पूर्णानंद के शिष्य मोतीराम में से भास्करानंद

कानपुर के पास मैथालालपुर गाँव है..कानपुर से 30 किमी पर होगा…वहाँ पर 1890 में आश्विन मास की सप्तमी की घटना है..

मिशरी लाल एक सज्जन सत्संगी थे..

उन के घर प्रभात काल अंधेरे अंधेरे में 3 साधु आए… साधु के आने से मिशरी लाल बड़े प्रसन्न हुए..

इस मध्यरात्रि को आप आए !

साधु बोले, “तुम्हारे यहा बालक होने वाला है..”

मिशरी लाल चमके!

…रात को पत्नी बोल रही थी  की प्रसूति की पीड़ा हो रही  है…

साधु बोले, “अभी तुम्हारे यहा बालक का जन्म होने वाला है..हम तुम्हारा  सहयोग चाहते है…तुम्हारे बालक का जन्म होते ही और किसी की नज़र उस पर ना पड़े ;  केवल हम 3 साधु वहा जाएँगे…

मिशरी लाल साधुओं के प्रभाव से पहेले ही पावन हो चुके थे… मिशरी लाल को संतों के प्रति आदर था…उन को अपने घर ले जाते, खिलाते पिलाते…ऐसे पवित्र आत्मा मिशरी लाल की सेवा ने करवट ली..उस के घर बालक आनेवाला है…. ये अंजान साधुओं ने कहा की हमें तुम्हारा सहयोग चाहिए…तुम हमारे स्वागत आगत की मेहनत नही करो…तुम्हारे घर अभी प्रसूति होने वाली है…प्रसूति हो जाए..बच्चा जनमे किसी की नज़र ना पड़े;  हम को उस बालक का दर्शन करना है..

महाराज आप की आज्ञा का पालन होगा..

मिशरी लाल ने थोड़े ही मिनिटों में खबर सुनी…दाई ने कहा पुत्र हुआ है.. मिशरी लाल ने दाई को कहा की बच्चे को ठीक जगह पर रखे और बच्चे की माँ को लेकर दाई दूसरी जगह जाए.

बच्चे को देखते ही साधुओ ने कहा , “मिशरी लाल , हवन सामग्री ले आओ”

मिशरी लाल चौके…. अभी सूरज उगा नही..अंधेरा है…प्रभात काल होते ही ले आऊँगा…

साधु बोले,  “नही नही..बाजार से नही लाना है..पास के कमरे मे हवन की सामग्री सब है… तुम ले आओ…समय व्यर्थ्य ना गवांओ..”

मिशरी लाल को और अचम्बा हुआ की पास के कमरे में हवन सामग्री? हम ने तो नही ला के रखी…जा कर देखा तो वहा हवन सामग्री पड़ी है..

साधुओ की अलौकिक शक्ति देख कर मिशरी लाल तो गदगद हो गया…साधुओ ने दरवाजा बंद कर के उस कमरे को हवन सामुग्री से  आहूतियाँ  देकर ऐसा प्रभावशाली बना दिया…देखते ही देखते साधु बाहर आए… वातावरण हवन सामग्री के धुवे से सात्विक हो चुका था ..

मैं क्या करता हूँ?

कमरा बंद कर के गो-चंदन अगरबत्ती जलाता हूँ..गो चंदन आगरबत्ती के उपर 2-4 घी की बूंदे डालता हूँ..पूरे कमरे में उर्जाई  वाला प्राण बन जाता है…इसी में मैं प्राणायाम करता हूँ..मेरी रोग प्रतिकारक शक्ति, याद शक्ति , बुध्दी शक्ति बरकरार है… आप लोग भी इस का फ़ायदा उठाओ ..

(पूज्यश्री बापूजी के दर्शन और अमृत वचन का लाभ उठाने के लिए आयकर विभाग के कमीशनर अमरेन्द्र कुमार आए…पुलिस विभाग के डी आई जी राजेन्द्र आए है..)

