phir aayegaa..

to manushy jeevan kewal dukh mitaane ke liye nahi..subah se sham se aap kya  karate ki jo bhi karate sukh paane ke liye aur dukh mitaane ke liye karate…shaadi karate to sukh paane ke liye, talaak bhi dete to sukh paane  ke liye..job karate to sukh paane ke liye aur ritirement lete to bhi sukh ke  liye..  rishwat lete sukh ke liye aur imaandari karate to bhi sukh ke liye..

to jo bhi karate sukh paane  ke liye aur dukh mitaane ke liye..

ek doctor thi..M. D. sree rog visheshagya …aborshan karanaa, khub paisaa  lenaa, khaanaa pinaa, mauj karanaa..lekin satsang sunaa to ye chhod diyaa to 

sab doctor us par hasate ki ab kyaa kamaayegi..lekin ab us ki 2-2 aspataale  chalati hai..baapu ke aashirwaad se ye ho gayaa bolati ..lekin ye to kuchh  bhi nahi…ye bahot chhoti chij hai.. adhyaatm tatv sab kaa saar hai..sab 

kaa aadhaar hai..shiv ji is men jyaadaa samay tikate to shiv ji mahaadev  hai..

adhyaatm nityaa

vinivrutt kaamaa

dwander muktaa

 sukh dukh sange

adhyaatm tatv sab se unchaa hai..

mere paas kayi pradhanmantri aaye..kayi mukhya mantri aaye… bade bade  dhanaadhy log aaye.. amerika ke dhanaadhy bhakt bole 22 miliyan doller arpan  karenge bole to main abhi tak nahi gayaa..bhagavan aur sachche santo ko  paiso se nahi kharid sakate…tumhaari duniyaa kuchh bhi mahatv nahi  rakhati..

aap yahaa baithe hai naa to suraj aap ko itanaa thaal jaisaa dikhataa  hai…lekin suraj thaal jitanaa nahi hai..suraj pruthvi se 13 laakh gunaa  badaa hai..lekin duri ke kaaran vo chhotaa dikhataahai…aakaashaganga me  400 karod suraj hai.. us me ye sab se chhota suraj apani srushti kaa hai jo  ham ko dikhataa hai.. wo bhi pruthvi se 13 laakh guna badaa hai lekin hame dikhataa kitanaa chhota dikhata hai…bahot dur hai isliye hame chhote  dikhate … sury niche aa jaataa hai aise 12 suraj aa jaate to pruthvi saari 

baashpibhut ho jaati…pralay ho jaataa hai ..

to 4 arab sury jis aakaashgangaa men hai vo aakaashagangaa  aadhi daivik  sattaa se chalati hai aur us ko sattaa milati hai  adhyaatm se…usi adhyaam 

ki sattaa se tumhaare ann men se khun banataa hai…vo hi adhyaatm sattaa se  tumhaari hamaari sab ki naabhi maa ki jer se judati hai.. ..aur maa ki god 

men aate to maa ke sharir men usi adhyaatm sattaa se dudh ban jaataa   hai..ham khaane pine ke kaabil hote to maa ke sharir men dudh band ho jaataa 

hai…

to vo aadhyaatmik shakti bijali ki naayi jad nahi hai..us men chetanaa  hai..us men gyaan hai..aur vo praani maatr ki suhurd hai….us men 12 divya  shaktiyaan hai…saari shaktiyon kaa mul wo hi hai..jitanaa bhi koyi jaane  anjaane aadhyaatmik shaktike karib aataa hai utanaa us ke jeevan men  divyataaye aati hai..

ab ye chandr grahan hai..sury aur chandr tab nahi dikhate jab baadalon se  dhake hote hai…hakikat ye hai ki baadal suraj aur chaand ko nahi  dhakate..hamaare aankho ki area men chaand aur suraj dhakaa dikhataa 

hai..aur jagah men dikhate hai..aise hi vo adhyaatm sattaa ko koyi dhak nahi  sakataa…vo nitya hamaare saath hai parameshwar sattaa…lekin raag aur 

dwesh, waasanaa aur bewkufi ki chadariyaa se vo dhaki si maalum hoti  hai…phir bhi us ki sattaa satat kaam kar rahi hai..

