“Bhagavaan se masti” dhyan

29 एप्रिल 2012 ; रायबरेली सत्संग अमृत

 

दुखों का मूल है निरसता…और ये निरसता संसारी नश्वर चीज़ो से मिटाने की ग़लती करते इसलिए निरसता मिटती नही,  निरसता बदलती है..दुखी आदमी का दुख तब तक जिंदा रहेता है जब तक वो संसार से दुख मिटाने की कोशिश करता है..नही मिटेगा ..दबेगा,बदलेगा,लेकिन मिटेगा नही…

दुखी आदमी अगर दुख का सत उपयोग करे, निरसता मिट जाए तो कितना भी दुख भेजो, मुसीबत भेजो लेकिन वो आदमी उस से हसते-खेलते पार हो जाएगा!

श्रीकृष्ण भगवान के सत्संग को समझा तब अर्जुन का मोह नष्ट हुआ..मोह माने उलटा ज्ञान..शरीर मरता तब भी हम रहेते है लेकिन बेवकूफी से शरीर को ही “मैं” मान बैठना उलटा ज्ञान है..और शरीर के द्वारा सुखी होने की बेवकूफी करते इसलिए निरसता नही मिटती..

जहा सुख है उस का मैं आज स्वाद चखा सकता हूँ..

मैं ने अनेक संतों को, शास्त्रों को, महा पुरुषों को,साधुओं को प्रॅक्टिकली अपने जीवन में देखा है..निरसता कैसे मिटती है मुझे पता है..दोष दुर्गूण कैसे मिटाते उस का मुझे पता है..मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति कैसे सुप्रसिद्ध हो सकती मुझे पता है..स्वास्थ्य कैसे पाया जाता मेरे गुरुजी जानते थे और  मुझे भी कुछ पता है..घर के झगड़े कैसे मिटाए जाते मुझे पता है..

बाए नथुने से (लेफ्ट नोस्ट्रिल) से श्वास अंदर भरो.. रोको  और 1 मिनट ओंकार का पवित्र चिंतन करो.. … ओम ओम प्रभुजी ओम..प्यारे जी..अंतरात्मा…मेरे रक्षक…मरने के बाद ये शरीर और दुनवी चीज़े साथ नही आती लेकिन आप मेरा साथ नही छोड़ते..मैं आप का हूँ..आप मेरे हो…मैं आप को नही जानता हूँ..केवल मानता हूँ..लेकिन आप तो मुझे जानते है प्रभु..और अपना मानते है…आप से सदियों का बिछड़ा जीवात्मा अब आप की शरण आ रहा हूँ…ये सत्संग के द्वारा मिल रहा है रास्ता..प्रभु मुझे स्वीकार कर लो..प्रभु मुझे अपनी कृपा से , अपनी रहेमत से, अपने प्रेमा रस से रसमय कर दो..हे प्रभु! जो भी आप के संतों के शरण जाता है उस पर आप बरसते हो संतों की निगाहो के द्वारा..संतों की नज़रों में जो आता है वो निहाल हो जाता है..गुरु नानक ने कहा है: ब्रम्ह ज्ञानी  की दृष्टि अमृत वर्षी…

दाये नथुने से (राईट  नोस्ट्रिल)  से धीरे धीरे श्वास छोड़ो..इस से बहुत फ़ायदे होंगे..

 

अब दोनो नथुने से मिला कर खूब गहेरा श्वास भरो और ओंकार का पवित्र चिंतन ब्रम्हज्ञानी संत श्री बापूजी के साथ करो..

ओम ओम….  रोग मिटाने वाले, पाप मिटाने वाले..ॐ ॐ ॐ … शक्ति और प्रीति देनेवाले ओम स्वरूप राम रटन ..ओम ओम ओम…हृदय पूर्वक रटन चालू रखो सव्वा मिनट..जनम जनम की वासना और दोषों से हम भटक रहे थे..अब निर्दोष ओम स्वरूप ईश्वर की हम शरण है..ओम ओम ओम प्रभुजी ओम …ओम ओम प्यारे जी ओम..रस स्वरूपा ओम…चैत्यन्य रूपा ओम …(दम मार के सव्वा मिनट श्वास रोक के पवित्र चिंतन करते रहे तो इस से पाप ताप रोग शोक मिटते है..)

ऐसा 5-7 बार रोज सुबह करोगे तो आज का सत्संग आप को और आप के परिवार को निहाल कर देगा!

(अब मुँह बंद रखते हुए- कंठ में ओम ओम का गुंजन करते हुए-गर्दन को आगे पिछे करते हुए धीरे धीरे श्वास छोड़े ..यह ख़ास ओंकार भ्रामरी प्राणायाम कैसे करना है यह पूज्यश्री बापूजी दिखा रहे है,वो ज़रूर देखे और वैसा ही करे रोज केवल 2 बार तो बहुत लाभ होते है)

इस से स्मृति शक्ति के केंद्र विकसित होते है..हाइपो थाईरोइड, हाइपर थाईरोइड नही होगा, हुआ हो तो मिट जाएगा..बुढ़ापे में भी याद शक्ति बनी रहेगी..स्कूल कॉलेज वाले बच्चे करेंगे तो होनहार होंगे , उन की  बुध्दी और भाग्य खुल जाते है …( ऐसे पूज्यश्री बापूजी के शिष्यों में लाखो बच्चों के उदाहरण है..)

देल्ही के अजय मिश्रा के पिताजी मर गये, स्कूल से निकाल देने की नौबत आई थी, कोई मेरे सत्संग में ले आया, ऐसा सरस बना की नोकिया कंपनी का ग्लोबल प्रॉडक्ट मॅनेजर है,47लाख रूपिया वार्षिक उस का पगार है..और उस के जहाज़ों के टिकेट,होटलों के किराए सब कंपनी भरती है..रोज 2500 रूपिया रोज जेब खर्ची मिलती है..स्कूल से निकाल दिए जाने की जिस पर नौबत थी उस लड़के को मेरे सत्संग में कोई ले आया तो अब नोकिया कंपनी का मॅनेजर है..यह बात झूठ निकली तो मैं 10करोड़ रूपिया इनाम दिला दूँगा!:) (आप भी सरस बनो, निरसता दूर भगाने का यह सुंदर तरीका अपनाओ..पूज्य बापूजी के साथ ओंकार का पवित्र चिंतन करो..)

मुझे तो बहुत कष्ट सहेने के बाद गुरुजी की कृपा का पता चला..आप को घर बैठे मिल रहा है..इस का आप आदर से फ़ायदा उठाओ..

दोनो नथुनों से जितना ज़्यादा श्वास अंदर ले सकते उतना भरो..रोको..ओंकार का पवित्र मंगल मे चिंतन करो :-

ओम ओम ओम ओम ओम..

अब हम निरसता से पार हो जाएँगे…भगवान के रस से हम रसवान होंगे…और भगवान के रस से जो रसीला होता है वो समाज का भी स्नेह भाजन हो जाता है…प्रभु का जो प्रेमी होता है वो सब का प्रेमी होने लगता है..

लवर-लव्हरी क्या जाने प्रेम को? वो तो कुत्ता-कुत्ती आकर्षित होते ना सेक्स से ऐसे है.. लवर-लव्हरी (प्रेमी प्रेमिका) बोलते हम ने एक दूसरे को पसंद कर लिया..वो तो कुत्ता- कुत्ती  भी पसंद कर लेते! ये कोई प्रेम नही है..ये काम है..

सच्चा प्रेम अब सीखोगे..ओम ओम ओम ओम प्रभुजी प्यारे जी…ओम ओम ओम ओम अंतर्यामी …ओम ओम ..भगवान दूर नही..दुर्लभ नही..परे नही..पराए नही..अपने अंतरात्मा है…हरि ओम ओम ओम ओम ओम …प्रभुजी ..प्यारे जी..मेरे जी….

वो एक ही भगवान सब में है..जैसे एक चाँद सभी घड़ों में दिखता है ऐसे …

अब मैं आप को भगवान रस चखाना चाहता हूँ..

प्रतिज्ञा करो: हम भगवान के नाम का जप करेंगे…

पहेली उंगली अंगूठे के नीचे और बाकी 3 उंगलियां सीधी और दोनो हाथ घुटने पर..(ज्ञान  मुद्रा)

लेकिन 45 साल से उम्र ज़्यादा है तो दोनो हाथ की उंगलियां  आमने सामने मिला कर हाथ गोद में रखे..बुढ़ापे की कमज़ोरी जल्दी नही आएगी..मैं 73 साल का जवान! मेरा चश्मा भी हट गया :)

hatho ki position for after 45 age

प्रतिज्ञा करो: अथ ओंकार मंत्र, गायत्री छन्द, परमात्मा ऋषि, अंतर्यामी देवता, अंतर्यामी प्रीति अर्थे, अंतर्यामी रस प्राप्तिअर्थे -अंतर्यामी प्राप्तिअर्थे..जपे विनियोग…

अंतर्यामी परमात्मा का नाम तो सुना है लेकिन अब महाराज आप की कृपा का रस चाहिए..इस से निरसता चली जाए..दुख चले जाए..संसार से दुख नही मिटते..मिटे होते तो रावण के कहाँ मिटे ?..रावण जैसे सोने की लंका होने के बाद भी दुख नही मिटा …निरसता नही मिटी इसलिए तो ललनाओ के पिछे  भागे..सीता मैया तक पहुँच गया और बुरा हाल हो गया..शबरी की निरसता मिट गयी..मतंग गुरु ने टेक्निक  बता दी तो राम उस के रसीले बेर खाने आ गये…

होठों से जपो: ओम ओम ओम प्रभुजी ओम…प्यारे जी ओम ओम ..मेरे जी ओम ओम ओम..रस दाता ओम ओम ..प्रेम स्वरूपा ओम ओम …आनंद रूपा ओम ओम ओम …ओम ओम ओम..

श्रीकृष्ण ने यशोदा को यह रसपान  कराया था..वो यशोदा तुम्हारे साथ है अभी..और कृष्ण भगवान भी तुम्हारे साथ है..शास्त्र में लिखा है : कर्षति आकर्षति इति कृष्ण…जो कर्षित आकर्षित कर दे वो कृष्ण है..श्रीकृष्ण ने अवतार लिया उस के पहेले भी कृष्ण नाम की महिमा थी लाखो वर्ष पहेले से..जो बुध्दी को जानता है वो आत्म कृष्ण है..वो ही रोम रोम में रम रहा है तो उस आत्म देव का नाम राम है..रघु राजा भी राम राम जपते थे..राम जी के पिता के पिता-पिता के पिता-पिता के पिता-पिता के पिता-पिता के पिता-दादा के दादा राम नाम जपते थे..वो अंतरयामी परमेश्वर के ही हज़ार हज़ार नाम है..

आप की बुध्दी तो है यशोदा..और बुध्दी को जाननेवाला है अंतर्यामी कृष्ण..कृष्ण यशोदा के कान में बोलता है: उउउम्म्म्म(होठ बंद कर के कंठ से..)

अब आप कंठ से बोलो..ओम..(उउउम्म्म्म)…ऊं माना ओम स्वरूप आत्मा प्रभु मेरा है, मैं प्रभु का हूँ…

फिर यशोदा भी बोलती: उउउम्म्म्म..कृष्ण कहेते : ऊं

तो आप की बुध्दी यशोदा और परमात्मा कृष्ण ..उन की ज़रा मस्ती होने दो..

भगवान से मस्ती चालू करो.. :)

हँसी आएगी..आनंद आएगा..भक्ति बढ़ेगी…भगवत रस उभरेगा..ऊं ऊं ऊं ऊं ….

ऐसा करने वाला कितना भी जुवारी हो, शराबी  हो.. सारे ऐब (दोष,दुर्गूण) चले जाएँगे..ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं  ओम ओम ओम ओम ओम ….ऊम्म्म्म ऊंम्म…हँसी आएगी…प्रेम रस उभरेगा..भगवान के साथ प्रेमा भक्ति का रस आस्वाद लेने में लग जाइए..चतुराई छोडीए…कोशिश मत कीजिए..अपने “मैं” को ईश्वर में मिला दीजिए..उउउम्म्म्म…निर्दोष बालक के नाई…ज़्यादा चालाकी करोगे तो रूखे रहे जाओगे महाराज!…उउउम्म्म्मम उउउम्म्म्म उउउम्म्म्म उउउंम कंठ से ओम जपना है..जैसे बच्चा बोलता ना “मां” “मैया” ऐसे “मेरे प्रभु-ऊं” पुकारो ..कई सदियों से बिछड़े है..संसार से रस ले ले के सुखी होने की कोशिश करते,संसार तो नीरस है.. संसार तो दुखालय है..जहाँ  पुस्तक होती वो पुस्तकालय, जहाँ दूध मिलता वो दुग्धालय, जहाँ औषध मिलता वो औषधालय ..ऐसे संसार तो है दुखालय!…वहा सुख लेने जाते इसलिए दुख है बस!इसलिए सुख स्वरूप आत्मा में आ जाओ ना!तुम्हारे बाप का जाता क्या है?

संसार का उपयोग करो और रस अंदर से लो…

सुख लेने के लिए शराब पिएगा-काला मुँह होगा तुम्हारा..शराब सुख क्या देगी?

शरीर सुख के लिए पति पत्नी के शरीर को नोचा..ज़रा सुख नही मिलता और बाद में फें..बच्चे के जन्म देने के लिए किया काला मुँह लेकिन रोज रोज क्या?

कंठ में ॐ ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं …कृष्ण कन्हैय्या बंसी बजइय्या..वृंदावन की कुंज गलियों में..प्यारे भक्तों की दिल की गलियों में तुम ठुम्मक ठुम्मक रास रचईय्या..उउउम्म्म्म उउउम्म्म्मम उउउम्म्म्मम…

मधुर बंसी नाद के साथ ध्यान के रस में सराबोर हो जाओ..

(ब्रम्‍हवेत्ता महापुरुष बापूजी के संकल्प से जो भी उन के साथ ध्यान करते वो ज़रूर ज़रूर अध्यात्मिक रस में सराबोर होते है ….यह लाखो लाखों का अनुभव है..)

रस मय हो रहे हो…उउउंम्म उउउम्म्म्म उउउम्म्म्म…ओम ओम ओम ओम ओम ..प्रभु ओम ओम ओम ओम …रामा ओम ओम ओम..

ओम ओम ओम ..शिव ओम ओम ओम

ओम ओम ओम ..शम्भो ओम ओम ओम

ओम ओम ओम ..दाता ओम ओम ओम ..

ओम ओम ओम ..भोले ओम ओम ओम..जे हो!!!!!

शिव शिव शिव मेरे सदा शिव..

हरि हरि  हरि  मेरे प्यारे श्री हरि …

(बहुत प्यारा संकीर्तन…)

ओम ओम ओम ओम ओम प्रभुजी ओम ..आनंद देवा ॐ ॐ ॐ … माधुर्य देवा ॐ ॐ ॐ हा हा हा..(हास्य)

 

विषय विकारों के द्वारा जो निरसता मिटाना चाहते है, थोड़ी देर के लिए निरसता बदलती है, लेकिन बाद में फिर और बढ़ती है.. जैसे कोई दुखी आदमी शराब पी कर दुख मिटाना चाहे तो बेहोशी के कारण थोड़ी देर के लिए दुख भूल जाएगा; लेकिन शराब में ताकद नहीं  दुख मिटाने की..

ऐसे ही संभोग में ताकद  नही निरसता मिटाने की …पति पत्नी का व्यवहार संयम और सदाचार से बालक को जन्म देने के लिए किया तो ठीक है..लेकिन पूनम, अमावस्या, होली, दीवाली, जन्माष्टमी  इन दिनों में पति पत्नी का भोग भोगा तो विकलांग संतान होती है..अगर गर्भादान ना हुआ तो जीव लेवा बीमारी पकड़ती है..उस का दुशफल विदेशों में बहुत लोग बेचारे भोग रहे की व्हील चेअर पर भटक रहे…हमारे देश से 10 गुना ज़्यादा दवाइयाँ खर्च होती  है अमेरिका में..यहा 10 हज़ार टन खर्च होती है तो वहा लाख टन खर्च होती है..लोक संख्या यहा से कम है..हर 1 लाख लोगों में 425 लोग गुनहगार प्रवृत्ति करते है, जेल में पड़े है..हमारे देश में लाख आदमी में केवल 24 आदमी ऐसे करते..अभी भी हमारा देश प्रसन्न रहेने वालों में बहुत आगे  है..और देश इतने प्रसन्न नही जितना यहा का नागरिक प्रसन्न है..इतनी लूट, शोषण, अराजकता,भ्रष्टाचार, ग़रीबी, महेँगाई  होने के बावजूद भी भारत का व्यक्ति जितना प्रसन्न रहेता है उतना और देशों का नही है..

हरि ॐ शांती।

श्री सद्गुरुदेव जी भगवान की महा जयजयकार हो !!!!!

गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे ……  

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

29 April 2012; Raibareli Satsang Amrut.

dukho ka mul hai nirasataa…aur ye nirasataa sansaari nashwar chijo se mitaane ki galati karate isliye nirasataa mitati nahi, nirasataa badalati hai..dukhi aadami ka dukh tab tak jinda rahetaa hai jab tak vo sansaar se dukh mitaane ki koshish karataa hai..nahi mitegaa..dabegaa,badalegaa,lekin mitegaa nahi…

dukhi aadami agar dukh ka sat upyog kare,nirastaa mit jaaye to kitanaa bhi dukh bhejo,musibat bhejo lekin vo aadami us se hasate-khelate paar ho jaayegaa!

shrikrushn bhagavaan ke satsang ko samajhaa tab arjun ka moh nasht huaa..moh maane ulataa gyaan..sharir marataa tab bhi ham rahete hai lekin bewkufi se sharir ko hi “main”maan baithanaa ulataa gyaan hai..aur sharir ke dwara sukhi hone ki bewkufi karate isliye nirsataa nahi mitati..

jahaa sukh hai us ka main aaj swaad chakhaa sakataa hun..

maine anek  santo ko, shaastron ko, mahaa purushon ko,sadhuon ko practically apane jeevan men dekhaa hai..nirasataa kaise mitati hai mujhe pataa hai..dosh durgun kaise mitate us ka mujhe pataa hai..murkh se murkh vyakti kaise suprasidhd ho sakati mujhe pataa hai..swaasthy kaise paayaa jata mere guruji jaanate the aur  mujhe bhi kuchh pataa hai..ghar ke jhagade kaise mitaaye jaate mujhe pataa hai..

 

left nostril se shwaas andar bharo..roko 1-savva minat …. omkaar ka pavitr chintan karo..

om om prabhuji om..pyaare ji..antaraatmaa…mere rakshak…marane ke baad ye sharir aur dunvi chije saath nahi aati lekin aap meraa saath nahi chhodate..main aap kaa hun..aap mere ho…main aap ko nahi jaanataa hun..kewal maanataa hun..lekin aap to mujhe jaanate hai prabhu..aur apanaa maanate hai…sadiyon kaa bichhadaa jivaatmaa ab aap ki sharan aa rahaa hun…ye satsang ke dwaaraa mil rahaa hai raastaa..prabhu mujhe sweekar kar lo..prabhu mujhe apani krupaa se , apani rahemat se, apane premaa ras se rasamay kar do..hey prabhu! jo bhi aap ke santon ke sharan jaataa hai us par aap barasate ho santon ki nigaaho ke dwaaraa..santon ki najaron men jo aataa hai vo nihaal ho jaataa hai..guru naanak ne kahaa hai: bramhgyaani ki drushti amrut varshi…

left nostril se dhire dhire shwas chhodo..is se bahut phaayade honge..

 

 

ab dono nathuno se milaa kar khub gahera shwaas bharo aur omkaar ka pavitr chintan bramhagyaani sant shri Bapuji ke sath karo..

om om rog mitaane waale, paap mitaane waale..shakti aur priti denewaale om swarup raam ratan ..om om om…hruday purvak ratan chaalu rakho savvaa minat..janam janam ki waasanaa aur doshon se ham bhatak rahe the..ab nirdosh om swarup iishwar ki ham sharan hai..om om om prabhuji om …om om pyaare ji om..ras swarupaa om…chaityanya rupaa om …(dam maar ke savvaa minat shwas rok ke pavitr chintan karate rahe to is se paap taap rog shok mitate hai..)

aisaa 5-7 baar roj subah karoge to aaj ka satsang aap ko aur aap ke pariwaar ko nihaal kar degaa!

(ab munh band rakhate huye- kanth men om om ka gunjan karate huye-gardan ko aage pichhe karate huye dhire dhire shwaas chhode ..yah khaas omkar bhramari pranayam kaise karanaa hai yah Pujyashri Baapuji dikha rahe hai,vo jarur dekhe aur waisaa hi kare roj kewal 2 baar to bahut laabh hote hai)

is se smruti shakti ke kendr vikasit hote hai..hypo thyroid, hyper thyroid nahi hogaa, huaa ho to mit jaayegaa..budhaape men bhi yaad shakti bani rahegi..school college waale bachche karenge to un ke budhdi aur bhaagy khul jaate hai …( aise pujyashri baapuji ke shishyon men lakho bachchon ke udaaharan hai..)

delhi ke ajay mishraa ke pitaji mar gaye, school se nikaal dene ki naubat aayi thi, koyi mere satsang men le aayaa, aisa saras banaa ki nokiya company ka global product manager hai,47lakh rupiya vaarshik us ka pagaar hai..aur us ke jahajon ke ticket,hotalon ke kiraaye sab company bharati hai..roj 2500 rupiya roj jeb kharchi milati hai..school se nikaal diye jane ki jis par naubat thi us ladake ko mere satsang men koyi le aayaa to ab nokiya company ka manager hai..yah baat jhuth nikali to main 10karod rupiya inaam dilaa dungaa!:) (aap bhi saras bano, nirasata door bhagaane ka yah sundar tarika apanaao..Pujya Bapuji ke sath omkar ka pavitr chintan karo..)

mujhe to bahut kasht sahene ke baad guruji ki krupaa ka pataa chalaa..aap ko ghar baithe mil rahaa hai..is kaa aap aadar se phaayadaa uthaao..

dono nathunon se jitanaa jyada shwaas andar le sakate utanaa bharo..roko..omkar ka pavitr mangal may chintan karo :-om om om om om..

ab ham nirasataa se paar jaayenge…bhagavaan ke ras se ham rasawaan honge…aur bhagavaan ke ras se jo rasilaa hotaa hai vo samaaj kaa bhi sneh bhaajan ho jata hai…prabhu ka jo premi hotaa hai vo sab ka premi hone lagataa hai..

lover-lovery kya jaane prem ko?vo to kuttaa-kutti aakarshit hote naa sex se aise hai..lover -lover (premi premikaa bolate ham ne ek dusare ko pasand kar liyaa..vo to kuttaa-kutti  bhi pasand kar lete! ye koyi prem nahi hai..ye kaam hai..

sachchaa prem ab sikhoge..om om om om prabhuji pyaare ji…om om om om antaryaami …om om ..bhagavaan dur nahi..durlabh nahi..pare nahi..paraaye nahi..apane antaraatmaa hai…hari om om om om om …prabhuji ..pyaare ji..mere ji….vo ek hi bhagavaan sab men hai..jaise ek chaand sabhi ghadon men dikhataa hai aise …

ab main aap ko bhagavaan ras chakhaanaa chaahataa hun..

pratigyaa karo: ham bhagavaan ke naam ka jap karenge…

paheli ungali anguthe ke niche aur baki 3 ungaliya sidhi aur dono hath ghutane par..(gyaan mudra)

lekin 45 saal se umr jyada hai to dono haath ki ungaliyaa aamane saamane milaa kar haath god men rakhe..budhaape ki kamajori jaldi nahi aayegi..main 73 saal ka jawaan!mera chashmaa bhi hat gayaa :)

 

 

pratigyaa karo: ath omkaar mantr, gaayatri chhand,paramaatmaa rishi, antaryaami devataa,antaryaami priti arthe,antaryaami ras praaptayarthe -antaryaami praptyarthe..jape viniyog…

antaryaami paramaatmaa kaa naam to sunaa hai lekin ab mahaaraaj aap ki krupaa ka ras chaahiye..is se nirasataa chali jaaye..dukh chale jaaye..sansaar se dukh nahi mitate..mite hote to raawan ke kahaa rahe?..raawan jaise sone ki lankaa hone ke baad bhi dukh nahi mite…nirasataa nahi miti isliye to lalanaao ke pichhe bhaage..sita maiyya tak pahunche aur buraa haal ho gayaa..shabari ki nirasataa mit gayi..matang guru ne technique bataa di to raam us ke rasile ber khaane aa gaye…

hothon se japo: om om om prabhuji om…pyaare ji om om ..mere ji om om om..ras daataa om om ..prem swarupaa om om …aanand rupaa om om om …om om om..

shrikrushn ne yashodaa ko yah raspaan karaayaa thaa..vo yashodaa tumhaare saath hai abhi..aur krushn bhagavaan bhi tumhaare saath hai..shaashtr men likhaa hai : karshati aakarshati iti krushn…jo karshit aakarshit kar de vo krushn hai..shrikrushn ne awataar liyaa us ke pahele bhi krushn naam ki mahimaa thi laakho varsh pahele se..jo budhdi ko jaanataa hai vo aatm krushn hai..vo hi rom rom men ram rahaa hai to us aatm dev kaa naam raam hai..raghu raajaa bhi raam raam japate the..ram ji ke pitaa ke pitaa-pitaa ke pitaa-pitaa ke pitaa-pitaa ke pitaa-pitaa ke pitaa-daadaa ke daadaa raam naam japate the..vo antrayaami parameshwar ke hi hajaar hajaar naam hai..

aap ki budhdi to hai yashodaa..aur budhdi ko jaananewaalaa hai antaryaami krushn..krushn yashodaa ke kaan men bolataa hai: uuuummmm(hoth band kar ke kanth se..)

ab aap kanth se bolo..om..(uuummmm)…uuuuummm maanaa om swarup aatma prabhu meraa hai, main prabhu kaa hun…

phir yashodaa bhi bolati: uuummmm..krushn kahete :uuuuuummmm..

to aap ki budhdi yashodaa aur paramaatmaa krushn ..un ki jaraa masti hone do..

bhagavaan se masti chaalu karo.. :)

hansi aayegi..aanand aayegaa..bhakti badhegi…bhagavat ras ubharegaa..uuuummm uuuummm uuuuummmm

aisa karane waalaa kitanaa bhi juwaari ho, sharaami ho..aib(dosh,durgun) chale jaayenge..uuuuummm uuuummm uuuuummmm

om om om om om ….uuuuummmm uuummm…hansi aayegi…prem ras ubharegaa..bhagavaan ke saath premaa bhakti kaa ras aaswaad lene men lag jaayiye..chaturaayi chhodiye…koshish mat kijiye..apane “main”ko iishwar men milaa dijiye..uuuuummmm…nirdosh baalak ke naayi…jyada chaalaaki karoge to rukhe rahe jaaoge mahaaraaj!…uuuuummmmm uuuuummmm uuummmm uuumm kanth se om japanaa hai..jaise bachchaa bolataa naa “maa” “maiyaa” aise “mere prabhu-uuuummm”pukaaro ..kayi sadiyon se bichhade hai..sansaar se ras le le ke sukhi hone ki koshish karate,sansaar to niras hai.. sansaar to dukhaalay hai..jahaa pustak hoti vo pustakaalay, jahaa dudh milataa vo dugdhaalay, jahaa aushadh milataa vo aushadhaalay ..aise sansaar to hai dukhaalay!…wahaa sukh lene jaate isliye dukh hai bas!isliye sukh swarup aatmaa men aa jaao naa!tumhaare baap kaa jaataa kyaa hai?

sansaar kaa upayog karo aur ras andar se lo…

sukh lene ke liye sharaab piyegaa-kaalaa munh hoga tumhaaraa..sharaab sukh kyaa degi?

sharir sukh ke liye pati patni ke sharir ko nocha..jaraa sukh nahi milataa aur baad men phai..bachche ke janm dene ke liye kiyaa kaalaa munh lekin roj roj kya?

uuummmm uuuuummmm uuuuummmm…krushn kanhaiyyaa bansi bajaiyyaa..vrundaawan ki kunj galiyon men..pyaare bhakton ki dil ki galiyon men tum thummak thummak raas rachaiyyaa..uuuummmm uuuuummmmm uuuuummmmm…

dhyaan ke ras men saraabor ho jaao..

(madhur bansi naad ke saath bramh vettaa mahaapurush Baapuji ke sankalp se jo bhi un ke sath dhyaan karate vo jarur jarur adhyaatmik ras men saraabor hote hai ….yah laakho laakhon kaa anubhav hai..)

ras may ho rahe ho…uuummm uuuummmm uuuummmm…om om om om om ..prabhu om om om om …raamaa om om om..

om om om ..shiv om om om

om om om ..shambho om om om

om om om ..daataa om om om ..

om om om ..bhole om om om..JAY HO!!!!!

shiv shiv shiv mere sadaa shiv..

hari hari hari mere pyaare shri hari…

(bahut pyara sankirtan…)

om om om om om prabhuji om ..haa haa haa..(hasya)

 

vishay vikaaro ke dwara jo nirasataa mitaanaa chaahate hai, thodi der ke liye nirasataa badati hai, lekin baad men phir aur badhati hai.. jaise koyi dukhi aadami sharaab pi kar dukh mitaanaa chaahe to behoshi ke kaaran thodi der ke liye dukh bhul jaayegaa; lekin sharaab men taakad nahidukh mitaane ki..

aise hi sambhog men taakad nahi nirasataa mitaane ki …pati patni ka vyavahaar sanyam aur sadaachaar se baalak ko janm dene ke liye kiyaa to thik hai..lekin poonam ,amaavasyaa, holi, diwaali, janmaasthami in dinon men pati patni kaa bhog bhogaa to vikalaang santaan hoti hai..agar garbhaadaan na huaa to jeev lewaa bimaari pakadati hai..us ka dushphal videshon men bahut log bechaare bhog rahe ki wheel chair par bhatak rahe…hamaare desh se 10 gunaa jyada dawaayiyaan kharch hti hai amerikaa men..yahaa 10 hajaar tan kharch hoti hai to wahaa laakh tan kharch hoti hai..lok sankhya yahaa se cum hai..har 1 laakh logon men 425 log gunahgaar pravrutti karate hai, jail men pade hai..hamaare desh men laakh aadami men kewal 24 aadami aise karate..abhi bhi hamaaraa desh prasann rahene waalon men bahut aage hai..aur desh itane prasann nahi jitanaa yahaa kaa naagarik prasann hai..itani loot, shoshan, araajakataa,bhrashtaachaar, garibi, mahengaaii hone ke baawajud bhi bhaarat ka vyakti jitanaa prasann rahetaa hai utanaa aur deshon kaa nahi hai..

 

Hari Om Shanti.

 

SHRI SADGURUDEV JI BHAGAVAAN KI MAHAA JAYJAYAKAAR HO!!!!!

Galatiyon ke liye Prabhuji kshamaa kare…

 

 

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One Comment on ““Bhagavaan se masti” dhyan”


  1. (ब्रम्‍हवेत्ता महापुरुष बापूजी के संकल्प से जो भी उन के साथ ध्यान करते वो ज़रूर ज़रूर अध्यात्मिक रस में सराबोर होते है ….यह लाखो लाखों का अनुभव है..)

    बिलकुल पक्की बात है !
    जय बापू आशाराम I
    जय गुरुदेव !


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