 हम 21हज़ार 600 श्वास लेते है..भोजन जो मिलता उस से 10 गुना हम को प्राण वायु से काम लेना पड़ता है.. तो आप के घर के अटैच शौचालय आप के स्वास्थ्य के  दुश्मन है..उस में एक्जोस फ़ैन ज़रूर होना चाहिए..आप के कमरे में गाय के गोबर के कंडे जलाओ और उस पर  घी  की कुछ बूंदे डालो..उर्जाई प्राण बनते है..उस में प्राणायाम कर के ऐसे पोवर फुल बनो..

अब हम फिर आते है मिशरी लाल के नवजात शिशु के कमरे में…3 साधुओ ने हवन कर के कमरे को ऐसा वाइब्रेट कर दिया की जैसा वो चाहते थे . देखते देखते 3 नो साधु बाहर आए… मिशरी लाल सेवा करने दौड़े …साधु बोले हमारी जो तुम ने सेवा करनी थी कर दी..आप के बच्चे दर्शन करा दिया…हम को जो करना था कर दिया..

देखते ही देखते चाँदनी रात थी,  भोर अभी होनेवाली थी…चंद्रमा की चाँदनी में साधु कहा गये पता नही चला… चारो तरफ दूर दूर तक नज़र डाली… साधु अदृश्य हो गये..

मिशरी लाल ने मान लिया की ये कैसे साधु रहे होंगे..ये बात  प्रभात होते होते सारे गाँव में फैल गयी .. मिशरी लाल का गाँव में अच्छे लोग महत्व जानते थे…

किसी ने कहा ये ब्रम्‍हा विष्णु महेश आए होंगे..तो किसी ने कहा ब्रम्‍हा विष्णु महेश होते तो यज्ञ की क्या ज़रूरत थी उन को?

किसी ने कहा की यज्ञ के द्वारा प्राण शक्ति बढ़ाने के लिए आए होंगे..बालक को होनहार बनाने के लिए आए होंगे…धरम लुप्त हो रहा है तो दिव्यात्मा बनाने को आए होंगे..किसी ने कुछ कहा किसी ने कुछ कहा लेकिन  वो साधु फिर कभी दिखे नही…

मिशरी लाल ने अपने बच्चे नामकरण किया…बच्चे का नाम रखा गया  मोतीराम.

साधारण बच्चे की अपेक्षा ये बालक कुछ अलग था..जितनी और बच्चे में चंचलता , हिलचाल होती इतनी इस बालक मोतीराम ने नही थी…वो शांत बैठे..कभी कभार मिट्टी का शिवलिंग बनाते उस को देखते रहते… माँ  को हुआ की उन बाबाओं ने मेरे बच्चे पर ना जाने क्या जादू कर दिया है…बेटा कही साधु ना हो जाए.. मिशरी लाल का सपूत मोतीराम कही साधु ना हो जाए इसलिए शादी करा दी 12 साल में …..16 साल की उम्र तक शादी क्या है और कामविकार क्या होता है उस तरफ उन का लक्ष ही नही रहा…

ये तो 1890 की बात है..लेकिन 1947 के भागादौड में मेरे भाई की शादी करा दी थी..भाई 15 साल का था… भाभी 14 साल की थी..लेकिन 20 साल की उमर 22 साल की उमर तक उन को पता नही था की शादी का मतलब ये होता है…और मैं ने मेरे 22 साल के बेटे नारायण की शादी करा दी…10 महीने  तक उन को शादी का मतलब ये होता ये पता ही नही था नारायण साई को…..मेरे बेटे की मैं ने पेड़ के नीचे शादी कराई… ऐसे तो 5-5 करोड़ के हीरे जिन के घरो में पड़े रहेते ऐसे लोगो ने ऑफर दिया था…..लेकिन मैने एक ग़रीब साधक (कृष्णानी) की कन्या  के साथ मेरे बेटे की शादी कराई…जब हम ने कृष्णानी को कहा की हम तुम्हारी कन्या का नारायण साई से शादी के लिए हाथ ..तो उन को बड़ा आश्चर्य हुआ..हम बोले हाँ , हम तैयार है…अमीरो के साथ अमिर बनने में क्या बड़ी बात है? ग़रीब भी तो वो ही परमात्मा है.. फिर दहेज-वहेज  की बात हुई तो मैं ने कहा, “कुछ भी नही” …आख़िर उस  बेटी की माँ को चैन नही पड़ा तो नारायण की माँ के पास गयी…बोली, मंगनी के लिए कुछ तो लो…

देना ही है?