lekin ayodhyaa men to abhi bhi hansi ki bandish chaalu hai.. 🙂

raam ji aur bramhaaji ke bich kaa khel shuru hai..aanand raamaayan men ye  kathaa aati hai…raam ji ke raajya men  hansi par bandish thi wo bramhaaji 

ne kaise hataayi ye sunoge to sachamuch aap ko hansi aayegi..

hasane par bandish hone se logon ki bojhili jivani shaili ho gayi…haajamaa  kharaab hone lagaa..chidchidaa pan badh gayaa..log bhagavaan se  praarthanaa 

karane lage ki hamaare bachche, ham aswasth ho gaye ..devataaon ko maanushi  jagat ka pataa chalataa hai..devataa ke agrani bramhaa ji ko bhi pataa 

chalaa…bramhaa ji ne dekha ki raam ji kaa banaayaa kaanun ko hataanaa hai  to kyaa kare?…bramhaa ji adhyaatm men chale gaye..aadhi bhautik srushti ke 

to bramhaaji racheyetaa hai..adhi daivik sattaa ke dhani hai hi hai..  in dono ko jahaa se vo sattaa aati wahaa jaanaa bramhaaji jaanate hai..jaise 

bramhagyaani sant jaanate hai aise bramhaa ji bhi jaanate hai..to thodi der  men bramhaa ji ke chehare par mushkaan aayi..bole , “devataa tumhaaraa 

mangal hogaa..ye samasyaa kaa samaadhan mil gayaa hai..”

to jahaa  ayodhyaa kaa jo prawesh dwaar thaa wahaa par ek vishaal pipal  thaa..aataa jaataa sabhi ko dikhaayi detaa jo bhi nagar men pravesh kare…bramhaa ji pipal men pravisht ho gaye…bhut pisaach pravisht hote to  bramhaaji ke shakti ke aage pipal men pravisht honaa kya kathin?

us jamaane me lakadiyon se gujaaraa hota thaa..ek lakadahaaraa lakadi kaa  bojaa uthaa ke chalaa..to bramhaaji pipal men se hans pade..lakadahaaraa 

chaukaa..koyi dikhe nahi to us  ki dabi huyi maanavi hansi chhut padi…..84 laakh yoniyon men 

kewal manushy ke paas hasane ki kalaa hai … dusare praani nahi has sakate 

…aur usi par ram ji ne bain lagaa di….

bramhaaji kaa sankalp tha to lakadahaaraa bhi has padaa…has padaa lekin  kaun hai dikhata anahi..are bhai kaun ho?.. kaun ho kaun ho, karate huye 

hasate jaaye.. hasate jaaye..saamane se koyi dikhe nahi to taajjub  lage…taajjub karate hasate hasate aage gayaa to gaav kaa kotwaal milaa…

kotawaal ko hasate hasate bolaa ki pipal ke paas hansi ki aawaaj aa rahi..   koyi has rahaa thaa dikhayi nahi de rahaa..

kotawaal bolaa,  ‘lekin hasanaa  manaa hai..’

lakadahaaraa bolaa, ‘haa pataa hai ..lekin kya karu? kya karu..kyaa  karu..karate karate kotawaal bhi hasane lagaa.. sankraamak bimaari jaise  phailati aise ye hansi phailate gayi… kotawaal hase to us kaa officer hase..aise karate thaane waale aaye.. S.P. , I.G. , D.I.G. sab hasane  lage..mantri, mahaa mantri tak ye hansi pahunch gayi…

ab F.I. R. kis par lagaaoge? lakadhaare par FIR lagaaoge to sab par lagaane  padegi ..raam ji kaa aadesh hai..pure prajaa men hansi hansi hansi phail 

gayi..aakhir vo hansi mahaa mantri se raam ji tak pahunchi…mahaa mantri bole, 

‘prabhu ayodhyaa men na jaane kaun si havaa aayi ki aap ki aagyaa kaanun pairo tale  kuchal ke sabhi hans rahe.. ’

raam ji bole, ‘sipaahi kya kar rahe?’

