इनायत शाह के शिष्य बुल्ला शाह

 

देल्ही पूनम सत्संग अमृत; 11 दिसंबर 2011 

अभी कुछ  समय पहेले मेरा अमृतसर में सत्संग था..अमृतसर में अपना आश्रम है..आश्रम से 20 किमी की दूरी पर पाकिस्तान की बॉर्डर आती है…पाकिस्तान की बॉर्डर से 20किमी दूर लाहोर है…लाहोर बड़ा शहेर है पाकिस्तान का..

मैं इस बार गया तो हिन्दुस्तान से सामान ले जाने वाली 80-90 ट्रकें थी..वहाँ  से भी हिन्दुस्तान आने वाली ट्रके खड़ी थी..अभी गेट  खुला नही था…हिन्दुस्तान से पाकिस्तान जाने वाली बस भी पहुँच गयी थी..ये सब देखा तो मुझे वो कथा याद आ गयी..

लाहोर में बुल्ला शाह नाम के संत रहेते…वो ईश्वर की- अल्लाह की बंदगी करते..रोजे  रखते..कुछ  शक्तियाँ भी आ गयी..पाप से बचने से शक्तियाँ आती है..लेकिन हृदय में शांति और भगवत रस नही था …अपन लोग प्रेमा भक्ति बोलते ऐसे इश्क इलाही, इश्क मिजाजी, इश्क नूरानी के बिना उन को संतोष नही था..

आख़िर लाहोर से सटे हुए देहात में पहुँचे हुए ब्रम्ह ज्ञानी  संत रहेते गृहस्थ वेश में…उन की अपनी खेत खली में देखते..अल्लाह के रास्ते चलने सब को बड़ी मदद करते…उस फकीर का नाम था इनायत शाह.

 

इनायत शाह अपने खेत में प्याज लगा रहे थे..प्याज के बीज से छोटे छोटे पौधे उगते उन को खेत में लगाया जाता है…इनायत शाह ऐसे प्याज लगा रहे थे..बुल्ला ने उन को प्रणाम किया…स्तुति की…

तो संत इनायत शाह ने पुछा , ‘अरे भाई कौन हो? क्यो आए?’

बुल्ला शाह बोले, ‘मालिक रब दा रास्ता दिखाओ’

इनायत शाह जी बोले, ‘अरे रब कोई दूर है क्या की उस का रास्ता दिखाऊँ ?..रब के पास जाना है क्या? रब को कही से लाना है क्या?रब को कही से बुलाना है क्या? वो तो हाजीरा हजूर है..रब ही रब है! शरीर में से ‘मैं’निकालो और आत्मा में मैं लगाओ!’मैं’ को यहा से उठाओ और यहा लगाओ बस!मैं आत्मा हूँ ..चैत्यन्य  हूँ …. तो रब ही रब है!’

ऐसा कहेते हुए इनायत शाहा के संकल्प के रहेमत  की नज़र भी बुल्ला शाह पर बरसी…और बुल्ला शाह के चेहरे पर अंतरात्मा का संतोष , प्रसन्नता आई…

बुल्ला बार बार इनायत शाह के दर्शन करने आता..बैटरी चार्ज करवाता जैसे तुम लोग करते…जब तक बापू से प्रसन्नता की झलक नही पाते पूनम व्रत धारियों को तब तक संतोष नही होता…ऐसे बुल्ला शाह भी चक्कर काटता महीने पंधरा  दिन पर इनायत शाहा के यहा..

 

बुल्ला के परिवार में शादी का प्रसंग आया और गुरु महाराज को अर्ज़ किया की विवाह है, आप पधारे तो कृपा होगी…

इनायत शाह बोले, ‘अच्छी बात है..मैं नही तो मेरा चेला ही आ जाएगा’

शादी में इनायत शाह ने अपने घर के पास रहेने वाले किसी छोटी जात के आदमी को बोला की तुम जाओ और बुल्ला के रिश्तेदारों की  शादी है..

 ..वो आदमी छोटे जाती का था, छोटे स्वभाव का था.. छोटे मन का था…कपड़े भी ऐसे वैसे पहेन  के गया था..तो बुल्ला के रिश्तेदारों ने भी उस को महत्व नही दिया…अलग से बिठा के थोड़ा  टुकड़ा डाल दिया..भगा दिया… तो उस ने आ कर मिर्च मसाला डाल कर इनायत शाह को बता दिया…की आप नूरानी निगाहो से उन को खुशी देते थे…वो ही खुशी से वो अल्लाही नूर तक पहुँचे…आप ने इतना दे डाला मालिक लेकिन आप के बंदे के यहा आप के भेजे हुए आदमी को नीच जाती का मान कर तुच्छ के जैसा व्यवहार किया…

इनायत शाह को ऐसा सब बता कर बुल्ला के प्रति नाराज़ कर दिया..

इनायत शाह ने कहा, ‘हमें उस से क्या लेना है? इधर को बहाया था पानी..अब उधर को बहेता पानी इधर को वापिस मोड़ लेंगे! क्या है उस में?…’

इनायत शाह ने दिल में इतना सोचा ही था की इधर बुल्ला शाह के हृदय से खुशी चली गयी…आनंद चला गया..बुल्ला समझ गया की नूरानी नूर शाही फकीर के दिल में मेरे लिए नाराज़गी है…भागा भागा आया…तो उस आदमी ने बुल्ला को दूर से देख के बोल दिया की बुल्ला फिर आ रहा है आप को रिझाने के लिए…आप भोले है..आप को मस्का मारता है..

इनायत शाह बोले, ‘नही नही.. उस को मेरे पास आने ही मत दो!’

खेत खली का जीवन था…बुल्ला जब भी आए उस को धक्का मार के भगाया जाता था…इनायत शाह तक जाने ही नही देते..

आख़िर बुल्ला ने सोचा की इस महा पुरुष को मैं कैसे रिझाऊँ ?..तो पता चला की इनायत शाह गाना बजाना कव्वाली सुनने जाते है कभी कभी…तो उस समय जो नर्तक होते वो किन्नर होते..उन को नाचू भी बोलते…ऐसे मंडली में भरती हो गया…आज नही तो कल..नही तो परसो ..ऐसे करते करते 12 साल गुजर गये ..हिजड़ो की मंडली में नाचना गाना , स्री  के वस्त्र पहेनेना वो सब सीखा…12 साल के बाद उस हिजड़ो के मंडली का नंबर लगा जिस में बुल्ला शाह भरती हुए थे…

बुल्ला शाह सोचे की 12 साल के बाद आज मालिक तक पहुँचे..ऐसी काफिया गाइ…ऐसी ग़ज़ल और कव्वालियाँ गाइ…जिस में दर्द और विरह भरा था…

तकदीर तू किसी से धोका ना कर ..

मुश्किल है जुदाई सहेना

जिस ने एक बार महापुरुषों की रहेमत  का स्वाद चखा है ..जिन को राज वैभव मिलता वो कंगाल होते तो जो पीड़ा होती है वो ही जाने..कंगाल को कंगाल होने की कैसी पीड़ा?…भीक मंगों को , झोपड़पट्टी में रहेने वालों को दरिद्रता का इतना दुख नही होता जितना आमिर को दरिद्र होने का दुख होता है…ऐसे गुरु कृपा की धारा वापस खींच के चली गयी..अब मुझ पे क्या बीती है ये एक मैं जानू और के मेरे इनायत प्रभु जाने….

इनायत शाह बोले, ‘अरे हिजड़े के वेश में बुल्ला है तू?’

बुल्ला शाह ने वो वेश फेंक के इनायत शाह के चरणों  में पड़ते हुए कहा, ‘बाबा बुल्ला नही ..मैं तो भुला हूँ! 12 साल जैसे 12 युग बीते मेरे मालिक..मैने आप के रिझाने के लिए ये वेश बनाया..’

बोले, ‘अरे फिर भी सौदा सस्ता है..कितने करोड़ो जनमो तक पटकते..’

 

तो गुरु को रिझाने के लिए बुल्ला ने 12 साल हिजड़ो की मंडली में रहेना स्वीकार किया..रगड़े गये वहा…उन के जैसा ख़ान पान, रहेन सहेन…12 साल इतना कष्ट सहें  कर गुरु को रिझाया तब बुल्ला शाह ने गुरु की रहेमत फिर से पाई..

 

गोरखनाथ  भी मच्छीन्द्र  नाथ को रिझाने के लिए नर्तक मंडली में  12 साल भारती हुए थे..नाचना गाना सीखे थे.. मच्छीन्द्र नाथ रुठ गये थे तो उन को मनाने के लिए गोरखनाथ नर्तको के मंडली में आए थे..तब गुरु को रिझाने में सफल हुए..

 

गुरुओं को रिझाने में 12 – 12 साल लगे थे…लेकिन तुम लोगों का क्या जादू है की गुरु को रिझाने के लिए तुम्हे 1 मिनट भी नही लगता..गुरु तो सदा रिझे मिलते है और गुरु तुम्हे रिझाते रहेते है की आ जाओ! ले जाओ!!..जब देखो गुरु आते जाते गुरु तुम्ही ही को रिझाते है..रेल गाड़ी चला कर भी रिझाते है..नाच कर भी रिझाते है..गा  कर भी रिझाते है..सुना कर भी रिझाते है..

12-12 साल गुरु को रिझाने के लगा देने वाले  शिष्य हो गये..हम भी गुरु को रिझाने में ऐसे लगे थे की वो बात बताऊंगा तो अभी आप के आँखों में आसूं बहेंगे…

आप भी करते लेकिन क्या पता क्या जादू है की मुझे रिझाने के लिए आप को कुछ  नही करना पड़ता…मेरी ही आदत ऐसी है की मैं ही रिझाता रहेता हूँ आप को…और मेरी ये आदत इसलिए बनी की मैं  ने भगवान के साथ एक बार पंगा ले लिया था! 🙂

मैं बहोत  तरसा..लेकिन वो ईश्वर का आनंद नही मिल रहा था…खूब गिरी गुफ़ाओं में घूमे..केदार नाथ गये..साधना किए..अनुष्ठान करते करते रात्रि के 12-1 बज जाए..जवान शरीर ..सोए तो एकदम पता ही नही चले..तो रात्रि को नींद में चूछूंदरी पैरों के तलूवे फूँक मार मार कर खा जावे..फिर सुबह नदी मे स्नान करने जाए तो बालू घुस जाए तब पता चले..ऐसे दिन भी बिताए ईश्वर को रिझाने के लिए…

ईश्वर रीझ गये तो आनंद ही आनंद है!

लेकिन मैं उन दिनों  ईश्वर से बोलता की आप मिलते नही हो…एक बार मिलोगे ना तो तुम्हारी हालत ऐसी करूँगा….  की जैसे कोई बहोत  दुखी हो कर माँ  से, बाप से , मित्र से चिढ़ जाते ऐसे हम ईश्वर से चिढ़ गये…की मिलते नही हो एक बार मिल जाओ तो तुम्हे ऐसा सस्ता कर दूँगा की जैसे फुटपाथ की सब्जी! सुबह 5 रुपये की 500 , दोपहेर को 3 की 500, और शाम आए तो 2 रूपीए में ले जाओ..तो ऐसा भगवान ने वचन सच्चा कर दिखाया…और वो मज़ा ले रहे है..और हम को भी दौड़ा दौड़ करा के मज़ा ही दिला रहे है

ओम शांति.

 

श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो!!!!!

ग़लतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे….

 

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

abhi kuchh samay pahele meraa amrutsar men satsang thaa..amrutsar men apanaa aashram hai..aashram se 20 kimi ki duri par paakisthaan ki bordar aati hai…paakisthaan ki border se 20kimi dur laahor hai…lahor badaa shaher hai paakisthaan kaa..

main is baar gayaa to hindusthaan se saaman le jaane waali 80-90 traken thi..wahaa se bhi hindusthaan aane waali trake khadi thi..abhi gate khulaa nahi thaa…hindusthaan se paakisthaan jaane waali bus bhi pahunch gayi thi..ye sab dekhaa to mujhe vo kathaa yaad aa gayi..

laahor men bullaa shaah naam ke sant rahete…vo iishwar ki allaah ki bandagi karate…roje rakhate..kuchh shaktiyaan bhi aa gayi..paap se bachane se shaktiyaan aati hai..lekin hruday men shanti aur bhagavat ras nahi…apan log premaa bhakti bolate aise ishk ilaahi, ishk mijaaji, ishk nuraani ke binaa un ko santosh nahi thaa..

aakhir laahor se sate huye dehaat men pahunche huye bramhagyaani sant rahete gruhasth vesh men…un ki apani khet khali men dekhate..allaah ke raste chalane sab ko badi madad karate…us phakir kaa naam thaa inaayat shaah.

 

inaayat shaah apane khet men pyaaj lagaa rahe the..pyaaj ke bij se chhote chhote paudhe ugate un ko khet men lagaayaa jaataa hai…inaayat shaah aise pyaaj lagaa rahe the..bullaa ne un ko pranaam kiyaa…stuti ki…

to sant inaayat shaah ne puchhaa, ‘are bhai kaun ho? kyo aaye?’

bullaa shaah bole, ‘maalik rab daa raastaa dikhaao’

inaayat shaah ji bole, ‘are rab koyi dur hai kyaa ki us kaa raastaa dikhaaun?..rab ke paas jaanaa hai kya? rab ko kahi laanaa hai kyaa?rab ko kahi se bulaanaa hai kya? vo to haajiraa hajur hai..rab hi rab hai! sharir men se ‘main’nikaalo aur aatmaa men main lagaao!’main’ ko yahaa se uthaao aur yahaa lagaao bas!main aatmaa hun ..chaityany hun to rab hi rab hai!’

aisaa kahete huye inaayat shahaa ke sankalp ke rahemat ki najar bhi bullaa shaah par barasi…aur bullaa shaah ke chehare par antaraatma aka santosh , prasannataa aayi…

bullaa baar baar inaayat shaah ke darshan karane aataa..baittery charge karavaataa jaise tum log karate…jab tak bapu se prasannataa ki jhalak nahi paate poonam vrat dhaariyon ko tab tak santosh nahi hotaa…aise bullaa shaah bhi chakkar kaatataa mahine pandharaa din par inaayat shahaa ke yahaa..

 

bullaa ke pariwaar men shaadi ka prasang aayaa aur guru mahaaraaj ko arj kiyaa ki vivaah hai, aap padhaare to krupaa hogi…

inaayat shaah bole, ‘achhi baat hai..main nahi to meraa chelaa hi aa jaayegaa’

shaadi men inaayat shaah ne apane ghar ke paas rahene waale kisi chhoti jaat ke aadami ko bolaa ki tum jaao aur bullaa ke rishtedaaron ki  shaadi hai..

 ..vo aadami chhote jaati kaa thaa, chhote swabhaav kaa thaa..chhote man kaa thaa…kapade bhi aise waise pahen ke gayaa thaa..to bullaa ke rishtedaaron ne bhi us ko mahatv nahi diyaa…alag se bithaa ke thodaa tukadaa daal diyaa..bhagaa diyaa… to us ne aa kar mirch masaalaa daal kar inaayat shaah ko bataa diyaa…ki aap nuraani nigaaho se un ko khushi dete the…wo hi khushi se vo allaahi nur tak pahunche…aap ne itanaa de daalaa maalik lekin aap ke bande ke yahaa aap ke bheje huye aadami ko nich jaati kaa maan kar tuchchh ke jaisaa vyavahaar kiyaa…

inaayat shaah ko aisaa sab bataa kar bullaa ke prati naaraaj kar diyaa..

inaayat shaah ne kahaa, ‘hamen us se kyaa lenaa hai? idhar ko bahaayaa tha apaani..ab udhar ko bahetaa paani idhar ko waapis mod lenge! kyaa hai us men?…’

inaayat shaah ne dil men itanaa sochaa hi thaa ki idhar bullaa shaah ke hruday se khushi chali gayi…aanand chalaa gayaa..bullaa samajh gayaa ki nuraani nur shaahi phakir ke dil men mere liye naaraajagi hai…bhaagaa bhaagaa aayaa…to us aadami ne bullaa ko dur se dekh ke bol diyaa ki bullaa phir aa rahaa hai aap ko rijhaane ke liye…aap bhole hai..aap ko maskaa maarataa hai..

inaayat shaah bole, ‘nahi nahi.. us ko mere paas aane hi mat do!’

khet khali kaa jeevan thaa…bullaa jab bhi aaye us ko dhakkaa maar ke bhagaayaa jaataa thaa…inaayat shaah tak jaane hi nahi dete..

aakhir bullaa ne sochaa ki is mahaa purush ko main kaise rijhaaun?..to pataa chalaa ki inaayat shaah gaanaa bajaanaa kawwaali sunane jaate hai kabhi kabhi…to us samay jo nartak hote vo kinnar hote..un ko naachu bhi bolate…aise mandali men bharati ho gayaa…aaj nahi to kal..nahi to paraso ..aise karate karate 12 saal gujar gaye ..hijado ki mandali men naachanaa gaanaa , sree ke vastr pahenenaa vo sab sikhaa…12 saal ke baad us hijado ke mandali kaa number lagaa jis men bullaa shaah bharati huye the…

bullaa shaah soche ki 12 saal ke baad aaj maalik tak pahunche..aisi kaafiyaa gaayi…aisi gajal aur kawwaaliyaan gaayi…jis men dard aur virah bharaa thaa…

takadir tu kisi se dhoka naa kar ..

mushkil hai judaayi sahenaa

jis ne ek baar mahaapurushon ki rahemat kaa swaad chakhaa hai ..jin ko raaj vaibhav milataa vo kangaal hote to jo pidaa hoti hai vo hi jaane..kangaal ko kangaal hone ki kaisi pidaa?…bhik mango ko , jhopad patti men rahene waalon ko daridrataa kaa itanaa dukh nahi hotaa jitanaa amir ko daridr hone kaa dukh hotaa hai…aise guru krupaa ki dhaaraa waapas khinch ke chali gayi..ab mujh pe kyaa biti hai ye ek main jaanu aur ke mere inaayat prabhu jaane….

inaayat shaah bole, ‘are hijade ke vesh men bullaa hai tu?’

bullaa shaah ne vo vesh phenk ke inaayat shaah ke charano men padate huye kahaa, ‘baabaa bullaa nahi ..main to bhulaa hun! 12 saal jaise 12 yug bite mere maalik..maine aap ke rijhaane ke liye ye vesh banaayaa..’

bole, ‘are phir bhi saudaa sastaa hai..kitane karodo janamo tak patakate..’

 

to guru ko rijhaane ke liye bullaa ne 12 saal hijado ki mandali men rahenaa sweekar kiyaa..ragade gaye wahaa…un ke jaisaa khaan paan, rahen sahen…12 saal itanaa kasht sahe kar guru ko rijhaayaa tab bullaa shaah ne guru ki rahemat phir se paayi..

 

gorakhanaath  bhi machhindar naath ko rijhaane ke liye nartak mandali men  12 saal bharati huye the..naachanaa gaanaa sikhe the..machchindar naath ruth gaye the to un ko manaane ke liye gorakhnaath nartako ke mandali men aaye the..tab guru ko rijhaane men saphal huye..

 

guruon ko rijhaane men 12 – 12 saal lage the…lekin tum logon kaa kyaa jaadu hai ki guru ko rijhaane ke liye tumhe 1 minat bhi nahi lagataa..guru to sadaa rijhe milate hai aur guru tumhe rijhaate rahete hai ki aa jaao! le jaao!!..jab dekho guru aate jaate guru tumhi hi rijhaate hai..rel gaadi chalaa kar bhi rijhaate hai..naach kar bhi rijhaate hai..gaa kar bhi rijhaate hai..sunaa kar bhi rijhaate hai..

12-12 saal guru ko rijhaane ke lagaa dene wale shishy ho gaye..ham bhi guru ko rijhaane men aise lage the ki vo baat bataaungaa to abhi aap ke aankhon men aasun bahenge…

aap bhi karate lekin kyaa pataa kyaa jaadu hai ki mujhe rijhaane ke liye aap ko kuchh nahi karanaa padataa…meri hi aadat aisi hai ki main hi rijhaataa rahetaa hun aap ko…aur meri ye aadat isliye bani ki maine bhagavaan ke saath ek baar pangaa le liyaa thaa! 🙂

main bahot tarasaa..lekin vo iishwar kaa aanand nahi mil rahaa thaa…khub giri gufaaon men ghume..kedaar nath gaye..saadhanaa kiye..anushtaan karate karate raatri ke 12-1 baj jaaye..jawaan sharir ..soye to ekadam pataa hi nahi chale..to raatri ko nind men chuchundari pairon ke taluwe phunk maar maar kar khaa jaawe..phir subah nadi me snaan karane jaaye to baalu ghus jaaye tab pataa chale..aise din bhi bitaaye iishwar ko rijhaane ke liye…

iishwar rijh gaye to aanand hi aanand hai!

lekin main un dino iishwar se bolataa ki aap milate nahi ho…ek baar miloge naa tumhaari haalat aisi karungaa ki jaise koyi bahot dukhi ho kar maa se baap se mitr se chidh jaate aise ham iishwar se chidh gaye…ki milate nahi ho ek baar mil jaao to tumhe aisaa sastaa kar dungaa ki jaise foot paath ki sabji! subah 5 rupaye ki 500 , dopaher ko 3 ki 500, aur shaam aaye to 2 rupiye men le jaao..to aisaa bhagavaan ne vachan sachchaa kar dikhaayaa…aur vo majaa le rahe hai..aur ham ko bhi daudaa daud karaa ke majaa hi dilaa rahe hai!..

..bhagavaan ko to sastaa kiyaa, ham bhi saste ho gaye!! 🙂

 

 

naaraayan hari ..hari om hari.

 

 

 

OM SHANTI.

 

SHRI SADGURUDEV JI BHAGAVAAN KI MAHAA JAYAJAYKAAR HO!!!!!

Galatiyon ke liye Prabhuji kshamaa kare….

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