बोली हाँ

तो नारायण की माँ बोली,  देना ही है तो 2 किलो मिठाई ले आओ और इन बच्चो को बाँट  दो..हो गयी मंगनी !

तब से मैं ने नारायण की माँ को बुलाकर हाथ मिलाया… नही तो हम उस को दूर से ही…मैं कहा आज से हम तुम को मानते है की तुम मेरे सिध्दांत पर हो!..

हमारी मोहब्बत बुढ़ापे में शुरू हुई…देखो दिल की बात सुने दिल वाला ! :)

लेकिन मोहब्बत का मतलब ये नही है की एक दूसरे के शरीर को नोच नोच कर अपनी कमर तोडो, पत्नी की कमर तोडो…संयम ही सच्ची मोहब्बत है..वो किसान बेवकूफ़ है जो खेडे और बीज ना रोपे …वो गृहस्थी बेवकूफ़ है जो खेडे और गर्भादान नही करे; ऐसे ही ओज तेज नाश करे… संयम बड़ी उँची चीज़ है…

नारायण की माँ मेरे पर इतनी श्रध्दा करती की उपवास रखती और चंद्रमा को अर्घ्य देना होता है तो मन ही मन मेरे को दूर से अर्घ्य देकर भोजन करती है.. :)   …मेरी माँ मेरे को भगवान मानती थी..नारायण की माँ  मेरे को भगवान नही तो गुरु तो मानती ही है…समझ गये आप? :)

आप का व्यवहार ऐसा होना चाहिए की आप की पत्नी का आप पर बड़ा भरोसा हो…और आप के पति का आप पर ऐसा विश्वास होना चाहिए की कोई बोले, तुम्हारी पत्नी ऐसी थी ऐसी थी तो पति बोले, आप ने किसी और को देखा होगा, मेरी पत्नी हो ही नही सकती….पत्नी को पति के विश्वास का संपादन करना चाहिए और पति को पत्नी के विश्वास का संपादन करना चाहिए..तभी गृहस्थी जीवन का कुछ रंग आता…  है.. संयम ऐसी चीज़ है..

खैर…

16 साल तक तो मोतीराम को संसार विकार का पता नही था…उस के बाद मोतीराम को  संसार व्यवहार में धकेला गया और फल स्वरूप बालक हुआ …कुछ ही दिन में  देखा की ये तो माया बढ़ जाएगी….एक दिन चले गये तो चले गये..

 26 साल की उमर में वो घर छोड़ कर उज्जैन चले गये ..उज्जैन में साधु संतों का दर्शन सत्संग करते..पूर्व के योगी थे..साधना में रत रहे…देखा की गुरु के बिना उँची स्थिति नही मिलेगी…गुरु की खोज करते करते  उज्जैन 4 साल रहे तो पूर्णानंद महात्मा उच्च कोटि के संत है ऐसा नाम सुना था… उन की शरण गये..उन्हो ने कहा, “दीक्षा तो बाद में देंगे..अभी वेदांत का अध्ययन करो”

अहमदाबाद में वेदांत का अध्ययन किया… फिर लौट कर आए..गुरु ने देखा की इस की भूख पक्की है…उन्हो ने दीक्षा देकर नाम दिया स्वामी भास्करानंद सरस्वती…पूर्णानंद के शिष्य अब मोतीराम में से भास्करानंद बन गये…

भास्करानंद जप, ध्यान, भजन के प्रभाव से इतनी उँचाई को छु चुके थे की उन  के निकट कोई आता तो उन को  शांति और अच्छे संस्कार मिलते … लोगो की भीड़ बढ़ने लगी..

भास्करानंद ने देखा की अभी मुझे पूर्णता का अनुभव नही हुआ..वाहवाही में मेरा समय बर्बाद हो रहा है..चुपचाप एक शाम को वो स्थान छोड़ के चले गये… उन के जीवन की लीलाए बहोत  है..वो काशी गये… काशी में भीड़ भड़ाका हुआ..इतने में सम्राट को पता चला… एक अच्छे योगी है भास्करानंद… दर्शन कर के काशी नरेश बड़े प्रसन्न हुए… कभी कभी आ जाते थे …महाराज भीड़ भाड़ से  उकताए हुए है …राजा ने कहा, ‘महाराज एक बगीचा है..वहाँ  कोठी है … काशी से बाहर है’  ..वो अयोध्या नरेश प्रतापराय सिंह  का वो बगीचा काशी में था… महाराज को उस बगीचे में ठहेरने की प्रार्थना की…और लोग तो आना जाना बंद हो गये लेकिन  सम्राट के 8 सेवक महाराज को कोई तकलीफ़ ना हो,  चीज़ वस्तु लाने के लिए रखे थे…महाराज ने सेवको को कहा की देखो  मेरे को तुम्हारी सेवा की ज़रूरत नही.. केवल इतनी सेवा करना की यहा कोई लोग आए नही…..कुछ  दिन तो साधना चली . लेकिन अयोध्या नरेश प्रतापराय  आते तो  काशी नरेश आने लगे…उन के परिवार वाले आने लगे…धीरे धीरे राज घराने के लोगो में महाराज की साधना, तितिक्षा, दर्शन, उपदेश का असर ऐसा पड़ा की बड़े बड़े लोग जुड़ने लगे… देखा की ये बड़े बड़े लोग जुड़ने लगे…एक भोयरा खुदवा दिया..उसी में रहेते..और  शाम को इतने बजे दिखेंगे.. दर्शन देंगे फिर मौन हो जाएँगे…उन का प्रभाव बढ़ता गया..लेकिन वहा एक कोई  अभागा मेहमान आ गया राज कुल का…उस मेहमान का कई ऐसे टोने टोटके करनेवाले और धूर्त साधुओ के साथ उस का पाला पड़ा होगा..उस मेहमान को महाराज को देख के लगा की  ये तो ढोंगी है ऐसा  मानसिकता  का अँधा चश्मा उस ने  पहेन लिया ..

बोले की आप किस के पिछे पड़े है ऐसे कई साधुओं  को मैं छान मारा है….इन की मैं परीक्षा लूँगा…उस ने काशी की  3 वेश्याओं को बुलाया की, जाओ! …. जगह दिखा दी …. 100-100 रूपिया मिलेगा…100 रूपिया मतलब उस समय का 20 ग्राम सोना मिलेगा..वेश्याए गयी…नीचे भोयरे में महाराज बैठे थे ध्यान में… महाराज को देखते ही वेश्याओं का मन बदल गया..

बोली, ‘राजा साब क्षमा करे..’

वो किसी रजवाड़े का राजा था, काशी के राज परिवार का मेहमान था और महाराज की ख्याति सुनी तो आया था….

वेश्याओं ने कहा की, ‘ये काम हम से नही होगा…’

’1000-1000 रूपीए दूँगा… कार्य में सफल होना तुम्हारा कर्त्यव्य  है..मेरा आदेश है’ …चढ़ाया रंग…

 तीनो वेश्याए फिर गयी ….उतने में महाराज का ध्यान खुला ..जो कुछ  नाज़ नखरे गंदी चेष्टा करनी होगी की …

महाराज ने कहा, ‘देखो, अगर तुम्हे जान प्यारी है तो यहाँ से चली जाओ..नही तो कुछ  भी हो सकता है समझी!’

2 तो भाग गयी ..लेकिन तीसरी को 40 तोला सोना दिखे..उस जमाने का 1000 रूपिया… वो गयी नही…

वो गयी नही तो महाराज के संकल्प से एक साप निकला और उस के पैरों से लिपट गया… ऐसी चीखी ऐसी चीखी की बाबा क्षमा करो….माफ़ करो…भागी तो ऐसी भागी  की पिछे मूड कर नही देखा… बाद में उस ने वेश्या का धंधा बंद कर दिया और भक्तानी बन गयी..

इस प्रकार इस कानपुर से सटे हुए गाँव में निष्काम सत्संगी धर्मात्मा के घर ऐसी दिव्यात्मा आई की उस के जीवन में बहोत सारे चमत्कार हुए..आत्मिक शक्तियाँ विकसित हुई…

मैं कई बार कहे चुका हूँ , विवेकानंद ने भी कहा की मनुष्य के अंदर जो योग्यताए है उस का लाखवाँ हिस्सा विकसित होता है तो बुध्दिमान कहेलाता है..अगर वो अपनी महिमा के तरफ मुड़े तो उस की कितनी शक्तियाँ जागेगी!

एवरी मैन इस द गॉड बट प्लेयिंग द फुल

 ओम शांति.

श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो!!!!!

ग़लतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे…

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

kaanapur ke paas maithaalaalpur gaanv hai..kanpur se 30 kimi par hogaa…wahaa par  1890 men aashwin maas ki saptami ki ghatanaa hai..

mishrilaal ek sajjan satsangi the..

un ke ghar prabhaat kaal andhere andhere men 3 saadhu aaye… saadhu ke aane se mishri laal bade prasann huye..

is madhyaraatri ko aap aaye !

saadhu bole, “tumhaare yahaa baalak hone waalaa hai..”

mishrilaal chamake!

…raat ko patni bol rahi thi  ki prasuti ki pidaa ho rahi  hai…

saadhu bole, “abhi tumhaare yahaa baalak ka janm hone waalaa hai..ham tumhaaraa  sahayog chaahate hai…tumhaare baalak kaa janm hote hi aur kisi ki najar us par naa pade ;  kewal ham 3 saadhu wahaa jaayenge…

mishrilaal saadhuon ke prabhaav se pahele hi paawan ho chuke the…mishrilaal ko santon ke prati aadar thaa…un ko apane ghar le jaate, khilaate pilaate…aise pavitra aatmaa mishrilaal ki sewaa ne karavat li..us ke ghar baalak aanewaalaa hai…. ye anjaan saadhuon ne kahaa ki hamen tumhaaraa sahyog chaahiye…tum hamaare swaagat aagat ki mehanat nahi karo…tumhaare ghar abhi prasuti hone waali hai…prasuti ho jaaye..bachchaa  janame kisi ki najar naa pade;  ham ko us baalak kaa darshan karanaa hai..

mahaaraj aap ki aagya kaa paalan hogaa..

mishrilaal ne thode himiniton men khabar suni…daayi ne kahaa putr huaa hai..mishrilaal ne daayi ko kahaa ki bachche ko thik jagah par rakhe aur bachche ki maa ko lekar daayi dusari jagah jaaye.

bachche ko dekhate hi saadhuo ne kahaa , “mishrilaal , havan saamagri le aao”

mishrilaal  chauke…. abhi suraj ugaa nahi..andheraa hai…prabhaat kaal hote hi le aaungaa…

saadhu bole,  “nahi nahi..bajaar se nahi laanaa hai..paas ke kamare me havan ki saamagri sab hai… tum le aao…samay vyarthy naa gavaao..”

mishrilaal ko aur achambaa huaa ki paas ke kamare men havan samagri? ham ne to nahi laa ke rakhi…jaa kar dekhaa to wahaa havan saamagri padi hai..

saadhuo ki alaukik shakti dekh kar mishrilaal to gadgad ho gayaa…saadhuone darwaajaa band kar ke us kamare ko havan saamugri se  aahutiyaa dekar aisa prabhaavshaali banaa diyaa…dekhate hi dekhate saadhu baahar aaye… waataavaran havan saamagri ke dhuwe se saatvik ho chukaa thaa ..

main kya karataa hun?

kamaraa band kar ke go-chandan agarabatti jalaataa hun..go chandan agarabattike upar 2-4 ghee ki bunde daalataa hun..pure kamare men urjaayi  waala praan ban jaataa hai…isi men main praanaayam karataa hun..meri rog pratikaarak shakti, yaad shakti , budhdi shakti barakaraar hai… aap log bhi is kaa phaaydaa uthaao ..