bole ,  ‘vo khud hi has rahe’…

sipaahiyon par kaanuni kaarawaahi honi chaahiye…3 star waale kahaan  gaye?…vo bhi has rahe …sare ke sare hasane lag gaye..

 raam ji bole, ‘sumant jaao… kis ne avagyaa ki hai?..raaj avagya raaj droh  maana jaataa hai ..’

sumant bhi has rahe the..bole, ‘prabhuji  raaj droh sabi ne kiya lekin main  bhi adrohi nahi hun’

‘jyaadaa baat mat karo… lakhan aur bharat yudhd ki taiyyari se jaao…  jahaa  se hansi aayi us ko khatam karo..’

 jaanch karate karate pataa chalaa ki sab se pahele lakadahaaraa hansaa  thaa..lakadahaar se inquiry ki….us ne bolaa pipal se hansi nikali  thi?…pipal ke paas gaye..is pipal se hansi nikali thi?.. bole ‘haa’..

‘haa’ bolate hi pipal se phir hansi nikali..lakshman aur bharat bhi hasane  lage..

are lakshman tum kyo hasate?

bole, ‘bharat tum kyo hasaa rahe?’

sabhi hasane lage..ab kyaa kare?…

senapati, mantri jobhi aaye  sabhi hasane lag jaaye…

ab kare to kya kare?kya upaay hai?

aakhir raam ji ke paas ek hi upaay bachaa..ram ji ne kahaa, ‘pawan sut jaao  apani gambhirataa ka parichay do!..ayodhya naresh ki aagyaa hai..koyi 

hasegaa nahi..jo aise waise hai un ko alag kar do’

hanumaan ji gaye…hanumaan ji dekha ki hansi wahaa se aa rahi hai..hanumaan  ji ko bhi hansi aa rahi thi..lekin hansi ko rokaa…apanaa  bal 

lagaayaa…hasi dabaate jaise hi aage badhe  hanumaanji  murchhit ho gaye..

kyo? ki vaayu devataa to bramhaa ji ke bete lagate hai..vayu devataa kaa  putra hanumaan ji  ke to bramhaaji daadaa lagate..daadaa ke saamane aankh 

dikhaataa hai? bramhaaji andar se thoda aankh dikhaate hi hanumaan ji  murchhit ho gaye..

‘prabhuji prabhuji hanumaan ji bhi  murchhit ho gaye…’

raam ji bole, ‘to aakhir vo hasane waalaa kaun purush hai?..’

raam ji bole , ‘rath taiyyar karo..ham swayam jaayenge’

raam ji swayam pipal ke paas gaye…bramhaaji haath jod kar pragat huye aur  raam ji ki stuti gaane lage..hasane lage..

to raam ji bhi hasane lage ..ab sajaa de to kis ko de kaun de?

bramhaa ji pragat ho kar raam ji ki stuti kiye..haath jod kar bataaye ki aap  ke raajya ki prajaa kaa swaasthy ke liye hasi jaisi dusari aushadhi nahi  thi..

raam ji ne hasi par ki bandish hataa di…

hari om om om om om prabhuji om..pyaare ji om aanand om haa haa haa 🙂

pujyashri Bapuji ke paawan kar kamalo dwaaraa aanand sukh shanti ki jyotiyon kaa praagatya huaa… Pujyashri Baapuji ne Dhaaran ki huyi kishmish ki maalaa jamanaapaar samiti ko dete huye Pujyashri Baapuji bole, “ab ye jyot aap ke gharon men bhakti,gyaan, aarogya,priti aur sukh shanti kaa ujaalaa karegi..jahaa paath hogaa wahaa ye prashad bategaa..”

log bolate hai ki jamaanaapaar kaa waataavaran aisaa hai ki,

naanak dukhiyaa sab sansaar

taate adhik dukhiyaa jamunaapaar!

lekin abhi us sutr ko hataanaa padegaa…

dukhiyaa sab sansaar..

jyot ke dwaaraa

huaa sukhiyaa jamunaapaar !

om shaanti.

SHRI SADGURUDEVJI BHAGAVAAN KI MAHAA JAYAJAYKAAR HO!!!!!

Galatiyon ke liye Prabhuji kshamaa kare…

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s


%d bloggers like this: