नीरसता मिटाने का सुंदर प्रयोग

रात के सोते समय का प्रयोग :-

दिन भर में जो अच्छा काम किया हे प्रभु आप को अर्पण..कही ग़लती हो गयी तो हमारी वासना, हमारा पाप और हमारी अज्ञानता से ग़लती ना हो ऐसी कृपा करो प्रभु..(तालिया बजाते हुए) हरि ओम ओम ओम ओम ओम हा हा हा..ऐसे हाथ उपर कर के हास्य प्रयोग करे..

सिरहाना पश्चिम की तरफ होगा तो चिंता पिछा नही छोड़ेगी , सिरहाना उत्तर की तरफ होगा तो बीमारिया और अकाल मृत्यु पीछा नही छोड़ेगी..ये गुरुत्वाकर्षण  नियम के अनुसार सिरहाना दक्षिण अथवा पूर्व की ओर  होना चाहिए..

फिर सीधे सो जाए..दोनो हाथ हृदय के पास रख कर ओम शिव शिव…शिव माना कल्याण..श्वास अंदर जाए तो ‘ओम’ बाहर आए तो ‘1’..श्वास अंदर जाए तो ‘शिव’ बाहर आए तो ‘2’..श्वास अंदर जाए तो ‘ओम’ बाहर आए तो 3 ऐसे श्वासोश्वास में भगवन नाम रटते रटते तुम को नींद आएगी वो नींद तो बहुत बढ़िया होगी और वो भक्ति में गिनी जाएगी !!रोज के 6 घंटे- तुम्हारी आयुष्य बढ़ गयी रोज..

 ये करोगे तो आप की नींद भक्ति मे बदल जाएगी..थकान भगवत विश्रान्ति में बदल जाएगी..तुम अल्लाह को मानते तो अल्लाह को  प्यार करो..तुम गॉड को मानते तो गॉड को प्यार करो..जिस को भी तुम अपना हितेशी, रक्षक , पोषक मानते हो उस को दुलार करो..अनेक रूपों में वो ही का वो ही है..

 

दिन की शुरुवात का प्रयोग  :- 

सुबह उठो तो बिस्तर पर पड़े पड़े ही ..ओम शिव..प्रभु..प्रभु की मधुर स्मृति करते हुए शरीर को 2-3 मिनट खींचे … जैसे कुत्ता बिल्ली प्राणी हमेशा उत्साह में होते , शरीर का विशेष खयाल नहीं रखते फिर भी शरीर सदा स्फुर्तीला रहेता ऐसा आप का भी शरीर रहेगा… फिर 2-3 मिनट शरीर ढीला छोड़ दे..बिस्तर पर बैठे …   हे प्रभु आनंद दाता ..निंदा किसी की हम कभी भी भूल कर भी ना करे..ईर्षा कभी भी हम किसी से भूल कर भी ना करे..सत्य बोले झूठ त्यागे मेल आपस में करे…हे प्रभु आनंद दाता ज्ञान  हम को दीजिए..ओम आनंद..ओम माधुर्य…ऐसा कर के बिस्तर का त्याग करे..

फिर 4 दाने धान के(गेंहू के /मुंग के/मटर के/चावल के कोई भी)-मैं 4 बोलता हूँ आप चाहे 25 लो..तो 4 दाने ईश्वर के लिए दो..लो प्रभु ये 4 दाने आप के लिए डालता हूँ..फिर गाय को दो चाहे कबूतरों को दो  चाहे घर में डाल दो लेकिन 4 दाने प्रभुजी आप के है कर के डाल दो.. 

सुबह उठो तो 4 मिनट प्रभु के है , रात को सोते तो 4 मिनट प्रभु के है….. (जो भी करते उस में 4 बार प्रभु का स्मरण हो .. बाते करेंगे तो 4 बाते प्रभु की , खाना खाते तो 4 निवाले प्रभु के , चलते तो भी 4 कदम प्रभु के इस प्रकार स्मरण ) ..ओम आनंद..ओम माधुर्य ..ओम शांती..

प्रभु से बोलो की, आज चाहे सुख आएगा दुख आएगा सब आएगा-जाएगा लेकिन आत्मा परमात्मा का संबंध शाश्वत है ये मैं समझूंगा..याद रखूँगा …

दिन भर आप का मंगलमय होगा..स्वास्थ्य का रस बनने लग जाएगा..ग़लती करने की आदत कम होने लग जाएगी..नि:सार चीज़ों से आप का मन उपराम होने लगेगा…और सार में तुम शाकिर बनते जाओगे..(शाकिर में हर बात में भगवान का शुक्रगुजार होना )

एक बात समझ लेनी चाहिए..वर्तमान को रस मय  बनाओ तो निरसता चली जाएगी..निरसता ही सारे विकार और अपराधों का मूल है..और जो वर्तमान को रस मय  बनाया तो उस का भूत काल भी रस मय  हो जाएगा..और भविष्य भी आएगा तो वर्तमान के रस में रस में रसीला हो के आएगा..और रसमय  करने के लिए रात्रि के शयन के वक्त का श्वासोशवास में भगवान नाम का प्रयोग, दिन की शुरूवात का प्रयोग , और काम करने से पहेले और काम के बाद एक मीनट- ‘भगवान मैं तेरा हूँ और तुम मेरे हो..तुम रस स्वरूप हो , बिन फेरे हम तेरे…ओम ओम ओम ओम ओम .. हा हा हा …’  ऐसा हास्य करो तो भगवान रस देने में कहाँ देर करते?..

पृथ्वी का सारा राज्य, धन, सत्ता मिल जाए लेकिन  जीवन में निरसता है तो वो अभागा है..

( पुज्यश्री बापुजी के सत्संग से  )

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ 

पृथ्वी का सारा राज्य, धन, सत्ता मिल जाए लेकिन  जीवन में निरसता है तो वो अभागा है..

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