(Pujyashri Baapuji ke darshan aur amrut vachan kaa laabh uthaane ke liye lakhano ke aaykar vibhaag ke kamishanar amarendra kumaar aaye…pulice vibhaag ke DIG raajendra aaye hai..)

 ham 21hajaar 600 shwaas lete hai..bhojan jo milataa us se 10 gunaa ham ko praan vaayu se lenaa padataa hai.. to aap ke attaich shuachaalay aap ke swaasthy ke  dushamn hai..us men ekzos fain jarur honaa chaahiye..aap ke kamare men gaay ke gobar ke kande jalaao aur us par  ghee ki kuchh  bunde daalo..urjaayi praan banate hai..us men praanaayam kar ke aise power full bano..

ab ham phir aate hai mishrilaal ke navjaat shishu ke kamare men…3 saadhuo ne havan kar ke kamare ko aisaa vibrate kar diyaa ki jaisaa vo chaahate the . dekhate dekhate 3 no saadhu baahar aaye…mishrilaal sewaa karane daude …saadhu bole hamaari jo tum ne sewaa karani thi kar di..aap ke bachche darshan karaa diyaa…ham ko jo karanaa thaa kar diyaa..

dekhate hi dekhate  chaandani raat thi,  bhor abhi honewaali thi…chandramaa ki chaandani men saadhu kahaa gaye pataa nahi chalaa… chaaro taraf dur dur tak najar daali… sadhu adrushy ho gaye..

mishrilaal ne maan liyaa ki ye kaise saadhu rahe honge..ye baat  prabhaat hote hote saare gaanv men phail gayi ..mishrilaal kaa gaanv men achchee log mahatv jaanate the…

kisi ne kahaa ye bramha vishnu mahesh aaye honge..to kisi ne kahaa bramhaa vishnu mahesh hote to yagy ki kyaa jarurat thi un ko?

kisi ne kahaa ki yagy ke dwaaraa praan shakti badhaane ke liye aaye honge..baalak ko honahaar banaane ke liye aaye honge…dharam lupt ho raahaa hai to divyaatmaa banaane ko aaye honge..kisi ne kuch kahaa kisi ne kuchh  kahaa lekin  vo saadhu phir kabhi dikhe nahi…

 mishrilaal ne apane bachche naam karan kiyaa…bachche kaa naam rakhaa gayaa  motiraam.

saadhaaran bachche ki apekshaa ye baalak kuchh alag thaa..jitani aur bachche men chanchalataa , hilchaal hoti itani is baalak motiraam ne nahi thi…vo shant baithe..kabhi kabhaar mitti ka shivling banaate us ko dekhate rahate… maa ko huaa ki un baabaabo ne mere bachche par naa jaane kyaa jaadu kar diyaa hai…

betaa kahi sadhu naa ho jaaye..mishrilaal ka saput motiram kahi sadhu naa ho jaaye isliye shaadi karaa di 12 saal men …..16 saal ki umr tak shaadi kya hai aur kaamvikaar kya hotaa hai us taraf un kaa laksh hi nahi rahaa…

ye to 1890 ki baat hai..lekin 1947 ke bhaagaadaud men mere bhaai ki shaadi karaa di thi..bhaai 15 saal kaa thaa… bhaabhi 14 saal ki thi..lekin 20 saal ki umar 22 sal ki umar tak un ko pataa nahi thaa ki shaadi kaa matalab ye hotaa hai…aur maine mere 22 saal ke bete naaraayan ki shaadi karaa di…10 mahine  tak un ko shaadi ka matalab ye hotaa ye pataa hi nahi thaa naaraayan saai ko…..mere bete ki shaadi karaayi maine  ped ke niche… aise to 5-5 karod ke hire jin ke gharo men pade rahete aise logo ne offer diyaa thaa…..lekin maine ek garib saadhak (krushnaani) ki kanyaa  ke sath mere bete ki shaadi karaayi…jab ham ne krushnaani ko kahaa ki ham tumhaari kanyaa kaa naaraayan saai se shaadi ke liye haath ..to un ko badaa aaschary huaa..ham bole haa, ham taiyyar hai…amiro ke saath amir banane men kyaa badi baat hai? garib bhi to wo hi paramaatmaa hai.. phir dahej-vahej  ki baat huyi to maine kahaa, “kuchh bhi nahi” …aakhir us  beti ki maa ko chain nahi padaa to naaraayan ki maa ke paas gayi…boli, mangani ke liye kuchh to lo…

‘denaa hi hai?’

boli, ‘haan’

to naaraayan ki maa boli,  ’denaa hi hai to 2 kilo mithaayi le aao aur in bachcho ko baat do..ho gayi mangani’!

tab se maine naaraayan ki maa ko bulaakar haath milaayaa… nahi to ham us ko dur se hi…main kahaa aaj se ham tum ko maanate hai ki tum mere  sidhdaant par ho!..

hamaari mohabbat budhaape men shuru huyi…dekho dil ki baat sune dil waalaa ! :)

lekin mohabbat kaa matalab ye nahi hai ki ek dusare ke sharir ko noch noch kar apani kamar todo, patni ki kamar todo…sanyam hi sachchi mohabbat hai..vo kisaan bewkuf hai jo khede aur bij naa rope…vo gruhasthi bewkuf hai jo khede aur garbhaadaan nahi kare..aise hi oj tej naash kare… sanyam badi unchi chij hai…

vo mere par itani shradhdaa karati ki upawaas rakhati aur chandramaa ko arghy denaa hotaa hai  to man hi man mere ko door se arghy dekar bhojan karati hai.. :)   …meri maa mere ko bhagavaan maanati thi..naaraayan ki maa mere ko bhagavaan nahi to guru to maanati hi hai…samajh gaye aap? :)

aap kaa vyavahaar aisaa honaa chaahiye ki aap ki patni kaa aap par badaa bharosaa ho…aur aap ke pati kaa aap par aisaa vishwaas honaa chaahiye ki koyi bole, tumhaari patni aisi thi aisi thi to pati bole, aap ne kisi aur ko dekhaa hogaa, meri patni ho hi nahi sakati….patni ko pati ke vishwaas kaa sampaadan karanaa chaahiye aur pati ko patni ke vishwaas kaa sampaadan karanaa chaahiye..tabhi gruhasthi jeevan kaa kuchh rang aataa hai.. sanyam aisi chij hai..

khair…

16 saal tak to motiraam ko sansaar vikaar ka pataa nahi thaa…us ke baad motiraam ko  sansaar vyavahaar men dhakelaa gayaa aur phal swarup baalak huaa …kuchh hi din me dekhaa ki ye to maya badh jaayegi….ek din chal gaye to chale gaye..

 26 saal ki umar men vo ghar chhod kar ujjain chale gaye ..ujjain men saadhu santo ka darshan satsang karate..purv ke yogi the..saadhanaa men rat rahe…dekhaa ki guru ke binaa unchi sthiti nahi milegi…guru ki khoj karate karate  ujjain 4 saal rahe to purnaanand mahaatmaa uchch koti ke sant hai aisaa naam sunaa thaa… un ki sharan gaye..unho ne kahaa, “dikshaa to baad men denge..abhi vedaant ka adhyayan karo”

ahmadaabaad men vedaant kaa adhyayan kiyaa… phir laut kar aaye..guru ne dekhaa ki is ki bhukh pakki hai…unho ne dikshaa dekar naam diyaa swaami bhaaskaraanand saraswati…purnaanand ke shishy ab motiraam me se bhaaskaraanad ban gaye…

bhaaskaraanad jap, dhyaan, bhajan ke prabhaav se itani unchaayi ko chhu chuke the ki un ke nikat koyi aataa to us ko  shanti aur achhe sanskaar milate…shaanti aur achhe sanskaar ke liye  logo ki bhid badhane lagi …. 

bhaaskaraanand ne dekhaa ki abhi mujhe purnataa kaa anubhav nahi huaa..waah waahi men meraa samay barbaad ho rahaa hai..chup chaap ek shaam ko vo sthan chhod ke chale gaye… un ke jeevan ki lilaaye bahot hai..vo kaashi gaye… kaashi men bhid bhadaakaa huaa..itane men samraat ko pataa chalaa… ek achhe yogi hai bhaaskaraanand… darshan kar ke kaashi naresh bade prasann huye… kabhi kabhi aa jaate the …mahaaraaj bhid bhaad se  ukataaye huye hai …raajaa ne kahaa, ‘mahaaraaj ek bagichaa hai..wahaan  kothi hai kaashi se baahar hai..vo ayodhyaa naresh prataap raay sinh  kaa vo bagichaa kaashi me thaa… mahaaraj ko us bagiche men thaherane ki praarthanaa ki…aur log to aanaa jaanaa band ho gaye lekin  samraat ke 8 sewak mahaaraj ko koyi takalif naa ho chij vastu laane ke liye rakhe the…mahaaraaj ne sewako ko kahaa  ki dekho  mere ko tumhaari sewaa ki jarurat nahi.. kewal itani sewaa karanaa ki yahaa koyi log aaye nahi…..kuchh din to saadhanaa chali . lekin ayodhyaa naresh praatap raai aate to  kaashi naresh aane lage…un ke pariwaar waale aane lage…dhire dhire raaj gharaane ke logo men mahaaraaj ki saadhanaa, titikshaa, darshan, updesh ka asar aisaa padaa ki bade bade log judane lage… dekhaa ki ye bade bade log judane lage…ek bhoyaraa khudavaa diyaa..usi men rahete..aur  shaam ko itane baje dikhenge.. darshan denge phir maun ho jaayenge…un kaa prabhaav badhataa gayaa..lekin wahaa ek koyi  abhaagaa mehamaan aa gayaa raaj kul kaa…us mehamaan kaa kayi aise tone totake karanewaale aur dhurt saadhuo ke saath us kaa paalaa padaa hogaa..us mehamaan ko mahaaraaj ko dekh ke lagaa ki  ye to dhongi hai aisaa  maansikataa  kaa andhaa chashmaa us ne  pahen liyaa ..

bole ki aap kis ke pichhe pade hai aise kayi saahduo ko main echhan maaraa hai….in ki main parikshaa lungaa…us ne kaashi ki  3 veshyaaon ko bulaayaa ki jaao…. jagah dikhaa di …. 100-100 rupiyaa milegaa…100 rupiyaa matalab us samay kaa 20 graam sonaa milegaa..veshyaaye gayi…niche bhoyare men mahaaraaj baithe the dhyaan men… mahaaraaj ko dekhate hi veshyaaon kaa man badal gayaa..

boli, ‘raajaa sab kshamaa kare..’

vo  kisi rajwaade kaa raajaa thaa, kaashi ke raaj pariwaar ka mehamaan thaa aur mahaaraaj ki khyaati suni to aayaa thaa….

veshyaaon ne kahaa ki, ‘ye kaam ham se nahi hogaa…’

’1000-1000 rupiye dungaa…’ kaary men saphal honaa tumhaaraa kartyavy hai..meraa aadesh hai….chadhaayaa rang…

 tino veshyaaye phir gayi ….utane men mahaaraaj kaa dhyaan khulaa ..jo kuchh naaj nakhare gandi cheshtaa karani hogi ki …

mahaaraaj ne kahaa, ‘dekho, agar tumhe jaan pyaari hai to yahaan se chali jaao..nahi to kuchh bhi ho sakataa hai samajhi!’

2 to bhaag gayi ..lekin tisari ko 40 tolaa sonaa dikhe..us jamaane kaa 1000 ripiyaa…  vo gayi nahi…

vo gayi nahi to mahaaraaj ke sankalp se ek saap nikalaa aur us ke pairon se lipat gayaa… aisi chikhi aisi chikhi ki baabaa kshamaa karo….maaph karo…bhaagi to aisi bhagai ki pichhe mud kar nahi dekhaa… baad me us ne veshyaa ka dhandaa band kar diya aur bhaktaani ban gayi..

is prakaar is kaanapur se sate huye gaanv men nishkaam satsangi dharmaatmaa ke ghar aisi divyaatmaa aayi ki us ke jeevan men bahot saare chamatkaar huye..aatmik shaktiyaan vikasit huyi…

main kayi baar kahe chukaa hun , vivekaanand ne bhi kahaa ki manushy ke andar jo yogyataaye hai us kaa laakhvaan hissa vikasit hotaa hai to budhdimaan kahelaataa hai..agar vo apani mahimaa ke taraf mude to us ki kitani shaktiyaan jagegi!

every man is the god but playing the fool !

om shaanti.

SHRI SADGURUDEV JI BHAGAVAAN KI MAHAA JAYAJAYAKAAR HO!!!!!

Galatiyon ke liye Prabhuji kshamaa kare…

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